गुरुवार, 5 मार्च 2026

Muqaddas Ramadan का आधा सफर हुआ तय, बाजार में बढ़ी रौनक

अज़ान की सदाएं सुनकर मोमिनीन ने खोला 15 वां रोज़ा




Sarfaraz Ahmad 

Varanasi (dil India live)। मस्ज़िदों से जैसे ही अज़ान कि सदाएं, अल्लाह हो, अकबर, अल्लाहो अकबर...फिज़ा में गूंजी। रोज़दारों ने खजूर और पानी से रमज़ान का 15 वां रोज़ा खोला। इसी के साथ रमज़ान का आधा सफर मुकम्मल हो गया। इसमें मोमिनीन ने पहला अशरा रहमत और आधा अशरा मगफिरत का पूरा कर लिया। कल रमज़ान का तीसरा जुमा है। जुमा को रोज़ेदार सहरी करके 16 वां रोज़ा रखेंगे और शाम में रमज़ान का 16 रोज़ा मुकम्मल करेंगे।

इससे पहले जुमेरात को शाम में इफ्तार के दस्तरखान पर लज़ीज़ इफ्तारी सजायी गई थी। कड़ी धूप से भी रोज़ादारों का जज्बा कम नहीं हुआ बल्कि रोज़ादारों ने राहत के लिए इफ्तार की थाली में तरबूज़, अंगूर व खरबूजे के साथ ही आइसक्रीम का भी सेवन किया। इस दौरान इफ्तार में परम्परागत इफ्तारी चने की घुघनी, पकौड़ी के अलावा अलग-अलग घरों में तरह-तरह की इफ्तारियां सजायी गयी थी। गर्मी से निजात के लिए  रुह आफ्ज़ा, नीबू का शर्बत आदि का भी लोगों ने लुत्फ लिया। रोज़ेदारों ने इन इफ्तारियों का लुत्फ लेने के बाद नमाज़े मगरिब अदा की। इस दौरान रब की बारगाह में सभी ने हाथ फैलाकर दुआएं मांगी। 

शहर के दालमंडी, नईसड़क, मदनपुरा, रेवड़ीतालाब, गौरीगंज, शिवाला, बजरडीहा, कश्मीरीगंज, कोयला बाज़ार, पठानी टोला, चौहट्टा लाल खां, जलालीपुरा, सरैया, पीलीकोठी, कच्चीबाग, बड़ी बाज़ार, अर्दली बाज़ार, पक्की बाज़ार, सदर बाजार, रसूलपुरा, नदेसर, लल्लापुरा आदि इलाकों में रमज़ान की खास चहल पहल दिखाई दी। इस दौरान मुस्लिम इलाकों में असर की नमाज़ के बाद और मगरिब के बाद लोग खरीदारी करने उमड़े हुए थे। 

UP के Deva Shariff Barabanki में देखिए दरगाह में खेली होली

हज़रत हाजी वारिस अली के दर पर फिर दिखा "एकता का रंग"




Mohd Rizwan 

dil india live (Barabanki). बाराबंकी के देवा स्थित हाजी वारिस अली शाह की दरगाह पर हिन्दू-मुस्लिम समुदाय ने एक साथ मिलकर होली खेल कर सौहार्द और एकता का रंग पेश किया। यहां केवल रंग ही नहीं होली खेलने के लिए यहां बाकायदा वारसी होली कमेटी बनाई गई है। इस्लाम धर्म में रंग खेलना सख्त मना है मगर कमेटी के पूर्व अध्यक्ष शहजादे आलम वारसी इस रंग को सौहार्द और देश की एकता का रंग बता रहे हैं। कहा कि यह मजार हिन्दू-मुस्लिम एकता की मिसाल है।

वो कहते हैं कि बाराबंकी सदैव ‘जो रब है, वही राम’ का संदेश देने वाले सूफी संत हाजी वारिस अली शाह की सरजमीं है। दरअसल बाराबंकी के देवा स्थित दरगाह परिसर में हिन्दू और मुस्लिम समुदाय के लोगों ने एकता की मिसाल पेश करते हुए जमकर होली खेली। उत्तर प्रदेश में जहां कई स्थानों पर होली पर पिछले साल जुमे की नमाज के मद्देनजर मस्जिदों और कुछ दरगाहों को तिरपाल से ढका गया था, वहीं देवा स्थित हाजी वारिस अली शाह की दरगाह पर ऐसा कुछ भी न पहले हुआ न इस बार। सूफी संत की दरगाह के परिसर में वारसी होली कमेटी द्वारा आयोजित कार्यक्रम में लोगों ने एक-दूसरे को रंग लगाया और होली की बधाई दी।

कमेटी के अध्यक्ष बताया कि हिन्दू और मुस्लिम हुरियारों ने सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल पेश करते हुए एक-दूसरे को रंग लगाया और होली की मुबारकबाद दी। इस दौरान ‘या वारिस’ की सदाएं भी फिजा में गूंजती रहीं। उन्होंने बताया कि दरगाह परिसर के पास स्थित ‘कौमी एकता गेट’ से नाचते और गाते-बजाते लोगों का जुलूस निकाला गया। यह जुलूस हर साल की तरह देवा कस्बे से होता हुआ दरगाह पर पहुंचा। इस बार भी जुलूस में हर धर्म के लोग शामिल हुए।

दरअसल यह मजार इस बात की मिसाल है कि रंगों का कोई मजहब नहीं होता। यही वजह है कि हर साल की तरह ही इस बार भी यहां सभी धर्मों के लोगों ने गुलाल व गुलाब की पंखुड़ियों से एक साथ होली खेली और आपसी भाईचारे की अनोखी मिसाल पेश की। सूफी संत हाजी वारिस अली शाह ने ‘जो रब है वही राम’ का संदेश दिया था। शायद इसीलिए यह स्थान हिन्दू-मुस्लिम एकता का संदेश देता आ रहा है। इस मजार पर मुस्लिम समुदाय से कहीं ज्यादा संख्या में हिन्दू समुदाय के लोग आकर मन्नत मानते हैं और चादर चढ़ाते दिखाई देते हैं।


Ramadan Mubarak 15 : आओ जश्न मनाएं जन्नत के सरदार का

माहे रमज़ान के दिन और रात को हासिल है खास खुसूसियत




Varanasi (dil India live). यूं तो साल का सारा दिन और सारी रात अल्लाह के बनाये हुए हैं, लेकिन रमज़ान महीने के दिन व रात को कुछ खास खुसूसियत हासिल है। इसकी वजह यह है कि मुकद्दस रमज़ान महीने के एक-एक पल को अल्लाह ने अपना कहा है। यह महीना बरकतों और रहमतों का है। इस महीने में इबादतों का सवाब कई गुना ज्यादा खुदा अता फरमाता है। इस महीने में मुकद्दस कुरान शरीफ नाज़िल हुई। रमज़ान में एक रात ऐसी भी है जो हज़ार महीनों की इबादत से बेहतर है। इसे शबे कद्र कहते हैं। इस रात हज़रत जिबरीले अमीन दूसरे फरिश्तों के साथ अर्श से ज़मी पर रहमतें लेकर नाज़िल हुए थे। यह वो महीना है जिसमें तोहफे हजरते इब्राहिम (हजरत इब्राहिम की पाक किताब) नाज़िल हुई। इसी महीने में हजरते मूसा की किताब तौरेत का भी नुज़ूल हुआ और यही वो महीना है जिसमें हजरते ईसा की किताब इंजील आसमान से उतारी गयी। इस महीने में बहुत सी मुबारक बातें पेश आयीं है जिनसे इस महीने की फज़ीलत में चार चांद लग गया है। नज़ीर के तौर पर रसूले इस्लाम के पौत्र इमाम हसन मुजतबा पन्द्रह रमज़ान को पैदा हुए। इस्लामी लश्कर ने बद्र और हुनैन जैसी जंगों को इसी महीने में जीता। मुकद्दस रमज़ान में ही मुश्किलकुशा मौला अली की शहादत हुई, जिससे पूरी दुनिया में उनके मानने वाले गमज़दा हुए मगर हज़रत अली ने इसे अपनी जिंदगी की सबसे बड़ी कामयाबी बताया। हज़रत अली मुश्किलकुशा कहते हैं कि रोज़ा इसलिए जरूरी किया गया है ताकि बंदे के एखलाक को आज़माया जा सके और उनके खुलूस का इम्तेहान लिया जा सके और यही सच्चाई है कि दूसरे सारे फर्ज़ में इंसान कुछ करके अल्लाह ताला के हुक्म पर अमल करता है मगर रोज़े में कुछ चीज़ों को अंजाम न देकर अपने फर्ज़ को पूरा करके खुदा के हुक्म को मानता है। दूसरे किसी भी अम्ल में दिखावे की संभावना रहती है मगर रोज़े में ऐसा नहीं हो सकता। अल्लाह का कोई बंदा जब खुलूसे नीयत के साथ उसे खुश करने के लिए रोज़ा रखता है तो उसके बदले में खुदा भी उसकी दुआओं को क़ुबूल करता है। जैसा की रसूले अकरम (स.) और उनके मासूम वारिसों ने फरमाया है कि रोज़ेदार इफ्तार के वक्त कोई दुआ करता है तो उसकी दुआ वापस नहीं होती। ऐ पाक परवरदिगार हमें रोज़ा रखने की तौफीक दे। ताकि हमारी दुआओं में असर पैदा हो सके और खुदा के फैज़ से हम सबकी ईद हो जाये..आमीन। 

   मौलाना नदीम असगर 

(शिया आलिम, जव्वादिया अरबी कालेज प्रहलाद घाट, वाराणसी)


बुधवार, 4 मार्च 2026

Nanhe Tasneem Fatma के हौसले को सभी कर रहे हैं सलाम

मुफ्ती अब्दुल हन्नान मिस्बाही की छोटी बेटी ने रखा रोज़ा 





dil india live (Varanasi). मशहूर आलिमे दीन मदरसा मजीदिया के उस्ताद मुफ्ती अब्दुल हन्नान मिस्बाही की दूसरी बेटी तसनीम फातिमा की बुधवार को रोज़ा कुशाई की गई। मुफ्ती अब्दुल हन्नान (Mufti Abdul Hannan) ने बताया कि उनकी बेटी तसनीम फातिमा ने सहरी करके रोज़ा रखा तो लोगों ने सोचा मजाक कर रही है रहेगी नहीं मगर जब दोपहर ज़ोहर की नमाज का वक्त हो गया और उसने कुछ खाया पिया नहीं तो घर में किसी ने उसे मना नहीं किया बल्कि उसकी रोज़ा कुशाई की तैयारी शुरू की गई। तसनीम घर में सबसे छोटी है इसलिए सभी ने उसकी खूब हौसला अफजाई की। शाम में जब मस्जिद से अज़ान की सदाएं बुलंद हुई तो तसनीम फातेमा ने अपनी जिंदगी का पहला रोजा अपनी पसंद की इफ्तार से पूरा किया। घर और आसपास के लोगों ने इस बच्ची को लंबी उम्र की दुआएं दी।

Ramadan ka Paigham 14 : ज्यादा से ज्यादा करें इबादत इससे पहले रमज़ान चला जाए

मुकद्दस रमज़ान की रूहानी चमक से फिर दुनिया हुई रोशन




Varanasi (dil India live). मुकद्दस रमज़ान की "रूहानी चमक" से दुनिया फिर रोशन हो चुकी है, और फिज़ा में घुलती अजान और दुआओं में उठते हाथ खुदा से मुहब्बत के जज्बे कि मिसाल पेश कर रहे हैं। दरअसल रमज़ान बंदे को हर बुराई से दूर रखकर अल्लाह के नजदीक लाने का जहां मौका देता है। वहीं मुक़द्दस रमज़ान बुरे कामों से रोकता है और नेकी की राह दिखाता है। इस पाक और दौड़-भाग और खुदगर्जी भरी जिंदगी के बीच इंसान को अपने अंदर झांकने और खुद को अल्लाह की राह पर ले जाने का रास्ता दिखाने वाला माहे रमजान में अल्लाह के नेक बंदे इस फिक्र में रहते हैं की ज्यादा से ज्यादा इबादत कर ली जाए कहीं रमज़ान चला न जाए।
भूख-प्यास समेत तमाम जिस्मानी जरुरतों तथा झूठ बोलने, चुगली करने, खुदगर्जी आदि बुराइयों से रमज़ान मुबारक रोकने का काम करता है। माहे रमजान में रोजेदार अल्लाह के नजदीक आने की कोशिश के लिए भूख-प्यास समेत तमाम जरुरतों को रोकता है। बदले में अल्लाह अपने इबादतगुजार रोजेदार बंदे के बेहद करीब आकर उसे अपनी रहमतों और बरकतों से नवाजता है। इसके बावजूद भी बहुत से लोग इस माहे मुबारक की खूबियों से अब भी दूर हैं। उनसे यही कहना है कि जल्दी करें कहीं रमजान की दौलत से महरूम न रह जाएं।
इस्लाम की पांच बुनियादों में रोज़ा भी शामिल है और इस पर अमल के लिए ही अल्लाह ने रमजान का महीना मुकर्रर किया है। खुद अल्लाह ने कुरान शरीफ में इस महीने का जहां जिक्र किया है, वहीं कुरान भी इसी पाक महीने में रब ने दुनिया में उतारा। रमजान इंसान के अंदर जिस्म और रूह है। आम दिनों में उसका पूरा ख्याल खाना-पीना और दीगर जिस्मानी जरूरतों पर रहता है लेकिन असल चीज उसकी रूह है। इसी की तरबीयत और पाकीजगी के लिए अल्लाह ने रमजान बनाया है। रमजान में की गई हर नेकी का सवाब कई गुना बढ़ जाता है। इस महीने में एक रकात नमाज अदा करने का सवाब 70 गुना हो जाता है। साथ ही इस माह में दोजख के दरवाजे बंद कर दिए जाते हैं, जन्नत के दरवाज़े खोल दिये जाते है।
अमूमन 30 दिनों के माहे रमजान को 10-10 दिन केे तीन अशरों में बांटा गया है। पहला अशरा ‘रहमत’ का है। जो मुकम्मल हो चुका है। इसमें अल्लाह अपने बंदों पर रहमत की दौलत लुटाता है। दूसरा अशरा ‘मगफिरत’ का है। इस अशरे में अल्लाह अपने बंदों को गुनाहों से पाक कर देता है। जबकि तीसरा अशरा 'जहन्नुम से आजादी' का है। इस आखिरी अशरे में रब रोज़ा रखने वाले को जहन्नुम से आजाद कर देता है।
महीने भर के रोज़े रखना, रात में तरावीह की पढना, क़ुरान की तिलावत करना, एतेकाफ़ में बैठना, अल्लाह से दुआ मांगना, ज़कात देना, अल्लाह का शुक्र अदा करने जैसी बंदा खूब नेकी करता है। इसीलिये इस माह को नेकियों और इबादतों का महीना भी कहते है। तरावीह की नमाज़ में महीना भर कुरान पढना। जिससे क़ुरान पढना न आने वालों को भी क़ुरान सुनने का सबाब मिलता है। यह महीना समाज के गरीब और जरूरतमंद बंदों के साथ हमदर्दी का भी है। इसलिए रमज़ान में जकात, खैरात और खूब फितरे से उनकी भरपूर मदद की जाती है। ऐ पाक परवरदिगार हमें रोज़ा रखने की तौफीक दे। ताकि हमारी दुआओं में असर पैदा हो सके और खुदा के फैज़ से हमारी ईद हो जाये..आमीन। 

     हाफ़िज़ मोहम्मद ताहिर 

(इमामे जुमा, जामा मस्जिद याकूब शहीद, नगवां वाराणसी)

मंगलवार, 3 मार्च 2026

Ramadan ka Paigham 13 : मस्जिदें नमाज़ियों से भरी है समझिए माहे रमज़ान है

जिसके आते ही फिज़ा में नूर छा जाता है वो है "माहे रमज़ान"

 




Varanasi (dil India live). हिजरी कलैंडर का 9 वां महीना रमज़ान, ये वो महीना है जिसके आते ही फिज़ा में नूर छा जाता है। चोर चोरी से दूर होता है, बेहया अपनी बेहयाई से रिश्ता तोड़ लेता है, मस्जिदें नमाज़ियों से भर जाती हैं। लोगों के दिलों दिमाग में बस एक ही बात रहती है कि कैसे ज्यादा से ज्यादा इबादत की जाये। फर्ज़ नमाज़ों के साथ ही नफ्ल और तहज्जुद पर भी लोगों का ज़ोर रहता है, अमीर गरीबों का हक़ अदा करते हैं, पास वाले अपने पड़ोसियों का, कोई भूखा न रहे, कोई नंगा न रहे, इस महीने में इस बात का खास ख्याल रखा जाता है। पता ये चला कि हक़ की जिन्दगी जीने की रमज़ान हमे जहां तौफीक देता है। वहीं गरीबो, मिसकीनों, लाचारों, बेवा, और बेसहरा वगैरह की ईद कैसे हो, कैसे उन्हें उनका हक़ और अधिकार मिले यह रमज़ान ने पूरी दुनिया को दिखा दिया, सिखा दिया। यही वजह है कि रमज़ान का आखिरी अशरा आते आते हर साहिबे निसाब अपनी आमदनी की बचत का ढ़ाई फीसदी जक़ात निकालता है। और दो किलों 45 ग्राम वो गेंहू जो वो खाता है उसका फितरा।

सदका-ए-फित्र ईद की नमाज़ से पहले हर हाल में मोमिनीन अदा कर देता है ताकि उसका रोज़ा रब की बारगाह में कुबुल हो जाये, अगर नहीं दिया तो तब तक उसका रोज़ा ज़मीन और आसमान के दरमियान लटका रहेगा जब तक सदका-ए-फित्र अदा नहीं कर देता। रब कहता है कि 11 महीना बंदा अपने तरीक़े से तो गुज़ारता ही हैतो एक महीना माहे रमज़ान को वो मेरे लिए वक्फ कर दे। परवरदिगारे आलम इरशाद फरमाते है कि माहे रमज़ान कितना अज़ीम बरकतों और रहमतो का महीना है इसे ऐसे भी समझा जा सकता है कि इस पाक महीने में कुरान नाज़िल हुआ। इस महीने में बंदा दुनिया की तमाम ख्वाहिशात को मिटा कर अपने रब के लिए पूरे दिन भूखा-प्यासा रहकर रोज़ा रखता है। नमाज़े अदा करता है। के अलावा तहज्जुद, चाश्त, नफ्ल अदा करता है इस महीने में वो मज़हबी टैक्स ज़कात और फितरा देकर गरीबों-मिसकीनों की ईद कराता है।अल्लाह ने हदीस में फरमया है कि सिवाए रोज़े के कि रोज़ा मेरे लिये है इसकी जज़ा मैं खुद दूंगा। बंदा अपनी ख्वाहिश और खाने को सिर्फ मेरी वजह से तर्क करता है। यह महीना नेकी का महीना है इस महीने से इंसान नेकी करके अपनी बुनियाद मजबूत करता है। ऐ मेरे पाक परवर दिगारे आलम, तू अपने हबीब के सदके में हम सबको रोज़ा रखने, दीगर इबादत करने, और हक की जिंदगी जीने की तौफीक दे ..आमीन।

हाजी इम्तियाज खान 

(सामाजिक कार्यकर्ता व साड़ी व्यवसायी, गौरीगंज वाराणसी)


रमज़ान मुबारक में नन्हे मुन्ने बच्चे भी रब की रज़ा के लिए कुछ इस तरह रहते हैं तैयार।।

UP K Varanasi Main पेंशनर साथियों ने की बजड़े पर अनोखी सभा

पंजाब नेशनल बैंक पेंशनर एसोसिएशन की आम सभा में विभिन्न मुद्दों पर चर्चा




F. Farouqi Babu 

dil india live (Varanasi). 3 मार्च को ऑल इंडिया पंजाब नेशनल बैंक पेंशनर एसोसिएशन के बैनर तले एक भव्य  आम सभा का आयोजन वाराणसी के प्रसिद्ध अस्सी घाट पर बजड़े में अत्यंत उत्साहपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत संगठन के पदाधिकारी नरेंद्र पांडे एवं जी.पी. श्रीवास्तव ने सभी पेंशनर साथियों का गुलाब के फूल भेंट कर आत्मीय स्वागत किया। स्वागत के इस स्नेहिल भाव ने पूरे कार्यक्रम को पारिवारिक वातावरण प्रदान किया।

इस अवसर पर विशेष हर्ष का वातावरण तब बना जब वरिष्ठ सदस्य श्री कामेश्वर राय का जन्मदिवस सामूहिक रूप से मनाया गया। उन्हें उपहार भेंट कर सम्मानित किया गया तथा सभी की उपस्थिति में केक काटकर जन्मदिन की शुभकामनाएं दी गईं। 

सभा के दौरान विगत माह दिवंगत हुए एक साथी सदस्य को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। यह क्षण अत्यंत भावुक एवं संवेदनशील रहा, जिसने संगठन की एकजुटता और पारस्परिक आत्मीयता को प्रदर्शित किया।

कार्यक्रम में पेंशन बढ़ोतरी, ग्रेच्युटी भुगतान की अद्यतन स्थिति, तथा हेल्थ इंश्योरेंस से संबंधित समस्याओं एवं संभावनाओं पर गंभीर एवं सार्थक चर्चा की गई। सदस्यों ने अपने विचार खुलकर रखे तथा संगठन की मजबूती एवं पेंशनरों के हितों की रक्षा के लिए भविष्य की रणनीति पर भी विमर्श किया। यह विचार-विमर्श अत्यंत उपयोगी एवं सकारात्मक रहा।

बजड़े पर चाय, नाश्ता एवं शुद्ध पेयजल की उत्कृष्ट व्यवस्था की गई थी। गंगा की निर्मल धारा के मध्य सौम्य वातावरण में बैठकर साथियों ने आपसी संवाद, पुरानी स्मृतियों और सेवा काल के अनुभवों को साझा किया। पुराने मित्र वर्षों बाद मिलकर अत्यंत प्रसन्न दिखाई दिए। हंसी-ठिठोली, आत्मीय बातचीत और अपनत्व की भावना ने पूरे कार्यक्रम को यादगार बना दिया।





कार्यक्रम के अंत में पूर्व प्रबंधक एस.पी. सिंह द्वारा औपचारिक धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया गया। उन्होंने सभी उपस्थित साथियों, पदाधिकारियों एवं आयोजन में सहयोग देने वाले सदस्यों के प्रति आभार व्यक्त किया। कुल मिलाकर लगभग 60 पेंशनर साथियों की गरिमामयी उपस्थिति रही और सभी ने एक स्वर में कार्यक्रम की सराहना की।

लौटते समय सदस्यों ने नमो घाट एवं विश्वविख्यात दशाश्वमेध घाट पर भव्य गंगा आरती का दिव्य दृश्य देखा और आध्यात्मिक आनंद की अनुभूति की। इस मौके पर यह निर्णय लिया गया कि आगामी बैठक जुलाई माह में और भी व्यापक स्तर पर आयोजित की जाएगी, जिसमें अधिक से अधिक पेंशनर साथियों की सहभागिता सुनिश्चित की जाएगी। इस सफल आयोजन ने संगठन की एकता, सक्रियता एवं पारस्परिक स्नेह को और अधिक सुदृढ़ करने का कार्य किया।