मंगलवार, 19 अगस्त 2025

UP K Bareilly Main तीन दिनी Urs -e-Razvi का हुआ आगाज़

जारी किया गया मुस्लिम एजेंडा, बुराइयों के खिलाफ चलाएंगे आंदोलन

सियासी मैदान में भी कूदेंगे बरेलवी 



सरफराज अहमद 

Bareilly (dil India live)। बरेली शरीफ में आला हजरत इमाम अहमद रजा खां फाजिले बरेलवी का सालाना तीन दिनी उर्स का आगाज़ हो गया है। बरेली शरीफ में देश दुनिया के तमाम बरेलवी उलेमा, दानिश्वर व मुरीदों का जमावड़ा होना शुरू हो गया है। उर्स के पहले दिन ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के तत्वावधान में बैठक हुई। बैठक में देशभर के उलमा शामिल हुए। इसमें ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने मुस्लिम एजेंडे का ऐलान किया। मौलाना ने कहा कि मुस्लिम समाज में बुराइयां बहुत ज्यादा बढ़ गई हैं, इसके खिलाफ आंदोलन चलाया जाएगा। मुस्लिम समाज को इस वक्त कुछ ऐसी बुराइयों से बचने की जरूरत है जो सामाजिक, धार्मिक और नैतिक रूप से नुकसान पहुंचा सकती हैं। मौलाना शहाबुद्दीन ने कहा कि राजनीतिक मैदान में बरेलवी बहुत पीछे हैं। बरेलवी उलमा ने सियासत को सीधे तौर पर पसंद नहीं किया,नौजवानों को आगे बढ़ने का मौका नहीं मिल सका।मौलाना ने कहा कि मगर अब देश के सियासी हालात में जरूरत पेश आई है कि बरेलवियों को भी राजनीति के मैदान में कदम रखना चाहिए।इसलिए अब हर जिले में बरेलवी लीडरशिप को उभारा जाएगा,राजनीतिक मैदान में दमखम के साथ नुमाइंदगी (प्रतिनिधित्व) किया जाएगा।


मौलाना शहाबुद्दीन ने कहा कि पैगंबर-ए-इस्लाम ने शिक्षा हासिल करने पर जोर दिया है। कुरान शरीफ में खुदा ने सबसे पहली आयत पैगंबर ए इस्लाम पर नाजिल (उतारी) की वो भी शिक्षा पर आधारित है। मौलाना ने कहा कि मुसलमान शिक्षा के क्षेत्र में अभी भी दूसरी कौमों से बहुत पीछे हैं। इसलिए केंद्र सरकार और राज्य सरकारों पर तकिया रखकर भरोसा करने की जरूरत नहीं है, बल्कि खुद मुसलमानों को अपनी नयी नस्ल की तालीम और तरबियत के लिए खड़ा होना होगा, वरना पीछे ढकेल दिए जाएं। 

शरीयत के खिलाफ है फिजुल खर्ची 

1. इस्लाम ने शादी को बहुत आसान और कम खर्च वाला कार्य बनाया है, मगर आजकल मुसलमानों ने शादी को बहुत महंगा कर दिया जो गैर शरई है।

2. निकाह में दूल्हा और दुल्हन की तैयारियां में जो तौर तरीका अपनाया जाता है, वो सब गैर शरई है।

3. शादियों में बरात का खाना, फिर वलीमे का खाना, फिर लड़की वालों की तरफ से खाना, हाल की बुकिंग के साथ ही और दीगर चींजों में फिजूलखर्ची की जाती है जो नाजायज है।

4. निकाह के दिन लड़की वाले हाल में दहेज की नुमाइश करते हैं, ये भी नाजायज है।

5. इस्लाम में दहेज के मांगने पर सख्त मनाही की है, मगर शादी की तारीख तय करते वक्त दूल्हे की तरफ से दहेज के लिए जिन जिन चीजों का मुतालबा किया जाता है, वो सभी नाजायज कार्य हैं।

6. लड़के वाले हो या लड़की वाले दोनों तरफ के खाने के इंतजाम मे खड़े होकर (बड़े सिस्टम) खाना खिलाने की व्यवस्था की जाती है, शरीयत की नजर में यह सख्त गुनाह का काम है। बैठकर खाना खिलाने कि व्यवस्था होनी चाहिए।

एजुकेशन पर दिया जोर 

1. दीनी और दुनियावी शिक्षा के लिए स्कूल, कॉलेज, और विश्वविद्यालय अमीर मुसलमान खोलें। मौजूदा समय में तकनीकी शिक्षा में पीछे रहना भी समाज के लिए नुकसानदेय है।

2. दुनियावी और धार्मिक शिक्षा में संतुलन और विज्ञान व तकनीक में जागरूकता लाना भी जरूरी है।

3. आईएएस, आईएएफ, आईपीएस, पीसीएस, पीसीएस जे आदि की परीक्षाओं के लिए कोचिंग सेंटर खोले जाएं। आर्थिक तौर पर गरीब व कमजोर छात्रों को फ्री कोचिंग करायी जाए।

4. मौजूदा हालात के पेशे नज़र लड़कियों के लिए अलहेदा स्कूल व कॉलेज खोले जाए, ताकि लड़कियों की शिक्षा अच्छे में हो सके ताकि समाज के बीच वो भी तरक्की कर सकें। 

फिजूलखर्ची और नशा

1. आजकल कई नौजवान नशे के आदी हो चुके हैं, जिसकी वजह से वह परिवार में विवाद और मां-बाप के लिए एक मुसीबत का सबब बन जाते हैं।

2. मस्जिद के इमामों और बुद्धिजीवियों को इस पर काम करना होगा।

3. मुसलमान शादी विवाह और दीगर कार्यक्रमों के साथ ही साथ जलसा, जुलूस, लंगर और उर्स में बेपनाह फिजूलखर्ची करते हैं। इस फिजूलखर्ची से कोई शबाब नहीं हासिल होता, बचना जरूरी है।

4. मुसलमान पीरी मुरीदी को असल इस्लाम न समझे, बल्कि असल इस्लाम तोहिद,नमाज,रोज़ा,हज,जकात हैं। इनके करने से खुदा और रसूल खुश होंगे।

सोमवार, 18 अगस्त 2025

Education: DAV PG College में संस्कृत के विद्यार्थियों के लिए हुआ छात्राभिनंदन समारोह

भारतीय संस्कृति संस्कृत में ही निहित- प्रो.मिश्रीलाल

Varanasi (dil India live). डीएवी पीजी कॉलेज के संस्कृत विभाग के छात्र मंच उत्कर्ष के तत्वावधान में सोमवार को नवप्रवेशी छात्राभिनंदन, शिक्षक सम्मान एवं सौप्रस्थानिक समारोह आयोजित किया गया। मुख्य अतिथि महाविद्यालय के कार्यवाहक प्राचार्य प्रो. मिश्रीलाल ने कहा कि भारतवर्ष की संस्कृति संस्कृत में ही संरक्षित है। संस्कृत पढ़कर जीवन धन्य हो जाता है, इसके सानिध्य में आने के बाद एक पवित्र चेतना का विकास होता है। संस्कृत केवल एक भाषा नही है बल्कि हमे दिव्य बोध कराने का माध्यम है। संस्कृत व्यापक है जिसका साहित्य व्यक्तिगत कल्याण से परे, समष्टि कल्याण की बात करता है। कार्यक्रम में प्रो. पूनम सिंह, चीफ प्रॉक्टर डॉ. संजय कुमार सिंह, डॉ. दीपक कुमार शर्मा, डॉ. त्रिपुर सुंदरी, डॉ. रंगनाथ, डॉ. अमित मिश्रा, डॉ. शिव प्रसाद पाण्डेय आदि ने भी विचार रखे। 


कार्यक्रम का संचालन छात्र सत्यान्जल त्रिपाठी, मंगलाचरण  ईशांत त्रिपाठी, सर्वेश कुमार मिश्र एवं धन्यवाद अंकित पाण्डेय ने दिया। त्रिकान्त सिंह, मोहित पाण्डेय, अदिति प्रभा आदि छात्रों का भी खास सहयोग में था। 


Education : VKM Varanasi Main एंटी रैगिंग सप्ताह का समापन

वसन्त कन्या महाविद्यालय में परास्नातक प्रथम वर्ष की छात्राओं का अभिमुखीकरण


Varanasi (dil India live). वसन्त कन्या महाविद्यालय , आन्तरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (आइक्यूएसी ) के तत्त्वावधान में छात्रा सलाहकार एवं अनुशासन समिति द्वारा छात्राओं के अभिमुखीकरण और एंटी रैगिंग सप्ताह का समापन किया गया। इस कार्यक्रम में महाविद्यालय में नवागत परास्नातक प्रथम वर्ष की छात्राओं का अभिमुखीकरण किया गया। आयोजन का मुख्य उद्देश्य छात्राओं को महाविद्यालय की शैक्षणिक, सह-पाठ्यक्रमीय, अनुशासन सम्बन्धी एवं प्रशासनिक संरचना से परिचित कराना था। कार्यक्रम का शुभारम्भ सररस्वती वंदना के साथ हुआ।

 
महाविद्यालय की प्राचार्या प्रो.रचना श्रीवास्तव ने नवीन सत्र में छात्राओं को महाविद्यालय के गौरवशाली इतिहास से परिचित कराया। आईक्यूएसी समन्वयक डॉ . शशिकला ने महाविद्यालय की अकादमिक और सांस्कृतिक गुणवत्ता को सुनिश्चित एवं बेहतर करने में छात्राओं की सहभागिता पर प्रकाश डाला। डॉ.शुभ्रा सिन्हा ने महाविद्यालय की छात्रवृत्तियों, डॉ. अंशु शुक्ला ने इंटर्नशिप, डॉ.सुनीता दीक्षित ने एंटी रैगिंग व छात्रा शिकायत निवारण, डॉ.विजय कुमार ने स्पोर्ट्स, नम्रता गुप्ता ने पुस्तकालय सुविधाओं से छात्राओं को अवगत कराया। इस अवसर पर एंटी रैगिंग जागरूकता हेतु सप्ताह पर्यन्त आयोजित व्याख्यान, नुक्कड़ नाटक ,स्लोगन राइटिंग, पोस्टर मेकिंग इत्यादि विभिन्न प्रतियोगिताओं की विजेता छात्राओं को पुरस्कार वितरित किया गया।

इस अवसर पर डॉ शांत चटर्जी, डॉ सुमन सिंह, डॉक्टर सपना भूषण, डॉ. आशीष कुमार सोनकर, डॉ .विजय कुमार, डॉ .आर पी सोनकर, डॉ .अखिलेश कुमार राय, डॉ आरती कुमारी, डॉ . पूर्णिमा आदि उपस्थित रहीं। कार्यक्रम का संचालन छात्र सलाहकार डॉ मंजू कुमारी तथा धन्यवाद ज्ञापन डॉक्टर आरती चौधरी ने किया।

रविवार, 17 अगस्त 2025

Samar Ghazipuri : शायरी और संचालन का अद्वितीय संगम

समर ग़ाज़ीपुरी एक जीवंत शख़्सियत 

Sarfaraz Ahmad 

Varanasi (dil India live). साहित्य के विस्तृत आकाश में कुछ नक्षत्र ऐसे होते हैं, जिनकी आभा युगों तक बनी रहती है। उनका नाम लिया जाए तो केवल काव्य नहीं, बल्कि संवेदना, संस्कृति और सौहार्द्र की संपूर्ण छवि सामने आ जाती है। समर ग़ाज़ीपुरी ऐसी ही एक जीवंत शख़्सियत हैं—शायर भी, नाज़िम भी, और उससे बढ़कर एक सच्चे इंसान।

1963 में ग़ाज़ीपुर के ग़नी चक, मुहम्मदाबाद में जन्मे, वह अपने पिता स्वर्गीय मोहम्मद अशरफ़ सिद्दीक़ी की स्मृति को संजोए हुए हैं। बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से अंग्रेज़ी साहित्य में स्नातकोत्तर की डिग्री हासिल करने वाले समर साहब आज वाराणसी के पड़ाव में रहते हैं, लेकिन उनका दिल अपने पैतृक गाँव ग़नी चक और यूसुफ़पुर की मिट्टी से गहराई से जुड़ा है।

समर ग़ाज़ीपुरी की साहित्यिक यात्रा 1980 के दशक की शुरुआत में उस वक़्त शुरू हुई, जब वह ग़ाज़ीपुर में पढ़ाई के लिए रोज़ ट्रेन से सफ़र करते थे। इस सफ़र में उनकी मुलाक़ात रामनाथ राय जैसे शायरी के दीवानों से हुई, जिन्होंने उनके भीतर छुपे कवि को उभारा। गाँव की तुकबंदी की परंपरा ने उनके शब्दों को पहला आकार दिया। बनारस के साहित्यिक माहौल ने उनकी प्रतिभा को पंख दिए। 'अहमद' अज़मी के घर की साहित्यिक गोष्ठियाँ, :मतीन' बह्रामी की प्रेरणा और उर्दू सोसाइटी के आयोजनों ने उन्हें मंच तक पहुँचाया। पीतरकुंडा में उनका पहला बड़ा प्रदर्शन, जहाँ डी.एच. पांडे नज़र कानपुरी और डॉ. अनवर जलालपुरी जैसे साहित्यिक दिग्गज मौजूद थे, उनकी काव्य-प्रतिभा का परिचय बन गया।

"समर" साहब की नाज़िम के रूप में कहानी एक अनपेक्षित मोड़ से शुरू हुई। सलीम शिवालवी के एक मुशायरे में जब नाज़िम नहीं पहुँचे, तो काविश नारी ने मंच पर उनका नाम पुकारा। पहली बार नाज़िम की भूमिका में उतरे समर ने ऐसी जादूगरी दिखाई कि यह सिलसिला देशभर के मुशायरों तक फैल गया। उनकी मखमली आवाज़, शब्दों की नज़ाकत और महफ़िल को बाँध लेने की कला उन्हें एक बेमिसाल नाज़िम बनाती है।

उनके उस्ताद ‘नश्तर बनारसी’ ने शब्दों का जादू सिखाया। ‘तरब’ सिद्दीकी, ‘एहतेशाम’ सिद्दीकी और ‘अहमद’ अज़मी जैसे साहित्यकारों का साथ उनकी भाषा, लय और विचार को परिष्कृत करता गया। उनकी रचनाओं में सामाजिक सरोकार, प्रेम की ऊष्मा, जीवन की नश्वरता और देशप्रेम की उज्ज्वल आभा साफ झलकती है,

"जो चाहे पढ़ ले ये रख दी है रू-ब-रू सबके

खुली किताब के जैसी है ज़िंदगी मेरी"

"क़लम की नोक को ख़ंजर की धार कर देगा

पढ़ा-लिखा है वो, लफ़्ज़ों से वार कर देगा"

"मैं आंधियों को भी हैरत में डाल आया हूँ

दिया जला के हवा में उछाल आया हूँ"

"चंद ही लोग हैं जो करते हैं नफ़रत पैदा

आम हिन्दू न मुसलमान बुरा होता है"

"हमारा मुल्क भारत तो सभी धर्मों का संगम है

यहाँ पर वेद वाले हैं, यहाँ क़ुरआन वाले हैं"।।

समर ग़ाज़ीपुरी ने अपनी काव्य-यात्रा को दो संग्रहों में समेटा है:

1.रंग-ए-हयात (2015)

2.चाँद और झील (2025)

ये संग्रह उनकी साहित्यिक मेहनत और काव्य के प्रति समर्पण का प्रतीक हैं। समर ग़ाज़ीपुरी के व्यक्तित्व में साहित्य और मित्रता समान रूप से प्रवाहित हैं। मशहूर उस्ताद शायर जनाब आबिद सलेमपुरी साहब के साथ उनकी आत्मीयता उनके स्वभाव की गहराई को दर्शाती है। उनके शब्द और व्यवहार दोनों में अपनापन झलकता है।

“ये ज़खीरा नहीं है लफ़्ज़ों का, फ़िक्र की काइनात है मेरी

ऐसी-वैसी नहीं किताब है, ये दास्तान-ए-हयात है मेरी”

समर ग़ाज़ीपुरी की यह दास्तान साहित्य के नभ में एक उज्ज्वल नक्षत्र की तरह है, जो आने वाले समय में भी अपनी रचनाओं और व्यक्तित्व से महफ़िलों को रोशन करता रहेगा। वह केवल शायर या संचालक नहीं, बल्कि उन विरल हस्तियों में से हैं, जिनके शब्द और कर्म, दोनों, समाज में प्रेम, भाईचारा और सौंदर्य के बीज बोते हैं।

UP k Varanasi Main हुआ निःशुल्क आई कैम्प का आयोजन

जरुरतमंद लोगों को कैंप का लाभ उठाने का मिलता है अवसर-डा. मोईन

F. Faruqui Babu 

Varanasi (dil India live). न्यू लाइफ मैटरनिटी होम बजरडीहा जीवधीपुर में डॉक्टर मोईन अहमद अंसारी की अगुवाई में एक निःशुल्क आई कैम्प का आयोजन किया गया। जिसमें एएसजी नेत्रालय के एक्सपर्ट डाक्टरों और टेक्नीशियन द्वारा फ्री नेत्र की जांच की गयी। 

इस कैम्प के ऑर्गेनाइजर डॉ. आमिर अंसारी व उनकी पूरी टीम आयुषी शास्त्री, मोहम्मद नासिर, अम्मार यासिर, रक्षा, तौसीफ आदि लोगो ने मिलकर इस कैम्प में आए हुए लोगों की आंखें जांचीं। डाक्टर मोईन व डाक्टर आमिर ने कैम्प की सफलता को देखते हुए जल्द दोबारा कैम्प का आयोजन करने का ऐलान किया और कहा कि इस तरह के कैंप से गरीब और जरूरतमंद लोगों को जो इलाज कराने में असमर्थ है उनकी मदद हो जाती है। उन्हें ज्यादा से ज्यादा कैंप का लाभ उठाने का अवसर मिले यही हम लोगों का प्रयास है।

शनिवार, 16 अगस्त 2025

Kidzee Varanasi Nadesar में शान से लहराया तिरंगा, गूंजा राष्ट्रगान

सेंटर इंचार्ज रीतिका सरीन ने जश्ने आजादी पर डाली रौशनी 

स्टूडेंट्स ने रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति से मोहा मन


Varanasi (dil India live). Kidzee School Varanasi Nadesar में स्वतंत्रता दिवस समारोहपूर्वक मनाया गया। इस दौरान स्कूल की सेंटर इंचार्ज श्रीमती रीतिका सरीन ने झंडारोहण किया। झंडा फहराने के साथ ही स्कूल के स्टूडेंट्स ने जहां राष्ट्रगान प्रस्तुत किया तो वहीं सेंटर इंचार्ज श्रीमती रीतिका सरीन ने जश्ने आजादी पर संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत कर स्टूडेंट्स का मार्गदर्शन किया। आयोजन के दौरान बच्चों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम व देश भक्ति पर आधारित गीत पेश कर मौजूद लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया। आयोजन में शान से लहरा रहे तिरंगे झंडे को बच्चों ने सलामी देकर अमर शहीदों को याद किया। स्वतंत्रता दिवस पर स्कूल की सभी टीचर्स, स्टाफ आदि ने न सिर्फ आयोजन में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया बल्कि स्कूल को तिरंगे झंडे व खूबसूरत होडिंग व बोर्ड आदि से खूबसूरती से सजाया गया था। इस दौरान बच्चों ने खूब मस्ती की और रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया। बच्चों की खास प्रस्तुति कथक नृत्य ने सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। ऐसे ही नन्हें मुन्ने बच्चों के नृत्य और गायन भी खूब पसंद किया गया।























karbala K Shahidon Ka UP K Varanasi में निकला चेहल्लुम का कदीमी जुलूस

ऐ अहले अज़ा बैठे क्या हो, फ़र्ज़न्दे नबी का चेहलुम...




Sarfaraz/ Rizwan 

Varanasi (dil India live). इस बार इमाम हसन और इमाम हुसैन समेत कर्बला के शहीदों का चेहल्लुम और देश की आजादी का जश्न जुमे को मुस्लिमों ने एक साथ मनाया। कुछ जुलूसों में अजादार तिरंगा झंडा साथ लेकर चल रहे थे और देश भक्ति का पैगाम पेश करते हुए चल रहे थे। इस मौके पर उल्फत कंपाउंड, अर्दली बाज़ार में मास्टर जहीर हुसैन के इमामबाड़े से बनारस में चेहलुम का मुख्य जुलूस जुमे की नमाज के बाद उठाया गया। जुलूस की अगुवाई अंजुमन इमामिया कर रही थी।


जुलूस से पहले मौलाना इकबाल हैदर ने मजलिस को खिताब करते हुए इमाम हुसैन और कर्बला के वाक़यात पर रौशनी डाली। मजलिस के बाद ऊंटों पर अमारी, अलम, ताबूत, दुलदुल, झूले का जुलूस निकला। जुलूस अपने कदीमी रास्ते उल्फत बीबी हाता, अर्दली बाज़ार, तार गली, डिठोरी महाल होते हुए पुन: जहीर हुसैन के इमाम बारगाह में मगरिब के वक्त सम्पन्न हुआ। इससे पहले जुलूस उल्फत बीबी कंपाउंड के मुख्य द्वार पर पहुंचने पर एक तकरीर हुई जिसे मौलाना सैयद रज़ा हैदर मुजफ्फरपुर ने खेताब किया।

जुलूस के साथ साथ मेहमान अहले सुन्नत, अंजुमन गुलामाने मुस्तफा शकुराबाद चन्दौली के अलावा मेज़बान अंजुमन पंजतनी, अंजुमन हुसैनिया, अंजुमन पैगामे हुसैनी, अंजुमन इमामिया नौहा मातम करते हुए चल रही थी। जुलूस के अन्त में संचालन के साथ साथ मौलाना बाकर बलियाबी ने जुलूस का परिचय (तार्रुफ) कराया। इस जुलूस कि परंपरा रही की जुलूस में सभी समुदाय के लोग मिलकर आए हुए मोमनीनो का स्वागत कर रहे थे जगह जगह स्टाल लगाकर राहगीरों और जुलूस में शामिल लोगों की खिदमत की जा रही थी। जुलूस सकुशल संपन्न होने के बाद मजलिस और दुआ ख्वानी हुई।

उधर वक़्फ मस्जिद व इमामबाड़ा  मौलाना मीर इमाम अली व मेहंदी बेगम गोविंदपूरा छत्तातला से ताजिया व अलम का चेहलुम का जुलूस अपनी परंपराओं के अनुसार मुतवल्ली  सैयद मुनाज़िर हुसैन 'मंजू' के ज़ेरे एहतमाम उठाया गयाI जुलूस उठने के पूर्व ज़ुल्फेक़ार ज़ैदी ने मजलिस पढ़ते हुए कर्बला में इमाम हुसैन व उनके साथियों की शहादत का जिक्र किया तो मौजूद तमाम लोग जार-जार रो पड़े।


जुलूस उठने पर कब्बन, शुजात खान व साथियो ने सवारी पढी - "जब गोरे गरीबा से वतन में हरम आए"। जुलूस नया चौक, गुदड़ी बाजार होते हुए दालमंडी स्थित हकीम काजिम के  इमामबाड़ा पहुँचा जहां से ज़ुल्जनाह शामिल हुए और अंजुमन हैदरी चौक बनारस ने नौहा व मातम शुरू कियाI अंजुमन हैदरी के नौहाख्वान लियाकत अली खान ने नौहा पढ़ा-  ऐ  अहले अज़ा बैठे क्या हो, फ़र्ज़न्दे नबी का चेहलुम है ।

जुलूस में शराफत अली,  सहाब ज़ैदी, शोफी , राजा,  शानू ने नौहाख्वानी की। जुलूस दालमंडी, खजूर वाली मस्जिद, नई सड़क, शेख सलीम फाटक, तुलसी कुआं, काली महल, पितरकुंडा होते हुए लल्लापुरा स्थित फ़ातमान पहुँच कर समाप्त हुआI 

ऐसे ही शिवाला में डिप्टी जाफर बक्त के अजाखाने से चेहल्लुम का जुलूस निकाला गया। इस जुलूस में कई अंजुमने नौहाख्वानी व मातम करते हुए चल रही थी। जुलूस विभिन्न रास्तों से होकर शिवाला घाट जाकर सम्पन्न हुआ। जुलूस में सैय्यद नासिर हुसैन जैदी के लिखे नौहों को जब पढ़ा गया तो तमाम लोगों ने जोरदार मातम का नज़राना पेश किया। शिवाला से आज शाम भी एक जुलूस निकलेगा। जुलूस में सैयद फरमान हैदर तकरीर करेंगे। सैयद आलिम हुसैन रिजवी लोगों का स्वागत करेंगे।