फिज़ा में शहद सी मिठास घोल रहे सुफियाना कलाम
उर्स के दूसरे रोज़ उमड़ा अकीदतमंदों का हुजूम
- Mohd Rizwan
Barabanki (dil India live). बाराबंकी में सूफी संत हज़रत वारिस अली शाह (रहमतुल्लाह अलैह) की दरगाह पर आयोजित तीन दिवसीय सालाना उर्स जिसे देवा मेला भी कहा जाता है यूं तो बुधवार से ही प्रारंभ हो गया था। इस उर्स में सूफी संत हजरत सैयद हाजी वारिस अली शाह रहमतुल्लाह के हजारों मुरीद और जायरीन हाजिरी लगाने उमड़े।
उर्स के दूसरे रोज सूफी संत हाजी सैय्यद वारिस अली शाह की दरगाह पर दूर दराज से जायरीन ने पहुंच कर मन्नतें व मुरादें मांगीं। तीन दिन के सालाना उर्स में सबसे पहला कार्तिक उर्स है। जो देवा मेले के रूप में देश-विदेश में प्रख्यात है। यह उर्स स्वयं हाजी वारिस अली शाह रहमतुल्लाह अलैह ने अपने वालिद सैयद कुर्बान अली शाह की याद में शुरू किया था। इसके बाद सफर का उर्स होता है। यह उर्स सूफी संत हाजी वारिस अली की याद में आयोजित होता है। चार दिवसीय इस उर्स में भी देश-विदेश के काफी जायरीन सूफी संत की दरगाह पर अपनी हाजिरी लगाते हैं। इसमें इस्लामी माह की पहली सफर को हाजी वारिस अली शाह का कुलशरीफ होगा। इसके बाद आयोजित होने वाला चैत्र उर्स मूलत: बाबा के एहरामपोश फुकरा द्वारा आयोजित किया जाता है।
इस उर्स में देश-विदेश में फैले बाबा के एहरामपोश मुरीद अपने पीर को अकीदत पेश करने आते हैं। देश भर में फैले बाबा के मुरीद वारसी संस्कृति के इस मरकज पर मौजूद रहकर अपने पीर को खिराजे अकीदत पेश करते हैं। सफर उर्स इस बार 23 जुलाई एवं इस्लामी तिथि 27 मुहर्रम से प्रारंभ होकर एक सफर की तिथि अंग्रेजी तारीख 26 जुलाई तक चलेगा। समाचार लिखे जाने तक हज़रत का उर्स जारी था। आपकी दरगाह पर गूंज रहा सुफियाना कलाम फिजा में शहद सी मिठास घोल रहे थे।
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