मुफ्ती अब्दुल बातिन नोमानी ने राष्ट्रपति को भेजा पत्र
बोलें:10 हजार की रोजी-रोटी का है सवाल, हाथ जोड़कर किया गुज़ारिश और सुझाया विकल्प
मोहम्मद रिजवान
Varanasi (dil India live)। दालमंडी व्यापारिक क्षेत्र में सड़क चौड़ीकरण को लेकर शुरू हो चुकी सरकारी कवायद के बीच मुफ्ती-ए-बनारस मौलाना अब्दुल बातिन नोमानी ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को मार्मिक पत्र लिख भेजा है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव सहित अन्य बड़े नेताओं को पत्र लिखकर निवेदन किया है कि दालमंडी में बुलडोजर कार्रवाई न की जाए।
मुफ्ती बातिन ने लिखा है कि दालमंडी को उजाड़ने से कम से कम 10 हजार नागरिकों की आजीविका पर संकट आ जाएगा। उन्होंने पत्र में कहा है कि दालमंडी वाराणसी का ऐतिहासिक और जीवंत क्षेत्र है। यह पूर्वांचल का प्रमुख व्यापारिक क्षेत्र भी है। जहां वर्षों से विविध सामाजिक, सांस्कृतिक एवं धार्मिक पृष्ठभूमि के लोग परस्पर सौहार्द के साथ व्यापारिक गतिविधियों में शामिल हैं।
उन्होंने कहा है कि यूपी सरकार द्वारा दालमंडी में लगभग 13 फीट चौड़ी गली को 56 फीट तक विस्तारित करने का निर्णय लिया गया है, जिसके लिए 220 करोड़ रुपए का बजटीय प्रावधान किया गया है। इसके फलस्वरूप सैकड़ों दुकानें, मकान और धार्मिक स्थलों को तोड़ा जाना है। ऐसे में जब देश पहले से ही आर्थिक मंदी, बढ़ती बेरोजगारी और सामाजिक असंतुलन से जूझ रहा है, इस निर्णय से क्षेत्र के नागरिकों पर गहरा सामाजिक और आर्थिक आघात पहुंच सकता है।
मुफ्ती-ए-शहर के अनुसार दालमंडी का क्षेत्र सामाजिक सद्भाव का उत्कृष्ट उदाहरण रहा है। यह क्षेत्र न केवल व्यापारिक रूप से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह भारत के साहित्य, कला और संस्कृति की महान विभूतियों की जन्मस्थली एवं कर्मभूमि भी रहा है।
उन्होंने सुझाव दिया है कि इस गली के लगभग 600 मीटर लंबे मार्ग के विकल्पस्वरूप मात्र 40 मीटर के वैकल्पिक मार्ग भी उपलब्ध है, जिस पर कार्य किये जाने से कम लागत, न्यूनतम तोड़फोड़ और व्यापक जनहित संभव है।
उन्होंने बताया कि इस मार्ग में इस्लाम धर्म से संबंधित 6 प्राचीन पंजीकृत वक्फ मस्जिदें स्थित हैं, जिनका विध्वंस न केवल संवैधानिक और धार्मिक भावनाओं का उल्लंघन होगा, बल्कि यह देश के अल्पसंख्यक समुदायों में गहरी उसुरक्षा और आक्रोश उत्पन्न कर सकता है। उन्होंने आशंका जताई है कि यह पूरी कार्ययोजना एक विशेष समुदाय के खिलाफ पूर्वाग्रहपूर्ण निर्णय हो सकती है।
उन्होंने कहा कि इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा इस परियोजना के खिलाफ संबंधित मस्जिदों और भवन स्वामियों को अस्थायी स्थगन आदेश (स्टे ऑर्डर) प्रदान किया गया है, जिससे स्पष्ट होता है कि इस परियोजना में विधिक जटिलताएं भी अंतर्निहित हैं। मुफ्ती-ए-बनारस ने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री सहित अन्य नेताओं से करबद्ध निवेदन करते हुए कहा कि इस विषय की गंभीरता को संज्ञान में लेते हुए इस परियोजना को तत्काल प्रभाव से स्थगित करने और इसके वैकल्पिक मार्गों की तलाश करने के लिए संबंधित लोगों को निर्देश दिया जाए।
उन्होंने राष्ट्रपति से कहा है कि आपकी दया, संवेदनशीलता और न्यायप्रियता ही इस ऐतिहासिक क्षेत्र के नागरिकों की आजीविका, धार्मिक स्थलों और सामाजिक सौहार्द की रक्षा कर सकती है।