गुरुवार, 3 अप्रैल 2025

VKM Varanasi news : साहित्य और सिनेमा में केवल प्रस्तुति और प्रभाव का अंतर

"साहित्य व सिनेमा: अतः संबंध और रूपांतरण" विषय पर प्रो. संजीव का व्याख्यान


Varanasi (dil India live). वसन्त कन्या महाविद्यालय कमच्छा, वाराणसी के तत्वावधान में पुनर्नवा हिंदी साहित्य परिषद् एवं हिंदी विभाग के अंतर्गत "साहित्य एवं सिनेमा: अतःसंबंध और रूपांतरण" विषयक एकल व्याख्यान का आयोजन किया गया। मुख्य वक्ता के रूप में गुजरात केन्द्रीय विश्वविद्यालय के हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो. संजीव दुबे ने साहित्य और सिनेमा पर चर्चा करते हुए हिंदी सिनेमा के इतिहास और पृष्ठभूमि पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए हिंदी सिनेमा के विकास पर छात्राओं का ध्यान आकर्षित किया। सिनेमा के व्यावसायिकरण की बात करते हुए उन्होंने हिंदी के साहित्यिक बाज़ार पर चर्चा की और कहा कि हिंदी सिनेमा का प्रबुद्ध दर्शक निर्मित नहीं हुआ है। उन्होंने वर्तमान समय में सिने साक्षरता की आवश्यकता पर बल दिया ।उनका मानना है कि सिनेमा के दृश्यों को किसी पुस्तक की तरह पढ़ना चाहिए। साहित्य एवं सिनेमा के अंतःसंबंध पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि साहित्य और सिनेमा में तत्वत: कोई अन्तर नहीं है केवल प्रस्तुति और प्रभाव का अंतर होता है और सिनेमा की प्रभावोत्पादकता साहित्य से अधिक होती है इसलिए इसका विस्तार साहित्य से गई गुणा अधिक होती है। साहित्य के सिनेमा में रूपांतरण पर उन्होंने कहा कि संक्षेपण, विस्तार, सामान्यीकरण और स्थिरीकरण के माध्यम से साहित्य का सिनेमा में रूपांतरण होता है जिसके परिणामस्वरूप मुख्य कथावस्तु के साथ कभी-कभी न्याय नहीं हो पाता। जो पुस्तक पढ़ने वालों को निराश भी करता है। अंत में सिनेमा को अकादमिक क्षेत्र में अध्ययन एवं शोध की दृष्टि से और भी प्रोत्साहित करने की आवश्यकता पर ज़ोर देते हुए विद्यार्थियों को प्रेरित किया।

स्वागत वक्तव्य देते हुए महाविद्यालय की प्राचार्या प्रो रचना श्रीवास्तव ने सिनेमा के माध्यम से समाज पर पड़ने वाले  सकारात्मक एवं नकारात्मक दोनों प्रभाव की चर्चा करते हुए छात्राओं को सिनेमा के गुणात्मक रूप को ग्रहण करने के लिए उद्बोधित किया। कार्यक्रम में डॉ. सपना भूषण, डॉ. शशिकला, डॉ. नैरंजना श्रीवास्तव , डॉ. प्रीति विश्वकर्मा एवं महाविद्यालय के सभी सिनेमा और साहित्य प्रेमी ,विद्यार्थी तथा अध्यापक गण मौजूद रहे।संचालन सुश्री  राजलक्ष्मी जायसवाल तथा धन्यवाद ज्ञापन डॉ. सपना भूषण ने किया।

बुधवार, 2 अप्रैल 2025

Hajj yatriyo की आसानी के लिए इसरा ने जारी किया हेल्पलाइन नंबर

जानिए कब है तीसरी किश्त जमा करने की अंतिम तिथि

 

  • Mohd Rizwan 

Varanasi (dil India live). हज कमेटी ऑफ इण्डिया की ओर से हज जायरीन के लिए बैलेन्स हज एमाउण्ट की तीसरी किश्त जमा करने व हज से संबंधित समस्त परेशानियों के लिए हल के लिए इसरा ने निःशुल्क हज हेल्प लाइन नंबर जारी किया है। इस सम्बन्ध में इसरा के  जनरल सेक्रेटरी हाजी फारुख खां ने बताया कि हज हज कमेटी ऑफ इण्डिया की ओर से हज 2025 पर जाने वाले जायरीन के बैलेन्स हज एमाउण्ट की तीसरी किश्त की घोषणा कर दी गई है। इस सम्बन्ध में इसरा [ISSRA] मुख्यालय अर्दली बाजार वाराणसी में डॉ. एसके सिंह की अध्यक्षता में बैठक सम्पन्न हुई। जिसमें सर्वसम्मति से तय हुआ कि हज जायरीन को बेहतर सुविधा के लिए हेल्पलाइन जारी किया जाय और तीसरी किश्त रूपया 65,050.00 जमा करने के लिए FEE TYPE-25 फार्म इसरा [ISSRA] मुख्यालय और सभी इसरा सेण्टरों पर भरवाया जाये। ताकि हज जायरीन को कोई मुश्किल का सामना न करना पड़े। इसलिए इसरा की ओर से हेल्पलाइन नम्बर जारी किया गया है। जिस पर हज जायरीन हज से मुताल्लिक पूरी जानकारी हासिल कर अपना FEE TYPE-25 फार्म भरवा सकते हैं।
इन नंबरों पर होगी रहनुमाई

1. हाजी मो. फारूक खां 9453365297

2. हाजी वसीम 4450010959

3. इम्तियाज अहमद 9305448200

4. अलहम अंसारी -8896548272

मुकद्दस हज 2025 के बारे में खास जानकारी

एक हज जायरीन हज कमेटी आफ इण्डिया के जरिये जिन्दगी में सिर्फ एक बार' ही हज कर सकता है। आरजी (PROVISIONAL) तौर पर चुने गये आजमीन "FEE TYPE 25 FORM" (Pay in Slip) पर अपने बैलेन्स हज एमाउण्ट की तीसरी किश्त 65,050 www.hajcommittee.gov.in पर ऑनलाइन या स्टेट बैंक ऑफ इण्डिया या यूनियन बैंक ऑफ इण्डिया की किसी भी शाखा में जमा कर सकते हैं। तीसरी किश्त जमा करने की आखिरी तारीख 03.04.2025 है। यदि हज कमेटी द्वारा मुकर्रर तारीख से आगे बढ़ाई जाती है तो इसकी सूचना हज कमेटी द्वारा दी जायेगी। यदि हज जायरीन को कुर्बानी हज कमेटी द्वारा करानी है तो हज कमेटी द्वारा कुर्बानी की तय की गई रकम 16,600 रूपये को ऑनलाइन या बैंक की Pay in Slip स्टेट बैंक ऑफ इण्डिया या यूनियन बैंक ऑफ इण्डिया की किसी भी ब्रान्च में जमा की जा सकती है। बैलेंस हज एमाउण्ट की जमा रसीद को लिफाफे में डालकर डाक द्वारा सेक्रेटरी स्टेट हज कमेटी लखनऊ-226008 या बैतुल हुजाज (हज हाउस) 7 ए,मार्ग, पल्टन रोड मुम्बई 40001 पर भेजें।

VKM Varanasi main ऑटिज़्म जागरूकता संगोष्ठी

न्यूरोडायवर्सिटी समाज को अधिक संवेदनशील और समावेशी बनने की प्रेरणा देती है-डा. तुलसी 

Varanasi (dil India live). आज, 2 अप्रैल को, वसंत कन्या महाविद्यालय के मनोविज्ञान विभाग और मनस्विनी क्लब के संयुक्त तत्वावधान में ऑटिज़्म जागरूकता संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत महाविद्यालय की प्राचार्या के उत्साहवर्धन से हुई। उन्होंने इस तरह के कार्यक्रमों को और व्यापक स्तर पर आयोजित करने का सुझाव दिया। बीएचयू की एम.एस. डा. दिव्या सिंह ने अपने संबोधन में ऑटिज़्म से प्रभावित व्यक्तियों की चुनौतियों, उनकी विशेषताओं और समाज में उनके समावेशन के महत्व पर प्रकाश डाला। डॉ. तुलसीदास (डायरेक्टर, देवा इंस्टीट्यूट फॉर डिसेबिलिटी रिहैबिलिटेशन एंड एंपावरमेंट) ने अपने संबोधन में कहा कि न्यूरोडायवर्सिटी केवल एक दृष्टिकोण नहीं, बल्कि एक ऐसी सीख है जो समाज को अधिक संवेदनशील और समावेशी बनने की प्रेरणा देती है। इस दौरान बी.एच.यू. के कुछ शोध छात्रों ने भी अपने विचार प्रस्तुत किए।

कार्यक्रम में स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर के लगभग 100 से अधिक छात्र-छात्राओं ने भाग लिया। इस अवसर पर विद्यार्थियों ने नाटक भी प्रस्तुत किया, जिसमें ऑटिज़्म और समाज में समावेशन की महत्ता को दर्शाया गया।

कार्यक्रम का धन्यवाद ज्ञापन डॉ. राम  प्रसाद सोनकर द्वारा किया गया। इस अवसर पर डॉ. शुभ्रा सिन्हा, डॉ. अंजू लता सिंह, डॉ. खुशबू मिश्रा, डॉ. शशि प्रभा कश्यप, डॉ अंशु शुक्ला सहित कई अन्य शिक्षक एवं शिक्षिकाएं उपस्थित रहे।

देश दुनिया में आज मनाया जा रहा है विश्व ऑटिज्म दिवस

आईए जानते हैं ऑटिज्म क्या है इसे कैसे रोका जा सकता है 

ऑटिज्म एक विश्वव्यापी समस्या है। इसे ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर (ASD) के नाम से भी जाना जाता है, यह एक न्यूरोलॉजिकल और विकासात्मक विकार है जो संचार, सामाजिक संपर्क और व्यवहार को प्रभावित करता है। प्रभावित बच्चों और उनके माता-पिता को अपने परिवार, समाज और यहाँ तक कि जीवन भर कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है क्योंकि इसका कोई स्थायी इलाज नहीं है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, दुनिया भर में लगभग 160 बच्चों में से 1 को ASD है। ASD के सटीक कारणों को अभी भी पूरी तरह से समझा नहीं जा सका है, लेकिन शोध बताते हैं कि यह आनुवंशिक और पर्यावरणीय कारकों से जुड़ा हुआ है।

  • डॉ. शशि प्रभा कश्यप

Varanasi (dil India live). हर साल 2 अप्रैल को हम विश्व ऑटिज्म जागरूकता दिवस मनाते हैं। ऑटिज्म एक विश्वव्यापी समस्या है। इसे ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर (ASD) के नाम से भी जाना जाता है, यह एक न्यूरोलॉजिकल और विकासात्मक विकार है जो संचार, सामाजिक संपर्क और व्यवहार को प्रभावित करता है। प्रभावित बच्चों और उनके माता-पिता को अपने परिवार, समाज और यहाँ तक कि जीवन भर कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है क्योंकि इसका कोई स्थायी इलाज नहीं है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, दुनिया भर में लगभग 160 बच्चों में से 1 को ASD है। ASD के सटीक कारणों को अभी भी पूरी तरह से समझा नहीं जा सका है, लेकिन शोध बताते हैं कि यह आनुवंशिक और पर्यावरणीय कारकों से जुड़ा हुआ है।

इसकी विशेषता निम्न में कठिनाइयाँ हैं:

1. सामाजिक संपर्क: सामाजिक संकेतों को समझने और व्याख्या करने, बातचीत शुरू करने या बनाए रखने और संबंधों को विकसित करने और बनाए रखने में परेशानी।

2. मौखिक और अशाब्दिक संचार: मौखिक और अशाब्दिक संचार में कठिनाई, जैसे कि भाषा विकास में देरी या अनुपस्थिति, आवाज़ की टोन को समझने में कठिनाई और आँख से संपर्क करने में परेशानी।

 3. व्यवहार के प्रतिबंधित और दोहराव वाले पैटर्न: दोहराव वाले व्यवहार, जैसे हाथ फड़फड़ाना या शरीर हिलाना, और प्रतिबंधात्मक रुचियाँ, जैसे किसी विशिष्ट विषय में गहरी रुचि।

जब हम इसके प्रकारों के बारे में बात करते हैं तो ऑटिज़्म:

1. ऑटिस्टिक डिसऑर्डर (क्लासिक ऑटिज़्म)

 भाषा विकास, सामाजिक संपर्क और संज्ञानात्मक विकास में महत्वपूर्ण देरी की विशेषता है।

2. एस्परगर सिंड्रोम

सामाजिक संपर्क और दोहराव वाले व्यवहारों की कठिनाइयों की विशेषता है, लेकिन भाषा विकास में महत्वपूर्ण देरी के बिना।

3. व्यापक विकासात्मक विकार (PDD-NOS)

सामाजिक संपर्क और संचार में कठिनाइयों की विशेषता है, लेकिन ऑटिस्टिक विकार के लिए पूर्ण मानदंडों को पूरा किए बिना।

हम इसके कारणों और जोखिम कारकों के बारे में बात करते हैं

1. आनुवंशिकी: ऑटिज़्म या अन्य विकासात्मक विकारों का पारिवारिक इतिहास।

2. पर्यावरणीय कारक

 वायु प्रदूषण के लिए जन्मपूर्व जोखिम, माता-पिता की उन्नत आयु और गर्भावस्था के दौरान मातृ संक्रमण।

 3. मस्तिष्क की संरचना और कार्य

मस्तिष्क की संरचना और कार्य में असामान्यताएं, विशेष रूप से सामाजिक संचार में शामिल क्षेत्रों में।

जब हम इसके लक्षणों और निदान के बारे में बात करते हैं, तो ऑटिज़्म के लक्षण व्यापक रूप से भिन्न हो सकते हैं और इसमें शामिल हो सकते हैं:

• विलंबित या अनुपस्थित भाषा विकास

• आँख से संपर्क करने में कठिनाई

• सामाजिक संकेतों को समझने में परेशानी

• दोहराव वाला व्यवहार

• संवेदी संवेदनशीलता।

निदान आमतौर पर निम्नलिखित के संयोजन के माध्यम से किया जाता है:

• व्यवहार संबंधी अवलोकन

• विकासात्मक आकलन

• चिकित्सा मूल्यांकन

जब हम इसके उपचार और सहायता के बारे में बात करते हैं तो ऑटिज़्म का कोई इलाज नहीं है, प्रारंभिक हस्तक्षेप और सहायता परिणामों में काफी सुधार कर सकती है।  उपचार विकल्पों में ये शामिल हो सकते हैं:

• व्यवहार संबंधी उपचार (जैसे, अनुप्रयुक्त व्यवहार विश्लेषण)

• भाषण और भाषा चिकित्सा

• व्यावसायिक चिकित्सा

• संबंधित स्थितियों (जैसे, चिंता, एडीएचडी) को प्रबंधित करने के लिए दवाएँ

और उचित समर्थन और समायोजन के साथ, ऑटिज़्म से पीड़ित व्यक्ति संतुष्टिदायक और सार्थक जीवन जी सकते हैं।


(लेखक मनोविज्ञान विभाग, वी.के.एम, कमच्छा में असिस्टेंट प्रोफेसर हैं)


मंगलवार, 1 अप्रैल 2025

Banaras में ही केवल मनाई जाती है 'Choti Eid'

ईद के दूसरे दिन से मोमिन रखतें हैं '6 नफिल रोज़ा' फिर आती है छोटी ईद 

अज़ान की सदाओं पर खोला पहला नफिल रोज़ा 
हज़रत शाह तैय्यब बनारसी के आस्ताने पर जुटे अकीदतमंद (फाइल फोटो)

Varanasi (dil India live)। पूरी दुनिया में छोटी ईद केवल बनारसी ही मनाते है। बनारस में ईदुल फित्र के दूसरे दिन से छह नफिल रोज़ा मोमिन रखते हैं। ईद के सातवें दिन फिर छोटी ईद की खुशियां मनाई जाती है। इस दौरान शहर के औरंगाबाद और मंडुवाडीह में छोटी ईद का मेला भी लगता है। आज लोगों ने ईद के दूसरे दिन नफिल रोज़ा रखा और शाम में अज़ान की सदाओं पर खजूर और पानी से रोज़ा खोला। इस दौरान इफ्तार की थाली लज़ीज़ पकवान से सजी हुई थीं। जिसका रोज़ादारो ने लुत्फ उठाया। जो लोग रोज़ा नहीं थे, वो अपने रिश्ते नातेदारों, अजीजों और दोस्तों से दूसरे दिन ईद मिलने पहुंचे। एक दूसरे से गले मिले और उन्हें मुबारकबाद दी।

छोटी ईद और हज़रत शाह तैय्यब बनारसी का उर्स

मंडुवाडीह स्थित कुतुबे बनारस हज़रत शाह तैयब बनारसी रहमतुल्लाह अलैह का सालाना उर्स 'छोटी ईद' के रूप में मनाया जाता है। उर्स के मौके पर आस्ताना परिसर में दिन भर मेला लगा रहता है। मेले में विभिन्न व्यंजनों का लोग जहां लुत्फ लेते हैं वहीं बच्चे खूब मस्ती करते हैं। छोटी ईद के मौके पर हजरत शाह तैयब बनारसी के आस्ताने पर हाजिरी देने के लिए देश के कोने-कोने से अकीदतमंदों की जुटान होती है। शाम होते ही आस्ताने पर पैर रखने की भी जगह नहीं बचती। बाबा की मजार पर गुलपोशी व चादरपोशी कर फातेहा पढ़ने वालों का सिलसिला देर रात तक चलता रहता है। इस दौरान फज्र की नमाज के बाद कुरआनख्वानी के साथ ही उर्स शुरू होता है। वहीं इशा की नमाज के बाद कुल शरीफ में अकीदतमंद शामिल होते हैं। इस मौके पर देश में अमन व खुशहाली के लिए दुआएं मांगी जाती है। वर्षो से चले आ रहे दस्तूर के मुताबिक छोटी ईद शानों-शौकत के साथ मनाई जाती है। मदरसा दारुल उलूम तैयबिया मोइनिया दरगाह शरीफ मंडुवाडह के प्रिंसिपल मोहम्मद अब्दुस्सलाम रशीदी ने बताया कि उर्स ईद के सातवें दिन मनाया जाता है। आयोजन को लेकर क्षेत्र ही नहीं बल्कि दूर दराज से आने वालों में काफी उत्साह रहता है। लोग एक-दूसरे को छोटी ईद कि मुबारकबाद देते हैं। हर कोई खुशी से लबरेज नजर आता है। 

औरंगाबाद में भी लगता है मेला

छोटी ईद पर औरंगाबाद में भी मेला लगता है। इस मौके पर हज़रत हवा शाह वह हज़रत हिम्मत शाह का अकीदत के साथ उर्स मनाया जाता है। उर्स के दौरान लोगों का हुजूम उमड़ता है। गुस्ल, फातिहा और चादर पोशी का दौर देर रात तक उर्स में चलता है। यहां भी छोटी ईद कि मुबारकबाद देने और खुशियां मनाने दूर दराज से लोग जुटते हैं।

VKM Varanasi के मनोविज्ञान विभाग के मनस्विनी क्लब का शौर्य सेंटर भ्रमण

छात्राओं ने ऑटिज्म और सेरेब्रल पाल्सी से प्रभावित बच्चों संग बिताए समय, की बातचीत

Varanasi (dil India live). वसन्त कन्या महाविद्यालय के मनोविज्ञान विभाग के मनस्विनी क्लब ने विश्व ऑटिज्म दिवस के उपलक्ष में सुसुवाही स्थित शौर्य सेंटर फॉर थेरेपी का शैक्षणिक भ्रमण किया। इस दौरान छात्राओं ने ऑटिज्म और सेरेब्रल पाल्सी से प्रभावित बच्चों के साथ बातचीत की और उनकी दिनचर्या व थेरेपी प्रक्रियाओं को करीब से समझा। क्लब के सदस्यों ने शौर्य सेंटर द्वारा संचालित विशेष विद्यालय का भी दौरा किया, जहाँ उन्होंने विशेष जरूरतों वाले बच्चों की शिक्षा व्यवस्था का अवलोकन किया।

इस भ्रमण का उद्देश्य विशेष बच्चों की चुनौतियों और उनकी शिक्षा व थेरेपी से जुड़े पहलुओं को समझना था। Psyconnect से मिस तुलिका के नेतृत्व में यह यात्रा सफलतापूर्वक संपन्न हुई, जिसमें छात्राओं ने गहरी संवेदनशीलता और सीखने की जिज्ञासा दिखाई।

results distribution एवं नामांकन समारोह का आयोजन

शिक्षा वो चाभी है जिससे बच्चों के शारीरिक एवं मानसिक विकास का ताला खुलता है-एहतेशामुल हक़ 

मेधावी छात्रों को किया गया पुरस्कृत


 मोहम्मद रिजवान 

Varanasi (dil India live)। विकासखंड चिरईगांव के प्राथमिक विद्यालय गौराकलां में शैक्षिक सत्र 2024-25 का वार्षिक परीक्षा फल वितरण समारोह आयोजित कर मेधावी छात्र एवं छात्राओं को पुरस्कृत किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रिंसिपल आरती देवी ने संचालन वरिष्ठ अध्यापिका रेखा उपाध्याय ने किया। कार्यक्रम में कक्षा 1 से 5 तक के सभी प्रथम, द्वितीय, तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले छात्र एवं छात्राओं को स्मृति चिन्ह व कॉपी पेन देकर पुरस्कार व प्रमाण पत्र प्रदान किए गए। सभी कक्षाओं में शत प्रतिशत उपस्थिति, बेहतरीन कार्य एवं हिंदी व अंग्रेजी के बेस्ट हैंडराइटिंग वाले सभी बच्चों को भी पुरस्कृत किया गया। 


मुख्य अतिथि एसआरजी डॉ. राजीव कुमार सिंह ने संबोधित करते हुए कहा इस ग्रामीण अंचल में परिषदीय विद्यालय में इस तरह का शानदार आयोजन काबिले तारीफ है शानदार सांस्कृतिक आयोजन शिक्षकों की मेहनत का परिणाम है जो कि बेहतर पठन-पाठन के माहौल में बहुत ही सहायक है। उन्होंने बच्चों को उनके उज्जवल भविष्य की शुभकामनाएं भी दिया। प्रिंसिपल आरती देवी ने अतिथियों का पुष्पगुच्छ और स्मृति चिन्ह देकर स्वागत कर सम्मानित किया। इस अवसर पर अटेवा पेंशन बचाओ मंच के जिला उपाध्यक्ष डॉ एहतेशामुल हक ने कहा कि शिक्षा व चाभी है जिससे बच्चों के शारीरिक एवं मानसिक विकास का ताला खुलता है बच्चे स्कूल में 6 से 7 घंटा तक शिक्षा ग्रहण करते हैं इसके बाद बच्चे अपने घर को जाते हैं तो अभिभावकों को भी चाहिए कि बच्चों का होमवर्क पूरा करें। विद्यालय में होने वाली शैक्षिक व सांस्कृतिक गतिविधियों, एक्स्ट्रा करिकुलर एक्टिविटीज, खेलकूद प्रतियोगिता में बच्चों को बढ़ चढ़कर भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करें।


इस अवसर पर प्रिंसिपल आरती देवी, ग्रामप्रधान राजेश कुमार राजू, एस आर जी डॉ राजीव कुमार सिंह, अटेवा के ज़िला उपाध्यक्ष डॉ एहतेशामुल हक, रेखा उपाध्याय, सादिया तबस्सुम, अनीता सिंह, शशिकला, प्रमिला सिंह, ज्योति कुमारी, शक्ति कुमारी, रीना, रीता, सोनी, आशा, त्रिलोकी प्रसाद गुप्ता व काफी संख्या में अभिभावकगण, छात्र एवं छात्राएं उपस्थित थे।

Mahaveer jayanti जानिए कब है, क्या है इस पर्व का इतिहास

मैत्री भवन में महावीर जयंती पर संगोष्ठी 6 अप्रैल को 

Varanasi (dil India live)। भगवान महावीर की जन्म जयंती इस बार 10 अप्रैल को मनाईं जाएगी। हालांकि बनारस में कैथोलिक ईसाई समुदाय के वाराणसी धर्म प्रांत द्वारा संचालित मैत्री भवन इस आयोजन को सभी धर्मों के साथ 6 अप्रैल को सेलीब्रेट करेगा। मैत्री भवन के निदेशक फादर फिलीप डेनिस कहते हैं कि "काशी में जैन धर्म" का क्या रोल है, भगवान महावीर की शांति की शिक्षा कितनी कारगर, इस विषय पर एक संगोष्ठी मैत्री भवन, भेलूपुर में आयोजित की जा रही है। जिसमें सभी धर्मों के लोग शिरकत करेंगे। मुख्य अतिथि पीयुष मोर्डिया (IPS) अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक, वाराणसी,  प्रमुख वक्ता प्रो. कमलेश कुमार जैन, प्रो. सुमन जैन, डा. विवेकानंद जैन, डा. आनंद कुमार जैन जैन धर्म की शांति और भाईचारे की शिक्षाओं को सभी बुद्धिजीवियों से साझा करेंगे। आयोजन में फादर फिलिप डेनिस एवं फादर येन अतिथियों का स्वागत करेंगे। यह आयोजन 6 अप्रैल को दोपहर 3 बजे से शाम 5 बजे तक मैत्री भवन सभागार में आयोजित किया गया है।

जानिए कौन हैं महावीर जैन कहां हुए पैदा 

जैन ग्रंथों के अनुसार  भगवान महावीर का जन्म चैत्र माह (हिंदू कैलेंडर) के शुक्ल पक्ष की 13 तारीख को बिहार के कुंडल ग्राम (अब कुंडलपुर) में हुआ था, जो पटना के निकट है। उस समय, वैशाली को राज्य की राजधानी माना जाता था। हालांकि, महावीर के जन्म का वर्ष विवादित है। श्वेतांबर जैन के अनुसार, महावीर का जन्म 599 ईसा पूर्व में हुआ था, जबकि दिगंबर जैन 615 ईसा पूर्व को उनका जन्म वर्ष मानते हैं। उनके माता-पिता - राजा सिद्धार्थ और रानी त्रिशला ने उनका नाम वर्धमान रखा था।


श्वेतांबर समुदाय की मान्यताओं के अनुसार, महावीर की मां ने 14 स्वप्न देखे थे, जिनकी व्याख्या बाद में ज्योतिषियों ने की, जिनमें से सभी ने कहा कि महावीर या तो सम्राट बनेंगे या ऋषि (तीर्थंकर)। जब महावीर 30 वर्ष के हुए, तो उन्होंने सत्य की खोज में अपना सिंहासन और परिवार छोड़ दिया। वे 12 वर्षों तक एक तपस्वी के रूप में निर्वासन में रहे। इस दौरान, उन्होंने अहिंसा का प्रचार किया और सभी के साथ सम्मान से पेश आएं। इंद्रियों को नियंत्रित करने में असाधारण कौशल दिखाने के कारण उन्हें "महावीर" नाम मिला। यह व्यापक रूप से माना जाता है कि जब महावीर 72 वर्ष के थे, तब उन्हें ज्ञान (निर्वाण) प्राप्त हुआ था। 

सोमवार, 31 मार्च 2025

Varanasi समेत Desh Duniya में Eid का जश्न

पहले रब की बारगाह में सिजदा, फिर गले मिलकर दी ईद कि मुबारकबाद 

Varanasi (dil india live). Desh Duniya में मुक़द्दस Ramadan का एक माह का रोजा कामयाबी से मुकम्मल करने बाद सोमवार को मुसलमानों ने ईद की खुशियां मनायीं। यूं तो खुशियों का आगाज़ ईद के चांद के दीदार के साथ ही हो गया था जब हिंदुस्तान में ईद का चांद देखा जा रहा था तब खाड़ी देशों में ईद कि खुशियां मनाई जा रही थी। हिंदुस्तान में ईद का जश्न ईदुल फित्र कि नमाज़ अदा करने के बाद अपने शबाब पर पहुंच गया। मज़हबी शहर Varanasi में तो ईद का मज़ा और रंग ही औरों से जुदा है। यहां सभी मज़हब के लोग मिलजुल कर एक साथ ईद का जश्न मनाते है।

आईपीएस ने गले मिलकर दी ईद की मुबारकबाद 


Varanasi में ईद का त्योहार उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। इस बीच लंगडे हाफिज मस्जिद में ईद की नमाज पढ़ने के बाद अकीदतमंदों ने एक दूसरे से गले मिलकर बधाई दी। वहीं आईपीएस सरवणन टी दालमंडी में सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लेने पहुंचे। उन्होंने लोगों को गले लगाया और ईद की मुबारकबाद दी। इस दौरान एक छोटे बच्चे को भी उन्होंने हाथ मिलाकर ईद की बधाई दी। वहीं हिंदू वर्ग ने नमाजियों पर पुष्पवर्षा कर मिसाल पेश किया। लोगों के लिए यह एक सुखद एहसास था। ईद पर्व के मौके पर वाराणसी में गंगा जमुना तहजीब की यह मिसाल कबीर और नज़ीर के शहर बनारस में उस पर की याद ताज़ा कर गई, जब जयचंद की हार के बाद बादशाह कुतुबुद्दीन ऐबक ने बनारस में सौहार्द की ईद देखी थी। उस ईद में हिंदू मुस्लिम की अलग अलग पहचान करना मुश्किल था कि कौन हिन्दू है और कौन मुसलमान। सोमवार को भी मस्जिद में ईद की नमाज अदा करने के बाद हिंदू भाइयों ने नामजियों पर पुष्पवर्षा के साथ ही गले मिलकर ईद मुबारक कहा। तो काशी के लोगों को बनारस की पहली ईद की याद आ गई।


Varanasi में दो दर्जन ईदगाह और 500 से ज्यादा मस्जिदों में इबादतगुजारों ने रब के सामने जहां सिर झुकाया वहीं अपनी रोजी-रोटी, देश की तरक्की और अमन के लिए रब की बारगाह में हाथ उठाया। मस्जिदों और ईदगाहों में नमाजियों का सैलाब नमाज अदा करने उमड़ा था। सुबह 6 बजे से 10.30 बजे के बीच ईद की नमाज मोमिनीन ने अकीदत के साथ अदा की। मस्जिदों व ईदगाहों के आसपास मेले जैसा माहौल दिखा। नमाज पूरी होते ही एक-दूसरे से गले मिलकर सभी ने ईद की मुबारकबाद दी। बड़ों ने छोटों को ईदी दिया तो वे निहाल हो उठे। गरीबों और मिसकीनों का भी लोगों ने ख्याल रखा। किसी ने फितरे की रकम तो किसी ने सदका व खैरात देकर गरीबों की मदद की। 

यहां अदा हुई नमाज़े ईदैन


कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच  ईदगाह पुरानापुल पुल्कोहना में मौलाना शकील, ईदगाह गोगा की बाग जलालीपुरा में मौलाना नुरुल हसन, ईदगाह शक्कर तालाब अहले हदीस में मौलाना अहसन जमील मदनी, ईदगाह मस्ज़िद लंगर नवापुरा में मौलाना इरशाद रब्बानी, जामा मस्ज़िद खोज़ापुरा मैदान में मौलाना जाहिर अहमद, मस्ज़िद शहीद बाबा सरैयां बाजार में हाफिज गुलाम, मस्ज़िद सुन्नी इमामबाडा सरैया में मौलाना इक़बाल अहमद सेराज़ी, शिया इमामबाडा सरैयां में मौलाना जफ़रुल हुसैनी, बड़ी मस्ज़िद सरैयां पक्का महाल हाफिज खैरुद्दीन, जामा मस्ज़िद कमल गडहा में मौलाना आज़ाद, नई मस्ज़िद शिया हज़रात दोषीपुरा में मौलाना जफ़र हुसैन, मीनार वाली मस्ज़िद कमालपुरा में मौलाना निजाम ने नमाज अदा कराया। मस्जिद लाट सरैया में मौलाना जियाउर्रहमान ने नमाज तो खानकाह शक्कर तालाब में मुफ्ती-ए-बनारस अहले सुन्नत मौलाना मोइनुद्दीन अहमद फारुकी प्यारे मियां, शाही मस्जिद ढाई कंगूरा में हाफिज नसीम अहमद बशीरी, शाही मुगलिया मस्जिद बादशाहबाग में मौलाना हसीन अहमद हबीबी, मस्जिद लंगड़े हाफिज में मौलाना जकीउल्लाह असदुल कादरी, सदर इमामबाड़े में मौलाना जफरुल हुसैनी, ईदगाह विद्यापीठ में मुफ्ती शमीम, मस्जिद उल्फत बीबी में मौलाना साकीब रजा, मस्जिद खाकी शाह में मौलाना मुनीर, जामा मस्जिद कम्मू खां डिठोरी महाल में मौलाना शमशुद्दीन साहब ने नमाज अदा करायी।

शाही मस्जिद ज्ञानवापी में मौलाना अब्दुल आखिर नोमानी, मस्जिद नगीना में हाफिज सैफुल मलिक, मस्जिद सुल्तानिया में अब्दुल्लाह सऊद अत्तारी, मदनपुरा अल्लू की मस्जिद हाफिज अनस, ऊंची मस्जिद में मौलाना एहसन कमाल, ढोमन की मस्जिद में कारी फराज अहमद, मस्जिद बरतला में वासिफ रज़ा, मस्जिद जहांगीर हटिया में हाफ़िज़ शुऐब व हाफिज मो. ताहिर ने मस्जिद याकूब शहीद में नमाज अदा करायी। खोजित कुआं में मौलाना वकील अहमद मिस्बाही, ईदगाह मस्जिद लाटशाही में हाफिज हबीबुर्रहमान, जामा मस्जिद नदेसर में मौलाना मजहरुल हक, मस्जिद टकटकपुर कब्रिस्तान में मौलाना अजहरुल कादरी, मस्जिद शाह तैय्यब बनारसी में मौलाना अब्दुस्सलाम, मस्जिद हज़रत शाह मूसा में हाफ़िज़ ख़ालिक़ जमाल, मस्जिद नगीना में हाफिज सैफुल मलिक, मस्जिद सुल्तानिया में अब्दुल्लाह सऊद अत्तारी, मदनपुरा अल्लू की मस्जिद में मौलाना शकील, ऊंची मस्जिद में मौलाना एहसन कमाल, ढोमन की मस्जिद में कारी फराज अहमद, ईदगाह दायम खां हाफिज नसीर, मस्जिद बरतला में अयाज महमूद व हाफिज मो. ताहिर ने मस्जिद याकूब शहीद में नमाज अदा करायी। ऐसे ही मस्जिद बुलाकी शहीद अस्सी, मस्जिद नईबस्ती गौरीगंज, मस्जिद हबीबिया गौरीगंज, आलमगीर मस्जिद धरहरा, मस्जिद कुश्ताबेगम, मस्जिद मदीना, मस्जिद गौसिया, मस्जिद ताराशाह, मस्जिद छित्तनपुरा इमलिया तले, मस्जिद नूरैन समेत शहर और आसपास की मस्जिदों में ईदुल फितर की नमाज पूरी अकीदत के साथ अदा की गई। इसी के साथ ईद का सप्ताह भर चलने वाला महापर्व शुरू हो गया। इस हिंदू-मुस्लिम से गले मिलने का नजारा गंगा-जमुनी शहर Varanasi की तस्वीर पेश करने में सफल रहा। लोहता, लालपुर, कोटवा, बाबतपुर, रामनगर, मिल्कीपुर आदि ग्रामीण इलाकों में भी ईद की खुशियां धूमधाम से मनायी गयीं। Varanasi में ईद की नमाज सकुशल संपन्न होने पर जिला व पुलिस प्रशासन ने राहत की सांस ली। इस दौरान पुलिस अधिकारियों द्वारा ईद-उल-फितर के अवसर पर प्रमुख मस्जिदों व ईदगाहों पर व्यवस्था संभाली। लाट सरैया में मुस्तैद पुलिस कर्मियों को ईद की नमाज को सकुशल सम्पन्न होने पर चौदहो के सरदार मकबूल हसन, हाजी मो. सुहैल आदि ने ईद की मुबारकबाद पेश की।


घरों में चला दावतों और जश्न का दौर 

ईद जैसे ग्लोबल पर्व पर सेवइयों की घुलन ने हर एक को अपने आगोश में ले लिया, हर आमो-खास ईद के रंग में रंगा नजर आया। ईद की नमाज अदा कर लौटे लोगों ने दूसरे वर्ग के लोगों को ईद की दावत दी। मुस्लिम घरों में दावतों का शुरू हुआ सिलसिला देर रात तक चलेगा। हिंदू-मुस्लिमों ने गले मिलकर एक-दूसरे को ईद की मुबारकबाद दी। कई जगहों पर ईद पार्टी रखी गयी थी। पार्टी में शामिल होने वालों के हिसाब से मीनू तैयार किया गया था। कुछ मुस्लिम घरों में गैर-मुस्लिमों के लिए सेवइयों के साथ नवरात्र को देखते हुए शाकाहारी सब्जी और पूड़ी का इंतजाम भी था। यहां ईद मिलने समाजिक संगठनों व सियासी दलों के लोगों का हुजूम जुटा हुआ था। 


ईदी पाकर निहाल हुए बच्चे

माहे रमज़ान का रोज़ा मुकम्मल करने के बाद लाखों मुसलमानों ने मज़हबी शहर बनारस में सभी मज़हब के लोगों संग मिलकर ईद की खुशियां मनायी। खुशियों का आगाज़ नमाज़-ए-ईदुल फित्र अदा करने के साथ हुआ। शहर के तकरीबन एक दर्जन ईदगाह और पांच सौ से ज्यादा मस्जिदों में इबादतगुज़ारों ने रब के सामने जहां सिर झुकाया वहीं अपनी रोज़ी रोटी, देश की तरक्की और खुशहाली के लिए रब की बारगाह में हाथ उठाया। इस मौके पर मस्जिदों और ईदगाहों में नमाजियों का जन सैलाब नमाज़ अदा करने उमड़ा हुआ था।


दीनी और दुनियावी दोनों तालीम करें हासिल 

दीनी और दुनियावी दोनों तालीम हासिल करना मौजूदा वक्त में सभी लोगों के लिए जरूरी है। अगर आप बेहतर तालीम अपने बच्चों को देंगे तो उनका मुस्तकबिल संवर जाएगा। बहुत लोग कहते हैं कहा से पढ़ाई कराएं पैसा नहीं है। मैं आपसे कह रहा हूं आज वो दौर है की सरकार की बहुत सी स्कीम है जिसका फायदा लेकर मुफ्त में या बहुत कम पैसों में तालीम हासिल की जा सकती है। मैं तो ये कहता हूं कि चटनी रोटी ही क्यों न हासिल करना पड़े मगर हर हाल में बच्चों को दीनी के साथ ही आधुनिक तालीम भी दें। यह तकरीर मशहूर आलिम मौलाना अजहरुल कादरी ने मस्जिद टकटकपुर में ईद की नमाज़ से पहले की। उन्होंने कहा कि नबी ने कहा था इल्म हासिल करना चाहते हो तो चीन तक जाना हो तो जाओ। उस दौर में अरब से चीन की दूरी कितनी ज्यादा थी, न तो ट्रेन थी न जहाज़ फिर भी तालीम के लिए चीन तक जाने के लिए कहना तालीम के महत्व को व अहमियत को बयां करता है।


पुरखों के दर पर हाजिरी

ईद की नमाज के बाद लोगों ने शहर के कब्रिस्तानों में जाकर वलियों, बुजुर्गों व अपने पुरखों के दर पर हाजिरी लगाई और फातेहा पढ़ा। टकटकपुर, हुकुलगंज, मदनपुरा, रेवड़ीतालाब, बजरडीहा, जलालीपुरा, गौरीगंज, फातमान आदि आस्ताने पर हाजिरी लगाई गई। हजरत लाटशाही बाबा, चंदन शहीद, हजरत याकूब शहीद, बहादुर शहीद, हज़रत शाह तैय्यब बनारसी, हरदाम शाह बाबा, हज़रत शाह मूसा व पीर आले शाह बाबा आदि के आस्ताने पर भी अकीतदमंदों का हुजूम उमड़ा। 

हज कमेटी के सदस्य सर्वर सिद्दीकी ईदगाह में लोगों को मुबारकबाद देते 


Eid Mubarak (3)-आइये नबी-ए-करीम की ईद और उनकी तालीम जाने

नबी-ए-करीम का रास्ता ही इंसानियत का पैग़ाम 

  • अमन

Varanasi (dil India live)। नबी-ए-करीम (स.) का दुनिया को दिखाया गया रास्ता ही इंसानियत का पैग़ाम है। प्यारे नबी ने अपनी 63 साल की जाहिरी जिंदगी में जो कुछ भी करने का अपनी उम्मत को हुक्म दिया उसे पहले खुद करके दिखाया। प्यारे नबी ईद भी सादगी से मनाया करते थे। इसलिए इस्लाम में सादगी से ईद मनाने का हुक्म है। नबी से जुड़ा एक वाक्या है, जिससे सभी को बड़ी सीख मिल सकती है। 

एक बार नबी-ए-करीम हजरत मोहम्मद (स.) ईद के दिन सुबह फज्र की नमाज़ के बाद घर से बाज़ार जा रहे थे। कि आपको एक छोटा बच्चा रोता हुआ दिखाई दिया। नबी (स.) ने उससे कहा आज तो हर तरफ ईद की खुशी मनायी जा रही है ऐसे में तुम क्यों रो रहे हो? उसने कहा यही तो वजह है रोने की, सब ईद मना रहे हैं मैं यतीम हूं, न मेरे वालिदैन है और न मेरे पास कपड़े और जूते-चप्पल के लिए पैसा। यह सुनकर नबी (स.) ने उसे अपने कंधों पर बैठा लिया और कहा कि तुम्हारे वालिदैन भले नहीं हैं मगर मैं तुम्हे अपना बेटा कहता हूं। नबी-ए-करीम (स.) के कंधे पर बैठकर बच्चा उनके घर गया वहां से तैयार होकर ईदगाह में नमाज़ अदा की। जो बच्चा अब तक यतीम था उसे नबी-ए-करीम (स.) ने चन्द मिनटों में ही अपना बेटा बनाकर दुनिया का सबसे अमीर बना दिया। इसलिए नबी की तालीम है कि ईद आये तो आप भी एक दूसरे में खुशियां बांटे। इसे ईद-उल-फित्र इसलिए कहते हैं क्यों कि इसमें फितरे के तौर पर 2 किलों 45 ग्राम गेंहू जो हम खाते हो उसके दाम के हिसाब से घर के तमाम लोगों का सदाका-ए-फित्र निकालना होता है। सदका ए फित्र ईद की नमाज़ से पहले अदा करना अफ़ज़ल है। नहीं अदा किया तो आपका रोज़ा जमीन और आसमान के बीच में तब तक लटका रहेगा जब तक आप अदा नहीं कर देते। यानी ईद की नमाज़ के बाद भी सदका ए फित्र अदा किया जा सकता है। मगर ईद से पहले करने से गरीब और जरूरतमंद लोगों को वक्त रहते उनका हक़ उन्हें मिल जाता है। दरअसल जकात और फितरा इसलिए ही इस्लाम में बनाया गया है ताकि उससे ग़रीब और जरूरतमंद को उनका हक मिल सके। यूं तो ईद उसकी है जिसने रमज़ान भर इबादत कि और कामयाबी से रमज़ान का पूरा रोज़ा रखा और वक्त रहते फितरा और जकात अदा कर दिया। वहीं ईद मुबारक के दिन खुशियां बांटना भी सुन्नत है। छोटे छोटे मासूम बच्चे भले ही रमज़ान मुबारक और ईद के पैग़ाम को न समझते हों मगर इतना जरूर जानते हैं कि ईद आई है तो ईदगाह जाएंगे, घर के बड़े ईदी देंगे। इसलिए नबी के रास्ते पर चलें और ईद पर उनकी सुन्नतों और पैग़ाम को आम करें। ऐ परवरदिगार तू अपने हबीब के सदके और तुफैल में हम सबको ईद की खुशियां नसीब फरमा और नबी के रास्ते पर चलने की तौफीक दे... आमीन।

        (लेखक-दिल इंडिया लाइव के संपादक हैं।)

रविवार, 30 मार्च 2025

Eid Mubarak 2025: चांद के दीदार संग देश दुनिया में ईद का जश्न शुरू

वाराणसी के मुस्लिम इलाकों में हुई जमकर आतिशबाजी
चांद का दीदार करते सपा नेता ज़ुबैर अहमद 


Varanasi (dil India live). माहे रमजान का महीना रोजेदारों से जुदा हो चुका है। चांद के दीदार संग ईद का जश्न मुस्लिम इलाकों में शुरू हो गया। रोजेदारों की नेकियों के बदले माहे रमजान के बाद मुल्सिम समुदाय का सबसे बड़ा पर्व ईद-उल-फित्र सोमवार को मनाया जाएगा। ईदुल फितर के खैरमकदम के लिए इतवार की शाम लोगों ने वाराणसी के मुस्लिम बहुल इलाकों में जमकर आतिशबाजी की। 

ईद रमजान की कामयाबी का ईनाम

Shahar kazi बनारस मौलाना जमील अहमद ने कहा कि रमजान रब का महीना है। ईद रमज़ान की कामयाबी का ईनाम है। इस महीने के बाद पड़ने वाला त्यौहार खुदा के नेक बन्दों की ईद है। इस दिन लोग अल्लाह की बारगाह में अपनी एक माह की इबादतों का शुक्र अदा करते हैं।


जमकर हुई आतिशबाज़ी 

मुस्लिम बहुल इलाकों में चांद की तस्दीक के बाद जमकर आतिशबाजी हुई। लोग अपनी छतों पर पटाखे फोड़ते दिखाई दिए। ख़ुशी से लबरेज लोगों ने अल्लाह से चांद देखने के बाद दुआ की। लोगों ने मुल्क में अमनों अमान की दुआएं मांगी और एक दूसरे को बधाई दी। ईद के जश्न की शुरुआत 29 वीं रमज़ान के चांद के दीदार संग इतवार को हो गया। इस दौरान सोशल मीडिया पर ईद मुबारक के कोटेशन वायरल होने लगे। देखते ही देखते सोशल मीडिया का सभी प्लेटफॉर्म मिल्लत की मिसाल पेश करता दिखाई दिया। हिंदू मुस्लिम सिख ईसाई सभी एक दूसरे को मुबारकबाद देते दिखे।

कड़ी सुरक्षा में संपन्न होगी नमाज

पुलिस कमिश्नरेट वाराणसी ने ईद की नमाज के लिए पुख्ता इंतजाम किए हैं। सभी ईदगाहों पर अतरिक्त सुरक्षा बालों की तैनाती की गयी है। एसीपी रैंक के अफसरों ने सभी ईदगाहों का स्वयं स्थलीय निरीक्षण कर सुरक्षा के इंतजामों को परखा है। बनारस में तकरीबन पांच सौ मस्जिदों, ईदगाहों और इबादतगाहों में नमाजे ईदुलफितर अदा की जाएगी।


ईद की नमाज का वक्त

मस्जिद खानकाह हमीदिया रशीदिया शक्कर तालाब 8:30 बजे, ईदगाह लाट सरैया 9:30 बजे, ईदगाह पुराना पुल पुलकोहना 8:30 बजे, ईदगाह गोगा की बाग जलालीपुरा 8:00 बजे, ईदगाह मस्ज़िद लंगर नवापुरा 8:15 बजे, जामा मस्ज़िद खोज़ापुरा मैदान 7:30 बजे, मस्ज़िद शहीद बाबा सरैयां बा़जार 8:15 बजे, मस्ज़िद सुन्नी इमामबाडा सरैया 8:00 बजे, बड़ी मस्ज़िद सरैयां पक्का महाल 8:00 बजे, मस्ज़िद इमिलिया तल्ले छित्तनपुरा 8:00 बजे, मस्ज़िद ढाई कंगूरा चौहट्टा लाल खां 8:00 बजे, मस्ज़िद उस्मानिया उस्मानपुरा 7:45 बजे, बड़ी मस्ज़िद सलारपुर कबड्डीदुआर 8:00 बजे, जामा मस्जिद अगागंज 8:00 बजे, जामा मस्ज़िद कमन गडहा 8:15 बजे, मीनार वाली मस्ज़िद कमालपुरा 8:00 बजे, पक्की मस्जिद लल्लापुरा 9.15 बजे, जामा मस्जिद बुद्धू छैला कमनगढहा 7.45 बजे, बड़ी मस्जिद ककरमत्ता 8:15 बजे, नूरी मस्जिद में 8:00 बजे, मस्जिद हज़रत शाह मूसा 7:45 बजे, मस्जिद उस्मान गनी 7:30 बजे, काली मस्जिद सलेमपुरा 8.00 बजे, बख्शी जी की मस्जिद अंधरापुल 8.15 बजे, मस्जिद तेलियाबाग़ 8.00 बजे, मस्जिद उल्फत बीबी अर्दली बाज़ार 8.00, मस्जिद टकटकपुर कब्रिस्तान 8.15 बजे, हज़रत याकूब शहीद नगवा 8.15 बजे, मस्जिद लंगडे हाफिज नयी सड़क 10 बजे, ईदगाह मस्जिद बैतुस्सलाम 8.00 बजे, मस्जिद नूरी फुलवरिया 9.00 बजे, मुंशी की मस्जिद रेवड़ी तालाब 7.45 बजे, बिचली मस्जिद कचहरी 8.00 बजे, गफूरी मस्जिद कचहरी 8.30 बजे, मस्जिद दायम खां, पुलिस लाइन 8.00 बजे, ईदगाह मस्जिद लाट शाही 9.00 बजे, मस्जिद अल कुरैश, हंकार टोला 8.00 बजे, मस्जिद रंग ढालवा, फाटक शेख सलीम 7:45 बजे, मस्जिद भाटिन मदनपुरा 7.45 बजे, मस्जिद इब्राहिम ताडतल्ला मदन पुरा 8.00 बजे, मस्जिद बारतल्ला मदनपुरा 8.15 बजे, मस्जिद जहांगीर हटिया 8.30 बजे, मस्जिद कमच्छा 7.30 बजे, मस्जिद डोमन मानसरोवर 7.45 बजे, बड़ी मस्जिद काजी पुरा, लल्लापुरा 8.00 बजे, नूरी मस्जिद (सरैया) फुलवरिया 8.30 बजे, मस्जिद चांदमारी 8.30 बजे, मस्जिद हबीबीया गौरीगंज 8.00 बजे, मस्जिद नयी बस्ती गौरीगंज 7.45 बजे, बड़ी ईदगाह पुलकोहना 8.30 बजे, मस्जिद लहरतारा पुल 8.00 बजे, जामा मस्जिद नदेसर 8.00 बजे, बड़ी मस्जिद काजी सादुल्लापुरा 8:00 बजे, मस्जिद अब्दुल सलाम लंहगपुरा, औरंगाबाद 8.00 बजे, दरगाह हकीम सलामत अली पितरकुंडा 8.00 बजे, शाही मस्जिद ज्ञानवापी 8.00 बजे, शाही छोटी मस्जिद शिवाला 7.30 बजे, मोती मस्जिद शिवाला 7.30 बजे, मस्जिद कुश्ता बेगम, शिवाला 8.15 बजे, मस्जिद अब्दुल रहीम खां, शिवाला 8.30 बजे, शिया जामा मस्जिद अर्दली बाजार 8.00 बजे। 

नोट-अहले हदीस वर्ग की ईद की नमाज़ 6.30 से 7.30 बजे के बीच अदा की जाएगी (नीचे देखें)।




Kaba में मनाई जा रही है आज Eid, Kashi में आज चांद रात

Eid की खुशियों की आहट से महक उठा बाजार 


Mohd Rizwan 

Varanasi (dil India live)। काबा में कल चांद देखा गया आज इतवार को वहां ईद का जश्न मनाया जा रहा है। वही काशी में आज चांद रात है। अगर चांद का दीदार हो जाता है तो सोमवार को यहां ईद मनाई जाएगी। ईद की आहट से ही बाजार बूम कर रहा है। ईद की खरीदारी अब अंतिम चरण में है। बाजार में सेवई की खुशबू बिखर रही है तो वहीं कुर्ता-पायजामा लोगों की पहली पसंद बने हुए हैं। बच्चे, युवा और बुजुर्गों में कुर्ता-पायजामा की खरीदारी ज्यादा है। इसके साथ ही इत्र, कपड़े, जूते-चप्पल और टोपी, सौंदर्य प्रसाधन की दुकानें देर रात तक गुलजार रह रही हैं।


शाम ढलने के बाद मुस्लिम बाहुल्य इलाकों में चहल-पहल बढ़ जा रही है। ईद के ग्लोबल पर्व पर पिछली बार की तुलना में 20 फीसदी अधिक महंगाई भी बाजार में छाई है। इसके बावजूद रोजेदारों में उत्साह है। भदऊ चुंगी स्थित सेवईं मंडी में अधिकतर कारोबारियों का माल खत्म हो चुका है। सेवईं की बिक्री अभी बनी हुई है। गर्मी को देखते हुए दिन में कम और शाम के बाद ज्यादा खरीदारी हो रही है। दालमंडी, बेनिया, नई सड़क, मदनपुरा, बजरडीहा, सरैया, अर्दली बाजार, पीलीकोठी, कज्जाकपुरा क्षेत्रों में सेवई, ड्राई फ्रूट्स समेत अन्य सामानों की खरीदारी अपने शबाब पर है। गोला दीनानाथ, विशेश्वरगंज, खोजवां, पांडेयपुर आदि क्षेत्रों में किराना माल की खपत बढ़ी है।

हाजी नासिर जमाल ने बताया कि खुशियां बांटने वाले इस पर्व पर लोगों की कुर्ता-पायजामा पहली पसंद होती है। तमाम आकर्षक और डिजाइनदार कुर्ते-पायजामे बाजार में हैं। टेलर के यहां दिन रात काम चल रहा है। नया ऑर्डर अब कोई नहीं ले रहा है। दालमंडी के सामाजिक कार्यकर्ता शकील अहमद जादूगर ने बताया कि गर्मी के कारण रात तक दुकानें खुल रही हैं और अधिकतर खरीदारी शाम में इफ्तारी के बाद शुरू हो रही है। दूर दराज के लोग दिन में और स्थानीय वाशिंदे रात में खरीदारी कर रहे हैं। हंकार टोला के सरफराज ने बताया कि खजूर, सेवई, ड्राई फ्रूट्स की खरीदारी 80 फीसदी तक हो चुकी है। मार्केट में ईरानी और अफगानी नकाब की बिक्री हो रही है।


बाजार में सेवइईयों की वैराइटी पर अगर नज़र डालें तो बेनिया के दुकानदार नूर मोहम्मद ने बताया कि बनारसी सेवई की कीमत 300 से 400 रुपये किलो, हैदराबाद की सेवई 300-350, कतर की सेवई 650 रुपये किलो बिक रही है। वहीं, लोकल बनारस की 100 से 250 रुपये किलो तक की सेवईं की बिक्री ज्यादा हैं। पूर्वांचल के कोने कोने और बिहार तक से लोग यहां खरीदारी को उमड़ रहे हैं।

Dr Shivendra Rahul ने प्रभावशाली संचार के सार्वजनिक जीवन में उपयोगिता पर डाली रौशनी


“रोल आफ कम्यूनिकेशन स्किल्स फाॅर टीम बिल्डिंग एण्ड लीडरशिप“ पर व्याख्यान 


Varanasi (dil India live). वसन्त कन्या महाविद्यालय में 29 मार्च को अंग्रेजी विभाग द्वारा एक विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में मुख्य वक्ता ‘डाॅ. शिवेन्द्र राहुल’ ने “रोल आफ कम्यूनिकेशन स्किल्स फाॅर टीम बिल्डिंग एण्ड लीडरशिप“ पर अपना व्याख्यान प्रस्तुत किया। वक्ता ने संचार कौशल के संदर्भ में महत्वपूर्ण बिंदुओं पर प्रकाश डाला तथा प्रभावशाली संचार का आधुनिक युग एवं सार्वजनिक जीवन में उपयोगिता को समझाया। कार्यक्रम का उद्घाटन काॅलेज की प्राचार्या प्रो. रचना श्रीवास्तव ने किया तथा छात्राओं को संचार-कौशल के महत्व से अवगत कराया। अंग्रेजी विभाग की विभागाध्यक्ष प्रो. नीहारिका लाल ने वर्तमान युग में संचार-कौशल की उपयोगिता पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम का संचालन एवं अतिथि का स्वागत डा. सुप्रिया सिंह ने किया। धन्यवाद ज्ञापन डा. मालविका ने किया। कार्यक्रम को सफल बनाने में डा. पूर्णिमा सिंह ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। महाविद्यालय के अन्य शिक्षक-शिक्षिकाओं तथा अंग्रेजी विभाग की छात्राओं की सक्रिय भागीदारी रही।

शनिवार, 29 मार्च 2025

VKM Varanasi main तनाव प्रबंधन पर हुआ विशिष्ट व्याख्यान

काॅग्निटिव बिहेवियर थेरेपी विशेषज्ञ डाॅ. शालू ने तनाव कम करने के बताएं उपाय 

Varanasi (dil India live).  वसंत कन्या महाविद्यालय के मनोविज्ञान विभाग तथा परामर्श एवं निदेशन प्रकोष्ठ के संयुक्त तत्वाधान में काॅलेज स्टूडेंट्स में तनाव के बेहतर प्रबंधन के लिए एक विशिष्ट व्याख्यान का आयोजन किया गया। अतिथि वक्ता के रूप में असिस्टेण्ट प्रोफेसर, स्वामी विवेकानन्द सुभारती विश्वविद्यालय, मेरठ डाॅ. शालू नेहरा उपस्थित थी। डाॅ. नेहरा काॅग्निटिव बिहेवियर थेरेपी की विशेषज्ञ हैं। महाविद्यालय की प्राचार्या प्रो. रचना श्रीवास्तव ने अपने सारगर्भित वक्तव्य में प्रभावशाली तनाव प्रबंधन की आवश्यक्ता पर प्रकाश डाला तथा ऐसे कार्यक्रमों को नियमित रूप से आयोजित करने पर बल दिया।

अपने विशिष्ट उद्बोधन में डाॅ. नेहरा ने स्ट्रेस की अवधारणा पर प्रकाश डाला। वातावरण में उर्पास्थत तनाव के कारणों का विवरण दिया। साथ ही हमारी संज्ञानात्मक प्रक्रियाएँ तनाव को बढ़ाने में कैसे योगदान करती हैं और उसका उचित प्रबंधन कैसे किया जाना चाहिए, इस विषय पर गहन चर्चा की। सत्र के दौरान छात्राओं के साथ क्रियात्मक संवाद पर बल दिया गया।

सत्र का संचालन तथा अतिथियों का स्वागत डाॅ. शुभ्रा सिन्हा ने किया तथा धन्वाद ज्ञापन डाॅ. राम प्रसाद सोनकर ने किया। परामर्श एवं निदेशन प्रकोष्ठ की ओर से इंचार्ज डाॅ. अंशु शुक्ला ने उत्तरीय एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर अतिथि वक्ता का स्वागत किया। मनोविज्ञान विभाग की ओर से डाॅ. अंजूलता सिंह, डाॅ. शशि प्रभा कश्यप तथा परामर्श प्रकोष्ठ की ओर से डाॅ. कल्पना आनन्द, डाॅ. नैरंजना श्रीवास्तव उपस्थित थी। महाविद्यालय की वरिष्ठ प्रोफेसर डाॅ0 इन्दू उपाध्याय ने प्रतिभगियों का उत्साहवर्धन किया।

VKM Varanasi पहुंचे निर्देशक अभिषेक शर्मा व ऑस्कर नामांकित श्रद्धा सिंह

स्टूडेंट्स एडवाइजरी समिति ने किया इंटरैक्टिव सेशन का आयोजन

फ़िल्म निर्माण एवं थिएटर जैसी विधा से छात्राएं हुई रूबरू 

Varanasi (dil India live). वसंत कन्या महाविद्यालय में ख्यातिलब्ध निर्देशक अभिषेक शर्मा और ऑस्कर नामांकित श्रद्धा सिंह के साथ एक इंटरैक्टिव सेशन आयोजित किया गया।स्टूडेंट्स एडवाइजरी समिति के सौजन्य से आयोजित इस कार्यक्रम की रूपरेखा डॉ राजेश श्रीवास्तव (वेस इंडिया) एवं डॉ अंशु शुक्ला, एसोसिएट प्रोफेसर के द्वारा बनायी गई जिसका उद्देश्य महाविद्यालय की छात्राओ को उनके अकादमिक क्रियाविधियों से अलग फ़िल्म निर्माण एवं थिएटर जैसी रचनात्मक विधा से रूबरू करना था। 


प्राचार्या प्रो रचना श्रीवास्तव ने अथितियों का स्वागत करते हुए उनके द्वारा लिखित एवम् निर्देशित  प्रसिद्ध फ़िल्मों तेरे बिन लादेन' (2010), इसके सीक्वल 'तेरे बिन लादेन: डेड ऑर अलाइव' (2016), 'द शौकीन्स' (2014) जैसी कॉमेडी फिल्में और जॉन अब्राहम अभिनीत उनकी फिल्म 'परमाणु: द स्टोरी ऑफ पोखरण' (2018),  अक्षय कुमार अभिनीत 'रामसेतु' (2022)और  सोनम कपूर अभिनीत 'द जोया फैक्टर' (2019 ) का जिक्र करते हुए उनके अद्भुत कार्य के लिए बधाई दी।


अभिषेक शर्मा एक भारतीय फिल्म निर्देशक और लेखक हैं जो हिंदी फिल्मों में अपने काम के लिए जाने जाते हैं, साथ ही राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय, नई दिल्ली (NSD) के एक प्रसिद्ध पूर्व छात्र भी हैं।

श्रद्धा सिंह एक फिल्म निर्माता हैं और पिछले एक दशक से हिंदी फिल्म उद्योग का हिस्सा रही हैं। उन्होंने ‘हाथी मेरे साथी 2’, ‘द जोया फैक्टर’, जाह्नवी कपूर और राजकुमार राव अभिनीत ‘रूही’, सनी कौशल और डायना पेंटी अभिनीत ‘शिद्दत’, अभिषेक बच्चन और यामी गौतम अभिनीत ‘दसवीं’ जैसी फिल्मों में अलग-अलग भूमिकाएँ निभाई हैं। वह मैडॉक फिल्म्स, मुक्ता आर्ट्स, एडलैब्स फिल्म्स आदि के लिए प्रोडक्शन का काम संभाल रही हैं। वह शहर में अपनी लघु फिल्म ‘कथाकार’ के लिए जानी जाती हैं, जिसे 2016 में स्टूडेंट्स एकेडमी अवार्ड्स (ऑस्कर) के लिए नामांकित किया गया था। एक बहुत ही रोचक सत्र में अभिषेक शर्मा ने छात्राओ एवम् अध्यापकों की जिज्ञासाओ को धैर्य से सुना और हर एक प्रश्न का जवाब बेबाकी से दिया। 


डायरेक्टर बनने का क्या विज़न होता है ? फ़िल्मों की रूपरेखा बनाते समय रिसर्च्स की क्या भूमिका होती है ? रिसर्च कैसे होती है? सेंसरशिप क्या होती है ? निर्देशक के रूप में आप इसको कैसे हैंडल करते है ? किसी मूवी को बनाने के लिए प्लॉट या करैक्टर क्या जायदा महत्वपूर्ण होता है ? कहानी का चयन कैसे करते है ? कहानी लिखने की प्रेरणा कैसे मिलती है ? OTT प्लेटफॉर्म पे क्या सेंसर बोर्ड की कमान नहीं होती ? जैसे कई प्रश्नों से सभी ने फ़िल्म जगत की सच्चाई को करीब से जानने का प्रयास किया और दोनों ही कलाकारों ने बड़ी गंभीरता से सबको इसके बारे में अवगत कराया । महाविद्यालय के शैक्षणिक एवम् गैरशैक्षणिक कर्मचारियों के साथ छात्राओ  ने अति उत्स से प्रतिभाग किया। कार्यक्रम में मचदूतम थिएटर ट्रस्ट के सदस्यों ने भी शिरकत की ।

Alvida Alvida माहे रमज़ान अलविदा...

मस्जिदों में अमन-मिल्लत के साथ अलविदा की नमाज शांतिपूर्ण सम्पन्न





मोहम्मद रिजवान 

Varanasi (dil India live). अलविदा जुमा की नमाज वाराणसी शहर में शांतिपूर्ण संपन्न हो गई। रमजान के आखिरी जुमे पर सभी मस्जिदों में अलविदा नमाज अदा की गई। इस दौरान खुतबा पढ़ा गया, अलविदा अलविदा माहे रमज़ान अलविदा....।

शाही मस्जिद ज्ञानवापी और नगवां सिथत मस्जिद हज़रत याकूब शहीद समेत ग्रामीण व शहरी इलाकों के मस्जिदों में काफी भीड़ रही। नमाज को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए मस्जिदों के आस-पास सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया। इस दौरान पुलिस और प्रशासन ड्रोन कैमरों व सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से लगातार निगरानी रखी। शहर में पुलिस-प्रशासन अलविदा जुमा को लेकर पहले से ही अलर्ट था। चप्पे-चप्पे पर पीएसी तैनात की गई थी। साथ ही ड्रोन कैमरों व सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से लगातार निगरानी की जा रही थी। पुलिस-प्रशासनिक अधिकारियों की देखरेख में अलविदा जुमा की नमाज नमाजियों ने ज्ञानवापी मस्जिद में अदा की गई। नमाज के दौरान कही से भी किसी अप्रिय घटना का समाचार नहीं मिला। इस दौरान लोगों ने वक्फ बिल का विरोध किया। नमाज के दौरान अमन, मिल्लत और देश व कौम की तरक्की की दुआएं मांगी गई।

Hafiz Saifi ने Quran किया मुकम्मल तो ईनाम में मिला खाने kaba का सफर

मस्जिद रंगीले शाह दालमंडी में 27 दिन की तरावीह पूरी 


Varanasi (dil India live). मस्जिद रंगीले शाह दालमंडी में ऐतिहासिक वक्त था जब हाफिज साहब ने तरावीह में एक कुरान मुकम्मल करायी तो मस्जिद कमेटी ने उन्हें इनाम में खाने काबा के सफर (हज-ए-उमराह) का अज़ीम तोहफा भेंट किया। हाफ़िज़ मोहम्मद सैफी कादरी ईद के बाद 6 अप्रैल को उमराह पर रवाना होंगे। उन्होंने कहा कि बहुत खुशी का सबब है कि कमेटी ने मुझे ये अज़ीम तोहफा दिया है। मैं काबा मुल्क में अमन, मिल्लत और सभी की तरक्की की दुआएं करुंगा।

दरअसल मस्जिद रंगीले शाह दालमंडी में 27 दिन की तरावीह आज मुकम्मल हुई। मस्जिद के मुक्तदी ने मिलकार जनाब हाफिज वा कारी मोहम्मद सैफी कादरी को तोहफा में उमराह का पाकेज दिया।

इसमें मोहम्मद अफ़ज़ल, हमजा इलाही, फुरकान इलाही, इरफान इलाही, फैज रजा ने मिलकर तोहफा तारवीह में उमरा का इनाम दिया है। इससे पहले जैसे ही तरावीह मुकम्मल हुई तमाम लोगों ने हाफ़िज़ सैफी साहब को फूल और मालाओं से लाद दिया। उनसे मुसाफा करने, गले मिलने की होड़ सी लग गई। इस दौरान मौजूद लोगों में तबर्रुक तकसीम किया गया।

VKM Varanasi news : साहित्य और सिनेमा में केवल प्रस्तुति और प्रभाव का अंतर

"साहित्य व सिनेमा: अतः संबंध और रूपांतरण" विषय पर प्रो. संजीव का व्याख्यान Varanasi (dil India live). वसन्त कन्या महाविद्यालय कमच्...