बुधवार, 10 जून 2026

Muharram 2026: कब है Mahe Muharram, Varanasi में क्यों खास होता है मोहर्रम, यहां जानिए

13 दिन तक लगातार निकलेगा जुलूस मनेगा इमाम हुसैन का ग़म

यौमे आशूरा, चेहल्लुम ही नहीं 1 मोहर्रम से साठे तक जुलूस ही जुलूस 

कर्बला के शहीदों की याद दो माह आठ दिन रहेगा ग़म का अय्याम

ताबूत के जूलूस का फाइल फोटो वाराणसी 


Varanasi (dil India live). (Muharram News 2026) बनारस का मोहर्रम कई मायनों में दूसरे शहरों से खास होता है। ज़्यादातर शहरों में मोहर्रम की खास तारीखों पर ही जुलूस निकाला जाता है और बड़े आयोजन होते हैं जिसमें यौमे मोहर्रम की दस तारीख यानी आशूरा, तीजा, चेहल्लुम ही खास रहता है मगर मजहबी शहर बनारस में शहीदाने कर्बला की याद में यौमे आशूरा चेहल्लुम ही नहीं बल्कि एक मोहर्रम से साठे तक जुलूस ही जुलूस निकाले जाते हैं। कर्बला के शहीदों की याद में दो माह आठ दिन ग़म का अय्याम रहता है। इस दौरान एक मोहर्रम से 13 दिन तक लगातार जुलूस निकलता है। 

कब है मोहर्रम, कैसे होगी शुरुआत 

इमाम हुसैन की याद में मनाएं जाने वाला माहे मोहर्रम यूं तो चांद के दीदार के साथ शुरू होता है। यह महीना इस्लामी हिजरी सन् का पहला महीना होता है। आज जिलहिज्जा की 23 तारीख है। इस लिहाज से अगर 16 जून (29 जिलहिज्जा) चांद रात है। 16 को चांद का दीदार होता है तो मोहर्रम का आगाज़ हो जाएगा। चांद के दीदार के साथ ही अजाखाने सजा दिए जाएंगे ख़्वातीन अपनी चूड़ियां और साजो श्रृंगार हटाकर काला लिवास पहन लेंगी। मर्द भी काले पोशाक में हो जाएंगे। एक मोहर्रम से जुलूस का सिलसिला शुरू हो जाएगा जो दो माह आठ दिन तक चलेगा। इस दौरान शादी ब्याह और खुशी के कोई भी आयोजन नहीं होंगे।

मोहर्रम पर यौमे आशूरा का फाइल फोटो 

यह है मोहर्रम का शिड्यूल

पहला जुलूस पहली मोहर्रम को सदर इमामबाड़े में कैंपस में ही उठाया जाता है। यहां अलम और दुलदुल के साथ अंजुमने नोहाख्वानी व मातम का नज़राना पेश करेंगी। दूसरी मोहर्रम को शिवपुर में अंजुमने पंजतनी के तत्वाधान में अलम व दुलदुल का जुलूस रात 8.00 बजे उठाया जाता है। बनारस के अलावा दूसरे शहरों की अंजुमनें भी शिरकत करती हैं। इसी दिन भारत रत्न उस्ताद बिस्मिल्ला खां के मकान पर दिन में 2. 00 बजे कदीमी मजलिस का आयोजन होता है। 

तीसरी मोहर्रम तीसरी मोहर्रम को अलम व दुलदुल का कदीमी जुलूस औसानगंज नवाब की ड्योढ़ी से सायं काल उठाया जाता है। अंजुमन जीवादिया जुलूस के साथ-साथ रहती है। इसी दिन शिवाला में अलीम हुसैन रिजवी के निवास से अलम ताबूत का जुलूस उठाया जायेगा, जो हरिश्चन्द्र घाट के पास कुम्हार के इमामबाड़े पर समाप्त होगा। तीन मोहर्रम को ही रामनगर के बारीगढ़ी स्थित सगीर साहब के मकान से अलग का जुलूस उठाया जायेगा। 

चौथी मोहर्रम को ताजिये का जुलूस शिवाले में आलीम हुसैन रिजवी के निवास से गौरीगंज स्थित वरिष्ठ पत्रकार काजिम रिज़वी के इमामबाड़े पर समाप्त होगा। चार मोहर्रम को ही चौहट्टा में इम्तेयाज हुसैन के मकान से 2.00 बजे दिन में जुलूस उठकर इमामबाड़े तक जायेगा। चौथी मुहर्रम को ही तीसरा जुलूस दुलदुल का चौहट्टा लाल खां इमामबाड़े से रात 8:00 बजे उठकर अपने कदीमी रास्तों से होता हुआ सदर इमामबाड़ा लाट सरैया पर समाप्त होगा। 

पाँचवी मोहर्रम को छत्तातले गोविन्दपुरा इमामबाड़े से अलम का जुलूस अंजुमन हैदरी के संयोजन में उठाया जायेगा। जुलूस में लोग मरसिया पढ़ेंगे। शहनाई पर मातमी धुन भारत रत्न उस्ताद विस्मिल्लाह खां के परिवार के लोग पेश करेंगे। पांच मोहर्रम को अर्दली बाजार में हाजी अबुल हसन के निवास से इमाम हुसैन के छः महीने के बच्चे शहीद अली असगर की याद में झूले का जुलूस उठेगा। जो मास्टर जहीर हुसैन के इमामबाड़े पर जाकर समाप्त होगा। पांच मोहर्रम को ही रामनगर में महाराज बनारस की मन्नत का जुलूस उठाया जायेगा। जिसमें अलम व दुलदुल शामिल रहेगा। 

छठी मोहर्रम की तारीख बनारस के मोहर्रम के लिए ऐतिहासिक है। इसमें दुलदुल का जुलूस सायं 5.00 बजे अंजुमन जव्वादिया के जेरे इम्तियाज कच्चीसराय इमामबाड़े से उठाया जाता है। ये जुलूस तकरीबन 40 घंटे तक पूरे शहर में भ्रमण करता है। सभी धर्मों के लोग इसमें शिरकत करते हैं। तकरीबन 9 थाना क्षेत्रों से होकर यह जुलूस गुजरता है और 8 मोहर्रम की सुबह समाप्त होता है। 

सातवीं मोहर्रम को चौहट्टा लाल खां में इमाम हुसैन के भतीजे (इमाम हसन के पुत्र) 13 साल के जनाबे कासिम की याद में मेहदी का जुलूस में उठाया जाता हैं। यहां मेहंदी का दो जुलूस उठाया जाता है। एक जुलूस देर रात अपने कदीमी रास्ते से होता हुआ सदर इमामबाड़े लाट सरैया पर समाप्त होता है। ये जुलूस अंजुमन आबिदया के जेरे इन्तजाम उठाया जाता है। दोषीपुरा में अंजुमन कारवाने कर्बला द्वारा मेहदी का जूलूस उठाया जाता है। हर घर में जनाबे कासिम की याद में रात 12.00 बजे मेंहदी रोशन की जाती है। और फातिहा होती है। सात मोहर्रम को कर्बला में इमाम हुसैन व उनके साथियों का पानी बन्द कर दिया गया था। 

आठवीं मोहर्रम का दिन इमाम हुसैन के छोटे भाई से सम्बन्धित है। इस दिन जनाबे अब्बास के नाम पर हाजिरी की फातिहा करायी जाती है। जनाबे अब्बास इमाम हुसैन के (अलमबरदार) भी थे। इस मौके पर रात 8 बजे खाजा नब्बू के चाहमामा स्थित निवास से ताबूत का जुलूस अजुमन हैदरी के तत्वाधान में उठाया जायेगा। लियाकत अली कर्बलायी मर्सिया पेश करेंगे। इसी जुलूस में शहनाई पर मातमी धुनों के साथ आंसुओं का नजराना पेश करेंगे। ये जुलूस फातमान से पलटकर भोर में छत्तातले पर समाप्त होगा। शिवाले में डिप्टी जाफर बख्त की मस्जिद से अलग व ताबूत का जुलूस उठाया जायेगा। शिवाले में ही बराती बेगम के इमामबाड़े से दुलदुल का जुलूस उठकर कुम्हार का इमामबाड़ा हरिश्चन्द घाट पर समाप्त होगा। आठ मुहर्रम को ही चौहट्टा लाल खा में मिरजा मेंहदी के निवास से अलम व ताबूत का जूलस उठकर मिरपूरा इमामबाड़े जाकर समाप्त होगा। चौहट्टा लाल खां में ही एक और जुलूस आलीम हुसैन के मकान से ताबूत व अलम का जुलूस उठाया जायेगा। इस जुलूस की विशेषता यह है कि पूरे रास्ते में अधेरा का दिया जाता है। रास्तों की लाईट बुझा दी जाती है। यह जुलूस भी मीरपुरा इमामबाड़े पर जाकर समाप्त होता है। आठ मोहर्रम को ही अर्दली बाजार में जियारत दुसैन के निवास से शब्बीर शद्दू के संयोजन में अलम व दुलदुल का उठाया जायेगा।

ऐसे ही मोहर्रम की नव तारीख को शहर के सभी इमामबाड़ों से गश्ती अलम का जुलूस निकाला जाता है साथ ही शिवाला से दूल्हे का जुलूस निकाला जाता है। ऐसे ही दसवीं मोहर्रम को इमाम हुसैन समेत कर्बला के वीरों की शहादत मनाई जाती है। शहर भर में जुलूस उठाया जाता है। ऐसे ही ग़म का यह अययाम दो माह आठ दिन तक चलेगा। 

11 मोहर्रम को दालमंडी से लुटा हुआ काफिला।
12 मोहर्रम को कर्बला के शहीदों का शहर भर में तीजे का जुलूस।
13 मोहर्रम को सदर इमामबाड़े में दुलदुल का जुलूस उठेगा।

मंगलवार, 9 जून 2026

Eye Discharge क्या है, ये कहीं ख़तरे की घंटी तो नहीं?

यहां जानिए आंखों से डिस्चार्ज का क्या है मतलब और कब विशेषज्ञ से लेनीं है सलाह?

Mohd Rizwan 

dil india live (Varanasi). आंखों से डिस्चार्ज (Eye Discharge) होना एक सामान्य समस्या है। सुबह उठने पर आंखों के कोनों में थोड़ा सा पदार्थ जमा होना सामान्य हो सकता है, लेकिन यदि डिस्चार्ज अधिक मात्रा में हो या उसका रंग व स्वरूप बदल जाए, तो यह किसी आंख संबंधी समस्या का संकेत हो सकता है।

नेत्र विशेषज्ञ बताते हैं कि आंखों से निकलने वाला तरल, म्यूकस (बलगम जैसा पदार्थ), पस या अन्य अवशेष Eye Discharge कहलाता है। दरअसल यह आंखों की प्राकृतिक सुरक्षा प्रणाली का हिस्सा है, जो धूल, एलर्जी पैदा करने वाले तत्वों और सूक्ष्मजीवों को बाहर निकालने में मदद करता है। हालांकि, डिस्चार्ज की मात्रा, रंग या बनावट में बदलाव किसी समस्या का संकेत हो सकता है।



सामान्य प्रकार के Eye Discharge

✅ पानी जैसा डिस्चार्ज (Watery Discharge)

एलर्जी, वायरल संक्रमण, ड्राई आई या पर्यावरणीय कारणों से हो सकता है। आमतौर पर साफ और पानी जैसा होता है।

✅ चिपचिपा म्यूकस डिस्चार्ज (Mucous Discharge)

अक्सर एलर्जिक कंजंक्टिवाइटिस और ड्राई आई में देखा जाता है।

✅ पीला या हरा डिस्चार्ज (Yellow/Green Discharge)

आमतौर पर बैक्टीरियल संक्रमण का संकेत होता है और पलकों को आपस में चिपका सकता है।

✅ गाढ़ा पस जैसा डिस्चार्ज (Purulent Discharge)

गंभीर संक्रमण का संकेत हो सकता है और तत्काल चिकित्सा सलाह की आवश्यकता होती है।

इसके सामान्य कारण

🔹 कंजंक्टिवाइटिस (Pink Eye)

🔹 ड्राई आई डिजीज

🔹 ब्लेफेराइटिस (पलकों की सूजन)

🔹 एलर्जी

🔹 कॉन्टैक्ट लेंस से जुड़ी समस्याएं

🔹 आंसू की नली का अवरुद्ध होना

Varanasi Main Ganga isnan के दौरान हादसा गहरे पानी में डूबा युवक व किशोर

पानी में जाकर डूबने वाले युवक व किशोर को जल पुलिस ने बचाया 
अस्सी घाट पर डूबने से बचाया गया किशोर

dil india live (Varanasi). आज 09/06/2026 को डूबने की दो घटनाएं हुई। पहली घटना समय करीब 10:30 बजे Varanasi में हादसा हो गया। इस हादसे में एक व्यक्ति गहरे पानी में डूब गया। पुलिस ने बताया कि वह व्यक्ति जो मीर घाट पर स्नान करते वक्त पैर फिसलने की वजह से गहरे पानी में चला गया और डूबने लगा मौके पर मौजूद ड्यूटी में लगे आरक्षी प्रमोद कुमार ठाकुर द्वारा तत्परता एवं साहस का परिचय देते हुए तत्काल नदी में पहुंचकर रेस्क्यू अभियान चलाया व राहत एवं बचाव उपकरण का प्रयोग कर गंगा में डूब रहे उक्त व्यक्ति को सकुशल बचाकर गंगा नदी से बाहर निकाला गया।

इसके बाद उक्त बचाएं गये व्यक्ति के परिजन को सुपुर्द किया गया। बचाए गए युवक की स्थिति सामान्य है। उक्त व्यक्ति के परिजनों द्वारा जल पुलिस का धन्यवाद करते हुए, कमिश्नरेट वाराणसी पुलिस की भूरि-भूरि प्रशंसा की गई। घाट पर स्नान कर रहे अन्य व्यक्तियों को बैरिकेटिंग के अन्दर रह कर ही स्नान करने हेतु बताया गया । जिससे कोई भी अप्रिय घटना घटित न हो।

अस्सी घाट पर डूब रहे किशोर को बचाया

आज 09/06/2026 को 06:25 पर सुबह एक लड़का उम्र लगभग 15 वर्ष जोकि जखनी तिमुहानी वाराणसी से अपने परिवारजन के साथ वाराणसी गंगा स्नान आया था, अस्सी घाट पर स्नान के दौरान गहरे पानी में चला गया और डूबने लगा। मौके पर मौजूद ड्यूटी में लगे वैभव सिंह व जल पुलिस गश्त पार्टी के द्वारा तत्परता एवं साहस का परिचय देते हुए तत्काल नदी में पहुंचकर रेस्क्यू अभियान चलाया व राहत एवं बचाव उपकरण का प्रयोग कर गंगा में डूब रहे उक्त बालक को सकुशल बचाकर गंगा नदी से बाहर निकाला गया तथा उनके परिजन को सुपुर्द किया गया। बचाए गए बालक की स्थिति सामान्य है। 

सराहनीय कार्य करने वाली पुलिस टीम में वोट चालक चन्द्रशेखर, कांस्टेबल वैभव सिंह, होमगार्ड अशोक कुमार जल पुलिस कमिश्नरेट वाराणसी शामिल थे।

जल पुलिस ने की यह अपील 

वाराणसी जल पुलिस द्वारा गंगा में स्नान करने वाले सभी श्र्द्धालुगण व आम जनमानस से अपील किया है कि गंगा स्नान के दौरान बैरिकेटिंग के अन्दर रह कर ही स्नान करें।

रविवार, 7 जून 2026

Hazrat Laatshahi Baba का उर्स अकीदत के साथ सम्पन्न

लाटशाही दरबार से झोली भर कर लौटे जायरीन

लाटशाही बाबा का 3 दिनी उर्स देश की तरक्की, अमन, मिल्लत की दुआओं संग सम्पन्न 

उर्स में हज़रत लाट शाही बाबा रहमतुल्लाह अलैह के दर पर जुटे जायरीन 


Varanasi (dil India live)। सर्किट हाउस स्थित हज़रत सैय्यद मुख्तार अली शाह शहीद उर्फ लाटशाही बाबा (रह.) का तीन दिवसीय उर्स रविवार को फजर की नमाज के साथ अमन, मिल्लत और देश की तरक्की की दुआओं संग सम्पन्न हो गया। उर्स के दौरान बाबा के दर पर अकीदत का सैलाब उमड़ा हुआ था। शनिवार की रात से रविवार की सुबह तक जायरीन बाबा के दर पर अपनी अकीदत लुटाते नज़र आएं। आलम यह था कि सर्किट हाउस, कचहरी के साथ ही आसपास के इलाके की सड़क पर पांव रखने भर की भी जगह नहीं थी। इससे पूर्व शाम को चादर-गागर का जुलूस निकला, जो कदीमी रास्ते से होता हुआ बाबा के आस्ताने पर पहुंचा। यहां बाबा की मजार पर चादरपोशी कर अकीदतमंदों ने मुल्क की सलामती व खुशहाली की दुआएं मांगी।

 तीन दिवसीय उर्स के दौरान कुरानख्वानी, फातेहा व लंगर का दौर चलता रहा। उर्स के मौके पर प्रशासनिक अधिकारियों संग बंगाल, बिहार, हरिद्वार, दिल्ली, अजमेर सहित पूर्वाचल भर से हजारों अकीदतमंदों ने बाबा के दर पर हाजिरी लगाकर दुआएं व मन्नतें मुराद मांगी। उर्स के दौरान जहां दोनों वर्गों के लोगों का हुजूम उमड़ा हुआ था वहीं उर्स को देखते हुए लगे मेले में सभी ने अस्थाई दुकानों से खरीदारी की। बच्चे झूला वह चरखी का लुत्फ उठाते दिखाई दिए। सुबह बाबा के दर पर अमन, मिल्लत और देश की खुशहाली एवं तरक्की की दुआओं संग उर्स संपन्न हो गया।

दस बजते-बजते आस्ताने के आसपास सन्नाटा पसरा गया कुछ चुनार के नानखताई, बिस्कुट वाले और कप व बर्तन वाले ही बचे थे जो सामान समेटते नज़र आएं। बाबा के दर से तमाम लोग ऐसे भी थे जो सिर्फ साल में एकाध बार ही उर्स के मौके पर आ पातें हैं उन तमाम लोगों ने फिर आने का वादा कर बाबा से बिदा लिया। 


दरअसल हज़रत लाटशाही शहीद बाबा (रह.) का असली नाम सैय्यद मुख्तार अली शाह था। सूफी जाफर हसनी की मानें तो बाबा फतेहपुर के रहने वाले थे। हज़रत लाटशाही बाबा सन् 1742 में बनारस आए। आप काशी नरेश के शिवपुर परगना के शहर काजी बने। राजा चेतसिंह ने बाबा के इंसाफ और बहादुरी के चलते अपनी सल्तनत में सिपहसालार बनाया। उन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ 1782, 1784 व 1786 में राजा चेतसिंह की ओर से जंग लड़ी। जंग में अंग्रेजों ने अपनी हार मानते हुए संधि की। इसके बाद अंग्रेजों की ओर से दूसरा गवर्नर भेजा गया। 1798 में उसने धोखे से जंग छेड़ दी। इस जंग में अंग्रेजों से लोहा लेते हुए सैय्यद मुख्तार अली शाह लाटशाही बाबा राजा तेज सिंह के कुनबे को बचाते हुए खुद शहीद हो गए। राजा चेतसिंह की ओर से उन्हें लार्ड गवर्नर नियुक्त होने के कारण इनका नाम बाद में लाटशाही बाबा पड़ गया। आज बाबा को मानने वाले देश दुनिया में फैले हुए हैं। उर्स के दौरान बाबा से अकीदत रखने वाले देश के कोने कोने से कचहरी, अर्दली बाजार व पक्की बाजार पहुंचते हैं। उर्स के दौरान इन इलाकों के तक़रीबन सभी घरों में मेहमान होते हैं।

शनिवार, 6 जून 2026

Ashraf Ansari को चिराग़ ने बनाया विधान परिषद प्रत्याशी, जानिए अशरफ को क्यों मिला इनाम

लोक जनशक्ति पार्टी के प्रत्येक कार्यकर्ता का सम्मान सर्वोपरि-चिराग पासवान


dil india live (Patna). लोक जनशक्ति पार्टी ने भभुआ के अशरफ़ अंसारी को विधान परिषद का उम्मीदवार घोषित किया है। इस घोषणा के बाद चिराग पासवान ने न सिर्फ अपने पिता को याद किया बल्कि अशरफ अंसारी के पिता रमजान अंसारी को भी याद करते हुए सोशल मीडिया पर एक भावुक पोस्ट डाली है इस पोस्ट और उनके फैसले को सही करार दे रहे हैं। यहां जानिए चिराग़ पासवान ने क्या लिखा...

चिराग़ पासवान ने अपनी पोस्ट में लिखा है कि लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रत्येक कार्यकर्ता का सम्मान मेरे लिए सर्वोपरि है। विपरीत परिस्थितियों में भी हमारे कार्यकर्ताओं ने श्रद्धेय रामविलास पासवान जी के आदर्शों और सिद्धांतों का झंडा मजबूती के साथ न सिर्फ थामे रखा, बल्कि बिना किसी व्यक्तिगत आकांक्षा के पार्टी के मूल्यों, विचारों और संघर्षों को बिहार के कोने-कोने तक पहुंचाने का कर्मठ प्रयास निरंतर किया है। ऐसे समर्पित कार्यकर्ताओं की निष्ठा और मेहनत ही संगठन की सबसे बड़ी ताकत है।

सन् 2013 में तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रद्धेय रामविलास पासवान जी ने जब मुझे केंद्रीय संसदीय बोर्ड की जिम्मेदारी देकर बिहार भेजा था , तब अशरफ अंसारी जी के पूजनीय पिताजी ने भभुआ में एक सफल कार्यक्रम कराकर मुझे राजनीतिक पहचान दिलाई थी। आज उन्हें विधान परिषद का प्रत्याशी बनाया जाना मेरे लिए सम्मान की बात है।

यह फैसला हर उस कार्यकर्ता के लिए प्रेरणा है जो निस्वार्थ भाव से पार्टी की सेवा कर रहें है। यह निर्णय स्पष्ट संदेश देता है कि लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) में संगठन के प्रति समर्पण, संघर्ष और निष्ठा का सम्मान किया जाता है तथा जमीनी कार्यकर्ताओं को सर्वोच्च स्थान दिया जाता है।

कार्यकर्ता ही हमारी सबसे बड़ी पूंजी हैं और उनका सम्मान ही हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। यही हमारी राजनीति है, यही हमारी प्रतिबद्धता है।

PNG Gas service का वाराणसी में हो रहा लगातार विस्तार

गेल इंडिया ने एपेक्स हॉस्पिटल की कैंटीन में पीएनजी सेवा की प्रारंभ


dil india live (Varanasi). गेल (इंडिया) लिमिटेड ने वाराणसी सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन परियोजना के अंतर्गत स्वच्छ, सुरक्षित एवं किफायती ऊर्जा के विस्तार की दिशा में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि करते हुए भिखारिपुर क्षेत्र स्थित "एपेक्स हॉस्पिटल" के कैंटीन में पाइप्ड नैचुरल गैस (पीएनजी) की आपूर्ति सफलतापूर्वक शनिवार को प्रारंभ कर दी। यह पहल वाणिज्यिक एवं संस्थागत प्रतिष्ठानों को हरित ऊर्जा से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। गेल ने बताया कि, आपूर्ति परियोजना का सफल क्रियान्वयन गेल की प्रोजेक्ट्स टीम द्वारा किया गया, जिसका नेतृत्व नवाज़िश अली अंसारी (उप महाप्रबंधक) द्वारा किया जा रहा है। वहीं, वाराणसी सीजीडी परियोजना का समग्र संचालन  सुशील कुमार, महाप्रबंधक (GM) के मार्गदर्शन में प्रभावी रूप से किया जा रहा है। 


अधिकारियों का कहना है कि, भिखारिपुर स्थित 'एपेक्स हॉस्पिटल" कैंटीन, जो प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोगों को सेवाएं प्रदान करता है, पूर्व में अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए प्रतिमाह लगभग 60 एलपीजी सिलेंडरों पर निर्भर था। आपूर्ति प्रारंभ होने के बाद अब प्रतिष्ठान को निरंतर, सुरक्षित एवं निर्बाध गैस उपलब्ध हो रही है, जिससे संचालन अधिक सुचारु, दक्ष और विश्वसनीय बन गया है। साथ ही, पहले उपयोग में लाए जा रहे इन एलपीजी सिलेंडरों को अब अन्य क्षेत्रों में पुनः उपयोग में लाया जा सकेगा, जिससे अधिक उपभोक्ताओं तक इसकी उपलब्धता सुनिश्चित होगी। गेल ने बताया भिखारिपुर एवं आसपास के क्षेत्रों में भी इस दिशा में तेजी से कार्य किया जा रहा है, जिससे उपभोक्ताओं को विश्वसनीय, सुरक्षित और पर्यावरण अनुकूल ऊर्जा विकल्प उपलब्ध कराया जा सके। 

उन्होंने कहा कि, एपेक्स हॉस्पिटल कैंटीन में पीएनजी आपूर्ति की शुरुआत, वाराणसी को स्वच्छ एवं सुरक्षित ऊर्जा की दिशा में अग्रसर करने की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है, जो गेल की सतत विकास एवं पर्यावरण संरक्षण के प्रति प्रतिबद्धता को सशक्त रूप से प्रदर्शित करती है। अंत में, गेल (इंडिया) लिमिटेड सभी उपभोक्ताओं से अपील करता है कि वे पीएनजी कनेक्शन अपनाकर आधुनिक, सुरक्षित एवं सुविधाजनक ऊर्जा प्रणाली का लाभ उठाएं।

Anita Singh Jaunpur की नयी शहर कोतवाल बनीं

जौनपुर को मिली पहली महिला कोतवाल, जानिए बलिया की बेटी की क्या है उपलब्धि

त्रिवेणी सिंह को कार्यभार संभालने के महज तीन दिन में भेजा गया गैर जनपद 


dil india live (Jaunpur). जौनपुर शहर कोतवाली में निरीक्षक अनीता सिंह को नया शहर कोतवाल नियुक्त किया गया है। यह बड़ा फेरबदल होने से यहां तरह तरह की चर्चाएं हो रही है क्योंकि अनीता सिंह से पहले नियुक्त किए गए त्रिवेणी सिंह को कार्यभार संभालने के महज तीन दिन बाद ही गैर जनपद तबादला कर दिया गया। 

आरोप तो यहां तक लग रहे हैं की यह सब सफेदपोश दबाव के चलते हुआ है। दरअसल जौनपुर के इतिहास में यह पहला मौका है जब किसी शहर कोतवाल का कार्यकाल सिर्फ तीन दिन का रहा हो। यह भी ख़ास है कि शहर कोतवाली की कमान पहली बार किसी महिला अधिकारी को सौंपी गई है।

कौन हैं अनीता सिंह जानिए इतिहास 

मूल रूप से बलिया निवासी अनीता सिंह वर्ष 2010 बैच की उपनिरीक्षक रही हैं और विभागीय पदोन्नति के बाद निरीक्षक बनीं। इससे पहले वह महिला एवं बाल सुरक्षा संगठन की प्रभारी के रूप में भी अपनी सेवाएं दे चुकी हैं। बताया जा रहा है कि हाल ही में पदोन्नत होकर निरीक्षक बने त्रिवेणी सिंह को वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक कुंवर अनुपम सिंह ने सोमवार रात शहर कोतवाल नियुक्त किया था। मंगलवार को कार्यभार संभालने के बाद उनकी तैनाती को लेकर सफेदपोश विरोध करने लगे। सूत्रों के अनुसार सत्तारूढ़ दल के कुछ नेताओं की आपत्ति के बाद उनके स्थानांतरण की प्रक्रिया न सिर्फ तेज हो गई बल्कि शुक्रवार को उनका स्थानांतरण आदेश जारी हो गया और त्रिवेणी सिंह को कार्यमुक्त कर दिया गया। अब अनीता सिंह ने शहर कोतवाल का कार्यभार ग्रहण कर लिया। शहर की कानून-व्यवस्था और पुलिसिंग को लेकर लोगों की निगाहें नई महिला शहर कोतवाल पर टिकी हैं। देखना यह है कि इस पद पर वो कितने दिनों तक बनी रहेगी और कैसे कानून व्यवस्था बनाए रखेंगी।