बुधवार, 18 मार्च 2026

VKM Varanasi Main ‘कंसेप्चुअल फ्रेमवर्क्स इन जेंडर सेंसिटिव रिसर्च’ पर व्याख्यान

व्याख्यान में 1950 के बाद के विश्व विकास योजना और औरतों के महत्व पर चर्चा



dil india live (Varanasi). वसंत कन्या महाविद्यालय के महिला अध्ययन प्रकोष्ठ और युवा समिति के संयुक्त तत्वावधान में कार्यशाला के दूसरे दिन (18 मार्च 2026 दिन) बुधवार को 6 दिवसीय लिंग संवेदनशीलता अनुसंधान के लिए ‘कंसेप्चुअल फ्रेमवर्क्स इन जेंडर सेंसिटिव रिसर्च’ विषय पर व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि डॉ. स्वाति सुचारिता नंदा (एसोसिएट प्रोफेसर डीएवी पीजी कॉलेज, वाराणसी) थी। मुख्य अतिथि का स्वागत महाविद्यालय की प्राचार्या प्रो. रचना श्रीवास्तव द्वारा किया गया। 

औरतें पैदा नहीं होती, बनाई जाती हैं

मुख्य वक्ता ने अपने संबोधन में जेंडर फ्रेमवर्क पर बात करते हुए कहा कि ‘औरतें पैदा नहीं होती, बनाई जाती हैं।' उन्होंने एलिजाबेथ सी. स्टेंटन, साइमन डी बुवाई, नए सामाजिक आंदोलन, मिस अमेरिका पेजेंट 1968 के आंदोलन के बारे में बात की। उन्होंने 1950 के बाद के विश्व विकास योजना और औरतों के महत्व पर चर्चा की।  ईस्टर बोसरूप की विमेन आधारित रचना ‘ विमेंस रोल इन इकोनॉमिक डेवलपमेंट ’ की बात की जिसमें महिलाओं के विभिन्न क्षेत्रों में भूमिका की बात की गई है। ‘विमेन इन डेवलपमेंट’ की बात करते हुए उन्होंने ‘ टुवर्ड्स इक्वालिटी रिपोर्ट’ के विषय में बताया तथा ‘डेवलपमेंट ऑफ़ विमेन एंड चिल्ड्रेन इन रूरल एरियाज’ के अंतर्गत सेल्फ हेल्प ग्रुप्स (SHG) के साथ ही अपने वक्तव्य में महिला सशक्तिकरण पर बल दिया तथा इसके लिए समय–समय पर किए गए  प्रयासों पर भी बात की। अंत में उन्होंने लिंग तटस्थता की बात करते हुए समझाया कि विमेन एंड डेवलपमेंट के बजाय जेंडर एंड डेवलपमेंट पर यदि ध्यान दिया जाए तो औरतों और पुरुषों के बीच वास्तविक समानता को हासिल किया जा सकता है। 


व्याख्यान के पश्चात छात्राओं ने अतिथि वक्ता से प्रश्न- उत्तर किया।दूसरे सत्र में प्रतिभागियों को लिंग संवेदनशीलता एवं महिला सशक्तिकरण पर आधारित सिनेमा दिखाया गया। जिससे जन जागरूकता फैले। कार्यशाला का संयोजन डॉ. अनुराधा बापुली के द्वारा किया गया तथा कार्यक्रम का संचालन डॉ. मालविका द्वारा किया गया। इस अवसर पर कार्यशाला के आयोजन समिति के सदस्य जिनमें डॉ. सुप्रिया सिंह, डॉ. शशिकेश कुमार गोंड, डॉ. प्रियंका, डॉ. श्वेता सिंह, डॉ. शुभांगी श्रीवास्तव आदि उपस्थित रहे।

VKM Varanasi Main एक दिवसीय स्वास्थ्य जागरूकता शिविर

मानव शरीर की आवश्यक जरूरतों और आयुर्वेद पर विस्तार से चर्चा

योग प्रतिदिन करने पर वेलनेस एक्सपर्ट ने दिया जोर



dil india live (Varanasi). "आधुनिक युग में स्वस्थ जीवनशैली का महत्व" विषय पर एक दिवसीय स्वास्थ्य जागरूकता शिविर का सफल आयोजन वसंत कन्या महाविद्यालय, कमच्छा के कॉन्फ्रेंस हॉल में किया गया।कार्यक्रम का संचालन NSS इकाई 014A  की  कार्यक्रम अधिकारी डॉ. शशि प्रभा कश्यप के मार्गदर्शन में किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य छात्राओं के बीच स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता पैदा करना और स्वस्थ जीवनशैली बनाए रखने में आयुर्वेद के महत्व को उजागर करना था।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि वक्ता स्वास्थ्य कार्यक्रम प्रशिक्षक मनीष कुमार वर्मा, विशिष्ट अतिथि स्वास्थ्य एवं वेलनेस सलाहकार, वाराणसी अनिल कुमार गुप्ता, ऋषि शर्मा और कपिल देव यादव थे। कार्यक्रम की शुरूआत अतिथियों के स्वागत में एनएसएस लक्ष्य गीत तथा एन एस एस ताली से हुई। उसके बाद कार्यक्रम अधिकारी डॉ. शशि प्रभा कश्यप ने सम्मान के प्रतीक के रूप में अतिथियों को बनारसी दुपट्टे भेंट कर अभिनंदन किया। महाविद्यालय की प्राचार्या प्रोफेसर रचना श्रीवास्तव ने कार्यक्रम के सफलता पर खुशी जताई। 



मुख्य अतिथि वक्ता मनीष कुमार वर्मा ने एक्यूप्रेशर तकनीकों पर चर्चा करके अपनी बात शुरू की और स्वास्थ्य लाभ के लिए ताली बजाने की सही विधि का प्रदर्शन किया। उन्होंने दीर्घायु बढ़ाने में स्वस्थ जीवनशैली के महत्व पर जोर दिया और अतीत की बीमारियों की तुलना आधुनिक जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों से की।

उन्होंने मानव शरीर की आवश्यक जरूरतों और आयुर्वेद पर विस्तार से चर्चा की और स्वास्थ्य समस्याओं के लिए जिम्मेदार विभिन्न कारकों, जिनमें पर्यावरणीय विषाक्त पदार्थ भी शामिल हैं, पर बात की। उन्होंने स्वस्थ दिनचर्या बनाए रखने के लिए व्यावहारिक सुझाव भी साझा किए, जैसे कि सुबह की सकारात्मक आदतों को अपनाना, चाय और कॉफी का अत्यधिक सेवन करने से बचना और नियमित रूप से योग का अभ्यास करना। उन्होंने एक मजबूत प्रतिरक्षा प्रणाली (immune system) के महत्व और इसे स्वाभाविक रूप से बेहतर बनाने के तरीकों के बारे में समझाया तथा इसमें आयुर्वेद की महत्वपूर्ण भूमिका का भी जिक्र किया। इसके अलावा, उन्होंने बहुत सारे आयुर्वेदिक वेलनेस और हेल्थकेयर उत्पादों की भी चर्चा की जिनका उद्देश्य रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाना और मधुमेह, जोड़ों की समस्याएँ, लिवर का स्वास्थ्य, हृदय की देखभाल, गुर्दे की पथरी, कैंसर की रोकथाम, थायरॉइड असंतुलन, एलर्जी, बवासीर, तंत्रिका संबंधी विकार, महिलाओं का स्वास्थ्य और आँखों की देखभाल जैसी समस्याओं का समाधान करना था। 


यह सत्र अत्यंत जानकारीपूर्ण था और इसने छात्रों को आयुर्वेद तथा प्राकृतिक उपायों के माध्यम से स्वस्थ जीवन बनाए रखने के संबंध में बहुमूल्य अंतर्दृष्टि प्रदान की।

कार्यक्रम का समापन डॉ. शशि प्रभा कश्यप द्वारा दिए गए हार्दिक धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ, जिसमें उन्होंने वक्ताओं के ज्ञानवर्धक और आँखें खोलने वाले सत्र के लिए उनके प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में लगभग 150 छात्राएं और संकाय सदस्य उपस्थित थे, जिससे यह कार्यक्रम अत्यंत रोचक और सफल रहा।

VKM Varanasi Main 6 दिवसीय लिंग संवेदनशीलता अनुसंधान के लिए शोध प्रविधि पर कार्यशाला का उद्घाटन

नारीवादी शोध प्रविधियां एवं दृष्टि वर्तमान समय की आवश्यकता



dil india live (Varanasi). वसंत कन्या महाविद्यालय में महिला अध्ययन प्रकोष्ठ और युवा समिति के संयुक्त तत्वावधान में 17 मार्च 2026 बुधवार को 6 दिवसीय लिंग संवेदनशीलता अनुसंधान के लिए शोध प्रविधि विषय पर एक कार्यशाला का उद्घाटन मुख्य अतिथि प्रोफेसर चंद्रकला पाडिया (पूर्व कुलपति महाराजा गंगा सिंह विश्वविद्यालय राजस्थान) ने किया। इस अवसर पर प्रोफेसर विभा त्रिपाठी (विधि संकाय काशी हिंदू विश्वविद्यालय) भी उपस्थित रहीं।

अपने संबोधन में कहा मुख्य अतिथि ने कहा कि नारीवादी शोध प्रविधियां एवं दृष्टि वर्तमान समय की आवश्यकता है।  शोध में लिंग आधारित संवेदनशीलता और नारीवादी विचार समाज एवं सामाजिक अनुसंधान की संपूर्णता को अभिव्यक्त करता है। साथ ही नारी वादी दृष्टिकोण को भी शोध में स्थान प्रदान करता है। जिसके बिना शोध कार्य अधूरा है और वह अपनी पूर्णता को नहीं प्राप्त कर सकता। 




अतिथियों का स्वागत महाविद्यालय की प्राचार्या प्रो रचना श्रीवास्तव द्वारा किया गया। अतिथियों का स्वागत करते हुए महाविद्यालय की प्राचार्या ने इस बात पर जोर दिया कि राजनीति पंचायतों में प्रतिनिधित्व एवं समाज और बाजार के विभिन्न समूहों में महिलाओं का प्रतिनिधित्व संबंधी लिंग आधारित संवेदनशील शोध ही एक शोध आधारित समेकित दृष्टि प्रदान करेगा। जिसे आगे बढ़ाने में ऐसी कार्यशालाओं का आयोजन एवं योगदान महत्वपूर्ण हैं।इस अवसर पर महाविद्यालय की प्रबंधिका श्रीमति उमा भट्टाचार्य ने भी उपयुक्त विषय पर अपने वक्तव्य को रखा और आयोजकों को अपनी शुभकामनाएं दी। कार्यशाला का संयोजन डॉ अनुराधा बापुली के द्वारा किया गया तथा कार्यक्रम का संचालन डॉ शुभांगी शुभंकर श्रीवास्तव द्वारा किया गया। इस शुभ अवसर पर मनोविज्ञान के प्रो आर पी सोनकर की नवीन पुस्तक का विमोचन भी अतिथियों द्वारा किया गया।

इस इस अवसर पर कार्यशाला के आयोजन समिति के सदस्य जिनमें डॉ. सुप्रिया सिंह, डॉ शशिकेश कुमार गोंड, डॉ. प्रियंका, डा. प्रतिमा, डा. सिमरन सेठ, डॉ. श्वेता सिंह, डा. मालविका, प्रो मीनू पाठक , प्रो. कमला पांडेय और डा. नैरंजना श्रीवास्तव आदि उपस्थित रहे।

मंगलवार, 17 मार्च 2026

Eid ka Paigham 1: नबी-ए-करीम (स.) का दुनिया को दिखाया रास्ता ही इंसानियत का पैग़ाम

पैगंबर-ए-इस्लाम ईद पर रखते थे सभी का ख्याल


dil india live (Varanasi). नबी-ए-करीम (स.) का दुनिया को दिखाया रास्ता ही इंसानियत का पैग़ाम है। प्यारे नबी ने अपनी 63 साल की जाहिरी जिंदगी में जो कुछ भी करने का अपनी उम्मत को हुक्म दिया उसे पहले खुद करके दिखाया। प्यारे नबी ईद भी सादगी से मनाया करते थे। इसलिए इस्लाम में सादगी से ईद मनाने का हुक्म है। नबी से जुड़ा एक वाक्या है, जिससे सभी को बड़ी सीख मिल सकती है। 

एक बार नबी-ए-करीम हजरत मोहम्मद (स.) ईद के दिन सुबह फज्र की नमाज़ के बाद घर से बाज़ार जा रहे थे। कि आपको एक छोटा बच्चा रोता हुआ दिखाई दिया। नबी (स.) ने उससे कहा आज तो हर तरफ ईद की खुशी मनायी जा रही है ऐसे में तुम क्यों रो रहे हो? उसने कहा यही तो वजह है रोने की, सब ईद मना रहे हैं मैं यतीम हूं, न मेरे वालिदैन है और न मेरे पास कपड़े और जूते-चप्पल के लिए पैसा। यह सुनकर नबी (स.) ने उसे अपने कंधों पर बैठा लिया और कहा कि तुम्हारे वालिदैन भले नहीं हैं मगर मैं तुम्हे अपना बेटा कहता हूं। नबी-ए-करीम (स.) के कंधे पर बैठकर बच्चा उनके घर गया वहां से तैयार होकर ईदगाह में नमाज़ अदा की। जो बच्चा अब तक यतीम था उसे नबी-ए-करीम (स.) ने चन्द मिनटों में ही अपना बेटा बनाकर दुनिया का सबसे अमीर बना दिया। इसलिए नबी की तालीम है कि ईद आये तो आप भी एक दूसरे में खुशियां बांटे।


इसे ईद-उल-फित्र इसलिए कहते हैं क्यों कि इसमें फितरे के तौर पर 2 किलों 45 ग्राम गेंहू जो हम खाते हो उसके दाम के हिसाब से घर के तमाम लोगों का सदाका-ए-फित्र निकालना होता है। सदका ए फित्र ईद की नमाज़ से पहले अदा करना अफ़ज़ल है। नहीं अदा किया तो आपका रोज़ा जमीन और आसमान के बीच में तब तक लटका रहेगा जब तक आप अदा नहीं कर देते। यानी ईद की नमाज़ के बाद भी सदका ए फित्र अदा किया जा सकता है। मगर ईद से पहले करने से गरीब और जरूरतमंद लोगों को वक्त रहते उनका हक़ उन्हें मिल जाता है। दरअसल जकात और फितरा इसलिए ही इस्लाम में बनाया गया है ताकि उससे ग़रीब और जरूरतमंद को उनका हक मिल सके। यूं तो ईद उसकी है जिसने रमज़ान भर इबादत कि और कामयाबी से रमज़ान का पूरा रोज़ा रखा और वक्त रहते फितरा और जकात अदा कर दिया। वहीं ईद मुबारक के दिन खुशियां बांटना भी सुन्नत है। छोटे छोटे मासूम बच्चे भले ही रमज़ान मुबारक और ईद के पैग़ाम को न समझते हों मगर इतना जरूर जानते हैं कि ईद आई है तो ईदगाह जाएंगे, घर के बड़े ईदी देंगे। इसलिए नबी के रास्ते पर चलें और ईद पर उनकी सुन्नतों और पैग़ाम को आम करें। ऐ परवरदिगार तू अपने हबीब के सदके और तुफैल में हम सबको ईद की खुशियां नसीब फरमा और नबी के रास्ते पर चलने की तौफीक दे... आमीन।

मौलाना निजामुद्दीन चतुर्वेदी 

(लेखक उलेमा व मुस्लिम मामलों के जानकार हैं)

DAV PG College Varanasi: NSS स्वयंसेवकों ने निकाली एकता रैली

नशा उन्मूलन में योग की भूमिका पर हुई कार्यशाला




dil india live (Varanasi). डीएवी पीजी कॉलेज के राष्ट्रीय सेवा योजना के विभिन्न इकाइयों द्वारा चल रहे सप्ताहव्यापी शिविर में इकाई ‘ई’ एवं ‘एच’ के कार्यक्रम अधिकारियों डॉ. ऋचा गुप्ता एवं डॉ. प्रियंका वहल के निर्देशन में स्वयंसेवकों ने सिगरा गांधी उद्यान से शहीद उद्यान तक राष्ट्रीय एकता रैली निकाली। रैली में समाज में जागरूकता फैलाने, राष्ट्रीय एकता, स्वच्छता और सामाजिक जिम्मेदारी के प्रति लोगों को प्रेरित करने संबंधित पोस्टर बनाये गए।

इसके बाद स्वयंसेवकों ने छोटे-छोटे समूह में सिगरा मार्केट में विस्तृत सर्वेक्षण किया, जहाँ स्थानीय दुकानदारों से संवाद कर उनके व्यावहारिक जीवन की बारीकियों को समझने का अवसर मिला। इसके अलावा चौथे दिन  रामकृष्ण विद्या मंदिर इंटर कॉलेज, सिद्धगिरी बाग परिसर में योग साधना अकादमी की संस्थापक तुलसी तिवारी एवं गरिमा तिवारी द्वारा योगाभ्यास कराया गया। दूसरे सत्र में स्वयंसेवकों को टीकाकरण जागरूकता से अवगत कराया गया। 





इसके अलावा रासेयो की इकाई ए एवं बी द्वारा राजघाट स्थित शम्भू पंच अग्नि अखाड़ा एवं सभा महादेव मंदिर परिसर में नशा मुक्ति में योग की भूमिका पर कार्यशाला का आयोजन हुआ। कार्यशाला में महंत विवेकानंद बह्मचारी, योगा स्कूल के योगाचार्य अभिषेक पाण्डेय तथा योग एवं संगीत के शिक्षक सैंटियागो, स्पेन ने स्वंयसेवकों का मार्गदर्शन किया। संचालन कार्यक्रम अधिकारी द्वय डॉ. ओम प्रकाश कुमार तथा धन्यवाद ज्ञापन डॉ. सूर्य प्रकाश पाठक ने किया।

NSS camp: Financial Management Skill कार्यशाला में जाना सुरक्षित बैंकिंग के तरीकें

सेबी ट्रेनर मोनी साहू ने दैनिक जीवन में बचत के महत्व पर डाली रौशनी
कठपुतली शो का भी सभी ने उठाया लुत्फ़ 


dil india live (Varanasi). कंपोजिट विद्यालय, छित्तूपुर खास, बीएचयू, वाराणसी में वसंत कन्या महाविद्यालय, कमच्छा की राष्ट्रीय सेवा योजना (nss unit:04) द्वारा आयोजित सात दिवसीय विशेष एनएसएस शिविर का सातवां दिन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। सभी ने गीत, हम होंगे कामयाब... प्रस्तुत कर शिविर की शुरुआत की। 
कार्यक्रम अधिकारी डॉ. शशि प्रभा कश्यप के मार्गदर्शन में सात दिवसीय विशेष एनएसएस शिविर की थीम “युवाओं में कौशल विकास" था। इसके अंतर्गत "वित्तीय प्रबंधन कौशल" (Financial Management Skill) विषय पर एक अत्यंत प्रभावशाली सत्र आयोजित किया गया। इस सत्र का मुख्य उद्देश्य स्वयंसेवकों के बीच वित्तीय योजना, बचत और सुरक्षित बैंकिंग प्रथाओं के बारे में जागरूकता पैदा करना था।
कार्यक्रम की शुरुआत मुख्य वक्ता मोनी साहू के गर्मजोशी भरे स्वागत और सम्मान के साथ हुई। साहू भारत सरकार के अंतर्गत एक SEBI SMART ट्रेनर हैं। डॉ. कश्यप द्वारा कार्यक्रम में उपस्थित अतिथि वक्ता का स्वागत किया गया। मोनी साहू ने वित्तीय प्रबंधन और दैनिक जीवन में बचत के महत्व पर एक ज्ञानवर्धक सत्र प्रस्तुत किया। उन्होंने विभिन्न प्रकार के बैंक खातों के बारे में जानकारी दी और छात्रों को कम उम्र से ही पैसे बचाने की आदत डालने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने बीमा (Insurance) के महत्व पर भी चर्चा की और मुश्किल समय में वित्तीय सुरक्षा प्रदान करने में इसकी भूमिका को समझाया।
सत्र के दौरान, उन्होंने वित्तीय सुरक्षा और कल्याण के उद्देश्य से चलाई जा रही विभिन्न सरकारी योजनाओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने 'सुकन्या समृद्धि योजना' जैसी योजनाओं के लाभों को समझाया, जो 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' पहल के तहत बालिकाओं के वित्तीय भविष्य को सुरक्षित करने में सहायता करती है। उन्होंने 'मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना' का भी उल्लेख किया, जो बालिकाओं की शिक्षा और कल्याण के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करती है।
श्रीमती साहू ने PPF (पब्लिक प्रोविडेंट फंड) की अवधारणा को भी स्पष्ट किया, जिसके तहत कोई भी व्यक्ति प्रति वर्ष ₹500 से लेकर ₹1.5 लाख तक जमा कर सकता है, जिसकी परिपक्वता अवधि (maturity period) 15 वर्ष होती है। उन्होंने चक्रवृद्धि ब्याज (Compound Interest) की शक्ति पर विशेष जोर दिया और इसे "दुनिया का 8वां अजूबा" बताया—यह कथन अक्सर अल्बर्ट आइंस्टीन से जोड़ा जाता है। विभिन्न उदाहरणों के माध्यम से, उन्होंने यह दर्शाया कि किस प्रकार छोटी-छोटी बचतें समय के साथ बढ़कर एक बड़ी राशि का रूप ले सकती हैं।
इसके अतिरिक्त, उन्होंने 'प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना' जैसी बीमा योजनाओं पर चर्चा की, जो मात्र ₹20 प्रति वर्ष के न्यूनतम प्रीमियम पर दुर्घटना की स्थिति में वित्तीय सहायता प्रदान करती है। उन्होंने समझाया कि बीमा को सामान्यतः दो श्रेणियों में विभाजित किया जा सकता है: वह बीमा जो बीमित व्यक्ति के जीवनकाल के दौरान लाभ प्रदान करता है। टर्म इंश्योरेंस (Term Insurance), जो बीमित व्यक्ति की मृत्यु के उपरांत उसके परिवार के सदस्यों को वित्तीय लाभ प्रदान करता है।
वक्ता ने साइबर सुरक्षा और वित्तीय धोखाधड़ी (Financial Frauds) के संबंध में भी जागरूकता फैलाई। उन्होंने छात्रों को सलाह दी कि वे अपने मोबाइल फ़ोन, OTP या बैंकिंग डिटेल्स किसी अजनबी के साथ शेयर न करें, और उन्हें कॉल स्पैम, ऑनलाइन स्कैम, ATM फ्रॉड और QR कोड के गलत इस्तेमाल के बारे में चेतावनी दी। उन्होंने सभी को सतर्क रहने और सुरक्षित डिजिटल लेन-देन करने के लिए प्रोत्साहित किया। श्रीमती साहू ने कहा, "अपने धन पर नियंत्रण पाना ही आत्मनिर्भरता की दिशा में पहला कदम है।" उन्होंने बजट बनाने और प्रतिभूति बाजार (securities market) के संबंध में कई व्यावहारिक सुझाव भी दिए।
सेशन के आखिर में, मोनी साहू ने डॉ. शशि प्रभा कश्यप को सामाजिक सेवा और NSS गतिविधियों में उनकी बेहतरीन काम और लगन के लिए एक अवॉर्ड देकर सम्मानित किया।
लंच ब्रेक के बाद दूसरा सत्र दोपहर 2:00 बजे शुरू हुआ। दूसरा सत्र एक सांस्कृतिक कार्यक्रम था, जिसमें खास मेहमान जयंती कुंडू, शिक्षिका, कंपोजिट विद्यालय, छित्तूपुर थीं। कार्यक्रम की शुरुआत एक दिलचस्प कठपुतली शो से हुई, जिसमें उन्होंने पोलियो टीकाकरण के महत्व पर रोशनी डाली, और बाद में एक और शो पेश किया जिसमें शिक्षा के महत्व पर ज़ोर दिया गया। इसके बाद, NSS के स्वयंसेवकों ने कई तरह के सांस्कृतिक कार्यक्रम पेश किए। यमुना, सृष्टि, रोशनी, गरिमा, वेदिका, श्रेया, देव प्रभा और अमृतांशी ने महिला सशक्तिकरण पर आधारित "उड़ान: एक नई सोच" नाम का एक नुक्कड़ नाटक पेश किया। इस नुक्कड़ नाटक के ज़रिए महिलाओं के अधिकारों और सशक्तिकरण के बारे में एक मज़बूत संदेश दिया गया।


कई और कार्यक्रमों ने इस सत्र में और भी ज़्यादा रौनक भर दी जैसे- आरज़ू ने एक पंजाबी गाने पर ज़ोरदार डांस किया, ज्योति ने NSS के स्वयंसेवकों, प्रोग्राम ऑफिसर और 'युवा शक्ति' की भावना को समर्पित एक कविता सुनाई, ज्योति और अंजलि यादव ने मिलकर एक खूबसूरत गाना पेश किया, जिसे दर्शकों ने खूब सराहा, अंजलि यादव ने इंसानियत पर एक दमदार और दिल को छू लेने वाली कविता भी सुनाई, जिसने दर्शकों को अंदर तक झकझोर दिया, तेजस्विनी पांडा ने महिलाओं को समर्पित एक खूबसूरत गाना गाया, भाग्यज्योति ने एक अर्थपूर्ण कविता पेश की, सृष्टि ओझा ने एक सुरीला गाना गाया, जिसने दर्शकों का मन मोह लिया, तेजस्विनी और दीप्ति ने हरियाणवी अंदाज़ में एक जोशीला डांस किया, इप्सिता ने कथक नृत्य की एक बहुत ही सुंदर प्रस्तुति दी, रूमी बाला दास ने असम की एक पारंपरिक नृत्य शैली का प्रदर्शन किया, आरज़ू ने पूरे जोश के साथ एक हरियाणवी गाना पेश किया, वंशिका चौरसिया ने एक प्यारा सा गाना गाया, जिसकी खूब तारीफ हुई, आखिरी कार्यक्रम एक ग्रुप परफॉर्मेंस थी, जिसमें सभी स्वयंसेवकों की एकता को दिखाया गया।
इसके बाद, स्वयंसेवकों ने सामुदायिक सेवा और सीखने के अपने सात दिवसीय अनुभव साझा किए। कार्यक्रम का समापन स्वयंसेवकों द्वारा धन्यवाद प्रस्ताव, प्रेरक नारे और राष्ट्रगान के साथ हुआ, जिसमें उन्होंने NSS कैंप के दौरान लगातार सहयोग, मार्गदर्शन और प्रोत्साहन देने के लिए डॉ. शशि प्रभा कश्यप के प्रति दिल से आभार व्यक्त किया। सातवाँ दिन एक सकारात्मक मोड़ पर समाप्त हुआ।

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सोमवार, 16 मार्च 2026

Ramadan ka Paigham 26: जानिए रमज़ान की रहमतों और बरकतों का क्या है इनाम

मुक़द्दस रमज़ान के इम्तेहान में पास होने वाले को मिलती हैं "ईद" की खुशियां 



dil india live (Varanasi). । मज़हबे इस्लाम में सब्र और आजमाइश को आला दर्जा दिया गया है। कहा जाता है कि रब वक्त-वक्त पर हर बंदों का इम्तेहान लेता है और उन्हें आज़माता है। ईद की कहानी भी सब्र और आज़माइश का ही हिस्सा है। यानी माह भर जिसने कामयाबी से रोज़ा रखा, सब्र किया, भूखा रहा, खुदा की इबादत की, वो रमज़ान के इम्तेहान में पास हो गया और उसे रब ने ईद कि खुशी अता फरमायी। दरअसल ईद उसकी है जो सब्र करना जानता हो, जिसने रमज़ान को इबादतों में गुज़ारा हो, जो बुरी संगत से पूरे महीने बचता रहा हो, मगर उस शख्स को ईद मनाने का कोई हक़ नहीं है जिसने पूरे महीने रोज़ा नहीं रखा और न ही इबादत की। नबी-ए-करीम (स.) ने फरमाया कि रमज़ान वो मुकदद्स महीना है जो लोगों को यह सीख देता है कि जैसे तुमने एक महीना अल्लाह के लिए वक्फ कर दिया, सुन्नतों और नफ़्ल पर ग़्ाौर किया, उस पर अमल करता रहा, वैसे ही बचे पूरे साल नेकी और पाकीज़गी जारी रखो। यह महीना इस बात की ओर भी इशारा करता है कि अगर एक महीने की इबादत के बाद ईद की खुशी बंदों को रब देता है तो 12 महीने अगर इबादतों में गुज़ारा जाये तो जिन्दगी में हर दिन ईद जैसा और हर रात रमज़ान जैसी होगी। रमज़ान महीने की इबादत इसलिए भी महबूब है क्यों कि ये अल्लाह का महीना है और इस महीने के पूरा होते ही खुदा ईद का तोहफा देकर यह बताता है कि ईद की खुशी तो सिर्फ दुनिया के लिए ह। इससे बड़ा तोहफा कामयाब रोज़ेदारों को आखिरत में जन्नत के रूप में मिलेगा। पूरी दुनिया में यह अकेला ऐसा त्योहार है जिसमें कोई भी पुराने या गंदे कपड़ों में नज़र नहीं आता। अगर एक महीने की इबादत के बाद ईद मिलती है तो हम साल के बारह महीने इबादत करें तो हमारा हर दिन ईद होगा। तो हम क्यों न हर दिन हर महीना अपना इबादत में गुज़ारे।

ज़ुबैर अहमद 

(सामाजिक कार्यकर्ता व सपा नेता)