सोमवार, 21 अप्रैल 2025

pope Francis (पोप फ्रांसिस) को मोमबत्ती जलाकर दी गई श्रद्धांजलि

हार्टमनपुर चर्च में हुई प्रार्थना सभा 

Ghazipur (dil India live). आज 21 अप्रैल, 2025 का दिन पूरे विश्व के ईसाई धर्म के लोगों के लिए अत्यधिक दुखद रहा। इसकी मुख्य वजह कैथोलिक ईसाई धर्म गुरु pope Francis (पोप फ्रांसिस) का 88 वर्ष की उम्र में निधन होना है। वह फेफड़ों के इन्फेक्शन की वजह से पिछले कई हफ्तों से अस्वस्थ चल रहे थे। उन्होंने 20 अप्रैल 2025 को ईस्टर की शुभकामनाएं पूरे विश्व को दिया था और आज वेटिकन सिटी के समय अनुसार प्रातः 7:35 पर ईश्वर को प्यारे हो गए। यह बातें फादर पी. विक्टर ने हार्टमनपुर चर्च में शोक सभा की अगुवाई करते हुए कही। 


        इस दुखद घड़ी में हार्टमनपुर चर्च में शोक सभा में हार्टमनपुर छात्रावास के छात्र-छात्राए, सिस्टर्स, फादर्स आदि उपस्थित थे। इस प्रार्थना सभा का शुभारंभ पोप फ्रांसिस के चित्र के सम्मुख मोमबत्तियां जलाकर किया गया तथा धार्मिक विधि अनुसार प्रार्थना सभा किया गया। वक्ताओं ने इसे पूरे विश्व के लिए एक क्षति बताया। 

अलविदा pope Francis 


वेटिकन सिटी में दुनिया के सबसे बड़े ईसाई धर्मगुरु पोप फ्रांसिस का सोमवार को निधन हो गया। उनका निधन वेटिकन के कासा सांता मार्टा स्थित उनके निवास स्थान पर हुआ। कार्डिनल केविन फेरेल, वेटिकन कैमरलेन्गो ने इसकी घोषणा करते हुए कहा कि “सोमवार को रोम से पोप फ्रांसिस पिता के घर लौट गए। उनका पूरा जीवन प्रभु और उनके चर्च की सेवा के लिए समर्पित था।’ उन्होंने कहा कि पोप फ्रांसिस ने हमें मूल्यों, साहस और सार्वभौमिक प्रेम के साथ जीना सिखाया, खासकर सबसे गरीब और सबसे हाशिए पर पड़े लोगों के लिए। 88 वर्षीय पोप फ्रांसिस अपने 12 साल के पोप कार्यकाल में वह कई बीमारियों से पीड़ित रहे। फ्रांसिस, पुरानी फेफड़ों की बीमारी से पीड़ित थे। युवावस्था में उनके एक फेफड़े का हिस्सा निकाल दिया गया था। उन्हें 14 फरवरी, 2025 को सांस की तकलीफ के कारण अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जो बाद में डबल निमोनिया में बदल गया। उन्होंने वहां 38 दिन बिताए। रविवार को पोप फ्रांसिस ने ईस्टर संडे के अपने संबोधन में विचार की स्वतंत्रता और सहिष्णुता का आह्वान किया।

गाज़ा के हालात पर जताई थी चिंता 

बेसिलिका की बालकनी से 35,000 से अधिक लोगों की भीड़ को ईस्टर की शुभकामनाएं देने के बाद, फ्रांसिस ने अपने पारंपरिक “उर्बी एट ओर्बी” (“शहर और दुनिया के लिए”) आशीर्वाद को पढ़ने का काम एक सहयोगी को सौंप दिया।उन्होंने भाषण में कहा, “धर्म की स्वतंत्रता, विचार की स्वतंत्रता, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और दूसरों के विचारों के प्रति सम्मान के बिना शांति नहीं हो सकती है.” उन्होंने “चिंताजनक” यहूदी-विरोध और गाजा में ‘नाटकीय और निंदनीय’ स्थिति की भी निंदा की।

बनारस में शोक, बंद रहेंगे स्कूल कालेज 

पोप फ्रांसिस के निधन से बनारस समेत देश दुनिया में शोक की लहर है। शोक में मसीही संस्थाएं व स्कूल-कालेज कल बंद रहेंगे। खास तौर पर जीवन ज्योति हायर सेकेण्डरी स्कूल सारनाथ, सेंट मैरीज कांवेंट स्कूल कैंटोंमेंट व सोना तालाब, सेंट जांस व सेंट जोसेफ आदि की सभी शाखाओं में अवकाश की घोषणा की गई है।

कैसे हुआ पोप का निधन, क्या थी बीमारी 

वपोप फ्रांसिस का निधन 21 अप्रैल 2025 को वेटिकन के कासा सांता मार्टा स्थित उनके निवास स्थान पर हुआ। वह 88 वर्ष के थे और लंबे समय से फेफड़ों की बीमारी से पीड़ित थे। उनके निधन की घोषणा वेटिकन केमरलेंगो कार्डिनल केविन फेरेल ने की, जिन्होंने कहा कि पोप फ्रांसिस ने अपने जीवन को प्रभु और उनके चर्च की सेवा के लिए समर्पित किया था।

पोप फ्रांसिस के निधन की वजह 

- पोप फ्रांसिस पुरानी फेफड़ों की बीमारी से पीड़ित थे, जिसके कारण उनके गुर्दे में भी खराबी के शुरुआती चरण नजर आने लगे थे।

- उन्हें 14 फरवरी 2025 को सांस की तकलीफ के कारण अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जो बाद में डबल निमोनिया में बदल गया।

- वह अस्पताल में 38 दिन रहे और हाल ही में ईस्टर कार्यक्रम में शामिल हुए थे।

मोदी व राहुल गांधी समेत कई की प्रतिक्रियाएं

-भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पोप फ्रांसिस के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया और उन्हें करुणा, विनम्रता और आध्यात्मिक साहस के प्रतीक के रूप में याद किया।

- कांग्रेस नेता राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी पोप फ्रांसिस के निधन पर दुख जताया और कहा कि उन्हें एक सच्चे धर्मगुरु के रूप में हमेशा याद किया जाएगा।


कौन बनेगा नया पोप, क्या है प्रकिया 

नए पोप के चयन की प्रक्रिया शुरू हो गई है, और कई नाम चर्चा में हैं। कुछ प्रमुख दावेदारों में शामिल हैं :

- फिलीपींस के कार्डिनल लुई एंटोनियो: अपनी धार्मिक नेतृत्व क्षमता और वैश्विक प्रभाव के लिए जाने जाते हैं।

- इटली के कार्डिनल पेट्रो पैरोलिन: वेटिकन के अनुभवी राजनयिक और चर्च के एक प्रमुख नेता।

- हंगरी के कार्डिनल पीटर एर्डो: चर्च के एक प्रमुख विद्वान और नेता।

- अमेरिका के कार्डिनल रेमंड लियो बर्के: एक अनुभवी कार्डिनल और चर्च के एक प्रमुख नेता।

- इटली के कार्डिनल मैटो जुप्पी: चर्च के एक युवा और गतिशील नेता।

- नीदरलैंड के कार्डिनल विलियम्स जैकब आइजक: चर्च के एक प्रमुख विद्वान और नेता।

- माल्टा के कार्डिनल मारियो ग्रेच: चर्च के एक अनुभवी नेता और वेटिकन के एक प्रमुख अधिकारी।

- जॉर्ज कूवाकड: एक वेटिकन राजनयिक और इंटररिलिजियस डायलॉग के प्रमुख।

नए पोप का चयन "कॉन्क्लेव" नामक प्रक्रिया के तहत किया जाएगा, जिसमें दुनिया भर के कार्डिनल भाग लेंगे। मतदान वेटिकन स्थित सिस्टीन चैपल में आयोजित किया जाएगा। नए पोप के नाम की घोषणा सेंट पीटर्स बेसिलिका की बालकनी से "हैबेमस पापम" की घोषणा के साथ की जाएगी।


pope Francis के निधन से Banaras से Rome तक शोक

अलविदा pope Francis 

मसीही संस्थाएं व स्कूल-कालेज कल रहेंगे शोक में बंद 

ईस्टर संडे को किया था दुनिया को संबोधित, सहिष्णुता पर दिया था जोर


Varanasi (dil India live). वेटिकन सिटी में दुनिया के सबसे बड़े ईसाई धर्मगुरु पोप फ्रांसिस का सोमवार को निधन हो गया। उनका निधन वेटिकन के कासा सांता मार्टा स्थित उनके निवास स्थान पर हुआ। कार्डिनल केविन फेरेल, वेटिकन कैमरलेन्गो ने इसकी घोषणा करते हुए कहा कि “सोमवार को रोम से पोप फ्रांसिस पिता के घर लौट गए। उनका पूरा जीवन प्रभु और उनके चर्च की सेवा के लिए समर्पित था।’ उन्होंने कहा कि पोप फ्रांसिस ने हमें मूल्यों, साहस और सार्वभौमिक प्रेम के साथ जीना सिखाया, खासकर सबसे गरीब और सबसे हाशिए पर पड़े लोगों के लिए। 88 वर्षीय पोप फ्रांसिस अपने 12 साल के पोप कार्यकाल में वह कई बीमारियों से पीड़ित रहे। फ्रांसिस, पुरानी फेफड़ों की बीमारी से पीड़ित थे। युवावस्था में उनके एक फेफड़े का हिस्सा निकाल दिया गया था। उन्हें 14 फरवरी, 2025 को सांस की तकलीफ के कारण अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जो बाद में डबल निमोनिया में बदल गया। उन्होंने वहां 38 दिन बिताए। रविवार को पोप फ्रांसिस ने ईस्टर संडे के अपने संबोधन में विचार की स्वतंत्रता और सहिष्णुता का आह्वान किया।

गाज़ा के हालात पर जताई थी चिंता 

बेसिलिका की बालकनी से 35,000 से अधिक लोगों की भीड़ को ईस्टर की शुभकामनाएं देने के बाद, फ्रांसिस ने अपने पारंपरिक “उर्बी एट ओर्बी” (“शहर और दुनिया के लिए”) आशीर्वाद को पढ़ने का काम एक सहयोगी को सौंप दिया।उन्होंने भाषण में कहा, “धर्म की स्वतंत्रता, विचार की स्वतंत्रता, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और दूसरों के विचारों के प्रति सम्मान के बिना शांति नहीं हो सकती है.” उन्होंने “चिंताजनक” यहूदी-विरोध और गाजा में ‘नाटकीय और निंदनीय’ स्थिति की भी निंदा की।

बनारस में शोक, बंद रहेंगे स्कूल कालेज 

पोप फ्रांसिस के निधन से बनारस समेत देश दुनिया में शोक की लहर है। शोक में मसीही संस्थाएं व स्कूल-कालेज कल बंद रहेंगे। खास तौर पर जीवन ज्योति हायर सेकेण्डरी स्कूल सारनाथ, सेंट मैरीज कांवेंट स्कूल कैंटोंमेंट व सोना तालाब, सेंट जांस व सेंट जोसेफ आदि की सभी शाखाओं में अवकाश की घोषणा की गई है।

कैसे हुआ पोप का निधन, क्या थी बीमारी 

वपोप फ्रांसिस का निधन 21 अप्रैल 2025 को वेटिकन के कासा सांता मार्टा स्थित उनके निवास स्थान पर हुआ। वह 88 वर्ष के थे और लंबे समय से फेफड़ों की बीमारी से पीड़ित थे। उनके निधन की घोषणा वेटिकन केमरलेंगो कार्डिनल केविन फेरेल ने की, जिन्होंने कहा कि पोप फ्रांसिस ने अपने जीवन को प्रभु और उनके चर्च की सेवा के लिए समर्पित किया था।

पोप फ्रांसिस के निधन की वजह 


- पोप फ्रांसिस पुरानी फेफड़ों की बीमारी से पीड़ित थे, जिसके कारण उनके गुर्दे में भी खराबी के शुरुआती चरण नजर आने लगे थे।
- उन्हें 14 फरवरी 2025 को सांस की तकलीफ के कारण अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जो बाद में डबल निमोनिया में बदल गया।
- वह अस्पताल में 38 दिन रहे और हाल ही में ईस्टर कार्यक्रम में शामिल हुए थे।

मोदी व राहुल गांधी समेत कई की प्रतिक्रियाएं

-भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पोप फ्रांसिस के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया और उन्हें करुणा, विनम्रता और आध्यात्मिक साहस के प्रतीक के रूप में याद किया।
- कांग्रेस नेता राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी पोप फ्रांसिस के निधन पर दुख जताया और कहा कि उन्हें एक सच्चे धर्मगुरु के रूप में हमेशा याद किया जाएगा।

कौन बनेगा नया पोप, क्या है प्रकिया 

नए पोप के चयन की प्रक्रिया शुरू हो गई है, और कई नाम चर्चा में हैं। कुछ प्रमुख दावेदारों में शामिल हैं :
- फिलीपींस के कार्डिनल लुई एंटोनियो: अपनी धार्मिक नेतृत्व क्षमता और वैश्विक प्रभाव के लिए जाने जाते हैं।
- इटली के कार्डिनल पेट्रो पैरोलिन: वेटिकन के अनुभवी राजनयिक और चर्च के एक प्रमुख नेता।
- हंगरी के कार्डिनल पीटर एर्डो: चर्च के एक प्रमुख विद्वान और नेता।
- अमेरिका के कार्डिनल रेमंड लियो बर्के: एक अनुभवी कार्डिनल और चर्च के एक प्रमुख नेता।
- इटली के कार्डिनल मैटो जुप्पी: चर्च के एक युवा और गतिशील नेता।
- नीदरलैंड के कार्डिनल विलियम्स जैकब आइजक: चर्च के एक प्रमुख विद्वान और नेता।
- माल्टा के कार्डिनल मारियो ग्रेच: चर्च के एक अनुभवी नेता और वेटिकन के एक प्रमुख अधिकारी।
- जॉर्ज कूवाकड: एक वेटिकन राजनयिक और इंटररिलिजियस डायलॉग के प्रमुख।
नए पोप का चयन "कॉन्क्लेव" नामक प्रक्रिया के तहत किया जाएगा, जिसमें दुनिया भर के कार्डिनल भाग लेंगे। मतदान वेटिकन स्थित सिस्टीन चैपल में आयोजित किया जाएगा। नए पोप के नाम की घोषणा सेंट पीटर्स बेसिलिका की बालकनी से "हैबेमस पापम" की घोषणा के साथ की जाएगी।

Hazrat yaqub shahid रहमतुल्लाह अलैह का आज मनाया जा रहा है उर्स

गंगा जमुनी तहज़ीब और मिली जुली संस्कृति का मरकज़ है याकूब शहीद का दर


Mohd Rizwan

Varanasi (dil India live)। हज़रत याकूब शहीद बाबा रहमतुल्लाह अलैह नगवां, (लंका वाराणसी) का दो दिनी उर्स आज अकीदत के साथ मनाया जा रहा है। बाबा के दर पर अकीदतमंद कल से ही हाजिरी दे रहे हैं। इससे पहले उर्स मुबारक 20 अप्रैल (21 शव्वाल) इतवार की रात 10 बजे गुस्ल मज़ार शरीफ के साथ शुरू हो गया था। उसी वक्त हज़रत याकूब शहीद से अकीदत रखने वालों ने हाजिरी लगाईं और फातेहा पढ़ा।

मस्जिद हज़रत याकूब शहीद के इमामे जुमा हाफिज मोहम्मद ताहिर ने बताया कि 22 शव्वाल (21 अप्रैल) को बाद नमाज़ ज़ोहर कुरान ख्वानी के साथ ही अकीदतमंद बाबा के दर पर मन्नतें व मुराद मांगने उमड़ने लगे। बाबा का दर गंगा जमुनी तहज़ीब और मिली जुली संस्कृति का मरकज़ है। यहां दोनों वर्गों के लोग बाबा हज़रत याकूब शहीद में अकीदत और आस्था रखते हैं। उन्होंने कहा कि बाद नमाज़ मगरिब चादर गागर और कुल शरीफ होगा। इसके बाद आखिर में कव्वाली का सुफियाना कलाम मशहूर कव्वाल पेश करेंगे। उर्स देर रात तक जारी रहेगा।

रविवार, 20 अप्रैल 2025

Happy Easter ki गिरजाघरों में सुनाई दी गूंज

लोगों ने एक दूसरे को दी ईस्टर की बधाईयां 


वाराणसी। मध्य रात्रि से शुरू हुआ ईस्टर का जश्न रविवार को अपने शवाब पर था। कैथलिक व प्रोटेस्टेंट मसीही समुदाय ने ईस्टर को पुनुरुत्थान दिवस की खुशी के रूप में सेलीब्रेट किया। इस दौरान जुलूस निकले व गिरजाघरों में विशेष आराधनाएं हुई। लोगों ने एक दूसरे को हैप्पी ईस्टर' कह विश किया। सेंट मेरीज महागिरजा में ईस्टर संडे सुबह 8 बजे वाराणसी धर्मप्रांत की ओर से मनाया गया। इसमें हिन्दी व अंग्रेजी में अलग-अलग आराधना करायी गयी। इस मौके पर विदेशी सैलानियों ने भी महागिरजा में आराधना की। इस दौरान लोगों में एग और बन का प्रसाद भी बांटा गया।

तेलियाबाग चर्च में हुई प्रार्थना सभा

तेलियावाग सीएनआई चर्च में पादरी आदित्य कुमार ने प्रार्थना सभा को सम्बोधित करते हुए ईसा मसीह की महानता और उनके चमत्कार पर प्रकाश डाला। इस मौके पर मसीही गीत से पूरा चर्च गुंजायमान हो उठा। इससे पहले सुबह जुलूस निकला जिसमें कैंडिल लेकर ईसाई समुदाय के नर नारियों और बच्चों ने शिरकत की। ईस्टर का जश्न मनाते मसीही जुलूस गिरजाघर पहुंच कर सम्पन्न हुआ। लाल गिरजा में पादरी इकबाल मसीह ने प्रार्थना सभा में यीशु के प्रेम एवं वलिदान के महत्व पर रौशनी डाली। यहां विजय दयाल, शीला पॉल, डा. रोशनी फिलिप्स, रोमी सिंह, नील चरण कमल, डेविड, मोनिका फिलिप्स, रोहित चरण, सनी, आनंद आदि मौजूद थे। 

चर्च ऑफ बनारस में नाट्य का मंचन

चर्च ऑफ बनारस छावनी में पादरी बेन जॉन की अगुवाई व सु जॉन के संयोजन में ईस्टर मनाया गया। ईस्टर पर यहां नाठ्य का मंचन हुआ जिसमें चर्च के वच्चों ने प्रभु यीशु का कब्र से जी उठने को अपनी अभिव्यक्ति से मंच पर दर्शाया। यहां अंत में लोगों ने ईस्टर लंच भी किया।


लाल गिरजा पहुंचा कैडिल जुलूस

लाल गिरजाघर की कलीसिया ने सुवह कटिंग मेमोरियल से कैंडिल मार्च निकला जिसमें बड़ी संख्या में मसीही हाथों में कैडिल लिए हुए थे। जुलूस प्रभु यीशु मसीह की जयकार करते हुए लाल गिरजाघर कैंटोंमेंट पहुंच कर सम्पन्न हुआ। इस दौरान लोगों ने एक दूसरे को बधाई दी।

सेंट पाल चर्च में ईस्टर की खुशी

सिगरा स्थित सेंट पाल चर्च में पुनरुत्थान दिवस पादरी सैम जोशुआ की अगुवाई में मनाया गया। ऐसे ही सेंट थामस चर्च में पादरी न्यूटन स्टीवन, महमूरगंज स्थित सेंट बेटलफूल गॉस्थल चर्च में पास्टर एंड्रू थामस्, विजेता प्रेयर फिनिस्ट्रीज में पास्टर अजय कुमार की अगुवाई में ईस्टर मनाया गया।

Issra के hajj Training camp में उमड़े लोग

8 जिलहिज्जा को मिना के लिए रवाना होंने से पहले कर लें अपनी पूरी तैयारी 

Varanasi (dil India live). इसरा (ISSRA), वाराणसी की ओर से स्पेशल हज ट्रेनिंग कैम्प, ISSRA मुख्यालय उल्फत कंपाउंड, अर्दली बाजार में इस इतवार को भी जारी रहा। आज तीसरे इतवार को मौलाना अब्दुल हादी खां हबीबी की सरपरस्ती तथा शहर के मायनाज ओलमा की मौजूदगी में सकुशल सम्पन्न हुआ।हाफिज गुलाम रसूल,  मौलाना हसीन अहमद हबीबी, मौलाना निजामुद्दीन चतुर्वेदी आदि लोग मुख्य रूप से मौजूद थे। हाफिज गुलाम रसूल साहब ने प्रोग्राम की शुरूआत तिलावते कलाम पाक से की। मौलाना मुबारक ने अपने बयान में बताया कि 8 जिलहिज्जा को आप मीना के लिए रवाना होगें। इसकी तैयारी आप पहले से कर लें अपनी जरूरत की चीज जैसे तसबीह, पाकेट कलामपाक, फोल्डिंग चटाई, फोल्डिंग जानामाज, पानी की बोतल, खाने का सूखा सामान जैसे मेवा, सोन पपड़ी, सत्तू, फरूई चना वगैरह और जरूरत की अपनी दवायें मोअल्लिम का एड्रेस और फोन नम्बर जरूर रख लें। अपना मोबाइल और चार्जर अपने साथ जरूर रखें ताकि अपने ग्रुप से अगर बिछड़ गए तो राब्ता कायम कर सकें। 8 जिलहिज्जा को एहराम पहन कर मक्का से मीना को रवाना होना है, मीना में रात को कयाम करना है। वहाँ जोहर अस्र, मगरिब और ऐशा की नमाज पढ़ना है। मौलाना हसीन साहब ने हज के बारे में बताते हुए कहा कि दूसरे दिन 9 जिलहिज्जा की फज की नमाज मीना में पढ़कर अराफात के लिए रवाना होना है। याद रहे कि अगर आप यदि अराफात की हद में ही पहुंच सके तो आप का हज नहीं होगा। क्योंकि वकूफे आराफात फर्ज है यह हज का रूक्ने आजम है। मस्जिद नमरा में जोहर और अस्र की नमाज एक साथ पढ़ना है। अगर मस्जिद के बाहर पढ़ेगे तो जोहर की नमाज जोहर के बाद और अस की नमाज अस्र के वक्त पढ़ेगे। मगरीब के बाद मगरीब की नमाज बिना पढ़े हुए अराफात से मुज्दलेफा को रवाना होना है। मगरीब और ईशा की नमाज एक साथ मुज्दलेफा में अदा पढ़नी है कजा नहीं। रात में मुज्दलेफा में कयाम करना है। वकूफे मुज्दलेफा वाजिब है। आप मुज्देलफा में करीब 70 कंकरी चुनकर शैतान को मारने के लिए अपने पास रख लें। तीसरे दिन 10 जिलहिज्जा को मुज्देलफा से फजीर के बाद तुलूए आफताब से पहले मीना के लिए रवाना होना है। ज़वाल से पहले सिर्फ बड़े शैतान को 7 कंकरी मारना वाजिब है। 1.जब आप 10 जिलहिज्जा को बड़े शैतान को 7 कंकरी मार लेंगे तो उसके बाद कुर्बानी वाजिब है। हज्जे तमत्तो करने वाले को कुर्बानी करना मुस्तहब है। 2. यहाँ पर जानवर की वही शराइत है जो बकरीद की कुर्बानी की होती है। मसलन बकरा एक साल का हो इससे कम उम्र है तो कुर्बानी जाइज नहीं है। 3. अगर जानवर का कान एक तिहाई से ज्यादा कटा होगा तो कुर्बानी होगी ही नहीं। 4. अगर जबह करने आता है तो खुद जबह करें कि सुन्नत है। वरना जबह के वक्त हाजिर रहें। 5. ऊँट की कुर्बानी अफजल है। 6. यहाँ कुर्बानी के बाद अपने और तमाम मुसलमानों के हज व कुर्बानी कुबूल होने की दुआ माँगें। हज्जे तमत्तों के लिए तरतीब वाजिब है कि पहले रमी करें। फिर कुर्बानी करें तब हलक करायें। अगर इस तरतीब के खिलाफ किया तो दम वाजिब हो जायेगा। इसके अलावा हज जायरीन को अरबी की गिनती व अरबी में बोले जाने वाले आम बोलचाल की भाषाओं की जानकारी भी दी गई। औरतों में लेडीज ट्रेनर निकहत फातमा, समन खानम मौजूद थी।

ख़्वातीन की अलग हुई ट्रेनिंग

लेडीज ट्रेनर सबीहा खातून ने औरतों को रमी के बारे में बताते हुए कहा कि अमूमन देखा जाता है कि मर्द अक्सर बिना किसी वजह के औरतों की तरफ से रमी कर दिया करते हैं इस तरह से औरतें रमी की सआदत से महरूम रह जाती है और चूँकि रमी वाजिब है लिहाजा वाजिब के छूटने के सबब उन पर दम भी वाजिब हो जाता है। लिहाजा औरतें अपनी रमी खुद करें। लेडीज ट्रेनर सनम खानम बताती हैं कि अगर आप मरीज हैं और इस हालत में रमी अपना हाथ पकड़वा कर भी नहीं कर सकती हैं आप अपने साथ के मर्दों को रमी करने की इजाजत करें तब वे आपकी तरफ से रमी करेंगे। कुर्बानी के बाद औरतें सिर्फ तकसीर करवायें यानी चौथाई (1/4) सर के बालों में से हर बाल अगली पोर के बराबर कटवायें या खुद कैंची से काट लें। 

इनकी रही खास मौजूदगी 

इस मौके पर खुसूसी तौर पर वाराणसी से अली बख्श, रियाज अहमद, नसीर जमाल, मोहम्मद हनीफ, शमीम अहमद, ब‌रूदीन, शमशेर अंसारी, सर्फद्दीन चंदौली से जावेद अली, मसी अहमद खान, नियामतउलाह खान, मंजूर आलम, मो० साजिद बलिया से मुनौवर हुसैन, इम्तियाज अहमद, गाजीपुर से लाल मोहम्मद, मोहम्मद आजम, नसीदुल अमीन, आफताब आलम, जौनपुर से सिददीक जफर, अब्दुल कलाम, अब्दुल वकार, सोनभद्र से मो० आरिफ खान तथा औरतों में, चांद अफसाना, सुलताना, जैतुननिशा, रूखसाना परवीन, खुश्बू बानो, मरियम बीबी, दरख्शा बेगम, निकहत खान, सनम सहित इसरा के सदस्यगण एवं पदाधिकारीगण मौजूद थे। इस स्पेशल हज ट्रेनिंग कैम्प की अगली कड़ी में चौथे इतवार का प्रोग्राम 27 को इसरा (ISSRA) मुख्यालय में होगा।

प. हरिराम द्विवेदी में बनारस के लोकमन एवं मनुष्यता को परखने की थी दृष्टि-डा.रामसुधार सिंह

भाषा केवल प्रान्त की धरोहर नहीं होती बल्कि वह हमारी होती है धरोहर

Varanasi (dil India live). वसंत कन्या महाविद्यालय में पं. हरिराम द्विवेदी भोजपुरी साहित्य-शोध अध्ययन पीठ, हिन्दी विभाग द्वारा आयोजित पंडित हरिराम द्विवेदी जयंती समारोह एवं भोजपुरी कवि सम्मेलन अपरान्ह 2ः00 से 4ः30 के बीच महाविद्यालय के सभागार में हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलन एवं पुष्पांजलि से हुआ तत्पश्चात् संगीत विभाग की प्रो. सीमा वर्मा के निर्देशन में छात्राओं द्वारा सुमधुर कुलगीत का प्रस्तुत किया गया। इस मौके पर उत्तरीय और पौधा देकर प्रबंधक, प्राचार्या एवं विभागाध्यक्ष द्वारा अतिथियों को सम्मानित किया गया। स्वागत वक्तव्य देते हुए महाविद्यालय की प्राचार्या प्रोफेसर रचना श्रीवास्तव ने कहा कि यहां इस अवसर पर आज हिन्दी के सितारे विभिन्न रूप में उपस्थित हैं। आज के इस कार्यक्रम से निश्चित रूप से भोजपुरी जगत में एक नया अध्याय जुड़ेगा। अपनी संस्कृति एवं सभ्यता को संवारने के लिए मातृभाषा अत्यन्त आवश्यक है।

अध्ययन पीठ को स्थापित करने के उद्देश्य के विषय में हिन्दी विभाग की अध्यक्षा प्रो. आशा यादव ने कहा कि कोई भी भाषा केवल प्रान्त की धरोहर नहीं होती बल्कि वह हमारी धरोहर होती है। भोजपुरी अत्यन्त उदार भाषा है इसमें कोमलता इतनी है कि यह किसी भी भाषा को अपने में समाहित करने की क्षमता रखती है। 12 वीं शताब्दी के उक्ति-व्यक्ति प्रकरण में भोजपुरी की चर्चा आती है। इसके लिखित स्वरूप का ना होना इसकी सबसे बड़ी विडम्बना है। अगर इसको शोध से जोड़ दिया जाये तो इसका महत्व बढ़ सकता है। भोजपुरी भाषा को आगे बढ़ाये जाने के संदर्भ में ही इस पीठ की स्थापना की गई है। आपने बताया कि भोजपुरी के संदर्भ में एक एम.ओ.यू. भी हस्ताक्षरित किया गया है। द्विवेदी लोकजीवन एवं संस्कृति के लिए समर्पित कवि हैं। इन्होंनेे राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भोजपुरी को प्रसारित किया। वे अधिकतर बाबूजी और हरि भैया के नाम से प्रचलित थे।

महाविद्यालय की प्रबन्धक उमा भट्टाचार्या ने कहा कि हिन्दी विभाग, महाविद्यालय का उत्कृष्ट विभाग है। आज हम भोजपुरी के नामित कवि को सम्मानित करने जा रहे हैं। भोजपुरी एक मीठी भाषा है। जिससे हम अपने व्यक्तित्व में निखार ला सकते है।

अध्यक्षीय उद्बोधन देते हुए उदय प्रताप कॉलेज हिंदी विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. राम सुधार सिंह ने कहा कि द्विवेदी जी पर बात करने के लिए मन और संवेदना की जरूरत है। अधिकांशतः कवि एवं कविता पर साथ बात नहीं की जा सकती है। किन्तु हरिराम द्विवेदी में कवि एवं कविता अलग-अलग नहीं है उनमें बनारस के लोकमन एवं मनुष्यता को परखने की दृष्टि थी। उन्होंने अपने वक्तव्य में हरिराम द्विवेदी की रचना एवं उसकी विशेषता पर भी बात कही।

मुख्य अतिथि वक्ता के रूप में बोलते हुए हिन्दी विभाग काहिविवि के पूर्व अध्यक्ष प्रो. सदानंद शाही ने कहा कि द्विवेदी जी भोजपुरी के हीरामन थे। कवि की खूबियों के साथ कमियों की भी बात की जानी चाहिए। द्विवेदी जी जो समय के पाबंद थे और वह उनके आचरण में भी दिखाई देता है। जीवन में समय की पाबंदी सफलता का मूलमंत्र है। उनके अंदर अभिमान नहीं था। कवि और कविता के लिए लोगों के जुबान पर टिके रहना सबसे बड़ी सफलता है। भोजपुरी की गंभीरता द्विवेदी जी के साहित्य में दिखाई देता है। वे एक स्वप्नद्रष्टा कवि थे जो स्वप्नों को जिंदा रखने की बात करते थे।

प्रो. चन्द्रकला त्रिपाठी ने पं. हरिराम द्विवेदी की स्मृतियों को साझा करते हुए कहा कि हरि भैया सबसे सरलता और नेह से मिलते थे। भोजपुरी में प्रयुक्त मेहना, महीन इत्यादि शब्दों की व्याख्या करते हुए उन्होंने द्विवेदी जी की स्मृतियों को साझा किया। भाषा की देशज टोन को अपने मधुर कंठ से गाकर सुनाया और यह भी बताया कि भोजपुरी का कलेवर पाकर कौशल्या का कलेजा और भी संवेदनशील हो जाता है।

तत्पश्चात् अपना वक्तव्य देते हुए प्रो. आनंद वर्धन शर्मा द्विवेदी जी के बारे में कहते है कि उनके हृदय में सरलता, कोमलता, स्निग्धता स्थायी रूप से विद्यमान था जो न केवल उनके व्यक्तित्व में अपितु रचनाओं में भी समान रूप से दिखाई देता है। द्विवेदी जी ने रोला, दोहा, नवगीत एवं मुक्त छन्द का बहुलता के साथ प्रयोग किया है।

भोजपुरी के जाने-माने कवि और कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि प्रो. प्रकाश उदय ने भोजपुरी के महत्व एवं पं द्विवेदी पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि हरि भैया जी का महत्व केवल भोजपुरी के कवि के रूप में ही नहीं अपितु उन्होंने बांवला जी जैसे व्यक्तित्व को भी स्थापित किया है। वे कवि के साथ एक जिंदादिल इंसान भी थे। धुन, राग, साज उनके भीतर चलता रहता था। उनकी कविता में लहर थी। द्विवेदी जी में कजरी का पंाडित्य भरा हुआ था। उनका मानना था कि लोकगीत एवं लोककथा को कंठ में बसाने एवं कहे जाने से ही उसका संरक्षण किया जा सकता है।

ऑल इंडिया रेडियो आकाशवाणी महमूरगंज, वाराणसी के निदेशक राजेश गौतम ने अपना वक्तव्य देते हुए कहा कि लोकगीत, लोककथा, नौटंकी इत्यादि लोकविधाओं पर द्विवेदी जी की अच्छी पकड़ थी। उनकी स्मृतियां संजोने योग्य है क्योंकि उन्होंने लोकगीत एवं लोकसंगीत में अंतर भी बताया है।

सारस्वत अतिथि के रूप में पूर्व प्राचार्या एवं पीठ की कार्यकारिणी समिति की उपाध्यक्ष प्रो. सविता भारद्वाज ने बताया कि बाबूजी बेटियों को बहुत प्रेम करते थे। वे संत जैसे आचरण एवं चरित्र वाले व्यक्ति थे। साथ ही उन्होंने अध्ययनपीठ को स्थापित करने की परिकल्पना एवं अध्ययनपीठ को अपनी तरफ से पुस्तकें भी भेंट करने की बात कही।

कार्यक्रम के मध्यावसान में पंडित हरिराम द्विवेदी के जीवन पर आधारित लघु फिल्म का प्रदर्शन किया गया। कार्यक्रम के द्वितीय सत्र भोजपुरी कवि-सम्मलेन में महाविद्यालय की प्राचार्या द्वारा अंगवस्त्र एवं पौधा देकर अतिथियों का अभिनन्दन किया गया । तत्पश्चात् अतिथि-कवियों प्रो. रामसुधार सिंह, 

प्रो. सदानंद शाही, प्रो. जगदीश पंथी, प्रो. आनंद वर्धन शर्मा, प्रो. प्रकाश उदय, डॉ. रामनारायण तिवारी, श्री नागेश शांडिल्य, प्रो. आशा यादव ने विविध विषयों पर अपने भोजपुरी काव्य-पाठ से कार्यक्रम को जीवन्तता प्रदान की। मंच संचालन हिन्दी विभाग की डॉ. प्रीति विश्वकर्मा ने किया। धन्यवाद ज्ञापन डॉ. सपना भूषण ने किया।

कार्यक्रम में महाविद्यालय के शिक्षक-शिक्षिकाएँ, विद्यार्थी एवं अन्य गणमान्य अतिथियों के साथ छपरा से पृथ्वीराज जी, काहिविवि से प्रो. वशिष्ठ नारायण त्रिपाठी एवं महाविद्यालय की पूर्व अध्यापिका डाॅ. कुमुद रंजन भी उपस्थित थीं साथ ही आभासीय माध्यम से महाविद्यालय की पूर्व प्राचार्या डॉ0 कुसुम मिश्रा, 

डॉ. माधुरी अग्रवाल, डॉ. अनुराधा बनर्जी, डाॅ. नन्दिनी वर्मा, डाॅ. बीना सिंह एवं प्रो. आशा यादव जुड़ी रहीं । रिपोर्ट लेखन डॉ. शशिकला एवं राजलक्ष्मी ने किया ।

शनिवार, 19 अप्रैल 2025

St. Mary's Church में हुआ देर रात ईस्टर का आगाज ...

देश दुनिया में ईस्टर का महापर्व शुरू 

महागिरजा में झूमे मसीही, ख्रीस्त हमारा जी उठा, खुशी मनाएं झूमे-गाएं...

Varanasi (dil India live)। सेंट मेरीज महागिरजा की घड़ी ने जैसे मध्य रात्रि का संकेत दिया, मसीही समुदाय ईस्टर की खुशी में झूम उठा। कैथलिक चर्चे में एक साथ पास्का गीत बुलंद हो उठे 'जी उठा-जी उठा, खीस्त हमारा जी उठा, खुशी मनाए, झूमे गाए अल्लेलूया।'...व 'आओ खीस्त भक्तगण आओ, परित्राता की महिमा गाओ, पूजनीय पास्का के बलि को तुम सब महिमा गान चढ़ाओ।' देर रात तक सेंट मेरीज महागिरजा के अलावा मातृधाम, सेंट जांस महरौली, सेंट फ्रांसिस ऑफ असीसी चर्च नगवां, सेंट जॉस महरौली, सेंट जांस डीरेका, मरियम माता चर्च मवैया समेत तमाम कैथलिक चर्च खूबसूरत गीतों से देर रात तक गूंजते रहे। दरअसल प्रभु ईसा मसीह की क्रूस पर शुक्रवार को हुई पवित्र मौत के बाद रविवार को प्रभु ईसा मसीह जी उठे थे इसकी खुशी में मसीही समुदाय ने देर रात्रि तक खुशियां मनाई। इस दौरान चर्चों और गिरजाघरों में प्रभु यीशु की झांकी देखने मसीही पहुंचे, विशेष प्रार्थना सभा भी हुई। सेंट मेरीज महागिरजा में वाराणसी धर्मप्रांत के धर्माध्यक्ष बिशप यूजीन की अगुवाई व पल्ली पुरोहित के संयोजन में प्रार्थना सभा व गीत- संगीत का कार्यक्रम शुरू हुआ। कार्यक्रम में देर रात चर्च परिसर में कैंडल के आग से आशीष की गयी। तत्पश्चात उसी आग से एक बड़ा-सा कैंडल जलाया गया। जिसे लोग पास्का मोमबत्ती कहते हैं। उस कैंडल से उपस्थित सभी लोगों ने बारी-बारी से कैंडल जलाकर एक जुलूस निकाला और जुलूस में प्रभु यीशु का जयकारा लगाते हुए मसीही चर्च के अंदर चले गये।

इस मौके पर फादर थामस, फादर अगस्टीन, सिस्टर अंजू, सिस्टर प्रीति, सिस्टर मंजू, सिस्टर विनाया, सिस्टर तारा आदि मौजूद थीं।  उधर प्रोटेस्टेंट मसीही समुदाय के गिरजाघरों में ईस्टर की पूर्वसंध्या पर बाइबिल का पाठ हुआ। सेंट पाल चर्च में पादरी सैम जोशुआ सिंह की अगुवाई में ईसा मसीह के दुखभोग काल पर प्रकाश डाला गया। लाल चर्च में यूथ फेलोशिप व वीमेन विंग की ओर से पूर्वसंध्या पर प्रार्थना सभा हुई तो तेलियाबाग चर्च में पादरी आदित्य ने प्रार्थना सभा को संबोधित किया।

आज बटेगा ईस्टर एग

 प्रभु ईसा मसीह के पुनः जीवित होने की याद में ईस्टर पर रविवार को ईस्टर एग का तबर्रक लोगों में बांटा जायेगा। ईसाई मान्यता है कि अंडा पुनर्रत्थान का प्रतीक है। इसलिए एंग का तबर्रुक तकसीम किया जाता है।


उधर खलारी कैथोलिक चर्च में शनिवार को मसीही विश्वासियों ने पास्का जागरण का पर्व हर्षोल्लास मनाया। मान्यता के अनुसार आज के दिन ही प्रभु यीशु सूली पर चढ़ने के बाद फिर से जी उठे थे। इसी खुशी में मसीही विश्वासी पास्का जागरण का पर्व मनाते हैं। फादर आर्थर, फादर हेलारियुस तिग्गा व फादर ऑस्कर टोप्पो ने ज्योति गुणगान गाया। लोगों को बाइबल का पाठ पढ़ाया गया। फादर ने प्रभु यीशु के पूर्व जन्म के बारे में बताया। कहा कि जिस प्रकार प्रभु यीशु मृत्यु से जी उठे, उसी प्रकार हम मानव जाति भी दुनिया के अंत में पूरे शरीर के साथ पुनर्जीवित होंगे। इसलिए सभी लोग दुनिया के अंतिम दिन तक अच्छा काम करें। कहा कि यह पर्व प्रेम, दया, दीनता, नम्रता का संदेश देता है। प्रभु यीशु ने दूसरों के लिए प्रेम करने व जीने की शिक्षा दी है। इस अवसर पर फादर खलारी चर्च में सिस्टर निर्मला सामुएल, सिस्टर दिव्या, सिस्टर नेली, सिस्टर ओलिश, सुषमा, नेली तिर्की, नेहा तिग्गा, प्रिया खलखो, उजाला लकड़ा, जोयसी कुजूर, संगीता टोप्पो, नरेश करमाली, अमित तिर्की, प्रदीप कुजूर, रोबिन एक्का, चार्ल्स पेंटोनी, प्रकाश टोप्पो, अनुराग टोप्पो, आदित्य कुजूर, समीर मिंज, सुनील तिर्की, विनोद टोप्पो, पॉल खलखो, रूमीला रुंडा, इनोसेंट कुजूर, प्रकाश कुजूर, ज्ञान कुजूर, सी कुजूर, पारस खलखो, गाजो रुंडा, जेवियर तिग्गा, पीटर तिग्गा, रोहित मैथ्यू, दीपक टोप्पो, विनीता टोप्पो, तेरेसा कुजूर, तेरेसा तिग्गा सहित कई मसीही विश्वासी उपस्थित थे।