सोमवार, 23 फ़रवरी 2026

Yashfeen fatima ने रखा अल्लाह की रज़ा के लिए Ramadan का रोज़ा

मुफ्ती अब्दुल हन्नान की नन्हीं बेटी यशफीन ने रोज़ा रख, पेश किया मिसाल 





dil india live (Varanasi). वाराणसी के लल्लापुरा निवासी,  मशहूर आलिमे दीन व मदरसा मजीदिया के उस्ताद Mufti Abdul Hannan की नन्हीं बेटी 6 साल की Yashfeen fatima ने रमज़ान का रोज़ा रखकर मिसाल पेश किया है।‌ छोटी सी उम्र में यशफीन फातेमा के रोज़ा रखने से घर में खुशियां मनाई गई। मुफ्ती अब्दुल हन्नान कहते हैं कि बच्ची ने जिद किया तो हम लोग उसे रोज़ा रखने से मना नहीं कर सकें। क्यों कि इंसान तो महज़ कोशिश करता है रोज़ा रखवाना तो रब का काम है। रब ने ही रोज़ा रखने के लिए बच्ची के दिल में रमजान की मोहब्बत पैदा की तभी तो उसने रोज़ा रखने का इरादा किया। उन्होंने दुआएं मांगी कि या पाक परवरदिगार तू अपने हबीब के सदके में तमाम वालिदैन को यह खुशी नसीब फरमा और तमाम मुसलमानों को रमज़ान की दौलत से मालामाल कर दें... आमीन। यशफीन के परिवार से जुड़े एस एम खुर्शीद ने कहा कि रमज़ान में रब की रहमत बरसती है तभी तो कितने हट्टे कट्टे लोग सेहतमंद होकर भी रोज़ा नहीं रख पाते वहीं छोटे छोटे मासूम बच्चे भी रोज़ा कामयाबी से रख लेते हैं।

रविवार, 22 फ़रवरी 2026

Md Yusuf Raza व ayesha zainab की हुई रोज़ा कुशाई

छोटी सी उम्र में दोनों बच्चों ने रखा रोज़ा कायम की मिसाल 




Varanasi (dil india live)। st. Mary's convent school कैंटोनमेंट में नर्सरी क्लास में तालीम ले रहा मोहम्मद युसूफ रज़ा और jevan jyoti higher secondary school sarnath में क्लास 2 में पढ़ रही आयशा जैनब की इतवार को रोज़ा कुशाई हुई। 

रिफ़त जहां और ज़ैद अख्तर के इन दोनों बच्चों ने छोटी सी उम्र में रोज़ा रख कर मिसाल कायम किया है। अर्दली बाज़ार के रहने वाले दोनों बच्चों ने रमज़ान का रोज़ा तो रखा ही साथ ही नमाज़ की भी पाबंदी खुशी खुशी की। मां रिफ़त कहती हैं कि अपने छोटे छोटे दोस्तों के साथ वो इस कदर खेल-खेल में मस्ती करने लगा कि रोज़ा भी है ये भूल गया। पहले दोनों बच्चों ने सहरी करने की जींद की फिर रोज़ा रख लिया। घर में किसी ने सोचा भी नहीं था कि दोनों रोज़ा रख लेंगे और दोनों की रोज़ा कुशाई करनी पड़ेगी मगर वक्त जब ज़ोहर की नमाज का हो गया तो भी दोनों रोज़ा रखने पर डटे रहे। फिर कब इफ्तार का वक्त हो गया और रोज़ा कुशाई की रस्म अदा करना पड़ा पता ही नहीं चला। इस दौरान युसुफ रज़ा और आयशा जैनब ने रब से दुआ मांगी कि, या अल्लाह वालिदैन कि रोजी-रोटी में बरकत हो जाए, मुल्क में हमेशा अमन चैन बना रहे, समाज से तमाम बुराइयां दूर हो जाए। हर बच्चा रब की रज़ा के लिए रोज़ा रखे। ...आमीन।




Ramadan ka Paigham 4: एतेकाफ कंकडिया बीर में एक माह का

यहां तो पूरे महीने ही बैठते हैं एतेकाफ पर रोजेदार






 

सरफराज/रिजवान 

dil india live (Varanasi). रमजान की खास इबादतों में शामिल एतेकाफ अमूमन रमजान के आखिरी अशरे में रहा जाता है मगर नबी ने कई बार पूरा रमजान यानी 30 दिन एतेकाफ किया था। नबी कि इसी सुन्नतों पर अमल करते हुए दावते इस्लामी हिंद के मेंबर्स मस्जिद कंकडियाबीर में पूरे रमजान एतेकाफ पर बैठते हैं। इस बार भी दावते इस्लामी इंडिया के मेंबर्स एतेकाफ पर बैठ गए हैं। पूरी मस्जिद इबादतगुजारो से भरी हुई है। एक साथ इबादत,एक साथ जमात से नमाजे अदा करना व एक साथ रोज़ा इफ्तार के साथ ही देश दुनिया में अमन और शांति के लिए दुआएं करने का नजारा देखते ही बनता है। दावते इस्लामी इंडिया के डा. साजिद अत्तारी बताते हैं कि हर साल दावते इस्लामी इंडिया के लोग एक साथ पहले ही रमजान से एतेकाफ पर बैठ जाते हैं और जब ईद का चांद होता है तो एतेकाफ पूरा करके अपने घरों को लौटते हैं।


यहां जानिए क्या है एतेकाफ
एतेकाफ सुन्नते कैफाया है। एतेकाफ का लफ्ज़ी मायने, अल्लाह की इबादत में बैठना या खुद को अल्लाह की इबादत के लिए वक्फ कर देना है। 20 रमज़ान से ईद का चांद होने तक मोमिनीन मस्जिद में खुद को अल्लाह के लिए वक्फ कर देते है। इसी इबादत का नाम एतेकाफ है। 

सुन्नत है एतेकाफ
एतेकाफ सुन्नते कैफाया है यानी मुहल्ले का कोई एक भी बैठ गया तो पूरा मुहल्ला बरी अगर किसी ने नहीं रखा तो पूरा मुहल्ला गुनाहगार होगा और पूरे मोहल्ले पर अज़ाब नाज़िल होगा।

ये कर रहे हैं सारा इंतजाम 

मुबारक अत्तारी, डाक्टर साजिद, गुलाम पीर अत्तारी, अब्दुल अज़ीम अत्तारी,मो. साबिर की देख-रेख में यह नेक काम चल रहा है।

शनिवार, 21 फ़रवरी 2026

DAV PG College ने स्पंदन में निकाली शांति में ही समाधान पर शोभायात्रा

'युद्ध से विनाश, शांति में ही समाधान' थीम पर डीएवी के दल ने मंच पर लघु नाट्य प्रस्तुत कर खींचा सबका ध्यान




dil india live (Varanasi). काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के अंतर संकाय युवा महोत्सव 'स्पंदन के शुभारंभ पर' डीएवी पीजी कॉलेज के दल ने भव्य शोभायात्रा निकाली। 'युद्ध से विनाश, शांति में ही समाधान' की थीम पर डीएवी के दल ने एमपी थियेटर के मंच पर लघु नाट्य प्रस्तुत कर सबका ध्यान आकर्षित किया। जब पूरी दुनिया युद्ध के मुहाने पर खड़ी है उसमें भारत ही एक ऐसा देश है जो विश्व शांति की बात कहता है। 

शोभायात्रा में कॉलेज का 125 सदस्यीय दल शामिल हुआ। दल में सांस्कृतिक समिति की सह समन्वयक डॉ. हसन बानो, डॉ. साक्षी चौधरी, डॉ. दीपक शर्मा, डॉ. विकास सिंह, डॉ. ऋचा गुप्ता, डॉ. श्रुति अग्रवाल, डॉ. शालिनी सिंह, डॉ. शशिकांत यादवा, डॉ. मृत्युंजय प्रताप सिंह, डॉ. ऐश्वर्या उपाध्याय, डॉ. त्रिपुर सुंदरी, डॉ. गौरव मिश्रा, प्रताप बहादुर सिंह सहित अन्य सदस्य शामिल रहे।


Ramadan ka Paigham 3 : जल्द से जल्द हकदारों तक ज़कात पहुंचा दें

यहां जानिए किसे दें, किसे न दें 'जकात', जकात न देने का क्या है 'अजाब' 



Varanasi (dil india live)। इस्लाम में जकात फर्ज हैं। जकात पर मजलूमों, गरीबों, यतीमों, बेवाओं का ज्यादा हक है। ऐसे में जल्द से जल्द हकदारों तक ज़कात पहुंचा दें ताकि वह रमजान व  ईद की खुशियों में शामिल हो सकें। ये ज़कात देने का सही वक्त है। जकात फर्ज होने की चंद शर्तें है। मुसलमान अक्ल वाला हो, बालिग हो, माल बकदरे निसाब (मात्रा) का पूरे तौर का मालिक हो। मात्रा का जरुरी माल से ज्यादा होना और किसी के बकाया से फारिग होना, माले तिजारत (बिजनेस) या सोना चांदी होना और माल पर पूरा साल गुजरना जरुरी हैं। सोना-चांदी के निसाब (मात्रा) में सोना की मात्रा साढ़े सात तोला (87 ग्राम 48 मिली ग्राम ) है जिसमें चालीसवां हिस्सा यानी सवा दो माशा जकात फर्ज है।

सोना-चांदी के बजाय बाजार भाव से उनकी कीमत लगा कर रुपया वगैरह देना जायज है। जिस आदमी के पास साढ़े बावन तोला चांदी या साढ़े सात तोला सोना या उसकी कीमत का माले तिजारत हैं  और यह रकम उसकी हाजते असलिया से अधिक हो। ऐसे मुसलमान पर चालीसवां हिस्सा यानी सौ रुपये में ढ़ाई रुपया जकात निकालना जरुरी हैं। दस हजार रुपया पर ढ़ाई सौ रुपया, एक लाख रुपया पर ढ़ाई हजार रुपया जकात देनी हैं। सोना-चांदी के जेवरात पर भी जकात वाजिब होती है। तिजारती (बिजनेस) माल की कीमत लगाई जाए फिर उससे सोना-चांदी का निसाब (मात्रा) पूरा हो तो उसके हिसाब से जकात निकाली जाए। अगर सोना चांदी न हो और न माले तिजारत हो तो कम से कम इतने रूपये हों कि बाजार में साढ़े बावन तोला चांदी या साढ़े सात तोला सोना खरीदा जा सके तो उन रूपर्यों की जकात वाजिब होती है।


इन्हें दी जा सकती हैं जकात 
"ज़कात" में अफ़ज़ल यह है कि इसे पहले अपने भाई-बहनों को दें, फ़िर उनकी औलाद को, फ़िर चचा और फुफीयों को, फ़िर उनकी औलाद को, फ़िर मामू और ख़ाला को, फ़िर उनकी औलाद को, बाद में दूसरे रिश्तेदारों को, फ़िर पड़ोसियों को, फ़िर अपने पेशा वालों को। ऐसे छात्र को भी "ज़कात" देना अफ़ज़ल है, जो "इल्मे दीन" हासिल कर रहा हो। ऊपर बताये गये लोगों को जकात तभी दी जायेगी जब सब गरीब हो, मालिके निसाब न हो।

जकात का इंकार करने वाला काफिर और अदा न करने वाला फासिक और अदायगी में देर करने वाला गुनाहगार  हैं। मुसलमानों को चाहिए कि जल्द से जल्द जकात की रकम निकाल कर गरीब, यतीम, बेसहारा मुसलमान को दें दे ताकि वह अपनी जरुरतें पूरी कर लें। जकात बनी हाशिम यानी हजरते अली, हजरते जाफर, हजरते अकील और हजरते अब्बास व हारिस बिन अब्दुल मुत्तलिब की औलाद को देना जाइज नहीं। किसी दूसरे मजहब को जकात देना जाइज नहीं है। क्यों की ये एक मज़हबी टैक्स है। सैयद को जकात देना जाइज नहीं इसलिए कि वह भी बनी हाशिम में से है। कम मात्रा यानी चांदी का एतबार ज्यादा बेहतर हैं कि सोना इतनी कीमत का सबके पास नहीं। नबी के जमाने में सोना-चांदी की मात्रा मालियत के एतबार से बराबर थीं। अब ऐसा नहीं हैं। 

अगर आप "मालिके निसाब" हैं, तो हक़दार को "ज़कात" ज़रुर दें, क्योंकि "ज़कात" ना देने पर सख़्त अज़ाब का बयान कुरआन शरीफ में आया है। जकात हलाल और जाइज़ तरीक़े से कमाए हुए माल में से दी जाए। क़ुरआन शरीफ में हलाल माल  को खुदा की राह में ख़र्च करने वालों के लिए ख़ुशख़बरी है, जैसा कि क़ुरआन में अल्लाह तआला फ़रमाता है कि... "राहे ख़ुदा में माल ख़र्च करने वालों की मिसाल ऐसी है कि जैसे ज़मीन में किसी ने एक दाना बोया, जिससे एक पेड़ निकला, उसमें से सात बालियां निकलीं, उन बालियों में सौ-सौ दाने निकले। गोया कि एक दाने से सात सौ दाने हो गए। अल्लाह इससे भी ज़्यादा बढ़ाता है। जिसकी नीयत जैसी होगी, वैसी ही उसे बरकत देगा"।

डा. साजिद अत्तारी (Dr Sajid attari)

Dawate Islami India 

Masjido से Allah Hu Akbar ki Gunji सदाएं, इफ्तार संग तीन रोज़ा मुकम्मल

लाट सरैया में मुकम्मल हुई तरावीह तो इमामे तरावीह की हुई गुलपोशी 



Sarfaraz/Rizwan 

dil india live (Varanasi). शाम में मगरिब का वक्त होते ही रब के नेक बंदे अज़ान के इंतजार में थे तभी मस्जिदों से अल्लाह हो अकबर अल्लाह...की सदाएं बुलंद हो उठी। इस दौरान तमाम रोजेदारों ने खजूर और पानी के साथ जहां रोज़ा खोला वहीं लज़ीज़ इफ्तार का तमाम रोजेदारों ने लुत्फ उठाया। इफ्तार के बाद लोगों ने नमाजे मगरिब अदा कर रब से अमनो-मिल्लत, सेहत, तन्दरूस्ती की दुआएं मांगी।

तरावीह मुकम्मल होना शुरू 

वाराणसी में रमजान का मुबारक महीना शुरू होते ही सभी मस्जिदों में तरावीह की नमाजे शुरू हो गई थी। अब तरावीह मुकम्मल होना शुरू हो गई है। इसी कड़ी में ईदगाह लाट सरैया में और मखदूम शाह बाबा की मस्जिद में तीन दिन की तरावीह की नमाज मुकम्मल हुई। इन दोनों मस्जिदों के मतवल्ली बुनकर बिरादराना तंजीम चौदहों के सरदार हाजी मकबूल हसन की अगुवाई में पढ़ाई गई। लाट मस्जिद सरैया में हाफिज मोहम्मद जुबैर ने और मखदूम शाह बाबा की मस्जिद में हाफिज मोहम्मद अहमद ने तीन दिन की तरावीह की नमाज में पूरी कुरान मुकम्मल कराई। तरावीह की नमाज खत्म होने के बाद नमाजियों के साथ सरदार मकबूल हसन ने दोनों हाफिजों को माला पहना कर मुबारक बाद दिया और रस्म अदायगी कर उनका शुक्रिया अदा किया। ऐसे ही आज रात मदरसा ख़ानम जान समेत कई जगहों पर तरावीह मुकम्मल होगी।




इनकी रही खास मौजूदगी 

इस मौके पर मौजूद चौदहों के सरदार मकबूल हसन, पार्षद हाजी ओकास अंसारी, पार्षद तुफैल अंसारी, पूर्व पार्षद कल्लू,  हाजी अब्दुल वहीद, हाजी बैतूल हसन, सरदार गुलाम नबी, अब्दुल रब अंसारी, नेसार अंसारी, अब्दुल रशीद, सरदार शमीम अहमद, अब्दुल मजीद, निजामुद्दीन, गुलाम रसूल उर्फ बाबा,  जुल्फिकार अली, शमीम सरदार, माजिद महतो, रशीद बाबा, बाबूल बाबा, मुस्तफा, रफीक शाह, हाफिज इकराम, हाफिज अब्दुल मजीद, हाजी मंजूर, मन्नान शाह सहित सैकड़ों लोगो ने तरावीह की नमाज मुकम्मल की।

राष्ट्रीय मॉडल के रूप में विकसित होगा “RWTP सेंटर फॉर रूरल इनोवेशन, सस्टेनेबल टेक्नोलॉजी एवं एआई”

बीएचयू के कुलपति प्रो. अजीत के मार्गदर्शन में हुई पहल, 20 अप्रैल को प्रस्तावित है उद्घाटन 

                                                                                 





dil india live (Varanasi). ग्रामीण नवाचार एवं तकनीकी सशक्तिकरण को राष्ट्रीय स्तर पर एक प्रतिरूप के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के तहत काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी के प्रेरणा एवं मार्गदर्शन में 

साईं इंस्टीट्यूट ऑफ रूरल डेवलपमेंट, बसनी, वाराणसी में “आरडब्ल्यूटीपी (RWTP) सेंटर फॉर रूरल इनोवेशन, सस्टेनेबल टेक्नोलॉजी एवं एआई” का निर्माण कार्य तीव्र गति से प्रगति पर है। केंद्र का उद्घाटन 20 अप्रैल 2026 को प्रस्तावित है।

यह केंद्र पूर्व में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, भारत सरकार के सहयोग से वर्ष 2018–2020 के दौरान स्थापित उत्तर प्रदेश के प्रथम रूरल वीमेन टेक्नोलॉजी पार्क का उन्नत एवं संस्थागत स्वरूप है। परियोजना अवधि पूर्ण होने के पश्चात भी साईं इंस्टीट्यूट द्वारा अपने संसाधनों से इस पहल का सतत संचालन किया जाना संस्था की दीर्घकालिक प्रतिबद्धता एवं आत्मनिर्भर विकास दृष्टि को दर्शाता है।

एक वार्ता में साईं इंस्टीट्यूट के निदेशक अजय सिंह ने कहा, “हमारा उद्देश्य केवल एक प्रशिक्षण केंद्र स्थापित करना नहीं, बल्कि वाराणसी से ग्रामीण भारत के लिए विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार आधारित एक सशक्त और प्रतिरूपणीय मॉडल विकसित करना है। निर्माण कार्य प्रगति पर है और शीघ्र पूर्ण कर 20 अप्रैल 2026 को इसका औपचारिक उद्घाटन किया जाएगा। यह केंद्र ग्रामीण महिलाओं और युवाओं को तकनीकी रूप से सशक्त बनाकर आत्मनिर्भर उद्यमिता की दिशा में अग्रसर करेगा।”

प्रस्तावित केंद्र में आधुनिक प्रशिक्षण अवसंरचना, डिजिटल कनेक्टिविटी एवं उन्नत तकनीकी सुविधाएँ विकसित की जा रही हैं। यहाँ सस्टेनेबल टेक्नोलॉजी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एआई, डिजिटल स्किलिंग, प्राकृतिक खेती, स्वच्छ ऊर्जा (बायोगैस सहित) एवं उद्यमिता विकास से संबंधित समेकित प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा।

प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में स्थापित यह केंद्र विज्ञान–प्रौद्योगिकी–नवाचार आधारित ग्रामीण परिवर्तन का एक सशक्त मंच सिद्ध होगा, जिसे भविष्य में राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर पर भी विस्तारित करने का लक्ष्य है।