शनिवार, 14 मार्च 2026

Allahabad high court ने कहा अपना तबादला करवा लें DM SP

संभल में नमाज़ियों की संख्या सीमित करने का आदेश भी किया रद्द



dil india live (Allahabad). इलाहाबाद से बड़ी खबर है। Allahabad High Court ने संभल जिला प्रशासन के उस फैसले को फटकार लगाते हुए खारिज कर दिया है जिसमें कहा गया था कि संभल जामा मस्जिद के भीतर नमाज़ पढ़ने वालों की संख्या सीमित कर दी जाए। उत्तर प्रदेश प्रशासन के इस फैसले को खारिज करते हुए कोर्ट ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है।

जस्टिस Atul Sreedharan और जस्टिस Siddharth Nandan की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए प्रशासन को सख्त टिप्पणी के साथ कहा है कि यदि स्थानीय प्रशासन यानी पुलिस अधीक्षक (SP) और जिलाधिकारी, कानून-व्यवस्था बनाए रखने में सक्षम नहीं हैं और इसी वजह से नमाज़ियों की संख्या सीमित करना चाहते हैं, तो उन्हें अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए या संभल से बाहर तबादले की मांग करना चाहिए।


हाईकोर्ट ने स्पष्ट कहा कि राज्य का यह संवैधानिक दायित्व है कि हर समुदाय को अपने निर्धारित पूजा स्थल पर शांतिपूर्वक धार्मिक अनुष्ठान करने की अनुमति मिले। अदालत ने यह भी कहा कि यदि संबंधित स्थान निजी संपत्ति है, जैसा कि पहले कोर्ट मान चुका है, तो वहां पूजा-अर्चना के लिए राज्य से अनुमति लेने की भी आवश्यकता नहीं है।

Ramadan ka Paigham 24 : यहां जानिए सदका-ए-फित्र की सच्चाई कितना दें किसे दें

सदका-ए-फित्र ईद की नमाज़ से पहले हर हाल में कर दें अदा



dil india live (Varanasi)। सदका-ए-फित्र ईद की नमाज़ से पहले हर हाल में मोमिनीन अदा कर दे ताकि उसका रोज़ा रब की बारगाह में कुबुल हो जाये, अगर नहीं दिया तो तब तक उसका रोज़ा ज़मीन और आसमान के दरमियान लटका रहेगा जब तक सदका-ए-फित्र अदा नहीं कर देता।

हिजरी कलैंडर का 9 वां महीना रमज़ान वो महीना जिसके आते ही जन्नत के दरवाज़े खोल दिये जाते हैं और रब जहन्नुम के दरवाजे बंद कर देता हैं। फिज़ा में चारों ओर नूर छा जाता है।मस्जिदें नमाज़ियों से भर जाती हैं। लोगों के दिलों दिमाग में बस एक ही बात रहती है कि कैसे ज्यादा से ज्यादा सवाब क्या लिया जाये। एक महीने की तो बात है। इसलिए फर्ज़ नमाज़ों के साथ ही नफ्ल और तहज्जुद पर ज़ोर रहता है, अमीर गरीबों का हक़ अदा करता हैं। पता ये चला कि रमज़ान हमे जहां नेकी की राह दिखाता है वही यह मुकद्दस महीना गरीबो, मिसकीनों, लाचारों, बेवा, और बेसहरा वगैरह को उनका हक़ और अधिकार भी देता है। यही वजह है कि रमज़ान का आखिरी अशरा आते आते हर साहिबे निसाब अपनी आमदनी की बचत का ढ़ाई फीसद जक़ात निकालता है तो दो किलों 45 ग्राम वो गेंहू जो वो खाता है उसका फितरा। रब कहता है कि 11 महीना बंदा अपने तरीक़े से तो गुज़ारता ही है, एक महीना माहे रमज़ान को वो मेरे लिए वक्फ कर दे। यही वजह है कि इस महीने को इबादत वाला महीना भी कहते हैं। 

रब कहता है कि माहे रमज़ान कितना अज़ीम बरकतों और रहमतो का महीना है इसे ऐसे भी समझा जा सकता है कि इस पाक महीने में कुरान शरीफ नाज़िल हुई। इस महीने में बंदा दुनिया की तमाम ख्वाहिशात को मिटा कर अपने रब के लिए पूरे दिन भूखा-प्यासा रहकर रोज़ा रखता है। नमाज़े अदा करता है। के अलावा तहज्जुद, चाश्त, नफ्ल अदा करता है इस महीने में वो मज़हबी टैक्स ज़कात और फितरा देकर गरीबों-मिसकीनों की ईद कराता है।अल्लाह ने हदीस में फरमया है कि सिवाए रोज़े के कि रोज़ा मेरे लिये है इसकी जज़ा मैं खुद दूंगा। बंदा अपनी ख्वाहिश और खाने को सिर्फ मेरी वजह से तर्क करता है। यह महीना नेकी का महीना है इस महीने से इंसान नेकी करके अपनी बुनियाद मजबूत करता है। ऐ मेरे पाक परवर दिगारे आलम, तू अपने हबीब के सदके में हम सबको रोज़ा रखने, दीगर इबादत करने, और हक की जिंदगी जीने की तौफीक दे ..आमीन।

      मौलाना इरशाद रब्बानी 
(प्रमुख उलेमा चंपारण, बिहार) 

शुक्रवार, 13 मार्च 2026

NSS camp : Art & Craft Skill के माध्यम से एक्सपर्ट ने बताया युवा कैसे बनेंगे सशक्त!

लुभावनी कृतियों को आकार दे प्रशिक्षुओं ने सभी को किया प्रभावित 






dil india live (Varanasi). 13 मार्च, 2026 को कंपोजिट विद्यालय, छित्तूपुर खास, बीएचयू, वाराणसी में वसंत कन्या महाविद्यालय (VKM), कमच्छा की राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) इकाई 014A द्वारा आयोजित सात दिवसीय विशेष एनएसएस शिविर का चौथा दिन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। दिन की शुरुआत सुबह 10:00 बजे स्वयंसेवकों की उपस्थिति दर्ज करने के साथ हुई, उसके बाद एनएसएस ताली, थीम गीत और हम होंगे कामयाब गीत के साथ शिविर की शुरुआत हुई। कार्यक्रम अधिकारी डॉ. शशि प्रभा कश्यप के मार्गदर्शन में  सात दिवसीय विशेष एनएसएस शिविर की थीम “युवाओं में कौशल विकास” रखी गई थी,  इस सत्र का मुख्य उद्देश्य "रचनात्मकता से रोजगार की ओर" में कला और शिल्प कौशल (Art & Craft Skill) के माध्यम से युवाओं को सशक्त बनाना था । 

इस सत्र में वाराणसी की पिडिलाइट (Pidilite) कंपनी की जानी-मानी कला और शिल्प विशेषज्ञ नीतू घोषाल ने अतिथि प्रशिक्षक के रूप में भाग लिया। डॉ. कश्यप ने अतिथि वक्ता का स्वागत किया। इस कार्यशाला का उद्देश्य पारंपरिक कला से आगे बढ़कर यह दिखाना था कि रचनात्मक कौशल को सीधे तौर पर रोजगार और उद्यमिता से कैसे जोड़ा जा सकता है। घोषाल ने एक गहन व्यावहारिक सत्र आयोजित किया, जिसमें उन्होंने स्वयंसेवकों को फैब्रिक पेंटिंग, क्ले मॉडलिंग (मिट्टी के मॉडल बनाना) में ढोकरा आर्ट, क्ले से ईयररिंग बनाना और "बेस्ट आउट ऑफ वेस्ट" (कचरे से उपयोगी वस्तुएँ बनाना) में पेबल आर्ट या छोटे छोटे पत्थरों से शो पीस, पेपर वेट, मिट्टी के फेंके गए कुल्हाड़ों से शो पीस बनाना इत्यादि कई रचनात्मक तकनीकें सिखाईं।

लंच ब्रेक के बाद दूसरा सत्र दोपहर 2:00 बजे शुरू हुआ। इस सत्र में श्रीमती घोषाल ने यह प्रदर्शित किया कि कैसे पारंपरिक शिल्प तकनीकों को, जब पेशेवर बारीकियों के साथ निखारा जाता है, तो वे रोजगार और उद्यमिता के विशाल अवसर खोल सकती हैं। फैब्रिक पेंटिंग से लेकर पुनर्चक्रित (recycled) सामग्री से उच्च-स्तरीय सजावटी वस्तुएँ बनाने तक, इस प्रशिक्षण ने छात्रों को अपने स्वयं के छोटे पैमाने के व्यवसाय शुरू करने के लिए एक रूपरेखा प्रदान की।

उन्होंने समझाया कि इन कौशलों के माध्यम से युवा इंटीरियर डेकोरेशन, बुटीक व्यवसाय और स्वतंत्र कलाकार (फ्रीलांस आर्टिस्ट) के रूप में अपना करियर कैसे बना सकते हैं। और युवा अपनी बनाई हुई वस्तुओं को बेचने के लिए सोशल मीडिया और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म का उपयोग कैसे कर सकते हैं, जिससे एक स्थानीय शिल्प को वैश्विक व्यवसाय में बदला जा सके। घोषाल ने कहा कि "कला अब केवल किसी गैलरी की दीवारों तक ही सीमित नहीं रह गई है। आज की डिजिटल अर्थव्यवस्था में, एक कुशल कारीगर स्वयं-निर्मित उद्यमी होता ह फॉर लोकल' (स्थानीय के लिए मुखर) जैसे इन कौशलों में महारत हासिल करके, हमारे युवा नौकरी चाहने वालों से नौकरी देने वालों की भूमिडॉ. शशि प्रभा कश्यप ने इस बात पर जोर देते हुए सत्र का समापन किया कि एनएसएस  का मिशन एक आत्मनिर्भर भारत का निर्माण करना है। उन्होंने कहा कि इस तरह का कौशल-आधारित प्रशिक्षण यह सुनिश्चित करता है कि VKM, बीएचयू  के युवा आर्थिक स्वतंत्रता प्राप्त करने के लिए आवश्यक व्यावहारिक उपकरणों से सुसज्जित हों। 

50 स्वयंसेवकों ने व्यावहारिक गतिविधियों में उत्साहपूर्वक भाग लिया और प्रशिक्षण सत्र के दौरान अपनी रचनात्मकता का प्रदर्शन किया। यह सत्र अत्यंत प्रेरणादायक, क्रिएटिव एवं ज्ञानवर्धक रहा उसके बाद शिविर का समापन राष्ट्रगान तथा स्वयंसेवकों द्वारा बनाई गई विभिन्न उपयोगी वस्तुओं की एक प्रदर्शनी के साथ हुआ, जिसमें नवाचार और पारंपरिक कलात्मकता का एक सुंदर मेल देखने को मिला।

UP main Varanasi ki शिया जामा मस्जिद में अमेरिका और इस्राइल के ख़िलाफ़ उठी आवाज़

अलविदा जुमे की नमाज़ के बाद हुआ यौमुल क़ुद्स का जलसा 



dil india live (Varanasi). अलविदा जुमे की नमाज़ के बाद शिया जामा मस्जिद, दारानगर में यौमुल क़ुद्स मनाया गया। इस मौके पर इमामे जुमा मौलाना ज़फ़र हुसैनी की इमामत में अलविदा जुमे की नमाज़ अदा की गई और बाद में मौलाना की सदारत में ही हुए इस जलसे का आग़ाज़ क़ुरआन पाक की तिलावत से क़ारी इमाम अली ने किया। डॉक्टर शफ़ीक़ हैदर ने जलसे की निज़ामत करते हुए कहा कि मौला अली का फ़रमान है कि ज़ालिमों के ख़िलाफ़ हो जाओ और मज़लूमों के साथ हो जाओ। मौला के फ़रमान पर अमल करते हुए इमाम ख़ुमैनी ने माहे रमज़ान के आख़िरी जुमे को बैतुल मुक़द्दस की आज़ादी और फिलिस्तीन के मज़लूमों की हिमायत में आवाज़ उठाने का दिन क़रार दिया जो आज सारी दुनिया में मनाया जाता है, और इसी रास्ते पर चलते हुए हमारे रहबरे मोअज़्ज़म आयतुल्लाह ख़ामेनेई ने अपने जान का नज़राना पेश किया और जामे शहादत पिया। दरअसल वो शहीदे राहे क़ुद्स हैं। 


इस अवसर पर मतमदार बनारसी ने अपना कलाम पेश किया। जलसे में तक़रीर करते सैय्यद मुनाज़िर हुसैन मंजू ने कहा कि ये हमारे लिए अफ़सोस की बात है कि आज हमारे क़िब्ला ए अव्वल में नमाज़ पढ़ने पर पाबंदी है लेकिन नामनिहाद मुस्लिम मुल्क ज़ालिमों के हाथ की कठपुतली बने हुए हैं और उनकी हर अच्छी बुरी बात पर उनके मददगार बने हुए हैं। मौलाना सैय्यद अमीन हैदर हुसैनी ने अपनी तक़रीर में मस्जिदे अक़्सा के इतिहास पर प्रकाश डाला साथ ही मीडिया को मुखातिब होते हुए कहा कि आयतुल्लाह ख़ामेनई के बारे में उनको मालूम होना चाहिए कि वो सिर्फ ईरान के सियासी लीडर नहीं थे बल्कि पूरी दुनिया में जहां जहां भी शिया रहते हैं उन सबके सबसे बड़े सुप्रीम लीडर थे और यही वजह है कि आज पूरी दुनिया के शिया उनकी शहादत पर ग़म और ग़ुस्से का इज़हार कर रहे हैं इसलिए हमारी धार्मिक भावनाओं को समझा जाए।

जलसे के बाद मजलिस को ख़िताब करते हुए इमामे जुमा मौलाना ज़फ़र-उल-हुसैनी साहब ने कहा कि इमामे ख़ामेनेई ने अपनी पूरी ज़िंदगी मुसलमानों में आपसी इत्तेहाद पर ज़ोर देते हुए क़ुरबान कर दी। उन्होंने तमाम मुस्लिम उम्मत को गवाह बनाते हुए कहा कि आप सब गवाह रहना हमने अपने एक से एक नायाब हीरे बैतुल मुक़द्दस की आज़ादी और इस्लामी इक़्तेदार को सर बुलंद करते हुए क़ुरबान कर दिए । इस अवसर पर मौलवी शौकत साहब, हाजी नादिर अली, शब्बीर बनारसी, साबिर फ़राज़ बनारसी, ज़ुल्फ़िकार ज़ैदी समेत सैकड़ों लोग नमाज़े जुमा और यौमुल क़ुद्स के जलसे में एकित्रत हुए। जामा मस्जिद दारानगर के प्रशासनिक सचिव सैय्यद मुनाज़िर हुसैन मंजू ने आये हुए लोगों का शुक्रिया अदा किया।

Ramadan ka Paigham 23: Alvida alvida, mahe Ramza अलविदा, तेरे आने से दिल खुश हुआ था तेरे जाने से दिल रो रहा है

अलविदा जुमा पर मस्जिदों में नमाजियों का उमड़ा जनसैलाब 

दालमंडी नयी सड़क समेत मुस्लिम इलाकों व मस्जिदों के पास रही कड़ी सुरक्षा व्यवस्था



Sarfaraz/Rizwan

Varanasi (dil India live )। ऐ अल्लाह तू अपने हबीब के सदक़े में इस मुल्क में अमन और तरक्की दे, माहे रमज़ान के सदके और तुफैल में जो लोग परेशानहाल हैं उनकी परेशानी दूर कर, जो बेरोज़गार हैं उन्हें रोज़गार दे, जो बेऔलाद हैं उन्हें औलाद दे, जिसने रमज़ान में रोज़ा रखा दीगर‌ इबादतें की उसे कुबुल कर, और जो रोज़ा नहीं रख सकें उन्हें हिदायत दे, की वो आगे अपनी जिंदगी इबादत में गुजारे। 

अलविदा जुमे को नमाज़ के बाद मस्जिद कम्मू खां डिठोरी महाल में मौलाना अल्लामा जियाउल मुस्तफा साहब (शेरे नेपाल के साहबजादे) ने कुछ ऐसी ही दुआएं की तो तमाम लोग...आमीन, कह उठें। उन्होंने मुल्क में अमन मिल्लत और देश की तरक्की के लिए खुसूसी दुआएं मांगी। 

ऐसे ही मस्जिद लाटशाही में हाफिज़ हबीबुर्रहमान ने कहा कि रब के बताए हुए रास्ते पर चल कर ही हमें कामयाबी मिल सकती है। जो रास्ता नबी ने दिखाया वहीं रास्ता अमन, इल्म, इंसानियत और मोहब्बत का रास्ता है। जो इस रास्ते पर चलेगा वही दीन और दुनिया दोनों में कामयाब होगा। 


 इस दौरान शहर भर की तमाम मस्जिदों में अलविदा नमाज़ पर खुतबा पढ़ा गया...अलविदा, अलविदा माहे रमज़ा अलविदा, तेरे आने से दिल खुश हुआ था, तेरे जाने से दिल रो रहा है अलविदा, अलविदा माहे रमज़ां अलविदा...। 
उल्फत बीबी अर्दली बाज़ार में मौलाना साकिब रज़वी, मस्जिद मुग़लिया बादशाह में मौलाना हाफिज़ हसीन अहमद हबीबी, मस्जिद लंगड़े हाफिज़ में मौलाना ज़कीउल्लाह असदुल क़ादरी, मस्जिद शक्कर तालाब में मौलाना मोइनुद्दीन अहमद फारुकी प्यारे मियां, मस्जिद याकूब शहीद नगवां में हाफ़िज़ मोहम्मद ताहिर, मस्जिद बुलाकी शहीद अस्सी में मौलाना मुजीब, मस्जिद खाकी शाह में मौलाना मुनीर, जामा मस्जिद बक्शी जी अंधरापुल में मौलाना हकीमुद्दीन, मस्जिद पठानी टोला में हाफ़िज़ इमामुद्दीन, मस्जिद रंग ढलवां फाटक शेख सलीम में मौलाना जाहिद, मस्जिद उस्मानिया में मौलाना हारुन रशीद नक्शबंदी ने नमाज़ अदा करायी। ऐसे ही बनारस की तकरीबन पांच सौ मस्जिदों में अकीदत के साथ नमाज़े अलविदा अदा की गयी। इस दौरान कड़ी सुरक्षा व्यवस्था देखने को मिली। 

अदा किया रब का शुक्रिया 

इस्लाम धर्म के लोगों ने इस दिन अल्लाह की इबादत के साथ इस बात का शुक्र अदा किया कि उन्हें माह-ए-रमजान में रोजा रखने, तरावीह पढ़ने और अल्लाह की इबादत करने का रब ने मौका दिया। अब पता नहीं अगली बार यह मौका मिलेगा या नहीं।  

जकात फिरता देने में करें जल्दी 

मस्जिदों अलविदा जुमे की नमाज के दौरान इमाम साहेबान ने रोजेदारों से अपील किया कि फितरा, ज़कात देने में जल्दी करें ताकि गरीबों की भी ईद हो जाए। मस्जिद उल्फत बीबी में तकरीर करते हुए मौलाना अजहरुल कादरी ने कहा कि जकात सही ढंग से हंसी खुशी निकालें। जितना आप खर्च करेंगे उससे ज्यादा रब आपको देगा।


गुरुवार, 12 मार्च 2026

DAV PG College Main जुटे पुरातन छात्रों ने साझा की यादें

एलुमनी मीट में सांस्कृतिक कार्यक्रमों की रही धूम



dil india live (Varanasi). वाराणसी के डीएवी पीजी कॉलेज में गुरुवार को जब पुरा छात्रों की जुटान हुई तो सबके चेहरे खिले दिखे, सभी ने एक दूसरे से भूली बिसरी यादें साझा की तो सब पुरानी स्मृतियों में खो गए। IQAC (आइक्यूएसी) के तत्वावधान में आयोजित पुरा छात्र सम्मेलन (एलुमनी मीट) में 150 से अधिक पुरा छात्र जुटे। कॉलेज के स्व. पीएन सिंह यादव स्मृति सभागार में आयोजित कार्यक्रम में गीत, संगीत के बीच पुरनिये छात्रों ने एक दूसरे से अपने कॉलेज के दिनों के किस्से सुनाए। 

 पुरा छात्र सम्मेलन का शुभारंभ कॉलेज के पुरा छात्रों ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इसमें मुख्य रूप से चिंतामणि गणेश मंदिर के महंत चल्ला सुब्बाराव, लखनऊ विश्वविद्यालय के पूर्व हेड एवं डीन प्रो.आईडी गुप्ता, खेदनलाल इण्टर कॉलेज के प्रबंधक एवं उद्यमी विजय प्रकाश जायसवाल, राष्ट्रपति सम्मान से पुरस्कृत प्रवक्ता रामलाल यादव, प्रबंधक अजीत कुमार सिंह यादव आदि ने दीप प्रज्ज्वलित एवं माँ सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण किया। 


इस अवसर पर पुरातन छात्रों को संबोधित करते हुए प्रो.आईडी गुप्ता ने कहा कि हम आज जो कुछ भी है वह सब हमारे गुरुजनों के आशीष के कारण ही है। आज नवयुवकों का समय है जिनके कंधो पर देश का सारा दारोमदार है। उन्होंने यह भी कहा कि अब शिक्षा केवल विषय आधारित ना होकर व्यक्तित्व निर्माण पर आधारित हो। 

सम्मेलन में सांस्कृतिक कार्यक्रमों की धूम रही, युवा कलाकार रुद्रशंकर ने कथक प्रस्तुत कर सबको मंत्रमुग्ध कर दिया। श्राबोनि भट्टाचार्य ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत किया, नैमिष एवं अनुराधा ने बिहार के लोक संगीत पर सांस्कृतिक नृत्य पेश किया। एसेल, ऋषि, गरिमा एवं अर्पिता ने छठ गीत प्रस्तुत किया। 

उप प्राचार्य द्वय प्रो. संगीता जैन एवं प्रो. राहुल ने सभी पुरा छात्रों का अंगवस्त्र एवं स्मृति चिन्ह प्रदान कर सम्मान किया। पुरा छात्रों में अंतरराष्ट्रीय एथलीट विश्वास राव, पत्रकार अरविंद मिश्र हर्ष, बैंक प्रबंधक सिद्धार्थ शर्मा, राजीव रंजन पाण्डेय, विजय शर्मा, तेजबहादुर सहित 150 से ज्यादा पुरा छात्र शामिल हुए। कार्यक्रम का संयोजन प्रो. विजयनाथ दुबे ने किया। आइक्यूएसी समन्वयक डॉ. पारुल जैन ने कॉलेज की विकास यात्रा पर प्रकाश डालातो संचालन डॉ. साक्षी चौधरी एवं डॉ. तरु सिंह ने किया। कार्यक्रम में समस्त विभागाध्यक्षों सहित बड़ी संख्या में प्राध्यापक, कर्मचारी भी उपस्थित रहे।

alvida Juma : इस्लामिक सेंटर ने मुसलमानों से की ये अपील

'जंग में मारे जा रहे बेगुनाहों के लिए करें दुआ... कल पढ़ी जाएगी अलविदा जुमा की नमाज



dil india live (Lucknow). रमजान का महीना चल रहा है और मुस्लिम समुदाय के लोग ईद की तैयारियां कर रहे हैं। ऐसे में रमजान का आखिरी जुमा यानी "अलविदा जुमा" को लेकर इस्लामिक सेंटर ऑफ इंडिया ने एडवाइजरी जारी की है। इस्लामिक सेंटर ऑफ इंडिया ने मुस्लिम समुदाय से अपील की है कि इल अलविदा जुमे के अवसर पर ईरान, फिलिस्तीन और इजरायल में मारे जा रहे बेगुनाहों के लिए दुआ करने और जल्द ही युद्ध खत्म होने की दुआ करें।

एडवाइजरी में कहा गया है कि रमजान का आखिरी जुमा इस बार 13 मार्च को पड़ेगा, इसलिए अलविदा की नमाज 13 मार्च को पढ़ी जाएगी, जिसको लेकर इस्लामिक सेंटर आफ इंडिया ने एक एडवाइजरी जारी की है। इस एडवाइजरी को इस्लामिक सेंटर ऑफ इंडिया के अध्यक्ष मौलाना खालिद रशीद फिरंगी महली ने जारी करते हुए कहा है कि अगर चांद 30 रमजान का होता है तो एक और अलविदा की नमाज 20 मार्च शुक्रवार को पढ़ी जाएगी और अगर चांद 29 रमजान का होता है तो 20 मार्च शुक्रवार को ईद मनाई जाएगी।

फिरंगी महली ने कहा कि अवाम से यह अपील रहेगी कि इस बार जुमे की नमाज में फिलिस्तीनियों के लिए और ईरान, इजरायल में जो बेगुनाह लोग मारे जा रहे हैं, उनके लिए दुआ मांगे और यह जो जंग चल रही है, यह खत्म हो जाए इसके लिए दुआ करें। साथ ही जो लोग अलविदा जुमा की नमाज पढ़ने आए वे अपनी गाड़ियां समय से पहले पार्किंग में लगाकर, मस्जिद पहुंचें। उन्होंने कहा कि लखनऊ और आसपास के शहरों की तमाम बड़ी मस्जिदों में अलविदा की नमाज अदा की जाएगी इसलिए साफ सफाई की व्यवस्था के लिए प्रशासन से कहा गया है। 

गौरतलब है कि अमेरिका और इजरायल ने बीते 28 फरवरी को रमजान के महीने में ईरान पर हमला कर दिया। पिछले 11-12 दिनों के युद्ध में अमेरिका और इजरयली हमलों में ईरान के सैकड़ों आम नागरिक मारे गए हैं। वहीं, ईरान में हजारों जगहों पर बमबारी हुई है। युद्ध के पहले ही दिन ईरान के सुप्रीम लीडर और उनके परिवार के कई सदस्यों की शहादत हो गई।