मंगलवार, 11 जनवरी 2022

नवजात को ‘आयुष्मान’ बनाने में मददगार बना एसएनसीयू

नवजात शिशुओं के लिए संकटमोचक बन रही यह विशेष यूनिट

 • तीन वर्ष में दो हजार से अधिक मासूमों की बचा चुकी  है जान

 • नवजात शिशुओं का  गहन चिकित्सा कक्ष में होता है मुफ्त उपचार



वाराणसी, 11 जनवरी (dil india live)।चौबेपुर के  संतोष के घर  विवाह के आठ वर्ष बाद  बेटे (पहली संतान) का जन्म हुआ । इससे घर-परिवार में खुशी का माहौल था | इसी दौरान अचानक  पता चला कि नवजात को तेज बुखार है। बच्चे को फौरन प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने फौरन जिला महिला अस्पताल के “सिक न्यूबॉर्न केयर यूनिट” (एसएनसीयू) ले जाने की सलाह दी।  एसएनसीयू में बच्चे के भर्ती होते ही वहां मौजूद विशेषज्ञ डॉक्टर उसके इलाज में जुट गए। दो-तीन दिन बाद ही बच्चा पूरी तरह स्वस्थ हो गया, तब  जाकर संतोष के चेहरे पर रौनक लौटी।

बडागांव निवासी पेशे से बढ़ई अशोक की पत्नी ने बेटी को जन्म दिया। दो दिन बाद ही बच्ची का शरीर पीला दिखने लगा। तबियत बिगड़ती देख बेटी को लेकर वह समीप के नर्सिंगहोम में पहुंचे, जहां इलाज पर लंबा खर्च बताया गया। इससे चिंतित अशोक  पड़ोसी की सलाह पर बेटी को  जिला महिला चिकित्सालय के एसएनसीयू में भर्ती कराया। दस दिनों तक चले उपचार के बाद बेटी की जान बच गई वह भी बिना खर्च के। पूरा उपचार निःशुल्क हुआ।

यह कहानी सिर्फ संतोष और अशोक की ही नहीं है बल्कि जिला महिला चिकित्सालय में स्थित “सिक न्यूबॉर्न केयर यूनिट” (एसएनसीयू) में हर रोज कोई न कोई माता-पिता अपने नवजात को लेकर आते हैं और यहां के चिकित्सक संकट में पड़े उनके बच्चे की जान बचाते हैं। एसएनएसीयू की प्रभारी व बालरोग इकाई की वरिष्ठ चिकित्सक डा. मृदुला मल्लिक बताती हैं  कि तीन वर्ष में इस केंद्र पर  2347 नवजात भर्ती  हो कर स्वस्थ  हो चुके हैं । उन्होंने बताया कि वर्ष  2019 में 773 बच्चे, वर्ष 2020 में 886 बच्चे और वर्ष 2021 में 688 बच्चे एसएनसीयू में भर्ती  किए गए । 

 क्या है एसएनसीयू

“सिक न्यूबर्न केयर यूनिट” नवजात शिशुओं के इलाज के लिए आधुनिक व्यवस्था है। यह विशेष वार्ड एक माह तक के उन बच्चों के लिए बनाया गया है जो समय से पहले पैदा हुये हों अथवा कम वजन के हों, जिन बच्चों को सांस लेने में समस्या होती है। इसके अलावा एक माह तक के बच्चों को अन्य बीमारियां होने पर उनका निःशुल्क इलाज किया जाता है। यहां बच्चों के लिए चौबीस घंटे आॅक्सीजन की व्यवस्था उपलब्ध है। यही नहीं मौसम के अनुसार उनके लिए वातावरण ठंडा व गर्म रखने की भी व्यवस्था है। यहां रेडिएंट वार्मर (बच्चों को गर्म रखने के लिए), फोटो थैरेपी (पीलिया पीड़ित बच्चों के लिए), एक्यूवेटर (कम वजन वाले बच्चों के लिए), एसी व हीटर भी लगे है। 

 इन रोगों का होता है उपचार

 प्री-मेच्योर बेबी, न्यूमोनिया, जांडिस, श्वांस संबंधित बीमारियां, कमजोर व कुपोषित बच्चे

 बढ़ेंगे पांच और बेड

जिला महिला चिकित्सालय में स्थित “सिक न्यूबार्न  केयर यूनिट” वर्ष  2013 में शुरू हई थी । वर्त्तमान में यहां बच्चों को भर्ती करने के लिए सात बेड हैं। एसएनसीयू प्रभारी डा. मृदुला मल्लिक बताती हैं जरूरतों को देखते हुए यहां बेड़ बढ़ाने के लिए शासन से अनुरोध किया गया था, जिसे स्वीकार कर लिया गया है। जल्द ही पांच और बेड बढ़ने वाले हैं और यहां बेड की संख्या अब 12 हो जाएगी।

बीएचयू में भी है यस.यन .सी.यू

बीयचयू के सर सुन्दर लाल चिकित्सालय में भी 75 बेड का यसयनसीयू है। इसमे 25 बेड राष्ट्रीय स्वास्थय मिशन के तहत आरक्षित हैं, जहाँ एक माह तक के बच्चों का निःशुल्क उपचार होता है।

राष्ट्रीय युवा दिवस पर लगा नेतृत्व क्षमता विकास प्रशिक्षण शिविर

आशा ट्रस्ट के प्रशिक्षण शिविर में 32 प्रतिभागी हुए शामिल

गांधी की प्रासंगिकता मौजूदा दौर में अधिक:  डॉ. मोहम्मद आरिफ




वाराणसी 11 जनवरी (dil india live)। स्वामी विवेकानंद जी की जयंती 12 जनवरी राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में मनाई जाती है। इस क्रम में युवाओं के लिए विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन प्रारंभ हो गया है। सामाजिक संस्था 'आशा ट्रस्ट' द्वारा युवाओं में  नेतृत्व क्षमता के विकास के लिए प्रशिक्षण शिविर का आयोजन भंदहा कला स्थित अपने प्रशिक्षण केंद्र पर किया जिसका समापन सोमवार को हुआ। इस शिविर में उत्तर प्रदेश के अनेक जिलों के 32 प्रतिभागियों ने भाग लिया।

शिविर के अंतिम दिन प्रथम सत्र को संबोधित करते हुए वरिष्ठ गांधीवादी चिंतक और इतिहासकार डॉ. मोहम्मद आरिफ ने कहा कि आज के दौर में गांधी के विचारों और उनके दर्शन की प्रासंगिकता काफी अधिक हो गयी है। उन्होंने कहा कि जब पूरी दुनिया में हिंसात्मक युद्ध छिड़ा हुआ था, तब गांधी जी ने अहिंसात्मक युद्ध शुरू कर दिया था और हिंसात्मक इतिहास को अहिंसा में बदल दिया. राजनीतिक संघर्ष हल करने के लिए जिस तरह से उन्होंने अहिंसात्मक प्रतिरोध यानी सत्याग्रह का उपयोग किया, इससे हुआ ये कि बाद की दुनिया में राजनीतिक संघर्षों के हल के लिए यह सर्वोत्तम माध्यम बन गया। आज गांधी ही अकेला दीया है जो सर्वत्र शांति, सद्भाव और भाईचारे की रोशनी विखेर सकता है। उन्होंने कहा कि  महात्मा गांधी, शहीद भगत सिंह, जवाहर लाल नेहरू, डॉ भीम राव अम्बेडकर, सुभाषचंद्र बोस आदि सभी महापुरुषों से युवाओं को प्रेरणा लेना चाहिए उन्हें अधिक से अधिक जानने और समझने की कोशिश करनी चाहिए जिससे बेहतर और समतामूलक समाज की स्थापना हो सके। 

दूसरे सत्र को प्रसिद्ध कठपुतली कलाकारों की टीम ने जल संरक्षण, तम्बाकू निषेध जैसे मुद्दों को कठपुतली नाटक के माध्यम से समझाया। टीम के संयोजक मिथिलेश दुबे ने कहा की कि कठपुतली विधा सामाजिक संदेशों को संप्रेषित करने की एक महत्वपूर्ण, प्रभावशाली और लोकप्रिय विधा है। इसके माध्यम से हम किसी भी अपरिचित समूह के बीच अपनी बात रोचक ढंग से रख सकते हैं। वक्ताओं को संविधान की उद्देशिका देकर सम्मानित किया गया।  कार्यक्रम का संचालन आशा ट्रस्ट के समन्वयक वल्लभाचार्य पाण्डेय और धन्यवाद ज्ञापन अरविंद मूर्ति ने किया. प्रशिक्षण शिविर के आयोजन ने राम जन्म भाई, प्रदीप सिंह, सूरज पाण्डेय, महेंद्र राठोर, विनय कुमार सिंह, दीनदयाल आदि की प्रमुख थे।

अल्पसंख्यक कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष का वाराणसी आगमन


वाराणसी11जनवरी। उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी अल्पसंख्यक विभाग के प्रदेश  अध्यक्ष शाहनवाज आलम 12 जनवरी को सुबह वाराणसी पहुंच कर कांग्रेस अल्पसंख्यक विभाग के पदाधिकारियों कार्यकर्ताओं के साथ बैठक करेंगे। इस दौरान वो विभिन्न वार्डो में अल्पसंख्यक समुदाय के बीच संवाद करेंगे। उक्त जानकारी अल्पसंख्यक कांग्रेस के प्रदेश महासचिव हसन मेहंदी कब्बन ने दी है।

फ्रंटलाइन व हेल्थ केयर वर्कर में पहले दिन एहतियाती डोज को लेकर दिखा उत्साह

फ्रन्ट लाइन वर्कर अलका ने लगवाई जिले में पहली “प्रीकाशनरी डोज”

 • अधिकतर ने टीका लगवाने के  बाद पूरी की अपनी ड्यूटी

 • बोले - खुद लगवाया है, दूसरों को भी लगवायेंगे, कोविड को दूर भगायेंगे



 



वाराणसी, 10 जनवरी(dil india live)। कोविड टीके के  एहतियाती डोज  को लेकर सोमवार को पहले  “फ्रन्ट लाइन  वर्कर” व “हेल्थ केयर वर्कर”  ने काफी उत्साह दिखाया। कई ने तो ड्यूटी के बीच में ही मौका निकालकर टीका लगवाया और लौटकर पुनः अपनी ड्यूटी पूरी की। टीका लगवाने के बाद वह काफी आश्वस्त नजर आये। बोले - खुद टीका लगवाया है, दूसरे को लगायेंगे और लगवायेंगे, कोरोना को दूर भगायेंगे।

सिगरा स्टेडियम स्थित  टीकाकरण केन्द्र पर एहतियाती डोज लगवाने के लिए “फ्रन्ट लाइन  वर्कर” समय से पहले ही पहुंच गये थे। वह जल्द से जल्द टीके की एहतियाती डोज लेकर अपनी ड्यूटी पर पहुंचना चाह रहे थे। जिले में टीके की एहतियाती डोज सबसे पहले “फ्रन्ट लाइन  वर्कर” अलका पाण्डेय को लगी। सिगरा स्टेडियम केन्द्र में टीका लगवाने के बाद 29 वर्षीया अलका पाण्डेय ने कहा कि वह बेहद खुशकिस्मत हैं जिन्हे  यह अवसर मिला। उन्होंने बताया कि मार्च  में उन्हें टीके का दूसरा डोज लगा था और जब से उन्होंने सुन रखा था कि “फ्रन्ट लाइन  वर्कर” को टीके की एहतियाती डोज भी लगेगी तभी से वह इस अवसर का इंतजार कर रहीं थीं। एहतियाती डोज लग जाने से वह अब और भी सुरक्षित हो गयी हैं। ऐसे में वह अधिक लगन से अपने कर्तव्यों का पालन कर सकेंगी।

यहां एहतियाती डोज लगवाने वालों में  जिला क्षय व कुष्ठ रोग अधिकारी डा. राहुल सिंह भी शामिल रहे। एहतियाती डोज लगवाने के बाद उन्होंने कहा कि सभी फ्रन्ट लाइन वर्कर को टीके की एहतियाती डोज जल्द से जल्द लगवा लेनी चाहिए ताकि वह और भी सुरक्षित हो जाएं। एहतियाती डोज लगवाने के फौरन बाद डा. राहुल सिंह पं. दीन दयाल चिकित्सालय पहुंचे और उन्होंने ओपीडी में मरीजों को देखा। इसके साथ ही स्वास्थ्य विभाग के जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डा. वी. एस. राय व वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी डा. ए. के. पाण्डेय एवं उनकी टीम को भी प्रीकाशनरी डोज लगायी गई।

श्री शिव प्रसाद गुप्त मण्डलीय चिकित्सालय में फ्रन्ट लाइन वर्कर ने कोविड टीके की एहतियाती डोज काफी उत्साह के साथ लगवाया। यहां सिस्टर कमलावती ने टीके सबसे पहले एहतियाती डोज लगवायी। उन्होंने बताया कि 22 जनवरी 2021 को उन्होंने टीके की पहली डोज लगवाई ही थी। दूसरी डोज उन्हें 18 फरवरी 2021 को लगी थी। एहतियाती डोज का उन्हें इंतजार था। इसके लग जाने से अब वह पहले से अधिक सुरक्षित हो चुकी हैं। उन्होंने कहा - सभी फ्रन्ट लाइन वर्कर को यह एहतियाती डोज लगवानी चाहिए ताकि वह खुद सुरक्षित रहते हुए मरीजों की सेवा कर सकेंगे । एसएसपीजी अस्पताल की सिस्टर रीता सिंह ने भी यहां एहतियाती डोज लगवाया और बोली यह बहुत जरूरी था क्योंकि हम सब खतरों के बीच रहकर मरीजों की सेवा करते हैं । पहले अपने आप को सुरक्षित कर ही हम दूसरों की जान बचा सकते हैं, इसलिए सभी फ्रन्ट लाइन वर्कर को एहतियाती डोज लगवाना चाहिए। एसएसपीजी अस्पताल की सिस्टर माधुरी ने भी टीके की एहतियाती डोज लगवायी और बोली हमने खुद तो टीके की सभी डोज लगवा ली है अब दूसरों को भी इसके लिए प्रोत्साहित करेंगे।

जिले में पहले दिन 917 को लगी एहतियाती डोज़

15 से 18 वर्ष के 19,658 किशोरों को लगा टीका

टीकाकरण अभियान में 39,273 लाभार्थियों को लगा टीका


वाराणसी, 10 जनवरी(dil india live)। जिलाधिकारी कौशल राज शर्मा के निर्देशन में जिले में कोविड-19 टीकाकरण का महा अभियान चरणबद्ध तरीके से चल रहा है। जनपद में सोमवार से हेल्थ केयर व फ्रंटलाइन वर्कर तथा 60 वर्ष से ऊपर के गंभीर बीमारी से ग्रसित व्यक्तियों को प्रीकाशनरी डोज़ (एहतियाती टीका) लगाने की शुरुआत की गई है। पहले दिन 917 लोगों ने एहतियाती टीका लगवाया। इसके साथ ही 19,658 किशोर-किशोरियों को कोविड का टीका लगाया गया। जिले के करीब 200 से अधिक स्कूलों में किशोरों का टीकाकरण किया गया। 

मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ संदीप चौधरी ने बताया कि सोमवार को जिले में हेल्थ केयर व फ्रंटलाइन वर्कर तथा 60 वर्ष से ऊपर के पूर्व से गंभीर बीमारी से ग्रसित व्यक्तियों को प्रीकाशनरी डोज़ लगाने की शुरुआत की जा चुकी है। दूसरी डोज़ के नौ माह या 39 सप्ताह बाद लगाई जा रही प्रीकाशनरी डोज़ के लिए सभी हेल्थ केयर व फ्रंटलाइन वर्कर बेहद उत्सुक थे और काफी समय से इसका इंतजार कर रहे थे। अब जब उन्हें प्रीकाशनरी डोज़ लग चुकी है, इससे उनकी रोग-प्रतिरोधक क्षमता और बढ़ जाएगी। सीएमओ ने कहा कि प्रत्येक कोविड टीकाकरण केंद्र पर हेल्थ केयर व फ्रंटलाइन वर्कर में उत्साह देखने को मिला। इसके साथ ही स्कूलों के अतिरिक्त अन्य स्थानों पर भी किशोर-किशोरियों में भी खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। 

सीएमओ ने बताया कि सोमवार को विभिन्न केन्द्रों, चैरिटेबल अस्पतालों सहित  511 सत्रों व करीब 200 से अधिक स्कूलों में कुल 39,273 लाभार्थियों का टीकाकरण किया गया, जिसमें 33,381 लाभार्थियों को प्रथम डोज तथा 4,975 लाभार्थियों को दूसरी डोज एवं 917 लोगों को प्रीकाशनरी डोज़ का टीका लगाया गया। इस क्रम में 15 से 18 वर्ष के बीच के 19,658 लाभार्थियों को, 18 से 45 वर्ष तक के बीच के 16,438 लाभार्थियों को, 45 से 60 वर्ष के बीच के 1,503 लाभार्थियों एवं 60 वर्ष से ऊपर के 752 लाभार्थियों को कोरोना का टीका लगाया गया। सीएमओ ने बताया कि अभी तक जिले में कुल 47,41,910 कोरोना डोज़ लगाई जा चुकी हैं। इसमें से 28,79,093 पहली डोज़ और 17,84,240 दूसरी डोज़ लगाई जा चुकी हैं।


सोमवार, 10 जनवरी 2022

कोरोना की बंदिशों के बीच मनेगा हजरत रहीम शाह का सालाना उर्स

 वाराणसी 10 जनवरी (dil india live)। हजरत रहीम शाह बाबा रहमतुल्लाह अलैह का तीन दिनी सालाना उर्स कोविड प्रोटोकाल के साथ बाबा के बेनिया स्थित आस्ताने में मनेगा। इस दौरान बाबा के आस्ताने पर फातिहा पढ़ने और मन्नतों की चादर चढ़ाने के लिए अकीदतमंदों का हुजूम उमड़ेगा। दूरदराज से आए अकीदतमंदों के कोरोना से बचाव के इंतज़ाम किए जा रहे हैं। बाबा के दर पर हाजिरी के साथ ही तकरीर और नात-ए-पाक का नजराना भी बाबा की शान में पेश किया जायेगा। तीन दिनी उर्स 

की शुरुआत मंगलवार को हजरत रहीम शाह बाबा के दर पर पाक कुरान की तेलावत से होगा। जोहर की नमाज के बाद महफिल-ए-शमा का आयोजन किया जायेगा। शाम को चादरपोशी और मगरिब की नमाज के बाद मीलाद शरीफ होगा। मीलाद शरीफ में बड़ी तादाद में अकीदतमंद शामिल होते हैं। इस मौके पर तकरीर और लंगर भी चलेगा। सुबह से शाम तक बाबा के दर पर फातिहा पढ़ने वाले आयेगे। आने वालों का खैरमखदम सज्जादानशीन मोहम्मद सैफ रहीमी करेंगे। उर्स को देखते हुए दरगाह को सजाया गया है, तथा आसपास भी सजावट की गई।

निकलेगी चादर होगी कव्वाली

सरपरस्त मोहम्मद शाहिद ने बताया कि 11 को फज्र के बाद कुरआन ख्वानी, जोहर के बाद महफिले समा, असर बाद चादर पोशी, मगरिब बाद मिलाद शरीफ, ईशा बाद तकरीर व लंगर, उसी तरह दूसरे दिन 12 को फज्र में कुरआन ख्वानी, बाद नमाज असर ग़ुस्ल मजार शरीफ, बाद नमाज मगरिब सरकारी चादर पोशी व मिलाद शरीफ, बाद नमाज ईशा लंगर व महफिले समा, फिर तीसरे दिन 13 को फज्र में कुरआन ख्वानी के बाद 10:30 बजे कुल शरीफ व बादहु रंग महफ़िल, लंगर  फिर बाद नमाज मगरिब महफिले समां होगा। सभी आयोजन कोविड गाइड लाइन के तहत किया जाएगा। आयोजन में अमन और मिल्लत की दुआएं होगी।

गुरु गोविंद सिंह की देश-दुनिया में 355 वीं जयंती मनाई गई

जिन प्रेम कियो तिनही प्रभु पायो...

मैं हूं परम पूरक को दासा देखन आयो जगत तमाशा...



Varanasi 09 जनवरी (dil india live) : सिक्ख धर्म के दसवें पातशाह गुरु गोविंद सिंह की जयंती पूरे श्रद्धा और उल्लास के साथ आस्थापूर्वक देश-दुनिया के साथ ही धर्म की नगरी काशी में भी मनायी गयी। इस अवसर गुरुद्वारा गुरुबाग व गुरुद्वारा नीचीबाग में विशेष आयोजन किये गये। पूरे दिन गुरुद्वारे शबद कीर्तन के बोलों से गूंजते रहे। दोनों गुरुद्वारों में दरबार साहिब को फूलमाला और बिजली के झालरों से सजाया गया था। सुबह से ही दरबार में हाजिरी लगाने वालों का तांता लगा रहा। हालांकि कोविड के चलते रात का दीवान आनलाइन ही सजा, गुरुद्वारों के पट रात 10 बजे बंद कर दिये गये।

इससे पहले सुबह गुरु पर्व का आगाज गुरुद्वारा बड़ी संगत नीचीबाग में गुरु ग्रंथ साहिब के प्रकाश से हुई। फूलों फूलों से सजी पालकी श्री गुरुग्रंथ साहिब की परिक्रमा में बड़ी संख्या में भक्त शामिल हुए। शब्द कीर्तन गायन कर गुरु ग्रंथ साहिब का प्रकाश हुआ।इसी के साथ ही पिछले 40 दिनों से निकल रही प्रभातफेरियों एवं श्री अखंड पाठ साहिब जी का लड़ी पाठ का भी समापन हुआ। अरदास एवं प्रसाद वितरण में गुरु भक्तों का हुजुम जुटा हुआ था। शाम को आनलाईन दीवान सजाया गया। 

 गुरुद्वारा गुरुबाग में हजूरी रागी जत्था भाई नरेंद्र सिंह भाई रकम सिंह भाई रंजीत सिंह ने गुरुवाणी, शबद कीर्तन व कथा से संगत को निहाल किया। सुबह से से रात तक गुरुद्वारे, सच कहूं सुन लेहु सभै, जिन प्रेम कियो तिनही प्रभु पायो...व, मैं हूं परम पूरक को दासा देखन आयो जगत तमाशा...जैसे शबद-कीर्तन के स्वर गूंज रहे थे। घरों से लेकर जश्न का माहौल था पंगत और संगत का उल्लास गुरुदारों में देखते ही बन रहा था।

गुरुबाग में तो गजब की रौनक थी। सुबह से ही श्रद्धालुओं का गुरुद्वारे में पहुंचने का क्रम शुरू हुआ जो अनवरत जारी रहा। पूरे दिन गुरुद्वारों में शबद कीर्तन में लोग जुटे हुए थे। गुरूनानक खालसा बालिका इंटर कालेज एवं गुरुनानक इंग्लिश स्कूल के बच्चों ने भी शबद कीर्तन में भाग लिया। इस अवसर पर विशिष्ट लोगों को सिरोपा देकर सम्मान किया गया। मौजूद संगत ने पंगत में बैठकर गुरु का अटूट लंगर बरता। जिसमें बड़ी संख्या में दूसरे धर्म के भी लोग शामिल हुए और प्रसाद ग्रहण कर खुद को निहाल किया।मुख्य ग्रंथि भाई रंजीत सिंह ने दीवान समाप्ति की अरदास की। इस अवसर पर बलजीत सिंह, महंत सिंह, भाई धरमवीर सिंह, परमवीर सिंह अहलूवालिया आदि मौजूद थे।