शुक्रवार, 20 फ़रवरी 2026

Ramadan ka Paigham 2: तीन अशरों में देखिए 'माहे रमज़ान' की नेमतें

रब को याद करने, दुनिया को भुलाने का नाम रमज़ान




dil india live (Varanasi)। हिजरी साल के 12 महीने में रमजान 9 वां महीना है। यह महीना मुसलमानों के लिए इसलिए भी ख़ास है। क्यों कि इस महीने को रब ने अपना महीना कहा है। इस माह को संयम और समर्पण का महीना कहा जाता है।इस्लाम के मुताबिक रमज़ान को तीन हिस्सों में बांटा गया है। पहला 10 दिन का अशरा रहमत का होता है इसमें रोज़ा नमाज़ इबादत करने वाले बन्दों पर अल्लाह अपनी रहमत अता करता है। दूसरा अशरा मगफिरत का होता है इसमें बन्दे कि गुनाहों को रब माफ कर देता है। रमज़ान में रब से माफ़ी मांगने, तोबा करने कि तमाम लोग खूब कसरत करते है, तो अल्लाह उसे जल्दी माफ़ कर देता है। तीसरा अशरा जहन्नुम से आज़ादी का है, यानी जिसने रमज़ान का 30 रोज़ा मुक्म्मल किया रब उसे जहन्नुम से आज़ाद कर देता है। इसलिए सभी मोमिनीन को रमज़ान को मुक्म्मल इबादत में गुज़ारना चाहिए।

माहे रमज़ान में अल्लाह का हर नेक बंदा रूह को पाक करने के साथ अपनी दुनियावी हर हरकत को पूरी तत्परता के साथ वश में रखते हुए केवल अल्लाह की इबादत में ही समर्पित हो जाता है। रमजान में खुदा की इबादत बहुत असरदार होती है। इसमें सुुुुबह सहर से शाम मगरिब कि अज़ान होने तक रोज़ेदार खानपान सहित सभी ख्वाहिशाते दुनिया को भुला कर खुद पर न सिर्फ संयम रखता है, बल्कि तमाम बुराईयो से माफी-तलाफी भी करता है इसे अरबी में सोंम कहा जाता है।

यूं तो रब की इबादत जितनी भी कि जाये कम है मगर रमजान में खुदा की इबादत मोमिनीन और तेज़ कर देता है, क्यो कि रमज़ान के दिनों में इबादत का खास महत्व है। यही वजह है कि इस माहे मुबारक में रोज़ेदार जकात देता है, जकात का अपना महत्व है, जकात अपनी कमाई में से ढाई प्रतिशत गरीबों में बांटने को कहते है,  जकात ‌देने से खुदा बन्दे ‌के कारोबार और माल में बरकत के साथ ही उसकी हिफाज़त भी करता है, इस्लाम में नमाज़, रोज़ा, हज समेत पांच फराईज़ है। माहे रमज़ान न सिर्फ रहमतों, बरकतो की बारिश का महीना हैं, बल्कि समूचे मानव जाति को इंसानियत, भाईचारा, प्रेम, मोहब्बत और अमन-चैन का भी पैगाम देता है। नमाज़ के बाद रमज़ान मुसलमानों के लिए सबसे महत्वपूर्ण है। ऐ पाक परवरदिगार तमाम आलम के लोगों को रमज़ान की नेकियों से माला माल कर दे...आमीन।

      हाफ़िज़ अहमद आज़मी
(मशहूर शायर व पूर्व मदरसा शिक्षक)

NSS camp Main जुटी वसंत कन्या महाविद्यालय की छात्राएं

आर्ट एक्सपर्ट ने सिखाया बंधनी कला की तकनीक 




dil india live (Varanasi). शुक्रवार को "वसंत कन्या महाविद्यालय" की 'राष्ट्रीय सेवा योजना', इकाई - 5 के सप्त दिवसीय विशेष शिविर का आयोजन कार्यक्रम अधिकारी 'डॉ० वर्षा सिंह' के निर्देशन में 'कम्पोजिट विद्यालय' सुन्दरपुर, नगर क्षेत्र - वाराणसी में किया गया।शिविर के पांचवें दिन मालवीय जी की मूर्ति पर माल्यार्पण, शिविर स्थल की स्वच्छता, लक्ष्य गीत के साथ योग, प्राणायाम किया गया। 

स्वरोजगार केन्द्रीत हस्तकलाओं को ध्यान में रखकर कार्यक्रम अधिकारी डॉ. वर्षा सिंह और पिडीलाइट से आर्ट एक्सपर्ट पूजा सेठ ने स्वयंसेविकाओं को 'बांधनी हस्तकला' पद्धति के माध्यम से विभिन्न प्रकार के वस्त्रों के रंगने की कला सिखाई। इसके अन्तर्गत रुमाल, दुपट्टे, टी-शर्ट, कुर्ते आदि विभिन्न प्रकार के वस्त्रों को बांधनी विधि से रंग कर तैयार किया गया। भोजनोपरान्त स्वयंसेविकाओं द्वारा विद्यालय परिसर में 'वृक्षारोपण' का कार्य किया गया। 



इस अवसर पर कार्यक्रम अधिकारी डॉ. वर्षा सिंह, प्रधानाचार्या डॉ. सुमन पाण्डेय,पूजा सेठ और सुन्दपुर क्षेत्र के पार्षद भी उपस्थित थे। तदुपरान्त स्वयंसेविकाओं द्वारा विद्यालय परिसर में विभिन्न खेलों का आयोजन किया गया, जिसमें रस्सीकूद, बैडमिंटन आदि खेलों की प्रतियोगिता की गयी। 


गुरुवार, 19 फ़रवरी 2026

NSS camp Main ”आत्मनिर्भरता एवं रोजगार क्षमता के लिए कौशल विकास ” पर दिया जोर

विद्यार्थियों को केवल किताबी ज्ञान नहीं बल्कि प्रायोगिक ज्ञान भी होना बेहद जरूरी -नीरज श्रीवास्तव 



dil india live (Varanasi).  19 फरवरी, 2026 को वसंत कन्या महाविद्यालय, कमच्छा, वाराणसी की राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) इकाई: 3 द्वारा सप्त दिवसीय शिविर के अंतर्गत ”आत्मनिर्भरता एवं रोजगार क्षमता के लिए कौशल विकास ” कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया। इस अवसर पर महाविद्यालय की प्राचार्या प्रोफेसर रचना श्रीवास्तव ने कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए शुभकामनाएं दी। कार्यक्रम का संचालन राष्ट्रीय सेवा योजना कार्यक्रम अधिकारी डॉ. पूनम वर्मा की अगुवाई में हुआ। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम का उद्देश्य छात्राओं को आत्मनिर्भरता एवं रोजगार क्षमता के लिए कौशल विकास के प्रति जागरूक करना तथा रोजगार के विभिन्न आयामों की जानकारी के साथ स्वयं सेविकाओं को प्रशिक्षित करना था। इस आयोजन के माध्यम से युवाओं को जिम्मेदार नागरिक के रूप में अपनी भूमिका समझाने का प्रयास किया गया। 




कार्यक्रम के मुख्य अतिथि वक्ता नीरज श्रीवास्तव (young skilled India, CEO, Founder) उन्होंने एक बहुत ही नये विषय Converting Subject Knowledge into Business Management Skills (NEP) के अंतर्गत स्वयं सेविकाओं को प्रबंधन एवं व्यापार के बिच सम्बन्ध को बहुत ही बारीकी से स्पष्ट करते हुए बताया की छात्राएं जो भी विषय पढ़ रही हैं चाहे वो किसी भी धारा की हो अपने प्राप्त ज्ञान को प्रबंधन में प्रयोग करके एक सफल व्यापारी या निजी संस्था में भी हम भूमिका निभा सकती हैं। नीरज श्रीवास्तव ने बताया कि वर्तमान समय में विद्यार्थियों को केवल किताबी ज्ञान नहीं बल्कि प्रायोगिक ज्ञान जैसे कौशल ज्ञान ,व्यक्तित्व विकास,आत्मविश्वास तथा व्यापार प्रबंधन की आवश्यकता हैं, आज का युवा पढ़ा लिखा बेरोजगार हैं जहां वो कई सारे परेशानियों को जीवन में ना केवल सामना कर रहा हैं बल्कि कौशल की कमी के कारण वो आय के श्रोत भी नहीं बना पा रहा हैं। Yong skilled India  भारत सरकार के द्वारा एक प्रमाणित स्टार्टअप हैं जहाँ हजारों की संख्या में युवाओं के कौशल विकास और व्यक्तित्व विकास, के द्वारा सफलता प्राप्ति में सहयोग प्राप्त हुआ हैं।

मुक़द्दस रमज़ान: मस्जिदों में दिखा नूरानी नज़ारा, Allahu Akbar ki Gunji सदाएं तो हुआ इफ्तार

रोजेदारों ने रमज़ान का पहला रोजा खोल रब का किया शुक्र अदा



सरफराज अहमद 

Varanasi (dil india live). रमजान के पहले रोज मस्जिदों से जैसे ही अजान की सदाएं, अल्लाह हो अकबर, अल्लाह हो अकबर... की गूंज सुनाई दी, तमाम रोजेदारों ने खजूर और पानी से इस साल का पहला रोजा जुमेरात को खोला। इस मौके पर इफ्तार में कई तरह के लज़ीज़ पकवान सजाया गया था। रोज़ा इफ्तार, और मस्जिदों में नमाज के साथ ही चारों तरफ नूर ही नूर, हर तरफ खुशी ही खुशी मुस्लिम बहुल इलाकों में देखने को मिली। मस्जिदों में रमजान की रहमत जहां बरस रही थी वहीं दूसरी ओर इफ्तार के बाद बाजार गुलजार हो गए। पहले रोज गुरुवार को मस्जिद लंगड़े हाफ़िज़ नयी सड़क में पूर्व पार्षद शाहिद अली खां मुन्ना ने रोजेदारों को इफ्तार सजाया। इस दौरान मस्जिदें पहले ही दिन नमाजियों से भरी हुई थी। इफ्तार के बाद लोगों ने बाजार का रुख किया। इस दौरान सहरी के लिए खरीदारी करते हुए मोमीनीन बाजारों में दिखाई दिए। 


इससे पहले मस्जिदों में नमाजे जोहर व असर के बाद रमजान का टाइम टेबल भी बांटा गया। इस दौरान कई मस्जिदों में नमाज़ के दौरान इमाम साहब आने वाले लोगों को नेकी की दावत देते दिखाई दिए। 

कहा कि यह महीना नेकियों का महीना है इस महीने की अजमत को समझें और बुराइयों को छोड़कर मोमिनीन ज्यादा से ज्यादा सवाब कमाने में जुट जाएं। उधर ख़्वातीन दोपहर से ही लजीज इफतारी बनाने में जुटी हुई थी। देखते ही देखते कब वक्त इफ्तार का हो गया पता ही नहीं चला और मस्जिदों से अज़ान की सदाएं गूंज उठी रोजेदारों ने पहला रोजा खोला और मुल्क में अमन, मिल्लत और क़ौम की तरक्की की दुआएं मांगी।

VKM Varanasi में दो दिवसीय अनुभवात्मक कार्यशाला व प्रदर्शनी का आगाज़

अनुभवात्मक शिक्षण के माध्यम से स्वदेशी शिल्प परंपराओं का संवर्धन





dil india live (Varanasi). वसंत कन्या महाविद्यालय (VKM), कमच्छा, वाराणसी के गृह विज्ञान विभाग द्वारा 18 फरवरी 2026 से दो दिवसीय अनुभवात्मक कार्यशाला, प्रदर्शनी एवं बिक्री स्टॉल का शुभारंभ महाविद्यालय परिसर के कैंटीन क्षेत्र में प्रातः 11:00 बजे किया गया। यह कार्यशाला 18 एवं 19 फरवरी 2026 को प्रतिदिन अपराह्न 4:00 बजे तक अवलोकनार्थ एवं बिक्री रहेगी।

कार्यक्रम विभागाध्यक्ष प्रो. संगीता देवड़िया के कुशल निर्देशन में तथा प्राचार्य प्रो. रचना श्रीवास्तव के मार्गदर्शन में यह आयोजन राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 की भावना के अनुरूप कौशल विकास एवं ‘Learning by Doing’ आधारित शिक्षण को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

इस कार्यशाला का उद्देश्य विद्यार्थियों को भारतीय पारंपरिक शिल्प विधाओं से प्रत्यक्ष रूप से जोड़ना तथा स्वदेशी कला परंपराओं के संरक्षण एवं संवर्धन हेतु प्रेरित करना है। कार्यक्रम के अंतर्गत दो प्रमुख शिल्प विधाओं लिप्पन आर्ट (कच्छ, गुजरात की प्रसिद्ध भित्ति सज्जा कला) तथा खटवा एवं मिरर वर्क (पारंपरिक कढ़ाई एवं दर्पण सज्जा शैली) का प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है।

कार्यक्रम में लिप्पन आर्ट सत्र का संचालन डॉ. सृष्टि पुरवार (फैकल्टी, सेंटर ऑफ फैशन डिजाइन एंड टेक्नोलॉजी, इलाहाबाद विश्वविद्यालय) द्वारा किया जा रहा है, जो विकास आयुक्त (हस्तशिल्प), वस्त्र मंत्रालय, भारत सरकार एवं एमएसएमई, उत्तर प्रदेश शासन द्वारा नामित डिज़ाइनर हैं। वहीं खटवा एवं मिरर वर्क सत्र का संचालन स्वतंत्र शिल्प विशेषज्ञ अनन्या शर्मा द्वारा किया जा रहा है। विशिष्ट अतिथि कुनाल (HKV बनारस) एवं अभिलाषा पोद्दार (सम्यक  क्रिएशन बनारस ) ने प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। 

प्रतिभागियो में विभिन्न महाविद्यालय से डॉ वेलेंटीना प्रिया (अम्बेडकर नगर ) डॉ. साधना अग्रवाल (एसोसिएट प्रोफेसर, GGDC DLW वाराणसी), डॉ. दीपिका यादव एवं डॉ. महेश्वरी विश्वकर्मा (डीएमपीजी कॉलेज), डॉ. कल्पना आनंद एवं डॉ. प्रीति विश्वकर्मा , डॉ सपना भूषण (VKM), डॉ. राखी अस्थाना, विद्या पटेल, डॉ. प्रियंका, डॉ. ज्योति, डॉ. श्वेता, डॉ. आकांक्षा, डॉ. स्वास्तिका, डॉ. गरिमा, डॉ. शिप्रा, अनीता त्रिपाठी , डॉ शालिनी ( अग्रसेन पीजी कॉलेज ) सहित अनेक शिक्षाविदों की गरिमामयी उपस्थिति रही।

कार्यशाला का प्रबंधन रिसर्च स्कॉलर्स शालिनी प्रिया , संयोगीता, उजाला सरोज एवं प्रयोग शाला सहायक योगिता पद्मा एवम् सोनी के द्वारा किया गया। कार्यशाला में लिप्पन आर्ट हेतु 113 विद्यार्थियों तथा खटवा हेतु 51 विद्यार्थियों ने पंजीकरण कराया है, लगभग 8 प्राध्यापक सदस्यों की सक्रिय सहभागिता इस आयोजन की अकादमिक गंभीरता को दर्शाती है।




इस कार्यक्रम में विभिन्न शिक्षण संस्थानों डी.एम.पी.जी. कॉलेज, महादेव पी.जी. कॉलेज, पी.जी. कॉलेज गाजीपुर, घनश्याम सिंह पी.जी. कॉलेज, वनिता पॉलिटेक्निक, केशव प्रसाद मिश्र राजकीय महाविद्यालय, राजकीय महिला महाविद्यालय, रामाबाई महिला राजकीय पी.जी. कॉलेज, महारानी बनारस महिला महाविद्यालय, महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ, पं. दीनदयाल उपाध्याय राजकीय महिला कॉलेज तथा दीप राय इंटर कॉलेज से विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भागीदारी की है।

इन दो दिनों में गृह विज्ञान विभाग की यूजी, पीजी एवं सर्टिफिकेट कोर्स की छात्राओं द्वारा निर्मित हस्तनिर्मित उत्पादों की प्रदर्शनी एवं बिक्री भी आयोजित की जा रही है, जिससे विद्यार्थियों को उद्यमिता एवं स्वरोजगार के व्यावहारिक आयामों का अनुभव प्राप्त होगा।

महाविद्यालय प्रशासन ने आशा व्यक्त की है कि यह पहल विद्यार्थियों में रचनात्मकता, आत्मनिर्भरता एवं सांस्कृतिक चेतना को सुदृढ़ करेगी तथा स्वदेशी शिल्प परंपराओं के संरक्षण की दिशा में एक सार्थक कदम सिद्ध होगी।

BLW Varanasi Main बड़ा बदलाव,आशुतोष पंत ने संभाला महाप्रबंधक का पदभार

जानिए कौन हैं आशुतोष पंत, शुरुआती कैरियर से बीएलडब्ल्यू के महाप्रबंधक तक का सफर



F. Farouqi Babu 

dil india live (Varanasi). बनारस रेल इंजन कारखाना (बरेका) के लिए आज का दिन अत्यंत महत्वपूर्ण रहा, जब आशुतोष पंत ने दिनांक 18 फरवरी 2026 को बरेका के महाप्रबंधक के रूप में पदभार ग्रहण किया। इससे पूर्व वे उत्तर रेलवे में प्रमुख मुख्य विद्युत इंजीनियर के पद पर अपनी सेवाएं दे रहे थे।

23 मार्च 1968 को उत्तराखंड के खटीमा में जन्मे पंत हल्द्वानी (उत्तराखंड) के निवासी हैं। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा निर्मला कॉन्वेंट, हल्द्वानी तथा बिड़ला विद्या मंदिर, नैनीताल से इंटरमीडिएट तक प्राप्त की। इसके उपरांत उन्होंने वर्ष 1988 में बिरला प्रौद्योगिकी एवं विज्ञान संस्थान (बिट्स), पिलानी से विद्युत इंजीनियरिंग में स्नातक की उपाधि प्राप्त की। आशुतोष पंत भारतीय रेलवे विद्युत इंजीनियरिंग सेवा (IRSEE) के वर्ष 1989 बैच के अनुभवी अधिकारी हैं।

भारतीय रेल सेवा में प्रवेश 

 वर्ष 1991 में उन्होंने भारतीय रेल सेवा में प्रवेश किया। उनकी पहली नियुक्ति प्रयागराज में सहायक विद्युत इंजीनियर (रेल विद्युतीकरण) के पद पर हुई।

भारतीय रेल में अपने दीर्घ एवं उल्लेखनीय सेवाकाल के दौरान Ashutosh पंत ने विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर कार्य करते हुए उत्कृष्ट प्रशासनिक एवं तकनीकी दक्षता का परिचय दिया। वे मुख्य विद्युत सामान्य इंजीनियर (CEGE), उत्तर रेलवे, उप महाप्रबंधक, उत्तर रेलवे, मंडल रेल प्रबंधक इज्जतनगर (पूर्वोत्तर रेलवे) तथा जोधपुर मंडल जैसे महत्वपूर्ण पदों पर अपनी सेवाएं दे चुके हैं।

उनकी उत्कृष्ट सेवाओं के लिए वर्ष 2016 में भारत सरकार के रेल मंत्री द्वारा उन्हें राजभाषा पुरस्कार से सम्मानित किया गया। आशुतोष पंत के कुशल नेतृत्व, व्यापक अनुभव एवं दूरदर्शी सोच से बरेका उत्पादन, गुणवत्ता एवं नवाचार के क्षेत्र में नई ऊँचाइयों को प्राप्त करेगा तथा भारतीय रेल के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देता रहेगा।

VKM Varanasi Main पुरा छात्रा सम्मेलन का भव्य आयोजन

“भारतीय ज्ञान परम्परा : प्राचीन बुद्धिमत्ता एवं सतत समाधान” पर हुई संगोष्ठी


 




dil india live (Varanasi). वसन्त कन्या महाविद्यालय, कमच्छा,वाराणसी कमच्छा, वाराणसी में 18 फरवरी 2026 को “भारतीय ज्ञान परम्परा: प्राचीन बुद्धिमत्ता एवं सतत समाधान” विषय पर एक दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी तथा पूर्व छात्रा सम्मेलन ‘आवर्तन–2026’ का भव्य आयोजन महाविद्यालय की एलुमनी एसोसिएशन द्वारा किया गया। कार्यक्रम में शिक्षाविदों, शोधार्थियों, छात्राओं एवं पूर्व छात्राओं की उत्साहपूर्ण सहभागिता रही। संगोष्ठी के उद्घाटन सत्र का शुभारंभ कुलगीत एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. रचना श्रीवास्तव ने स्वागत भाषण में भारतीय ज्ञान परम्परा की समकालीन प्रासंगिकता पर प्रकाश डालते हुए इसे राष्ट्रीय शिक्षा नीति–2020 के बहुविषयक, मूल्यपरक एवं अनुभवात्मक शिक्षण दृष्टिकोण से जोड़ा। उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान प्रणाली सतत विकास लक्ष्यों, विशेषतः गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, लैंगिक समानता एवं पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण मार्गदर्शन प्रदान करती है।अंतर्राष्ट्रीय अतिथि डॉ. शमा मित्तल ने भारतीय ज्ञान प्रणाली की वैश्विक उपयोगिता तथा पर्यावरणीय संतुलन में उसकी भूमिका को रेखांकित किया। मुख्य वक्ता प्रो. चन्द्रकला पाडिया, पूर्व कुलपति,


महाराजा गंगा सिंह विश्वविद्यालय, ने भारतीय चिंतन की दार्शनिक गहराई एवं उसके व्यावहारिक आयामों पर प्रकाश डाला। द्वितीय मुख्य वक्ता प्रो. कल्पलता पाण्डेय, पूर्व कुलपति, जननायक चन्द्रशेखर विश्वविद्यालय ने नई शिक्षा नीति एवं सतत विकास लक्ष्यों के संदर्भ में भारतीय शिक्षण परम्परा की उपयोगिता को स्पष्ट किया।कार्यक्रम की मुख्य अतिथि श्रीमती उमा भट्टाचार्य, प्रबंधक, व.क.म., ने छात्राओं को भारतीय मूल्यों के संरक्षण एवं आत्मनिर्भरता की भावना से प्रेरित किया। अध्यक्षीय उद्बोधन में डॉ. कुसुम मिश्रा, पूर्व प्राचार्या, वी.के.एम., ने शिक्षा में मानवीय संस्कार,संस्कृति एवं सामाजिक उत्तरदायित्व के समन्वय पर बल दिया। संस्कृत विभागाध्यक्ष डॉ. शांता चटर्जी ने धन्यवाद ज्ञापन किया।तकनीकी सत्र में विभिन्न विषयों पर लगभग पचास शोधपत्र प्रस्तुत किए गए, जिनमें भारतीय गणित, पर्यावरणीय चिंतन, नारी अध्ययन एवं मूल्य शिक्षा जैसे आयामों पर सारगर्भित चर्चा हुई। पूर्व छात्राओं द्वारा लगाए गए स्टालों में पेंटिंग, ललित कला एवं वैदिक गणित शिक्षण सामग्री का प्रदर्शन आकर्षण का केंद्र रहा। सांस्कृतिक सत्र में सितार वादन, शास्त्रीय एवं लोकनृत्य, गायन ,काव्य पाठ तथा श्रुति नाटक की मनोहारी प्रस्तुतियों ने सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। कैलिफोर्निया से आनलाइन माध्यम से जुड़ीं पुराछात्रा व प्रख्यात कथाकार आर्या झा ने अपनी कहानी प्रस्तुत की।इस अवसर पर लगाए गए नि: शुल्क स्वास्थ्य शिविर में पुरा छात्राओं ने अपने स्वास्थ्य परीक्षण कराए।कार्यक्रम का समापन इतिहास विभागाध्यक्ष प्रो. पूनम पाण्डेय के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। यह आयोजन भारतीय ज्ञान परम्परा की पुनर्प्रतिष्ठा, नई शिक्षा नीति–2020 के उद्देश्यों की पूर्ति तथा पूर्व एवं वर्तमान छात्राओं के मध्य सुदृढ़ संवाद स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध हुआ।