शनिवार, 3 जुलाई 2021

गज़ल

      डॉ. अत्रि भारद्वाज

 वाराणसी 03 जुलाई (दिल इंडिया लाइव)


जीवन की मेरे इतनी बस राम कहानी है।
बचपन है गुलाबों का,पत्थर की जवानी है।।


यह फूल पे शबनम है,कागज पे है चिंगारी ।
जम जाए तो मोती है, बह जाए तो पानी है।।


इक चांद का टुकड़ा है,इक गीत का मुखड़ा है।
मौसम की जवानी की,एक शाम सुहानी है ।।


मेहनत का पसीना है,एहसास के माथे पर ।
दुनिया ये समझती है, चांदी की निशानी है ।।


साहिल पे खड़े हो कर,हर देखने वाले को ।
तूफां से गुजर जाना, आसान बयानी है।

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