शनिवार, 5 जुलाई 2025

मातमी धुन के साथ निकाले जाएंगे ताज़िए

कर्बला की शहादत इंसाफ़ और सच्चाई की मिसाल: सलीना शेरी

के डी अब्बासी 

Jaipur (dil india live). Rajasthan के Kota शहर में माहे मोहर्रम के मौके पर हज़रत इमाम हुसैन रज़ियल्लाहु अन्हु की शहादत की याद में मातमी जुलूसों का आयोजन किया जाएगा। जानकारी के अनुसार किशोरपुरा, साजी देहड़ा, चंबल गार्डन, आधारशिला और घंटाघर क्षेत्र में पारंपरिक ढंग से मातमी धुनों के साथ ताज़िए निकाले जाएंगे। स्थानीय पार्षद सलीना शेरी ने बताया कि मोहर्रम इस्लामिक वर्ष का पहला महीना है और यह महीना सब्र, बलिदान और इंसानियत की याद दिलाता है। "यह सिर्फ शोक नहीं बल्कि एक पैग़ाम है – ज़ुल्म के ख़िलाफ़ आवाज़ बुलंद करने का", 

 पार्षद सलीना शेरी ने मोहर्रम के अवसर पर कहा कि हज़रत इमाम हुसैन रज़ियल्लाहु अन्हु की शहादत हमें इंसाफ़, सच्चाई और ज़ालिम के खिलाफ़ खड़े होने का सबक देती है। मोहर्रम कोई त्योहार नहीं, बल्कि ग़म, सब्र और कुर्बानी का महीना है।

उन्होंने कहा कि ताज़िए निकालना सिर्फ़ एक रस्म नहीं, बल्कि कर्बला की याद को ज़िंदा रखने और हुसैनी सोच को आगे बढ़ाने का प्रतीक है। इमाम हुसैन ने अपनी शहादत देकर दुनिया को यह पैग़ाम दिया कि ज़ुल्म के आगे झुकना नहीं है, और हक़ के लिए जान भी कुर्बान करनी पड़े तो पीछे नहीं हटना चाहिए।पार्षद सलीना शेरी ने बताया कि ताज़िए, मातम और मजलिसें उस ऐतिहासिक संघर्ष की याद हैं, जहाँ 72 जानिसारों ने कर्बला में प्यासे शहीद होकर इस्लामी मूल्यों की हिफ़ाज़त की। उन्होंने नौजवानों से अपील की कि वे इमाम हुसैन की मिसाल से प्रेरणा लेकर अपने समाज में इंसाफ़, अमन और भाईचारे को बढ़ावा दें।


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