गुरुवार, 12 मार्च 2026

Ramadan ka Paigham 22 : ताक रात यानी इबादत होगी खास

ऐ अल्लाह रमज़ान के सदके में दुनिया और आखिरत संवार दे... 



सरफराज अहमद 

Varanasi (dil India live)। ऐ अल्लाह रमज़ान के सदके में दुनिया और आखिरत संवार दे, तू रहीम है तू करीम है मेरे मौला हम सबके हालात सुधार दे, दुनिया के तमाम लोगों की जो भी परेशानियां है उसे दूर कर दे...आमीन। 

आज शबे कद्र है, इस रात कुछ ऐसी ही सदाएं रोज़ादार और इबादतगुजार घरों मस्जिदों में बुलंद करेंगे। ताक रात में आज पूरी रात इबादत होगी, रोज़ेदार पूरी रात जागकर इबादत में मशगूल रहेंगे। दरअसल माहे रमजान के आखिरी दस दिनों की पांच रातों में से कोई एक शबे कद्र होती है। इस शब में लोग जागकर रब की इबादत करते हैं। इस्लाम में इस रात को हजार रातों से अफजल बताया गया है। इसलिए रोजेदार ही नहीं बल्कि हर कोई इस रात में इबादत कर अल्लाह से खुसूसी दुआ मांगता है। नफिल नमाजों की खूब कसरत होगी।‌

दरअसल रमज़ान महीने के आखिरी अशरे के दस दिनों में पांच रातें ऐसी होती हैं जिन्हें ताक रातें कहा जाता है। ये हैं रमज़ान की 21, 23, 25, 27, 29 की शब। इन पांच रातों में से कोई एक शबेकद्र होती है। यह रात हजार महीनों की इबादत से बेहतर मानी जाती है। इस रात में मुस्लिम मस्जिदों व घरों में अल्लाह की कसरत से इबादत करते हैं। इसमें महिलाएं और बच्चे भी घरों में इबादत करते दिखाई देते हैं। मौलाना निज़ामुददीन चतुर्वेदी कहते हैं कि कुरान में बताया गया है कि तुम्हारे लिए एक महीना रमजान का है, जिसमें एक रात है जो हजार महीनों से अफजल है। कहा कि जो शख्स इस रात से महरूम रह गया वो भलाई और खैर से दूर रह गया। जो शख्स इस रात में जागकर ईमान और सवाब की नीयत से इबादत करता है तो उसके पिछले सभी गुनाह माफ कर दिए जाते हैं। हाफिज तहसीन रज़ा कहते हैं कि शबे कद्र की रात बड़ी बरकतों वाली होती है। यह रात बड़ी ही चमकदार होती है व सुबह सूरज बिना किरणों के ही निकलता है। इस रात को मांगी गई दुआ हर हाल में कुबूल होती है।

यूं तो रमज़ान महीने को तीन अशरों में बांटा गया है। पहले अशरा रहमत, दूसरे को मगफिरत व तीसरे अशरे को जहन्नुम से आजादी का अशरा कहा जाता है। प्रत्येक अशरा दस दिन का होता है। आज 22 रोज़ा पूरा होने के साथ ही 23 वें रोज़े की शब लग गई। सहरी से पहले तक तमाम इबादत गुज़ार जागकर रब को राज़ी करने के लिए दुआएं मांगेंगे और खूब इबादत करेंगे। या अल्लाह रब्बुल इज्जत हम सबको ज्यादा से ज्यादा इबादत करने की तौफीक दे... आमीन।


NSS camp: दूसरा दिन रहा Handicraft Skill के नाम

शिविर में प्रशिक्षुओं को विभिन्न परम्परागत कलाओं का दिया प्रशिक्षण 





dil india live (Varanasi). कंपोजिट विद्यालय, छित्तूपुर खास, बीएचयू, वाराणसी में वसंत कन्या महाविद्यालय, कमच्छा की राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) इकाई: 014A द्वारा आयोजित सात दिवसीय विशेष एनएसएस शिविर का दूसरा दिवस सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। शिविर का आयोजन डॉ. शशि प्रभा कश्यप के मार्गदर्शन में किया गया। शिविर की थीम “युवाओं में कौशल विकास” थी, जिसके अंतर्गत शिविर के दूसरे दिन “हस्तकला कौशल” (Handicraft Skill) पर विशेष प्रशिक्षण सत्र आयोजित किया गया। इस सत्र का उद्देश्य युवाओं में रचनात्मकता, आत्मनिर्भरता और स्वरोजगार की संभावनाओं को विकसित करना था।

हस्तकला कौशल सत्र की अतिथि आर्ट एवं क्राफ्ट प्रोफेशनल, पिडिलाइट इंडस्ट्रीज प्रशिक्षक  नीतू घोषाल ने स्वयंसेवकों को विभिन्न हस्तकला तकनीकों, जैसे टाई एंड डाई की अलग-अलग तकनीकें, दाबू पेंटिंग, ब्लॉक पेंटिंग तथा सूरज की किरणों तथा अलग अलग पत्तों से रचनात्मक कलात्मक गतिविधियों का स्वयंसेविकाओं को व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया।

उन्होंने बताया कि भारत कई रीजनल स्टाइल के लिए मशहूर है, जिनमें से हर एक के लिए खास सब-स्किल्स की ज़रूरत होती है:

बांधनी (गुजरात/राजस्थान) कपड़े के बहुत छोटे पॉइंट्स को तोड़कर और बांधकर छोटे, मुश्किल डॉटेड पैटर्न बनाना। 
लेहरिया (राजस्थान) एक टेक्निक जिससे तिरछी, लहर जैसी धारियां बनती हैं जो आमतौर पर पगड़ी और साड़ियों के लिए इस्तेमाल होती हैं। 
इकत (ओडिशा/तेलंगाना/गुजरात) एक मुश्किल प्रोसेस जिसमें कपड़े में बुनने से पहले धागे को टाई-डाई किया जाता है। 
सुंगड़ी (तमिलनाडु) इसकी खासियत चमकीले बैकग्राउंड पर छोटे डॉट्स होते हैं, जिनमें अक्सर मेटैलिक बॉर्डर होते हैं।

लंच ब्रेक के बाद दूसरा सत्र दोपहर 2:00 बजे शुरू हुआ। इसमें घोषाल ने बताया कि टाई एंड डाई को एक ज़रूरी हैंडीक्राफ्ट स्किल माना जाता है जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सपोर्ट करता है और सांस्कृतिक विरासत को बचाकर रखता है। यह एक पॉपुलर क्रिएटिव छोटा बिज़नेस आइडिया है क्योंकि इसमें कम शुरुआती इन्वेस्टमेंट की ज़रूरत होती है और घरेलू और इंटरनेशनल दोनों तरह के फैशन में इसकी बहुत ज़्यादा डिमांड है।

उन्होंने बताया कि ये  हस्तकला कौशल युवाओं के लिए स्वरोजगार और रोजगार के अनेक अवसर प्रदान करता है। इस क्षेत्र में युवा हैंडमेड उत्पादों का निर्माण कर ऑनलाइन प्लेटफॉर्म, प्रदर्शनियों, स्थानीय बाजारों और स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से अपनी आय का स्रोत विकसित कर सकते हैं। उन्होंने युवाओं को अपनी रचनात्मकता को व्यवसायिक रूप में विकसित करने के लिए प्रेरित किया।

इस अवसर पर डॉ. शशि प्रभा कश्यप ने स्वयंसेवकों को संबोधित करते हुए कहा कि ऐसे कौशल युवाओं को आत्मनिर्भर बनने और उद्यमिता की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते हैं। उन्होंने स्वयंसेवकों से आग्रह किया कि वे इस प्रकार के कौशलों को सीखकर समाज में भी जागरूकता फैलाएँ तथा उसके बाद डॉ. कश्यप ने अतिथि प्रशिक्षक श्रीमती घोषाल को धन्यवाद ज्ञापित किया।

कार्यक्रम में 50 एनएसएस स्वयंसेवकों ने उत्साहपूर्वक प्रशिक्षण में भाग लिया और विभिन्न हस्तकला गतिविधियों में अपनी रचनात्मक प्रतिभा का प्रदर्शन किया। यह सत्र अत्यंत प्रेरणादायक एवं ज्ञानवर्धक रहा तथा सात दिवसीय विशेष एनएसएस शिविर की गतिविधियों को सफलतापूर्वक आगे बढ़ाने में सहायक सिद्ध हुआ। शिविर का समापन राष्ट्रगान के साथ किया गया।

Education: Varanasi k DAV PG College में एलुमनी मीट गुरुवार को

जुटेंगे पुरनिया तो खूब लगेंगे ठहाके, पुरानी यादें होंगी ताज़ा 


dil india live (Varanasi). वाराणसी के डीएवी पीजी कॉलेज में आइक्यूएसी के तत्वावधान में गुरुवार को एलुमनी मीट (पुरा छात्र सम्मेलन) का आयोजन किया जाएगा। कार्यक्रम में देशभर से डीएवी के 200 से ज्यादा पुरा छात्रों को आमंत्रित किया गया है। इस आयोजन में जब जुटेंगे पुरनिया तो खूब ठहाके लगेंगे साथ ही पुरानी यादें भी ताज़ा होंगी।

महाविद्यालय के कार्यवाहक प्राचार्य प्रो. मिश्रीलाल ने बताया कि सम्मेलन का आयोजन सायं 4 बजे से कॉलेज के स्व. पीएन सिंह यादव स्मृति सभागार में होगा। जिसमें अतिथि के रूप में चिंतामणि गणेश मंदिर के महंत सीवी सुब्बाराव, लखनऊ विश्वविद्यालय के अर्थशास्त्र विभाग के पूर्व डीन प्रो.आईडी गुप्ता, खेदनलाल इण्टर कॉलेज के प्रबंधक, समाजसेवी एवं उद्यमी विजय कुमार जायसवाल एवं राष्ट्रपति पदक से सम्मानित प्रवक्ता रामलाल यादव शामिल होंगे। कार्यक्रम संयोजक प्रो. विजयनाथ दुबे ने बताया कि सम्मेलन में कॉलेज के छात्र छात्राओं द्वारा विविध सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया जाएगा। इसके अलावा पुरा छात्रों को सम्मानित किया जाएगा।

बुधवार, 11 मार्च 2026

BLW Varanasi के दौरे पर पहुंचे चितरंजन लोकोमोटिव वर्क्स के महाप्रबंधक मोहित चंद्रा

रेलवे बोर्ड के पंकज शर्मा ने भी किया निरीक्षण




F. Farouqi Babu 

dil india live (Varanasi). बनारस रेल इंजन कारखाना (बरेका) में आज दिनांक 11 मार्च 2026 को चितरंजन लोकोमोटिव वर्क्स (CLW) के महाप्रबंधक मोहित चंद्रा तथा रेलवे बोर्ड के पीईडी/ईई/डेवलपमेंट पंकज शर्मा ने दौरा किया। इस अवसर पर बरेका के महाप्रबंधक आशुतोष पंत के नेतृत्व में वरिष्ठ अधिकारियों ने उनका स्वागत किया।

अपने दौरे के दौरान दोनों वरिष्ठ अधिकारियों ने बरेका की उत्पादन क्षमता और तकनीकी उत्कृष्टता का प्रत्यक्ष अवलोकन करते हुए कर्मशाला का विस्तृत निरीक्षण किया। उन्होंने लोको फ्रेम शॉप, लोको असेंबली शॉप तथा लोको टेस्ट शॉप सहित विभिन्न उत्पादन इकाइयों का भ्रमण किया और लोकोमोटिव निर्माण की आधुनिक प्रक्रियाओं, गुणवत्ता नियंत्रण प्रणाली तथा कर्मचारियों की दक्षता को करीब से देखा। निरीक्षण के दौरान उन्होंने कर्मचारियों की कार्यकुशलता और समर्पण की सराहना की।

कर्मशाला भ्रमण के उपरांत प्रशासन भवन स्थित महाप्रबंधक कॉन्फ्रेंस हॉल में महाप्रबंधक आशुतोष पंत की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की गई। बैठक में लोको के  अत्याधुनिक तकनीकी नवाचार, उत्पादन क्षमता में वृद्धि तथा गुणवत्ता को और अधिक सुदृढ़ बनाने से संबंधित विभिन्न पहलुओं पर विस्तृत चर्चा की गई। इस दौरान बरेका के वरिष्ठ अधिकारियों ने उत्पादन प्रणाली के आधुनिकीकरण और तकनीकी उन्नयन से जुड़े महत्वपूर्ण जानकारी आपस में साझा की। इस अवसर पर महाप्रबंधक आशुतोष पंत ने पर्यावरण संरक्षण और हरित पहल को बढ़ावा देने के प्रतीक के रूप में मोहित चंद्रा एवं श्री पंकज शर्मा को पौधा भेंट कर सम्मानित किया।

बैठक में प्रमुख मुख्य विद्युत इंजीनियर सुशील कुमार श्रीवास्तव, प्रमुख मुख्य यांत्रिक इंजीनियर विवेकशील, प्रमुख मुख्य सामग्री प्रबंधक आलोक अग्रवाल, प्रधान वित्त सलाहका मुक्तेश मित्तल, प्रमुख मुख्य इंजीनियर शैलेंद्र कुमार सिंह, महानिरीक्षक सह प्रधान मुख्य सुरक्षा आयुक्त देवराज कुमार मौर्य, प्रमुख मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. देवेश कुमार  सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। इस दौरे को भारतीय रेलवे की उत्पादन इकाइयों के बीच तकनीकी सहयोग, नवाचार और गुणवत्ता उन्नयन को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

Bishop house Main में जुटे रोजेदार, हुआ इफ्तार

वसुधैव कुटुंबकम् की हमारी परंपरा हमें दुनिया से अलग पहचान देती है-बिशप यूजीन



Varanasi (dil India live)। कैंटोंमेंट स्थित बिशप हाउस परिसर में जैसे ही अज़ान कि सदाएं, अल्लाह हो अकबर, अल्लाह...। फिज़ा में बुलंद हुई तमाम रोजेदारों ने एक ही दस्तरखान पर रोजा इफ्तार किया। इसमें हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई समेत सभी धर्म के लोग मौजूद थे। सभी ने काशी की गंगा-जमुनी तहजीब की इस रवायत को देखकर रमजान के मुकद्दस महीने में अल्लाह से मिल्लत व सलामती की दुआएं मांगी। बिशप हाउस में सजाए गए दस्तरखान पर ईसाई धर्मगुरुओं ने अपने हाथों से रोजेदारों के लिए थालियां परोसी। अजान होने के बाद रोजेदारों के साथ सभी ने खजूर, शर्बत, जूस, कटलेट आदि तमाम लज़ीज़ इफ्तारी का लुत्फ उठाया। नमाज मौलाना अब्दूल आखिर नोमानी ने अदा कराई। उन्होंने मुल्क हिन्दुस्तान में अमन, मिल्लत और सौहार्द की दुआएं मांगी। स्वागत फादर फिलिप डेनिस ने और शुक्रिया फादर थामस मैथ्यू ने किया। 

बिशप हाउस में इफ्तार पार्टी में शामिल रोजेदार 

भारत मिली जुली तहजीब का मुल्क

इस मौके पर "मेजबान धर्माचार्य बिशप यूजीन जोसेफ ने कहा कि भारत मिली जुली तहजीब का मुल्क है जहां सभी धर्मावलंबी आपस में प्रेम मुहब्बत और भाईचारे के साथ रहते हैं। हमें अपनी इस संस्कृति को बचाए रखना है। यही वसुधैव कुटुंबकम् की हमारी परंपरा हमें पूरी दुनिया से अलग पहचान देती है। यहां के व्रत त्योहार सबको समाहित करने की अपनी संस्कृति के कारण सदैव एकता का संदेश देते रहे हैं। इस आयोजन का उद्देश्य भी परस्पर सामाजिक सद्भावना को बनाए रखना है। 


इनकी रही खास मौजूदगी 

अतहर जमाल लारी, बुनकर बिरादराना तंजीम बारहों के सरदार मकबूल हसन, सपा नेता सैयद नईम, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता फसाहत हुसैन बाबू, फिरोज खान मुन्ना, हाजी नासिर जमाल, मन्नू अंसारी, हाजी वकास अंसारी, बसपा नेता मोहम्मद शाहिद खान, इतिहासकार डॉ. मो. आरिफ, सेंट मैरीज महागिरजा के पल्ली पुरोहित फादर जान अब्राहम, सेंट मैरीज कांवेंट स्कूल कैंटोनमेंट की प्रिंसिपल सिस्टर जमीला, फादर जोसेफ परेरा, फादर थामस, फादर सुनील, मो. अमीनुद्दीन, फादर कास्पर, वरिष्ठ पत्रकार एके लारी, नुरुल हसन खां, वरिष्ठ अधिवक्ता महफूज आलम एडवोकेट, अशफाक सिद्दीकी, राजीव पांडेय, डाक्टर हम्ज़ा, अब्दुल हकीम, मोहम्मद ज़ैद अख्तर सिद्दीकी, अमन, इशरत उस्मानी, सैयद सलमान हैदर, ज़ुबैर आदिल, शमीम अंसारी, मो. इस्माइल रज़ा समेत सैकड़ों लोग मौजूद थे।







Ramadan ka Paigham 21: रमज़ान में दिखावे से दूर रहकर हो रही खिदमत

दावते इस्लामी इंडिया बांट रहा जरुरतमंदों में रमज़ान राशन किट



मोहम्मद रिजवान 

dil india live Varanasi (Varanasi). वाराणसी में दावतें इस्लामी इंडिया रमज़ान के मुक़द्दस महीने में जरुरतमंदों की मदद गुपचुप तरीके से करने के लिए आगे आया है। दावतें इस्लामी इंडिया फ्रंटल संगठन मानव सेवा विभाग का गरीब नवाज रिलीफ़ फाउंडेशन द्वारा गरीब, जरुरतमंदों की पहचान करके उन्हें उनके घर पर रमज़ान राशन किट पहुंचाई जा रही है।

संस्था के प्रवक्ता डाक्टर मोहम्मद साजिद अत्तारी ने बताया कि हम लोगों के यहां किट लेने वालों की पहचान गुप्त रखी जाती है यहां तक कि सामने से फोटो तक लेना मना है। कहा जाता है कि मदद में किसी की इज्जत उछालना ठीक नहीं है। इसलिए रमज़ान किट बांटी जा रही है साथ ही जो बीमार हैं उन्हें दवा व इलाज के लिए भी मदद किया जा रहा है।


Ramadan ka Paigham 20: शब-ए-कद्र पर सहर तक हुई इबादत

हज़ार रातों में अफज़ल है शबे कद्र की एक रात



Varanasi (dil India live)। शब-ए-कद्र पर रोज़ादारों ने पूरी रात जागकर इबादत की, इसके बाद सहरी किया और फजर की नमाज अदा करके तीसरे अशरे का पहला रोजा रखा। इस मौके पर तसबीर, कुरान की तेलावत और नफिल नमाजों की कसरत की गई।

शब-ए-कद्र की अहमियत

 रमज़ान महीने की इबादतों में शब-ए-कद्र की अहमियत बहुत ज्यादा है। इसे इस तरह भी समझा जा सकता है कि रब फरमाता है कि रमज़ान के मुक़द्दस महीने के आखिरी अशरे के दस दिनों में पांच रातें ऐसी होती हैं जिन्हें शब-ए-कद्र या ताक रातें कहा जाता है। ये हैं रमज़ान की 21, 23, 25, 27 व 29 वीं की शब। इममें से कोई एक शब-ए-कद्र की रात होती है। यह रात हजार महीनों से बेहतर मानी जाती है। यही वजह है कि इन पांचों रातों में मुस्लिम मस्जिदों व घरों में अल्लाह की कसरत से इबादत करते हैं। यही वजह है कि मर्द ही नही महिलाएं और बच्चे भी घरों में रात जागकर इबादत करते दिखाई देते हैं। उलेमा कहते हैं कि रब कहता है कि तुम्हारे लिए एक महीना रमजान का है, जिसमें एक रात है जो हजार महीनों से अफजल है। उस रात का नाम शबे कद्र है। यानी यह कद्र वाली रात है कि जो शख्स इस रात से महरूम रह गया वो भलाई और खैर से दूर रह गया। जो शख्स इस रात में जागकर ईमान और सवाब की नीयत से इबादत करता है तो उसके पिछले सभी गुनाह माफ कर दिए जाते हैं। यह रात बड़ी बरकतों वाली रात होती है। इस रात को मांगी गई दुआ हर हाल में रब कुबूल करता है। दरअसल रब का आफर केवल रमज़ान महीने में ज्यादा रहता है वो इसलिए भी की यह महीना अल्लाह का महीना है जिसके शुरू होते ही शैतान गिरफ्तार कर लिया जाता है और जन्नत के दरवाजे खोल दिए जाते हैं, जहन्नुम के दरवाजे बंद कर दिए जाते हैं। या अल्लाह रब्बुल इज्ज़त तू अपने हबीब के सदके में हम सबको रमज़ान की इबादतों और नेमतों से मालामाल कर और हमारी नेक दुआएं कुबुल कर ले... आमीन।

मौलाना अमरुलहोदा
( प्रमुख मुस्लिम उलेमा, मिल्कीपुर)