मंगलवार, 23 सितंबर 2025

India Post: डाक बचत योजनाएं सुरक्षित निवेश के साथ आर्थिक सशक्तिकरण का माध्यम

डाक सेवा–जन सेवा मिशन के तहत 

पाटन में भव्य डाक मेले का पोस्टमास्टर जनरल कृष्ण कुमार यादव ने किया आगाज़

सुकन्या समृद्धि योजना के जरिए बेटियों को दें वित्तीय सुरक्षा-पोस्टमास्टर जनरल 

Ahmedabad (dil india live).भारतीय डाक विभाग वित्तीय समावेशन और डिजिटल इंडिया को जमीनी स्तर तक प्रभावी रूप से लागू करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। ‘डाक सेवा - जन सेवा’ के अनुरूप देश के सुदूर व ग्रामीण क्षेत्रों तक इसकी मजबूत पहुँच और विश्वसनीय सेवाओं ने इसे लोगों के बीच एक प्रभावशाली संगठन के रूप में स्थापित किया है। उक्त उदगार उत्तर गुजरात परिक्षेत्र के पोस्टमास्टर जनरल कृष्ण कुमार यादव ने पाटन स्थित हेमचंद्राचार्य उत्तर गुजरात विश्वविद्यालय परिसर में 23 सितम्बर को आयोजित “डाक व्यवसाय विकास एवं वित्तीय समावेशन” महामेले का बतौर मुख्य अतिथि शुभारंभ करते हुए व्यक्त किए। 


महामेले के माध्यम से जहाँ डाक सेवाओं के बारे में जानकारी दी गई, वहीं पोस्टमास्टर जनरल श्री कृष्ण कुमार यादव ने विभिन्न बचत योजनाओं, सुकन्या समृद्धि योजना, डाक जीवन बीमा, इण्डिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक के लाभार्थियों को पासबुक व पॉलिसी बॉन्ड प्रदान किए। इसके साथ ही उन्होंने उत्कृष्ट कार्य करने वाले डाककर्मियों को सम्मानित कर उनका उत्साहवर्धन भी किया। पाटन मंडल के डाक अधीक्षक श्री एच सी परमार ने सभी का स्वागत किया।

पोस्टमास्टर जनरल श्री कृष्ण कुमार यादव ने कहा “डाक विभाग अब केवल पत्र वितरण तक सीमित नहीं है; यह वित्तीय समावेशन, डिजिटल इंडिया और सामाजिक-आर्थिक विकास का एक गतिशील मंच बन चुका है। “डाकिया डाक लाया” से “डाकिया बैंक लाया” तक के सफ़र में डाकघर लोगों को सरकारी योजनाओं, बैंकिंग, बीमा, और वैश्विक बाजारों से जोड़कर सशक्त बना रहे हैं। उन्होंने डाकघरों में हाल ही में शुरू की गई “एडवांस्ड पोस्टल टेक्नोलॉजी (एपीटी) 2.0” का उल्लेख किया, जो सेवाओं को और अधिक स्मार्ट और सुलभ बना रही है।

इस महा मेले में डाक चौपाल का भी आयोजन किया गया, जिसमें आधार नामांकन, पासपोर्ट सेवाओं जैसे सरकारी कल्याण योजनाओं के साथ आईपीपीबी के माध्यम से डिजिटल बैंकिंग, डीबीटी, जनरल इंश्योरेंस, डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट के बारे में जागरूकता बढ़ाई गई। विशेष रूप से दूरदराज और गैर-बैंकिंग क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया गया। स्थानीय कारीगरों और एमएसएमई हेतु ई-कॉमर्स और अंतरराष्ट्रीय निर्यात के लिए डाकघर निर्यात केंद्र के बारे में जानकारी दी गई। युवाओं को फ़िलेटली के प्रति प्रोत्साहित करते हुए फ़िलेटलिक डिपाजिट खाता और माई स्टैंप से जोड़ा गया।


पोस्टमास्टर जनरल श्री कृष्ण कुमार यादव ने बालिकाओं को सुकन्या समृद्धि योजना की पासबुक और उपहार देते हुए कहा कि बेटियों की शिक्षा और आर्थिक सुरक्षा ही सशक्त समाज की नींव है। श्री यादव ने उपस्थित सभी लोगों से अपील की कि वे नवरात्रि जैसे पावन पर्वों पर बेटियों के सुकन्या समृद्धि योजना के अंतर्गत खाते खुलवाकर उन्हें वित्तीय उपहार अवश्य प्रदान करें । इस अभिनव प्रयास के अंतर्गत पूरे उत्तर गुजरात में 4.77 लाख सुकन्या समृद्धि खाते संचालित हैं, वहीं 850 गाँवों को ‘सम्पूर्ण सुकन्या समृद्धि ग्राम’ बनाया जा चुका है। पाटन जिले में अब तक 34 हजार से अधिक सुकन्या समृद्धि खाते खोले जा चुके हैं। साथ ही, 108 गाँवों को ‘सम्पूर्ण सुकन्या समृद्धि ग्राम’ घोषित किया गया है।

पोस्टमास्टर जनरल श्री कृष्ण कुमार यादव ने कहा की डाकघर की बचत योजनाएं न केवल सुरक्षित और भरोसेमंद निवेश का माध्यम प्रदान करती हैं, बल्कि यह सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ-साथ आर्थिक आत्मनिर्भरता को भी सशक्त रूप से बढ़ावा देती हैं।

पाटन  डाक मंडल के डाक अधीक्षक श्री एच सी परमार ने कहा कि डाक सेवाओं से समाज के हर व्यक्ति को जोड़ा जा रहा है। पाटन  मंडल में वित्तीय समावेशन के तहत कुल 2.94 लाख बचत खाते, 85 हजार आईपीपीबी  खाते संचालित हैं। पाटन  में 105 गाँवों को 'सम्पूर्ण बीमा ग्राम' और हाल ही में शुरू की गई नवीनतम पहल के अंतर्गत 14 गाँवों को ‘सम्पूर्ण बचत ग्राम भी बनाया जा चुका है। पाटन  प्रधान डाकघर में संचालित पासपोर्ट सेवा केंद्र के माध्यम से इस  वित्तीय वर्ष में 3 हजार से अधिक लोगों ने पासपोर्ट बनवाया। पाटन मंडल के समस्त शाखा डाकघरों ने ‘सिल्वर वॉरियर’ के सभी निर्धारित मानकों को सफलतापूर्वक पूर्ण किया है। वहीं, 2 शाखा डाकघरों ने ‘डायमंड वॉरियर’ एवं 16 शाखा डाकघरों ने ‘गोल्डन वॉरियर’ की श्रेणी में स्थान हासिल किया है।

डाककर्मियों का हुआ सम्मान

इस अवसर पर पोस्टमास्टर जनरल श्री कृष्ण कुमार यादव ने योगेशभाई आर. दवे, रेवाभाई एच. चौहान, मलाजी डी. ठाकोर, सचिनभाई पी. जोशी, गणपतभाई. जोशी, शैलेशभाई. जोशी, यश पी. मोदी, दीप एम. बारोट, बलदेव बी. प्रजापति, श्यामभाई डी. नाडोड़ा, मंजीज़ी एच. ठाकोर, वालजीभाई एच. राबारी, कृषी एच. नाई, भार्गव एस. मोदी, हैप्पी एम. सोलंकी, रमीलाबेन बी. देसाई, रोनक आर. राठोड़, एच. डी. ठक्कर, नरेश जे. सोलंकी, मुकेश डी. सोलंकी, मित्तल डी. जोशी को विभिन्न सेवाओं में उत्कृष्ट कार्य के लिए सम्मानित किया। साथ ही पाटन  डाक मंडल के उप-मंडलीय प्रमुख श्री नेहल पटेल, एस आई घांची, जीतेन्द्र अडालिया को भी सम्मानित किया गया। 

इस अवसर पर अधीक्षक डाकघर श्री एच सी परमार, सहायक निदेशक श्री एम एम शेख, आइपीपीबी चीफ मैनेजर अभिजीत जिभकाटे, मैनेजर विष्णुवर्धन रेड्डी, पाटन निगम पार्षद राजेन्द्र के. हिरवणिया, सहायक अधीक्षक के. बलासुब्रह्मनियम, डाक निरीक्षक विनु भरवाड, नेहल पटेल, एस आई घांची, जीतेन्द्र अडालिया, पाटन पोस्टमास्टर वालजीभाई रबारी सहित तमाम स्थानीय जनप्रतिनिधि, डाक कर्मियों एवं सम्मानित जनता ने भागीदारी की।

UP: Varanasi Main All India Mushayra व Kavi sammelan सम्पन्न

मुशायरे में विभिन्न हस्तियों का हुआ सम्मान

Varanasi (dil india live)। सदियों से शहर बनारस साझा संस्कृति व गंगा जमुनी तहज़ीब, ज्ञान, साहित्य और संस्कृति का केंद्र रहा है, कबीर और नज़ीर की उसी पावन धरती पर कवियों और शायरों ने अपने अंदाज में जब एकता और अखंडता को मजबूत करते अशरार पेश किए तो मौजूद कद्रदान वाह वाह कर उठें। मौका था साहित्यिक संध्या गुलिस्तां स्कूल, क़ाज़ी सादुल्लाह पुरा, चौका घाट, वाराणसी में टीम कविता वाला के तत्वावधान में आयोजित ऑल इंडिया मुशायरा व कवि सम्मेलन का। 


इस गरिमामयी आयोजन की अध्यक्षता मुस्लिम इंटर कॉलेज के पूर्व प्रधानाचार्य भाषा विशेषज्ञ और उस्ताद शायर आबिद हाशमी ने की। वहीं मुख्य अतिथि बुनकर बिरादराना तंज़ीम बाइससी के अध्यक्ष सरदार मोईनुद्दीन अंसारी थे।

इस दौरान वाराणसी की उन विशिष्ट हस्तियों को साहित्य सम्मान से अलंकृत किया गया, जिन्होंने शैक्षिक, सामाजिक, साहित्यिक और सांस्कृतिक क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान दिया है। इनमें डॉ. अकबर, हाजी इश्तियाक़, अब्दुल्ला बिन ग़फ़्फ़ार, असलम ख़लीफ़ा, डॉ. अज़हर सईद, आक़िब एडवोकेट, डॉ. एहतेशामूल हक और शमीम रियाज़ के नाम प्रमुख हैं।

 इस दौरान मुशायरे के रुहे रवां और विख्यात शायर दानिश इक़बाल ने अपने उद्गार व्यक्त करते हुए कहा "आज का यह दौर बेहद चुनौतीपूर्ण है, जब समय की कमी और सांप्रदायिक तत्व हमारी गंगा-जमुनी तहज़ीब और राष्ट्रीय एकता को चुनौती दे रहे हैं,ऐसे माहौल में टीम कविता वाला ने यह संकल्प लिया है कि जहाँ-जहाँ नफ़रत के बीज बोए जाएँगे, वहाँ-वहाँ हम मोहब्बत और भाईचारे के गुलाब खिलाएँगे। आज का यह मुशायरा और कवि सम्मेलन उन्हीं नफ़रती ताक़तों के खिलाफ एक साहित्यिक जवाब है। भविष्य में हमारी टीम बनारस और उसके आसपास के क्षेत्रों में भी इस तरह के आयोजनों को निरंतर करती रहेगी।"


इस सफल और ऐतिहासिक मुशायरे में देश भर से पधारे कवियों और शायरों ने अपनी रचनाएँ प्रस्तुत कीं और श्रोताओं से भरपूर सराहना प्राप्त की। श्रोताओं का उत्साह और उनकी साहित्यिक रुचि इस बात का प्रमाण था कि बनारस की मिट्टी आज भी तहज़ीब, संस्कृति और कला की सच्ची संरक्षक है।

कार्यक्रम के अंत में यह प्रार्थना की गई कि इस तरह की साहित्यिक परंपराएँ निरंतर जारी रहें और ज्ञान व साहित्य का उजाला पूरे देश को आलोकित करता रहे। 

इस मुशायरा और कवि सम्मेलन में जिन शायरों और कवियों ने अपने कलाम पेश किये उन के नाम मुख्य रूप से आबिद हाशमी सलेमपुरी, सुहेल उस्मानी, डॉक्टर शाद मशरकी, जम जम रामनगरी, डॉ प्रशांत सिंह, रौशन अहमद रौशन, अनिल प्रवक्ता, रोहित पांडे, शारिक़ फूलपूरी, डॉ सुरेश कुमार अकेला, मोहम्मद आमिर इत्यादि हैं। दरअसल आयोजन का मुख्य उद्देश्य समाज में शैक्षिक जागरूकता और साहित्यिक चेतना को प्रोत्साहित करना था। जिसमें आयोजन काफी हद तक कामयाब होता दिखा।




Kolkata main महालय पर साहित्य सम्मेलन में जुटे साहित्य प्रेमी

"प्रौद्योगिकी का प्रभाव साहित्य को क्षति न पहुंचाए"-कवि सुदीप चंद्र हालदार

Kolkata (dil india live). महालय की पवित्र सुबह कोलकाता के हृदयस्थल में एक भव्य साहित्यिक सम्मेलन, कविता पाठ और सम्मान समारोह का आयोजन हुआ। इस आयोजन का सूत्रधार था उभरता हुआ प्रकाशन समूह "ऐक्यतान"। इस अवसर पर कुल 28 पुस्तकों का विमोचन हुआ जिनमें 19 सामूहिक संकलन तथा 9 एकल काव्य संग्रह शामिल था। इस दौरान करीब 200 से अधिक साहित्य प्रेमियों की उपस्थिति ने इस आयोजन को बेहद जीवंत बना दिया। कार्यक्रम में युवा कवि व शोधकर्ता सुदीप चंद्र हालदार को उत्तरीय पहनाकर एवं "शारदीय सम्मान" स्मृति चिह्न प्रदान कर विशेष रूप से सम्मानित किया गया।



कवि सुदीप चंद्र हालदार ने कहा-

 "चारों ओर पर्व का उल्लास है, प्रकृति स्वयं मानो मातृ स्वागत को तत्पर है। ऐसे दिन में एक साहित्यिक संगोष्ठी वास्तव में एक अनुपम संगम है। बांग्ला साहित्य, विश्व साहित्य की एक अमूल्य धरोहर है। इसे आगे ले जाने के लिए युवाओं को और भी गंभीर होना होगा। हमें सजग रहना होगा कि तकनीकी प्रगति साहित्य को नुकसान न पहुंचा पाए।

युवाओं की साहित्य साधना वास्तव में सराहनीय 
 "मुख्य अतिथि प्रोफेसर तबारक अली ने कहा "इस तकनीक-प्रधान युग में युवाओं की साहित्य साधना वास्तव में सराहनीय है।" कवयित्री सुलताना परवीन ने अपने विचार साझा करते हुए कहा "नवीन पीढ़ी की साहित्य के प्रति निष्ठा और प्रेम देख मैं अभिभूत हूं।"


कार्यक्रम के अंतिम चरण में, ऐक्यतान प्रकाशन के प्रमुख संगबाद साहू ने सभी को धन्यवाद ज्ञापित किया और भविष्य में भी साहित्य साधना के पथ पर साथ चलने का आह्वान किया।कार्यक्रम में अन्य विशिष्ट उपस्थितियों में रियाली बोस, नीलिमा मंडल, सौमी सरकार, मौमिता गुड़िया और देबाशीष राय जैसे गणमान्य साहित्यकार उपस्थित थे।

Kolkata: ICCR द्वारा अवनींद्रनाथ आर्ट गैलरी में लगी अनोखी काव्य प्रदर्शनी

माँ दुर्गा के चरणों में कविता का अर्पण

ICCR में कवि सुदीप की लेखनी ने जीते दिल

Kolkata (dil india live). महालय के अवसर पर, देवी पक्ष के शुभारंभ के पावन क्षण में, भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (ICCR), कोलकाता के अवनींद्रनाथ आर्ट गैलरी में एक अनोखी काव्य प्रदर्शनी का आयोजन हुआ। यह प्रदर्शनी जो समर्पित थी जगज्जननी महादुर्गा को। इस शाम यह विशिष्ट साहित्यिक संध्या पूरे शहर में एक सांस्कृतिक उत्सव का वातावरण लेकर आई।


इस प्रदर्शनी के केंद्र में थे नवोदित कवि और शोधकर्ता सुदीप चंद्र हलदार, जिनकी कविताओं की हर पंक्ति में माँ दुर्गा की शक्ति, सौंदर्य और शाश्वतता की झलक सुनाई दी। सुदीप की रचनाएं केवल दर्शकों का मन नहीं जीत पाईं, बल्कि देवी पक्ष के आरंभ में यह कविता के माध्यम से माँ के चरणों में एक निःस्वार्थ अर्पण बन गईं। कार्यक्रम में उपस्थित लगभग 500 से अधिक गणमान्य अतिथि और साहित्यप्रेमी उनके लेखन की मुक्तकंठ से सराहना करते दिखे, जिससे पूरी गैलरी उत्साह और श्रद्धा से गूंज उठी। कार्यक्रम के दौरान अपने उद्गार व्यक्त करते हुए कवि सुदीप चंद्र हलदार ने गहन भावनाओं के साथ कहा:

“यह संसार माँ दुर्गा के स्वागत के लिए सज रहा है। समस्त जगत उनकी दिव्य उपस्थिति की प्रतीक्षा कर रहा है। चारों ओर उत्सव का माहौल है। ऐसे समय में इस प्रकार की एक प्रदर्शनी का अपना एक विशेष अर्थ है।यह मानो कला की भाषा में देवी का आमंत्रण है।”


कला, भक्ति और कविता का संगम

उन्होंने इस अवसर के लिए आयोजकों का हार्दिक धन्यवाद किया, सभी दर्शकों और श्रोताओं के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की और अपने भावी साहित्यिक पथ के लिए सभी से आशीर्वाद की कामना की। यह प्रदर्शनी केवल एक काव्य संध्या नहीं थी, यह थी कला, भक्ति और कविता का संगम, जहाँ शब्द देवी के चरणों में अर्पित एक प्रार्थना बन गए।

सोमवार, 22 सितंबर 2025

National: Mufti-E-Nepal मौलाना jaish मोहम्मद सिद्दीकी का उर्स अकीदत से मनाया गया

शेरे नेपाल की दीनी ख़िदमात पर उलेमा ने डाली रौशनी
शेरे नेपाल, मुफ्ती मौलाना जैश मोहम्मद सिद्दीकी (फाइल फोटो)

Varanasi (dil India live). मुफ्ती-ए-आजम नेपाल, हजरत मौलाना मुफ्ती जैश मोहम्मद सिद्दीकी (शेरे नेपाल) का बनारस से गहरा रिश्ता था। बनारस में उनके लाखों अकीदतमंद और सैकड़ों मुरीद हैं। वो जब भी यूपी के दौरे पर निकलते थे तो बनारस जरुर आते थे। ये बातें उनके उर्स के दौरान उलेमा ने कही। जामा मस्जिद कम्मू खां डिठोरी महाल में हुए उर्स में शेरे नेपाल मौलाना मुफ्ती जैश मोहम्मद सिद्दीकी (रहमतुल्लाह अलैह) की दीनी ख़िदमात और इस्लाम की तहरीक के लिए किए गए कार्यों पर भी उलेमा ने बारीकी से रौशनी डाली।

गौरतलब हो कि जामा मस्जिद कम्मू खां डिठोरी की नव तामीर के लिए संगे बुनियाद शेरे नेपाल ने ही रखी थी। तामीर के बाद जब आलीशान मस्जिद बनकर तैयार हो गई तो शेरे नेपाल फिर बनारस आएं तो मस्जिद में जुमा अदा कराया था। उस दौरान उनसे मुरीद होने लोगों का मजमा उमड़ा हुआ था। कई जगहों पर उन्होंने तकरीर की थी और जुमे की नमाज के बाद उन्होंने दोनों हाथ फैलाकर अमन और सलामती की दुआएं मांगी थी। मस्जिद डिठोरी महाल के इमाम मौलाना शमसुद्दीन साहब ने मुफ्ती साहब के एजाज में कहा था कि दो साल पहले जब मस्जिद की नवतामीर शुरू हुई तो इसकी संगे बुनियाद हज़रत ने ही रखी थी, दो साल बाद आलीशान मस्जिद बनकर तैयार हो गयी है, ये सब हजरत मुफ्ती-ए-नेपाल की दुआओं का असर है। इस मौके पर मुफ्ती-ए-नेपाल ने नमाज के बाद दुआ में हाथ उठाकर हिन्दुस्तान के साथ ही पूरी दुनिया में अमनो-मिल्लत के लिए दुआएं मांगी थी। दुआ के दौरान मस्जिद खचाखच भरी हुई थी। नमाज़ के बाद वहां जुटे हुए तमाम लोगों ने हज़रत से मुसाफा किया था। 

शेरे नेपाल, मुफ्ती मौलाना जैश मोहम्मद सिद्दीकी (फाइल फोटो)

यूं तो शेरे नेपाल के उर्स पर देश दुनिया में उनसे अकीदत रखने वाले जहां थे उन्होंने वहां उर्स का एहतमाम किया मगर बनारस में डिठोरी महाल जामा मस्जिद कम्मू खां में उर्स धूमधाम से मनाया गया। इस मौके पर मौलाना इलयास कादरी, मौलाना अजहरुल कादरी, मौलाना शमशुद्दीन साहब, मस्जिद कम्मू खां के मुतवल्ली एखलाक अहमद टीटी, इरफान अहमद, एखलाक अहमद, इम्तेयाज अहमद, इश्तेयाक अहमद, शानू समेत सैकड़ों लोग मौजूद थे।

Education: VKM Varanasi Main Hindi सप्ताह का हुआ समापन

हिंदी हमारी संस्कृति और अस्मिता की पहचान-डॉ. रचना

Varanasi (dil india live). वसंत कन्या महाविद्यालय में 15 सितंबर से 22 सितंबर तक हिंदी सप्ताह समारोह बड़े ही उत्साह और गरिमा के साथ मनाया गया। इस सप्ताह के अंतर्गत विद्यार्थियों के भाषाई कौशल, रचनात्मक प्रतिभा और हिंदी के प्रति प्रेम को उजागर करने के लिए विविध प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्ष रहीं डाॅ. उर्वशी गहलोत (हिन्दी विभाग, महिला महाविद्यालय, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय) एवं विशिष्ट अतिथि रहीं डाॅ. प्रियंका सोनकर (हिन्दी विभाग, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय)।


कार्यक्रम का समापन सोमवार को ’हिंदी सप्ताह उद्यापन एवं पुरस्कार वितरण समारोह’ के रूप में किया गया। इस अवसर पर महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. रचना श्रीवास्तव, प्रबंधक उमा भट्टाचार्य, कार्यक्रम की अध्यक्ष डॉ. उर्वशी गहलोत, असोसिएट प्रोफेसर, महिला महाविद्यालय, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय, विशिष्ट अतिथि डॉ. प्रियंका सोनकर, विभागाध्यक्षा डॉ. आशा यादव, डॉ. शशि कला, डॉ.सपना भूषण, डॉ शुभांगी श्रीवास्तव, संगीत विभाग से प्रो. सीमा वर्मा और प्रो. सौम्यकांत मुखर्जी की गरिमामयी उपस्थित रहीं। कार्यक्रम का शुभारंभ पुष्पांजलि और कुलगीत के गायन के साथ हुआ। प्राचार्या डॉ. रचना श्रीवास्तव ने मंच की अध्यक्षता कर रही डॉ. उर्वशी गहलोत और विशिष्ठ अतिथि डॉ.प्रियंका सोनकर का उत्तरीय और पौधा देकर स्वागत और अभिनंदन किया।


समारोह के दौरान प्राचार्या रचना श्रीवास्तव ने कहा कि “हिंदी केवल भाषा नहीं, यह हमारी संस्कृति और अस्मिता की पहचान है। आज की पीढ़ी को चाहिए कि वह हिंदी को केवल अध्ययन की भाषा न माने, बल्कि व्यवहार की भाषा बनाए।” प्रबंधक उमा भट्टाचार्य ने हिंदी सप्ताह जैसे आयोजन के लिए सभी को शुभकामनाएं दी।

हिंदी के कवियों ने समाज को जागृत किया

मंच की अध्यक्षता कर रही डॉ. उर्वशी गहलोत ने अपने वक्तव्य में स्वतंत्रता और नवजागरण में हिंदी के योगदान की बात करते हुए कहा “ हिंदी ने सभी देशवासियों को साथ लाने का कार्य किया, कबीर, मीरा, महादेवी जैसे हिंदी के कवियों ने समाज को जागृत किया।“ विशिष्ट अतिथि डॉ.प्रियंका सोनकर ने हिंदी के वैश्वीकरण की बात कही। कार्यक्रम का सफल संयोजन प्रीति विश्वकर्मा, राजलक्ष्मी जायसवाल ने किया। धन्यवाद ज्ञापन डॉ. प्रीति विश्वकर्मा ने किया।

प्रतियोगिता में हुई सफल, तो मिला पुरस्कार 

हिन्दी सप्ताह कार्यक्रम में विभिन्न प्रतियोगितायें आयोजित की गयी थीं। इसमें प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों में जयंतिका डे‌ (भजन प्रतियोगिता), अनुपमा (इमला प्रतियोगिता), प्रज्ञा पटेल, अनिशा यादव (काव्य पाठ), विदिशा तिवारी (कहानी पाठ), सिंधु कुमारी (भाषण प्रतियोगिता) को प्राचार्या डॉ. रचना श्रीवास्तव एवं प्रबंधक डॉ. उमा भट्टाचार्य ने  प्रमाणपत्र और पुस्तक भेंट कर सम्मानित किया।

UP: राष्ट्रीय महिला सशक्तिकरण कार्यशाला मथुरा Main छा गईं Varanasi Ki Chavi

कार्यशाला में छवि अग्रवाल की पुस्तक का विमोचन संग हुआ सम्मान 

Varanasi (dil india live). हिंदुस्तान कॉलेज ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी, फरह, मथुरा में बेसिक एजुकेशन मूवमेंट ऑफ इंडिया और राज्य ललित कला अकादमी, उत्तर प्रदेश, लखनऊ के संयुक्त तत्वाधान में राष्ट्रीय महिला सशक्तिकरण कार्यशाला एवं सम्मान समारोह का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उत्तर प्रदेश महिला आयोग की अध्यक्ष श्रीमती बबीता चौहान, पूर्व सांसद श्री ओमपाल सिंह ‘निडर’ और जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी मथुरा श्री रविंद्र सिंह उपस्थित रहे।


कार्यक्रम में जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी श्री रविंद्र सिंह ने महिलाओं के सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक अधिकारों पर चर्चा करते हुए कहा कि इस संगोष्ठी और सम्मान समारोह का उद्देश्य केवल सम्मान तक सीमित नहीं है, बल्कि भारतीय संस्कृति में महिलाओं की गरिमामय स्थिति और सामाजिक विकास की यात्रा में उनके योगदान की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करना है। उन्होंने शिक्षिकाओं के योगदान पर विशेष प्रकाश डालते हुए उनके कार्यों की सराहना की।

पूर्व सांसद श्री ओमपाल सिंह ‘निडर’ ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा, “स्त्री सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक सभी क्षेत्रों में कार्य करने में सक्षम है। सशक्तिकरण का अर्थ केवल शक्ति का अधिग्रहण नहीं, बल्कि अपनी शक्ति के प्रयोग की क्षमता का विकास करना है।” 


इस अवसर पर छवि अग्रवाल द्वारा महिला सशक्तिकरण पर आधारित व संपादित पुस्तक (ISBN 978-93-7026-096-2) का विमोचन हुआ। कार्यक्रम में सभी अतिथियों ने अपने विचार प्रस्तुत किए और महिला सशक्तिकरण के महत्व पर जोर दिया। देश के 75 जिलों से बालिका शिक्षा और महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाली महिला शिक्षिकाओं को सम्मानित किया गया, जिसमें वाराणसी जिले की छवि अग्रवाल को विशेष रूप से बालिका शिक्षा और सुरक्षा के क्षेत्र में उनके कार्यों हेतु सम्मानित किया गया।

 यह आयोजन महिला सशक्तिकरण और शिक्षा के क्षेत्र में प्रेरणादायक कदम साबित हुआ, जिसमें उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों ने समाज में महिलाओं की भूमिका को और सशक्त करने की प्रतिबद्धता दोहराई।