गुरुवार, 19 मार्च 2026

Gender-Sensitive Research Methodology कार्यक्रम के तीसरे दिन दो सत्रों में हुई कार्यशाला

रसोईघर महिलाओं के लिए एक प्रकार की “रसायन प्रयोगशाला” : प्रो. ध्रुव 

स्तन और गर्भाशय कैंसर महिलाओं में तेजी से बढ़ती गंभीर बीमारियां : डा. नैना



dil india live (Varanasi). वसंत कन्या महाविद्यालय में महिला अध्ययन प्रकोष्ठ एवं युवा समिति के संयुक्त तत्वावधान में संचालित छह दिवसीय लिंग-संवेदनशीलता अनुसंधान (Gender-Sensitive Research Methodology) कार्यक्रम के अंतर्गत तृतीय दिवस, गुरुवार, 19 मार्च 2026 को दो सत्रों में कार्यशाला का आयोजन किया गया।

प्रथम सत्र में ‘महिलाएं, लिंग और विज्ञान’ विषय पर विचार-विमर्श किया गया, जबकि द्वितीय सत्र में ‘स्वास्थ्य संचार और लिंग: स्तन एवं गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर पर केंद्रित अध्ययन’ विषय पर विशेषज्ञों द्वारा विस्तृत प्रस्तुति दी गई। कार्यशाला के सफल आयोजन के लिए प्राचार्या प्रोफेसर रचना श्रीवास्तव ने शुभकामनाएं दी।

कार्यक्रम के पहले सत्र में मुख्य अतिथि बीएचयू इतिहास विभाग के प्रो. ध्रुव कुमार सिंह थे। मुख्य अतिथि का स्वागत डॉ अनुराधा बापुली द्वारा किया गया। उन्होंने कहा कि आज विज्ञान हमारे दैनिक जीवन का अभिन्न हिस्सा बन चुका है और मानव उसके साथ अधिक सशक्त संबंध स्थापित कर रहा है। उन्होंने कहा कि रसोईघर को महिलाओं के लिए एक प्रकार की “रसायन प्रयोगशाला” के रूप में देखा जा सकता है, जहाँ पाक-कला विज्ञान का एक सरल उदाहरण है। समय के साथ महिलाएं पेशेवर रूप से भी विज्ञान के क्षेत्र में आगे बढ़ी हैं, विशेषकर होम साइंस जैसे विषयों के माध्यम से। परन्तु होम साइंस को एक पेशेवर और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखा जाना चाहिए था, पर यह भी लैंगिक पूर्वाग्रह का शिकार होकर सीमित दायरे में रह गया। हालांकि, विज्ञान के विकास में जेंडर बायस और पदानुक्रम जैसी बाधाएँ बनी रहीं, जो उचित नहीं हैं। विज्ञान एक सार्वभौमिक ज्ञान है, जिसका किसी एक राष्ट्र या एक लिंग से संबंध नहीं होता। इसका विकास निरंतर परिवर्तन और प्रयोग के माध्यम से होता है।

 उन्होंने कहा कि किसी भी राष्ट्र के विकास में दोनों लिंगों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है और विज्ञान के विकास के बिना समग्र प्रगति संभव नहीं है। संक्षेप में, विज्ञान की भागीदारी के बिना लैंगिक संवेदनशीलता को सही नहीं किया जा सकता और न ही महिला सशक्तिकरण संभव है। केवल विज्ञान ही जेंडर से जुड़ी रूढ़ियों को तोड़ सकता है।



कार्यक्रम के दूसरे सत्र में मुख्य अतिथि एपेक्स हॉस्पिटल, वाराणसी की डॉ. नैना गुप्ता ने अपने संबोधन में ‘स्वास्थ्य संचार और लिंग: स्तन एवं गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर पर केंद्रित अध्ययन’ विषय पर विस्तृत रूप से अपने विचार व्यक्त किए।उन्होंने बताया कि स्तन कैंसर और गर्भाशय ग्रीवा (सर्वाइकल) कैंसर महिलाओं में तेजी से बढ़ती गंभीर बीमारियां हैं, जिनके पीछे प्रमुख कारणों में जागरूकता की कमी, असंतुलित जीवनशैली, एचपीवी (HPV) संक्रमण, समय पर जांच न कराना तथा स्वच्छता की अनदेखी शामिल हैं। 

उन्होंने विशेष रूप से कहा कि कई महिलाएं संकोच या जानकारी के अभाव में शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज कर देती हैं, जिससे बीमारी गंभीर रूप ले लेती है। आगे चर्चा करते हुए उन्होंने बताया कि इन कैंसरों से बचाव के लिए नियमित स्वास्थ्य जांच अत्यंत आवश्यक है। स्तन कैंसर के लिए स्वयं स्तन परीक्षण (Self Breast Examination) और समय-समय पर मैमोग्राफी करवाना चाहिए, जबकि गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर से बचाव हेतु एचपीवी वैक्सीनेशन और पाप स्मीयर टेस्ट कराना जरूरी है। इसके साथ ही व्यक्तिगत स्वच्छता, संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने पर भी उन्होंने जोर दिया।उन्होंने स्वास्थ्य संचार की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि सही और सरल जानकारी का व्यापक प्रसार महिलाओं को अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरूक और सशक्त बनाता है। अंत में उन्होंने सभी से अपील की कि वे नियमित जांच कराएं और अन्य महिलाओं को भी इसके प्रति जागरूक करें।


कार्यशाला का सफलतापूर्वक संयोजन डॉ अनुराधा बापुली तथा संचालन डॉ श्वेता सिंह द्वारा किया गया। इस अवसर पर कार्यशाला के आयोजन समिति के सदस्य जिनमें डॉ. सुप्रिया, डॉ. प्रियंका, डाॅ. शशिकेश, डॉ. मालविका, डॉ. शुभांगी , डॉ अनु सिंह आदि उपस्थित रहे।

Chand Raat Aaj, दीदार को उमड़ेगा मस्जिदों, घरों, मैदानों में मोमिनीन का हुजूम

आज दिखा चांद तो मिलेगी दोहरी ईद, नहीं दिखा तो मिलेगा दूसरा अलविदा जुमा



dil india live (Varanasi). रहमत,  मगफिरत और जहन्नुम से आजादी का मुक़द्दस महीना रमजान हमसे रुखसत होने वाला है। इसका ग़म जहां इबादतगुजारों को है वहीं ईद आने की खुशी भी। ईद आने में अब महज़ कुछ ही वक्त रह गए हैं। आज चांद रात है, अगर चांद दिखा तो माहे रमज़ान हमसे जुदा हो जाएगा और जुमे के मुक़द्दस दिन मुस्लिम ईद की खुशियां मनाएंगे। आज अगर चांद दिखता है तो दोहरी ईद मिलेगी क्योंकि जुमा छोटी ईद होती है। उसी दिन ईद मिलना खुशियां दुगनी करेगा अगर आज चांद नहीं दिखा तो भी झोली में खुशियां ही है दूसरा अलविदा जुमा नसीब होने और एक और रोज़ा मिलने की खुशी। यानी इस बार रब रोज़ादारों पर ज्यादा मेहरबान है।


तो मिल सकता है 30 वां रोज़ा 

आज अगर चांद का दीदार नहीं हुआ तो कल मोमिन एक और रोज़ा रखकर अपना 30 रोज़ा मुकम्मल करेंगे और शनिवार की सुबह नमाज़े ईद अदा की जाएगी। मुगलिया मस्जिद बादशाह के शाही इमाम मौलाना हसीन अहमद हबीबी ने बताया कि पूर्वांचल चांद कमेटी चांद देखने के लिए तैयार चांद के लिए टीम बनाई गई है जिससे कोई भी संपर्क करके चांद की जानकारी ले सकता है।

दरअसल हिजरी कैलेंडर में २८, ३१ तारीख का कोई वजूद नहीं है। हिजरी महीना चांद पर आधारित है। इसलिए कभी २९ दिन का तो कभी ३० दिन का होता है। इसलिए हर साल तकरीबन १० दिन इस्लामी पर्व पहले आ जाता हैं। ईद की तैयारियां अंतिम चरण में है। आज चांद देखने मोमिनीन मस्जिदों, मैदानों और घरों की छतों पर एकत्र होंगे। चांद के दीदार के साथ ही तय होगा कि ईद कब है जुमा या फिर शनिवार।

चांद दिखे तो इनसे करें करें सम्पर्क 
मौलाना मोइनुद्दीन अहमद फारूकी प्यारे मियां (Piyare Miya) 9415695493,M. Abdul Hadi Khan  9415996307,M. Ansarul Haque 7985336211, M. Uzair Ahmad 8318356937, Pro. Irfan Amjadi 9305700668, M. Q. Moazzam 6306410448, M. Noman Barkati 7523098124,


DAV PG College Main महिला सशक्तिकरण संवाद में छात्राओं ने किया रैम्प वॉक

भरतनाट्यम में चेन्नई की कृपा रवि ने की शक्ति की आराधना

डॉ. मंगला कपूर ने साझा किया एसिड अटैक का दर्द



dil india live (Varanasi). वाराणसी के डीएवी पीजी कॉलेज में आइक्यूएसी के अंतर्गत महिला विकास प्रकोष्ठ द्वारा बुधवार को महिला सशक्तिकरण संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। स्व. पीएन सिंह यादव स्मृति सभागार में आयोजित कार्यक्रम में चेन्नई से आई टेक उद्यमी एवं भरतनाट्यम कलाकार कृपा रवि एवं पद्मश्री से सम्मानित होने वाली विदुषी प्रो. मंगला कपूर ने छात्राओं से संवाद किया। इसके साथ ही कॉलेज की छात्राओं ने प्रख्यात महिला शख्सियतों पर आधारित फैशनशो और रैम्पवॉक आयोजित किया गया। 

मुख्य अतिथि कृपा रवि ने शक्ति की उपासना के स्वरूप में मंत्रमुग्ध कर देने वाला भरतनाट्यम नृत्य प्रस्तुत किया। शक्ति की स्वरुप माँ दुर्गा, माँ काली, माँ सरस्वती के रूपों का भावपूर्ण मंचन किया। इस अवसर पर उन्होंने छात्राओं से संवाद करते हुए कहा कि तुम शक्ति हो, मज़बूत हो और बहुमुखी हो। ज़िंदगी के दौर में बड़े सपने देखो, साहस से काम करो और मिलकर कुछ सार्थक बनाओ। प्रेरणा को क्रम में बदलो और बेहतर शुरुआत करें।





विशिष्ट अतिथि विदुषी प्रो. मंगला कपूर ने कहा कि आज लड़किया लड़को से कंधा मिला कर नहीं चल रही बल्कि उनसे आगे चल रही है। हम किसी से कमजोर नहीं है, एक अलग पहचान हमे बनानी है और खुद को समाज मे स्थापित करना है।

इसके पूर्व उप प्राचार्य प्रो.संगीता जैन ने अतिथि द्वय का स्मृति चिन्ह एवं अंगवस्त्र प्रदान कर स्वागत किया। संचालन  डॉ. तरु सिंह, विषय स्थापना डॉ. साक्षी चौधरी एवं धन्यवाद ज्ञापन डॉ. त्रिपुरसुंदरी ने दिया। इस अवसर पर मुख्य रूप से प्रो. ऋचारानी यादव, प्रो.पूनम सिंह, प्रो.मधु सिसोदिया, डॉ. हसन बानो, डॉ. कल्पना सिंह, डॉ. आहूति सिंह, डॉ. ऋचा गुप्ता, डॉ. प्रियंका बहल, रुचि भाटिया, सपना श्रीवास्तव सहित प्रकोष्ठ की समस्त महिलाएं शामिल रही। 



छात्राओं ने किया रैम्पवॉक

 कार्यक्रम में छात्राओं ने मशहूर महिलाओं पर फैशनशो आयोजित किया। श्रेया शर्मा को नायिका बुलबुल के लिए प्रथम स्थान, श्राबोनि भट्टाचार्य को लता मंगेशकर के लिए द्वितीय स्थान एवं श्री बरनवाल को एसिड अटैक पीड़िता के रूप तथा एस्सेल बोइपाई को रानी लक्ष्मीबाई के लिए संयुक्त रूप से तीसरा स्थान मिला। इसके अलावा छात्राओं ने सावित्रीबाई फुले, किरण बेदी, मिशेल ओबामा, रानी पद्मावती आदि के रुप मे रैम्पवॉक किया। संयोजन छात्रा नैमिष ने किया।

बुधवार, 18 मार्च 2026

VKM Varanasi Main ‘कंसेप्चुअल फ्रेमवर्क्स इन जेंडर सेंसिटिव रिसर्च’ पर व्याख्यान

व्याख्यान में 1950 के बाद के विश्व विकास योजना और औरतों के महत्व पर चर्चा



dil india live (Varanasi). वसंत कन्या महाविद्यालय के महिला अध्ययन प्रकोष्ठ और युवा समिति के संयुक्त तत्वावधान में कार्यशाला के दूसरे दिन (18 मार्च 2026 दिन) बुधवार को 6 दिवसीय लिंग संवेदनशीलता अनुसंधान के लिए ‘कंसेप्चुअल फ्रेमवर्क्स इन जेंडर सेंसिटिव रिसर्च’ विषय पर व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि डॉ. स्वाति सुचारिता नंदा (एसोसिएट प्रोफेसर डीएवी पीजी कॉलेज, वाराणसी) थी। मुख्य अतिथि का स्वागत महाविद्यालय की प्राचार्या प्रो. रचना श्रीवास्तव द्वारा किया गया। 

औरतें पैदा नहीं होती, बनाई जाती हैं

मुख्य वक्ता ने अपने संबोधन में जेंडर फ्रेमवर्क पर बात करते हुए कहा कि ‘औरतें पैदा नहीं होती, बनाई जाती हैं।' उन्होंने एलिजाबेथ सी. स्टेंटन, साइमन डी बुवाई, नए सामाजिक आंदोलन, मिस अमेरिका पेजेंट 1968 के आंदोलन के बारे में बात की। उन्होंने 1950 के बाद के विश्व विकास योजना और औरतों के महत्व पर चर्चा की।  ईस्टर बोसरूप की विमेन आधारित रचना ‘ विमेंस रोल इन इकोनॉमिक डेवलपमेंट ’ की बात की जिसमें महिलाओं के विभिन्न क्षेत्रों में भूमिका की बात की गई है। ‘विमेन इन डेवलपमेंट’ की बात करते हुए उन्होंने ‘ टुवर्ड्स इक्वालिटी रिपोर्ट’ के विषय में बताया तथा ‘डेवलपमेंट ऑफ़ विमेन एंड चिल्ड्रेन इन रूरल एरियाज’ के अंतर्गत सेल्फ हेल्प ग्रुप्स (SHG) के साथ ही अपने वक्तव्य में महिला सशक्तिकरण पर बल दिया तथा इसके लिए समय–समय पर किए गए  प्रयासों पर भी बात की। अंत में उन्होंने लिंग तटस्थता की बात करते हुए समझाया कि विमेन एंड डेवलपमेंट के बजाय जेंडर एंड डेवलपमेंट पर यदि ध्यान दिया जाए तो औरतों और पुरुषों के बीच वास्तविक समानता को हासिल किया जा सकता है। 


व्याख्यान के पश्चात छात्राओं ने अतिथि वक्ता से प्रश्न- उत्तर किया।दूसरे सत्र में प्रतिभागियों को लिंग संवेदनशीलता एवं महिला सशक्तिकरण पर आधारित सिनेमा दिखाया गया। जिससे जन जागरूकता फैले। कार्यशाला का संयोजन डॉ. अनुराधा बापुली के द्वारा किया गया तथा कार्यक्रम का संचालन डॉ. मालविका द्वारा किया गया। इस अवसर पर कार्यशाला के आयोजन समिति के सदस्य जिनमें डॉ. सुप्रिया सिंह, डॉ. शशिकेश कुमार गोंड, डॉ. प्रियंका, डॉ. श्वेता सिंह, डॉ. शुभांगी श्रीवास्तव आदि उपस्थित रहे।

VKM Varanasi Main एक दिवसीय स्वास्थ्य जागरूकता शिविर

मानव शरीर की आवश्यक जरूरतों और आयुर्वेद पर विस्तार से चर्चा

योग प्रतिदिन करने पर वेलनेस एक्सपर्ट ने दिया जोर



dil india live (Varanasi). "आधुनिक युग में स्वस्थ जीवनशैली का महत्व" विषय पर एक दिवसीय स्वास्थ्य जागरूकता शिविर का सफल आयोजन वसंत कन्या महाविद्यालय, कमच्छा के कॉन्फ्रेंस हॉल में किया गया।कार्यक्रम का संचालन NSS इकाई 014A  की  कार्यक्रम अधिकारी डॉ. शशि प्रभा कश्यप के मार्गदर्शन में किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य छात्राओं के बीच स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता पैदा करना और स्वस्थ जीवनशैली बनाए रखने में आयुर्वेद के महत्व को उजागर करना था।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि वक्ता स्वास्थ्य कार्यक्रम प्रशिक्षक मनीष कुमार वर्मा, विशिष्ट अतिथि स्वास्थ्य एवं वेलनेस सलाहकार, वाराणसी अनिल कुमार गुप्ता, ऋषि शर्मा और कपिल देव यादव थे। कार्यक्रम की शुरूआत अतिथियों के स्वागत में एनएसएस लक्ष्य गीत तथा एन एस एस ताली से हुई। उसके बाद कार्यक्रम अधिकारी डॉ. शशि प्रभा कश्यप ने सम्मान के प्रतीक के रूप में अतिथियों को बनारसी दुपट्टे भेंट कर अभिनंदन किया। महाविद्यालय की प्राचार्या प्रोफेसर रचना श्रीवास्तव ने कार्यक्रम के सफलता पर खुशी जताई। 



मुख्य अतिथि वक्ता मनीष कुमार वर्मा ने एक्यूप्रेशर तकनीकों पर चर्चा करके अपनी बात शुरू की और स्वास्थ्य लाभ के लिए ताली बजाने की सही विधि का प्रदर्शन किया। उन्होंने दीर्घायु बढ़ाने में स्वस्थ जीवनशैली के महत्व पर जोर दिया और अतीत की बीमारियों की तुलना आधुनिक जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों से की।

उन्होंने मानव शरीर की आवश्यक जरूरतों और आयुर्वेद पर विस्तार से चर्चा की और स्वास्थ्य समस्याओं के लिए जिम्मेदार विभिन्न कारकों, जिनमें पर्यावरणीय विषाक्त पदार्थ भी शामिल हैं, पर बात की। उन्होंने स्वस्थ दिनचर्या बनाए रखने के लिए व्यावहारिक सुझाव भी साझा किए, जैसे कि सुबह की सकारात्मक आदतों को अपनाना, चाय और कॉफी का अत्यधिक सेवन करने से बचना और नियमित रूप से योग का अभ्यास करना। उन्होंने एक मजबूत प्रतिरक्षा प्रणाली (immune system) के महत्व और इसे स्वाभाविक रूप से बेहतर बनाने के तरीकों के बारे में समझाया तथा इसमें आयुर्वेद की महत्वपूर्ण भूमिका का भी जिक्र किया। इसके अलावा, उन्होंने बहुत सारे आयुर्वेदिक वेलनेस और हेल्थकेयर उत्पादों की भी चर्चा की जिनका उद्देश्य रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाना और मधुमेह, जोड़ों की समस्याएँ, लिवर का स्वास्थ्य, हृदय की देखभाल, गुर्दे की पथरी, कैंसर की रोकथाम, थायरॉइड असंतुलन, एलर्जी, बवासीर, तंत्रिका संबंधी विकार, महिलाओं का स्वास्थ्य और आँखों की देखभाल जैसी समस्याओं का समाधान करना था। 


यह सत्र अत्यंत जानकारीपूर्ण था और इसने छात्रों को आयुर्वेद तथा प्राकृतिक उपायों के माध्यम से स्वस्थ जीवन बनाए रखने के संबंध में बहुमूल्य अंतर्दृष्टि प्रदान की।

कार्यक्रम का समापन डॉ. शशि प्रभा कश्यप द्वारा दिए गए हार्दिक धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ, जिसमें उन्होंने वक्ताओं के ज्ञानवर्धक और आँखें खोलने वाले सत्र के लिए उनके प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में लगभग 150 छात्राएं और संकाय सदस्य उपस्थित थे, जिससे यह कार्यक्रम अत्यंत रोचक और सफल रहा।

VKM Varanasi Main 6 दिवसीय लिंग संवेदनशीलता अनुसंधान के लिए शोध प्रविधि पर कार्यशाला का उद्घाटन

नारीवादी शोध प्रविधियां एवं दृष्टि वर्तमान समय की आवश्यकता



dil india live (Varanasi). वसंत कन्या महाविद्यालय में महिला अध्ययन प्रकोष्ठ और युवा समिति के संयुक्त तत्वावधान में 17 मार्च 2026 बुधवार को 6 दिवसीय लिंग संवेदनशीलता अनुसंधान के लिए शोध प्रविधि विषय पर एक कार्यशाला का उद्घाटन मुख्य अतिथि प्रोफेसर चंद्रकला पाडिया (पूर्व कुलपति महाराजा गंगा सिंह विश्वविद्यालय राजस्थान) ने किया। इस अवसर पर प्रोफेसर विभा त्रिपाठी (विधि संकाय काशी हिंदू विश्वविद्यालय) भी उपस्थित रहीं।

अपने संबोधन में कहा मुख्य अतिथि ने कहा कि नारीवादी शोध प्रविधियां एवं दृष्टि वर्तमान समय की आवश्यकता है।  शोध में लिंग आधारित संवेदनशीलता और नारीवादी विचार समाज एवं सामाजिक अनुसंधान की संपूर्णता को अभिव्यक्त करता है। साथ ही नारी वादी दृष्टिकोण को भी शोध में स्थान प्रदान करता है। जिसके बिना शोध कार्य अधूरा है और वह अपनी पूर्णता को नहीं प्राप्त कर सकता। 




अतिथियों का स्वागत महाविद्यालय की प्राचार्या प्रो रचना श्रीवास्तव द्वारा किया गया। अतिथियों का स्वागत करते हुए महाविद्यालय की प्राचार्या ने इस बात पर जोर दिया कि राजनीति पंचायतों में प्रतिनिधित्व एवं समाज और बाजार के विभिन्न समूहों में महिलाओं का प्रतिनिधित्व संबंधी लिंग आधारित संवेदनशील शोध ही एक शोध आधारित समेकित दृष्टि प्रदान करेगा। जिसे आगे बढ़ाने में ऐसी कार्यशालाओं का आयोजन एवं योगदान महत्वपूर्ण हैं।इस अवसर पर महाविद्यालय की प्रबंधिका श्रीमति उमा भट्टाचार्य ने भी उपयुक्त विषय पर अपने वक्तव्य को रखा और आयोजकों को अपनी शुभकामनाएं दी। कार्यशाला का संयोजन डॉ अनुराधा बापुली के द्वारा किया गया तथा कार्यक्रम का संचालन डॉ शुभांगी शुभंकर श्रीवास्तव द्वारा किया गया। इस शुभ अवसर पर मनोविज्ञान के प्रो आर पी सोनकर की नवीन पुस्तक का विमोचन भी अतिथियों द्वारा किया गया।

इस इस अवसर पर कार्यशाला के आयोजन समिति के सदस्य जिनमें डॉ. सुप्रिया सिंह, डॉ शशिकेश कुमार गोंड, डॉ. प्रियंका, डा. प्रतिमा, डा. सिमरन सेठ, डॉ. श्वेता सिंह, डा. मालविका, प्रो मीनू पाठक , प्रो. कमला पांडेय और डा. नैरंजना श्रीवास्तव आदि उपस्थित रहे।

मंगलवार, 17 मार्च 2026

Eid ka Paigham 1: नबी-ए-करीम (स.) का दुनिया को दिखाया रास्ता ही इंसानियत का पैग़ाम

पैगंबर-ए-इस्लाम ईद पर रखते थे सभी का ख्याल


dil india live (Varanasi). नबी-ए-करीम (स.) का दुनिया को दिखाया रास्ता ही इंसानियत का पैग़ाम है। प्यारे नबी ने अपनी 63 साल की जाहिरी जिंदगी में जो कुछ भी करने का अपनी उम्मत को हुक्म दिया उसे पहले खुद करके दिखाया। प्यारे नबी ईद भी सादगी से मनाया करते थे। इसलिए इस्लाम में सादगी से ईद मनाने का हुक्म है। नबी से जुड़ा एक वाक्या है, जिससे सभी को बड़ी सीख मिल सकती है। 

एक बार नबी-ए-करीम हजरत मोहम्मद (स.) ईद के दिन सुबह फज्र की नमाज़ के बाद घर से बाज़ार जा रहे थे। कि आपको एक छोटा बच्चा रोता हुआ दिखाई दिया। नबी (स.) ने उससे कहा आज तो हर तरफ ईद की खुशी मनायी जा रही है ऐसे में तुम क्यों रो रहे हो? उसने कहा यही तो वजह है रोने की, सब ईद मना रहे हैं मैं यतीम हूं, न मेरे वालिदैन है और न मेरे पास कपड़े और जूते-चप्पल के लिए पैसा। यह सुनकर नबी (स.) ने उसे अपने कंधों पर बैठा लिया और कहा कि तुम्हारे वालिदैन भले नहीं हैं मगर मैं तुम्हे अपना बेटा कहता हूं। नबी-ए-करीम (स.) के कंधे पर बैठकर बच्चा उनके घर गया वहां से तैयार होकर ईदगाह में नमाज़ अदा की। जो बच्चा अब तक यतीम था उसे नबी-ए-करीम (स.) ने चन्द मिनटों में ही अपना बेटा बनाकर दुनिया का सबसे अमीर बना दिया। इसलिए नबी की तालीम है कि ईद आये तो आप भी एक दूसरे में खुशियां बांटे।


इसे ईद-उल-फित्र इसलिए कहते हैं क्यों कि इसमें फितरे के तौर पर 2 किलों 45 ग्राम गेंहू जो हम खाते हो उसके दाम के हिसाब से घर के तमाम लोगों का सदाका-ए-फित्र निकालना होता है। सदका ए फित्र ईद की नमाज़ से पहले अदा करना अफ़ज़ल है। नहीं अदा किया तो आपका रोज़ा जमीन और आसमान के बीच में तब तक लटका रहेगा जब तक आप अदा नहीं कर देते। यानी ईद की नमाज़ के बाद भी सदका ए फित्र अदा किया जा सकता है। मगर ईद से पहले करने से गरीब और जरूरतमंद लोगों को वक्त रहते उनका हक़ उन्हें मिल जाता है। दरअसल जकात और फितरा इसलिए ही इस्लाम में बनाया गया है ताकि उससे ग़रीब और जरूरतमंद को उनका हक मिल सके। यूं तो ईद उसकी है जिसने रमज़ान भर इबादत कि और कामयाबी से रमज़ान का पूरा रोज़ा रखा और वक्त रहते फितरा और जकात अदा कर दिया। वहीं ईद मुबारक के दिन खुशियां बांटना भी सुन्नत है। छोटे छोटे मासूम बच्चे भले ही रमज़ान मुबारक और ईद के पैग़ाम को न समझते हों मगर इतना जरूर जानते हैं कि ईद आई है तो ईदगाह जाएंगे, घर के बड़े ईदी देंगे। इसलिए नबी के रास्ते पर चलें और ईद पर उनकी सुन्नतों और पैग़ाम को आम करें। ऐ परवरदिगार तू अपने हबीब के सदके और तुफैल में हम सबको ईद की खुशियां नसीब फरमा और नबी के रास्ते पर चलने की तौफीक दे... आमीन।

मौलाना निजामुद्दीन चतुर्वेदी 

(लेखक उलेमा व मुस्लिम मामलों के जानकार हैं)