शुक्रवार, 27 फ़रवरी 2026

UP k Varanasi Main अदा की गई रमज़ान के दूसरे जुमे की नमाज

या रब हम सबको पांचों वक्त का नमाज़ी बना दे...आमीन

जुमे की नमाज में अमन और मिल्लत की गूंजीं सदाएं






Mohd Rizwan 

Varanasi (dil India live). मुक़द्दस रमजान के दूसरे जुमे को मस्जिदों में नमाजियों का जहां हुजूम उमड़ा वहीं मस्जिदों, इबादतगाहों का माहौल नूरानी नज़र आया। इस दौरान लोगों ने रब से दुआएं मांगी। इस्लाम में जुमे के दिन को छोटी ईद के तौर पर मनाया जाता है और रमजान के महीने में इसका महत्व और भी बढ़ जाता है। इस दिन मस्जिदों में विशेष जुमे की नमाज अदा की गई और लोगों ने एक-दूसरे से मुसाफा कर जुमे की मुबारकबाद दी। 

मस्जिद याकूब शहीद नगवां में हाफ़िज़ मोहम्मद ताहिर, मस्जिद लाटशाही में हाफ़िज़ हबीबुर्रहमान, मस्जिद उल्फत बीबी में हाफ़िज़ साकिब रज़वी, मस्जिद ढ़ाई कंगूरा में हाफ़िज़ नसीम अहमद बशीरी, मस्जिद दायम खां में हाफ़िज़ नसीर, मस्जिद शक्कर तालाब में मौलाना मोइनुद्दीन अहमद फारूकी प्यारे मियां, मस्जिद लंगड़े हाफ़िज़ में मौलाना वलीउल्ला आरिफ, मुगलिया मस्जिद बादशाह बाग में मौलाना हसीन अहमद हबीबी ने नमाज़ के पहले तकरीर कर रमज़ान की जहां फजीलत बयां किया वहीं नमाजे जुमा के बाद दुआ में उन्होंने रब से मुल्क में अमन मिल्लत और रोज़गार में तरक्की के साथ ही नमाजियों को पांचों वक्त का पक्का सच्चा नमाज़ी बनाएं जाने की रब से दुआएं मांगी। 

ऐसे ही मस्जिद अलकुरैश, मस्जिद ताराशाह, कपड़ा मार्केट, मस्जिद लाटसरैया, शिया जामा मस्जिद दारानगर, मस्जिद लंगडे हाफिज, मस्जिद ज्ञानवापी, मस्जिद उल्फत बीबी विद्यापीठ, मस्जिद कम्मू खां, जामा मस्जिद नदेसर, मस्जिद हबीबीया गौरीगंज, मस्जिद नयी बस्ती गौरीगंज, खजूर वाली, मस्जिद बड़ी काजी सादुल्लाह पुरा, मस्जिद कमनगढहा, मस्जिद रंगीले शाह, मस्जिद नयी बस्ती, मस्जिद खाकी शाह बाबा, मस्जिद बुलाकी शहीद, मस्जिद बाबा फरीद, मस्जिद सुग्गा गढही, मस्जिद अस्तबल शिवाला, मस्जिद जलालीपुरा, मस्जिद लाट सरैया, मस्जिद भोले शाह दीवान, मस्जिद वरुणा पुल आदि मस्जिदों सैकड़ों मस्जिदों में जुमे की नमाज अकीदत के साथ अदा की गई। नमाज के बाद दुआएं और मुसाफा किया गया।

Ramadan ka Paigham 9: तीन अशरों में बटा है "माहे रमज़ान"

रहमत का दस रोज़ा पूरा होते ही शुरू होगा मगफिरत का अशरा




dil india live (Varanasi)। मुकद्दस रमज़ान केवल कोई पर्व या त्योहार का महज नाम ही नहीं है बल्कि रमज़ान नाम है उस इस्लामिक सिस्टम और सिद्धांत का जिस पर अमल करके एक रोजेदार अपनी जिंदगी संवारता है। यही वजह है कि रमज़ान को दस दस दिन के तीन हिस्सों में बांटा गया है। जिसे अशरा कहते हैं। 

पहला अशरा रहमत का, दूसरा आशरा मगफिरत और तीसरा अशरा जहन्नुम से आजादी का होता है। "अशरा" दस दिन को कहते हैं। कहा जाता है कि रहमत के पहले दस दिन रोज़ादारों पर रब अपनी रहमत बरसाता है। फिर दस दिन मगफिरत का होता है जिसमें अल्लाह रोज़ेदारों की गुनाह माफ कर देता है यानी मगफिरत फरमाता है। इसके बाद रमज़ान के आखिरी अशरे में अल्लाह रोज़ेदारों को जहन्नुम से आज़ाद कर देता है।जो रमजान का पूरा रोजा रखेगा, तीसो दिन रोजा रखने में कामयाब रहेगा। उसे जहन्नम की आग नहीं खा पाएगी और उसे जन्नत में दाखिल किया जाएगा। रोजेदारों के लिए जन्नत में एक खास दरवाजा बाबे रययान होगा, जिसमें से केवल रोजेदार ही जन्नत में दाखिल होंगे। रमजान के तीन अशरो को जिसने भी कामयाबी से पूरा किया, जैसा कि रब चाहता है तो वो रोज़ेदार जन्नत का हकदार होगा। रब उसे जहन्नुम से आजाद कर देगा।

कल शुरू होगा मगफिरत का अशरा 

मुक़द्दस रमज़ान का नौ रोज़ा आज मुकम्मल हो गया। कल रमज़ान की रहमत का अशरा पूरा हो जाएगा। रमजान का रहमत का सफर पूरा होने के साथ ही इस माहे मुबारक का दूसरा अशरा मगफिरत शनिवार को शुरू हो जाएगा।

 

        एस.एम खुर्शीद 

(सदर इस्लामिक फाउंडेशन आफ इंडिया)

 

गुरुवार, 26 फ़रवरी 2026

DAV PG College Varanasi के विरासत फोरम में हुई आज की राजनीति पर चर्चा

विद्यार्थियों को समसामयिक विषयों पर संतुलित दृष्टिकोण अपनाने की दी प्रेरणा




dil india live (Varanasi). डीएवी पीजी कॉलेज के इतिहास विभाग के अकादमिक फोरम विरासत द्वारा गुरुवार को आज की राजनीति और भविष्य का भारत विषय पर वाद-विवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों में समसामयिक राजनीतिक परिदृश्य के प्रति जागरूकता, तार्किक चिंतन एवं लोकतांत्रिक संवाद की भावना को प्रोत्साहित करना था। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए विभागाध्यक्ष प्रो. विनोद कुमार चौधरी ने लोकतांत्रिक मूल्यों की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए विद्यार्थियों को समसामयिक विषयों पर गंभीर अध्ययन एवं संतुलित दृष्टिकोण अपनाने की प्रेरणा दी।

वाद-विवाद में विद्यार्थियों ने पक्ष और विपक्ष दोनों दृष्टिकोणों से अपने विचार प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किए। वर्तमान राजनीति की चुनौतियाँ, युवाओं की भूमिका, लोकतांत्रिक आदर्शों की प्रासंगिकता तथा भविष्य के भारत की दिशा जैसे मुद्दों पर सारगर्भित तर्क रखे गए।

इनकी रही खास मौजूदगी 

कार्यक्रम का संयोजन विरासत फोरम के समन्वयक डॉ. शोभनाथ पाठक, संचालन डॉ. प्रतिभा मिश्र एवं धन्यवाद ज्ञापन डॉ. शिवनारायण ने दिया। इस अवसर पर मुख्य रूप से डॉ.संजय कुमार सिंह, डॉ. लक्ष्मीकांत सिंह,  डॉ. शशिकांत यादवा उपस्थित रहे। छात्र प्रिंस पाण्डेय, विशाल महतो, दीपक यादव, आंचल आदि ने विचार रखे।

Ramadan ka Paigham 8 : इबादत की कसरत का महीना है रमज़ानुल मुबारक

रहमत, बरकत संग मगफिरत का सबब बनकर आता है रमज़ान 





Varanasi (dil india live)। रमज़ान की नेमतों और रहमतों का क्या कहना। रमज़ान का रोज़ा रोज़ेदारों के लिए रहमत व बरकत का सबब बनकर आता है। इसमें तमाम परेशानियां और दुश्वारियां बंदे की दूर हो जाती हैं। नेकी का रास्ता ऐसे खुला रहता है कि फर्ज़ और सुन्नत के अलावा नफ्ल इबादत और मुस्तहब इबादतों की भी बंदा कसरत करता है। रोज़ा कितनी तरह का होता है इसे कम ही लोग जानते हैं। तो रमज़ान के रोज़े को तीन तरह से समझे। मसलन पहला, आम आदमी का रोज़ा: जो खाने पीने और जीमाह से रोकता है। दूसरा खास लोगों का रोज़ा: इसमें खाने पीने और जीमाह के अलावा अज़ा को गुनाहों से रोज़ेदार बचाकर रखता है, मसलन हाथ, पैर, कान, आंख वगैरह से जो गुनाह हो सकते हैं, उनसे बचकर रोज़ेदार रहता है। तीसरा रोज़ा खवासुल ख्वास का होता है जिसे खास में से खास भी कहते हैं। वो रोज़े के दिन जिक्र किये हुए उमूर पर कारबन भी रहते हैं और हकीकतन दुनिया से अपने आपको बिलकुल जुदा करके सिर्फ और सिर्फ रब की ओर मुतवज्जाह रखते हैं। रमज़ान की यह भी खसियत है कि जब दूसरा अशरा पूरा होने वाला रहता है तो, 20 रमज़ान से ईद का चांद होने तक मोमिनीन मस्जिद में खुद को अल्लाह के लिए वक्फ करते है। जिसका नाम एतेकाफ है। एतेकाफ सुन्नते कैफाया है यानि मुहल्ले का कोई एक भी बैठ गया तो पूरा मुहल्ला बरी अगर किसी ने नहीं रखा तो पूरा मुहल्ला गुनाहगार। पूरे मोहल्ले पर अज़ाब नाज़िल होगा। रमज़ान में एतेकाफ रखना जरूरी। एतेकाफ नबी की सुन्नतों में से एक है। एतेकाफ का लफ्ज़ी मायने, अल्लाह की इबादत के लिए वक्फ कर देना। एतेकाफ अल्लाह रब्बुल इज्ज़त को राज़ी करने के लिए रोज़ेदार बैठते है। एतेकाफ सुन्नते रसूल है। हदीस व कुरान में है कि हजरत मोहम्मद रसूल (स.) ने कहा कि एतेकाफ खुदा की इबादत में रोज़ेदार को मुन्हमिक कर देता है और बंदा तमाम दुनियावी ख्वाहिशात से किनारा कर बस अल्लाह और उसकी इबादतों में मशगूल रहता है। इसलिए जिन्दगी में एक बार सभी को एतेकाफ पर बैठना चाहिए। या अल्लाह ते अपने हबीब के सदके में हम सबको रोज़ा रखने और दीगर इबादतों को पूरा करने की तौफीक दे।..आमीन।

         हाजी फारुख खां  
(जनरल सेक्रेटरी "इसरा" अर्दली बाजार वाराणसी)

बुधवार, 25 फ़रवरी 2026

Handicraft Model प्रदर्शनी में दिखा छात्राओं का हुनर

माॅडल्स ने सिद्ध किया काशी की बच्चियों में है कला के बेशुमार गुण

अहमदाबाद प्लेन क्रैश मॉडल रहा आर्कषण का केंद्र, तो लंदन का हाइड्रोलिक ब्रिज भी सराहा गया 


dil india live (Varanasi). वाराणसी के बुनकर बाहुल्य बड़ी बाजार स्थित द मॉडर्न पब्लिक स्कूल के परिसर में हैंडीक्राफ्ट मॉडल प्रदर्शनी का आयोजन हुआ। जिसमें अलग अलग Classes की Students ने अपने भव्य मॉडल प्रस्तुत कर लोगों को मंत्रमुग्ध कर ये सोचने पर मजबूर कर दिया कि अपनी काशी की बच्चियों में कला के बेशुमार गुण विद्दमान है। मॉडल में अहमदाबाद प्लेन क्रैश मॉडल लोगों का आर्कषण का केंद्र रहा, वहीं दूसरी ओर लंदन हाइड्रोलिक ब्रिज, स्मार्ट सिटी, सोलर सिस्टम, वाटर साइकिल, सेल साइकिल इत्यादि के अलावा अन्य मॉडल्स भी प्रस्तुत किए गए। प्रस्तुतीकरण अदीबा, माहरीन, सायरीन इमरान, एलीना, रजिया, अस्फिया माहिम, मुजीरबा इत्यादि ने किया।




इस अवसर पर बच्चों की सराहना करते हुए डायरेक्टर एम.ए. खान ने कहा कि बच्चों में प्रतिभा बहुत होती है बस इनके टीचर्स का मार्गदर्शन हो तो ये भविष्य में बहुत कुछ कर सकते हैं। इस अवसर पर प्रिंसिपल अब्दुल वफ़ा, जफर अंसारी, अंकित, सोफिया अहमद, रहमतुल्लाह, जुबैदा, तबस्सुम, हंजला इत्यादि के अलावा भारी संख्या में लोग मौजूद थे।

Ramadan ka Paigham 7 : रमज़ान में पड़ोसियों के साथ अच्छा सुलूक का हुक्म

कोई तुमसे झगड़ा करे तो उससे कह दो मैं रोज़े से हूं




dil india live (Varanasi)। मुकद्दस रमज़ान में कहा गया है कि अपने पड़ोसियों के साथ अच्छा सुलूक करो, भले ही वो किसी भी दीन या मज़हब का हो। पड़ोसी अगर भूखा सो गया तो उसके जिम्मेदार तुम खुद होगे। रब कहता हैं कि 11 महीना तो बंदा अपने तरीक़े से गुज़ारता है एक महीना अगर वो मेरे बताए हुए नेकी के रास्ते पर चले तो उसकी तमाम दुश्वारियां दूर हो जाएगी। इस 1 महीने के एवज़ में रोज़ेदार पूरे साल नेकी की राह पर चलेगा।

मुकद्दस रमजान में अगर कोई तुमसे झगड़ा करने पर अमादा हो तो उसे लड़ो मत, बल्कि उससे कह दो मैं रोज़े से हूं। यानी मैं तुमसे लड़ाई झगड़ा नहीं चाहता। रमज़ान मिल्लत की दावत देता है, रमज़ान नेकी की राह दिखाता है। यही वजह है कि रमज़ान में खून-खराबा, लड़ाई झगड़ा सब मना फरमाया गया है। रमज़ान के लिए साफ कहा गया है कि यह महीना अल्लाह का महीना है। इस महीने में रोज़ेदार केवल नेकी, इबादत और मोहब्बत के रास्ते पर चलें। यही वजह है कि रमज़ान आते ही शैतान गिरफ्तार कर लिया जाता है। जन्नत के दरवाज़े खोल दिए जाते हैं और जहन्नुम के दरवाज़े बंद कर दिए जाते हैं। 

इस माहे मुबारक में पांच ऐसी रात आती है जिसे ताक रात या शबे कद्र कहा जाता है। इस रात में इबादत का सवाब रब ने कई साल की इबादत से भी ज्यादा अता करता है। ऐ मेरे पाक परवरदिगार तू अपने हबीब के सदके में हम सबको रमज़ान की नेअमत अता कर और सभी को रोजा रखने की तौफीक दे ताकि सभी की ईद हो जाये..आमीन।

हाजी इमरान अहमद

(राइन गार्डेन, वाराणसी)

मंगलवार, 24 फ़रवरी 2026

DAV PG College में हिन्दी: अध्ययन एवं रोजगार की संभावना विषयक ओरिएन्टेशन प्रोग्राम

हिन्दी मजबूरी का नही, मजबूती का विषय-डॉ. रविशंकर




dil india live (Varanasi). वाराणसी के डीएवी पीजी कॉलेज के हिन्दी विभाग द्वारा मंगलवार को हिन्दी: अध्ययन एवं रोजगार की संभावना विषय पर ओरिएन्टेशन कार्यक्रम आयोजित हुआ। मुख्य वक्ता काशी हिंदू विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग के सहायक आचार्य डॉ. रविशंकर सोनकर ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि हिन्दी सिर्फ एक भाषा नही है बल्कि यह भारतवर्ष की आत्मा है, हिन्दी पढ़ना गर्व की बात होनी चाहिये ना कि इसको लेकर ग्लानि का भाव हो। देश मे 57 फीसदी लोगो में बोली और समझे जानी वाली हिन्दी अब सिर्फ भारत तक सीमित नही है, बल्कि यह वैश्विक हो चली है। उन्होंने कहा कि हिन्दी के प्रति अपने नजरिये और विचारों को व्यापक रखने की आवश्यकता है। हिन्दी मजबूरी का विषय नही बल्कि मजबूती के विषय है। उन्होंने त्रिभाषा पद्धति को ठीक ढंग से अमल में लाने का विचार दिया और अन्य भाषाओं के प्रति पूर्वाग्रह वैचारिकी को त्यागने पर भी बल दिया। 

      महाविद्यालय के कार्यवाहक प्राचार्य प्रो.मिश्रिलाल ने अतिथि का स्मृति चिन्ह एवं अंगवस्त्र प्रदान कर स्वागत किया। स्वागत भाषण विभागाध्यक्ष प्रो.राकेश कुमार राम, संयोजन डॉ. अस्मिता तिवारी, संचालन डॉ. श्वेता मिश्र एवं धन्यवाद ज्ञापन डॉ. नीलम सिंह ने दिया। कार्यक्रम में प्रो.राकेश कुमार द्विवेदी, प्रो. समीर कुमार पाठक, डॉ. संजीव वीर प्रियदर्शी, डॉ. शमशीर अली आदि प्राध्यापक एवं विद्यार्थी शामिल रहे।