रविवार, 12 अक्टूबर 2025
All India वैश्य महिला महासम्मेलन ने मनाया Dipawali
अखिल भारतीय वैश्य महिला महासम्मेलन ने किया 'उजाले' में धमाल
Varanasi (dil india live). अखिल भारतीय (All India) वैश्य महिला महासम्मेलन द्वारा गुरुधाम स्थित एक होटल (hotel) में उजाले कार्यक्रम आयोजित किया। इस मौके पर महिलाओं ने जमकर धमाल किया।
VKM Varanasi Main मनोविज्ञान क्लब ने किया “व्योम” का आयोजन
VKM Varanasi Main मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता दिवस पर हुए अनेक आयोजन
Varanasi (dil india live). वसंत कन्या महाविद्यालय (VKM) के मनोविज्ञान विभाग (Phycology Dipartment) एवं मनोविज्ञान क्लब (Phycology Club) मनस्विनी के संयुक्त तत्वावधान में “व्योम” कार्यक्रम का आयोजन मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता दिवस के अवसर पर किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ प्राचार्या (Principal) प्रो. रचना श्रीवास्तव के प्रेरक संबोधन से हुआ। उन्होंने विद्यार्थियों को ऐसे सुंदर और सार्थक आयोजनों को निरंतर करते रहने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा कि हमें अपनी भावनाओं को साझा करते रहना चाहिए, ताकि कोई भी व्यक्ति अपने मानसिक संघर्षों से अकेले न जूझे।
मुख्य अतिथि प्रो. संजय गुप्ता, पूर्व विभागाध्यक्ष, मनोचिकित्सा विभाग, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU), ने विद्यार्थियों के साथ अपनी प्रेरणादायक यात्रा साझा की। उन्होंने मानसिक स्वास्थ्य के न्यूरोलॉजिकल आधार और स्वस्थ सामंजस्य की भूमिका पर विस्तार से चर्चा की और बताया कि लोगों को हमेशा प्रमाणित और योग्य विशेषज्ञों से ही सहायता लेनी चाहिए।
कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण ‘मनस्विनी’ मासिक पत्रिका के तृतीय संस्करण का लोकार्पण था, जिसे मुख्य अतिथि, प्राचार्या तथा विभागाध्यक्षा डॉ. शुभ्रा सिन्हा द्वारा संयुक्त रूप से अनावृत किया गया। पत्रिका का सम्पादन एवं रूपांकन मनोविज्ञान विभाग के विद्यार्थियों द्वारा अत्यंत सुंदर ढंग से किया गया था।
BLW में राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा जागरूकता माह
“साइबर जागृत भारत” थीम पर साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण का हुआ आयोजन
F.farooqui/Santosh nagvanshi
Varanasi (dil india live). वैश्विक स्तर और भारत में हर साल अक्टूबर (October) का महीना राष्ट्रीय (National) साइबर सुरक्षा जागरूकता माह (NCSAM) के रूप में मनाया जाता है। इस वर्ष भारत सरकार के राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय (MSCS) द्वारा निर्धारित अभियान थीम-"साइबर जागृत भारत" है, जिसका उद्देश्य लोगों के बीच साइबर जागरूकता के माध्यम से देश के साइबर बुनियादी ढांचे को और अधिक सुरक्षित बनाने पर है।
रेलवे बोर्ड (Railway Board) के निर्देश एवं बरेका महाप्रबंधक, नरेश पाल सिंह के मार्गदर्शन में BLW में साइबर सुरक्षा जागरूकता माह के अंतर्गत “साइबर जागृत भारत” थीम पर विशेष साइबर प्रशिक्षण सत्र का आयोजन किया गया।
प्रावधिक प्रशिक्षण केंद्र,बरेका के सभागार मे आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम में कर्मचारियों को साइबर सुरक्षा के विभिन्न तकनीकी पहलुओं से अवगत कराया गया। संगणक केंद्र,बरेका के आंकड़ा संसाधन प्रबंधक, अमित सिकदर द्वारा कर्मचारियों को साइबर सुरक्षा की विस्तृत जानकारी प्रदान की गई। बरेका द्वारा आयोजित इस साइबर प्रशिक्षण का उद्देश्य साइबर सुरक्षा ढांचा को मजबूती देना तथा कर्मचारियों में साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाना एवं “साइबर जागृत भारत – सुरक्षित भारत” के लक्ष्य को साकार करना है।
शनिवार, 11 अक्टूबर 2025
UP: Varanasi Main सूचनाधिकार कानून के बीस वर्ष होने पर हुई कार्यशाला
भ्रष्टाचार उजागर करने के लिए सूचना के अधिकार का सकारात्मक प्रयोग आवश्यक: वल्लभाचार्य
युवा वर्ग को ऑनलाइन शिकायत या सुझाव देने की आदत बनानी होगी: राजकुमार गुप्ता
छात्राओं ने सीखा सूचना के अधिकार के तहत आवेदन का तरीका
Varanasi (dil india live). देश में सूचना का अधिकार कानून (RTI) लागू हुए बीस वर्ष (20 year) हो गये है इस उपलक्ष्य में ग्राम भंदहा कलां में सामाजिक संस्था आशा ट्रस्ट (Asha Trust) एवं सूचना का अधिकार अभियान द्वारा एक दिवसीय कार्यशाला (work shop) का आयोजन किया गया। कार्यशाला में विभिन्न समस्याओं के निराकरण और तंत्र में पारदर्शिता के लिए सूचना के अधिकार का सकारात्मक प्रयोग किये जाने पर बल दिया गया।
इस अवसर पर सामाजिक कार्यकर्ता वल्लभाचार्य पाण्डेय ने कहा कि दो दशक में यह कानून अपने शैशवावस्था, किशोरावस्था से होते हुए युवावस्था में है अब इसे और ताकत प्रदान किये जाने की आवश्यकता है इसलिए इसमें वांछित संशोधन करके इसके अधिकार क्षेत्र को व्यापक बनाना चाहिए। किसी भी प्रकार से सरकारी सुविधा, लाभ, छूट, अनुदान प्राप्त करने वाली सभी संस्थाओं जिसमें राजनैतिक दल, सामाजिक संस्थाएं, धार्मिक संस्थाएं, औद्योगिक घराने, चिकित्सा संस्थान आदि को भी अनिवार्य रूप से सूचना के अधिकार के अंतर्गत लाया जाना चाहिए। इससे आम जनता के टैक्स के पैसे के उपयोग के प्रति पारदर्शिता आएगी।
वरिष्ठ सूचनाधिकार कार्यकर्ता राजकुमार गुप्ता ने कहा कि समाज मे व्याप्त भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिए आमजन को जागरूक होना होगा और जन अधिकारों का अधिकतम प्रयोग सकारात्मक दृष्टिकोण से करना होगा। उन्होंने कहा कि तकनीक के इस दौर में युवा वर्ग को विभिन्न पोर्टलों द्वारा ऑनलाइन शिकायत या सुझाव देने की आदत बनानी होगी । कार्यशाला में आशा लाइब्रेरी की छात्राओं ने सूचना के अधिकार के तहत आवेदन करना सीखा। कार्यशाला आयोजन में सौरभ चन्द्र, प्रदीप सिंह, साधना पाण्डेय, सरोज सिंह आदि का विशेष सहयोग रहा।
वरिष्ठ सूचनाधिकार कार्यकर्ता राजकुमार गुप्ता ने कहा कि समाज मे व्याप्त भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिए आमजन को जागरूक होना होगा और जन अधिकारों का अधिकतम प्रयोग सकारात्मक दृष्टिकोण से करना होगा। उन्होंने कहा कि तकनीक के इस दौर में युवा वर्ग को विभिन्न पोर्टलों द्वारा ऑनलाइन शिकायत या सुझाव देने की आदत बनानी होगी । कार्यशाला में आशा लाइब्रेरी की छात्राओं ने सूचना के अधिकार के तहत आवेदन करना सीखा। कार्यशाला आयोजन में सौरभ चन्द्र, प्रदीप सिंह, साधना पाण्डेय, सरोज सिंह आदि का विशेष सहयोग रहा।
मशहूर शायर Ahmad Azmi का काव्य संकलन “क़तरा-ए-शबनम” का विमोचन कल
अहमद आज़मी : बनारस की गंगा-जमुनी आत्मा का कवि
Varanasi (dil india live). Banaras (बनारस) — यह शब्द केवल एक नगर (City) नहीं, भारतीय आत्मा का प्रतीक है। यहाँ की हवा में धर्म नहीं, दर्शन बहता है; यहाँ की गलियों में समय ठहरता नहीं, विचार बनकर गूंजता है। इस नगरी की सुबहें आरती से नहीं, गंगा की सांसों से आरंभ होती हैं। इसी सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और भाषाई प्रवाह में एक कवि अपनी आवाज़ रखता है — Ahmad Azmi (अहमद आज़मी)।
Ahmad Azmi (अहमद आज़मी) की कविता बनारस की गंगा-जमनी संस्कृति की जीवित मिसाल है। वे उस परंपरा के कवि हैं जहाँ तुलसी की करुणा, कबीर की सच्चाई और नज़ीर की लोकधर्मिता एक साथ मिलती है। उनकी कविता न हिन्दू है न मुसलमान — वह भारतीय है, मानवीय है। उसमें बनारस के घाटों की भक्ति है, साड़ियों की कारीगरी की नजाकत है, और यहाँ के सूफिज्म की वह सादगी है जो ज्ञान को अनुभव बनाती है।
उनके संग्रह “क़तरा-ए-शबनम” को यदि हम ध्यान से पढ़ें तो यह मात्र कविताओं का संकलन नहीं, बल्कि बनारस की आत्मा का आधुनिक रूपांतरण है। उनकी पंक्तियाँ गंगा की लहरों-सी बहती हैं — शांत भी, गहराई लिए हुए भी। जैसे जल में प्रतिबिंबित होती हुई संस्कृति, वैसे ही उनके शब्दों में उतरता हुआ मनुष्य का सामूहिक चेहरा।
अहमद आज़मी की कविताओं में ‘घर’ केवल एक जगह नहीं, एक अनुभव है —जहां मां की दुआ, बच्चे की हंसी और पिता की चुप्पी — सब एक भाव-संगीत में घुल जाते हैं। वे जब लिखते हैं, तो लगता है मानो शब्द नहीं, संस्कार बोल रहे हों। उनकी पंक्तियों में वह संवेदना है जो कबीर के “सांच कहो तो मारन धावै” से लेकर प्रेमचंद के “मानव धर्म” तक की परंपरा को जोड़ती है। मशहूर साहित्यकार नामवर सिंह कहा करते थे "कवि वही है जो भाषा में जीवन को पुनर्जन्म दे।" अहमद आज़मी की कविता इसी पुनर्जन्म की प्रक्रिया है। उनके शब्द केवल माध्यम नहीं, साक्षी हैं —एक ऐसे समाज के साक्षी जो विभाजन की दीवारों से थक चुका है और जो कविता में अपने लिए शरण ढूंढता है। उनकी कविता में हमें नफ़रत की ध्वनि नहीं, संवाद की गूंज सुनाई देती है। उनकी भाषा में आस्था है, लेकिन वह संप्रदाय की नहीं बल्कि उस व्यापक भारतीय चेतना की जो बुद्ध, कबीर और तुलसी से होती हुई गालिब तक पहुंचती है।
बनारस की सांस्कृतिक बुनावट में, जहां साड़ी का ताना-बाना हाथों से बनता है, वहां अहमद आज़मी शब्दों से बुनते हैं इंसानियत का कपड़ा। जिस तरह बुनकर धागों में रंग भरता है, उसी तरह यह कवि भावनाओं में अर्थ भरता है —रंगों का, रिश्तों का, और यादों का अर्थ। उनकी कविताओं में गंगा केवल नदी नहीं, एक जीवित प्रतीक है —जो सबको जोड़ती है, सबको एक करती है। गंगा उनके लिए भक्ति का नहीं, एकता का प्रतीक है; जहां हर आस्था, हर जाति, हर पहचान एक साझा मानवता में घुल जाती है।
“क़तरा-ए-शबनम” का अर्थ ही है 'वह नन्हा-सा बिंदु जो सृष्टि की व्यापकता में भी अपनी मासूमियत बचाए रखे'। अहमद आज़मी के लिए यह कविता का नहीं, मनुष्य होने का रूपक है।उनकी हर पंक्ति इस प्रश्न के साथ आती है —क्या हम अब भी उतने ही मनुष्य हैं जितने होना चाहिए? उनकी काव्य-दृष्टि में बनारस केवल पृष्ठभूमि नहीं, एक जीवित चेतना है —जहां सूफी संतों का दर्शन, कलाकारों की साधना और शब्दों की शुचिता एक साथ बहती है। वह हमें याद दिलाते हैं कि साहित्य का अर्थ केवल सौंदर्य नहीं, सत्य भी है — और जब तक सत्य जीवित है, कविता भी जीवित रहेगी। अहमद आज़मी की कविता हमें यह एहसास कराती है कि शब्दों का असली काम विभाजन नहीं, मिलन है; कविता का उद्देश्य विचार नहीं, संवेदना है; और कवि का धर्म किसी धर्म से बड़ा है मानवता का धर्म। इसलिए जब हम “क़तरा-ए-शबनम” पढ़ते हैं, तो लगता है जैसे हम बनारस की किसी संध्या में बैठे है गंगा के किनारे, आरती की लहरियों के बीच, जहां से कोई कवि कह रहा है —"हमारे बीच जो भी है, वह शब्द नहीं, आत्मा का संवाद है।अहमद आज़मी उस परंपरा के कवि हैं जो कविता को समाज की आत्मा मानते है। वे उन दुर्लभ सर्जकों में हैं जिनकी कविताएं केवल पढ़ी नहीं जातीं, महसूस की जाती हैं।
वे हमें यह याद दिलाते हैं कि भारत केवल भूगोल नहीं, भावना है। और इस भावना की गहराई में गंगा, बनारस और कविता — तीनों एक ही लय में बहते हैं।
“क़तरा-ए-शबनम” का विमोचन कल
शायर अहमद आज़मी की ग़ज़लों और नज़्मों का बहुप्रतीक्षित संकलन “क़तरा-ए-शबनम” शीघ्र ही पाठकों के सामने आ रहा है। इस काव्य-संग्रह का विमोचन समारोह आगामी 12 अक्टूबर 2025 (रविवार) को सायं 4:00 बजे, काशी पत्रकार संघ, पराड़कर स्मृति भवन, मैदागिन में आयोजित किया जा रहा है। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रसिद्ध साहित्यकार एवं चिंतक प्रो. गुरुचरण सिंह करेंगे तथा मुख्य अतिथि प्रख्यात कवि और विद्वान प्रो. याकूब यावर होंगे।
UP k Varanasi Main बेलवा बाबा गैस गोदाम के पास भीषण सड़क हादसा, एक की मौत
सड़क किनारे खड़ी ट्रक में पीछे से घुसी तेज़ रफ़्तार वैगनआर
पांच घायल, 3 की हालत गंभीर, घायल बीएचयू रेफर, हादसे से मचा कोहराम
Varanasi (dil india live)। लालपुर पांडेयपुर थाना (Lalpur-Pandaypur Thana) क्षेत्र के बेलवा बाबा गैस गोदाम के पास तड़के एक भीषण सड़क (Road) हादसा हो गया। हादसे में सड़क किनारे खड़ी ट्रक में तेज रफ्तार आ रही कार जा घुसी। इस एक्सीडेंट में एक व्यक्ति की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि तीन लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। सूचना पर लालपुर थाना प्रभारी राजीव सिंह तत्काल मौके पर पहुंचे और राहत व बचाव कार्य शुरू कराया। उन्होंने घायलों को उपचार के लिए अस्पताल (Hospital) भेजा।
यह है हादसे का पूरा डिटेल
लालपुर पांडेयपुर थाना क्षेत्र के बेलवा बाबा बाजार स्थित संजना स्टील वर्क्स दुकान के पास शनिवार तड़के भीषण सड़क हादसा होने से कोहराम मच गया। सड़क किनारे खड़े ट्रक (संख्या UP-65 JT-8374) में पीछे से एक वैगनआर कार (संख्या BR-05 W-5834) जा घुसी। हादसे में अवध किशोर चौबे (65 वर्ष), पुत्र शिवशंकर चौबे, निवासी सब्या चरगहा, जनपद चम्पारण, बेतिया (बिहार) की मौके पर ही मौत हो गई। वहीं नीलम चौबे (60 वर्ष), अमित कुमार (40 वर्ष), सौम्या चौबे (37 वर्ष), सादिका चौबे (10 वर्ष) और अनामिका चौबे (6 वर्ष) गंभीर रूप से घायल हो गए।
सभी घायलों को तत्काल पंडित दीनदयाल राजकीय अस्पताल भेजा गया, जहां से तीन की गंभीर हालत देखते हुए बीएचयू के लिए रेफर कर दिया गया। पुलिस ने परिजनों को सूचना देकर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है।
Varanasi Main Ummid Portal पर वक्फ संपत्तियों के पंजीकरण में आ रही तकनीकी दिक्कतें
तकनीकी दिक्कतों और प्रगति पर विस्तार से की गई चर्चा
Mohd Rizwan
Varanasi (dil india live). विकास भवन (Vikas Bhawan), सिथत कार्यालय जिला अल्पसंख्यक कल्याण विभाग (Office District minority welfare Department ) में अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी (DMO) की अध्यक्षता में वक्फ को-ऑर्डिनेटरों की बैठक सम्पन्न हुई। बैठक में उम्मीद पोर्टल (Ummid Portal) पर वक्फ संपत्तियों के पंजीकरण से जुड़ी तकनीकी दिक्कतों और प्रगति पर विस्तार से चर्चा की गई। जिसपर अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि जल्द से जल्द तकनीकी कार्य पूरा कर लिया जाएगा
इस मौके पर शिया और सुन्नी वक्फ बोर्ड के सभी को-ऑर्डिनेटर ने अपने विचार साझा किए। मौजूद रहे। इस दौरान सैय्यद एजाज़ हुसैन, रियाज़ अहमद, अब्दुल्लाह शाहिद, अब्दुल्लाह फैसल, अयाज़ अहमद, एहलाक अहमद, एजाज़ अहमद, मिर्ज़ा सैफ़ बेग आदि शामिल थे।
बैठक में यह तय किया गया कि सभी को-ऑर्डिनेटर अपने-अपने क्षेत्रों में पंजीकरण कार्य में तेजी लाएंगे ताकि समय सीमा के भीतर सभी वक्फ संपत्तियां उम्मीद पोर्टल पर दर्ज हो जाएं।















