सोमवार, 1 दिसंबर 2025

Seminar: Maulana Abul Kalam की शिक्षा, दर्शन और राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020

मौलाना अबुल कलाम आज़ाद ने पारंपरिक शिक्षा से आगे जाकर आधुनिक शिक्षा पर दिया था जोर-प्रो. आफ़ताब



dil india live (Chandoli). Mughalsarai के होटल स्प्रिंग स्काई में तमिल फाउंडेशन के तत्वाधान में मौलाना अबुल कलाम आज़ाद का शिक्षा दर्शन और राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 विषयक एक दिवसीय विचार गोष्ठी BHU उर्दू विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. आफ़ताब अहमद आफाक़ी की अध्यक्षता में हुई। इस मौके पर आफाकी ने कहा कि मौलाना अबुल कलाम आज़ाद को कई विषयों में महारत प्राप्त थी। वह एक बड़े आलिम ए दीन, महान शिक्षाविद, दार्शनिक, बेबाक पत्रकार, कुशल राजनीतिज्ञ थे। पंडित जवाहरलाल नेहरू भी उनकी राजनीतिक कुशलता के प्रशंसक थे और उन्हें एक मझा हुआ राजनीतिज्ञ मानते थे। उन्होंने कहा मौलाना का विचार था कि बच्चों को धार्मिक शिक्षा के साथ-साथ ऐसी शिक्षा दी जाए जिसके माध्यम से हमारी नस्ले दुनिया को समझें और दुनिया के साथ कंधे से कंधा मिलाकर आगे बढ़ें। इसके लिए उन्होंने 1948 में संस्कृत पाठशालाओं और मदरसे की नुमाइंदों के साथ अलग-अलग कॉन्फ्रेंस की, जिसमें उन्होंने दोनों संप्रदायों से कहा कि वे अपनी पारंपरिक शिक्षा से आगे बढ़कर पाठ्यक्रम में आधुनिक शिक्षा को जगह दें और बच्चों को धार्मिक शिक्षा के साथ-साथ विज्ञान, टेक्नोलॉजी, कला, संस्कृति आदि भी सिखाएं, ताकि वे दुनिया के साथ चल सकें। उनका मानना ​​था कि अंग्रेजों द्वारा यूरोपीय शिक्षा प्रणाली ने छात्रों के दिमाग को बंद कर दिया है और उनके दिमाग से मानवीय मूल्यों, सहनशीलता और त्याग की भावना को खाली कर दिया है। 




विशेष अतिथि डिप्टी डायरेक्टर/प्रिंसिपल डाइट चंदौली ने कहा कि मौलाना आज़ाद स्वतंत्रता सेनानी होने के साथ-साथ भारत में आधुनिक शिक्षा के संस्थापकों में से एक थे। नेशनल एजुकेशन पॉलिसी 2020 में मौलाना आज़ाद के शैक्षिक विचारों से जुड़ी कई बातें शामिल हैं। विशेष वक्ता BHU के हिंदी विभाग के पूर्व विभाग अध्यक्ष प्रोफेसर बलराज पांडेय ने अपने भाषण में कहा कि मौलाना आज़ाद हमेशा मुसलमानों में राजनीतिक जागरूकता पैदा करने के लिए चिंतित रहते थे और कड़ी मेहनत करते थे। वे विभाजन के सख्त खिलाफ थे और इसे एक जानलेवा बीमारी बताते थे। उन्होंने हमेशा धार्मिक सहनशीलता और राष्ट्रवाद पर जोर दिया। BHU के भूगोल विभाग के प्रोफेसर सरफराज आलम ने आंकड़ों के हिसाब से मुसलमानों के पढ़ाई में पिछड़ेपन का जिक्र करते हुए कहा कि बेसिक एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन में प्रवेश लेने वालों में मुस्लिम बच्चों का हिस्सा मुस्लिम आबादी के हिस्से से ज़्यादा है, लेकिन यह धीरे-धीरे कम होता जाता है, यानी वे बीच में ही पढ़ाई छोड़ने लगते हैं। यह दर आगे चलकर बहुत ज़्यादा है, ग्रेजुएशन में भी यह संख्या दुर्भाग्य से घटकर लगभग ढाई प्रतिशत रह जाती है।


इंडियन रेलवे मुगलसराय जोन के पूर्व वरिष्ठ राजभाषा अधिकारी दिनेश चंद्र ने अपने भाषण में कहा कि बच्चों को शैक्षणिक संस्थाओं में प्रवेश दिलाने के साथ-साथ उनकी पढ़ाई आगे जारी रखना भी बहुत ज़रूरी है। परिवार के भविष्य के साथ-साथ देश के भविष्य की ज़िम्मेदारी भी उनके कंधों पर होती है। उन्होंने कहा कि यह बहुत दुख की बात है कि जिसक़ौम से आज़ाद भारत के पहले शिक्षा मंत्री थे, वही क़ौम आज शिक्षा में पिछड़ रही है। इसका साफ़ मतलब है कि लोगों ने उनके कार्यों,विचारों और सेवाओं को भुला रखा है । उन्होंने मुसलमानों में शिक्षा के पिछड़ेपन के लिए मुस्लिमो को ही ज़िम्मेदार ठहराया। शिक्षा के महत्व पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि स्कूल खोलना जेल बंद करने जैसा है। डॉ. शम्स अज़ीज़, वाराणसी के रीजनल डायरेक्टर (MANU) ने भी मौलाना अब्दुल कलाम आज़ाद की शख्सियत पर रोशनी डाली। इस प्रोग्राम में 2025 में सेवा निर्मित हुए उर्दू टीचरों को भी उनकी शिक्षा सेवाओं के लिए सम्मानित किया गया। अज़हर आलम हाशमी, इरफ़ान अहमद, सोहराब अली अंसारी, शाहजहां बेगम, जहांआरा, इश्तियाक अहमद को मेहमानों ने शॉल मुमेंटो और ततोहफे दिए । प्रोग्राम की शुरुआत पवित्र कुरान की तिलावत से हुई। अपने स्वागत भाषण में, डाइट लेक्चरर डॉ. अज़हर सईद ने सभी मेहमानों का स्वागत करते हुए  तामीर फाउंडेशन  के कार्य और उसके मकसद से लोगों को रूबरू करवाया। उन्होंने कहा कि तामीर फाउंडेशन मुख्य रूप से शिक्षा, जागरूकता , इसके प्रचार प्रसार और विशेष रूप से उर्दू भाषा एवं साहित्य के विकास और उसके संरक्षण कलिए बनाया गया है और आज का कार्यक्रम इसी फाउंडेशन की देखरेख में आयोजित किया गया है। सुश्री अफशां रोमानी और शफाअत अली ने संयुक्त रूप से संचालन किया। कार्यक्रम का समापन इरफान अली मंसूरी के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। 

मुशायरे में हुई उम्दा शायरी  


कार्यक्रम के दूसरे भाग में, एक भव्य मुशायरा का आयोजन किया गया। मुशायरा की अध्यक्षता बीएचयू (BHU) उर्दू विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रोफेसर याकूब यावर ने की, जबकि अयाज़ आज़मी ने विशेष अतिथि थे। मुशायरे में डॉ. शाद मशरिकी, ज़मज़म रामनगरी, दानिश ज़ैदी, नसीमा निशा, आलम बनारसी, ज़िया अहसानी, नदीम  गाज़ीपुरी, शारिक फूलपुरी, अबू शहमा, सुरेश  अकेला, आकाश मिश्रा, अब्दुल रहमान नूरी, जिया अहसनी आदि ने अपने कलाम से लोगों को देर तक बांधे रखा। मुशायरा की निजामत करते हुए डॉ. अज़हर सईद ने खूब वाहवाही लूटी। इस अवसर पर बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे।

रविवार, 30 नवंबर 2025

BLW: डिजिटल इंडिया मिशन को नई गति दे रहा बरेका

डिजिटल इंडिया मिशन के अंतर्गत बरेका में फाइलों के डिजिटलीकरण प्रक्रिया का शुभारंभ


F. farooqi/Santosh Nagvanshi 

dil india live (Varanasi). रेलवे बोर्ड के निर्देशानुसार एवं बरेका  महाप्रबंधक सोमेश कुमार के मार्गदर्शन में बनारस रेल इंजन कारखाना (बरेका) में डिजिटल इंडिया मिशन को नई गति देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए  फाइलों का डिजिटलीकरण प्रक्रिया का शुभारंभ कर दिया गया है। 

फाइलों का डिजिटलीकरण होने से कार्यप्रणाली में आधुनिक तकनीकों का समावेश सुनिश्चित होगा। इससे  न केवल  कार्य संस्कृति में सुधार होगा, बल्कि कार्यस्थलों की स्वच्छता, बेहतर कार्यक्षमता के साथ ही श्रम एवं समय की बचत भी सुनिश्चित होगी। यह पहल प्रशासनिक प्रक्रियाओं को तेज, पारदर्शी और अधिक सुगम बनाएगी।

फाइलों के डिजिटलीकरण का कार्य वरिष्ठ आंकड़ा संसाधन प्रबंधक संतोष कुमार सिंह के नेतृत्व में किया जा रहा है। इस टीम में आंकड़ा संसाधन प्रबंधक प्रशांत दुबे, वरिष्ठ अभियंता (आई.टी.) नईम अख्तर तथा तीर्थ विश्वास सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। बरेका की यह पहल डिजिटल इंडिया के संकल्प को मजबूत करेगी और बरेका को तकनीकी रूप से और अधिक सक्षम व दक्ष बनाएगी।


URS Hazrat Rahim Shah Baba : रहीमी दरबार में उमड़े बाबा के दीवाने

हज़रत रहीम शाह बाबा के तीन दिनी उर्स पर माहौल दिखा नूरानी

 



  • Mohd Rizwan 

dil india live (Varanasi)। हज़रत रहीम शाह बाबा रहमतुल्लाह अलैह का तीन दिनी सालाना उर्स अकीदत और एहतराम के साथ बाबा के बेनिया स्थित रहीमी दरबार में दूसरे दिन भी मनाया जा रहा है। उर्स के मौके पर हज़रत रहीम शाह बाबा के दर पर अकीदतमंदों का हुजूम उमड़ा हुआ है। उर्स में अकीदतमंद जहां मन्नती चादरें पेश कर रहे थे वहीं जियारत करने वाले सिर झुकाकर वहां पहुंचे हुए हैं। इस मौके पर फातिहा पढ़ने दूर-दराज़ से अकीदतमंद जुटे हुए थे।



दूसरे दिन इतवार को फज्र के बाद कुरआनख्वानी, बाद नमाज असर ग़ुस्ल मजार शरीफ, बाद नमाज मगरिब सरकारी चादर पोशी हुई व मिलाद शरीफ में लोगों का हुजूम उमड़ा। बाद नमाज इशा लंगर व महफिले समा का आयोजन समाचार लिखे जाने तक जारी था।

शनिवार को हुई थी शुरुआत 

तीन दिनी उर्स की शुरुआत शनिवार को हजरत रहीम शाह बाबा के दर पर पाक कुरान की तेलावत से हुई। जोहर की नमाज के बाद महफिल-ए-समां का आयोजन किया गया। शाम को चादरपोशी और मगरिब की नमाज के बाद मीलाद शरीफ में अकीदतमंद जुटे हुए थे। उर्स के मौके पर तकरीर और लंगर का भी दौर देर रात तक चला। आने वालों का खैरमखदम सज्जादानशीन मोहम्मद सैफ रहीमी कर रहे थे। उर्स को देखते हुए दरगाह को सजाया गया था, तथा आसपास भी विद्युतीय सजावट की गई थी। 

VKM Varanasi Main काशी तमिल संगम का समृद्ध सांस्कृतिक आयोजन

भरतनाट्यम नृत्य की मोहक प्रस्तुति से हुआ आगाज़



dil india live (Varanasi). वसन्त कन्या महाविद्यालय, कमच्छा में काशी तमिल संगमम् 25 (4.0) संस्करण के अन्तर्गत छात्र सलाहकार और अनुशासन समिति द्वारा काशी और तमिल संस्कृति की विविधता और एकता को समर्पित एक भव्य प्रमोशनल सांस्कृतिक कार्यक्रम का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विभिन्न संस्कृतियों के संगम को प्रदर्शित करते हुए युवाओं में सांस्कृतिक सहिष्णुता और सामंजस्य की भावना को प्रोत्साहित करना था।  अध्यात्म और संस्कृति की नगरी कशी में तमिल कला, ज्ञान और परम्पराओं  को जोड़ने के उपक्रम रूप में यह संगम निरन्तर समाज में नवीन भावनाओं का संचार कर रहा है।

कार्यक्रम की शुरुआत मंगलात्मक भरतनाट्यम नृत्य की मोहक  प्रस्तुति से हुई। इसके बाद छात्राओं को सम्बोधित करते हुए प्राचार्या प्रो.रचना श्रीवास्तव ने कहा कि ऐसे आयोजन हमारे संस्थान के लिए गर्व के विषय हैं, जो देश की युवा पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ते हैं और उनमें सौहार्द की भावना विकसित करते हैं। महाविद्यालय की प्रबन्धक उमा भट्टाचार्य ने अपने आशीर्वचन में इस आयोजन के महत्व को रेखांकित करते हुए इसे महाविद्यालय की सुदीर्घ शैक्षिक एवं सांस्कृतिक धरोहरों की परम्परा में अद्वितीय कड़ी बताया। इस अवसर पर छात्राओं ने काशी-तमिल सांस्कृतिक परम्पराओं को उजागर करते हुए भव्य नृत्य और गीत प्रस्तुत किए। इन सांस्कृतिक प्रस्तुतियों में काशी की पौराणिक और ऐतिहासिक विरासत के साथ-साथ तमिल साहित्य, शास्त्रीय नृत्य और लोकगीतों की झलक देखने को मिली। डॉ.श्वेता सिंह एवं डॉ. श्रीप्रिया सिंह के कुशल निर्देशन में छात्राओं ने विभिन्न नृत्य रूप जैसे भरतनाट्यम और कथक, तथा प्रेरणादायक गीतों के माध्यम से भारतीय सांस्कृतिक विविधता के सौन्दर्य को दर्शाया।  आयोजन के माध्यम से छात्राओं ने न केवल कला और संस्कृति का सम्मान किया, बल्कि विभिन्न संस्कृतियों के बीच संवाद और मेलजोल का सन्देश भी दिया। 

आली, जीविका, भारती चट्टोपाध्याय, इप्सिता, दिशा लखानी व यीशु इत्यादि छात्राओं ने अपनी समृद्ध कला प्रस्तुतियों से इस तरह के सांस्कृतिक कार्यक्रमों को निरन्तर जारी रखने की प्रतिबद्धता व्यक्त की ताकि युवाओं में राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक समन्वय को मजबूती मिले। यह कार्यक्रम काशी तमिल संगम के समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर को साझा करने वाली एक यादगार सांस्कृतिक शाम के रूप में संजोया गया। जो विविधता में एकता का सशक्त उदाहरण प्रस्तुत करता है। कार्यक्रम में महाविद्यालय के शिक्षक एवं शिक्षणेत्तर कर्मचारियों सहित लगभग सवा सौ छात्राओं की उपस्थिति रही।


शनिवार, 29 नवंबर 2025

BLW: बाल निकेतन का Annual Sport Day Celebration


भव्य स्पोर्ट्स डे में बच्चों ने दिलाई प्रतिभा 

महिला कल्याण संगठन द्वारा होता है बाल निकेतन संचालित 



F. farooqui/Santoshi Nagvanshi 

dil india live (Varanasi). बनारस रेल इंजन कारखाना (BLW) महिला कल्याण संगठन द्वारा संचालित बाल निकेतन विद्यालय का वार्षिक खेल दिवस 2025-26 “खेल स्पंदन” का आज दिनांक 29 नवम्बर 2025 को बरेका केंद्रीय खेलकूद मैदान में भव्य आयोजन किया गया। बरेका महिला कल्याण संगठन की अध्यक्ष एवं मुख्य अतिथि मोनिका श्रीवास्तव द्वारा ध्वजारोहण एवं मशाल प्रज्वलित कर कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ किया गया। तत्पश्चात् प्राचार्या, बाल निकेतन रश्मि श्रीवास्तव ने स्वागत भाषण दिया।


इसके बाद बच्चों ने खेल प्रतिस्पर्धा एवं विभिन्न प्रस्तुतियों के माध्यम से अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। कार्यक्रम के मुख्य प्रस्तुतियों में नर्सरी के बच्चों द्वारा ग्लास रेस, बैग पैक रेस, एल.के.जी. के बच्चों द्वारा मंकी रेस, डक रेस, यू.के.जी. के बच्चों द्वारा स्पून एवं लेमन रेस, बुक बैलेंस रेस, पहली कक्षा के बच्चों द्वारा पिक द बॉल एंड ड्रॉप रेस एवं थ्रो रिंग रेस, दूसरी कक्षा के बच्चों  द्वारा हर्डल रेस एवं कॉलेक्ट द बॉल विद लेग रेस, कक्षा तीन के बच्चों द्वारा थ्री लेग रेस एवं स्कीपिंग रेस, कक्षा चार के बच्चों द्वारा 100 मीटर रेस, कक्षा चार एवं पांच के बच्चों  द्वारा 200 मीटर रेस एवं 400 मीटर रिले रेस के साथ ही बच्चों द्वारा योगा, पी.टी., ग्रुप डांस, फॉक डांस जैसी मनमोहक प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। बच्चों ने अपनी मेहनत एवं समर्पण की झलक अत्यंत मनोरम रूप में प्रस्तुत किया।


इस अवसर पर प्री प्राइमरी के विजेताओं को महिला कल्याण संगठन की अध्यक्ष मोनिका श्रीवास्तव ने एवं प्राइमरी के विजेताओं को महाप्रबंधक सोमेश कुमार ने मेडल एवं प्रशस्ति-पत्र भेंट कर पुरस्कृत किया। तदोपरांत महाप्रबंधक ने अपने उद्बोधन में कहा, "बाल निकेतन विद्यालय, अपनी 53 वर्षों की गौरवशाली यात्रा पूरी करते हुए शिक्षा और संस्कार के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहा है, जो समाज और राष्ट्र के निर्माण में योगदान दे रही है। उन्होंने मानव जीवन को खेल से जोड़ते हुए कहा कि मानव जीवन में भी खेल की तरह हार-जीत लगा रहता है। जीवन में हार और जीत को समान रूप से स्वीकार करते हुए सदैव आगे बढ़ते रहना चाहिए।“ उन्होंने विद्यालय के प्राचार्य एवं अध्यापकगण को इस अद्वितीय उपलब्धि के लिए हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दी। उन्होंने बच्चों की प्रतिभाओं और प्रस्तुतियों से प्रभावित होकर पुरस्कार प्रदान करने की घोषणा की। यह न केवल उनके प्रयासों का सम्मान है, बल्कि उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए प्रेरणा भी है। कार्यक्रम का मुख्य  उद्देश्य छात्रों में सांस्कृतिक और नैतिक मूल्‍यों को विकसित करना तथा उनके सर्वांगीण विकास को प्रोत्साहित करना था।

विद्यालय का वार्षिक रिपोर्ट स्कूल इंचार्ज प्रथम राखी गुप्ता ने विस्तारपूर्वक प्रस्तुत किया। धन्यवाद ज्ञापन स्कूल इंचार्ज द्वितीय अदिश्री वत्स ने एवं सम्पूर्ण कार्यक्रम का सुरूचिपूर्ण संचालन सुमोना नाग ने किया।


इनकी रही खास मौजूदगी 
मुख्य रूप से बरेका महिला कल्याण संगठन की उपाध्यक्ष गौरी श्रीवास्तव, कार्यकारणी सदस्याएं पूनम खरवार, गुरमीत कौर, प्राची मित्तल, कल्पना चौधरी, अंजू गुप्ता, पूजा मौर्या, शिखा जैन, रश्मि सिंह, लक्ष्मी चौधरी, सरिता सिंह, रुचि नंदकर, रितिका सिंह, हंसा चौधरी, अर्चना तिवारी, अनुजा खरे, कोषाध्यक्ष श्वेता श्रीवास्तव, सचिव श्वेता सिंह एवं प्राचार्या, बाल निकेतन रश्मि श्रीवास्तव समेत बड़ी संख्या में अध्यापिकाएं, छात्र-छात्राएं एवं अभिभावकगण उपस्थित रहें। इस अवसर पर बरेका के प्रमुख विभागाध्यक्षगण, विभागाध्यक्षगण, अधिकारी एवं कर्मचारीगण भी उपस्थित रहे।

शुक्रवार, 28 नवंबर 2025

Book Review: 'Rishte' (Short Story Collection)

लेखिका (Author): लता सुरेश  (Lata Suresh)

यह पुस्तक लता सुरेश द्वारा लिखित एकल लघु कहानी संग्रह है जिसका शीर्षक 'रिश्ते' है। यहां इस पुस्तक की संदीप चौरसिया कर रहे हैं ख़ास समीक्षा, यहां देखिए:-


dil india live (Varanasi).

'रिश्ते' जैसा शीर्षक सुनते ही मन में एक गहरी भावना जागृत होती है, क्योंकि जीवन में रिश्तों से अधिक महत्वपूर्ण और कुछ नहीं। लेखिका लता सुरेश का यह लघु कहानी संग्रह अपने नाम को पूरी तरह से सार्थक करता है, जहां हर कहानी मानव मन की गहराइयों और उसके जटिल संबंधों को छूती है।

विषय-वस्तु और सार

यह संग्रह एक कहानी से दूसरी कहानी तक, हमें मानवीय रिश्तों के अलग-अलग पहलुओं से रूबरू कराता है। चूँकि यह एक लघु कहानी संग्रह है, यह उम्मीद की जाती है कि हर कहानी छोटी, लेकिन अत्यंत मार्मिक और प्रभावशाली होगी। लेखिका ने शायद परिवार, दोस्ती, प्रेम, विश्वासघात, और आधुनिक जीवन शैली में रिश्तों की बदलती परिभाषा जैसे विषयों पर ध्यान केंद्रित किया है। एक कहानी शायद माँ-बेटे के अनकहे प्यार को दर्शाती हो, तो दूसरी दो दोस्तों के बीच उपजे मनमुटाव को। लघु कहानियों की सबसे बड़ी विशेषता उनकी तीव्रता होती है—कम शब्दों में बड़ा अर्थ समेटना—और 'रिश्ते' में यह विशेषता भली-भांति दिखाई पड़ती है। यह किताब उन छोटे-छोटे पलों पर रोशनी डालती है जिन्हें हम अक्सर अनदेखा कर देते हैं, लेकिन वे ही हमारे जीवन की बुनियाद होते हैं।

लेखन शैली

लता सुरेश की लेखन शैली सरल और हृदयस्पर्शी होने की संभावना है। रिश्तों जैसे भावुक विषय पर लिखने के लिए भाषा में सहानुभूति और स्पष्टता का होना आवश्यक है। ऐसा प्रतीत होता है कि उनकी कहानियों का ताना-बाना हमारे अपने आस-पास के लोगों और घटनाओं से बुना गया है, जिससे पाठक तुरंत कहानियों से जुड़ाव महसूस कर सकता है। लघु कहानी होने के कारण, हर अंत शायद एक प्रश्नचिह्न या एक छोटी-सी सीख छोड़ जाता है, जो पाठक को लंबे समय तक सोचने पर मजबूर करती है।

हमारा निष्कर्ष
'रिश्ते' एक ऐसा संग्रह है जो आपको भावनाओं के कई स्तरों से होकर गुज़ारता है। यह उन पाठकों के लिए एक बेहतरीन चुनाव है जो कम समय में गहन और यथार्थवादी कहानियाँ पढ़ना पसंद करते हैं। यदि आप मानवीय भावनाओं, सामाजिक ताने-बाने, और रिश्तों की नाजुक डोर को करीब से समझना चाहते हैं, तो लता सुरेश की यह किताब निश्चित रूप से आपकी पठन-सूची में होनी चाहिए।
( लेखक नगर के युवा विचारक हैं) 

URS Mubarak: Hazrat Rahim Shah Baba का उर्स कल से, उमड़ेंगे अकीदतमंद

रहीम शाह बाबा के तीन दिनी उर्स में चढ़ेगी अकीदत की चादर


Mohd Rizwan 

dil india live (Varanasi).। हजरत रहीम शाह बाबा (Hazrat Rahim shah baba) रहमतुल्लाह अलैह का तीन दिनी सालाना उर्स अकीदत और एहतराम के साथ बाबा के बेनिया स्थित आस्ताने पर कल मनाया जाएगा। उर्स के मौके पर हज़रत रहीम शाह बाबा के दर पर अकीदतमंदों का हुजूम उमड़ेगा। उर्स में अकीदतमंद जहां मन्नती चादरें पेश करेंगे वहीं बाबा के आस्ताने पर सरकारी चादर चढ़ी चढ़ाई जाएगी। इस मौके पर फातिहा पढ़ने दूर-दराज़ से अकीदतमंद पहुंचना शुरू हो गये हैं। 


कुरान की तेलावत से होगी शुरुआत 

तीन दिनी उर्स की शुरुआत शनिवार को हजरत रहीम शाह बाबा के दर पर पाक कुरान की तेलावत से होगी। जोहर की नमाज के बाद महफिल-ए-समां का आयोजन किया जाएगा। शाम को चादरपोशी और मगरिब की नमाज के बाद मीलाद शरीफ होगा। मीलाद शरीफ में बड़ी तादाद में अकीदतमंद शामिल होंगे। उर्स के मौके पर तकरीर और लंगर का भी दौर चलेगा। सुबह से शाम तक बाबा के दर पर फातिहा पढ़ने जायरीन पहुंचेंगे। आने वालों का खैरमखदम सज्जादानशीन मोहम्मद सैफ रहीमी करेंगे। उर्स को देखते हुए दरगाह को सजाया गया है, तथा आसपास भी सजावट की गई।


ऐसे ही दूसरे दिन फज्र के बाद कुरआनख्वानी, बाद नमाज असर ग़ुस्ल मजार शरीफ, बाद नमाज मगरिब सरकारी चादरपोशी होगी व मिलाद शरीफ में लोगों का हुजूम उमड़ेगा। बाद नमाज इशा लंगर व महफिले समां का आयोजन होगा। वहीं तीसरे दिन फज्र में कुरआन ख्वानी के बाद 10:30 बजे कुल शरीफ व बादहु रंग महफ़िल, लंगर  फिर बाद नमाज मगरिब महफिले समां होगा। आखिर में अमन और मिल्लत की दुआएं मांगी जाएगी।