शुक्रवार, 14 नवंबर 2025

Education: VKM Varanasi में 'जनजातीय गौरव दिवस का हुआ आयोजन’

राष्ट्र निर्माण में एन एस एस की भूमिका महत्वपूर्ण 



dil india live (Varanasi). वसंत कन्या महाविद्यालय, (VKM) वाराणसी में राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) की एक दिवसीय विशेष शिविर का आयोजन 'जनजातीय गौरव दिवस’ के अवसर पर बड़े उत्साह और गरिमा के साथ किया गया। इस विशेष आयोजन में मुख्य अतिथि के रूप में प्रसिद्ध शोधकर्ता और वक्ता डॉ गंगेश शाह गोंडवाना (अस्सिटेंट रजिस्ट्रार, आई .आई .टी,काशी हिंदू विश्वविद्यालय) उपस्थित रहे। उनकी उपस्थिति ने पूरे कार्यक्रम को एक विद्वतापूर्ण और प्रेरणादायक वातावरण प्रदान किया।

कार्यक्रम की शुरुआत NSS स्वयंसेवकों द्वारा प्रस्तुत लक्ष्य गीत से हुई, जिसने पूरे माहौल में ऊर्जा और सामूहिकता का भाव जागृत किया। इस गीत ने शिविर के उद्देश्य और NSS की सामाजिक चेतना को प्रभावी रूप से व्यक्त किया। प्राचार्या प्रोफेसर रचना श्रीवास्तव ने स्वागत वक्तव्य देते हुए बाल दिवस एवं राष्ट्रीय जनजातीय दिवस के अवसर पर सभी को बधाई और शुभकामनाएं दी।

शालिनी गुप्ता स्नातक द्वितीय वर्ष की छात्रा ने राष्ट्रीय जनजातीय गौरव दिवस के अवसर पर भाषण की प्रस्तुति दी। इसके पूर्व जनजाति गौरव दिवस विषय पर निबंध प्रतियोगिता भी आयोजित की गई।

मुख्य अतिथि श्री गंगेश शाह ने अपने उद्बोधन में NSS अधिकारी डॉक्टर शुभांगी श्रीवास्तव तथा इतिहास विभाग के प्रोफेसर शशिकेश कुमार गोंड के प्रति हृदय से आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि NSS युवाओं में सेवा भावना, नेतृत्व कौशल और सामाजिक ज़िम्मेदारी का विकास करती है, जो राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।



अपने विस्तृत भाषण में उन्होंने आदिवासी संस्कृतियों, विशेषकर गोंड और भील समुदायों, पर गहन चर्चा की। उन्होंने बताया कि गोंड दक्षिण एशिया की सबसे बड़ी और ऐतिहासिक जनजातियों में से एक है, जिसकी सांस्कृतिक विरासत, कला, भाषा और जीवन पद्धति अत्यंत समृद्ध है। उन्होंने ‘गोंड’ शब्द के अर्थ, उनकी लोकपरंपराओं, मिथकों और प्रकृति-केंद्रित जीवन दर्शन को विस्तार से समझाया। उन्होंने गोंड कला—विशेषकर गोंड चित्रकला—का महत्व भी बताया, जो आज विश्व स्तर पर सराही जाती है।

मुख्य अतिथि ने अपनी प्रस्तुति में सिंधु लिपि के इतिहास, उसकी जटिलता और उसके संभावित अर्थों पर रोचक जानकारी दी। उन्होंने सिंधु सभ्यता के प्रतीकों, लेखन शैली और इनके माध्यम से प्रकट होने वाले सामाजिक संकेतों को सरल शब्दों में समझाया। यह विषय विद्यार्थियों के लिए अत्यंत ज्ञानवर्धक सिद्ध हुआ और प्राचीन भारतीय इतिहास के प्रति उनकी समझ को विस्तृत किया।

इसके बाद उन्होंने आदिवासी स्वतंत्रता सेनानियों बिरसा मुंडा, रघुनाथ शाह और शंकर शाह के योगदान को विशेष रूप से याद किया। उन्होंने बताया कि इन नायकों ने ब्रिटिश दमनकारी नीतियों के विरुद्ध सशक्त संघर्ष किया और अपने अद्वितीय साहस, आत्मसम्मान एवं सांस्कृतिक गौरव के कारण इतिहास में अमर हो गए। आदिवासी आंदोलनों में इन नेताओं की भूमिका सामाजिक न्याय और स्वाधीनता की संघर्षगाथा का महत्वपूर्ण अध्याय है।

अपने संबोधन में श्री गंगेश शाह ने मानव मूल्यों और नैतिकता की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज प्रकृति के साथ सामंजस्य, सामूहिकता, सरलता और मानवीय संवेदनाओं को प्राथमिकता देता है। आज के समय में इन मूल्यों का पुनर्स्मरण और संरक्षण अत्यंत आवश्यक है क्योंकि यही मूल्य समाज को संतुलन और स्थायी विकास की दिशा में ले जाते हैं।

कार्यक्रम की समाप्ति एक गरिमामयी वातावरण में हुई, जहाँ विद्यार्थियों और स्वयंसेवकों ने आदिवासी संस्कृति, इतिहास और सभ्यता के प्रति गहरा सम्मान अनुभव किया। यह एक दिवसीय शिविर सभी उपस्थित लोगों के लिए ज्ञानवर्धक, प्रेरक और सांस्कृतिक दृष्टि से समृद्ध अनुभव साबित हुआ। कार्यक्रम में कुल 100 स्वयं सेविकाएं मौजूद रही।

Education: VKM Varanasi में आदिमानव के परिवेश और तकनीकी विकास पर हुई चर्चा

प्रागैतिहासिक मानव जीवन के विविध पक्षों पर डाली रौशनी 


dil india live (Varanasi). वसंत कन्या महाविद्यालय में आयोजित, उत्तर प्रदेश राज्य पुरातत्व इकाई द्वारा वित्तपोषित, छह दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला के पांचवें दिन प्रागैतिहासिक मानव जीवन के विविध पक्षों को विस्तार से समझाया गया।  दिन के पहले सत्र में प्रोफेसर विदुला जायसवाल ने यूरोप औऱ एशिया के मध्यपाषाण काल के चरणों का तुलनात्मक अध्ययन प्रस्तुत किया। उन्होंने आदिमानव के परिवेश और तकनीकी विकास यात्रा पर भी विस्तार से बात की। डॉ आरती कुमारी ने नवपाषाणिक संस्कृति में मानव जीवन में आए बदलावों को वैश्विक और भारतीय परिप्रेक्ष्य में समझाया। 

अपरान्ह सत्र में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के भूतपूर्व डायरेक्टर जनरल डॉक्टर राकेश तिवारी ने उत्तर प्रदेश में मनुष्य के बसाव की पुरातनता को पुरातात्विक आधार पर लगभग ग्यारह हजार साल पहले ले जाने की बात कही। उन्होंने कहा कि पुरातत्व के अध्ययन में हमें नए साक्ष्यों को सावधानी से ग्रहण करने की आवश्यकता है। साथ ही पूर्वाग्रहों से दूर रहना भी ज़रूरी है। 

उत्तर प्रदेश और बिहार के प्रागैतिहासिक संस्कृतियों की दृष्टि से महत्त्वपूर्ण पैसरा, चिरांद, लहुरादेवा, हेता पट्टी आदि पुरास्थलों का उदाहरण देकर उन्होंने इस क्षेत्र के पूर्व-स्थापित इतिहास के पुनरावलोकन की आवश्यकता पर बल दिया। 


उत्तर प्रदेश राज्य पुरातत्व विभाग की निदेशक डॉ रेणु द्विवेदी ने आयोजकों को शुभकामनाएं दीं। अतिथियों का स्वागत प्राचार्या प्रोफेसर रचना श्रीवास्तव के संबोधन से हुआ तो धन्यवाद ज्ञापन डॉ आरती चौधरी ने किया। संचालन डॉ. नैरंजना श्रीवास्तव और संयोजन डॉ आरती कुमारी ने किया। कार्यक्रम में मार्गदर्शन प्रोफेसर विदुला जायसवाल का रहा। 

इस अवसर पर डी ए वी पी जी कॉलेज से डॉ. ओम प्रकाश और महिला महाविद्यालय से डॉ स्वतंत्र सिंह उपस्थित रहे। क्षेत्रीय पुरातत्व इकाई से डॉ. राजीव रंजन भी उपस्थित रहे।

गुरुवार, 13 नवंबर 2025

Education: Munshi Premchand ने शुरू की Urdu अफसाने की रवायत

प्रेमचंद ने जिस तरह से समाज को देखा उसे हु-ब-हू अपने अफसाने में उतारा



dil india live (Varanasi). वाराणसी के डीएवी पीजी कॉलेज में उर्दू विभाग के तत्वावधान में गुरुवार को 'उर्दू में अफसाना निगारी की रवायत' विषय पर विशिष्ट व्याख्यान का आयोजन हुआ। मुख्य वक्ता काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के उर्दू विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. मुशर्रफ अली ने कहा कि उर्दू में अफसाना (कहानी) लेखन का श्रेय सर्वप्रथम मुंशी प्रेमचंद को जाता है, जिनका शोबे वतन मील का पहला पत्थर है। प्रेमचंद ने जिस तरह से समाज को देखा उसे ही अपने अफसाने में उतारा, उर्दू अफसाने में शुरू की गई उनकी रिवायत पर ही आज समूचा उर्दू अफसाना चल रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रेमचंद का साहित्य हमे संयुक्त परिवार के चलन की ओर प्रेरित करता है। डॉ. मुशर्रफ अली ने उर्दू निगारी की रवायत के आगाज से लेकर वर्तमान तक के तीनों दौर प्रगतिशील, आधुनिक और उत्तर आधुनिक दौर और समकालीन उर्दू रवायत पर भी प्रकाश डाला।

अध्यक्षता करते हुए महाविद्यालय के कार्यवाहक प्राचार्य प्रो. मिश्रीलाल ने कहा कि इंसानी जिंदगी और इंसानियत पर उर्दू निगारी की रवायत बहुत प्रभावशाली रही है। इसके पूर्व प्रबंधक अजीत कुमार सिंह यादव ने मुख्य अतिथि डॉ. मुशर्रफ अली का शॉल और स्मृति चिन्ह देकर उनका इस्तकबाल किया। संचालन डॉ. शमशीर अली एवं धन्यवाद ज्ञापन डॉ. नजमुल हसन ने दिया।


इनकी रही खास मौजूदगी 

इस मौके पर प्रो. प्रशांत कश्यप, प्रो. राकेश राम, डॉ. ज़ियाउद्दीन, डॉ. मयंक कुमार सिंह, डॉ. ओमप्रकाश कुमार, डॉ. अस्मिता तिवारी, डॉ. नीलम सिंह, डॉ.  विजय यादव, डॉ. संजीव प्रियदर्शी, डॉ.श्वेता मिश्रा,डॉ. अनुराग चौरसिया, प्रताप बहादुर सिंह सहित बड़ी संख्या में विद्यार्थी शामिल रहे।

Education: VKM Varanasi Main कार्यशाला के चौथे दिन जानिए क्या हुआ, क्या बोले एक्सपर्ट?

पाषाण उपकरणों के प्रकार, निर्माण प्रणाली व वातावरण पर कार्यशाला में हुई चर्चा 




dil india live (Varanasi). वसंत कन्या महाविद्यालय (VKM) के कमच्छा स्थित परिसर में क्षेत्रीय पुरातत्व इकाई के साथ संयुक्ततः आयोजित 6 दिवसीय राष्ट्रीय कोर्स (कार्यशाला) के चौथे दिन, 13 नवंबर को प्रोफेसर विदुला जायसवाल के संबोधन से दिन के सत्र की शुरुआत हुई। पुरा-इतिहास के विभिन्न चरणों पर बात करते हुए उन्होंने विश्व और भारत के संदर्भ में पाषाण उपकरणों के प्रकार, निर्माण प्रणाली और वातावरण के साथ सहजीविता पर बात की। प्रोफेसर विदुला जायसवाल ने विस्तार से बताया कि पाषाण उपकरणों के आकार के परिवर्तन, पत्थरों के चयन और तकनीक के उपयोग में मानवीय बुद्धि के विकास और पर्यावरणीय कारकों की बहुत बड़ी भूमिका होती है। 

दिन के दो अन्य सत्रों में प्रतिभागियों ने टूल-ड्राॅइंग की बारीकियों को समझा। काशी हिंदू विश्वविद्यालय के राम बदन और शिव कुमार ने पाषाण उपकरणों के दस्तावेजीकरण की दृष्टि से ड्राइंग का महत्व बताया और ड्राॅइंग का कौशल सिखाया। अतिथि वक्ता डॉक्टर तोशाबन्ता प्रधान का सम्मान करते हुए प्राचार्या प्रोफेसर रचना श्रीवास्तव ने कहा कि ऐसी कार्यशालाएं इस विषय पर स्तरीय शिक्षण और प्रशिक्षण का बेहद उपयोगी माध्यम हैं। प्रशिक्षुओं को प्रयोग में भाग लेते हुए व्याख्यानों के साथ ज्ञान को संपूर्णता में ग्रहण करना चाहिए। 


उत्तर प्रदेश पुरातत्व विभाग की निदेशक डॉक्टर रेनू द्विवेदी ने अपने शुभकामना संदेश में वसंत कन्या महाविद्यालय के इस आयोजन को इतिहास के आरंभ को समझने की दृष्टि से अमूल्य बताया। इस अवसर पर क्षेत्रीय पुरातत्व इकाई से डॉक्टर राजीव रंजन और उनकी टीम के सदस्य उपस्थित रहे। महाविद्यालय के प्राचीन भारतीय इतिहास संस्कृति विभाग के सभी सदस्य उपस्थित रहे। एंटीक्विटी क्लब के अमूल्य सहयोग से कार्यक्रम को सफलता से संचालित किया गया। प्रोफेसर विदुला जायसवाल और डॉक्टर आरती कुमारी ने कार्यक्रम का संयोजन किया। धन्यवाद ज्ञापन डॉक्टर आरती ने दिया।


Nataraj Sangita academy का तीसवां कत्थक महोत्सव आज

पंडित बिरजू महाराज की विरासत और परंपरा को आगे बढ़ा रहीं हैं संगीता सिन्हा 


dil india live (Varanasi). नटराज संगीत अकादमी वाराणसी द्वारा आयोजित सनबीम शिक्षण समूह के विशेष सहयोग से 30 वें कत्थक महोत्सव (विरासत पंडित बिरजू महाराज परंपरा) का आयोजन आज शाम 5:00 बजे सनबीम लहरतारा में आयोजित होने जा रहा है। नटराज संगीत अकादमी की निदेशक एवं पं. बिरजू महाराज की वाराणसी में वरिष्ठ शिष्या संगीता सिन्हा ने दिल इंडिया लाइव को बताया कि नटराज संगीत अकादमी द्वारा विगत 30 वर्षों से कथक महोत्सव का आयोजन होता आ रहा है, जिसमें अकादमी के 30 वें कथक महोत्सव सभी संगीत रसिकों को आमंत्रित किया गया है। आयोजन में छात्राओं के अतरिक्त बाहर के उभरते एवं प्रतिष्ठित कलाकारों को भी आमंत्रित किया गया है। यह आयोजन 22 वर्षों तक डॉ. राजेन्द्र प्रसाद घाट पर मनाया गया तो 2 वर्ष अस्सी घाट पर और 2017 में 25 वर्ष होने पर सिल्वर जुबली भी मना। संगीता सिन्हा ने कहा कि प्रत्येक वर्ष मेरे गुरु पद्म विभूषण पं. बिरजू महाराज उपस्थित रहते थे। यह बनारस में अपना एक अकेला महोत्सव है। मैं अपने गुरु पं. बिरजू महाराज की कथक परंपरा को आगे ले जाने के लिए संकल्पित हूं। इस कथक महोत्सव में अकादमी की छात्राएं सम्या गर्ग, अन्विता दीक्षित युगल कथक नृत्य जहां प्रस्तुत करेंगी वहीं, ऋचा जालान एकल कथक नृत्य एवं अन्नेश दत्ता एकल कथक नृत्य प्रस्तुत करेंगी। यह आयोजन एक यादगार आयोजन होगा।

बुधवार, 12 नवंबर 2025

Education: VKM Varanasi में CPR प्रशिक्षण कार्यक्रम

कोविड महामारी के बाद कार्डिक अरेस्ट की घटनाओं में हुई वृद्धि

आपदा प्रबंधन क्लब व छात्र सलाहकार समिति ने किया आयोजन

dil india live (Varanasi). 12 नवम्बर 2025 को वसन्त कन्या महाविद्यालय, कमच्छा में आज आपदा प्रबन्धन क्लब तथा छात्र सलाहकार एवं अनुशासन समिति के संयुक्त तत्वावधान में CPR (कार्डियो पल्मोनरी रिससिटेशन) प्रशिक्षण कार्यक्रम’ का सफल आयोजन किया गया, जिसमें आपातकालीन जीवनरक्षक तकनीक सीपीआर का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। 

कार्यक्रम का शुभारंभ प्रातः 11 बजे महाविद्यालय प्रांगण में हुआ। इस अवसर पर महाविद्यालय की प्राचार्या मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थीं। प्रशिक्षण सत्र का संचालन प्रसिद्ध चिकित्सा विशेषज्ञ डॉ. शिवशक्ति प्रसाद द्विवेदी, राजकीय चिकित्सा अधिकारी, वाराणसी द्वारा किया गया।  इस अवसर पर प्रशिक्षण के दौरान डॉ. द्विवेदी ने सम्बोधित करते हुए कहा कि कोविड महामारी के बाद कार्डिक अरेस्ट की घटनाओं में बहुत वृद्धि हुई है। 


आधुनिक या गलत जीवनशैली के कारण युवा भी शिकार हो  रहे हैं, किन्तु सीपीआर एक ऐसी जीवन रक्षक तकनीक है जिसका उचित समय पर प्रयोग करके कुछ हद तक जीवन को बचाया जा सकता है। उन्होंने हार्ट अटैक और कार्डिक अरेस्ट के अन्तर को सरलता से बताते हुए सीपीआर देने के परिस्थितियों, स्थान तथा विधियों को सूक्ष्मता से परिचित कराया। डॉ . द्विवेदी ने व्यावहारिक प्रदर्शन द्वारा बताया कि हृदय गति रुक जाने जैसी आपात स्थितियों में समय पर और सही ढंग से सीपीआर तकनीक का प्रयोग किसी व्यक्ति के जीवन को बचाने में महत्वपूर्ण होता है। उन्होंने ने छात्राओं, शिक्षकों एवं कर्मचारियों को सीपीआर की प्रक्रिया के प्रत्येक चरण की जानकारी दी। कैसे हृदयगति और श्वसन रुकने की पहचान की जाए, किस प्रकार छाती पर दबाव दिया जाए, और कृत्रिम श्वसन (mouth-to-mouth respiration) को सही ढंग से किया जाए। उन्होंने प्रतिभागियों को मौके पर अभ्यास करने के लिए प्रोत्साहित किया, जिससे उन्हें व्यावहारिक अनुभव प्राप्त हुआ।

मुख्य अतिथि प्राचार्या रचना श्रीवास्तव ने अपने संबोधन में कहा कि इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम न केवल जीवनरक्षक तकनीकों के प्रति जागरूकता बढ़ाते हैं, बल्कि आपात परिस्थितियों में आत्मविश्वास से कार्य करने की क्षमता भी विकसित करते हैं। उन्होंने आयोजक समितियों की इस उपयोगी पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रमों के माध्यम से छात्र-छात्राओं में सामाजिक संवेदनशीलता एवं उत्तरदायित्व की भावना विकसित होती है। महाविद्यालय के शिक्षकगण, शिक्षणेतर कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में छात्राओं ने उत्साहपूर्वक प्रतिभाग किया। 

कार्यक्रम के अन्त में आपदा प्रबन्धन क्लब की संयोजिका एवं छात्र सलाहकार डॉ. मंजू कुमारी ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि महाविद्यालय भविष्य में भी आपदा प्रबंधन से संबंधित इस प्रकार के उपयोगी और व्यावहारिक प्रशिक्षण कार्यक्रमों का नियमित रूप से आयोजन करता रहेगा। यह कार्यक्रम न केवल शिक्षार्थियों को आपातकालीन चिकित्सा सहायता की मूल तकनीकों से परिचित कराने में सार्थक रहा, बल्कि मानवीय संवेदना और तत्परता के आदर्श को भी मजबूत करने वाला साबित हुआ।


इनकी रही खास मौजूदगी 

इस अवसर पर महाविद्यालय के शिक्षकों डॉ.शशिकला, डॉ. विजय कुमार, डॉ.शशिकेश कुमार गोण्ड, डॉ.आशीष कुमार सोनकर , डॉ.शुभांगी श्रीवास्तव, डॉ .सरोज उपाध्याय, डॉ.प्रियंका पाठक, डॉ. अनुजा त्रिपाठी, सुधा चौबे तथा शिक्षणेतर कर्मचारियों- डॉ.अन्नपूर्णा, भारती चटोपाध्याय, बृजेश कुमार, ममता गुप्ता सहित लगभग सवा सौ छात्राओं ने सप्रयोग प्रशिक्षण प्राप्त किया। धन्यवाद ज्ञापन डॉ. पूनम वर्मा ने दिया।

Education: VKM Varanasi Main कार्यशाला के तीसरे दिन आखिर छात्राओं ने क्या सीखा ?

आखिर कैसे बनेगा पत्थर से उपकरण, बनाने का क्या है तरीका?

'इतिहास आरंभ और मानव जीवन के संघर्षों में तकनीक की अहम भूमिका' पर कार्यशाला



dil india live (Varanasi). 12 नवंबर को वसंत कन्या महाविद्यालय (VKM) के कमच्छा स्थित परिसर में कार्यशाला के दूसरे सत्र में प्रतिभागियों ने प्रस्तर युगीन मानव के द्वारा प्रयुक्त उपकरणों की नकल पर उपकरण निर्माण की तकनीक सीखी। नालंदा से आए अतिथि- वक्ता डॉक्टर तोषाबन्ता प्रधान ने कोर और फ्लेक पर बने उपकरणों को बनाने के तकनीकी पक्ष और पत्थर के प्रयोग पर निर्भर आदि मानवों की जीवन प्रणाली के विविध पक्षों को प्रयोग और प्रदर्शन के माध्यम से समझाया। 

'इतिहास के आरंभ और मानव जीवन के संघर्षों में तकनीक की अहम भूमिका' विषय पर केंद्रित छः दिवसीय कार्यशाला के तीसरे दिन की शुरुआत प्रोफेसर विदुला जायसवाल के व्याख्यान से हुई। उन्होंने यूरोप में अश्यूलियन संस्कृति और उनके उपकरणों की विशेषताओं और सांस्कृतिक संदर्भों को विस्तार पूर्वक समझाया। चर्चा को आगे बढ़ाते हुए, द्वितीय सत्र में प्रोफेसर जायसवाल ने बिहार के पुरा ऐतिहासिक स्थल 'पैसरा' के पुरातात्विक महत्व पर बात की। 


उपकरणों की ड्राइंग का बताया तरीका 

काशी हिंदू विश्वविद्यालय के प्राचीन भारतीय इतिहास विभाग के श्री राम बदन ने प्रतिभागियों को उपकरणों की ड्राइंग करना बताया। क्षेत्रीय पुरातत्व कार्यालय, वाराणसी से आए डॉ राजीव रंजन ने भी कार्यशाला में प्रतिभागियों का मार्गदर्शन किया। प्राचार्य ने छात्राओं को उत्साहित करते हुए कहा कि ऐसी कार्यशाला में उपकरणों के निर्माण से लेकर प्रयोग तक आदि-मनुष्य के जीवन की सुविधाओं और दुविधाओं को भी समझ सकते हैं। 


इनकी रही खास मौजूदगी 

इस अवसर पर डॉक्टर मीरा शर्मा, डॉक्टर नैरंजना श्रीवास्तव, डॉ आरती चौधरी, डॉक्टर दीक्षा, डॉक्टर आराधना, डॉक्टर श्वेता, डॉक्टर रवि कुमार आदि उपस्थित रहे। स्वागत और धन्यवाद सहसंयोजिका डॉक्टर आरती कुमारी ने किया। 

प्रायोगिक पक्ष की सफलता में एंटीक्विटी क्लब के अथक परिश्रम का अमूल्य योगदान रहा। प्रतिभागियों ने अपने प्रश्नों के माध्यम से विभिन्न सत्रों में जीवंतता को बनाए रखा।