सोमवार, 13 अक्टूबर 2025

पवित्र वेद एवं प्रतिमा में ईश्वर की उपासना

यज्ञ का महत्व न केवल लौकिक बल्कि आध्यात्मिक



Sudip chandra handra

Varanasi (dil india live). सनातन हिंदू धर्म (Hindu Religion) का परम और सर्वोच्च शास्त्र – पवित्र वेद – परमात्मा को ‘अनंत चैतन्यमय’ के रूप में वर्णित करता है। ऋषि-मुनि ध्यान के माध्यम से इस अनंत चैतन्यमय परमात्मा की शरणागति की प्रार्थना किया करते थे। वे मन के तीनों स्तर – चेतन, अवचेतन एवं अचेतन – के माध्यम से ध्यान करते हुए उस दिव्य महाचैतन्य से गहनतम संबंध स्थापित करते थे। कालांतर में यज्ञ के माध्यम से इस चैतन्यमय भगवान की शरण, स्तुति और प्रार्थना की जाती रही। यज्ञ का महत्व न केवल लौकिक बल्कि आध्यात्मिक भी रहा है। समय के साथ इन वैदिक यज्ञों ने जो रूप लिया, वही आज की पूजा-पद्धति है।

पूजा में मूर्तियों के माध्यम से, शास्त्रसम्मत विवरणों के अनुसार भगवान के रूप या प्रतीक की स्थापना की जाती है, ताकि साधक ध्यान और भक्ति से भगवान के चैतन्य से जुड़ सकें। कारण यह है कि यदि इस अनंत चैतन्य की कोई प्रत्यक्ष अभिव्यक्ति न हो, तो वह सामान्य जनमानस को शून्य या अमूर्त प्रतीत होगा।

यह स्मरणीय है कि किसी भी भक्त ने कभी पत्थर या मिट्टी की प्रतिमा से कुछ नहीं माँगा; वह तो उस प्रतिमा में प्रतिष्ठित अनंत चैतन्य से संवाद करता है। भक्ति की भावधारा से वह उस अनिर्वचनीय परमात्मा के निकट पहुँचने का प्रयास करता है – अतीत में भी, वर्तमान में भी और भविष्य में भी।

यहां एक दृष्टांत प्रासंगिक है। जैसे एक विद्युत बल्ब का कोई प्रयोजन नहीं यदि उसमें विद्युत धारा प्रवाहित न हो। किंतु विद्युत जुड़ते ही बल्ब प्रकाशित हो उठता है, यद्यपि विद्युत स्वयं अदृश्य है। इसी प्रकार मूर्ति में जब वैदिक मंत्रों द्वारा प्राण प्रतिष्ठा की जाती है, तब वह एक जीवंत प्रतीक बन जाती है – उस अनंत चैतन्यमय प्रभु की उपस्थिति से युक्त। अब कल्पना कीजिए–बिना किसी रूप या प्रतीक के उस अनंत चैतन्यमय परमात्मा का ध्यान करना। आप पाएँगे कि वह आपके मन में शून्यता उत्पन्न कर देगा। अस्तित्वहीन सा प्रतीत होगा।

इसलिए यह कहना अत्यंत समीचीन है कि सभी शास्त्रों के परम शिखर, अपौरुषेय एवं नित्य, स्वयं परमेश्वर के श्वास से प्रकट पवित्र वेदों में वर्णित निराकार परमात्मा की उपासना और मूर्ति के माध्यम से की जाने वाली उपासना में कोई विरोध नहीं है – अपितु यह दोनों परस्पर पूरक हैं।

अंत में एक कथा दृष्टांत के रूप में प्रस्तुत है। सातवीं कक्षा का एक छात्र बीजगणित का अध्ययन कर रहा था। उसने तीसरी कक्षा के कुछ विद्यार्थियों से पूछा – “बताओ, 3 - 5 कितना होता है?” तीसरी कक्षा के छात्र ठहाका मारकर हँस पड़ा। उनमें से एक ने कहा – “यह तो पागल है! छोटे अंक से बड़े अंक को घटाया जा सकता है क्या! हमारे गुरुजी ने तो यही सिखाया है कि घटाव केवल बड़े अंक से छोटे का होता है।” सातवीं कक्षा का छात्र कहता रहा – “उत्तर है -2”, पर तीसरी कक्षा के बालक और भी ज़ोर से चिल्लाए – “यह तो पागल है!” और सब एक स्वर में बोले – “सही है! सही है!” अब सोचिए – यहां दोष किसका था? न तो सातवीं कक्षा के छात्र का, और न ही तीसरी कक्षा के छात्रों का। समस्या केवल उनकी ‘ज्ञान की सीमा’ में थी। इसी प्रकार हमारे समाज में भी लोग अपने-अपने बौद्धिक स्तर और ज्ञान की सीमा के अनुरूप ही विचार और निर्णय करते हैं। हमारा सनातन धर्म, हमारी शास्त्रीय परंपरा और आध्यात्मिक विचारदृष्टि ‘पोस्ट-डॉक्टोरल’ स्तर की है। इसे सम्यक रूप से समझने के लिए सही मार्ग पर ज्ञान की साधना और प्रभु की असीम कृपा आवश्यक है।


“ॐ स नः पितेव सूनवेऽग्ने सुपायनो भव।

सचस्वा नः स्वस्तये।।”

– ऋग्वेद 1.1.9

हे अग्निदेव! जैसे पिता अपने पुत्र के प्रति सुलभ होता है, वैसे ही आप हमारे प्रति भी सहज सुलभ हों। आप हमें परस्पर कल्याण के लिए एकसूत्र में बाँधें। हमारे जीवन से त्रिविध तापों की शांति हो।

(नोट -लेखक के यह अपने विचार हैं इससे संपादक या संपादकीय टीम का सहमत होना जरूरी नहीं है)

रविवार, 12 अक्टूबर 2025

Varanasi Main नामचीन शायर Ahmad Azmi की काव्य-कृति "क़तरा-ए-शबनम" का भव्य विमोचन

शायर और कवि प्रेम और सौहार्द की रोशनी से अंधकार को चीर देते है-प्रो. गुरु चरण सिंह 

मुशायरे की पाकीज़गी को फिर से कायम करने की जरूरत-याकूब यावर



Varanasi (dil india live). वाराणसी की Ganga तट की पावन व जीवंत फिज़ाओं में, जहां सदियों से ज्ञान और साहित्य का दीप प्रज्वलित है, वहां मशहूर कवि अहमद आज़मी (Ahmad Azmi) की नवीन काव्य-कृति “क़तरा-ए-शबनम” का भव्य आयोजन पराड़कर स्मृति भवन में हुआ। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रोफेसर गुरुचरण सिंह (Pr. Gurucharan Singh) ने किया। जबकि विशिष्ट अतिथि प्रोफेसर डॉ. याकूब यावर (Dr Yaqoob Yawar) थे। शहर के समस्त मत-मतांतर और विचारधाराओं से जुड़े कवि, साहित्यकार, कलाकार, पत्रकार और विद्वान इस आयोजन में उपस्थित थे। यह सजीव संगम स्वयं यह प्रमाणित करता था कि अहमद आज़मी का सृजन और उनके मित्रमंडल कितने व्यापक और विविध हैं।



दिलों को जोड़ती है अहमद आज़मी की कविताएं 

प्रोफेसर गुरुचरण सिंह ने कहा कि, “जब राजनीति के वातावरण में वैमनस्य और कटुता की आंधियां उठती हैं, तब शायर और कवि ही वह दीपक होता है, जो प्रेम और सौहार्द की रोशनी से अंधकार को चीर देता है। अहमद आज़मी ऐसे ही दीपक हैं, जिनकी कविताएं दिलों को जोड़ती हैं, तोड़ती नहीं।”

हिंदुस्तानी संस्कृति की आत्मा से परिपूर्ण


विशिष्ट अतिथि प्रोफेसर डॉ. याकूब यावर ने अहमद आज़मी की रचनाओं को हिंदुस्तानी संस्कृति की आत्मा से परिपूर्ण बताया। इस दौरान उन्होंने कहा कि आज दुनिया में बड़ा बदलाव महसूस किया जा रहा है। लोगों को पढ़ने की बजाय देखने और सुनने की आदत ज्यादा होती जा रही है। किताबों से लोग दूर हो रहे हैं ऐसे में उर्दू अदब की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है कि ज्यादा अच्छा लिखा और पढ़ा जाए। उन्होंने कहा कि आज मुशायरे अदब से इतर हो रहे हैं ऐसे में मुशायरे की पाकीज़गी को फिर से कायम करने की जरूरत है। यह जिम्मेदारी अहमद आज़मी जैसे शायर बखूबी निभा सकते हैं। अहमद आज़मी के काव्य में एकता, सौहार्द और पारस्परिक सम्मान का ऐसा पैग़ाम है जो समाज को जोड़ता है और मानवता को सुदृढ़ करता है। उन्होंने आगे कहा कि यह कार्यक्रम केवल एक काव्य-संग्रह का विमोचन नहीं था, बल्कि प्रेम, एकता और सांस्कृतिक सामंजस्य के प्रति नवीनीकृत संकल्प की अभिव्यक्ति है। 

इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि डॉ. कमालुद्दीन शेख ने अहमद आज़मी को दिल की गहराइयों से बधाई दी और कहा कि जैसे उनकी शायरी हमेशा पाठकों और श्रोताओं के हृदय में जगह बनाती रही हैं, उसी तरह उनका यह नवीन संग्रह भी जनता में समान रूप से सराहा जाएगा।


प्रोफेसर डॉ. मोहम्मद आरिफ़ (Dr Mohmmad arif) ने कहा कि अहमद आज़मी की कविता में घर और आंगन की बातें, पुत्र और माता के अमर संबंध, समाज का दर्द, राष्ट्र और देशभक्ति की अनुभूति और समकालीन परिस्थितियों का चित्रण सब एक साथ प्रभावशाली ढंग से प्रकट होता है। यही कारण है कि आज हम इसे “क़तरा-ए-शबनम” के रूप में देख रहे हैं। 



प्रोफेसर इशरत जहां (Dr ishrat jahan) ने अहमद आज़मी की कविता की सरलता और प्रभावशाली प्रस्तुतियों की प्रशंसा करते हुए कहा कि पिछले 30–35 वर्षों से उनकी रचनाएं जनता और विद्वानों के हृदय में स्थायी स्थान बनाए हुए हैं। 

इस अवसर पर चकाचौंध ज्ञानपुरी, शंकर कैमूरी ने भी अहमद आज़मी की रचनाओं पर अपने विचार रखे। सांस्कृतिक एवं सामाजिक संगठन “क़ालिब फाउंडेशन”, मिर्ज़ापुर के अध्यक्ष डॉ. शाद मशरकी और सचिव ज़मज़म रामनगरी ने अहमद आज़मी को शाल ओढ़ाकर सम्मानित किया और उन्हें सर्जनात्मक प्रयासों के लिए बधाई दी।


रसम-ए-एजरा के अंतिम चरण में एक भव्य मुशायरे का आयोजन भी हुआ, जिसमें शहर वाराणसी और आसपास के प्रसिद्ध शायरों और कवियों ने अपना काव्य प्रस्तुत किया। प्रमुख कवियों में आबिद हाशमी, डॉ. शाद मशरीकी, ज़मज़म रामनगरी, आलम बनारसी, दमदार बनारसी, शमीम गाज़ीपुरी, समर गाज़ीपुरी, सलीम शिवालवी, निज़ाम बनारसी, अज़फर अली, डॉ. सुरेश कुमार अकेला, डॉ. नसीमा निसा और डॉ. रीना तिवारी ने अपने अशरार से लोगों को बांधे रखा।

अल मुबीन अवार्ड से किया सम्मानित 
क़तरा-ए-शबनम के प्रकाशक खान ज़ियाउद्दीन मोहम्मद क़ासिम ने उपस्थित अध्यक्षता कर रहे प्रोफेसर गुरचरण सिंह एवं मुख्य अतिथि प्रोफेसर याकूब यावर के अतिरिक्त विशिष्ट अतिथियों को अल मुबीन अवार्ड से सम्मानित किया और आश्वासन दिया कि भविष्य में भी कवियों और कलाकारों की पुस्तकों के प्रकाशन में वे इसी निष्ठा और समर्पण के साथ योगदान देंगे।

इनकी रही खास मौजूदगी 

हाफिज जमाल नोमानी, मतीन सासारामी, कार्यक्रम संयोजक ज़मज़म रामनगरी, नोमानी हसन खां, इमरान हसन खां, इस्तकबाल कुरैशी बाबू, डा. एहतेशामुल हक़, एहतेशामुलल्लाह सिद्दीकी, निज़ाम बनारसी, रेयाज अहमद, नदीम एडवोकेट, तारिक सिद्दीकी एडवोकेट आदि मौजूद थे।





All India वैश्य महिला महासम्मेलन ने मनाया Dipawali

अखिल भारतीय वैश्य महिला महासम्मेलन ने किया 'उजाले' में धमाल

 

Varanasi (dil india live). अखिल भारतीय (All India) वैश्य महिला महासम्मेलन द्वारा गुरुधाम स्थित एक होटल (hotel) में उजाले कार्यक्रम आयोजित किया। इस मौके पर महिलाओं ने जमकर धमाल किया। 
इससे पहले ममता जायसवाल, माया जायसवाल ने गणेश वंदना से कार्यक्रम का आगाज़ किया। अध्यक्ष अंजलि अग्रवाल ने आये हुए सभी सदस्यों का स्वागत करते हुए, ज्योतिपर्व दिवाली(dipawali) की अग्रिम शुभकामना दी। इस दौरान संचालन निशा अग्रवाल ने करते हुए उजाले पर विस्तार से रौशनी डाली तथा धन्यवाद सचिव सुशील जायसवाल ने किया।



VKM Varanasi Main मनोविज्ञान क्लब ने किया “व्योम” का आयोजन

VKM Varanasi Main मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता दिवस पर हुए अनेक आयोजन

  

Varanasi (dil india live). वसंत कन्या महाविद्यालय (VKM) के मनोविज्ञान विभाग (Phycology Dipartment) एवं मनोविज्ञान क्लब (Phycology Club) मनस्विनी के संयुक्त तत्वावधान में “व्योम” कार्यक्रम का आयोजन मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता दिवस के अवसर पर किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ प्राचार्या (Principal) प्रो. रचना श्रीवास्तव के प्रेरक संबोधन से हुआ। उन्होंने विद्यार्थियों को ऐसे सुंदर और सार्थक आयोजनों को निरंतर करते रहने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा कि हमें अपनी भावनाओं को साझा करते रहना चाहिए, ताकि कोई भी व्यक्ति अपने मानसिक संघर्षों से अकेले न जूझे।

मुख्य अतिथि प्रो. संजय गुप्ता, पूर्व विभागाध्यक्ष, मनोचिकित्सा विभाग, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU), ने विद्यार्थियों के साथ अपनी प्रेरणादायक यात्रा साझा की। उन्होंने मानसिक स्वास्थ्य के न्यूरोलॉजिकल आधार और स्वस्थ सामंजस्य की भूमिका पर विस्तार से चर्चा की और बताया कि लोगों को हमेशा प्रमाणित और योग्य विशेषज्ञों से ही सहायता लेनी चाहिए।

कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण ‘मनस्विनी’ मासिक पत्रिका के तृतीय संस्करण का लोकार्पण था, जिसे मुख्य अतिथि, प्राचार्या तथा विभागाध्यक्षा डॉ. शुभ्रा सिन्हा द्वारा संयुक्त रूप से अनावृत किया गया। पत्रिका का सम्पादन एवं रूपांकन मनोविज्ञान विभाग के विद्यार्थियों द्वारा अत्यंत सुंदर ढंग से किया गया था।

BLW में राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा जागरूकता माह

“साइबर जागृत भारत” थीम पर साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण  का हुआ आयोजन


F.farooqui/Santosh nagvanshi

Varanasi (dil india live). वैश्विक स्तर और भारत में हर साल अक्टूबर (October) का महीना राष्ट्रीय (National) साइबर सुरक्षा जागरूकता माह (NCSAM) के रूप में मनाया जाता है। इस वर्ष भारत सरकार के राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय (MSCS) द्वारा निर्धारित अभियान थीम-"साइबर जागृत भारत" है, जिसका उद्देश्य लोगों के बीच साइबर जागरूकता के माध्यम से देश के साइबर बुनियादी ढांचे को और अधिक सुरक्षित बनाने पर है।

रेलवे बोर्ड (Railway Board) के निर्देश एवं बरेका महाप्रबंधक, नरेश पाल सिंह के मार्गदर्शन में BLW में साइबर सुरक्षा जागरूकता माह के अंतर्गत “साइबर जागृत भारत” थीम पर  विशेष साइबर प्रशिक्षण सत्र का आयोजन किया गया।

प्रावधिक प्रशिक्षण केंद्र,बरेका के सभागार मे आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम में कर्मचारियों को साइबर सुरक्षा  के विभिन्न तकनीकी पहलुओं से अवगत कराया गया। संगणक केंद्र,बरेका के आंकड़ा संसाधन प्रबंधक, अमित सिकदर द्वारा कर्मचारियों को साइबर सुरक्षा की विस्तृत जानकारी प्रदान की गई। बरेका द्वारा आयोजित इस साइबर प्रशिक्षण का उद्देश्य साइबर सुरक्षा ढांचा को मजबूती देना तथा कर्मचारियों में साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाना एवं “साइबर जागृत भारत – सुरक्षित भारत” के लक्ष्य को साकार करना है।

शनिवार, 11 अक्टूबर 2025

UP: Varanasi Main सूचनाधिकार कानून के बीस वर्ष होने पर हुई कार्यशाला

भ्रष्टाचार उजागर करने के लिए सूचना के अधिकार का सकारात्मक प्रयोग आवश्यक: वल्लभाचार्य 

युवा वर्ग को ऑनलाइन शिकायत या सुझाव देने की आदत बनानी होगी: राजकुमार गुप्ता

छात्राओं ने सीखा सूचना के अधिकार के तहत आवेदन का तरीका 


Varanasi (dil india live). देश में सूचना का अधिकार कानून (RTI) लागू हुए बीस वर्ष (20 year) हो गये है इस उपलक्ष्य में ग्राम भंदहा कलां में सामाजिक संस्था आशा ट्रस्ट (Asha Trust) एवं सूचना का अधिकार अभियान द्वारा एक दिवसीय कार्यशाला (work shop) का आयोजन किया गया। कार्यशाला में विभिन्न समस्याओं के निराकरण और तंत्र में पारदर्शिता के लिए सूचना के अधिकार का सकारात्मक प्रयोग किये जाने पर बल दिया गया। 

इस अवसर पर सामाजिक कार्यकर्ता वल्लभाचार्य पाण्डेय ने कहा कि दो दशक में यह कानून अपने शैशवावस्था, किशोरावस्था से होते हुए युवावस्था में है अब इसे और ताकत प्रदान किये जाने की आवश्यकता है इसलिए इसमें वांछित संशोधन करके इसके अधिकार क्षेत्र को व्यापक बनाना चाहिए। किसी भी प्रकार से सरकारी सुविधा, लाभ, छूट, अनुदान प्राप्त करने वाली सभी संस्थाओं जिसमें राजनैतिक दल, सामाजिक संस्थाएं, धार्मिक संस्थाएं, औद्योगिक घराने, चिकित्सा संस्थान आदि को भी अनिवार्य रूप से सूचना के अधिकार के अंतर्गत लाया जाना चाहिए। इससे आम जनता के टैक्स के पैसे के उपयोग के प्रति पारदर्शिता आएगी।

वरिष्ठ सूचनाधिकार कार्यकर्ता राजकुमार गुप्ता ने कहा कि समाज मे व्याप्त भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिए आमजन को जागरूक होना होगा और जन अधिकारों का अधिकतम प्रयोग सकारात्मक दृष्टिकोण से करना होगा। उन्होंने कहा कि तकनीक के इस दौर में युवा वर्ग को विभिन्न पोर्टलों द्वारा ऑनलाइन शिकायत या सुझाव देने की आदत बनानी होगी । कार्यशाला में आशा लाइब्रेरी की छात्राओं ने सूचना के अधिकार के तहत आवेदन करना सीखा। कार्यशाला आयोजन में सौरभ चन्द्र, प्रदीप सिंह, साधना पाण्डेय, सरोज सिंह आदि का विशेष सहयोग रहा।

मशहूर शायर Ahmad Azmi का काव्य संकलन “क़तरा-ए-शबनम” का विमोचन कल

अहमद आज़मी : बनारस की गंगा-जमुनी आत्मा का कवि


Zamzam Ramnagari

Varanasi (dil india live). Banaras (बनारस) — यह शब्द केवल एक नगर (City) नहीं, भारतीय आत्मा का प्रतीक है। यहाँ की हवा में धर्म नहीं, दर्शन बहता है; यहाँ की गलियों में समय ठहरता नहीं, विचार बनकर गूंजता है। इस नगरी की सुबहें आरती से नहीं, गंगा की सांसों से आरंभ होती हैं। इसी सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और भाषाई प्रवाह में एक कवि अपनी आवाज़ रखता है — Ahmad Azmi (अहमद आज़मी)।

Ahmad Azmi (अहमद आज़मी) की कविता बनारस की गंगा-जमनी संस्कृति की जीवित मिसाल है। वे उस परंपरा के कवि हैं जहाँ तुलसी की करुणा, कबीर की सच्चाई और नज़ीर की लोकधर्मिता एक साथ मिलती है। उनकी कविता न हिन्दू है न मुसलमान — वह भारतीय है, मानवीय है। उसमें बनारस के घाटों की भक्ति है, साड़ियों की कारीगरी की नजाकत है, और यहाँ के सूफिज्म की वह सादगी है जो ज्ञान को अनुभव बनाती है।

उनके संग्रह “क़तरा-ए-शबनम” को यदि हम ध्यान से पढ़ें तो यह मात्र कविताओं का संकलन नहीं, बल्कि बनारस की आत्मा का आधुनिक रूपांतरण है। उनकी पंक्तियाँ गंगा की लहरों-सी बहती हैं — शांत भी, गहराई लिए हुए भी। जैसे जल में प्रतिबिंबित होती हुई संस्कृति, वैसे ही उनके शब्दों में उतरता हुआ मनुष्य का सामूहिक चेहरा।

अहमद आज़मी की कविताओं में ‘घर’ केवल एक जगह नहीं, एक अनुभव है —जहां मां की दुआ, बच्चे की हंसी और पिता की चुप्पी — सब एक भाव-संगीत में घुल जाते हैं। वे जब लिखते हैं, तो लगता है मानो शब्द नहीं, संस्कार बोल रहे हों। उनकी पंक्तियों में वह संवेदना है जो कबीर के “सांच कहो तो मारन धावै” से लेकर प्रेमचंद के “मानव धर्म” तक की परंपरा को जोड़ती है। मशहूर साहित्यकार नामवर सिंह कहा करते थे "कवि वही है जो भाषा में जीवन को पुनर्जन्म दे।" अहमद आज़मी की कविता इसी पुनर्जन्म की प्रक्रिया है। उनके शब्द केवल माध्यम नहीं, साक्षी हैं —एक ऐसे समाज के साक्षी जो विभाजन की दीवारों से थक चुका है और जो कविता में अपने लिए शरण ढूंढता है। उनकी कविता में हमें नफ़रत की ध्वनि नहीं, संवाद की गूंज सुनाई देती है। उनकी भाषा में आस्था है, लेकिन वह संप्रदाय की नहीं बल्कि उस व्यापक भारतीय चेतना की जो बुद्ध, कबीर और तुलसी से होती हुई गालिब तक पहुंचती है।

बनारस की सांस्कृतिक बुनावट में, जहां साड़ी का ताना-बाना हाथों से बनता है, वहां अहमद आज़मी शब्दों से बुनते हैं इंसानियत का कपड़ा। जिस तरह बुनकर धागों में रंग भरता है, उसी तरह यह कवि भावनाओं में अर्थ भरता है —रंगों का, रिश्तों का, और यादों का अर्थ। उनकी कविताओं में गंगा केवल नदी नहीं, एक जीवित प्रतीक है —जो सबको जोड़ती है, सबको एक करती है। गंगा उनके लिए भक्ति का नहीं, एकता का प्रतीक है; जहां हर आस्था, हर जाति, हर पहचान एक साझा मानवता में घुल जाती है।

“क़तरा-ए-शबनम” का अर्थ ही है 'वह नन्हा-सा बिंदु जो सृष्टि की व्यापकता में भी अपनी मासूमियत बचाए रखे'। अहमद आज़मी के लिए यह कविता का नहीं, मनुष्य होने का रूपक है।उनकी हर पंक्ति इस प्रश्न के साथ आती है —क्या हम अब भी उतने ही मनुष्य हैं जितने होना चाहिए? उनकी काव्य-दृष्टि में बनारस केवल पृष्ठभूमि नहीं, एक जीवित चेतना है —जहां सूफी संतों का दर्शन, कलाकारों की साधना और शब्दों की शुचिता एक साथ बहती है। वह हमें याद दिलाते हैं कि साहित्य का अर्थ केवल सौंदर्य नहीं, सत्य भी है — और जब तक सत्य जीवित है, कविता भी जीवित रहेगी। अहमद आज़मी की कविता हमें यह एहसास कराती है कि शब्दों का असली काम विभाजन नहीं, मिलन है; कविता का उद्देश्य विचार नहीं, संवेदना है; और कवि का धर्म किसी धर्म से बड़ा है मानवता का धर्म। इसलिए जब हम “क़तरा-ए-शबनम” पढ़ते हैं, तो लगता है जैसे हम बनारस की किसी संध्या में बैठे है गंगा के किनारे, आरती की लहरियों के बीच, जहां से कोई कवि कह रहा है —"हमारे बीच जो भी है, वह शब्द नहीं, आत्मा का संवाद है।अहमद आज़मी उस परंपरा के कवि हैं जो कविता को समाज की आत्मा मानते है। वे उन दुर्लभ सर्जकों में हैं जिनकी कविताएं केवल पढ़ी नहीं जातीं, महसूस की जाती हैं।

वे हमें यह याद दिलाते हैं कि भारत केवल भूगोल नहीं, भावना है। और इस भावना की गहराई में गंगा, बनारस और कविता — तीनों एक ही लय में बहते हैं।

“क़तरा-ए-शबनम” का विमोचन कल
 शायर अहमद आज़मी की ग़ज़लों और नज़्मों का बहुप्रतीक्षित संकलन “क़तरा-ए-शबनम” शीघ्र ही पाठकों के सामने आ रहा है। इस काव्य-संग्रह का विमोचन समारोह आगामी 12 अक्टूबर 2025 (रविवार) को सायं 4:00 बजे, काशी पत्रकार संघ, पराड़कर स्मृति भवन, मैदागिन में आयोजित किया जा रहा है। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रसिद्ध साहित्यकार एवं चिंतक प्रो. गुरुचरण सिंह करेंगे तथा मुख्य अतिथि प्रख्यात कवि और विद्वान प्रो. याकूब यावर होंगे।