रविवार, 1 जून 2025

बाहुबली रहे Mukhtar Ansari के बेटे Abbas ansari की विधायकी खत्म

सियासी संकट के दौर से गुज़र रहा मुख्तार का कुनबा 

सजा के बाद छुट्टी में खुला सचिवालय, विधानसभा अध्यक्ष ने अब्बास की सीट की रिक्त, चुनाव आयोग को भेजी जानकारी 

अब उमर अंसारी की सियासत में हो सकती है इंट्री, मऊ सीट पर रहेगी सभी की नज़र 

  • Sarfaraz Ahmad/Mohd Rizwan 

Lucknow (dil India live). बाहुबली विधायक रहे मुख्तार अंसारी के बेटे अब्बास अंसारी सियासी संकट के दौर से गुज़र रहे हैं। मुख्तार अंसारी की मौत के बाद भी उनके कुनबे की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही है। हेट स्पीच मामले में कोर्ट से अब्बास अंसारी को शनिवार को सजा का ऐलान हुआ था इसके बाद आज रविवार को यूपी के मऊ से सुभासपा विधायक अब्बास अंसारी की विधायकी औपचारिक तौर पर खत्म कर दी गई। इसके लिए रविवार को छुट्टी के दिन लखनऊ में सचिवालय खोला गया। यूपी विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना सचिवालय पहुंचे और उन्होंने उनकी सीट को रिक्त घोषित कर दिया है। चुनाव आयोग को इसकी सूचना भेज दी गई है। अब इस विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव पर सबकी नजर है। विकल्प के तौर पर मुख्तार कुनबा ऊपरी अदालत में तो जाएगा ही साथ ही अब्बास अंसारी के छोटे भाई उमर अंसारी की सियासी इंट्री के भी चांस बढ़ते दिखाई दे रहें हैं। हालांकि इसकी अभी कोई मजबूत पुष्टि नहीं हुई है।


हेट स्पीच में अब्बास को सजा, यह है पूरा मामला 

शनिवार को गत विधानसभा चुनाव के दौरान नफरती भाषण देने और चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन के मामले मे फैसला सुनाया गया था। उस फैसले में अदालत ने आचार संहिता के उल्लंघन के मामले में अब्बास अंसारी को दोषी करार देते हुए दो साल की सजा सुनाई। साथ ही अलग-अलग धाराओं में दर्ज मामले में दोषी पाते हुए कोर्ट ने अब्बास अंसारी पर जुर्माना भी ठोंका है। इससे पहले मऊ जिले के सीजेएम डॉ. केपी सिंह ने मामले में पक्षकारों की बहस सुनने के बाद फैसला के लिए 31 मई की तिथि नियत की थी। 

मंसूर अंसारी को भी कोर्ट ने दी सजा

इस मामले में अब्बास अंसारी के साथी अब्बास के चाचा मंसूर अंसारी को भी सजा सुनाई गई है। अब्बास अंसारी के साथ ही मंसूर अंसारी को भी धारा 120 बी भादवि के तहत 6 माह की सजा सुनाई है और एक हजार रुपये अर्थदंड लगाया है।

पूरा मामला मऊ के शहर कोतवाली क्षेत्र का है। मामले में अभियोजन के अनुसार एसआई गंगाराम बिंद की तहरीर पर शहर कोतवाली में एफआईआर दर्ज की गई थी। इसमें सदर विधायक अब्बास अंसारी और अन्य लोगों को आरोपी बनाया गया था। आरोप था कि बीते 3 मार्च 2022 को विधानसभा चुनाव के दौरान सदर विधानसभा सीट से सुभासपा के प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़ रहे अब्बास अंसारी ने हेट स्पीच दिया। नगर के पहाड़पुर मैदान में जनसभा के दौरान उन्होंने कहा था कि मऊ चुनाव के बाद हिसाब-किताब होगा। 

Hazrat Lathshahi Baba फिर आएंगे अगले बरस

लाटशाही दरबार से झोली भर कर लौटे जायरीन

लाटशाही बाबा का तीन दिवसीय उर्स अकीदत और एहतराम संग सम्पन्न 
हज़रत लाट शाही बाबा रहमतुल्लाह अलैह के दर पर जुटे जायरीन 

मोहम्मद रिजवान 

Varanasi (dil India live)। सर्किट हाउस स्थित हज़रत सैय्यद मुख्तार अली शाह शहीद उर्फ लाटशाही बाबा (रह.) का तीन दिवसीय उर्स रविवार को फजर की नमाज के साथ सम्पन्न हो गया। उर्स के दौरान बाबा के दर पर अकीदत का सैलाब उमड़ा हुआ था। शनिवार की रात से रविवार की सुबह तक जायरीन बाबा के दर पर अपनी अकीदत लुटाते दिखाई दिए। आलम यह था कि सर्किट हाउस, कचहरी के साथ ही आसपास के इलाके की सड़क पर पांव रखने भर की भी जगह नहीं थी। इससे पूर्व शाम को सूफी जाफर हसनी के उल्फत बीबी के हाता सिथत दौलतखाने से चादर-गागर का जुलूस निकला, जो कदीमी रास्ते से होता हुआ बाबा के आस्ताने पर पहुंचा। यहां बाबा की मजार पर चादरपोशी कर अकीदतमंदों ने मुल्क की सलामती व खुशहाली की दुआएं मांगी।


 तीन दिवसीय उर्स के दौरान कुरानख्वानी, फातेहा व लंगर का दौर चलता रहा। उर्स के मौके पर प्रशासनिक अधिकारियों संग बंगाल, बिहार, हरिद्वार, दिल्ली, अजमेर सहित पूर्वाचल भर से हजारों अकीदतमंदों ने बाबा के दर पर हाजिरी लगाकर दुआएं व मन्नतें मुराद मांगी। उर्स के दौरान जहां दोनों वर्गों के लोगों का हुजूम उमड़ा हुआ था वहीं उर्स को देखते हुए लगे मेले में सभी ने अस्थाई दुकानों से खरीदारी की। बच्चे झूला वह चरखी का लुत्फ उठाते दिखाई दिए। सुबह बाबा के दर पर अमन, मिल्लत और देश की खुशहाली एवं तरक्की की दुआओं संग उर्स संपन्न हो गया।

दस बजते-बजते आस्ताने के आसपास सन्नाटा पसरा गया कुछ चुनार के नानखताई, बिस्कुट वाले और कप व बर्तन वाले ही बचे थे जो सामान समेटते नज़र आएं। बाबा के दर से तमाम लोग ऐसे भी थे जो सिर्फ साल में एकाध बार ही उर्स के मौके पर आ पातें हैं उन तमाम लोगों ने फिर आने का वादा करके बाबा से विदा लिया। 


दरअसल हज़रत लाटशाही शहीद बाबा (रह.) का असली नाम सैय्यद मुख्तार अली शाह था। सूफी जाफर हसनी की मानें तो बाबा फतेहपुर के रहने वाले थे। हज़रत लाटशाही बाबा सन् 1742 में बनारस आए। आप काशी नरेश के शिवपुर परगना के शहर काजी बने। राजा चेतसिंह ने बाबा के इंसाफ और बहादुरी के चलते अपनी सल्तनत में सिपहसालार बनाया। उन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ 1782, 1784 व 1786 में राजा चेतसिंह की ओर से जंग लड़ी। जंग में अंग्रेजों ने अपनी हार मानते हुए संधि की। इसके बाद अंग्रेजों की ओर से दूसरा गवर्नर भेजा गया। 1798 में उसने धोखे से जंग छेड़ दी। इस जंग में अंग्रेजों से लोहा लेते हुए सैय्यद मुख्तार अली शाह लाटशाही बाबा राजा तेज सिंह के कुनबे को बचाते हुए खुद शहीद हो गए। राजा चेतसिंह की ओर से उन्हें लार्ड गवर्नर नियुक्त होने के कारण इनका नाम बाद में लाटशाही बाबा पड़ गया। आज बाबा को मानने वाले देश दुनिया में फैले हुए हैं। उर्स के दौरान बाबा से अकीदत रखने वाले देश के कोने कोने से कचहरी, अर्दली बाजार व पक्की बाजार पहुंचते हैं। उर्स के दौरान इन इलाकों के तक़रीबन सभी घरों में मेहमान होते हैं।

Varanasi main Bakrid को लेकर कमिश्नरेट पुलिस अलर्ट

संवेदनशील इलाकों, सोशल मीडिया पर बढ़ी निगरानी

पीस कमेटी की बैठक हुई सम्पन्न

 

Sarfaraz Ahmad 

Varanasi (dil India live)। जैतपुरा थाना क्षेत्र के अंतर्गत एक होटल में आगामी बकरीद के मद्देनजर पीस कमेटी की बैठक का आयोजन किया गया। चेतगंज के सहायक पुलिस आयुक्त गौरव कुमार की अध्यक्षता में हुई मीटिंग का मुख्य उद्देश्य त्योहार को सौहार्द्रपूर्ण वातावरण में मनाने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने को लेकर समुदाय के बीच समन्वय स्थापित करना था।

बैठक में सहायक पुलिस आयुक्त ने क्षेत्र के संभ्रांत नागरिकों, धर्मगुरुओं, समाजसेवियों और जनप्रतिनिधियों से संवाद करते हुए उनकी समस्याएं सुनीं और त्वरित समाधान का भरोसा दिलाया। उन्होंने सभी से अपील की कि शासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए बकरीद को शांतिपूर्वक और स्वच्छता के साथ मनाएं।

उन्होंने विशेष रूप से कुर्बानी के बाद जानवरों के अवशेष को खुले में फेंकने से परहेज करने और नगर निगम द्वारा लगाए गए कूड़ेदान कंटेनरों में ही डालने का आग्रह किया। खुले में कुर्बानी, खून बहाना या मांस को सार्वजनिक रूप से लेकर चलने से बचने की सलाह दी गई। साफ-सफाई को लेकर प्रशासन पूरी तरह सजग है, लेकिन नागरिक सहयोग भी जरूरी बताया गया।

यातायात व्यवस्था को लेकर भी सुझाव साझा किए गए और नागरिकों से अनुरोध किया गया कि त्योहार के दौरान सहयोग करें ताकि मार्ग अवरुद्ध न हों और आपसी व्यवस्था बनी रहे। नागरिकों ने भी पानी, बिजली, साफ-सफाई जैसे बुनियादी मुद्दों को बैठक में उठाया, जिस पर समाधान का आश्वासन दिया गया।

एसीपी ने सोशल मीडिया पर अफवाहों से सतर्क रहने की सलाह देते हुए कहा कि बिना सत्यापन के कोई भी जानकारी साझा न करें। सभी धर्मों का सम्मान करना हमारी सांस्कृतिक पहचान है और इसे बनाए रखना हम सबकी जिम्मेदारी है। बैठक में थाना जैतपुरा के चौकी प्रभारी, दारोगा, उपनिरीक्षक, कांस्टेबल सहित समाज सेवा सोसायटी के वालंटियर, स्थानीय सभासद एवं बड़ी संख्या में क्षेत्रीय संभ्रांत नागरिक उपस्थित रहे।

पीस कमेटी की बैठक में बोलते फरीद अहमद अंसारी 

लक्सा थाने में पीस कमेटी की बैठक 

थाना लक्सा में थाना प्रभारी दया राम की अध्यक्षता व वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता फरीद अहमद अंसारी के संचालन में पीस कमेटी की बैठक हुई। बैठक में इलाके के संभ्रांत नागरिकों ने शिरकत किया। वक्ताओं ने पुलिस को भरोसा दिलाया कि आपसी सहयोग और सौहार्द की जो बनारसी परम्परा और गंगा जमुनी तहज़ीब है उसे बरकरार रखा जाएगा। आगामी त्योहार शांति और भाईचारे के साथ बिना किसी नयी परम्परा को कायम किए मनाया जाएगा।


Hazrat Lathshahi Baba के उर्स में अकीदतमंदों का उमड़ा जनसैलाब

उर्स के दौरान हिंदू मुस्लिम दोनों वर्गों ने लुटाई अकीदत, चढ़ाई चादर 


Sarfaraz Ahmad 

Varanasi (dil india live). सर्किट हाउस स्थित hazrat Syed mukhtar ali shah उर्फ लाटशाही शहीद बाबा (रह.) के तीन दिवसीय उर्स में शनिवार को अकीदत का सैलाब उमड़ पड़ा। बाबा के आस्ताने पर जहां एक ओर सूफियाना कलाम गूंज रहा था, वहीं दूसरी ओर सर्किट हाउस के पीछे झूला,चरखी आदि पर बच्चों का हुजूम मस्ती करता दिखाई दिया। सैकड़ों कि तादाद में सजी अस्थाई दुकानें लोगों को अपनी ओर आकर्षित कर रही थी। उर्स में आए हुए तमाम लोगों का हुजूम फातेहा पढ़ने के बाद खरीददारी करके लौटता दिखाई दिया। उर्स के दौरान हिंदू मुस्लिम दोनों वर्गों ने बाबा के दर पर जहां अकीदत लुटाई वहीं चादर चढ़ाकर तमाम लोगों ने फातेहा पढ़ा और मन्नतें व मुराद मांगी।


उर्स में सुबह से देर रात तक जायरीन का हुजूम 

बाबा के उर्स में सुबह से देर रात तक जायरीन का हुजूम फातेहा पढ़ने और बाबा कि जियारत के लिए उमड़ा हुआ था। आलम ये था कि सर्किट हाउस, कचहरी आदि के आसपास सड़क पर पांव रखने तक की भी जगह नहीं थी। इससे पूर्व शाम को उल्फत बीबी के अहाते से चादर-गागर का जुलूस निकला, जो कदीमी रास्ते से होता हुआ बाबा के आस्ताने पर पहुंचा। यहां बाबा की मजार पर चादरपोशी कर अकीदतमंदों ने मुल्क की सलामती व खुशहाली की दुआ मांगी। सूफी मोहम्मद जाफर हसनी ने उर्स में आए हुए लोगों का खैरमकदम किया।


तीन दिवसीय उर्स के दौरान कुरानख्वानी, तकरीर व नातिया मुशायरे व लंगर का दौर समाचार लिखे जाने तक चलता रहा। उर्स के मौके पर प्रशासनिक अधिकारियों संग बंगाल, बिहार, हरिद्वार, दिल्ली, अजमेर सहित पूर्वाचल भर से हजारों अकीदतमंदों ने बाबा के दर पर हाजिरी लगाकर दुआएं मांगी। समाचार लिखे जाने तक उर्स अपने शबाब पर था।

शनिवार, 31 मई 2025

Hazrat Ibrahim की सुन्नत है ईदे कुर्बां

बक़रीद की तैयारियों में जुटे लोग, बकरा मंडी गुलज़ार 

सात जून को मनाईं जाएगी बक़रीद 

  • Sarfaraz Ahmad/ Mohd Rizwan 

varanasi (dilindialive)। देश-दुनिया में 07 jun को ईदुल अजहा यानी बकरीद का त्योहार पूरी अकीदत के साथ मनाया जाएगा। इसको लेकर तैयारियां शुरू हो गई हैं। देर रात तक बकरो और सेवईयो की खरीदारी bakharid के मुक़द्दस पर्व को देखते हुए हो रही है। बकरीद के दिन को कुर्बानी और त्याग के दिन के रूप में याद किया जाता है। इस्लामिक हिजरी कैलेंडर के मुताबिक, कुर्बानी का त्योहार बकरीद रमजान के दो महीने बाद आता हैं। इस्लाम धर्म में बकरीद तीन दिन होती है, आमतौर पर बक़रीद पर छोटे-बड़े जानवरों की कुर्बानी दी जाती है।


इस दिन जानवर को अल्लाह की राह में जहां कुर्बान कर दिया जाता हैं। वहीं काबा में ज़ायरीन हज के अरकान मुकम्मल कर रहे होते हैं। उधर बकरों की खरीद के साथ ही खोवा, सेवई, मेवा, प्याज,अदरक आदि की भी खरीदारी देर रात तक होती है, दरअसल कुर्बानी के साथ ही घरों में लज़ीज सेवईयां भी बनती है। इसकी तैयारियां ख्वातीन देर रात से ही करती हैं। शहर के बेनियाबाग, रेवड़ी तालाब, बड़ी बाजार, सरैया, कोनिया, लल्लापुरा, बजरडीहा आदि इलाकों में जानवरों की खरीदारी फरोख्त शुरू हो गई है। अभी शुरुआत है बेनियाबाग बकरा मंडी में तमाम लोग रेट लगाते, पुश्त टटोलते देखें जा रहे हैं। 

bakharid की ये कहानी ख़ास कहानी 

बकरीद पैगम्बर हजरत इब्राहिम की सुन्नत है। दरअसल खुदा ने हजरत इब्राहिम का इम्तिहान लेने के लिए ख्वाब में हुक्म दिया कि इब्राहिम अपनी सबसे अजीज चीज़ रब के लिए कुर्बानी दें। हजरत इब्राहिम के लिए सबसे अजीज उनका बेटे हजरत इस्माइल थे, जिसकी कुर्बानी के लिए वे रब की रज़ा के लिए तैयार हो गए। उन्हे कुर्बानी के लिए ले भी गये मगर ऐन कुर्बानी से पहले रब ने हजरत इस्माईल की जगह ये कहते हुए जेबाह के लिए दुम्बा भेज दिया कि वो हज़रत इब्राहिम का इम्तेहान ले रहे थे और इम्तेहान में वो पास हो गये, तभी से कुर्बानी का पर्व मनाया जाता है।


इस साल ये है तैयारी

इस साल 07 जुलाई को पूरे देश में बकरीद का पर्व मनाया जाएगा। ईदगाहों और प्रमुख मस्जिदों में ईद-उल-अजहा की विशेष नमाज का टाइम टेबल जारी हो चुका है।सुबह 6 बजे से लेकर 10.30 बजे तक ईदुल अजहा की नमाज अदा की जाएगी। दुनिया भर के मुसलमान ईद की तरह कुर्बानी पर भी गरीबों का खास ख्याल रखते हैं। कुर्बानी के सामान का तीन हिस्सा बांटकर एक हिस्सा गरीबों को दिया जाता है। दो हिस्सों में एक खुद के लिए और दूसरा हिस्सा दोस्तों और रिश्तेदारों के लिए रखा जाता है। मुसलमानों का विश्वास है कि पैगंबर हजरत इब्राहिम की कठिन परीक्षा ली गई। अल्लाह ने उनको अपने बेटे पैगम्बर हजरत इस्माइल की कुर्बानी देने को कहा जिसमें वो पास हो गये।

Ganga main डूबते युवक को NDRF ने बचाया

एनडीआरएफ कर्मियों की बहादुरी और तत्परता की लोगों ने दी मिसाल

  • Sarfaraz Ahmad 

Varanasi (dil India live). आज प्रातः काशी के मान मंदिर घाट पर स्नान कर रहे आर्यन सिंह, निवासी शिवपुर, वाराणसी, स्नान के दौरान अचानक गहरे पानी की ओर बह गए और डूबने लगे। इस घटना के दौरान घाट पर उपस्थित लोगों में हड़कंप मच गया। लोग बचाव के लिए राहत की राह देखने लगे की उसी समय गंगा नदी में नियमित जल पेट्रोलिंग कर रही 11 वीं वाहिनी, एनडीआरएफ की टीम सतर्कता और तत्परता के साथ मौके पर मौजूद थी। उप महानिरीक्षक मनोज कुमार शर्मा के नेतृत्व में 11 वीं वाहिनी, एनडीआरएफ की टीम घटना स्थल पर तैनात एनडीआरएफ के साहसी और उच्च प्रशिक्षित बचावकर्मी, जो गंगा नदी में नियमित पेट्रोलिंग कर रहे थे, ने बिना किसी विलंब के नदी में छलांग लगाई। त्वरित प्रतिक्रिया और उत्कृष्ट तकनीकी कौशल का परिचय देते हुए उन्होंने डूबते हुए युवक को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। इस दौरान वहां मौजूद तमाम लोगों ने एनडीआरएफ कर्मियों और उनकी पूरी टीम को बधाई दी और उनकी बहादुरी को सलाम किया।

Varanasi main Hazrat Laat Shahi Baba के उर्स में जुटे लोग

तीन दिवसीय उर्स के दूसरे रोज मन्नतें व मुराद मांगने उमड़ा हुजूम 

Varanasi (dil India live)। सर्किट हाउस स्थित हज़रत सैय्यद मुख्तार अली शाह शहीद उर्फ लाटशाही बाबा (रह.) का तीन दिवसीय उर्स शुक्रवार को फजर की नमाज के बाद शुरू हो गया साथ। उर्स के दौरान बाबा के दर पर अकीदत का सैलाब उमड़ा हुआ था। शनिवार की रात से रविवार की सुबह तक जायरीन बाबा के दर पर अपनी अकीदत लुटाते दिखाई देंगे। जुमेरात को शुरू हुए उर्स में जुटे को दूसरे दिन आलम यह था कि सर्किट हाउस में फातेहा, मन्नत व मुराद मांगने लोगों का हुजूम उमड़ा हुआ था। 

आज चढ़ेगी सरकारी चादर

शनिवार शाम को सूफी जाफर हसनी के उल्फत बीबी के हाता सिथत दौलतखाने से चादर-गागर का जुलूस निकलेगा, जो कदीमी रास्ते से होता हुआ बाबा के आस्ताने पर पहुंचेगा। मगरिब की नमाज़ के बाद बाबा की मजार पर चादरपोशी कर तमाम अकीदतमंद मुल्क की सलामती व खुशहाली की दुआएं मांगेंगे। तीन दिवसीय उर्स के दौरान कुरानख्वानी, फातेहा व लंगर का दौर दूसरे दिन भी चलता रहा। 

बाबा चेतसिंह के थे सिपहसालार 


सूफी जाफर की मानें तो हज़रत लाटशाही शहीद बाबा (रह.) का असली नाम सैय्यद मुख्तार अली शाह था। बाबा फतेहपुर के रहने वाले थे। हज़रत लाटशाही बाबा सन् 1742 में बनारस आए। आप काशी नरेश के शिवपुर परगना के शहर काजी बनाएं गये। राजा चेतसिंह ने बाबा के इंसाफ और बहादुरी के चलते अपनी सल्तनत में सिपहसालार बनाया। उन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ 1782, 1784 व 1786 में राजा चेतसिंह की ओर से जंग लड़ी। जंग में अंग्रेजों ने अपनी हार मानते हुए संधि की। इसके बाद अंग्रेजों की ओर से दूसरा गवर्नर भेजा गया। 1798 में उसने धोखे से जंग छेड़ दी। इस जंग में अंग्रेजों से लोहा लेते हुए सैय्यद मुख्तार अली शाह लाटशाही बाबा शहीद हो गए। राजा चेतसिंह की ओर से उन्हें लार्ड गवर्नर नियुक्त होने के कारण इनका नाम बाद में लाटशाही बाबा पड़ गया। डाक्टर हम्ज़ा की मानें तो आज बाबा को मानने वाले देश दुनिया में फैले हुए हैं। उर्स के दौरान बाबा से अकीदत रखने वाले देश के कोने कोने से कचहरी, अर्दली बाजार व पक्की बाजार पहुंचते हैं। उर्स के दौरान इन इलाकों के तक़रीबन सभी घरों में मेहमान उमड़ते हैं। बनारस के वरुणापार का कोई देश के किसी भी इलाके में रहता हो मगर उर्स के बहाने वो बनारस खींचा चला आता है।