सोमवार, 2 फ़रवरी 2026

SEVEN DAY NSS camp का हुआ समापन

NSS के उद्देश्य, कौशल विकास, सशक्तिकरण एवं अनुशासन पर डाला प्रकाश




dil india live (Varanasi). 2 फरवरी 2026, पूर्वाह्न 10:00 बजे, राष्ट्रीय सेवा योजना की चतुर्थ इकाई द्वारा आयोजित सप्त दिवसीय विशेष शिविर के अंतिम दिन का कार्यक्रम शिवपुर वार्ड संख्या 9 में गरिमामयी वातावरण में संपन्न हुआ। कार्यक्रम राष्ट्रीय सेवा योजना समन्वयक डॉ. स्वप्ना मीणा के निर्देशन वसंत कन्या महाविद्यालय की प्राचार्या प्रोफेसर रचना श्रीवास्तव के मार्गदर्शन में, कार्यक्रम अधिकारी डॉ. शुभांगी श्रीवास्तव के नेतृत्व में आयोजित हुआ।

कार्यक्रम का शुभारंभ राष्ट्रीय सेवा योजना की तालियों एवं लक्ष्य गीत के साथ हुआ, जिससे स्वयंसेवकों एवं उपस्थित जनसमूह में उत्साह, अनुशासन एवं सेवा भावना का संचार हुआ। इस अवसर पर सभासद बालराम कन्नौजिया, हेड मास्टर कंपोजिट विद्यालय शिवपुर के श्री पंकज दीक्षित की गरिमामयी उपस्थिति रही।


सांस्कृतिक सत्र के अंतर्गत स्वयंसेवकों द्वारा विविध मनमोहक प्रस्तुतियां दी गईं। आयोजन में शालिनी गुप्ता एवं मैत्रेई राय द्वारा काव्यपाठ प्रस्तुत किया गया। अदिति एवं नितिशा ने भजन प्रस्तुति से वातावरण को भक्तिमय बनाया, वहीं काजल यादव ने भी भजन प्रस्तुत किया। स्वाति श्रीवास्तव एवं कीर्ति सिंह द्वारा प्रस्तुत नृत्य ने सभी का मन मोह लिया। नैंसी वर्मा ने कविता पाठ किया तथा श्रुति सिंह ने बालिका सशक्तिकरण विषय पर प्रभावशाली कविता प्रस्तुत की। अनुष्का गुप्ता द्वारा प्रस्तुत देशभक्ति गीत ने श्रोताओं में राष्ट्रप्रेम की



भावना जागृत की।

कार्यक्रम के दौरान कार्यक्रम अधिकारी डॉ. शुभांगी श्रीवास्तव द्वारा मुख्य अतिथि को अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया गया। इसके पश्चात अपने उद्बोधन में उन्होंने स्वयंसेवकों को शुभकामनाएं देते हुए राष्ट्रीय सेवा योजना के उद्देश्य, आपसी सहयोग, कौशल विकास, बालिकाओं के सशक्तिकरण एवं अनुशासन के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सेवा योजना विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास का सशक्त माध्यम है। समापन अवसर पर सभी अतिथियों एवं स्वयंसेवकों के योगदान की सराहना की गई। यह सप्तदिवसीय विशेष शिविर सेवा, संस्कृति एवं संस्कारों का अनुपम उदाहरण बनते हुए सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।

VKM Varanasi Main सांस्कृतिक महोत्सव सर्जना का हुआ आगाज़

छात्राएं आत्म अभिव्यक्ति एवं आत्मविश्वास के पथ पर हों अग्रसर- प्रो. रचना श्रीवास्तव 

सर्जना में पहले दिन “वसुधैव कुटुम्बकम्" थीम पर हुए आयोजन



dil india live (Varanasi). वाराणसी के वसंत कन्या महाविद्यालय,(VKM) कमच्छा में 2 फरवरी 2026 को वार्षिक सांस्कृतिक महोत्सव सर्जना 2025-26 के पहले दिन “वसुधैव कुटुम्बकम् - थीम पर अनेक आयोजन हुए।

प्रकृति की त्रयी को समर्पित” रही, जिसका प्रायोजन मान्यवर-मोहे द्वारा किया गया। इस अवसर पर महाविद्यालय की प्राचार्या प्रो. रचना श्रीवास्तव ने अपने उद्बोधन में छात्राओं को आत्म-अभिव्यक्ति एवं आत्मविश्वास के पथ पर अग्रसर होने का संदेश दिया तथा सांस्कृतिक समृद्धि में संगीत की सशक्त भूमिका को रेखांकित किया।



रंगारंग प्रस्तुतियों से गूंजा वीकेएम

सर्जना में रंगा रंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुतियों से वीकेएम गूंज उठा। इस दौरान प्रश्नोत्तरी, संगीत गायन, फोटोग्राफी, पोस्टर-मेकिंग एवं कार्टूनिंग प्रतियोगिताओं का सफल आयोजन हुआ। गायन प्रतियोगिता में एकल एवं समूह श्रेणियों में कुल 47 प्रतिभागियों ने शास्त्रीय, अर्ध-शास्त्रीय, लोक एवं पाश्चात्य संगीत की प्रस्तुतियां दीं। कार्यक्रम में निर्णायक पल्लवी घोष, प्रो. सीमा वर्मा, डॉ. सुमन सिंह, डॉ. नैरंजना श्रीवास्तव, डॉ. पूनम वर्मा एवं सौम्यकांति मुखर्जी शामिल थे।


“मेरे कैमरे की दृष्टि से प्रकृति” 

प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता में छात्राओं ने जहां उत्साहपूर्वक सहभागिता कर अपनी बौद्धिक क्षमता एवं त्वरित निर्णय-शक्ति का परिचय दिया, वहीं “मेरे कैमरे की दृष्टि से प्रकृति” विषय पर आयोजित फोटोग्राफी प्रतियोगिता में प्रतिभागियों ने प्रकृति के विविध रूपों को रचनात्मक ढंग से प्रस्तुत किया।

कार्यक्रमों ने छात्राओं की सृजनात्मकता, सांस्कृतिक चेतना एवं प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता को प्रभावी रूप से अभिव्यक्त किया। यह प्रतियोगिताएं छात्राओं की रचनात्मक कल्पनाशीलता को उजागर करने के साथ-साथ प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता एवं सौंदर्यबोध को भी सुदृढ़ करती दिखी।अ

Shab-E-Baraat : लो आ गई रब से माफी तलाफी की रात

बुजुर्गो के दर पर होगी हाजिरी 

घरों व इबादतगाहों में कल होगा चिराग़ा






Sarfaraz/Rizwan 

dil india live (Varanasi). शब-ए-बरात मुस्लिमों के लिए सबसे महत्वपूर्ण पर्वो में से एक है। शाबान नबी का महीना है और इसके बाद आने वाला रमजान रब का महीना है। मौलाना साकीबुल कादरी कहते हैं कि शाबान की 14 तारीख का दिन बीतने के बाद जो रात आती है वो शबे बरात की अज़ीम रात कहलाती है। इस शब को मग़फित की रात कहा जाता है। इस रात इबादत करने वालों की गुनाह रब माफ़ कर देता है। हिजरी कैलेंडर के अनुसार, हर साल शाबान महीने की 15 वीं तारीख को शब ए- बरात मनाया जाता है। मौलाना हसीन अहमद हबीबी कहते हैं कि शबे बरात से रुहानी साल का आगाज़ होता है। नामे आमाल लिखे जाते हैं कि पूरे साल किसके साथ क्या होगा। कौन दुनिया में रहेगा, किसकी मौत आएगी वगैरह। यह महीना बहुत ही अज़ीम महीना है।



मौलाना अजहरुल कादरी कहते हैं कि शब-ए-बरात दो शब्दों से मिलकर बना है रात और बरात यानी बरी होने की रात या गुनाहों से माफी की रात। मुसलमान इस खास रात को नमाज अदा करने के साथ अपने गुनाहों की माफ़ी मांगते हैं। इसके साथ ही पूर्वजों की कब्रों पर जाकर अपने बुजुर्गों के मगफिरत की दुआ करते हैं। बता दें कि इसे एशिया में शबे बरात, अरबी में लैलातुल बारात, इंडोनेशिया और मलेशिया में निस्फ़ स्याबान जैसे नामों से भी जाना जाता है। 

इस्लामिक कैलेंडर के मुताबिक, शब-ए -बरात शाबान महीने की 14 और 15 वीं तारीख के बीच की रात को मनाया जाता है। ये रात 14 का दिन बीतने के साथ मगरिब की अज़ान के साथ शुरू होती है और 15 शाबान को फजर की अज़ान के साथ समाप्त हो जाती है। इस साल शब-ए-बरात 3 फरवरी 2026 को मनाई जाएगी।

मगफिरत की खास शब 

इस्लाम धर्म में शब-ए-बरात काफी खास मानी जाती है, क्योंकि ये उन रातों में से एक मानी जाती है जब अल्लाह अपने बंदों की हर नेक और जायज़ दुआएं कुबुल करता हैं और उन्हें माफ़ी देता हैं। बता दें कि शब-ए-बरात के अलावा शुक्रवार की रात, ईद-उल-फितर से पहले की रात, ईद-उल-अजहा से पहले की रात, रजब की रात और  शब-ए-कद्र की रात की दुआएं रब कुबुल करता हैं।

ऐसे मनाते हैं शब-ए-बरात

मुस्लिम इस दिन मगरिब की नमाज के बाद से पूरी रात इबादत करते हैं, नफिल नमाज अदा करने के साथ ही कुरान की तेलावत करते हैं और अल्लाह से अपनी गुनाहों के लिए माफी मांगते हैं। इसके साथ ही कल सहर सहरी करके शब-ए-बरात पर नफिल रोज़ा रखा जाता है। यही नहीं इस रात को लोग कब्रिस्तान जाते हैं और इंतकाल फरमा चुके अपने अजीजों और बुजुर्गो की कब्र पर फातेहा के साथ ही मगफिरत की दुआएं मांगते हैं।

RSS के शताब्दी वर्ष पर DAV में 2 दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी

वर्षगांठ नहीं, आत्मावलोकन करता है आरएसएस-जे. नंद कुमार




dil india live (Varanasi). राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ ही एक ऐसा संगठन है जो अपनी वर्षगांठ नही मनाता बल्कि आत्मावलोकन करता है की जो लक्ष्य निर्धारित था, वह प्राप्त हुआ कि नहीं। उक्त विचार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में डीएवी पीजी कॉलेज में आयोजित पंच परिवर्तन एवं भविष्य का भारत विषयक दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी के उदघाटन समारोह में सोमवार को प्रज्ञा प्रवाह के राष्ट्रीय समन्वयक जे. नन्द कुमार ने बतौर मुख्य अतिथि व्यक्त किये। ICSSR नई दिल्ली द्वारा प्रायोजित संगोष्ठी में नन्द कुमार ने कहा कि यह शताब्दी सिर्फ एक संगठन का सौ वर्ष नही है बल्कि यह भारतीय संस्कृति के पुनर्जागरण का साक्षी बन रहा है। यह नवोत्थान का क्षण है, यह प्रतिमान परिवर्तन का क्षण है। 


हिन्दू राष्ट्र बनाने की आवश्यकता नही

जे. नन्द कुमार ने यह भी कहा की भारत को हिन्दू राष्ट्र बनाने की आवश्यकता नही है, यह पहले से ही हिन्दू राष्ट्र है और आगे भी हिन्दू राष्ट्र ही रहेगा। 

           अध्यक्षता करते हुए साउथ एशिया विश्वविद्यालय के प्रेसिडेंट प्रो.के.के. अग्रवाल ने कहा कि पंच परिवर्तन सिर्फ एक शब्द नही है बल्कि संघ के सिद्धांतों को समेकित करने का मूलमंत्र है। यदि भारत को विश्वगुरु बनाना है तो संघ के विचारों को आत्मसात करना ही होगा। पंच परिवर्तन का सिद्धांत नया नही है, बस इसे ठीक ढंग से बताया नही गया। यह हमारी सोच को संकुचित नही बल्कि वैश्विक बनाता है। विशिष्ट वक्ता प्रज्ञा प्रवाह के केंद्रीय समिति के सदस्य रामाशीष जी ने कहा कि कुंठित मन, संकुचित हृदय और बंधा हुआ हाथ राष्ट्र का निर्माण नही कर सकते ।भारतीय युवा राम से प्रेरणा लेकर समभाव वाले बने। अतिथियों ने संगोष्ठी की स्मारिका का विमोचन किया। इसके पूर्व अतिथियों का स्वागत महाविद्यालय के प्रबंधक अजीत सिंह यादव ने स्मृति चिन्ह, अंगवस्त्र एवं पुष्प गुच्छ प्रदान कर किया। स्वागत भाषण डॉ. पारुल जैन एवं धन्यवाद ज्ञापन कार्यवाहक प्राचार्य प्रो.मिश्रीलाल ने दिया। संयोजन डॉ. शान्तनु सौरभ एवं सह संयोजन डॉ. सिद्धार्थ सिंह एवं संचालन डॉ. रमेन्द्र सिंह ने किया। उप प्राचार्य द्वय प्रो.संगीता जैन एवं प्रो. राहुल भी उपस्थित रहे।

24 से अधिक विद्वानों ने रखे विचार

संगोष्ठी में पहले दिन विभिन्न सत्रों में 24 से अधिक विद्वानों ने विचार रखें। इनमें पूर्व कुलपति प्रो.अजय कुमार सिंह, प्रो.एचके सिंह, प्रो.टीपी सिंह, पूर्व कुलपति प्रो.राजाराम यादव, प्रो. एसके दुबे, प्रो.पीएन सिंह, अजय कुमार, डॉ. अनिल सिंह, प्रो. जयशंकर पाण्डेय सहित अन्य वक्ता शामिल रहे। इसके अलावा पहले दिन 8 सत्रों में 100 से अधिक शोधपत्र प्रस्तुत किये गए। देश के सभी राज्यो से शोधपत्र प्रस्तुत हुए।


रविवार, 1 फ़रवरी 2026

Rise of Tarrif War and Current Economic Situation पर हुआ व्याख्यान

अमेरिका को अपनी व्यापारिक नीतियों पर आत्म चिंतन की जरूरत-प्रो. इंदु उपाध्याय




dil india live (Varanasi). वसंत कन्या महाविद्यालय (VKM) के आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ द्वारा Rise of Tarrif War and Current Economic Situation विषय पर अर्थशास्त्र विभाग की डॉक्टर श्रीप्रिया सिंह के व्याख्यान का आयोजन किया गया। इस मौके पर प्रिंसिपल प्रो. रचना श्रीवास्तव ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की नीतियों पर बात करते हुए इस बात की आवश्यकता पर बल दिया कि टैरिफ के वैश्विक पैटर्न और पॉलिसी पर खुले दिमाग़ से बात की जानी चाहिए ताकि अर्थव्यवस्था के मूलभूत सिद्धान्तों और समस्याओं को समझाना सम्भव हो। वर्तमान समय मे आर्थिक कारणों का राजनैतिक प्रभाव अभूतपूर्व रूप से बढ़ता दिख रहा है और नीतिगत बदलाव बाजार की ज़रूरतों को प्रभावित कर रहे हैं, ऐसी स्थिति में टैरिफ क़ानूनों को समझना महत्वपूर्ण हो जाता है।



अमेरिकी नीतियां अपरिपक्वता का परिणाम

अर्थशास्त्र विभाग की अध्यक्ष प्रोफेसर इंदु उपाध्याय ने कहा कि अमेरिका को अपनी व्यापारिक नीतियों पर आत्म चिंतन करने की ज़रूरत है वरना आने वाले समय में अमेरिका की अंदरूनी व्यवस्था को धराशायी होने में समय नहीं लगेगा। उन्होंने कहा कि अमेरिका की ये नीतियां प्रशासनिक और नीतिगत अपरिपक्वता का परिणाम हैं। 

समाजशास्त्र विभाग से डॉक्टर अखिलेश कुमार राय ने तेल और पेट्रो उत्पादनों पर अमेरिकी एकाधिकार की अलोचना की और कहा कि भारत की आत्मनिर्भरता की नीति ने इस कठिन समय में एशिया केन्द्रित वैकल्पिक अर्थव्यवस्था का जो माडल प्रस्तुत किया है उसके दूरगामी परिणाम होंगे। मंच संचालन संयोजिका डॉक्टर शशिकला ने किया। इस अवसर पर छात्राओं के साथ महाविद्यालय के सभी शिक्षक उपस्थित रहे ।

Chief Pharmacist हाजी फारुख खां हुए सेवा निवृत्त दी गई बिदाई

नौकरी से भले ही रिटायर हो गया पर लोगों की सेवा ताउम्र करता रहूंगा-हाजी फारुख खां 




dil india live (Varanasi). वाराणसी में शहरी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र शिवपुर में वरिष्ठ फार्मासिस्ट हाजी मो. फारुख खां की बिदाई के अवसर पर भावपूर्ण समारोह का आयोजन किया गया। 36 वर्षों की लंबी एवं समर्पित सेवा पूरी करने पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. राजेश प्रसाद ने उन्हें शाल, सम्मान पत्र एवं स्मृति चिह्न भेंट कर गौरवान्वित किया। अपने संबोधन में मो. फारुख ने भावुक स्वर में अपनी सेवा यात्रा को न सिर्फ याद किया बल्कि अपने वरिष्ठ और कनिष्ठ सभी का आभार व्यक्त किया और कहा कि अगर आप किसी पर हैं और चेयर पर बैठ गए हैं तो पूरे सिस्टम को आपकी उपस्थिति का पता होना चाहिए। मैंने जाड़ा, बरसात गर्मी यहां तक की कोविड में भी वक्त और ड्यूटी का फ़र्ज़ अदा किया इसके लिए मेरा सम्मान भी हुआ। इस दौरान उन्होंने कहा कि खुशी इस बात की है कि किस तरह सेवा के 36 साल बीत गए पता ही नहीं चला। कार्यक्रम का संचालन फार्मासिस्ट आलोक गुप्ता व धन्यवाद ज्ञापन डा. एसके यादव ने किया।


गौरतलब हो कि हाजी फारुख खां की फार्मासिस्ट के पद पर नियुक्ति 8 नवंबर 1990 को हुई थी और 31 जनवरी 2026 को वो सेवा निवृत्त हुए। उन्हें मेडिकल हज मिशन के तहत सऊदी अरब में इंडियन मेडिकल टीम में सलेक्शन 2007, 2012 व 2017 में किया गया। इसके बाद कोरोना काल में Corona warrior Award व 2025 में Pharmacy Ratan award से नवाजा गया। हाजी फारुख खां ने कहा मैं भले ही नौकरी से रिटायर हो गया हूं पर लोगों की सेवा ताउम्र करता रहूंगा।


VKM Varanasi Main कल से सर्जना की धूम 7 फ़रवरी तक

तब एक वृक्ष के नीचे कुछ छात्राओं एवं शिक्षिकाओं की रचनात्मक पहल से हुई थी शुरुआत 


dil india live (Varanasi). वाराणसी के वसंत कन्या महाविद्यालय कमच्छा में छात्राओं की अंतर्निहित प्रतिभा, साहित्यिक संवेदना सांस्कृतिक समझ और अकादमिक संवाद को मंच प्रदान करने के लिए सांस्कृतिक एवं अकादमिक  कार्यक्रम "सर्जना" का आयोजन 2 फ़रवरी से 7 फ़रवरी 2026 तक किया जाएगा। महाविद्यालय का यह प्रतिष्ठित मंच विगत 33 वर्षों से छात्राओं की साहित्यिक सांस्कृतिक और रचनात्मक प्रतिभाओं के प्रदर्शन का सशक्त माध्यम रहा है। 

महाविद्यालय द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया है कि सर्जना का शुभारंभ आरंभिक काल में एक वृक्ष के नीचे कुछ छात्राओं एवं शिक्षिकाओं की रचनात्मक पहल से हुआ था, जो छात्राओं की बढ़ती संख्या के कारण महाविद्यालय के विभिन्न स्थलों पर आयोजित किया जा रहा है। इस कार्यक्रम के अंतर्गत वसुधैव कुटुंबकम्: "प्रकृति के त्रयी को समर्पित" केंद्रीय विषय पर आधारित विविध प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाएगा। सप्त दिवसीय आयोजन के दौरान महाविद्यालय परिसर उत्सवपूर्ण वातावरण से सराबोर रहता है। छात्राओं के पहल के रूप में आयोजित की जाने वाली 30 से अधिक प्रतियोगिताओं में नृत्य, संगीत, थिएटर, निबंध लेखन, भाषण जैसी पारंपरिक विधाओं के साथ-साथ डॉक्यूमेंट्री निर्माण, फोटोग्राफी, लोगो-मेकिंग, जीरो वेस्ट, फैशन डिजाइनिंग और हैंडीक्राफ्ट जैसी नवाचारी प्रतियोगिताएं भी सम्मिलित हैं। जिनमें बड़ी संख्या में छात्राएं प्रतिभाग कर रही हैं।