शनिवार, 18 सितंबर 2021

पर्यूषण का 9वां दिन: कठिन व्रत, तपस्या संग हुई रत्नत्रय की स्थापना



संस्कारवा झुक कर दूसरों को सम्मान देने में आनंदित होते है: आचार्य विशद सागर


वाराणसी18 सितंबर (दिल इंडिया लाइव)। तन , मन और आत्मा की शुद्धि के लिए भादो माह में जैन धर्मावलंबियों द्वारा मनाए जा रहे पर्युषण महापर्व पर भगवान पार्श्वनाथ अतिशय क्षेत्र मंदिर भेलूपुर में पर्व के नौवें दिन शनिवार को नवे अध्याय “उत्तम आकिंचन  धर्म “ पर प्रवचन व्याख्यान करते हुए दिगंबर जैन आचार्य 108 विशद सागर ने कहा कि-“ किंचित मात्र भी परिग्रह का ना होना ही आकिंचन धर्म कहलाता है अथवा मेरी ज्ञानदर्शन रूपी चैतन्य के अलावा ,  वस्तु यह शरीर , घर , मकान ,बंगला , गाड़ी मेरा कुछ भी नहीं है । अपरिग्रह से ही आत्मा को केंद्रित किया जा सकता है । दिगंबर जैन साधु जीवन पर्यंत आकिंचन धर्म को अंगीकार करते हैं । हमारे जीवन का मूल उद्देश्य ध्येय धन अर्जन करना ही नहीं अपितु धर्म के आधार पर सुख और समृद्धि लाना भी होना चाहिए। धर्म जीवन का परम आधार है । परि का अर्थ है चारों तरफ से और ग्रह का अर्थ है संयम करना अर्थात चारों तरफ  से संचय करना परिग्रह कहलाता है । सिद्धांत: तो हमारा कुछ भी नहीं है , नश्वर वस्तु हमारी हो ही नहीं सकती। शाश्वत वस्तु हमारे पास से जा नहीं सकती । यह आत्मा संकल्प , विकल्प रूप , कर्तव्य भावों से संसार सागर में डूबती रहती है । परिग्रह का परित्याग कर परिणामों को आत्म केंद्रित करना ही आकिंचन धर्म की भावधारा है ।” मुनिश्री ने कहा-“ भौतिक वादी , प्रगतिशील , अर्थ तंत्र की मुख्यता को लेकर चलने वाली दुनिया में यह भावनाएं प्रायः लुप्त हो चुकी हैं ।” 

शनिवार को प्रातः नगर की जैन मंदिरों में भगवंतो का अभिषेक पूजन किया गया । महापर्व के नौवें दिन रत्नत्रय स्थापना नंदीश्वर दीप पूजन , दशलक्षण पूजन , 16 कारण व्रत पूजन , स्वयंभू स्रोत पूजा भी प्रारंभ हुई। 10 लक्षण पर्व के पावन अवसर पर 16 कारण के 32 \16 उपवास, 10 लक्षण व्रत के 10 उपवास , अठाई व्रत के आठ उपवास , रत्नत्रय के तीन उपवास, एकासना एवं किसी भी प्रकार से त्याग -तपस्या-साधना कर तप की राह पर चलने वाले सभी धर्म प्रेमी तपस्वीयो के उत्कृष्ट साधना की जैन समाज द्वारा अनुमोदना की गई । सभी के जीवन को एक नई दिशा मिले ऐसी मंगल कामना की गई। 

सायंकाल जिनेंद्र भगवान की आरती , शास्त्र पूजन , भजन इत्यादि कार्यक्रम किए गए। आयोजन में प्रमुख रूप से दीपक जैन अध्यक्ष,  राजेश जैन उपाध्यक्ष, अरूण जैन प्रधानमंत्री, तरुण जैन समाज मंत्री, राजीव जैन, कमल बागड़ा,  विनोद जैन ,संजय जैन, आर.सी. जैन उपस्थित थे।


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