सोमवार, 20 अक्टूबर 2025

Darbar -E-Mughaliya की दीवाली

"प्यार की जोत से घर- घर है चराग़ां वर्ना,

एक भी शम्अ न रौशन हो हवा के डर से"- शाकिब जलाली




Dr Muhammad Arif 

Varanasi (dil india live). दीवाली का जश्न पौराणिक के साथ-साथ भारतीय संस्कृति की विरासत का भी प्रतीक है। शास्त्रों में भी इसे मान्यता प्राप्त है और इस त्योहार का मूल तत्व बुराई पर अच्छाई की विजय है। दीवाली (diwali) प्रेम, भाई-चारा और उल्लास का संदेश पूरी दुनियां को दे रही है और एक ऐसे समाज की कल्पना को साकार करने का प्रयास कर रही है जहां मनुष्य से मनुष्य के बीच नफरत नहीं बल्कि मोहब्बत हो, पर इस बात से भी इनकार नहीं किया जा सकता कि दीवाली को भव्यता और आधुनिक स्वरूप प्रदान करने में मुग़लों का योगदान उल्लेखनीय रहा है। मुग़ल दरबार में जिस साझी विरासत का जन्म हुआ दीवाली ने उसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

      वैसे तो सभी भारतीय त्योहारों ने हिंदुस्तान में प्रवेश के समय से ही तुर्कों में गहरी दिलचस्पी पैदा किया परन्तु कृष्ण जन्माष्टमी, दशहरा, बसंत पंचमी, होली और दीवाली ने उन्हें खासकर आकर्षित किया। ये पर्व तत्कालीन दरबार का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गए। इसे ही अमीर खुसरो ने हिंदुस्तानी तहज़ीब कहा जो हिंदुस्तान को सारी दुनियां से श्रेष्ठ बनाता है। तुर्क और मुग़ल इस तहज़ीब में ऐसे रंगे की उनकी अलग पहचान कर पाना मुश्किल हो गया। इसी मेल-जोल की परम्परा ने हमें पूरी दुनियां पर मकबूलियत प्रदान की।


        भारत में तुर्क सुल्तानों के भारतीय त्योहार मनाने के दृष्टांत प्रारम्भ से ही मिलते हैं। 14वीं शताब्दी में मुहम्मद बिन तुग़लक़ दीवाली का त्योहार अपने महल में मनाता था। उस दिन महल को खूबसूरती से सजाया जाता और सुल्तान अपने दरबारियों को नए-नए वस्त्र प्रदान करता था तथा एक शानदार दावत का भी आयोजन किया जाता था।

   मुग़ल बादशाह बाबर (Badshah Babar) के समय पूरे महल को दुलहन की तरह सजा कर पंक्तियों में लाखों दीये जलाए जाते थे और इस अवसर पर शहंशाह गरीबों को नए कपड़े और मिठाइयां बाँटता। सम्राट हुमांयू (Humayun) ने अपने पिता की विरासत को न केवल बरकरार रखा बल्कि साथ-साथ महल में लक्ष्मी पूजा की भी शुरूआत किया। पूजा के दौरान एक विशाल मैदान में आतिशबाजी का आयोजन किया जाता था। गरीबों को सोने के सिक्के बांटे जाते और तदुपरांत 101 तोपों की सलामी दी जाती थी।

मुगल शहंशाह अकबर के समय में 'जश्न-ए-चिरागा' होता था। इतिहास में अकबर और जहांगीर के समय 'जश्न-ए-चिरागा' मनाए जाने का उल्लेख ऐतिहासिक ग्रंथो में बहुतायत से मिलता है। आगरा किला दीयों की रोशनी में दमक उठता था।


अकबर मुंडेर पर दीपक जलवाता

अकबर के  दरबारी अबुल फजल (Abdul Fazal) ने 'आइन-ए-अकबरी' में लिखा है कि अकबर दीवाली पर अपने राज्य में मुंडेर पर दीपक जलवाता था। महल में पूजा दरबार का आयोजन होता था। ब्राह्मण दो गायों को सजाकर शाही दरबार में आते और शहंशाह को आशीर्वाद देते। सम्राट उन्हें मूल्यवान उपहार प्रदान करता था। दीवाली के लिए महलों की सफाई और रंग रोगन महीनों पहले से शुरू हो जाता था। अपने कश्मीर प्रवास के दौरान अकबर ने वहां नौकाओं, घरों, झीलों और नदी तट पर दीये जलाने का फरमान जारी किया। अपने शहजादों और शहजादियों को जुए खेलने की भी इजाजत प्रदान की। अकबर ने गोवर्धन पूजा तथा बड़ी दीवाली के साथ छोटी दीवाली मनाने की भी शुरुआत की।


अकबर (Akbar) ने ही आकाश दीये की भी परम्परा शुरु की जो दीवाली की पूरी रात जलता था। इसमें 100 किलो से ज्यादा रुई और सरसों का तेल लगता था। दीये में रुई की बत्ती और तेल डालने के लिए सीढ़ी का इस्तेमाल किया जाता था। दरबार में फ़ारसी में अनुदित रामायण का पाठ भी होता था। पाठ के उपरांत दरबार में राम के अयोध्या वापसी का नाट्य मंचन होता फिर आतिशबाजी का दौर शुरू होता था। इस अवसर पर गरीबों को कपड़े,धन और मिठाइयां वितरित की जाती थी।अकबर ने राम सिया की को प्रदर्शित करता हुआ सिक्का भी जारी किया।

 'तुजुक-ए-जहांगीरी' में दिवाली का जिक्र 

मुगल शहंशाह जहांगीर (Mughal Badshah Jahangir) ने अपनी आत्मकथा 'तुजुक-ए-जहांगीरी' में वर्ष 1613 से 1626 तक अजमेर में दीपावली मनाए जाने का जिक्र किया है। जहांगीर दीपक के साथ-साथ मशाल भी जलवाता था और अपने सरदारों को नज़राना देता था। आसमान में 71 तोपें दागी जाती थीं तथा बारूद के पटाखे छोड़े जाते थे। फकीरों को नए कपड़े व मिठाइयां बांटी जातीं। तोप दागने के बाद आतिशबाजी होती थी। मुगलकालीन पेंटिंग्स में भी दीवाली का जश्न बहुतायत से मिलता है।

   शाहजहां (Shahjahan) के समय भी यह त्योहार परंपरागत तरीके से मनाया जाता रहा। दीवाली के दिन शहंशाह को सोने-चांदी से तौला जाता और इसे गरीब जनता में बांट दिया जाता था। मुग़ल बेगमें और शहजादियां आतिशबाजी देखने के लिए कुतुबमीनार जाती थीं। शाहजहां राज्य के 56 जगहों से अलग-अलग तरह के पकवान मंगा कर 56 तरह का थाल सजवाता था। 40 फिट ऊंची भव्य आतिशबाजी का मनोहारी दृश्य देखने के लिए दूरस्थ इलाकों से लोग आते थे। औरंगजेब के समय दीवाली ही नहीं बल्कि मुस्लिम त्योहारों में भी कुछ फीकापन आ गया।

मुहम्मद शाह (Muhammad Shah) दीवाली के मौके पर अपनी तस्वीर बनवाता था। उसने अकबर तथा शाहजहां से भी अधिक भव्यता इस त्योहार को प्रदान की। सजावट और आतिशबाजी के अलावा शाही रसोई में नाना प्रकार के पकवान बनाये जाते थे जिसे जन-साधारण में बांटा जाता था।


 बहादुर शाह जफर (Bahadur Shah Zafar) भी दीवाली के दिन लक्ष्मी पूजा (Laxmi puja) के बाद दरबार में आतिशबाजी और मुशायरा का आयोजन करते थे।गले मिलने की परंपरा सम्भवतः मुहम्मद शाह के दौर में शुरू हुई जो इस त्योहार का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन गयी।

  आज इस विरासत पर कुछ लोग सवाल उठाते हैं। ये कौन है जो इन मूल्यों को नकार रहे है। हमें इनसे सावधान रहने की जरूरत है। यही मूल्य हमें दुनिया में अलग पहचान देते है और इन्ही पर विश्वास करके हमनें मिल-जुल कर आजादी की लड़ाई लड़ी। इन्हें ही संविधान में जगह दी गई और उसकी प्रस्तावना में यही मूल्य स्वतंत्रता, समता, बंधुता और न्याय बनकर उभरे। आज हमें इनकी हिफाजत करने और इनके पक्ष में खड़ा होने के लिए तैयार रहना होगा अन्यथा इतिहास हमें माफ नहीं करेगा।

(लेखक : मशहूर इतिहासकार है और पीस के लिए काम करते हैं। )

रविवार, 19 अक्टूबर 2025

31 October तक जमा कर दें हज की दूसरी किशत

इसरा के कैंप में अरकान संग भरवाया गया दूसरी किश्त का फार्म 


Varanasi (dil india live). इसरा (ISSRA) की ओर से स्पेशल हज कैम्प का एहतेमाम मौलाना अब्दुल हादी खां हबीबी की सरपरस्ती व मौलाना हसीन हबीबी की सदारत में Sunday को सम्पन्न हुआ। कैंप में हज 2026 में हज यात्रा पर जाने के लिए चयनित हज जायरीन की दूसरी किश्त जमा करने के लिए FEE TYPE-25 (Pay--in-Slip) फार्म ऑनलाइन व ऑफलाइन निःशुल्क भरवाया गया और हज व उमरह को लेकर आवश्यक शुरूआती जानकारी दी गई। जिसमें आरजी तौर पर चुने गये हज जायरीन को बताया गया कि एक हाजी को दूसरी किस्त 1 लाख 25,00 रूपया प्रति व्यक्ति 31.10.2025 तक ऑनलाइन या ऑफलाइन स्टेट बैंक ऑफ इण्डिया या यूनियन बैंक ऑफ इण्डिया में अवश्य जमा करना है तथा Pay-in- Slip में हज कमेटी द्वारा जारी बैंक रिफरेन्स नम्बर अवश्य लिखें नहीं तो उनकी किश्त बैंक में जमा नहीं होगी। जमा की गई दूसरी किश्त Pay--in-Slip की एक कॉपी हज कमेटी लखनऊ के आफिस में जमा करें या डाक द्वारा भेजें। डाक द्वारा भेजने का पता-एक्सक्यूटिव आफिसर उ०प्र० हज कमेटी मौलाना अली मियां मेमोरियल हज हाउस, सरोजनी नगर, कानपुर रोड, लखनऊ 226008 है। 


इस कैम्प में पूर्वांचल के कई जिलों के लोगों ने FEE TYPE-25 फार्म (Pay--in-Slip) निःशुल्क ऑनलाइन या ऑफलाइन भरवाया तथा हज के मुताल्लिक आवश्यक जानकारी हासिल की। इस मौके पर इसरा के सदस्य एवं पदाधिकारीगण मौजूद थे। शुक्रिया हाजी फारुख खां ने व स्वागत शाहरुख खान ने किया।

शनिवार, 18 अक्टूबर 2025

Mozambique के Runway पर दौड़ेगा Varanasi k BLW निर्मित Engine

Make In India की वैश्विक उड़ान– BLW की तकनीकी दक्षता का प्रमाण

BLW निर्मित 3300 एचपी का है यह स्वदेशी इंजन


F. Farouqi Babu/Satosh 

Varanasi (dil india live). बनारस रेल इंजन कारखाना (BLW) ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय (International) पटल पर India का परचम लहराया है। महाप्रबंधक Naresh pal Singh (नरेश पाल सिंह) के नेतृत्व में BLW द्वारा निर्मित 3300 हॉर्स पावर एसी-एसी डीजल-इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव का चौथा इंजन आज Mozambique के लिए सफलतापूर्वक रवाना किया गया। यह आपूर्ति मेसर्स राइट्स के माध्यम से 10 इंजनों के निर्माण एवं निर्यात अनुबंध के अंतर्गत की जा रही है। पहले दो इंजन जून 2025 में, तीसरा सितंबर में और चौथा आज 18 अक्टूबर 2025 को निर्यात के लिए भेजा गया। शेष 6 इंजनों का प्रेषण दिसंबर 2025 तक पूरा कर लिया जाएगा।

तकनीक, उत्कृष्टता चालक-अनुकूल डिज़ाइन

BLW के ये अत्याधुनिक 3300 एचपी केप गेज (1067 मिमी) Engine 100 किमी/घंटा की गति से दौड़ने में सक्षम हैं। इनमें चालक के लिए रेफ्रिजरेटर, हॉट प्लेट, मोबाइल होल्डर, आधुनिक कैब डिज़ाइन और शौचालय सुविधा जैसी अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाएं दी गई हैं — जो इन्हें न केवल शक्तिशाली बल्कि मानव-केंद्रित बनाती हैं।

विश्वस्तरीय प्रदर्शन की पुनः पहचान

पूर्व में भेजे गए 6 डीजल इंजनों (3000 HP) के उत्कृष्ट प्रदर्शन से प्रभावित होकर मोजाम्बिक रेलवे (CFM) ने बरेका को यह नया अनुबंध सौंपा। यह उपलब्धि भारतीय रेल की निर्माण क्षमता और विश्वसनीयता का जीवंत प्रमाण है।

मेक इन इंडिया–मेक फॉर द वर्ल्ड’ की मिसाल

BLW की यह सफलता ‘मेक इन इंडिया’ के उस विजन को साकार करती है जिसमें भारत वैश्विक स्तर पर तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में अग्रसर है। 1956 से अब तक बरेका 10000 से अधिक लोकोमोटिव का निर्माण कर चुका है और वियतनाम, मोजाम्बिक, माली, अंगोला, म्यांमार, श्रीलंका, सूडान सहित कई देशों को सफलतापूर्वक निर्यात कर चुका है।

महाप्रबंधक नरेश पाल सिंह ने इस अंतरराष्ट्रीय सफलता के लिए बरेका परिवार के सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों की टीम भावना, तकनीकी दक्षता और प्रतिबद्धता की सराहना की।

विभिन्न क्षेत्रों की हस्तियों का हुआ सम्मान

जौहर-ए-अदब अवार्ड से नवाजे गये अहमद आज़मी


  

Varanasi (dil india live). पं. दीन दयाल उपाध्याय मेमोरियल एजुकेशनल सोसाइटी द्वारा न्यू सेन्ट्रल पब्लिक स्कूल (New Central Public school) में हरदिल अज़ीज़ शायर अहमद आज़मी (Ahmad Azmi) को जौहर-ए-अदब अवार्ड से नवाजा गया। इस दौरान उनकी हाल में ही विमोचित हुए काव्य संकलन कतरा-ए-शबनम का भी तजकिरा हुआ। अहमद आज़मी ने dil india live से बातचीत करते हुए बताया कि उनके साथ ही कार्यक्रम में विभिन्न विधाओं की पांच प्रमुख हस्तियों डा. एके सिंह को शिक्षा एवं समाज सेवा क्षेत्र में (लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड), त्रिलोकी प्रसाद को (पत्रकारिता शिखर पुरस्कार), लाल बहादुर शास्त्री महाविद्यालय हिंदी विभाग की प्रोफेसर इशरत जहां को लेखन एवं साहित्य सेवा में (साहित्य रत्न पुरस्कार), प्रो. पीके राय को विज्ञान रत्न पुरस्कार से नवाजा गया।


 

कठिन परिश्रम वालों के लिए प्रेरणादायक 
उपरोक्त सम्मान समारोह के मुख्य अतिथि राजेश गौतम (निदेशक आकाशवाणी एवं दूरदर्शन वाराणसी) ने कहा कि पं. दीन दयाल उपाध्याय एजुकेशनल सोसाइटी का यह सार्थक प्रयास निश्चित रूप से उन लोगों के लिये भी प्रेरणादायक सिद्ध होगा जो विभिन्न विधाओं में कठिन परिश्रम कर रहे हैं। इस अवसर पर समारोह की अध्यक्षता कर रहे सुप्रसिद्ध साहित्यकार एवं हास्य व्यंग के कवि चकाचौंध ज्ञानपुरी (डा. अजय कुमार श्रीवास्तव) एवं शायर अहमद आजमी ने संयुक्त रूप से अपनी रचनाओं से महफिल में समां बांध दिया।

मेहमानों का स्वागत सोसाइटी के संस्थापक अध्यक्ष मुख्तार अहमद, संचालन पीके राय एवं पो. गुरोध सिठ (पवन सेठ) संदीप दास ने किया। इस अवसर पर पीएम श्री. प्र०ना०रा०ई० कालेज के प्रधानाचार्य अविनाश मिश्रा, अर्चना पाण्डेय, चरनजीत सिंह, पाण्डेय विजय कुमार, मोहन लाल, शिवा सैनी, शैल चौरसिया, रामबाबू, शाबरीन, पवन कुमार आदि उपस्थित रहे।

UP k Varanasi Main छात्र ने 6 माह में Quran किया कंठस्थ

Abu Huzaifa बने महज़ छह महीने में हाफ़िज़-ए-कुरान

घर में छायी ईद सी खुशियां 



Varanasi (dil india live). Abu Huzaifa हिफ्ज के ऐसे Student (छात्र) हैं जिन्होंने अपनी कड़ी मेहनत और लगन से महज़ छह महीने में मुकम्मल कुरान (Quran) कंठस्थ कर रिकार्ड बनाया है। इसी के साथ अब वो हाफ़िज़-ए-कुरान बन गये हैं। उनके हाफिज बनने से घर में न सिर्फ ईद (Eid) सी खुशियां है बल्कि उनके पास पड़ोस के लोग भी उन्हें मुबारकबाद देते नहीं थक रहे हैं। 

मदरसा तालीमुद्दीन पुरानापुल के प्रधानाचार्य (Principal) मौलाना रिज़वानुल्लाह नोमानी खुश हैं। वो कहते है कि मो. असलम के साहबजादे Abu Huzaifa एक प्रतिभाशाली मलबा (छात्र) है। उनके Teacher (शिक्षक) हाफ़िज़ मौलाना हबीब-उर-रहमान मज़हरी ने 7 साल की उम्र में महज़ 6 महीने में ही कुरान मुकम्मल याद (कंठस्थ) कराया है।

Quran इंसान के लिए जीवन का स्रोत 

अबु हुज़ैफ़ा के कुरान को याद करने पर एक कार्यक्रम का आयोजित किया गया। इस अवसर पर मदरसा के प्रधानाचार्य मौलाना रिज़वानउल्लाह नोमानी ने कहा कि कुरान इंसान के लिए जीवन का स्रोत है। अल्लाह ने पवित्र (paak) कुरान को सुरक्षित रखने की ज़िम्मेदारी ली है और इसमें कोई बदलाव नहीं किया जा सकता। इसका सबसे अच्छा उदाहरण हाफ़िज़ों के रूप में है। अल्लाह तआला ने पवित्र कुरान को हाफ़िज़ों के सीने में सुरक्षित रखा है। उन्होंने आगे कहा कि ये हाफ़िज़ क़ुरान और उनके माता-पिता बधाई के पात्र हैं। कल हश्र के मैदान में उनके सिरों पर नूर का ताज रखा जाएगा। इसलिए जो कोई भी पवित्र क़ुरान से जुड़ा होगा, उसे दोनों जहां में कामयाबी मिलेगी।

हाफिज हुजैफा की हुई गुलपोशी 

इस अवसर पर मदरसे के सदस्यों, विशेष रूप से छात्र हुजैफा के शिक्षक मौलाना हबीब-उर-रहमान मज़हरी और मदरसा के प्रधानाचार्य मौलाना रिज़वानुल्लाह नोमानी ने अपनी खुशी का इज़हार करते हुए हार्दिक बधाई दी और दुआओं के साथ उन्हें आशीर्वाद दिया। उधर सुल्तान क्लब के सदर डा. एहतेशामुल हक़ ने हाफिजे कुरान अबु हुजैफा की गुलपोशी कर मुबारकबाद दी।

शुक्रवार, 17 अक्टूबर 2025

Education: VKM Varanasi की NSS ईकाई ने लगाया रक्तदान शिविर

छात्राओं को रक्तदान में सक्रिय रूप से भाग लेने के लिए किया प्रेरित 



Varanasi (dil india live) वसंत कन्या महाविद्यालय (VKM), कमच्छा में राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) इकाई चतुर्थ  की कार्यक्रम अधिकारी डॉक्टर शुभांगी श्रीवास्तव द्वारा 17 अक्टूबर 2025 को  पूर्वाह्न 10 बजे रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया। इस शिविर का उद्देश्य विद्यार्थियों में सामाजिक सेवा की भावना, मानवता के प्रति समर्पण तथा रक्तदान के महत्व के प्रति जागरूकता फैलाना था।

कार्यक्रम का शुभारंभ महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. रचना श्रीवास्तव के स्वागत भाषण से हुआ। उन्होंने अपने संबोधन में रक्तदान को “महान दान” बताया और छात्राओं को इस सामाजिक कार्य में सक्रिय रूप से भाग लेने के लिए प्रेरित किया 

इसके पश्चात रजनी गुप्ता, काउंसलर, सर सुन्दरलाल चिकित्सालय (BHU) ने रक्तदान के महत्व पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि रक्तदान न केवल किसी अन्य के जीवन को बचाता है बल्कि यह दाता के स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी होता है। उन्होंने छात्राओं को रक्तदान की प्रक्रिया, सुरक्षा एवं इससे जुड़ी भ्रांतियों के बारे में विस्तार से जानकारी दी।

इस मौके पर सर सुन्दरलाल चिकित्सालय की चिकित्सा टीम में बाबूनंदन यादव – मेडिकल ऑफिसर, रमेश यादव – नर्सिंग ऑफिसर, बृजेश मौर्य – लैब टेक्नीशियन, रजनी गुप्ता – काउंसलर आदि मौजूद थे। इन सभी के सहयोग से रक्तदान शिविर का सफल संचालन हुआ। विद्यार्थियों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया तथा योग्य दाताओं से रक्त संग्रह किया गया।

कार्यक्रम की रूपरेखा एवं संचालन में एन.एस.एस. कार्यक्रम अधिकारी डॉक्टर शुभांगी श्रीवास्तव की महत्वपूर्ण भूमिका रही। उनके निर्देशन में एन.एस.एस. स्वयंसेविकाओं ने पूरे आयोजन को सफलतापूर्वक सम्पन्न कराया।



शिविर में लगभग 100 प्रतिभागी उपस्थित रहे, जिनमें अनेक छात्राओं ने पहली बार रक्तदान (Blood donate) किया। कॉलेज परिसर में सेवा, उत्साह और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना स्पष्ट रूप से दिखाई दी। शिविर के समापन पर एन.एस.एस. कार्यक्रम अधिकारी ने सभी प्रतिभागियों, चिकित्सा टीम, अतिथियों और आयोजन समिति का आभार व्यक्त किया। यह एक दिवसीय रक्तदान शिविर अत्यंत सफल एवं प्रेरणादायक रहा। वसंत कन्या महाविद्यालय की एन.एस.एस. इकाई ने “स्वयं के लिए नहीं, समाज के लिए” के आदर्श को वास्तविक रूप में चरितार्थ किया।

Education : DAV PG College में कार्य स्थल पर महिलाओं के लिए चुनौतियां एवं अवसर पर संगोष्ठी

3 फीसदी ही महिलाओं की उच्च पदों तक पहुंच

कार्यस्थल पर दक्षता से खुद को साबित करें महिलाएं- मेजर निशा



Varanasi (dil india live)। डीएवी पीजी कॉलेज में शुक्रवार को IQAC (आइक्यूएसी) के अंतर्गत स्त्री विमर्श प्रकोष्ठ के तत्वावधान में कार्य स्थल पर महिलाओं के लिए चुनौतियां एवं अवसर विषयक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। मुख्य वक्ता IIT (आईआईटी) BHU की डिप्टी रजिस्ट्रार (अकादमिक) मेजर निशा बलोरिया ने कार्यस्थल पर महिलाओं को आने वाली समस्याओं पर खुलकर विमर्श किया। उन्होंने कहा कि आज जब महिलाएं पुरुषों के साथ कदम से कदम मिला कर चल रही है और काफी क्षेत्रों में उनसे आगे भी है बावजूद उसके सिर्फ 2 या 3 फीसदी महिलाएं ही उन उच्च पदों तक पहुंच पाती है जहां वें नीतिगत निर्णयों में भागीदार हो या स्वयं नीतियां निर्धारित कर सकें। उन्होंने कहा कि कार्यस्थल पर महिलाओं को नारी की पहचान से अलग कार्य को निपुणता पूर्वक सम्पन्न कर खुद को साबित करने वाली होनी चाहिए। कॉरपोरेट सेक्टर में महिलाओं को काम करना सबसे मुश्किल है। उन्होंने यह भी कहा कि महिलाओं को सबसे पहले खुद के लिए लक्ष्य निर्धारित करना, स्वयं से प्यार करना सीखना होगा। 


अध्यक्षता करते हुए कार्यवाहक प्राचार्य प्रो. मिश्रीलाल ने कहा कि प्रशासनिक और नेतृत्वकारी पदों पर महिलाओं की बढ़ती भागीदारी पर बल दिया। उन्होंने कहा कि वास्तविक सशक्तिकरण तभी होगा जब जड़ताओं से मुक्त होक समान अवसरों और सम्मान की मिले।

प्रकोष्ठ की समन्वयक एवं उपाचार्य प्रो.संगीता जैन ने कहा कि समाज मे नारी विरोधी कुछ नए शब्द चलन में आ गए है  इसमें मैनस्प्लेनिंग और मैन्टरप्टिंग जैसे लैंगिक शब्दों की उत्पत्ति और उनके अर्थ पर चर्चा की।

       


स्मृति चिन्ह प्रदान कर उनका अभिनन्दन
संगोष्ठी के प्रारंभ में प्रबंधक अजीत कुमार सिंह यादव ने मुख्य वक्ता को स्मृति चिन्ह प्रदान कर उनका अभिनन्दन किया। संचालन डॉ. वन्दना बालचंदानी एवं धन्यवाद ज्ञापन IQAC की समन्वयक Dr Parul Jain (डॉ. पारुल जैन) ने दिया। इस मौके पर मुख्य रूप से प्रकोष्ठ की सह समन्वयक प्रो.पूनम सिंह, प्रो.ऋचारानी यादव, डॉ. स्वाति सुचरिता नंदा, प्रो.अनूप मिश्रा, डॉ. साक्षी चौधरी, डॉ. कल्पना सिंह, डॉ. हसन बानो, डॉ. नेहा चौधरी, डॉ. तरु सिंह, डॉ. प्रतिमा गुप्ता, डॉ. शालिनी सिंह, रुचि भाटिया सहित बड़ी संख्या में महिला प्राध्यापिका एवं छात्राएं उपस्थित रही।