रविवार, 24 मई 2026

UP K Varanasi Main Ghazi Miya की फिर लौटी बारात

गाज़ी मियां का लगा मेला, उमड़ा दोनों वर्ग का हुजूम 

सुल्तान क्लब ने लगाया चिकित्सा शिविर 


Varanasi (dil India live)। बड़ी बाजार स्थित हज़रत सैयद सालार मसूद (गाजी मियां) की दरगाह पर शनिवार को शुरू हुआ मेला इतवार अपने शबाब पर पहुंच गया।मेले में लोगों का हुजूम उमड़ा हुआ था। इस दौरान सुल्तान क्लब के मेम्बर्स लोगों की खिदमत में जुटे दिखाई दिए। लोगों का हुजूम देर रात तक अस्थाई दुकानों पर खरीदारी करने जुटा हुआ था।

उधर देर रात सनाउल्लाह के मकान से बारात निकली जो विभिन्न रास्तों से होकर सलारपुर बड़ी बाजार पहुंची। दरगाह में बारात आते ही लोगों ने अंदर से दरवाजा बंद कर लिया। शादी की रस्म शुरू हुई थी कि किसी बात को लेकर औरतों से बारतियों की बहस हो गई तभी पास में रखा हुआ मटका टूट गया और बात बढ़ गई। लोगों ने बीच बचाव किया, समझाया मगर बाराती नहीं माने तेज हवाएं चलने लगी, शादी टूट गई, बारात वापस लौट गयी।



बारात में हिंदू और मुस्लिम एकता की मिसाल देखने को मिली।

इस मौके पर लगे मेले में पूर्वांचल भर से हजारों अकीदतमंद शामिल हुए। सदर हाजी सेराजुददीन व गद्दीनशीं हाजी एजाजुद्दीन हाशमी कमेटी के लोगों के साथ व्यवस्था संभाले हुए थे। हाजी एजाजुद्दीन हाशमी ने बताया कि मेले की मान्यता है कि जिस किसी भी जायरीन की मुराद पूरी होती है, वो इस मेले में आकर चादर, मलीदा वगैरह चढ़ाते हैं। मेले में पूरे पूर्वांचल भर से लोग आते हैं। समाचार लिखे जाने तक गाजी मियां के दर पर दोनों मज़हब का जमावड़ा था।




Bharat Vigyan Yatra का आशा केंद्र वाराणसी में हुआ भव्य स्वागत

वैज्ञानिक दृष्टिकोण बढाने के उद्देश्य के निकली भारत विज्ञान यात्रा

विज्ञान के विभिन्न प्रयोगों का किया गया प्रस्तुतिकरण

dil india live (Varanasi). गोरखपुर से वाराणसी पहुंची भारत विज्ञान यात्रा के सदस्यों का भंदहा कला स्थित आशा ट्रस्ट परिसर में पहुचने पर भव्य स्वाग्य किया गया । इस यात्रा में गोरखपुर के विभिन इंटर कालेजों के विज्ञान विषय के प्राध्यापक शामिल हैं जिनका उद्देश्य बच्चो को विज्ञान के छोटे प्रयोगों को आसानी से समझाना है।  इस अवसर पर अभिनंदन करते हुए आशा ट्रस्ट के समन्वयक वल्लभाचार्य पाण्डेय ने कहा कि बच्चों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण और तर्कशक्ति को विकसित करने की बहुत आवश्यकता है ऐसे में इस तरह के जागरूकता अभियानों का महत्व है।


 

यात्रा के संयोजक एस टी अली ने बताया कि 'भारत विज्ञान यात्रा' एक प्रमुख शैक्षणिक व प्रेरणादायक अभियान है। इसका मुख्य उद्देश्य ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के छात्रों को विज्ञान, प्रौद्योगिकी और अनुसंधान के प्रति जागरूक करना है, ताकि 2047 तक 'विकसित भारत' के निर्माण में युवा प्रतिभाओं का योगदान सुनिश्चित किया जा सके।


  

यात्रा दल में शामिल सदस्यों द्वारा विज्ञान विशेषकर रसायन के विभिन्न प्रयोगों का प्रस्तुतिकरण करके उसके महत्व को विस्तार से समझाया गया।   

इनकी रही खास मौजूदगी 
यात्रा दल में आयुष शर्मा, सत्यम यादव, दिवाकर, खुश्बुद्दीन भी शामिल रहे, कार्यक्रम संयोजन में सौरभ चन्द्र, अवनीश पाण्डेय, अमित कुमार, दीन दयाल सिंह, प्रदीप सिंह, वैभव पाण्डेय, सनी, ब्रजेश कुमार, रमेश प्रसाद आदि की प्रमुख भूमिका रही।


पुण्यतिथि 24 मई: मजरूह सुल्तानपुरी: बगावती तेवर और मज़लूमों का मसीहा

मैं अकेला ही चला था जानिब ए मंज़िल मगर, 

लोग साथ आते गए और कारवां बनता गया।


dil india live (Varanasi). साझी संस्कृति, धर्मनिरपेक्षता के प्रतीक और अपनी धुन के पक्के,अड़चनों के सामने चट्टान की तरह अडिग इस महान सपूत की गोद में खेल कर बड़े होने का हमें गौरव प्राप्त है। ये वही मजरूह है जिन्होंने बालासाहब ठाकरे के हाथों से फिल्मी दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण अवार्ड लेने से यह कहते हुए इनकार कर दिया था कि जिन फिरकापरस्त ताकतों का हमने जीवन भर विरोध किया उनके हाथ से सम्मानित होना हमें कतई गवारा नहीं,ये विरोध उन्होंने उस वक़्त जताया जब ठाकरे अपने जीवन के सबसे ऊंचे पायदान पर खड़े थे।

मजरूह का मिजाज देखिये

रोक सकता हमें ज़िंदान ए बला क्या मजरूह,
हम तो आवाज़ है दीवार से छन जाते हैं।

मजरूह और हमारे वालिद सागर सुल्तानपुरी बेहतरीन दोस्त थे।मेरे वालिद गांधियन आंदोलन की उपज थे तो मजरूह प्रगतिशीलता के प्रतीक और प्रतिबद्ध कम्युनिस्ट आंदोलन की अग्रिम पंक्ति के सिपाही,पर दोनों के विचारों की भिन्नता कभी आड़े हाथों नही आयी और दोनों का घर एक दूसरे का आशियाना बना रहा।एक विशेष बात जो मैंने नोट की थी कि मजरूह ने कभी भी गाँधीजी की आलोचना नही की।हां अलबत्ता वो नेहरू के नाम पर जरूर तैश में आ जाते थे पर भाषा का संयम बना रहता।बाद में मेरे वालिद साहब ने बताया था कि मजरूह वो शख्स है जो मजदूरों के हक़ के लिए चलने वाली तहरीक से न केवल जुड़े रहे वल्कि अहम किरदार रहे।उन्होंने नेहरू की पालिसी के खिलाफ और मजदूरों के हड़ताल के पक्ष में एक इंक़लाबी कविता पढ़ी और हड़ताल का नेतृत्व किया।नतीजतन उन्हें सरकार के खिलाफ बगावती तेवर अपनाने के जुर्म में गिरफ्तार कर लिया गया और  लगभग दो साल जेल की हवा खानी पड़ी। मजरूह को सरकार ने सलाह दी कि अगर वे माफ़ी मांग लेते हैं, तो उन्हें जेल से आज़ाद कर दिया जाएगा, लेकिन मजरूह सुल्तानपुरी इस बात के लिए राजी नहीं हुए और उन्हें दो वर्ष के लिए जेल भेज दिया गया। नेहरू की ऐसी आलोचना शायद किसी ने की हो----

मन में ज़हर डॉलर के बसा के,
फिरती है भारत की अहिंसा.
खादी की केंचुल को पहनकर,
ये केंचुल लहराने न पाए.
ये भी है हिटलर का चेला,
मार लो साथी जाने न पाए.
कॉमनवेल्थ का दास है नेहरू,
मार लो साथी जाने न पाए.

सत्ता की छाती पर चढ़कर एक शायर ने वह कह दिया था, जो इससे पहले इतनी साफ़ और सपाट आवाज़ में नहीं कहा गया था. यह मज़रूह का वह इंक़लाबी अंदाज़ था, जिससे उन्हें इश्क़ था. वह फिल्मों के लिए लिखे गए गानों को एक शायर की अदाकारी कहते थे और चाहते थे कि उन्हें उनकी ग़ज़लों और ऐसी ही इंक़लाबी शायरी के लिए जाना जाए।

 1986 तक कमोबेश मजरूह साहब अगर जाड़ों में उत्तर प्रदेश आते तो हमारे घर आना उनकी यात्रा का एक अहम पड़ाव होता था और हमें उनका इंतजार।शायद वालिद साहब के वही इकलौते दोस्त थे जो बाल्यावस्था में कुछ रुपये उस वक़्त रोज हम भाइयों को देते थे जिनकी लालच में हम सब उनकी बात माना करते थे। दिन भर घर पर शेर ओ शायरी का माहौल रहता और हमारी वालिदा साहिबा को खाने के नए नए फरमान दिए जाते। मेरी वालिदा साहिबा मजहबी मिज़ाज की थी और कई बार मजरूह साहब की आलोचना पर्दे की आड़ से कर देती कि कुछ इबादत भी कर लिया कीजिये।अल्लाह को क्या मुंह दिखाओगे तो जवाब होता कि भाभी आप अपनी इबादतों का कुछ हिस्सा हमें वक़्फ़ कर दीजियेगा और बस मेरा बेड़ा पार।

"मुझ से कहा जिब्रील ए जुनूँ ने ये भी वही ए इलाही है,
मजहब तो बस मजहब ए दिल है बाकी सब गुमराही है।,"
(24 मई 2000 को वे इस दुनिया से कूच कर गए।)

  •  डॉ. मोहम्मद आरिफ
(लेखक गांधीवादी, शांति कार्यकर्ता व इतिहासकार हैं)

Iran's Supreme Leader के प्रतिनिधि डॉ. अब्दुल हकीम ने Kashi को किया ख़िताब

ज़ुल्म के सामने न झुकना हमने इमाम हुसैन से सीखा- डॉक्टर अब्दुल हकीम इलाही


Mohd Rizwan 

dil india live (Varanasi). मोमिनीने बनारस के तत्वाधान में Iran's Supreme Leader (ईरान के सुप्रीम लीडर) आयतुल्लाह अली ख़ामेनेई की याद में एक मजलिस का आयोजन किया गया। सभा के मुख्य अतिथि ईरान के सुप्रीम लीडर के प्रतिनिधि डॉक्टर अब्दुल हकीम इलाही ने काशी के लोगों को ख़िताब करते हुए कहा कि भारत और ईरान का रिश्ता सदियों पुराना है और उस पर बनारस शहर की मिसाल एक ख़ूबसूरत नगीने की तरह है। अगर समय कम न होता तो मैं घंटों इस खूबसूरत शहर की शान बयान करता। ये एक ऐसा शहर है जिसकी पूरी दुनिया में मिसाल दी जाती है जहां हर धर्म के मानने वाले अपने अपने धार्मिक अनुष्ठान संपन्न करते हैं और सुकून से ज़िंदगी गुज़ारते हैं।


ज़ुल्म के सामने अपना सर नहीं झुकाया

डॉक्टर इलाही ने मजलिस को ख़िताब करते हुए कहा कि आज हम सब एक ऐसे इंसान को याद करने के लिए बैठे हैं जिसने इंसानियत की खिदमत के लिए अपनी जान का नज़राना दे दिया लेकिन ज़ालिम और ज़ुल्म के सामने अपना सर नहीं झुकाया। 

जलसे का आग़ाज़ मौलाना सरताज और क़ारी सदरे आलम ने तिलावते कलामे पाक से किया। मौलाना सैय्यद अक़ील हुसैनी, डॉक्टर शफ़ीक़ हैदर, मौलाना सैय्यद ज़मीरुल हसन ने रहबर की ख़िदमात और उनकी ज़िंदगी पर रौशनी डाला। उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अजय राय ने जलसे को संबोधित करते हुए कहा कि आज दुनिया ने देख लिया के एक 86 साल के बुजुर्ग ने बड़ी बड़ी ताकतों को चारों खाने चित कर दिया। उसने अपनी जान तो दे दी पर अपनी इज़्ज़त का समझौता नहीं किया और पूरे ईरान के सर को ऊंचा कर दिया। हम ऐसे मर्द को नमन करते हैं। 


मुफ़्ती-ए-शहर मौलाना अब्दुल बातिन नोमानी ने फ़ारसी भाषा में अपना शोक संदेश पढ़ कर सुनाया जिसमें उन्होंने शेख अली हजी की मिसाल देते हुए कहा कि हमारा बनारस शहर ऐसा खूबसूरत शहर है कि जब यहां शेख अली हजी आये तो यहीं के होकर रह गए साथ ही उन्होंने रहबर की शहादत पर इज़हारे ग़म किया। जलसे का संचालन मौलाना तौसीफ़ अली ने किया। इस अवसर पर हजारों की संख्या में अकीदतमंद मौजूद थे। प्रोग्राम के आयोजक एमजियो ट्रस्ट की ओर से मुहम्मद मुर्तुज़ा जाफ़री ने डॉक्टर इलाही को स्मृति चिन्ह देकर उनका शुक्रिया अदा किया। 

दरगाहे फ़ात्मान के मुतवल्ली सैय्यद अब्बास रिज़वी शफ़क़ ने जलसे को कामयाब बनाने में अपना भरपूर सहयोग प्रदान किया। इमामे जुमा मौलाना ज़फरुल हुसैनी ने आये हुए सभी लोगों का शुक्रिया अदा किया। आये हुए लोगों का स्वागत मुनाजिर हुसैन मंजू ने किया।

शनिवार, 23 मई 2026

All India Muslim Jamat ने बक़रीद को लेकर जानिए क्या किया ऐलान

सड़क और चौराहों पर नमाज़ पढ़ने व कुर्बानी करने से बचें-मौलाना शाहबुद्दीन रज़वी

कुर्बानी का फोटो और विडियो सोशल मीडिया पर न करें वायरल 

  • Mohd Rizwan 
dil india live (Bareliy). बरेली से बकरीद को लेकर बड़ी और अहम खबर आ रही है यहां आल इंडिया मुस्लिम जमात प्रमुख मौलाना शहाबुद्दीन रज़वी ने देश भर के मुस्लिमों को एडवाइजरी जारी किया है। उन्होंने कहा है कि खुली जगह पर कुर्बानी न करें, घर या स्लॉटर हाउस का कुर्बानी में इस्तेमाल करें। मौलाना शाहबुद्दीन ने सोशल मीडिया पर कुर्बानी के फोटो-वीडियो, पोस्ट न करने की सलाह दी है। 
आल इंडिया मुस्लिम जमात प्रमुख मौलाना शहाबुद्दीन रज़वी ने सड़क और चौराहों पर नमाज़ पढ़ने से बचने की अपील की है, मौलाना ने कहा कि मस्जिद में ही नमाज अदा करें, नमाज़ इस तरह पढ़ें किसी को कोई तकलीफ़ न हो। दूसरे धर्मों की आस्था और भावनाओं का सम्मान करने की उन्होंने अपील किया है। बंगाल और दिल्ली में कुर्बानी विवाद के बीच आये आल इंडिया मुस्लिम जमात के इस महत्वपूर्ण बयान को ख़ासी अहमियत दी जा रही है। मुस्लिम जमात प्रमुख मौलाना शहाबुद्दीन रज़वी ने सड़क की बजाय मस्जिद में ज्यादा भीड़ होने पर एक ही मस्जिद में कई बार जमात कराने की भी सलाह दी है।

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आर इंडिया मुस्लिम जमात प्रमुख मौलाना शहाबुद्दीन रज़वी ने सड़क और चौराहों कुर्बानी न करने व प्रतिबंधित जानवरों की कुर्बानी न करने की भी हिदायत दी है। उन्होंने है भी कहा है कि अगर कुर्बानी या नमाज के वक्त किसी तरह का कहीं कोई विवाद होता है तो शांतिपूर्ण तरीके से मसले का हल निकालें  और अधिकारियों को इसकी तत्काल सूचना दें।

 

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शुक्रवार, 22 मई 2026

Hajj 2026: अय्याम शुरू होने में अब गिनती के रह गए दिन

पूर्वांचल की मस्जिदों में इसरा ने कराया हज जायरीन के लिए दुआएं 

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dil india live (Varanasi). हज का अय्याम शुरू होने में अब गिनती के दिन रह गए है। इसे देखते हुए हज के लिए सक्रिय रहने वाली संस्था इसरा (ISSRA) वाराणसी द्वारा इज्तेमाई दुआख्वानी का प्रोग्राम 22. 05.2026 जुमा को वाराणसी सहित पूर्वांचल के विभिन्न जिलों में किया गया। 

वाराणसी में इज्तेमाई दुआख्वानी का मुख्य केन्द्र मुगलिया शाही जामा मस्जिद बादशाह बाग में सारी दुनिया से मक्क-ए-मुकर्रमा पहुंचे हुए हज जायरीन की सेहत व हज बखैरियत मुकम्मल होने और मुल्क में अमनों अमान खुशहाली के लिए इज्तेमाई दुआख्वानी की गई। मौलाना हसीन अहमद हबीबी की सदारत व इसरा के जनरल सेक्रेटरी हाजी फारुख खां के संयोजन में बाद नमाज जुमा यह पूर्व घोषित कार्यक्रम सम्पन्न हुआ। ऐसे ही अपनी अपनी मस्जिदों में पेश इमामों ने पूर्वांचल के जिलों में एक साथ सारी दुनिया से पहुंचे हुए हज जायरीन की सेहत बखैरियत हज मुकम्मल होने व कुबूल होने एवं अपने मुल्क सकुशल वापसी की इज्तेमाई दुआ की गई। साथ ही साथ अपने मुल्क में अमनो-अमान व खुशहाली के लिए भी इज्तेमाई दुआ अल्लाह तआला की वरगाह में हाथ उठाकर की गई। अल्लाह तआला से खुसुसी तौर से दुआ की गई कि मुल्क में अमनो-अमान, आपसी भाईचारे को बरकरार रखते हुए पूरी सादगी के साथ सारे त्योहार सकुशल सम्पन्न हो ताकि गंगा-जमुनी तहजीब के लिए मशहूर शहर बनारस की अपनी खासियत बरकरार रहे और अल्लाह तआला हम सबकों को ऐसी सद्बुद्धि दें कि हम अपने-अपने कर्तव्यों को समझते हुए प्रशासन का पूर्ण सहयोग दें। जिससे बनारस सहित पूरे उ.प्र. व देश में अमनो अमान व खुशहाली कायम रहे। इन जिलों में इज्तेमाई दुआ के इस प्रोग्राम को कामयाब बनाने के लिए हर जिले में इसरा (ISSRA) ने अपने प्रतिनिधियों को नियुक्त किया था। जिन्होंने इस दुआ के प्रोग्राम को काययाब बनाने में अपना प्रशंसनीय सहयोग प्रदान कर सफल बनाया। उनमें क्रमश बनारस में हाजी सुल्तान, अलहम अंसारी, मो. शाहरूख इम्तियाज अहमद, हाजी नौशाद, मो. फिरोज, मुख्तार अहमद, सेराज, तथा अलहन, जौनपुर से डॉ. शकील, फैजान खलील, गाजीपुर से मकसूद अंसारी, हाजी नसीम, इमरान अनवार अहमद, बलिया में डॉ. बदरेआलम, डा. मो. अरशद असारी, मऊ से डॉ. सरफराज, सलीम अहमद, चंदौली से मो. शाहीद, मो. नफीस, पप्पू, सोनभद्र से हाजी रिजवान, नफीस, महताब आलम व हाजी ताहिर भदोही से इजहार खान बाबू, गोरखपुर से सलाउ‌द्दीन, मो. नदीम, पप्पू, मो. नदीम, इलाहाबाद से मोहम्मद अजहरूद्दीन व महफूज सिद्दीकी, प्रतापगढ़ से महमूद खान, कौशाम्बी में दाउद अहमद, मिर्जापुर में गुलाम रब्बानी, कुशीनगर में हाजी लियाकत अली, सिद्धार्थनगर में मोहम्मद अली, महराजगंज में अहमद हुसैन आदि शामिल थे। 

मुख्य मस्जिदें जहां हुई दुआख्वानी

मस्जिद दायम खां पक्की बाजार के पेश इमाम मौलाना नसीर, मस्जिद हाता उल्फत बीबी के पेश इमाम मौलाना इल्यास कादरी, गफूरी मस्जिद कचहरी के पेश इमाम हाफिज इरफान, मस्जिद लाटशाही बाबा के पेश हाफिज हबीबुर्रहमान, मुगलिया शाही मस्जिद बादशाह बाग के पेश इमाम मौलाना हसीन हबीबी, जहांगीरी मस्जिद हरहुआ बाजार के पेश इमाम हाफिज गुलाम रसूल, नूरी मस्जिद नरिया वाराणसी, तारा मस्जिद कुड़ी मौलाना नुरुददीन, जामा मजिस्द कूड़ी बाजार मौलाना जलील, बड़ी जामा मस्जिद के पेश इमाम मौलाना जियाउल हक, ईदगाह चोलापुर के पेश इमाम हाफिज जमालुद्दीन, मस्जिद मीरा शाह बाबा हबीबपुरा, चेतगंज के पेश इमाम मौलाना मुहम्मद नईम, मस्जिद काले खां के पेश इमाम मौलाना हाजी अब्दुल हादी खां, मस्जिद लाल सहतूत औरंगाबाद के पेश इमाम हाजी अश्फाक, छोटी मस्जिद पानी टंकी के पेश इमाम मौलाना निजामुद्दीन, जुमा मस्जिद सदर बाजार के पेश इमाम रूखसार अहमद, जामा मस्जिद राजा बाजार के पेश इमाम मौलाना मजहरूल हक, जामा मस्जिद खाजापुरा गड़ही के पेश इमाम हाजी मौलाना युनूस, मस्जिद आशिक माशूक सिगरा के पेश इमाम मौलाना कमालुद्दीन, जामा मस्जिद काश्मीरीगज खोजवा के पेश इमाम मौलाना मुहम्मद वाहिद रजा, मस्जिद जलालीपुरा के पेश इमाम मौलाना मुहम्मद उमर, बड़ी मस्जिद छत्ता तले के पेश इमाम मौलाना कारी साजिद, मस्जिद पिपलानी कटरा के पेश इमाम मौलाना इस्लामुद्दीन।

धानापुर चन्दौली के जुमा मस्जिद के पेश इमाम हाफिज इलियास शम्श, जामा मस्जिद चकिया चंदौली के पेश इमाम, बडी जामा मस्जिद बड़गवां चंदौली के पेश इमाम हाफिज मकबूल, जुमा मस्जिद सतपोखरी दुलहीपुर के पेश इमाम जैनुल आब्दीन, जामा मस्जिद चहनियों कारी ऐनुल हक, जुमा मस्जिद बडागाव के पेश इमाम हाजी सेराजुद्दीन, नगरा बलिया मदीना मस्जिद के पेश इमाम मौलाना नसीम, बडी मस्जिद गुदड़ी बाजार बलिया के पेश इमाम मौलाना अजहर, मस्जिद विशुनीपुर के पेश इमाम कारी नौशाद अहमद, बड़ी मस्जिद उमरगंज के पेश इमाम मौलाना आजम, जामा मस्जिद बेल्थरा रोड के पेश इमाम मौलाना मंजूर, मस्जिद कामिल शाह रहमतुल्ला अलैह के पेश इमाम वलिदपुर, मऊ में शाही मस्जिद कोपागंज के पेश इमाम मौलाना मोहम्मद नजीर शाह, जौनपुर में शाही बड़ी मस्जिद के पेश इमाम मुफ्ती मौलाना फैसल, जामा मस्जिद बदरूल इस्लाम शाहगंज जौनपुर के पेश इमाम मौलाना हमजा, जामा मस्जिद मोहम्मदाबाद आजमगढ़ के पेश इमाम हाफिज शाहजहां, जुमा मस्जिद महराजगंज मौलाना मोइनुद्दीन, अस्करगंज, गोखपुर के पेश इमाम मौलाना अनीस, जामा मस्जिद कुशीनगर के पेश इमाम हाजी लियाकत अली, मस्जिद स्टेशन रोड प्रतापगढ़ के पेश इमाम मौलाना रियाजुल हसन कासमी, जुमा मस्जिद ओबरा के पेश इमाम कारी मोहम्मद असलम, भदोही, जामा मस्जिद कल्लन शाह तकिया के पेश इमाम हाफिज अच्छे, गाजीपुर जामा मस्जिद आदि पूर्वांचल के सभी मस्जिदों में एक साथ पूरे मुल्क में खुशहाली एवं अमनो अमान की दुआख्वानी हुई।

 दुआख्वानी के मौके पर अलहम अंसारी, मो इम्तियाज, मो. शाहरूख, हाजी नौशाद, सेराज अहमद, मुख्तार मोहममद फिरोज, सेराज अहमद आजाद, मौलाना शाबान, मोहम्मद असलम, मोहम्मद युसूफ, रेयाज, निजाम, हाजी शमसुद्दीन, हाजी करीमुद्दीन, मो. शफीक, राजू, हाजी शुऐब, तथा इसरा के पदाधिकारीगण एवं सदस्यगण मौजूद थे।

गुरुवार, 21 मई 2026

कृषि तकनीक चौपाल : 32 विक्रेताओं ने 11 स्टार्टअप कंपनियों से किया सीधा संवाद

स्टार्टअप कंपनियों का लाभ सीधे किसानों तक जाएगा-सलमान हैदर

कृषि उत्पाद उद्यमी एवं निर्माताओं का प्रथम समागम सम्पन्न


dil india live (Barabanki)। देवा रोड, बाराबंकी स्थित ग्रीनलैब्स पर आज प्रथम कृषि तकनीक चौपाल सफलतापूर्वक सम्पन्न हुई। मॉसफैम प्राइवेट लिमिटेड और सोशल अल्फा के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस चौपाल में 32 कृषि इनपुट विक्रेताओं ने 11 कृषितकनीक स्टार्टअप कंपनियों के प्रतिनिधियों से सीधा संवाद किया।

ग्रीनलैब्स मॉसफैम प्राइवेट लिमिटेड द्वारा संचालित एक भौतिक-डिजिटल कृषि नवाचार केंद्र है जो बाराबंकी में करीब चार हजार वर्ग फीट के सौर ऊर्जा संचालित परिसर में स्थापित किया गया है। यह केंद्र किसानों तक आधुनिक कृषि तकनीक की अंतिम दूरी तक पहुंच सुनिश्चित करता है, जहां तीन दर्जन से अधिक प्रजातियों के वृक्ष, लघु मियावाकी वन, मत्स्य तालाब एवं जीवंत प्रदर्शन खेत हैं। सोशल अल्फा भारत का अग्रणी विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी उद्यम त्वरक है जो कृषि, स्वास्थ्य, ऊर्जा और पर्यावरण क्षेत्र में सामाजिक प्रभाव वाले स्टार्टअप को पालन-पोषण एवं समर्थन देता है।


कृषि तकनीक चौपाल एक जमीनी मंच है जहां कृषि इनपुट फुटकर विक्रेता, किसान प्रतिनिधि और कृषि तकनीक कंपनियाँ सीधे खेत पर मिलकर संवाद करती हैं ताकि नवीन तकनीक प्रदर्शनी तक सीमित न रहे बल्कि किसान की ज़मीन तक पहुंचे। इस चौपाल में चार श्रेणियों में कुल 11 स्टार्टअप कंपनियां उपस्थित रहीं। कृषि यंत्र, स्टेप अपिफाई, एग्रोश्योर एवं नियॉ (ईवाई टीम) डेयरी,ओकामी एवं डाइएग्रोप्रूटिक, ई एफ पॉलीमर, कैप्सबर, ईकोसाइट एवं अर्काशाइन।विकेन्द्रित नवीकरणीय ऊर्जा न्यू लीफ डायनेमिक्स एवं रुद्र सोलर शामिल हैं।




मॉसफैम के सह-संस्थापक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी सलमान हैदर ने बताया इस चौपाल में 5 स्टार्टअप कंपनियों को स्थानीय स्तर पर इनपुट फुटकर साझेदार मिले हैं। अब ये विक्रेता अपने नेटवर्क के किसानों तक इन कंपनियों की तकनीक एवं उत्पादों की जानकारी पहुँचाएंगे , जिससे स्टार्टअप कंपनियों का लाभ सीधे किसानों तक जाएगा।

कार्यक्रम में सोशल अल्फा की ओर से कार्यक्रम प्रबंधक प्रशांत कनौजिया एवं अली सज्जाद, शिवम दीक्षित आदि उपस्थित रहे। मॉसफैम की ओर से सह-संस्थापक हलीम अंसारी, अपूर्वा सिंह एवं रियाज़ भट्ट ने प्रतिनिधित्व किया। रियाज़ भट्ट ने उपस्थित समस्त खाद-बीज विक्रेताओं का हार्दिक धन्यवाद ज्ञापित किया।