शुक्रवार, 6 मार्च 2026

BLW Varanasi Main 55 वां "राष्ट्रीय संरक्षा सप्ताह" की शुरुआत

राष्ट्रीय संरक्षा सप्ताह" के अंतर्गत विभिन्न कार्यक्रमों का हुआ आयोजन




F. Farouqi Babu 

dil india live (Varanasi). बनारस रेल इंजन कारखाना (बरेका) मे महाप्रबंधक आशुतोष पंत के मार्गदर्शन में मनाये जा रहे 55 वें "राष्ट्रीय संरक्षा सप्ताह" के अंतर्गत आज 6 मार्च 2026 को "प्रभात फेरी" सहित विभिन्न प्रकार के कार्यक्रमों का आयोजन किया गया।

मुख्य  संरक्षा अधिकारी राम जन्म चौबे ने इस जन- जागरूकता प्रभात फेरी को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह प्रभात फेरी कुंदन तिराहा से प्रारंभ होकर सूर्य सरोवर, काली मंदिर,   बैंक ऑफ़ बड़ौदा और बरेका कॉलोनी से होते हुए पुनः कुंदन तिराहे पर आकर समाप्त हुई। प्रभात फेरी के दौरान लोगों के हाथों में संरक्षा से प्रेरित विभिन्न प्रकार के नारों से युक्त तख्तियां और बैनर समस्त जनमानस को संरक्षा के प्रति प्रेरित कर रहे थे। इस दौरान संरक्षा से प्रेरित नारों के उद्घोष से संपूर्ण बरेका परिसर गुंजायमान हो उठा। 



एक अन्य कार्यक्रम के अंतर्गत बरेका कर्मशाला के लोको  डिवीजन के कर्मचारियों के बीच संरक्षा जागरूकता के लिए फायर एवं व्यक्तिगत संरक्षा उपकरण का प्रशिक्षण ,संरक्षा शपथ ,संरक्षा प्रश्नोतरी एवं पुरस्कार वितरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया  जिसमे  कर्मचारियों ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया। 

सप्‍ताहव्‍यापी कार्यक्रम के इस कड़ी मे आज कर्मशाला परिसर में कंट्र्क्चुयल कर्मचारियों के बीच भी संरक्षा जागरूकता के लिए फायर एवं व्यक्तिगत संरक्षा उपकरण का प्रशिक्षण एवं संरक्षा शपथ जैसे कार्यक्रमों का आयोजन किया गया जिसमे  कर्मचारियों ने अति उत्साह के साथ  हिस्सा लिया। 

बच्चों में संरक्षा जागरूकता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से बरेका पेंटिंग स्कूल, “कलांजलि” में “उन्नत सुरक्षा के लिए लोगों को संलग्न करे, शिक्षित करें और सशक्त बनाएँ” विषय पर  पेंटिंग प्रतियोगिता का भी आयोजन किया  गया जिसमें बच्चों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। इन विभिन्न कार्यक्रमों का उद्देश्य अधिकारियों, कर्मचारियों  समेत समस्त जनमानस में संरक्षा के प्रति जागरूकता फैलाना था।

 उल्लेखनीय है कि प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी बनारस रेल इंजन कारखाना में बरेका संरक्षा अनुभाग द्वारा दिनांक 04 से 10 मार्च तक 55वें राष्‍ट्रीय संरक्षा सप्‍ताह का आयोजन किया जा रहा है।

इस अवसर पर उप मुख्य संरक्षा अधिकारी अक्षय कांत धुसिया,सहायक कार्मिक अधिकारी एवं सचिव मंडल कमांडर सेंट जॉन्स एम्बुलेंस ब्रिगेड पीयूष मिंज, बरेका  नागरिक सुरक्षा संगठन, सेंट जॉन्स एंबुलेंस ब्रिगेड और भारत स्काउट एंड गाइड के सदस्य, रेलवे सुरक्षा बल के जवान और बड़ी संख्या में कर्मचारी एवं आमजन उपस्थित रहे।

UP K Varanasi Main अमेरिका इस्राएल के ख़िलाफ़ लगाए गए नारे

आयतुल्लाह ख़ामेनेई की शहादत पर शिया जामा मस्जिद दारानगर में मजलिस








Sarfaraz Ahmad 

dil india live (Varanasi). मरकज़ी शिया जामा मस्जिद दारानगर में जुमा की नमाज़ के बाद ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह ख़ामेनेई की याद में जलसे व मजलिस का आयोजन हुआ। जलसे का आग़ाज़ मौलाना सरताज हुसैन ने तिलावते कलाम पाक से किया। मौलाना ज़ायर हसन ईमानी और मौलाना सैय्यद अमीन हैदर हुसैनी ने जलसे को ख़िताब करते हुए कहा कि आयतुल्लाह ख़ामेनेई सिर्फ़ कोई सियासी रहनुमा नहीं थे बल्कि वो पूरी दुनिया में रहने वाले शिया समुदाय के सबसे बड़े धर्मगुरु थे। उन्होंने मौत को ज़िल्लत की ज़िंदगी पर तरजीह दी और ज़ालिमों के ख़िलाफ़ अंतिम समय तक मोर्चे पर डटे रहे। उनकी शहादत की खबर सुनकर हर वो इंसान रोया जो उनसे मुहब्बत रखता था। जलसे की निज़ामत डॉक्टर शफ़ीक़ हैदर ने की। इस दौरान अमेरिका और इस्राएल के ख़िलाफ़ जम कर नारे बाज़ी की गई और भारत सरकार द्वारा विदेश सचिव को ईरान एम्बेसी भेजकर शोक संवेदना व्यक्त करने की प्रशंसा की गई साथ ही सरकार से मुतालेबा किया गया कि जल्द से जल्द अमेरिका और इस्राइल से अपने सारे रिश्ते तोड़ लेना चाहिए क्योंकि ये देश किसी के सगे नहीं है और वक़्त आने पर ये पीठ दिखाने वाले देश हैं। 

आखिर में मजलिस को ख़िताब करते हुए मौलाना सैय्यद अक़ील हुसैनी हुसैनी ने कहा कि ज़ालिम समझ रहा हैं कि अब ईरान की क़यादत करने वाला कोई नहीं बचा और अब हसको मिटा दिया जाएगा और घुटनों पर ले आया जाएगा लेकिन उनको मालूम होना चाहिये कि हम लोग इमाम हुसैन के रास्ते पर चलने वाले लोग हैं। इमाम हुसैन को शहीद करने के बाद यज़ीद भी यही सोच रहा था कि अब इस्लाम मिट गया लेकिन उसको नहीं मालूम कि शहीद का खून जब ज़मीन पर गिरता है तो एक नया इनकेलाब लाता है और हर दिल में ऐसी आग रौशन हो जाती है जिसकी रौशनी कभी मद्धिम नहीं पड़ती। जलसे में मौलाना शौकत अली, सैय्यद मुनाज़िर हुसैन मंजू, मातमदार बनारसी, अतश बनारसी, रिजवान बनारसी समेत बनारस की सभी मातमी अंजुमनों के सदस्य एवं शिया समुदाय के सैकड़ों लोग एकित्रत हुए। इस अवसर पर पुलिस विभाग भी अपने लाव लश्कर के साथ मस्जिद प्रांगण में मुस्तैद दिखा।

Taravih Mukammal: मस्जिद खुलफा-ए-राशिदीन में कुरान मुकम्मल

तरावीह मुकम्मल होते ही हाफ़िज़ साहेब की हुई गुलपोशी 





dil india live (Varanasi)। मस्जिद खुलफा-ए-राशिदीन नयी बस्ती गौरीगंज में तरावीह की नमाज़ जैसे ही मुकम्मल हुई हाफिज़ मोहम्मद आफरीदी (Hafiz Muhammad Afridi) हाफ़िज़ हसनैन मुदस्सिर (Hafiz hasnain Mudassir) का मौजूद तमाम लोगों ने गुलपोशी की। लोगों ने उन्हें फूल-मालाओं से लाद दिया। हाफिज हसनैन मुदस्सिर ने कहा कि अल्लाह के रसूल (स.) ने फरमाया कि इस माहे मुबारक में जन्नत के दरवाजे खोल दिए जाते हैं और जहन्नम के दरवाजे बंद कर दिए जाते हैं। इस महीने में दस दस दिन के तीन अशरे होते हैं। पहला अशरा खत्म हो चुका है और दूसरा अशरा भी खत्म होने में 4 दिन बाकी हैं। यानी रमज़ान का आधा सफर मुकम्मल हो गया है। इस अशरे मगफिरत में रब रोज़ेदारों की दुआएं कुबुल करता है और उनके गुनाहों से तौबा करने पर रब उन्हें माफ कर देता हैं। हाफ़िज़ मोहम्मद आफरीदी ने कहा कि तरावीह में कुरान भले ही मुकम्मल हो गई मगर तरावीह पूरे रमज़ान अदा सभी को करना है।

इस मुकद्दस मौके पर अकीदतमंदों ने मुल्क में अमन चैन की दुआ रब की बारगाह में करते हुए अपनी अपनी जायज तमन्नाओ की तलब रब से किया और देश दुनिया की खैर अल्लाह रब्बुल आलमीन से मांगी। तरावीह मुकम्मल होने के बाद नामाजियों ने एक दूसरे से मुसाफा करके उन्हें मुबारकबाद दी। सभी नमाजियो में बतौर तबर्रुक मिठाई तकसीम की गई।

इस मौके पर इम्तियाज खान, मोहम्मद नसीम, हाजी जहीन अंसारी, मोहम्मद खालिद, अमीन अंसारी, वसीम अंसारी, हाजी रशीद, वहीद, अमीर अहमद, मोहित खान, इमरान खान, सैयद रजा अली, नसीम अंसारी, नायाब इमाम हाफिज परवेज, आदिल खान, सलीम बाबू, परवेज अहमद, सैयद हामिद, मोहम्मद ताहा खान आदि सैकड़ों नमाज़ी मौजूद थे।


Ramadan ka Paigham 16 : यहां जानिए कद्र वाली रात की सच्चाई

हज़ार रातों में अफज़ल है शबेकद्र की एक रात



Varanasi (dil India live)। रमज़ान महीने की इबादतों के क्या कहने। अल्लाह हो अकबर। रब का आफर केवल इसी महीने ज्यादा रहता है वो इसलिए भी की यह महीना अल्लाह का महीना है जिसके शुरू होते ही शैतान गिरफ्तार कर लिया जाता है और जन्नत के दरवाजे खोल दिए जाते हैं, जहन्नुम के दरवाजे बंद कर दिए जाते हैं। इस महीने के आखिरी अशरे के दस दिनों में पांच रातें ऐसी होती हैं जिन्हें ताक रातें कहा जाता है। ये हैं रमज़ान की 21, 23, 25, 27 व 29 वीं की शब। इममें से कोई एक शबेकद्र की रात होती है। यह रात हजार महीनों से बेहतर मानी जाती है। यही वजह है कि इन पांचों रातों में मुस्लिम मस्जिदों व घरों में अल्लाह की कसरत से इबादत करते हैं। यही वजह है कि मर्द ही नही महिलाएं और बच्चे भी घरों में रात जागकर इबादत करते दिखाई देते हैं। 

उलेमा कहते हैं कि रब कहता है कि तुम्हारे लिए एक महीना रमजान का है, जिसमें एक रात है जो हजार महीनों से अफजल है। उस रात का नाम शबे कद्र है। यानी यह कद्र वाली रात है कि जो शख्स इस रात से महरूम रह गया वो भलाई और खैर से दूर रह गया। जो शख्स इस रात में जागकर ईमान और सवाब की नीयत से इबादत करता है तो उसके पिछले सभी गुनाह माफ कर दिए जाते हैं। यह रात बड़ी बरकतों वाली रात होती है। इस रात को मांगी गई दुआ हर हाल में रब कुबूल करता है। ओ पाक परवरदिगार तू अपने हबीब के सदके में हम सबको जहन्नुम की आग से बचा और रमज़ान की इबादत की तौफीक दे... आमीन।


हाफ़िज़ कारी शाहबुद्दीन 

(उस्ताद मदरसा फारुकिया, रेवड़ी तालाब वाराणसी)


 

Master Blaster Sachin Tendulkar के बेटे अर्जुन ने सानिया संग लिए सात फेरे

अर्जुन तेंदुलकर, सानिया चंदोक की शादी में जुटी हस्तियां 















 dil india live (Mumbai). मुंबई में पूर्व भारतीय क्रिकेट कप्तान मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर (Master Blaster Sachin Tendulkar) के बेटे अर्जुन तेंदुलकर की शादी में फिल्म और क्रिकेट जगत की हस्तियां जुटी। अर्जुन तेंदुलकर ने सानिया चंदोक के साथ मुंबई में एक समारोह में सात फेरे लिए।

 शादी समारोह में परिवार, रिश्तेदारों और कई नामी हस्तियों की मौजूदगी रही। इस मौके पर क्रिकेट, बॉलीवुड और राजनीति जगत की कई बड़ी हस्तियां पहुंचीं। अभिनेता अमिताभ बच्चन, क्रिकेटर महेंद्र सिंह धोनी, राहुल द्रविड़ और हरभजन सिंह अपनी पत्नियों के साथ समारोह में शामिल हुए। इसके अलावा खेल और फिल्म जगत की कई अन्य प्रसिद्ध हस्तियों ने भी नवविवाहित जोड़े को आशीर्वाद दिया। शादी समारोह को निजी रखा गया था, जिसमें करीबी मेहमानों और खास आमंत्रितों को ही बुलाया गया। सभी ने नवयुगल को अपनी शुभकामनाएं दी। होली के ठीक दूसरे दिन शादी समारोह होने से लोगों का उत्साह दूंगना हो गया। सभी ने आयोजन का जमकर लुत्फ उठाया।


गुरुवार, 5 मार्च 2026

Muqaddas Ramadan का आधा सफर हुआ तय, बाजार में बढ़ी रौनक

अज़ान की सदाएं सुनकर मोमिनीन ने खोला 15 वां रोज़ा




Sarfaraz Ahmad 

Varanasi (dil India live)। मस्ज़िदों से जैसे ही अज़ान कि सदाएं, अल्लाह हो, अकबर, अल्लाहो अकबर...फिज़ा में गूंजी। रोज़दारों ने खजूर और पानी से रमज़ान का 15 वां रोज़ा खोला। इसी के साथ रमज़ान का आधा सफर मुकम्मल हो गया। इसमें मोमिनीन ने पहला अशरा रहमत और आधा अशरा मगफिरत का पूरा कर लिया। कल रमज़ान का तीसरा जुमा है। जुमा को रोज़ेदार सहरी करके 16 वां रोज़ा रखेंगे और शाम में रमज़ान का 16 रोज़ा मुकम्मल करेंगे।

इससे पहले जुमेरात को शाम में इफ्तार के दस्तरखान पर लज़ीज़ इफ्तारी सजायी गई थी। कड़ी धूप से भी रोज़ादारों का जज्बा कम नहीं हुआ बल्कि रोज़ादारों ने राहत के लिए इफ्तार की थाली में तरबूज़, अंगूर व खरबूजे के साथ ही आइसक्रीम का भी सेवन किया। इस दौरान इफ्तार में परम्परागत इफ्तारी चने की घुघनी, पकौड़ी के अलावा अलग-अलग घरों में तरह-तरह की इफ्तारियां सजायी गयी थी। गर्मी से निजात के लिए  रुह आफ्ज़ा, नीबू का शर्बत आदि का भी लोगों ने लुत्फ लिया। रोज़ेदारों ने इन इफ्तारियों का लुत्फ लेने के बाद नमाज़े मगरिब अदा की। इस दौरान रब की बारगाह में सभी ने हाथ फैलाकर दुआएं मांगी। 

शहर के दालमंडी, नईसड़क, मदनपुरा, रेवड़ीतालाब, गौरीगंज, शिवाला, बजरडीहा, कश्मीरीगंज, कोयला बाज़ार, पठानी टोला, चौहट्टा लाल खां, जलालीपुरा, सरैया, पीलीकोठी, कच्चीबाग, बड़ी बाज़ार, अर्दली बाज़ार, पक्की बाज़ार, सदर बाजार, रसूलपुरा, नदेसर, लल्लापुरा आदि इलाकों में रमज़ान की खास चहल पहल दिखाई दी। इस दौरान मुस्लिम इलाकों में असर की नमाज़ के बाद और मगरिब के बाद लोग खरीदारी करने उमड़े हुए थे। 

UP के Deva Shariff Barabanki में देखिए दरगाह में खेली होली

हज़रत हाजी वारिस अली के दर पर फिर दिखा "एकता का रंग"




Mohd Rizwan 

dil india live (Barabanki). बाराबंकी के देवा स्थित हाजी वारिस अली शाह की दरगाह पर हिन्दू-मुस्लिम समुदाय ने एक साथ मिलकर होली खेल कर सौहार्द और एकता का रंग पेश किया। यहां केवल रंग ही नहीं होली खेलने के लिए यहां बाकायदा वारसी होली कमेटी बनाई गई है। इस्लाम धर्म में रंग खेलना सख्त मना है मगर कमेटी के पूर्व अध्यक्ष शहजादे आलम वारसी इस रंग को सौहार्द और देश की एकता का रंग बता रहे हैं। कहा कि यह मजार हिन्दू-मुस्लिम एकता की मिसाल है।

वो कहते हैं कि बाराबंकी सदैव ‘जो रब है, वही राम’ का संदेश देने वाले सूफी संत हाजी वारिस अली शाह की सरजमीं है। दरअसल बाराबंकी के देवा स्थित दरगाह परिसर में हिन्दू और मुस्लिम समुदाय के लोगों ने एकता की मिसाल पेश करते हुए जमकर होली खेली। उत्तर प्रदेश में जहां कई स्थानों पर होली पर पिछले साल जुमे की नमाज के मद्देनजर मस्जिदों और कुछ दरगाहों को तिरपाल से ढका गया था, वहीं देवा स्थित हाजी वारिस अली शाह की दरगाह पर ऐसा कुछ भी न पहले हुआ न इस बार। सूफी संत की दरगाह के परिसर में वारसी होली कमेटी द्वारा आयोजित कार्यक्रम में लोगों ने एक-दूसरे को रंग लगाया और होली की बधाई दी।

कमेटी के अध्यक्ष बताया कि हिन्दू और मुस्लिम हुरियारों ने सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल पेश करते हुए एक-दूसरे को रंग लगाया और होली की मुबारकबाद दी। इस दौरान ‘या वारिस’ की सदाएं भी फिजा में गूंजती रहीं। उन्होंने बताया कि दरगाह परिसर के पास स्थित ‘कौमी एकता गेट’ से नाचते और गाते-बजाते लोगों का जुलूस निकाला गया। यह जुलूस हर साल की तरह देवा कस्बे से होता हुआ दरगाह पर पहुंचा। इस बार भी जुलूस में हर धर्म के लोग शामिल हुए।

दरअसल यह मजार इस बात की मिसाल है कि रंगों का कोई मजहब नहीं होता। यही वजह है कि हर साल की तरह ही इस बार भी यहां सभी धर्मों के लोगों ने गुलाल व गुलाब की पंखुड़ियों से एक साथ होली खेली और आपसी भाईचारे की अनोखी मिसाल पेश की। सूफी संत हाजी वारिस अली शाह ने ‘जो रब है वही राम’ का संदेश दिया था। शायद इसीलिए यह स्थान हिन्दू-मुस्लिम एकता का संदेश देता आ रहा है। इस मजार पर मुस्लिम समुदाय से कहीं ज्यादा संख्या में हिन्दू समुदाय के लोग आकर मन्नत मानते हैं और चादर चढ़ाते दिखाई देते हैं।