बुधवार, 19 मार्च 2025

पूर्व प्रधानाचार्य फहीम अहमद की पत्नी सुपुर्द खाक

सुल्तान क्लब के अध्यक्ष डॉ एहतेशाम की मां को खिराजे अकीदत 

Varanasi (dil India live)। सामाजिक संस्था सुल्तान क्लब के अध्यक्ष डॉ एहतेशामुल हक की माता और नेशनल इंटर कॉलेज पीली कोठी के पूर्व प्रधानाचार्य मरहूम फहीम अहमद की शरीके हयात जरीना फहीम का 66 वर्ष की आयु में मंगलवार को निधन हो गया। इनके निधन पर शहर के कई तंजीमों ने अफसोस के साथ शोक संवेदना व्यक्त किया है।

डॉक्टर एहतेशामुल हक की माता को बुनकर कॉलोनी स्थित कब्रस्तान में मंगलवार दोपहर 2 बजे सैकड़ों लोगो के बीच सुपुर्द खाक किया गया। उनकी नमाज़ ए जनाजा मुफ्ती ए बनारस मौलाना अब्दुल बातीन नोमानी ने अदा कराई। जनाजे में पूर्वाचल के लोग बड़ी तादाद में मौजूद थे।

   उधर एक अफसोस बैठक सामाजिक संस्था सुल्तान क्लब वाराणसी के सदस्यों की रसूलपुरा स्थित कार्यालय में महबूब आलम की अध्यक्षता और जावेद अख्तर के संचालन में संपन्न हुई। अफसोस बैठक में सदस्यों ने अफसोस का इज़हार करते हुए कहा कि डॉक्टर एहतेशामुल की माता बहुत ही शरीफ और नेक खातून थीं क्षेत्र में उनको अच्छी औरतों में शुमार किया जाता रहा है। अल्लाह से दुआ की गई कि मरहूमा की मगफिरत फरमाए और परिवार को दुख सहन करने की शक्ति दे, आमीन।मरहूमा ने अपने पीछे चार पुत्र, तीन पुत्रियां सहित नाती पोतों का भरापुरा परिवार छोड़ा है।

पूर्व प्रधानाचार्य स्वर्गीय फहीम अहमद की पत्नी व डॉ एहतेशामुल हक की माता को खिराजे अकीदत पेश करने वालों में मुफ्ती-ए-बनारस मौलाना अब्दुल बातीन नोमानी, नेशनल इंटर कॉलेज के प्रबंधक हाजी मकबूल हसन, उर्दू बीटीसी टीचर्स एसोसियेशन के महामंत्री मुहम्मद जफर अंसारी, जमीअतुल अंसार के जनरल सेक्रेटरी इशरत उस्मानी, आजाद हिंद रिलीफ सोसाइटी के अध्यक्ष जुल्फिकार अली, मरियम फाउंडेशन के शाहिद अंसारी,प्रधानाचार्य मंजूर आलम खान,सुल्तान क्लब के महामंत्री एच हसन नन्हे,कोषाध्यक्ष शमीम रियाज़,शाही जामा मस्जिद ज्ञानवापी के नायब इमाम मौलाना अब्दुल आखिर नोमानी,मदरसा मनबउल उलूम खैराबाद के वरिष्ठ अध्यापक कारी वसीम अहमद,बुनकर बिरादराना तंजीम के अध्यक्ष हाफिज मोइद्दीन,पूर्व विधायक हाजी अब्दुल समद अंसारी,जमीयत उलेमा जिला बनारस के अध्यक्ष मौलाना अब्दुल्लाह नासिर, जमाते इस्लामी हिंद के जिलाध्यक्ष डॉ अकबर, अटेवा पेंशन बचाओ मंच के पूर्व जिलाध्यक्ष विनोद यादव,जिला महामंत्री बी एन यादव, एस आर जी डॉ राजीव कुमार सिंह, नेशनल इंटीग्रेटेड ग्रेटेड मेडिकल एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ आर के यादव सहित दर्जनों सामाजिक और तालीमी इदारों ने अफसोस जताया है।

मंगलवार, 18 मार्च 2025

Bishop house में गूंजी अज़ान सभी ने एक संग किया इफ्तार

बिशप हाउस में रोज़ा इफ्तार दावत 

विविधता बनारस की विशेषता-बिशप यूजीन



मोहम्मद रिजवान 

Varanasi (dil India live)। कैंटोंमेंट स्थित बिशप हाउस परिसर में अज़ान कि सदाएं बुलंद होते ही काशी के विभिन्न धर्मगुरुओं और रोजेदारों ने एक ही दस्तरखान पर रोजा इफ्तार किया। इसमें हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई समेत सभी धर्म के लोग मौजूद रहे। सभी ने काशी की गंगा-जमुनी तहजीब की इस रवायत को देखकर रमजान के मुकद्दस महीने में अल्लाह से मिल्लत व सलामती की दुआएं मांगी।

इससे पहले बिशप हाउस में सजाए गए दस्तरखान पर वाराणसी धर्मप्रान्त के बिशप ने अपने हाथों से रोजेदारों के लिए थालियां परोसी। अजान होने के बाद रोजेदारों के साथ सभी ने रोजा इफ्तार किया। रोजेदारों ने खजूर, शर्बत, जूस, खजूर, कटलेट आदि से इफ्तारी की। नमाज मौलाना बातिन ने अदा करायी। उन्होंने मुल्क हिन्दुस्तान में अमन, मिल्लत और सौहार्द की दुआएं मांगी। 

स्वागत करते हुए बिशप यूजीन जोसेफ ने कहा कि मुल्क में शांति और सौहार्द के लिए आवश्यक है कि विभिन्न धर्मों के लोग एक साथ बैठकर मुल्क में अमन चैन कायम करने के लिए दुआ करें।हमारा मुल्क विविधता को समेटे हुए है और इस खूबसूरती को बनाए रखने के लिए हम सब को कोशिश करनी चाहिए।रोजेदार की दुआ अल्लाह कुबूल करता है।बनारस गंगा जमुनी तहजीब और सभी धर्मों का केंद्र है और यहां सभी के बीच जो मेल जोल है यही इसकी खूबसूरती है। धन्यवाद ज्ञापन करते हुए फादर फिलिप डेनिस ने कहा कि भारत की खूबसूरती इसके त्योहारों में है। हम सब मिलकर होली,दिवाली,रमजान,क्रिसमस,ईद और गुरुपर्व एक साथ मनाते हैं। आयोजन में फादर थामस, फादर यान और मोहम्मद आरिफ़ की भूमिका महत्वपूर्ण रही। रोजा इफ्तार में भाई धर्मवीर सिंह, अतहर ज़माल लारी, सैयद फरमान हैदर, वरिष्ठ पत्रकार असद कमाल लारी, डॉ दयानंद, एडवोकेट अब्बास मुर्तजा फिरदौसी, गुरिंदर सिंह, मुनीजा खान, फादर्स, सिस्टर्स, ब्रदर्स सहित शहर भर के सभी धर्मों के सैकड़ों गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

Ramzan mubarak (17) आइये जानते हैं क्या है 'ताक़ रातें'

हज़ार रातों में अफज़ल है शबे कद्र की एक रात

Varanasi (dil India live)। रमज़ान महीने की इबादतों के क्या कहने। अल्लाह हो अकबर। रब का आफर केवल इसी महीने ज्यादा रहता है वो इसलिए भी की यह महीना अल्लाह का महीना है जिसके शुरू होते ही शैतान गिरफ्तार कर लिया जाता है और जन्नत के दरवाजे खुल जाते हैं जहन्नुम के दरवाजे बंद कर दिए जाते हैं। इस महीने के आखिरी अशरे के दस दिनों में पांच रातें ऐसी होती हैं जिन्हें ताक रातें कहा जाता है। ये हैं रमज़ान की 21, 23, 25, 27 व 29 वीं की शब। इममें से कोई एक शबेकद्र की रात होती है। यह रात हजार महीनों से बेहतर मानी जाती है। यही वजह है कि इन पांचों रातों में मुस्लिम मस्जिदों व घरों में अल्लाह की कसरत से इबादत करते हैं। यही वजह है कि मर्द ही नही महिलाएं और बच्चे भी घरों में रात जागकर इबादत करते दिखाई देते हैं। उलेमा कहते हैं कि रब कहता है कि तुम्हारे लिए एक महीना रमजान का है, जिसमें एक रात है जो हजार महीनों से अफजल है। उस रात का नाम शबे कद्र है। यानी यह कद्र वाली रात है कि जो शख्स इस रात से महरूम रह गया वो भलाई और खैर से दूर रह गया। जो शख्स इस रात में जागकर ईमान और सवाब की नीयत से इबादत करता है तो उसके पिछले सभी गुनाह माफ कर दिए जाते हैं। यह रात बड़ी बरकतों वाली रात होती है। इस रात को मांगी गई दुआ हर हाल में रब कुबूल करता है।

एस एम खुर्शीद
सामाजिक कार्यकर्ता 

Varanasi जेल में कैसे पहुंचता है मादक पदार्थ

कैदियों से होती है उगाही, दो अफसरों के विवाद में खुली पोल

मोहम्मद रिजवान 

Varanasi (dil India live). Varanasi जिला jail के जेल अधीक्षक और डिप्टी जेलर के बीच का विवाद नए-नए खुलासे कर रहा है। डिप्टी जेलर ने जेल अधीक्षक पर जेल में बंद बंदियों से लाखों की उगाही करने का आरोप लगाया है। वाराणसी जिला जेल से नैनी जेल ट्रांसफर की गईं मीना कनौजिया ने मीडिया से बातचीत में ये खुलासा किया। मीना कनौजिया ने आरोप लगाया कि जेल अधीक्षक उमेश सिंह बंदियों पर पहले दबाव बनाते हैं और जब वो टूट जाते हैं, तब इनको पैसा पहुंचाते हैं। वाराणसी जिला जेल में कौन सा ग़लत काम नहीं होता। गांजा, भांग, बीड़ी, सिगरेट और पान मसाला सब उपलब्ध हैं। उन्होंने बताया की ये मादक पदार्थ कैसे पहुंचते हैं। मीना ने कहा कि बंदी मेरे सामने गिड़गिड़ाते थे और मुझे इसको लेकर बेहद कष्ट होता था। यही कारण है कि मैंने इन ग़लत हरकतों का विरोध करने का फ़ैसला किया।

मीना कनौजिया के मुताबिक, जब उन्होंने इन गलत कामों का विरोध करना शुरू किया, वहीं से उमेश सिंह के निशाने पर आ गई। मुझे घर बुलाने लगे। अकेले में कमेंट करने लगे। यहां तक कि मुझे सार्वजनिक रूप से भी प्रताड़ित करने लगे। मैं अकेले इनकी प्रताड़ना का शिकार हुई हूं ऐसा भी नही है। मुझसे पहले भी एक डिप्टी जेलर रतन प्रिया के साथ भी इन्होंने ऐसा ही किया था।

मीना कनौजिया का आरोप है कि रतन प्रिया के मामले में उमेश सिंह ने मुझ पर दबाव डाला और मैंने जांच समिति के सामने दबाव में आकर उमेश सिंह के पक्ष में बयान दिया। मुझे इस बात का आज तक अफ़सोस होता है। मेरे मामले में भी उमेश सिंह यही कर रहे हैं। इसलिए इनको जब तक सस्पेंड नहीं किया जाता, इंसाफ नही हो सकता।

वाराणसी जेल में षड्यंत्र

मीना कनौजिया कहती हैं कि मेरी लड़ाई तब तक जारी रहेगी, जब तक कि उमेश सिंह को सस्पेंड कर बनारस से हटा नहीं दिया जाता। मेरे ख़िलाफ वाराणसी जिला जेल में षड्यंत्र शुरू हो गया है। बंदियों से कहलवाया जा रहा है कि मीना कनौजिया पैसे लेती थी। ऐसे में उमेश सिंह जेल अधीक्षक रहते न्याय की कल्पना भी नही कर सकती। इसको हटाया जाना इसलिए भी जरूरी है क्यूंकि उमेश सिंह साथी महिला अधिकारियों के लिए खतरा है। सीएम योगी तक मेरी पीड़ा पहुंची है और मुझे उम्मीद है कि मुझे न्याय मिलेगा।

सोमवार, 17 मार्च 2025

जागरूक जनता ट्रस्ट के होली मिलन समारोह में हुआ नागरिक अभिनन्दन


एफ. फारुकी बाबू 

Varanasi (dil India live). आज संकट मोचन समाचार पत्र व जागरूक जनता ट्रस्ट के संयुक्त तत्वावधान में मैदागिन स्थित पराड़कर भवन में होली मिलन व नागरिक अभिनन्दन कार्यक्रम का आयोजन हुआ, जहां जम कर अबीर गुलाल व गुलाब की पंखुड़ियां उड़ाया गया, कार्यक्रम की शुरुवात गणेश वंदना व शिव ध्यान स्तुति से किया गया। वक्ताओं ने होली को परिभाषित करते हुए कहा कि अनादिकाल से होली भाईचारे का संदेश देते आई है और ये काशी में विशेष हो जाती है क्योंकि शिव यहां साक्षात विराजते हैं और होली ही नहीं वरन जीवन के सारे रंग महादेव आम जन मानस पर बरसाते हैं, नागरिक अभिनन्दन सम्मान ग्रहण करने वालों में प्रमुख रूप से पत्रकार देवेन्द्र श्रीवास्तव, डॉक्टर नारायण सिंह,मनोज कुमार केशरी , सुमित कुमार शर्मा व दिनेश कुमार शर्मा थे इसके अतिरिक्त वहां उपस्थित जनो का भी सद्भावना पूर्ण सम्मान किया गया जिसके प्रमुख रूप से दशरथ सिंह, प्रदीप कुमार सिंह,मनोज कुमार वर्मा, पत्रकार मनीष श्रीवास्तव पत्रकार संजय सिंह,।पंडित राजेश शर्मा,पंडित शिवम् शर्मा,अंकित कुमार अग्रवाल संतोष कुमार वर्मा,गोपाल उपाध्याय,चंद्रशेखर बाजपेई, ममता मिश्रा, मीना पांडेय कवियत्री सुषमा सिन्हा, डॉ, उदयशंकर भगत अरविंद कुमार पाण्डेय रितेश कुमार सिंह,जयराजबहादुर सिंह आदि शामिल रहे।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि बृहस्पति देव मंदिर के महंत अजय गिरी व विशिष्ट अतिथि किशन कुमार जायसवाल व दशरथ सिंह थे। कार्यक्रम का संचालन देवेन्द्र श्रीवास्तव व अध्यक्षता संस्था के राष्ट्रीय अध्यक्ष अवधेश सिंह ने किया अंत में धन्यवाद ज्ञापन लकी वर्मा ने दिया।

Ramzan mubarak (16) हर साहिबे नेसाब मोमिन को ज़कात देना वाजिब है

आप भी जकात देने में करें जल्दी 

Varanasi (dil India live)। ज़कात देना हर साहिबे नेसाब पर वाजिब है। साहबे नेसाब वो है जिसके पास साढ़े सात तोला सोना या साढ़े बावन तोला चांदी में से कोई एक हो, या फिर बैंक, बीमा, पीएफ या घर में इतने के बराबर साल भर से रकम रखी हो तो उस पर मोमिन को ज़कात देना वाजिब है। ज़कात शरीयत में उसे कहते हैं कि अल्लाह के लिए माल के एक हिस्से को जो शरीयत ने मुकर्रर किया है मुसलमान फक़़ीर को मालिक बना दे। ज़कात की नीयत से किसी फक़़ीर को खाना खिला दिया तो ज़कात अदा न होगी, क्योंकि यह मालिक बनाना न हुआ। हां अगर खाना दे दे कि चाहे खाये या ले जाये तो अदा हो गई। यूं ही ज़कात की नियत से कपड़ा दे दिया तो अदा हो गई।

ज़कात वाजिब के लिए चंद शर्ते 
मुसलमान होना, बालिग होना, आकि़ल होना, आज़ाद होना, मालिके नेसाब होना, पूरे तौर पर मालिक होना, नेसाब का दैन से फारिग होना, नेसाब का हाजते असलिया से फारिग होना, माल का नामी होना व साल गुज़रना। आदतन दैन महर का मोतालबा नहीं होता लेहाज़ा शौहर के जिम्मे कितना दैन महर हो जब वह मालिके नेसाब है तो ज़कात वाजिब है। ज़कात देने के लिए यह जरूरत नहीं है कि फक़़ीर को कह कर दे बल्कि ज़कात की नीयत ही काफी है।

फलाह पाते हैं वो जो ज़कात अदा करते है

नबी-ए-करीम ने फरमाया जो माल बर्बाद होता है वह ज़कात न देने से बर्बाद होता है और फरमाया कि ज़कात देकर अपने मालों को मज़बूत किलों में कर लो और अपने बीमारों को इलाज सदक़ा से करो और बला नाज़िल होने पर दुआ करो। रब फरमाता है कि फलाह पाते हैं वो लोग जो ज़कात अदा करते है। जो कुछ रोज़ेदार खर्च करेंगे अल्लाह ताला उसकी जगह और दौलत देगा, अल्लाह बेहतर रोज़ी देने वाला है। आज हम और आप रोज़ी तो मांगते है रब से मगर खाने कि, इफ्तार कि खूब बर्बादी करके गुनाह भी बटौरते है, इससे हम सबको बाज़ आना चाहिए।

उन्हे दर्दनाक अज़ाब की खुशखबरी सुना दो

अल्लाह रब्बुल इज्जत फरमाता है जो लोग सोना, चांदी जमा करते हैं और उसे अल्लाह की राह में खर्च नहीं करते उन्हें दर्दनाक अज़ाब की खुशखबरी सुना दो। जिस दिन जहन्नुम की आग में वो तपाये जायेंगे और इनसे उनकी पेशानियां, करवटें और पीठें दागी जायेगी। और उनसे कहा जायेगा यह वो दौलत हैं जो तुमने अपने नफ्स के लिए जमा किया था। ऐ अल्लाह तू अपने हबीब के सदके में हम सबका रोज़ा कुबुल कर ले और हम सबको ज़कात देने की तौफीक दे..आमीन।

मौलाना शमशुद्दीन
{जामा मस्जिद कम्मू खान, डिठोरी महाल, वाराणसी}

Rozadaar 'मधुमेह' से पीड़ित है तो भी रखे रोज़ा, उठाएं लज़ीज पकवानों का लुत्फ

रमज़ान का रोज़ा रखें और मीठे को करे बाय-बाय 

  • Mohd Rizwan 

Varanasi (dil India live)। मुस्लिमों के सबसे बड़े त्योहार ईद की बुनियाद रमज़ान है। पहले रमजान आता है जिसमें पूरे महीने मोमिनीन रोज़ा रखते हैं। इन दिनों रमज़ान चल रहा है। रमज़ान मुकम्मल होने पर ईद आयेगी। जब तक ईद नहीं आती तब तक पूरा महीना रमज़ान जोश-ओ-खरोश के मनाया जाता है। लोग अपने घरों में तरह तरह के पकवान बनाते हैं और एक दूसरे के साथ मिल बांटकर दिन भर रोज़ा रखने के बाद शाम में लज़ीज पकवानों का लुत्फ उठाते हैं। काफी लोग यह सोचते है कि रमज़ान के पकवान का लुत्फ मधुमेह से पीड़ित नही ले सकते है इसलिए काफी मधुमेह पीड़ित रोज़ा रखने से भी बचते है, जबकि चिकित्सको का कहना है कि मधुमेह से पीड़ित हैं तो भी आप रोज़ा रख सकते है और लज़ीज पकवानों का लुत्फ उठा सकते है, बस आपको बचना है, मीठे से। 

रमज़ान के साथ आपकी ईद भी हंसी-खुशी बीत जाये इसके लिए हमें रमज़ान में खास ख्याल रखना पड़ेगा। खास कर ऐसे मौकों पर जब घर में लज़ीज मीठे पकवान बनते हैं तो डायबिटीज के मरीजों के लिए बड़ी दिक्कत हो जाती है। क्यों कि इन लज़ीज इफ्तारी का ज़ायका लेने से इफ्तार में वो अपने को रोक नहीं पाते, या तो कोई उन्हें खिला देता है या फिर वो खुद मीठे पकवान खा लेते है। बेहतर हो कि आप अपनी केस हिस्ट्री लेकर नज़दीकी चिकित्सक से सम्पर्क करे और उनसे उचित सलाह ले कर रोज़ा रखे, मीठे से बचते हुए लज़ीज इफ्तारी का ज़ायका ले और ईद भी मनाये है।

खुद ही अपने स्वास्थ्य का रखना पड़ेगा ध्यान 

चिकित्सक डा. एहतेशामुल हक की माने तो रमज़ान में मधुमेह के मरीज़ों को खुद ही अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखना पड़ेगा। क्योंकि अगर कोई मुश्किल आ गई तो रमज़ान का रोज़ा तो जायेगा ही साथ ही उसके ईद का भी मज़ा फीक़ा हो सकता है। इसलिए डायबिटीज़ के मरीज़ों को थोड़ा ख्याल रखने और एहतेयाद की ज़रूरत है। चिकित्सक डा. गुफरान जावेद की माने तो रोजे के दौरान शाम में इफ्तार के वक्त हर हाल में मीठे शर्बत व मीठें पकवान से परहेज़ करें तो मुश्किल टल सकती है, और ईद की खुशियां दुगनी हो सकती है।

क्या है हाइपरगिलेसेमिया ?

रोजे के दौरान मधुमेह के मरीज़ों को ग्लूकोज में अचानक गिरावट होने से हाइपोगिलेसेमिया हो सकती है इसमें मरीज को चक्कर और बेहोशी आने लगती है। हाथ-पांव ठंडे पड़ जाते हैं। रोजे के दौरान मरीज के खून में शुगर की मात्रा अधिक हो सकती है जिसे हाइपरगिलेसेमिया कहा जाता है। जिसमें मरीजों की आंखों के सामने धुंधलापन, बेहोशी, कमजोरी और थकान जैसी समस्याएं हो सकती है। ऐसी स्थिति में रोज़ा रखने से पूर्व अपने चिकित्सकों से परामर्श ज़रूर ले कि उन्हें सहरी में क्या खाना है और इफ्तार व खाने में उन्हें रात को क्या लेना है।

इन बातों को न करें नजरअंदाज

  1. -जिन फलों में मीठा अधिक हो उनका सेवन ना करें।
  2. -जितनी भूख हो उतना ही खाएं, रोजा समझकर ज्यादा ना खाएं।
  3. -मीठे चीजों को एकदम दूरी बनाएं रखें।
  4. -अपने आहार में रस भरे फल, सब्जियां, जूस और दही में चीनी का सेवन ना करें।
  5. -भोजन और सोने के बीच दो घंटे का अंतराल रखें।
  6. -सोने से पहले किसी भी कार्बोहाइड्रेट युक्त आहार का सेवन ना करें।
  7. -अधिक तले भोजन से परहेज करें, रोटी और चावल में स्टार्च होता है इसलिए इनका भोजन भी कम ही करें।