गुरुवार, 25 जून 2026

Dulhe ka Julus: पूरी दुनिया में केवल बनारस में उठाया जाता है दूल्हे का जुलूस

या हुसैन, या हुसैन...की सदाओं संग आग पर दौड़ेगा दूल्हे का जुलूस

शिवाला से दूल्हे का जुलूस आज 


dil india live (Varanasi). बनारस में मुहर्रम की नौवीं तारीख यानी गुरुवार की रात सैकड़ों साल पुरानी रवायतों के साथ आग पर दूल्हे का कदीमी जुलूस दौड़ेगा। शहीदाने कर्बला की याद में इस तरह का दुनिया में इकलौता 'दूल्हे का जुलूस' अपनी अलग रवायत और खास पहचान रखता है। दूल्हा कमेटी के सदर परवेज कादिर खान की मानें तो इमाम हुसैन के भतीजे हजरत कासिम के घोड़े की नाल के साथ 'दूल्हा' नंगे पांव 30 टन से ज्यादा लकड़ियों के लाल अंगारों पर से होकर गुजरता है इस दौरान ‘या हुसैन, या हुसैन’ की सदाएं बुलंद होती है। दूल्हे के वापस इमामबाड़ा पहुंचने के बाद ही ताजियों के जुलूस उठाएं जाते हैं। 72 अलाव व 60 ताजिये को सलामी देकर रात को उठा यह जुलूस सुबह वापस इमामबाड़े लौटता है।

दूल्हा कासिम नाल कमेटी के सदर परवेज कादिर खान बताते हैं कि  हजरत कासिम की शादी तय थी लेकिन कर्बला की जंग का ऐलान होने और जंग में उनके शहीद होने के कारण शादी नहीं हुई। क्यों की उन्होंने शादी के बजाय जंग में शहीद होना पसंद किया। इसलिए उनकी याद में ही सैकड़ों साल पुरानी रवायतों को बनारस के लोग निभाते चले आ रहे हैं। हजरत कासिम के घोड़े की नाल को पकड़ने वाले को दूल्हा कहा जाता है और उस पर इमाम हुसैन की सवारी आती है।

इमामबाड़े में रखी है कदीमी "नाल"

शिवाला के जिस इमामबाड़े से दूल्हे का जुलूस उठता है वहां हजरत कासिम के घोड़े की नाल सुरक्षित रखी हुई है। इसे सिर्फ इस्लामिक कैलेंडर के अनुसार नौवीं मुहर्रम और 10 वीं को ही बाहर निकाला जाता है। इमामबाड़ा की दीवारों पर प्रतीकात्मक रूप से खून के छींटे कर्बला के मंजर की बयां करते हैं।

दूल्हे का जुलूस जुमेरात की रात 10 बजे शिवाला से उठेगा जो भदैनी, अस्सी दुर्गाकुंड, बाराती बेगम के इमामबाड़े, गौरीगंज, भेलूपुर, रेवड़ी तालाब, नई सड़क होते हुए माध्यरात्रि के बाद फातमान पहुंचेगा। 12 किलोमीटर लंबे रास्ते में जगह-जगह लोग जुलूस आने के पहले ही दस-दस मन लकड़ी के अलाव जलाएंगे। इस दौरान पहले दूल्हा अंगारों पर दौड़ता है और फिर सब उसके पीछे-पीछे दौड़ते हैं।

हिन्दूओं ने सौंपी थी मुस्लिमों को "नाल"

दूल्हा कासिम नाल कमेटी के पूर्व सेक्रेटरी सलीम शिवालवी बुजुर्गों की सुनी बताते हैं कि इमाम हुसैन की शहादत के बाद उनके घोड़े की नाल गंगा में स्नान कर रहे पंडित रामफल को मिली थी। नेपाली रियासत के रामफल को वो नाल आकर्षित कर रही थी इसलिए उन्होंने एक लोहे के बक्से में उसे रख दिया। सलीम शिवालवी बताते हैं कि मोहर्रम आने पर उस नाल से या हुसैन, या हुसैन... की सदाओं निकलती। इसे देखते हुए पंडित रामफल ने नाल का इस्लामिक महत्व समझते हुए उसे शिवाला के मुस्लिमों को दे दिया। तब से लगातार मोहर्रम की 9 व 10 तारीख को दूल्हे का जुलूस उठाया जा रहा है।




प्रशासन ने की तैयारियों की समीक्षा

'दूल्हे' को अंगारों पर चलते देखने के लिए दूर-दूर से लोगों के आने के चलते भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस प्रशासन द्वारा खास इंतजाम रखा जाता हैं। जुलूस से पूर्व ही तैयारियों की समीक्षा बैठक की जाती है ताकि शांति व्यवस्था कायम रहे।

पिछले दिनों पीस कमेटी की बैठक डायमंड होटल परिसर में हुई। बैठक में मोहर्रम पर्व ताजिया जुलूस विश्व विख्यात शिवाला दुल्हे का जुलूस 25 जून 2026 को रात्रि में निकाले जाने के संबंध में विस्तृत चर्चा वार्तालाप महत्वपूर्ण बिंदुओं को नजर रखते हुए उपस्थित थाना भेलूपुर क्षेत्र से आए सम्मानित जनमानस, ताजियादार, दूल्हा कमेटी के समस्त पदाधिकारी स्वयंसेवक समाज संगठन सोसाइटी परिवार के पदाधिकारी स्वयंसेवक इस महत्वपूर्ण बैठक में उपस्थित रहकर जुलूस को सकुशल संपन्न कराने में महत्वपूर्ण योगदान पर चर्चा की।


बैठक की अध्यक्षता गौरव कुमार (सहायक पुलिस आयुक्त सर्किल भेलूपुर), संचालन मुख्तार अहमद (प्रदेश प्रवक्ता समाज संगठन सोसाइटी), धन्यवाद दुर्गा सिंह (प्रभारी निरीक्षक थाना भेलूपुर) व स्वागत परवेज कादिर खान ने किया।

रेवड़ी तालाब, मदनपुरा व नवाबगंज से निकला जुलूस 

थाना भेलूपुर क्षेत्र में रेवड़ी तालाब के अशफ़ाक नगर में 24 जून 2026 को रात्रि 11:00 बजे परंपरागत रेवड़ी तालाब दूल्हा कमेटी के द्वारा  जुलूस भारी भीड़ के साथ निकाला गया जो विभिन्न रास्तों से होते हुए पांडेय हवेली स्थित इमाम चौक परिसर में भोर में वापस सम्पन्न हुआ। ऐसे ही मदनपुरा थाना दशाश्वमेध क्षेत्र में प्रातः काल जुलूस सकुशल संपन्न हुआ। इस महत्वपूर्ण जुलूस में गौरव कुमार (सहायक पुलिस आयुक्त सर्किल भेलूपुर ज़ोन काशी पुलिस कमिश्नरेट वाराणसी) दुर्गा सिंह (प्रभारी निरीक्षक थाना भेलूपुर) संतोष कुमार सिंह (थाना अध्यक्ष थाना दशाश्वमेध) विशाल विक्रम सिंह, शिवम श्रीवास्तव आदि ने महत्वपूर्ण जुलूस में शामिल थे।


समाज संगठन रही मुस्तैद 
समाज संगठन सोसाइटी परिवार सर्किल भेलूपुर शाखा चेतगंज शाखा जैतपुरा, शाखा चौक, शाखा दशाश्वमेध, शाखा सिगरा, शाखा लक्सा के समस्त पदाधिकारी इस महत्वपूर्ण जुलूस में उपस्थित रहकर  शांति व्यवस्था में महत्वपूर्ण सहयोग प्रदान करते दिखे। प्रदेश प्रवक्ता समाज संगठन सोसाइटी मुख्तार अहमद द्वारा नवाबगंज से रात्रि 10:00 बजे निकलने वाले दुल्हे के जुलूस का नेतृत्व किया गया। जुलूस नवाबगंज से होकर दुर्गा कुंड स्थित इमामबाड़े में जाकर समाप्त हुआ है।




Bihar : मुस्लिम बेटियों और बेटों ने किया बड़ा काम

बीपीएससी में मिली 12 को एसडीएम और 10 को डीएसपी जैसी ज़िम्मेदारी




dil india live (Patna). बिहार लोक सेवा आयोग की 70 वीं संयुक्त प्रतियोगी परीक्षा के नतीजों में मुस्लिम उम्मीदवारों का प्रदर्शन बेहद काबिले तारीफ है। इस बार कई मुस्लिम छात्राओं ने भी बड़ी कामयाबी हासिल कर मिसाल पेश की है। उन्होंने प्रशासनिक सेवाओं में अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज करा कर सबको हेरानी कर दिया है। 20 जून को जारी किए गए नतीजों के मुताबिक, बिहार प्रशासनिक सेवा यानी एसडीएम के 200 पदों में 12 मुस्लिम उम्मीदवारों ने कामयाबी हासिल की है। इनमें 5 महिला और 7 पुरुष उम्मीदवार शामिल हैं। मुस्लिम उम्मीदवारों की प्रशासनिक और पुलिस सेवा में कामयाबी का आंकड़ा निराशाजनक रहा है। बीपीएससी में प्रशासनिक सेवाओं के लिए 6 फीसदी मुस्लिम उम्मीदवार को जबकि पुलिस सेवा में 7.35 फीसदी उम्मीदवार कामयाब रहे। 

एसडीएम पद के लिए कामयाबी हासिल करने वाली महिला उम्मीदवारों में यासमीन बानो, साहेबा खान, मावरा जफर, सायका खातून और समरीन फातमा शामिल हैं। वहीं, पुरुष उम्मीदवारों में मोहम्मद इश्तियाक रहमान, रागिब नौशाद, रेयान हुसैन, मोहम्मद लुत्फुर रहमान, मोहम्मद शाह फहद, साकिब हसन और मुस्कान के अलावा अन्य नाम भी लिस्ट में शामिल हैं। इन उम्मीदवारों में कई ने राज्य स्तर पर बेहतर रैंक हासिल की है। मुस्लिम उम्मीदवारों में मोहम्मद इश्तियाक रहमान टॉप 20 में शामिल हैं। मोहम्मद इश्तियाक रहमान ने 11वीं रैंक हासिल की, जबकि यासमीन बानो ने 33 वीं और साहेबा खान ने 35 वीं रैंक हासिल की। इसके अलावा रागिब नौशाद 39 वें और मावरा जफर 74 वें स्थान पर हैं।

वहीं, बिहार पुलिस सेवा यानी डीएसपी के 136 पदों के लिए चुने गए उम्मीदवारों में 10 मुस्लिम उम्मीदवारों ने जगह बनाई है। इनमें 5 महिला और 5 पुरुष उम्मीदवार शामिल हैं। डीएसपी पद के लिए सफल महिला उम्मीदवारों में शिरीन नाज, बुशरा रहमान, जन्नत निशा, सानिया कलीम और हशमत सबा शामिल हैं। वहीं, पुरुष उम्मीदवारों में मोहम्मद सरफराज आलम, अताउल हक, अहमद फराज, सद्दाम हुसैन और मोहम्मद हसनैन आलम ने कामयाबी हासिल की है। मोहम्मद सरफराज, पूरे बिहार में डीएसपी के रैंक में पहले स्थान पर रहे। इसी तरह ओवर ऑल रैंक के हिसाब से मोहम्मद सरफराज आलम ने राज्य स्तर पर 60 वीं रैंक हासिल की है। इसके अलावा शिरीन नाज ने 259वीं और बुशरा रहमान ने 327वीं रैंक हासिल की। एसडीएम के मुकाबले डीएसपी पद के लिए मुस्लिम उम्मीदवारी की कामयाबी का फीसदी बेहतर है। 

बिहार प्रशासनिक सेवा में एसडीएम पद के चयनित

1. रोल नंबर - 502119, मोहम्मद इश्तेयाक रहमान, 11 पुरुष

2. रोल नंबर - 558246, यासमीन बानो, 33 महिला

3. रोल नंबर - 481260, साहेबा खान, 35 महिला

4. रोल नंबर - 397642,  रागिब नौशाद, 39 पुरुष

5. रोल नंबर - 427154, मावरा जफर, 74 महिला

6. रोल नंबर - 302559, रेयान हुसैन, 132 पुरुष

7. रोल नंबर - 225394, मोहम्मद लुत्फुर रहमान, 144 पुरुष

8. रोल नंबर - 528729, मोहम्मद शाह फहाद, 156 पुरुष

9.रोल नंबर - 392458, साकिब हसन, 222 पुरुष

10. रोल नंबर - 520027, साइका खातून, 236 महिला

11. रोल नंबर - 328162, समरीन फातमा, 282 महिला

12. रोल नंबर - 124474, मुस्कान, 1768 महिला

बिहार पुलिस सेवा में चयनित मुस्लिम उम्मीदवार

1. रोल नंबर - 537173, मोहम्मद सरफराज आलम, 60 पुरुष

2. रोल नंबर - 493468, शिरीन नाज, 259 महिला

3. रोल नंबर - 219247,  बुशरा रहमान, 327 महिला

4. रोल नंबर - 207877, अताउल हक, 444 पुरुष

5 रोल नंब - 442891, अहमद फराज, 510 पुरुष

6. रोल नंबर - 126802 सद्दाम हुसैन, 543 पुरुष

7. रोल नंबर - 442233,  मोहम्मद हसनैन आलम, 619 पुरुष

8. रोल नंबर - 220779, जन्नत निशा, 695 महिला

9. रोल नंबर - 474656, सानिया कलीम, 821 महिला

10. रोल नंबर - 308446, हश्मत सबा, 1124 महिला






8 mahe muharram: ख्वाजा नब्बू के इमामबाड़े से निकला कदीमी आठवीं मोहर्रम का तुर्बत व अलम का जुलूस

नगीने व रांगे की ताजिया की जियारत को उमड़े जायरीन 

...अर्शे बरी हिल गया गिरने से अलम के

आंसुओं का नज़राना सुन उस्ताद बिस्मिल्लाह खां की याद हुई ताज़ा


Mohd Rizwan 

dil India live (Varanasi). चाहमाहमा स्थित ख्वाजा नब्बू के इमामबाड़े से कदीमी आठवीं मोहर्रम का तुर्बत व अलम का जुलूस अपनी पुरानी परंपराओं के अनुसार कार्यक्रम संयोजक सैयद मुनाज़िर हुसैन 'मंजू' के ज़ेरे एहतमाम उठाया गया। जुलूस उठने से पूर्व मजलिस को खिताब करते हुए अब्बास मूर्तज़ा शम्सी ने मौला अब्बास की शहादत बयान की।

जुलूस उठने पर लियाकत अली खां व उनके साथियों ने सवारी शुरू की- "जब हाथ कलम हो गए सक्काए हरम के, और अर्शे बरी हिल गया गिरने से अलम के" जुलूस चाहमामा होते हुए दालमंडी स्थित हकीम साहब के अज़ाख़ाने पर पहुंचा जहां से अंजुमन हैदरी चौक बनारस ने नौहाख्वानी शुरू की "अब्बास क्या तराई में सोते हो चैन से" जिसमें शराफत हुसैन, लियाकत अली खां, साहब ज़ैदी, शफाअत हुसैन शोफी, मज़ाहिर हुसैन, राजा व शानू ने नौहाख्वानी की। जुलूस दालमंडी, खजुर वाली मस्जिद, नई सड़क, फाटक शेख सलीम, काली महल, पितरकुंड, मुस्लिम स्कुल होते हुए लल्लापूरा स्थित फ़ातमान के लिए देर रात रवाना हुआ।


पूरे रास्ते उस्ताद फतेह अली खां व उनके साथियों ने शहनाई पर आंसुओं का नज़राना पेश किया। फ़ातमान से जुलूस पुनः वापस मुस्लिम स्कुल, लाहंगपूरा, रांगे की ताज़िया, औरंगाबाद, नई सड़क कपड़ा मार्केट, कोदई चौकी, सर्राफा बाजार, टेढ़ी नीम, बांस फाटक, कोतवालपूरा, कुंजीगरटोला, चौक, दालमंडी, चाहमामा होते हुए इमामबाड़े में समाप्त होगा।




ताज़िए की जियारत को उमड़े जायरीन  
पठानी टोला की फैमस हाजी उमर की नगीने की ताजिया व लल्लापुरा की रांगे की विश्व प्रसिद्ध ताजिया समेत दर्जन भर ताजिया आठवीं मोहर्रम को इमाम चौक पर बैठा दी गई। ताज़िए की जियारत को जायरीन उमड़े हुए थे।

बुधवार, 24 जून 2026

Ganga jamuni tahzib: ज़रा देखो तो दुनिया वालों बनारस में बहती है सौहार्द की आबो-हवा

ताजिया है "मंदिर" जैसी तो कुम्हार का "दिल" है अजाखाना
हरिश्चंद्र घाट स्थित कुम्हार की ताजिया -फाइल फोटो 

dil India live (Varanasi). भीतर से देखने में पूरी तरह मंदिर, मगर है अजाखाना (इमामबाड़ा) कहते हैं ये उस नन्हें कुम्हार का दिल है जिससे इस अजाखाने के निर्माण कि कहानी जुड़ी हुई है। बात हो रही है हरिश्चंद्र घाट स्थित एक ऐसे अजाखाने की जिसकी बुनियाद की कहानी एक हिंदू कुम्हार की अकीदत से जुड़ी हुई है। कुम्हार के अटूट विश्वास के कारण ही इस अजाखाने का नाम कुम्हार का अजाखाना पड़ा। इसमें एक ओर जहां शिया मुस्लिम मजलिस करते हैं तो वहीं हिंदू हाथ जोड़कर अकीदत के फूल चढ़ाते हैं। शहर ही नहीं बल्कि दुनिया का लगभग हर अजाखाना गुंबद नुमा होता है, जो मस्जिद या मकबरे की सूरत में नजर आता है। वहीं हरिश्चंद्र घाट के कुम्हार का अजाखाना मंदिर की तरह दिखता है। मुहर्रम आते ही यहां के हिंदू इसकी साफ-सफाई और रंग-रोगन का काम कराते हैं।

यहां जानिए तवारीखी अजाखाने कि दास्तां 

हरिश्चंद्र घाट स्थित कुम्हार का अजाखाना लगभग डेढ़ सौ वर्ष से भी पुराना है। इसकी देखरेख एक हिंदू कुम्हार परिवार कर रहा है, तो वहीं सरपरस्ती शिया वर्ग के हाथ में है। अजाखाना के मुतवल्ली सैयद आलिम हुसैन रिजवी हैं। वो बताते हैं कि डेढ़ सौ वर्ष पहले जहां अजाखाना है उसी के पास ही एक हिंदू कुम्हार परिवार रहता था। कुम्हार का एक बेटा था, जो हर वर्ष मुहर्रम पर मिट्टी की ताजिया बनाया करता था। पिता ने पहले तो बच्चे को ताजिया बनाने से मना किया। जब वह नहीं माना तो उसकी जमकर पिटाई कर दी। पिटाई के बाद बच्चा इतना बीमार हुआ कि वैद्य, हकीम भी काम न आए। बेटे को लेकर पिता की चिंता बढ़ने लगी। मंदिर, मस्जिद, मजार पर उसने हाजिरी लगाई, लेकिन कोई फायदा न हुआ।  

कुम्हार ने एक दिन सपने में देखा कि एक बुजुर्ग उसके सामने खड़े हैं। वह कह रहे हैं कि तेरा बेटा मुझसे अकीदत रखता है। तुमने उसे ताजिया बनाने से रोक दिया, तो वह बीमार पड़ गया है। अगर तुम्हें उससे मोहब्बत नहीं है तो मैं उसे अपने पास बुला लेता हूं। कुम्हार ने स्वप्न में ही अपनी गलती मानते हुए कहा कि बस एक बार आप मुझे माफ करके मेरे बच्चे को ठीक कर दें। इस पर बुजुर्ग ने कहा कि नींद से उठकर देख, तेरा बच्चा खेल रहा है। आलिम हुसैन अपने बुजुर्गो की सुनी जुबानी बातों को याद करते हुए बताते हैं कि नींद से जगकर कुम्हार ने देखा कि जो बच्चा गंभीर रूप से बीमार था, वह न केवल पूरी तरह स्वस्थ था, बल्कि बच्चों के साथ खेल रहा था।

हिंदू कुम्हार की आस्था के कारण ही अजाखाने के निर्माण के समय इसको मंदिर जैसा रूप दिया गया और नाम भी कुम्हार का अजाखाना रखा गया। उसी समय से आस-पास के हिंदू भाइयों की आस्था अजाखाने से जुड़ गई। मोहर्रम में जब भी अजाखाना खुलता है, वहां दोनों मजहब के लोग जुटते हैं। इसके अलावा 9 वीं व 10 वीं मुहर्रम का विश्व प्रसिद्ध दूल्हे का जुलूस यहां सात बार सलामी देता है। आलिम हुसैन बताते हैं कि उन दिनों अवध के नवाब शहादत हुसैन अपने वालिद से नाराज होकर बनारस आ गए थे। उन्हीं की वंशज बाराती बेगम ने कुम्हार के बेटे का इमाम हुसैन के प्रति लगाव देख यह अजाखाना बनवाया। इसकी देख रेख युद्ध-कौशल की शिक्षा देने वाले सैयद मीर हसन के परिवार को सौंपी गई। सैयद आलिम हुसैन और उनका कुनबा उन्हीं का वंशज हैं, जो आज भी शिवाला इलाके में निवास करता है। 

दरअसल बनारस में आबो-हवा ही कुछ ऐसी है कि यहां पग पग पर गंगा जमुनी तहज़ीब की मिसाल देखने को मिलती है। यही वजह है कि सौहार्द की इस नगरी में कोई नूर फातेमा शिव का मंदिर बनवाती है तो कोई विक्रम राय इमामबाड़ा। कबीर के इस शहर को नज़ीर बनारसी के के इस कलाम से समझा जा सकता है कि 

"मेरी एक आंख गंगा, मेरी एक आंख जमुना, मेरा दिल है संगम जिसे पूजना हो आ जाए।।"

Varanasi Main dalmandi ki रंगीले शाह मस्जिद के ज्वाइंट सेक्रेटरी ने दिया पदभार से इस्तीफा

शाहबुद्दीन अहमद अल्लाह मालिक शाही मस्जिद रंगीले शाह के प्रबंधन समिति के हैं जॉइंट सेक्रेटरी

dil india live (Varanasi). अल्लाह मालिक शाही मस्जिद रंगीले शाह के प्रबंधन समिति के जॉइंट सेक्रेटरी शाहाबुद्दीन अहमद, पुत्र स्वर्गीय ख्वाजा सरफराज अहमद, निवासी सी-4/215 ॥ FB सरायगोवर्धन चेतगंज, वाराणसी ने अपने पदभार से इस्तीफा दे दिया है। अपने त्यागपत्र को जारी करते हुए उन्होंने कहा है कि अल्लाह मालिक शाही मस्जिद (रंगीले शाह) की प्रबंधन समिति में मैं जॉइंट सेक्रेटरी के पद पर कार्यरत हूँ।

वर्तमान परिस्थितियों एवं व्यक्तिगत कारणों से मैं अपने दायित्वों का निर्वहन पूर्ववत् करने में स्वयं को असमर्थ पा रहा हूँ। इसीलिए मैं अपने पद से स्वेच्छा से तत्काल प्रभाव से त्यागपत्र प्रस्तुत करता हूँ। आपसे निवेदन है कि मेरा त्यागपत्र स्वीकार करते हुए आवश्यक कार्यवाही करने का कष्ट करें। उन्होंने इस पत्र की एक प्रति मुख्य कार्यपालक अधिकारी (CEO), उत्तर प्रदेश, सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड, लखनऊ को आवश्यक जानकारी एवं अभिलेख हेतु प्रेषित किया है।


मंगलवार, 23 जून 2026

UP के Varanasi में गेल ने किया नये CNG स्टेशन की शुरुआत

गेल द्वारा संचालित सीएनजी स्टेशनों की बनारस में संख्या पहुंची 46

dil india live (Varanasi). वाराणसी में गैस अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (गेल) ने स्वच्छ एवं पर्यावरण-अनुकूल ईंधन को बढ़ावा देते हुए अपने 46वें सीएनजी (सीएनजी) स्टेशन का शुभारंभ किया। यह नया सीएनजी स्टेशन आशापुर क्षेत्र में स्थापित किया गया है, जिससे आसपास के क्षेत्रों के निवासियों को किफायती एवं सुलभ ईंधन की सुविधा मिलेगी। इस सीएनजी स्टेशन का उद्घाटन गेल के कार्यकारी निदेशक (सीजीडी) आशु शिंगल द्वारा किया गया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि, गेल शहर में स्वच्छ ऊर्जा के प्रसार के लिए निरंतर प्रयासरत है और प्रतिदिन नए घरेलू कनेक्शनों (डीपीएनजी) की संख्या बढ़ाने के साथ-साथ अधिक से अधिक उपभोक्ताओं तक पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि वे पीएनजी को अपनाएं, ताकि एलपीजी सिलेंडरों की उपलब्धता ग्रामीण क्षेत्रों में अधिक हो सके और वहां के लोगों को इसका लाभ मिल सके।


उद्घाटन समारोह में गेल के कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे, जिनमें सुशील कुमार (महाप्रबंधक) प्रवीण सिंह, मुख्य प्रबंधक (स्टील) चंदन कुमार, आनंद मोहन, देबाशीष साहू,जे आकाश, सुमित सागर, विकास कुमार शामिल रहे। इसके साथ ही इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (आइओसीएल) के प्रतिनिधियों की उपस्थिति ने इस आयोजन को और अधिक महत्वपूर्ण बना दिया।

यह उपलब्धि वाराणसी सीजीडी के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है, क्योंकि अब गेल शहर में कुल 46 सीएनजी स्टेशनों का संचालन कर रहा है। इससे नागरिकों को स्वच्छ ईंधन की आसान उपलब्धता सुनिश्चित होगी और शहर के विभिन्न हिस्सों में सीएनजी नेटवर्क और मजबूत होगा। सीएनजी एक स्वच्छ, सुरक्षित एवं किफायती ईंधन है, जो पारंपरिक ईंधनों की तुलना में कम प्रदूषण फैलाता है। इसके उपयोग से वाहनों की कार्यक्षमता बढ़ती है, रखरखाव लागत कम होती है तथा कार्बन उत्सर्जन में कमी आती है, जिससे पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलता है। गेल वाराणसी लगातार सीएनजी एवं पीएनजी नेटवर्क का विस्तार कर रहा है। कंपनी आधुनिक तकनीक, उच्च सुरक्षा मानकों तथा विश्वसनीय आपूर्ति के माध्यम से शहरवासियों को बेहतर ऊर्जा समाधान प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। इसके साथ ही गेल स्थानीय स्तर पर अधोसंरचना विकास एवं रोजगार सृजन में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।

गेल का यह प्रयास वाराणसी को स्वच्छ, हरित एवं प्रदूषण-मुक्त शहर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

7 moharram: बड़ागांव, चौहट्टा में मेंहदी और दुलदुल का निकला जुलूस

लोहता में अलम सददा की जियारत तो रिज़वी हाउस में ख़्वातीन का मातम


dil india live (Varanasi). 7 moharram को शहर भर अनेक आयोजन कर्बला के शहीदों की याद में आयोजित हुआ। इस मौके पर चौहट्टा लाल खां से सातवीं मुहर्रम मंगलवार को मेंहदी, ताबूत, अलम और दुलदुल का कदीमी जुलूस परम्परागत तरीके से निकाला गया। इस जुलूस में विभिन्न अंजुमनों ने नौहाख्वानी व मातम का नज़राना पेश किया। उधर बड़ागांव में मजलिस को मौलाना सैयद शकिर इमाम गाजीपुरी ने खिताब करते हुए कर्बला के मसायब बयान किया। इसके बाद जुलुस मरहूम सैय्यद अब्बास हुसैन के इमामबाड़े से निकला। जुलूस में शामिल महेंदी, अल्लम, दुलदुल संग सैकड़ों लोग नौहाख्वानी व मातम करते हुए चल रहे थे।

जुलूस अपने कदीमी रास्तों से होता हुआ अब्बासिया मस्जिद स्थित कर्बला एवं गंजे शहीदा पर पहुंचा जहां रौजे पर सलामी देकर पुनः इमामबाड़े पहुंच कर समाप्त हुआ। जुलुस में रास्ते भर नगर की विभिन्न अंजुमानों ने नौहाख्वानी, मातम किया। जुलूस में मुख्य रूप से सैयद अबूल हसन, सैयद जफरूल हसन, आरिफ, जेमी, प्रिन्स, अम्मार, बादशाह हुसैन, खुशीद हुसैन, जिशान हुसैन, मोहम्मद दानिश, कमरुल हसन, रूमान हुसैन आदि शामिल थे। 

इसी क्रम में चौहट्टा लाल खां स्थित अजाखाना मोहतमिम कासिम का प्राचीन जुलूस देर रात्रि में निकाला गया। जुलूस निकलने से पूर्व मजलिस को डाक्टर शफीक हैदर ने खिताब किया। जुलूस में अंजुमन आबिदिया ने दर्द भरा नौहा पढ़ा जिसे सुनकर अकीदत मंदों की आंखे नम हो गयी। गमें शब्बीर क्या-क्या है, इसे बिस्मिल समझते है, कहानी कर्बला वालों की अहले दिल समझाते है। जुलूस में इस्लाम एण्ड पाटी ने शहनाई पर मातमी धुन प्रस्तुत की। ऊंट, बैण्ड बाजा और ताशा, ढोल से जुलूस का आकर्षण बढ़ गया। अकीदत मंद महिलाओं, पुरुष और बच्चों का हुजूम देर रात्रि तक जमा रहा। मेंहदी का जुलूस अपने कदीमी रास्तो इमामबाड़ा मीरघुरा होता हुआ सदर इमामबाड़ा लाट सरैया जाकर समाप्त हुआ। रास्ते भर अकीदतमंदो ने दुलदुल को दूध पिलाया और मन्नते व मुराद मानी। जुलूस में विभिन्न अंजुमनों ने नौहाख्वानी, मातम किया। 


कदीमी बाल का हुआ मातम, जुटी ख़्वातीन 

सातवीं मुहर्रम मंगलवार को पूर्वाहन १२ बजे शेख सलीम फाटक स्थित रिज़वी हाउस पर खातूनों महिलाओं ने कदीमी बाल का मातम किया और मन्नत मांगा। इस दौरान मजलिस को सम्बोधित करती हुई मोहतरमा नुजहत फरमान ने कहाकि हजरत इमाम हुसैन हजरत इमाम के भतीजे हजरत कासिम जो इमाम हसन के १३ वर्षीय पुत्र पुत्र थे, जिनका अकद इमाम हुसैन की बेटी फातिमा कुबरा से हुआ था और वे कर्बल की जंग में शहीद हो गये थे। यजीदों ने खैमें में आग लगा दी, लाशे इमाम हुसैन पामाल किया। उनकी लाश कर्बला की जलती रेत पर चालीस दिनों तक बेगोरों कफन रही। नन्हें अली असगर को शहीद कर दिया गया। शामे गरीबा आ गयी, कर्बलावालों ने सब कुछ बर्दाशत किया। आज यही वजा है कि सारी दुनिया में हुसैन का नाम याद किया जाता है ओर यजीद जिंदा रहकर मुर्दाबाद हो गया। हुसैन शहीद होकर कयामत तक लोगों के दिलों में जिंदा रहेंगे। हुसैन कल भी जिंदाबाद थे, आज भी जिन्दाबाद है। मोतरमा नुजहत फरमान ने कहाकि लाखों रौजे है जहां में हजरते अब्बास के ऐ यजीदों बेहया तेरा ठिकाना है कहां, सारे मसलक की किताबों को उठाकर देख लो, कर्बला सा वकेया दुनिया में मिलता है कहां।

इस मौके पर या हुसैन-या हुसैन... की सदा आने लगी। मजलिस में शामिल सैकड़ों महिलाओं की आंखों से आंसू छलक पड़े। मजलिस के बाद अंजुमन हैदरी निस्वां ने प्रभावशाली नौहा पढ़ा और बाल का मातम किया गया और कर्बला के मंजर को दर्शाया गया। नौहे के बोल कुछ इस तरह थे ये पुकारे रन में असगर वे जुबान वे जुबानी, कोई तुम में है मुसलमां जो पिला दे मुझको पानी, मैं हुसैन का हूं बेटा और हसन का हूं भतीजा, मेरे जद रसूले वर हक मैं अली की हूं निशानी। सुनते ही दूर-दराज से आयी महिलाओं की आंखों से आंसुओं के एक-एक कतरे बहने लगे और कर्बला का मंजर याद आने लगे। 

इस अनोंखे बाल के मातम और मजलिस को सुनने के लिए दूर-दराज से सैकड़ों की संख्या में गाजीपुर, जौनपुर, शाहगंज, आजमगढ़, मऊ, इलाहाबाद, मिर्जापुर, दुलाईपुर, बड़ागांव, रामनगर आदि जिलों से आयी हुई थी। जायरीनों में तबरुक (प्रसाद) का भी वितरण किया गया। उधर लोहता में अलम सददा का जुलूस निकाला गया। कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच छोटे बड़े रंग-बिरंगे अलम सददा को देखने, अलम सददा की जियारत करने लोगों का हुजूम उमड़ा हुआ था।