गुरुवार, 3 सितंबर 2026

Education News 2 September 2026 Varanasi: युवाओं को मिला सजग खान-पान और स्वस्थ जीवनशैली का संदेश

भोजन केवल व्यक्तिगत पसंद नहीं, अनेक सामाजिक, आर्थिक और मनोवैज्ञानिक कारकों का परिणाम : प्रो. अंशु शुक्ला



dil india live (Varanasi). राष्ट्रीय पोषण माह के अवसर पर धीरेंद्र महिला पी.जी. कॉलेज के गृह विज्ञान विभाग द्वारा छात्राओं में संतुलित आहार, सजग खान-पान एवं स्वस्थ जीवनशैली के प्रति जागरूकता उत्पन्न करने के उद्देश्य से विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में वसंत कन्या महाविद्यालय, कमच्छा की प्रो. अंशु शुक्ला ने “आप वही हैं जो आप खाते हैं, लेकिन आप जो खाते हैं, उसका चुनाव कौन कर रहा है? युवाओं के खान-पान के चुनाव और उन्हें प्रभावित करने वाले छिपे कारक” विषय पर विद्यार्थियों को रोचक कहानी एवं संवादात्मक शैली में संबोधित किया।

अपने व्याख्यान को पारंपरिक पोषण संबंधी उपदेश से अलग रखते हुए प्रो. अंशु शुक्ला ने एक काल्पनिक युवा पात्र की दैनिक जीवनचर्या के माध्यम से विद्यार्थियों को यह समझाया कि भोजन का चुनाव हमेशा उतना सरल और स्वतंत्र नहीं होता, जितना पहली दृष्टि में दिखाई देता है। उन्होंने विद्यार्थियों के समक्ष यह प्रश्न रखा कि जब कोई युवा नाश्ता छोड़ता है, भोजनालय में उपलब्ध त्वरित भोजन का चयन करता है, सामाजिक माध्यमों पर किसी खाद्य पदार्थ को देखकर उसे खाने की इच्छा महसूस करता है अथवा किसी आकर्षक विज्ञापन से प्रभावित होकर कोई खाद्य पदार्थ खरीदता है, तो क्या वह प्रत्येक स्थिति में पूरी तरह स्वतंत्र होकर निर्णय ले रहा होता है?

उन्होंने कहा कि हमारे खान-पान के निर्णय केवल व्यक्तिगत रुचि या इच्छा से निर्धारित नहीं होते। परिवार, मित्र-समूह, आर्थिक स्थिति, भोजन की उपलब्धता, समय का अभाव, सुविधा, स्वाद, आदत, तनाव, सामाजिक परिवेश, विज्ञापन, संचार माध्यम तथा सामाजिक माध्यम जैसे अनेक कारक हमारे भोजन संबंधी व्यवहार को प्रभावित करते हैं। विशेष रूप से युवाओं के जीवन में सामाजिक माध्यमों और डिजिटल माध्यमों की बढ़ती भूमिका ने भोजन के प्रति उनकी पसंद और इच्छाओं को प्रभावित करने की नई परिस्थितियाँ उत्पन्न की हैं।


प्रो. शुक्ला ने विद्यार्थियों को समझाया कि भूख और किसी विशेष खाद्य पदार्थ की तीव्र इच्छा एक समान नहीं होती। कई बार व्यक्ति शारीरिक रूप से भूखा न होने पर भी किसी खाद्य पदार्थ को देखकर, उसकी सुगंध से अथवा उसके प्रचार से उसे खाने के लिए प्रेरित हो जाता है। इसलिए स्वस्थ खान-पान की दिशा में पहला कदम भोजन पर प्रतिबंध लगाना नहीं, बल्कि अपने भोजन संबंधी व्यवहार को समझना और उसके पीछे के कारणों के प्रति सजग होना है।

उन्होंने भोजन के आकर्षक प्रचार एवं पैकेट पर लिखे विभिन्न दावों के प्रति भी विद्यार्थियों को सचेत किया। उन्होंने कहा कि केवल “बहु-अनाज”, “अधिक प्रोटीन”, “प्राकृतिक” अथवा “शून्य शर्करा” जैसे आकर्षक शब्दों को देखकर किसी खाद्य पदार्थ को पूर्णतः स्वास्थ्यवर्धक मान लेना उचित नहीं है। उपभोक्ताओं को खाद्य पदार्थ के लेबल, संघटक, मात्रा तथा पोषण संबंधी जानकारी को समझकर निर्णय लेना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों को संदेश दिया कि “पैकेट के सामने लिखे दावे से अधिक महत्वपूर्ण उसके पीछे दी गई वास्तविक जानकारी है।”

व्याख्यान के दौरान उन्होंने भोजन को “अच्छा” और “बुरा” कहकर देखने की प्रवृत्ति पर भी चर्चा की। उन्होंने स्पष्ट किया कि स्वस्थ खान-पान का अर्थ किसी एक खाद्य पदार्थ को पूर्णतः त्याग देना नहीं है, बल्कि संतुलित, विविधतापूर्ण और संयमित आहार पद्धति विकसित करना है। एक बार पिज्जा, मिठाई अथवा किसी अन्य पसंदीदा खाद्य पदार्थ का सेवन व्यक्ति के संपूर्ण स्वास्थ्य का निर्धारण नहीं करता; वास्तविक महत्व उसके दीर्घकालीन खान-पान के स्वरूप और आदतों का होता है।

युवाओं में बढ़ते त्वरित एवं अत्यधिक प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों के सेवन पर चर्चा करते हुए प्रो. शुक्ला ने कहा कि व्यवहार में परिवर्तन हमेशा एक दिन में संभव नहीं होता। यदि कोई युवा जंक फूड का सेवन तत्काल पूरी तरह बंद नहीं कर सकता, तो उसे लेकर अपराधबोध उत्पन्न करने के बजाय उसकी मात्रा एवं आवृत्ति को धीरे-धीरे कम करने तथा उसके स्थान पर अधिक पौष्टिक और संतुलित विकल्पों को शामिल करने का प्रयास करना चाहिए। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य का लक्ष्य पूर्णतावाद नहीं, बल्कि निरंतर बेहतर विकल्पों की ओर बढ़ना होना चाहिए।

उन्होंने विद्यार्थियों का ध्यान भारतीय खान-पान की समृद्ध परंपरा की ओर भी आकर्षित किया। दाल, अनाज, मोटे अनाज, सब्जियाँ, मौसमी फल, दही, अंकुरित अनाज, मेवे एवं बीज जैसे पारंपरिक खाद्य पदार्थों में उपलब्ध पोषण विविधता को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि आधुनिक जीवनशैली अपनाने का अर्थ अपनी पारंपरिक खाद्य विरासत को भूल जाना नहीं है। स्थानीय, मौसमी और विविधतापूर्ण खाद्य पदार्थों को आधुनिक जीवनशैली के साथ संतुलित रूप से जोड़ा जा सकता है।

प्रो. शुक्ला ने यह भी स्पष्ट किया कि स्वस्थ जीवन केवल भोजन तक सीमित नहीं है। संतुलित आहार, पर्याप्त जल सेवन, नियमित शारीरिक सक्रियता, पर्याप्त नींद, तनाव का उचित प्रबंधन तथा सजग भोजन व्यवहार एक समग्र स्वस्थ जीवनशैली के महत्वपूर्ण अंग हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को प्रेरित किया कि शारीरिक सक्रियता को केवल व्यायामशाला तक सीमित न मानें, बल्कि पैदल चलना, सीढ़ियों का उपयोग करना, खेलना, नृत्य करना तथा दैनिक जीवन में सक्रिय रहना भी जीवनशैली का हिस्सा बनाएं।

व्याख्यान का एक महत्वपूर्ण संदेश “ज्ञान और व्यवहार के बीच का अंतर” रहा। प्रो. शुक्ला ने कहा कि अधिकांश युवाओं को यह जानकारी होती है कि फल-सब्जियाँ उपयोगी हैं, नियमित शारीरिक सक्रियता आवश्यक है और अत्यधिक अस्वास्थ्यकर खाद्य पदार्थों का सेवन उचित नहीं है; फिर भी केवल जानकारी व्यवहार में परिवर्तन की गारंटी नहीं देती। इसके लिए व्यक्ति को अपने समय, सुविधा, आर्थिक परिस्थितियों, सामाजिक परिवेश और आदतों को ध्यान में रखते हुए ऐसे छोटे एवं व्यावहारिक परिवर्तन करने होंगे जिन्हें वह लंबे समय तक बनाए रख सके।


इसी संदर्भ में उन्होंने विद्यार्थियों को भोजन चुनते समय स्वयं से पाँच प्रश्न पूछने का सुझाव दिया—मैं क्या खा रहा/रही हूँ? मैं इसे क्यों खा रहा/रही हूँ? मैं कितना खा रहा/रही हूँ? मैं इसे कितनी बार खाता/खाती हूँ? और मेरे समग्र आहार में क्या कमी रह जा रही है? उन्होंने कहा कि इन प्रश्नों का उद्देश्य स्वयं को दोषी ठहराना नहीं, बल्कि भोजन के प्रति सजगता विकसित करना है।


कार्यक्रम में भारत सरकार की आहार क्रांति पहल (GIST Initiative) के अंतर्गत उत्तम पोषण एवं उत्तम स्वास्थ्य के महत्व के बारे में भी विद्यार्थियों को जानकारी दी गई। विद्यार्थियों को संतुलित एवं विविधतापूर्ण आहार, स्थानीय एवं पारंपरिक खाद्य पदार्थों के महत्व तथा स्वस्थ जीवनशैली के प्रति जागरूक किया गया। उन्हें यह संदेश दिया गया कि स्वस्थ राष्ट्र की आधारशिला स्वस्थ एवं जागरूक युवा पीढ़ी से ही निर्मित होती है।

कार्यक्रम का संचालन गृह विज्ञान विभाग की डॉ. अर्चना सिंह ने किया। विभाग की ओर से रेखा पटेल एवं तनुश्री मिश्रा ने मुख्य वक्ता प्रो. अंशु शुक्ला एवम् सुश्री शालिनी प्रिया, शोध क्षात्रा का स्वागत किया। कार्यक्रम के अंत में हिंदी विभाग की विनीता जी ने आभार व्यक्त किया।

कार्यक्रम ने विद्यार्थियों को पोषण संबंधी जानकारी देने के साथ-साथ अपने दैनिक भोजन संबंधी निर्णयों को नए दृष्टिकोण से देखने का अवसर प्रदान किया। व्याख्यान का मूल संदेश यही रहा कि स्वस्थ भविष्य किसी एक बड़े संकल्प से नहीं, बल्कि प्रतिदिन लिए जाने वाले छोटे-छोटे सजग निर्णयों से निर्मित होता है। युवाओं के लिए आवश्यक है कि वे भोजन को केवल स्वाद और तात्कालिक सुविधा के आधार पर न देखें, बल्कि उसके पोषण, आवश्यकता, मात्रा, आवृत्ति और अपने समग्र स्वास्थ्य के संदर्भ में समझदारी से चुनाव करें।

“भोजन आपका चुनाव है, लेकिन उस चुनाव को प्रभावित करने वाली दुनिया को पहचानना भी उतना ही आवश्यक है।”

URS Mubarak Hazrat Baba Bahadur शहीद रहमतुल्लाह अलैह में बरसात के बावजूद जुटे अकीदतमंद

कोई हम को दबा नहीं सकता, हम बहादुर शहीद वाले हैं...

हज़रत बहादुर शहीद के उर्स पर उमड़ा जनसैलाब
Hazrat Baba Bahadur Shahid News Varanasi September 2026


dil India live (Varanasi). मुश्किलों में सदा संभाले हैं शहरे काशी में ये निराले हैं, कोई हमको दबा नहीं सकता, हम बहादुर शहीद वाले हैं...।

यह कलाम जब मशहूर शायर अहमद आज़मी ने वाराणसी में छावनी स्थित सद्भावना पार्क में तशरीफ़ फ़रमा हजरत बाबा बहादुर शहीद रहमतुल्लाह अलैह के उर्स में पेश किया तो मजमा मचल उठा, लोगों ने नारे तकबीर अल्लाह हो अकबर.. की सदाएं बुलंद कर उठें। 

कौमी एकता की मिसाल, हज़रत बाबा बहादुर शहीद रहमतुल्लाह अलैह का सालाना उर्स मुबारक देर रात गुस्ल शरीफ के साथ शुरू हुआ। गुस्ल से पहले बाबा के सद्भावना पार्क में जश्ने ईद मिलाद-उन-नबी का जलसा हुआ जिसमें सभी मज़हब के लोगों का हुजूम उमड़ा हुआ था। बरसात के बावजूद लोगों के हौसले बुलंद थे। इस दौरान अहमद आज़मी का एक और कलाम लोगों की जुबान पर राज करता दिखा। 





क्या बयां करे कोई मर्तबा मदीने का, अर्श पे भी होता है तज़किरा मदीने का...। इसे लोग गुनगुनाते नज़र आएं। इस दौरान निज़ाम बनारसी ने भी कई उम्दा कलाम पेश किया।

उर्स में 1 सितंबर 2026, बरोज़ मंगलवार जश्न ईद मिलादुन्नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) और रात 2:30 बजे कुल शरीफ व सुबह लंगर का प्रोग्राम हुआ। गद्दीनशीन बड़े सगीरउल्लाह खान व समीउल्लाह खान की अगुवाई में जलसे में मौलाना शम्सुद्दीन साहब रज़वी और मौलाना अब्दुल कय्यूम आदि ने नूरानी तकरीर किया। नकीबुल हिंद कारी वसीम अकरम की निजामत और हफीज़ अहमद आजमी, निज़ाम बनारसी जैसे शायरों ने अपने कलाम से हज़रत बहादुर शहीद को खिराजे अकीदत पेश किया।

गुस्ल का पानी जायरीन में हुआ तकसीम 

जलसे के साथ ही हज़रत बाबा बहादुर शहीद रहमतुल्लाह अलैह का मध्यरात्रि गुस्ल हुआ। इस मौके पर गुस्ल का पानी सभी जायरीन में तकसीम किया गया। इसे लेने के लिए लोग दूर दराज़ से बाबा के दर पर जुटे हुए थे। माना जाता है कि गुस्ल के पानी से तमाम लोगों को अचूक फायदा होता है। इस मौके पर उलेमा ने औलिया कराम की ज़िंदगी और उनकी रहनुमाई की चर्चा की। उलेमा ने कहा कि नबी और सहाबा के मिशन को औलिया-ए-कराम ने आगे बढ़ाया। हज़रत बहादुर शहीद के रास्ते पर मौजूद लोगों से चलने की वकालत की।

उर्स के दूसरे रोज़ बुधवार की शाम चादर गागर का जुलूस बाबू भाई के दौलतखाने से निकला जो मगरिब की नमाज़ के बाद बाबा के दर पर पहुंचा, जहां बाबा की चादरपोशी की गई व देर रात महफिले समां का आयोजन हुआ।

अकीदत का मरकज़ हज़रत बहादुर शहीद का दर 

 हज़रत बहादुर शहीद का दर लोगों की बिगड़ी बनाने के लिए मशहूर है। जो परेशानहाल हैं या फिर भूत प्रेत ने जिन्हें घेर रखा है, या जिसे औलाद नहीं हो रही है ऐसे लोग बाबा के आस्ताने पर दस्तक देते हैं और यहां से सुकुन पाकर, अपनी झोली भर कर वापस लौटते हैं। गद्दीनशीं मो. सग़ीरुल्लाह खां दावा करते हैं कि यह आस्ताना मिल्लत का मरकज़ है। यहां सभी मज़हब के लोग बिना किसी भेदभाव के हाजिरी लगाने उमड़ते हैं। वो दिखाते हैं कि ये देखिये भूतों से छुटकारा पाने के लिए झूमती औरतें, पुरुष और बुजुर्ग दिन भर यहां आते हैं और बाबा के फैज़ से ठीक हो कर यहां से जाते हैं। यहां आने वालों का भरोसा बाबा में है जो उन्हें इस आधुनिक युग में भी जिसमें साइंस भूत-प्रेत जैसी बातों को नहीं मानता, फिर भी तमाम लोग हज़ारों की संख्या में यहां से फ़ैज़ उठाने आते हैं। 

पूर्वांचल के साथ ही बिहार, दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, मुंबई तक से लोग यहां अपनी परेशानी दूर करने पहुंचते है। बाबा के उर्स में मेला लगा हुआ था। आम दिनों में भी यहां काफी भीड़ होती है। हर जुमेरात व नवचंदी जुमेरात को भूत, प्रेत से छुटकारे के लिए जायरीन आते हैं। लोगों का दावा है कि शैतान (भूत) कितना भी शक्तिशाली हो बाबा के गुस्ल का पानी पड़ते ही वो पनाह मांगता है। इस दर पर सभी का मज़हब एक है वो है मानवता।

बुधवार, 2 सितंबर 2026

All schools from class 1 to 8 closed due to heavy rains

भारी बारिश की संभावना के चलते कल नहीं खुलेंगे स्कूलों के कपाट
school closed News update Varanasi Uttar Pradesh 3 September 2026

dil india live (Varanasi). वाराणसी जनपद में हो रही अत्यधिक वर्षा तथा आगामी मौसम के पूर्वानुमान को ध्यान में रखते हुए जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी भूपेन्द्र सिंह द्वारा जारी कार्यालय आदेश के अनुसार 03 September 2026 को अवकाश रहेगा। यह अवकाश परिषदीय, मान्यता प्राप्त, सहायता प्राप्त एवं अन्य बोर्डों से संचालित कक्षा-1 से 8 तक के सभी विद्यालयों पर समान रूप से लागू होगा। 


  

जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी की ओर से जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि अवकाश केवल विद्यार्थियों के लिए रहेगा। परिषदीय विद्यालयों के सभी शिक्षक और शिक्षणेत्तर कर्मचारी विद्यालय में उपस्थित रहेंगे। इस दौरान उन्हें अपार, डीबीटी, यू-डायस और अन्य विभागीय कार्य पूरे करने होंगे।

Education News Varanasi Uttar Pradesh 02 September 2026: VKM kamacha में हिन्दी विभाग की पत्रिका 'पुनर्नवा' के द्वितीय संस्करण का अनावरण

हिंदी विभाग की छात्राएं  'पुनर्नवा' का स्वयं करती हैं प्रकाशन

education News Varanasi Uttar Pradesh 02 September 2026


dil india live (Varanasi). वसंत कन्या महाविद्यालय, कमच्छा, वाराणसी (VKM kamacha Varanasi) में हिन्दी विभाग की पत्रिका 'पुनर्नवा' के द्वितीय संस्करण का अनावरण प्राचार्या  प्रो. रचना श्रीवास्तव, प्रबंधक उमा भट्टाचार्या, पिलग्रिम्स के प्रकाशक रामानंद तिवारी एवं हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो.आशा यादव द्वारा किया गया। पत्रिका के संदर्भ में विभागाध्यक्ष प्रो.आशा यादव ने बताया कि यह पत्रिका विभाग की छात्राओं द्वारा निकाली जाती है जिसमें हिंदी विभाग की सभी छात्राओं के सृजनात्मक लेखन को प्रकाश में लाने का प्रयास रहता है। इसके साथ ही उनके भीतर प्रकाशन कौशल का निर्माण भी इस पत्रिका का ध्येय है। 'पुनर्नवा' के इस द्वितीय संस्करण में कविता, कहानी, नाटक, समीक्षात्मक लेख, संस्मरण एवं साक्षात्कार इत्यादि विधाओं की रचनाएं प्रकाशित हैं। इसके संपादक मंडल में मांडवी सिन्हा, सृष्टि कुमारी, रिद्धिमा जायसवाल, वंदना गुप्ता एवं मोनिका का महत्वपूर्ण योगदान रहा। 

अनावरण समारोह में जुटीं हस्तियां 

इस आयोजन में पं. हरिराम द्विवेदी भोजपुरी भाषा एवं साहित्य शोध अध्ययनपीठ के अध्यक्ष अरूण कुमार द्विवेदी, उपाध्यक्ष, प्रो. सविता भारद्वाज एवं सांस्कृतिक प्रकोष्ठ की अध्यक्ष प्रो. मीनू पाठक के साथ ही काशी कला कस्तूरी की अध्यक्ष- डाॅ. शबनम खातून, डॉ. जया शाही (वसंत महिला महाविद्यालय राजघाट) उपस्थित थीं तथा वरिष्ठ कलाप्रेमी एवं विद्वानों  में डाॅ. सरिता लखोटिया, डाॅ. कुसुम मिश्रा (पूर्व प्राचार्या, वसन्त कन्या महाविद्यालय), डाॅ. बीना सिंह, डाॅ. स्वरवन्दना शर्मा,गृह विज्ञान विभाग से प्रो. संगीता देवड़िया, प्रो. गरिमा उपाध्याय, प्रो. अंशु शुक्ला, संगीत गायन विभाग से प्रो. सीमा वर्मा, डाॅ. पूनम वर्मा, सौम्यकान्ति मुखर्जी, मनोविज्ञान विभाग से डॉ. शशिप्रभा ने अपनी उपस्थिति से कार्यक्रम को गरिमा प्रदान की तो हिन्दी विभाग से प्रो. सपना भूषण,डाॅ. शुभांगी श्रीवास्तव, डाॅ0. प्रीति विश्वकर्मा, राजलक्ष्मी के साथ ही हिन्दी विभाग की सभी विद्यार्थियों ने सक्रिय सहभागिता करते हुए अपनी उपस्थिति दर्ज की।



मंगलवार, 1 सितंबर 2026

Education News Varanasi Uttar Pradesh 01September 2026: नीलम राय ने किया जिले का नाम किया रोशन, मिल रही है बधाइयां

वाराणसी की शिक्षिका नीलम राय को राज्य अध्यापक पुरस्कार-2025


dil india live (Varanasi). जनपद वाराणसी के लिए गौरव का क्षण है। उत्तर प्रदेश राज्य अध्यापक पुरस्कार-2025 के लिए प्राथमिक विद्यालय मण्डुआडीह, विकासखंड काशी विद्यापीठ की सहायक अध्यापक नीलम राय का चयन हुआ है। उनके चयन की जानकारी बेसिक शिक्षा अधिकारी ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी साझा की है। राज्य अध्यापक पुरस्कार-2025 के लिए चयनित होने की खबर जब उनके प्राथमिक विद्यालय मण्डुआडीह (विकासखंड काशी विद्यापीठ) में पहुंची तो सहायक अध्यापक नीलम राय का वहां के अन्य शिक्षकों, कर्मचारियों व पैरेंट्स ने ज़ोरदार स्वागत किया। उन्हें सभी ने बधाई देते हुए फूल मालाओं से लाद दिया।


इस संबंध में जानकारी देते हुए BSA Varanasi Bhupendra Singh ने कहा उनके इस चयन पर पूरे शिक्षा विभाग और जनपद में हर्ष का माहौल है। उनके निष्ठापूर्ण सेवाभाव, उत्कृष्ट शिक्षण कार्य और समर्पण को देखते हुए उन्हें इस सम्मान के लिए चुना गया है। यह सम्मान न केवल उनके लिए, बल्कि समस्त जनपद वाराणसी के लिए गर्व का विषय है। उनकी यह उपलब्धि अन्य शिक्षक-शिक्षिकाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी। उधर दिल इंडिया लाइव परिवार की तरफ से संपादक अमन ने नीलम राय को हार्दिक बधाई एवं अनंत शुभकामनाएं पेश की।

Education News Varanasi Uttar Pradesh September 2026






Sport News Varanasi Uttar Pradesh September 2026:कराटे के 115 बच्चों ने विभिन्न श्रेणियों की कलर बेल्ट परीक्षा में किया प्रतिभाग

इन खिलाड़ियों को मिली "ब्लैक बेल्ट" तो चेहरे पर दिखी खुशियां 
sport News Varanasi Uttar Pradesh September 2026


dil india live (Varanasi). वाराणसी में सिकोकाई कराटे-डू इंटरनेशनल, वाराणसी इकाई के प्रशिक्षुओं के लिए कोइराजपुर स्थित संत अतुलानंद कॉन्वेंट स्कूल परिसर में बेल्ट प्रमोशन टेस्ट आयोजित हुआ, जिसमें आरम्भ स्पोर्ट्स एंड फिटनेस एकेडमी के सात प्रशिक्षुओं को ब्लैक बेल्ट की उपाधि प्रदान की गई।
परीक्षा में कुल 115 बच्चों ने विभिन्न श्रेणियों की कलर बेल्ट परीक्षा में प्रतिभाग किया जिसमें से 7 ब्लैक बेल्ट रहे। इसके अलावा 27 येलो बेल्ट, 13 ऑरेंज बेल्ट, 13 ग्रीन बेल्ट, 8 ब्लू बेल्ट, 9 पर्पल बेल्ट, 18 ब्राउन बेल्ट, 6 फर्स्ट स्ट्राइप, 7 सेकेंड स्ट्राइप तथा 6 थर्ड स्ट्राइप प्राप्त करने वाले प्रशिक्षु शामिल रहे। परीक्षा में प्रशिक्षुओं का प्रायोगिक (प्रैक्टिकल) एवं सैद्धांतिक (थ्योरी) दोनों स्तरों पर मूल्यांकन किया गया। 

इन्हें मिली ब्लैक बेल्ट की उपाधि 

ब्लैक बेल्ट प्राप्त करने वाले प्रशिक्षुओं में डा. रुचि मिश्रा, वेदान्श त्रिपाठी, प्रशांत सिंह, ख्याति गिरी, रिवाना दास, प्रशांत रावत एवं प्रशंसा सिंह शामिल रही। इन सभी 7 प्रशिक्षुओं ने ब्लैक बेल्ट की परीक्षा में शानदार प्रदर्शन करते हुए ए एवं बी ग्रेड से सफलता हासिल की।

मुख्य अतिथि स्वामी अतुलानंद रचना परिषद के सचिव व आरम्भ स्पोर्ट्स एंड फिटनेस अकादमी के अध्यक्ष ई. राहुल सिंह ने सभी सफल विद्यार्थियों को प्रमाण पत्र एवं बेल्ट प्रदान किए। परीक्षा के मुख्य निर्णायक रेन्शी अजीत श्रीवास्तव के निर्देशन में सदस्य सेंसेई राजेन्द्र तिवारी, सेंसेई गणेश विश्वकर्मा, सेम्पई सोनम राईन, आकाश सोनकर, पंकज यादव एवं आयुष श्रीवास्तव निर्णायक रहे। संयोजन शिंहान अखिलेश रावत ने किया।

सोमवार, 31 अगस्त 2026

VKM kamacha Varanasi news august 2026: पं. हरिराम द्विवेदी के गीतों पर एकाग्र गीतांजलि समारोह का हुआ आयोजन

झूमें श्रोता: डा. जया शाही ने किया भोजपुरी लोकगीतों की मनमोहक प्रस्तुति

Education News VKM kamacha Varanasi Uttar Pradesh August 2026


dil india live (Varanasi). वाराणसी के वसन्त कन्या महाविद्यालय, कमच्छा में 31.08.2026 को हिन्दी विभाग के पं. हरिराम द्विवेदी भोजपुरी भाषा एवं साहित्य शोध अध्ययनपीठ और काशी कला कस्तूरी वाराणसी के संयुक्त तत्वावधान में पं. हरिराम द्विवेदी के गीतों पर एकाग्र गीतांजलि समारोह का आयोजन किया गया। इस अवसर पर वसन्त महिला महाविद्यालय, राजघाट से मुख्य अतिथि कलाकार डाॅ. जया शाही द्वारा पं. हरिराम द्विवेदी के भोजपुरी लोकगीतों की मनमोहक प्रस्तुति की गयी। 

कजरी ने किया रस माधुर्य का संचार

जया शाही के मधुर स्वरों में विदाई गीत, झूला गीत, सोहर एवं कजरी ने वातावरण में रस माधुर्य का संचार कर दिया। इस दौरान मौजूद श्रोता झूम उठें। आयोजन में अतिथियों का स्वागत करते हुए प्राचार्या प्रो. रचना श्रीवास्तव ने पं. हरिराम द्विवेदी के वैविध्यपूर्ण सृजनात्मकता को याद करते हुए उनको नमन किया। महाविद्यालय की प्रबंधक उमा भट्टाचार्या द्वारा सभी के लिए शुभ मंगल कामना संदेश प्रेषित किया गया। कार्यक्रम में औपचारिक धन्यवाद ज्ञापित करते हुए हिन्दी विभागाध्यक्ष एवं अध्ययनपीठ की महासचिव प्रो. आशा यादव ने पण्डित जी के रचना संसार के सौन्दर्य को व्याख्यायित किया। उन्होंने कहा कि पं. हरिराम द्विवेदी का व्यक्तिगत करूणा, प्रेम इत्यादि भाव उनकी रचनाओं में समष्टिगत होकर आयी है। यही समष्टि भाव उनके रचनात्मक व्यक्तित्व को अमर बना देती है।

VKM kamacha Varanasi news august 2026

education News Varanasi Uttar Pradesh 2026

आयोजन में इनकी रही खास मौजूदगी 

इस आयोजन में पं. हरिराम द्विवेदी भोजपुरी भाषा एवं साहित्य शोध अध्ययनपीठ के अध्यक्ष अरूण कुमार द्विवेदी, उपाध्यक्ष, प्रो. सविता भारद्वाज एवं सांस्कृतिक प्रकोष्ठ की अध्यक्ष प्रो. मीनू पाठक, काशी कला कस्तूरी की अध्यक्ष डाॅ. शबनम खातून के अलावा डाॅ. सरिता लखोटिया, डाॅ. कुसुम मिश्रा (पूर्व प्राचार्या, वसन्त कन्या महाविद्यालय), डाॅ. बीना सिंह, डाॅ. स्वरवन्दना शर्मा, पिलग्रिम्स के पूर्व प्रकाशक रामानन्द तिवारी, गृह विज्ञान विभाग से प्रो. संगीता देवड़िया, प्रो. गरिमा उपाध्याय, प्रो. अंशु शुक्ला, संगीत गायन विभाग से प्रो. सीमा वर्मा, डाॅ. पूनम वर्मा, सौम्यकान्ति मुखर्जी, मनोविज्ञान विभाग से डॉ. शशिप्रभा, हिन्दी विभाग से प्रो. सपना भूषण, डाॅ. शुभांगी, डाॅ. प्रीति, राजलक्ष्मी उपस्थित रहीं। तबले पर अमित, हारमोनियम पर हर्षित ने संगत की तो संचालन राजलक्ष्मी ने किया।