श्लोक अंत्याक्षरी में शिवेंद्र, संस्कृत गीत में रोहित रहे प्रथम
dil india live (Varanasi). वाराणसी के डीएवी पीजी कॉलेज के संस्कृत विभाग द्वारा गुरुवार को संस्कृत दिवस के अवसर पर विभिन्न प्रतियोगिता का आयोजन हुआ। स्त्रोत पाठ, संस्कृत भाषण, संस्कृत श्लोकान्त्याक्षरी एवं संस्कृत सामान्य ज्ञान प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। स्तोत्रपाठ एवं संस्कृत गीत प्रतियोगिता में रोहित दूबे प्रथम, वृषभानु तिवारी द्वितीय एवं अभय कुमार पाण्डेय तृतीय स्थान पर रहे। संस्कृत भाषण में जयन्त देव प्रथम, गोविंद राज ज्योतिषी द्वितीय एवं आशीष शुक्ला तृतीय स्थान पर रहे। संस्कृत सामान्य ज्ञान प्रतियोगिता में रोहित दुबे प्रथम, शिवेंद्र कुमार दूसरे एवं निर्जला तीसरें स्थान पर रही। संस्कृत श्लोकान्त्याक्षरी प्रतियोगिता में शिवेंद्र कुमार प्रथम, रोहित दुबे द्वितीय एवं आदर्श पाण्डेय तीसरें स्थान पर रहे।
इस मौके पर मुख्य अतिथि महाविद्यालय के का. प्राचार्य प्रो. मिश्रीलाल ने कहा कि संस्कृत भाषा और भारतीय संस्कृति दोनों एक दूसरे के पूरक है, इसमें हमेशा लोक कल्याण और विश्व कल्याण की कामना की गई है।
उन्होंने कहा कि यही वह भाषा है जिसमें मानव को मानव बनाने की तकनीक है, यह हमारे विचारों का शोधन करती है। संस्कृत भाषा वही है जो मानव के चरित्र और संस्कार को चमकाए। यह पुनः जनभाषा बने यही कामना है।
विशिष्ट अतिथि उप- प्राचार्या प्रो. संगीता जैन रही। विभागाध्यक्षा प्रो. पूनम सिंह ने स्वागत एवं डॉ. दीपक कुमार शर्मा ने धन्यवाद दिया। कार्यक्रम में डॉ. त्रिपुर सुन्दरी, डॉ. रंगनाथ, डॉ. अमित कुमार मिश्र निर्णायक मण्डल में रहे।
नन्हीं तुलिका से अभिव्यक्त कर काशी की ऐतिहासिक धरोहर Kidzee के नन्हें कलाकारों ने जीता दिल
dil india live (Varanasi) शिक्षा, धर्म और सांस्कृतिक राजधानी वाराणसी अपने आप में अनूठी है। यहां पग पग पर केवल मंदिर, मस्जिद ही नहीं कला और संस्कृति के रंग भी स्वत दिखाई देते हैं। कुछ ऐसी ही कला संस्कृति की मिसाल हमें देखने को मिली Kauri Exhibition Hall (कला दीर्घा) में। Kauri चौकाघाट में Kidzee Elementary School, Nadesar Branch के नन्हे मुन्ने बच्चों की पिछले दिनों प्रेरणादायक कला प्रदर्शनी और कल्चरल प्रोग्राम आयोजित किया गया था। प्ले ग्रुप से class 5 तक के इन बच्चों ने ज्यादातर पेंटिंग्स वारली और गौड़ आर्ट शैली में बनाई थीं, जिसने सभी का ध्यान अपनी ओर स्वत: खींचा। लोग चकित थे खासकर बच्चों के पैरेंट्स और टीचर्स भी, इतनी कम उम्र में बच्चों की कला समझ इतनी बड़ी और पारखी है ये किसी ने सोचा भी नहीं था।
क्या है वारली और गौड़ आर्ट?
बच्चों ने दो प्रसिद्ध जनजातीय कला को अपने अंदाज में पेश किया जिसमें वारली और गौड़ आर्ट शामिल है।
वारली आर्ट
महाराष्ट्र की वारली जनजाति की यह 400 साल पुरानी कला है। इसमें मिट्टी की दीवारों पर चावल के आटे से सफेद रंग से चित्र बनाए जाते हैं। तिकोने आकार के इंसान, गोले और रोजमर्रा की जिंदगी इसकी पहचान है।गौड़ / गोंड आर्ट
मध्य प्रदेश के गोंड जनजाति की यह कला प्रकृति को समर्पित है। इसमें बारीक बिंदुओं और लकीरों से जानवरों, पेड़ों और कहानियों को चटख प्राकृतिक रंगों से दिखाया जाता है।
नन्हें हाथों ने इसी Warli-Gond स्टाइल में काशी के घाट, मंदिर और गांव की तस्वीरें बनाईं। साथ ही नुक्कड़ नाटक, देशभक्ति गीत और कविताओं की प्रस्तुति ने आयोजन में चार चांद लगा दिया। अभिभावकों ने इस अनोखी पहल के लिए स्कूल संचालक, प्रिंसिपल रितिका सरीन और टीचर्स को सराहा तो kauri की इंचार्ज स्तुति ने आभार व्यक्त किया।
सौहार्द और मोहब्बत, नबी की सुन्नत और ईमान की मजबूती पर दिया उलेमा ने जोर
बेनियाबाग में जुटे देश के बड़े आलिम, उलेमा व बुद्धिजीवी
सकुशल संपन्न हुआ जुलूस व जलसा
सरफराज अहमद/मोहम्मद रिजवान
dil india live (Varanasi)। (Eid miladunnabi 26 August 2026 Varanasi Uttar Pradesh) नबी की 1501 वीं यौमे पैदाइश अकीदत और एहतराम के साथ बुधवार को पूर्वांचल भर में मनाई गई। इस दौरान निकले जुलूस-ए-मोहम्मदी ने क़ौमी यकजहती का जहां पैगाम दिया वहीं हिंदू मुस्लिम में आपसी सौहार्द और मोहब्बत, नबी की सुन्नत और ईमान की मजबूती पर उलेमा ने जोर देते हुए इसे देश की तरक्की के लिए जरूरी क़रार दिया। बेनियाबाग के फुटबॉल मैदान में जुटे देश के बड़े आलिम, उलेमा व बुद्धिजीवियों में दोनों वर्गों के जिम्मेदार शख्सियतों की भी तादाद कसीर थी।
अज़हरी मैदान से निकला जुलूस
रेवड़ी तालाब के अज़हरी मैदान से जुलूस-ए-मोहम्मदी निकाला गया। एक जूलूस की क़यादत सदर काजी ए शहर बनारस मौलाना हसीन अहमद हबीबी कर रहे थे तो दूसरा जुलूस शहर काजी मौलाना जमील अहमद रज़वी की सदारत में निकला। शहर काजी मौलाना जमील अहमद रज़वी का जुलूस अपने कदीमी रास्तों से होकर नबी की नात और सलाम पेश करते हुए वापस अजहरी मैदान में शहर काजी की दुआओं संग सम्पन्न हो गया। जबकि मौलाना हसीन अहमद हबीबी की क़यादत वाला जुलूस अपने कदीमी रास्तों से होकर बेनियाबाग मैदान में पहुंच कर जलसे में तब्दील हो गया। शाम में पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मोहम्मद (स.) की 1501 वीं यौमे पैदाइश (जन्मदिन) के मौके पर अलवीपुरा, वरुणापार के इलाकों में भी जुलूस-ए मोहम्मदी का शानदार जुलूस निकाला गया। जुलूस में बग्घी, ऊंट और बड़ी गाडियां भी थीं। इन इलाकों में भी जुलूस-ए-मोहम्मदी का आयोजन अकीदत और उल्लास के साथ किया गया। जुलूस में अमन, एकता, भाईचारे और सौहार्द का संदेश दिया गया। इससे पहले रेवड़ी तालाब से मरकजी दावते इस्लामी जुलूस-ए मोहम्मदी कमेटी के तत्वावधान में निकला जुलूस विभिन्न मार्गों से होते हुए बेनियाबाग पहुंचा, जहां जुलूस सभा में तब्दील हो गया। जुलूस में देश से मोहब्बत, नबी की सुन्नत और ईमान की मजबूती का पैगाम दिया गया। जुलूस की सरपरस्ती बरेली शरीफ के मुफ्ती इमरान रजा साहब कादरी ने की। जुलूस के बाद बेनियाबाग में देश के बड़े आलिमों और उलेमा ने नबी की सुन्नत, नेकी का रास्ता अपनाने और देश से मोहब्बत पर रोशनी डाली। जुलूस की अगुवाई ऑल इंडिया काजी बोर्ड के अध्यक्ष मौलाना सैयद कौसर रब्बानी ने की, जबकि सदर काजी-ए-शहर बनारस मौलाना हसीन अहमद हबीबी ने जुलूस की सदारत की। जुलूस में सुबह करीब 6:30 बजे कमेटी के वॉलंटियर बड़ी संख्या में पुलिस-प्रशासन के साथ व्यवस्था संभालते नजर आए। जुलूस-ए-मोहम्मदी के प्रवक्ता दानिश अत्तारी ने मीडिया को संबोधित करते हुए बताया की डीसीपी काशी जोन गौरव बंसवाल की ओर से सदर काजी-ए-शहर मौलाना हसीन अहमद हबीबी को 100 गाड़ियों को जुलूस के साथ चलने की अनुमति दी गई थी। साथ ही जुलूस में शामिल लोगों से लाउडस्पीकर वाली गाड़ी के अतिरिक्त किसी अन्य वाहन को साथ नहीं रखने की अपील की गई थी। व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए वॉलंटियर भी तैनात किए गए थे। अल्हमदोलिल्लाह जुलूस अमन और मिल्लत के साथ सम्पन्न हो गया।
दिखी बनारस की गंगा जमुनी तहज़ीब
मरकजी दावते इस्लामी जुलूस-ए मोहम्मदी कमेटी के तत्वावधान में रेवड़ी तालाब अजहरी मैदान से निकले जुलूस में क़ौमी यकजहती देखने को मिली। जुलूस के रास्ते में विभिन्न धर्मों के लोगों ने जुलूस में शामिल लोगों का अंगवस्त्रम और फूल-मालाओं से स्वागत किया। खासकर गोदौलिया पर कई हिंदू संगठनों ने जुलूस-ए-मोहम्मदी का बैनर लगाकर स्वागत किया। बुलानाला, मैदागिन और लोहटिया में इसरा कमेटी के लोगों ने जुलूस के अतिथियों का माल्यार्पण कर स्वागत किया गया। इसके बाद झंडी दिखाकर जुलूस को आगे रवाना किया गया।
इस दौरान डॉ. एके कौशिक, डॉ. अफजल, डॉ. हैदर अली, इसरा के जनरल सेक्रेटरी डॉ. हाजी मोहम्मद फारुख सहित अन्य लोगों ने बुके भेंट कर अतिथियों का स्वागत किया। कई स्थानों पर लोगों के लिए चाय-कॉफी के स्टॉल भी लगाए गए थे।
उलेमा ने दिया अमन का पैग़ाम
जुलूस की अध्यक्षता मुफ्ती बोर्ड के अध्यक्ष मौलाना मुफ्ती अब्दुल हादी खां रिजवी ने की। जुलूस का नेतृत्व मुफ्ती बोर्ड के सेक्रेटरी व जामा मस्जिद के शाही इमाम और सदर काजी-ए-शहर बनारस मौलाना हसीन अहमद हबीबी ने किया। जुलूस के दौरान ‘सरकार की आमद मरहबा, मुस्तफा की आमद मरहबा’ के नारे लगाए गए। विभिन्न मुस्लिम संगठनों की ओर से गौरीगंज, मदनपुरा, चौक, बुलानाला और लोहटिया समेत कई स्थानों पर स्वागत स्टॉल लगाए गए थे।
बेनियाबाग पहुंचने के बाद जुलूस सभा में परिवर्तित हो गया। सभा का आगाज कारी कोसैन मौज्जम ने कुरान की तिलावत से किया। इसके बाद मौलाना अंजुम रजा नूरी इलाहाबादी और मौलाना उजैर आलम साहब हकाकटोला ने संबोधित किया। मुफ्ती अब्दुल हादी खां और मौलाना हमदा शैदा इस्माइली ने हुजूर की पैदाइश, उनकी सीरत और अमन की तालीम पर प्रकाश डाला।
अवाम शायरों में मोहम्मद कौसर रजा इलाहाबादी, आरिफ शमीम, वसीम अत्तारी, आबिद जमाल, दानिश अत्तारी और शाहजेब अख्तर समेत कई लोग शामिल रहे। संचालन के कौसर रजा बरकाती, नजमी शम्सी इलाहाबादी ने बहुत ही शायराना अंदाज में किया।
दोनों वर्गों के शांति प्रिय हुए सभा में शामिल
सभा में विभिन्न सामाजिक और धार्मिक संगठनों से जुड़े गणमान्य नागरिक भी शामिल हुए। इनमें महन्त के.के. सिंह, अजय राय, किशन दीक्षित, संजय सिंह दाढ़ी, अनुराग पांडेय छोटू, कांग्रेस अध्यक्ष राघवेंद्र चौबे, राजेश्वर पटेल, ओम प्रकाश ओझा, स्नातक एमएलसी आशुतोष सिंहा, ओम प्रकाश पटेल, आशीष गौतम, दिव्यवंत पांडेय, ऋषभ पांडेय, हाजी अब्दुल अमीन, हाजी अमीर अहमद, हाजी हाफिज जावेद अख्तर, हाजी हाफिज नूर और डॉक्टर हमजा सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
जुलूस अपने पारंपरिक मार्ग से होते हुए गोदौलिया, नीचीबाग, मैदागिन, कबीरचौरा और पियरी होते हुए बेनियाबाग पहुंचा। बनारस के विभिन्न मोहल्लों से निकले छोटे-छोटे जुलूस भी मुख्य जुलूस में शामिल हुए। इनमें अर्दली बाजार, अहाता उल्फत बीबी, गोलघर, नदेसर, तेलियाबाग और लहराबीर से आने वाले जुलूस शामिल रहे।
इसके अलावा शक्कर तालाब, जलालीपुरा, गोलमड़हा, पीलीकोठी, विश्वेश्वरगंज, बजरडीहा और लल्लापुरा समेत अन्य क्षेत्रों से निकले छोटे जुलूस भी मुख्य जुलूस में शामिल हुए। जुलूस को देखने के लिए सड़क के दोनों ओर मकानों पर महिलाओं और बच्चों समेत बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे। दुआ और सलातो-सलाम के साथ हुआ समापन
जुलूस के सफल और शांतिपूर्ण आयोजन के बाद सदर काजी-ए-शहर मौलाना हसीन अहमद हबीबी ने प्रशासनिक अधिकारियों, आईजी, एलआईयू, वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों, स्वास्थ्य विभाग, नागरिक सुरक्षा और आवाम का धन्यवाद किया।
बेनियाबाग में सभा के दौरान हिन्दुस्तान की खुशहाली और अमन के लिए दुआ की गई। अंत में हजरत अल्लामा मौलाना सय्यद कौसर रब्बानी साहब और इमरान रजा बरेलवी की दुआ, प्रार्थना और सलातो-सलाम के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।
ये है पैग़म्बर हज़रत मुहम्मद रसूल अल्लाह की यौमे पैदाइश ईद मिलाद-उन-नबी का जश्न
सरफराज अहमद/ मोहम्मद रिजवान
dil india live (Varanasi). देश दुनिया भर में आज फिर ईद है। ये रमज़ान के रोज़े रखने की खुशी में मनाई जाने वाली ईद नहीं बल्कि ये ईद उस शख्सियत की दुनिया में आमद की खुशी में है जिसने हमें इस्लाम का सिस्टम दिया, जिसने हमें रोज़ा रखना, नमाज़ पढ़ना ही नहीं जिंदगी जीने से लेकर दुनिया से रुखसत होने तक का सलीका बताया। ये ईद-मिलादुन्नबी का जश्न मनाया जा रहा है। इस्लाम धर्म के पैगंबर हजरत मोहम्मद (स.) के जन्मदिन की खुशी की ईद है, इसे हम ईद मिलादुनन्बी या ईद-ए-मिलाद कहते है।
दरअसल रबीउल अव्वल की 12 वीं तारीख को ही हजरत मोहम्मद (स.) की यौमे पैदाइश (जन्म) हुई थी इसीलिए मुस्लिम इस दिन को जश्न के रूप में मनाते हैं। इस खास मौके पर रात भर मस्जिदों मुहल्लों में इबादत होती हैं और जलसा (इस्लामिक सभा) का आयोजन किया जाता है, जिसमें हजरत मोहम्मद (स.) की शान में नातिया कलाम व नज़्म अकीदतमंद पेश करते हैं। कई जगहों पर जुलुसे मोहम्मदी निकाले जाते है। इस दिन मस्जिदों व घरों में कुरान को खास तौर पर पढ़ा जाता है और गरीबों में जरूरत की चीजें खैरात व सदका की जाती हैं।
पैगंबर मोहम्मद (स.) की पैदाइश
पैगंबर मोहम्मद (स.) का जन्म अरब के शहर मक्का में 571 ईस्वी में 12 रबीउल अव्वल को सुबह सादिक के वक्त हुआ था। नबी की पैदाइश की सुबह अरब में हर तरफ नूर की बारिश हो रही थी। इस्लामी किताबों में आया है जैसी सुबह उस दिन थी वैसी ना तो कभी सुबह हुई न ही फिज़ा में कभी ऐसी ताजगी देखी गई।
पैगंबर हजरत मोहम्मद (स.) के जन्म से पहले ही उनके वालिद का इंतकाल (निधन) हो चुका था। जब वह 6 वर्ष के थे तो उनकी वालिदा जनाबे आमीना का भी इंतकाल हो गया। मां के इंतकाल के बाद पैगंबर मोहम्मद (स.) अपने चाचा अबू तालिब और दादा अबू मुतालिब के साथ रहने लगे। इनके वालिद का नाम अब्दुल्लाह और मां का नाम बीबी आमिना था। अल्लाह ने सबसे पहले पैगंबर हजरत मोहम्मद को ही पवित्र कुरान अता की। इसके बाद ही पैगंबर हजरत मोहम्मद (स.) ने पवित्र कुरान का पैगाम दुनिया के कोने-कोने तक पहुंचाया।
नबी ने क ऐसा इस्लाम का सिस्टम बनाया कि आज पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा पढ़ी, समझी और याद की जाने वाली किताब कुरान मजीद है। हर मुसलमान नमाज़ में कुरान की आयतें पढ़ता है। इसलिए पूरी दुनिया में कुरान पढ़ी और याद की जाती है। संपूर्ण कुरान कंठस्थ करने वाले हाफ़िज़ कहलाते हैं जो अकेले बनारस में ही दस हजार से ज्यादा हैं, पूरे देश और दुनिया का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है।
आज उसी शख्सियत पैग़म्बरे इस्लाम हज़रत मुहम्मद रसूल अल्लाह (स.) की यौमे पैदाइश ईद मिलाद-उन-नबी के तौर पर मनाया जा रहा है।
सज गये मुस्लिम इलाक़े गूंज रही नात
इस्लाम धर्म के आखिरी पैगम्बर, हज़रत मोहम्मद मुस्तफा (स.) की यौमे पैदाइश की खुशी में मंगलवार की शाम मुसालिम इलाके रौशनी और सजावट से इतराते नज़र आये। इस दौरान सारा जहां नबी की मोहब्बत और अकीदत लुटाता नज़र आया। हर तरफ नूर की बारिश और डायसो से नबी की शान में कलाम पेश करते शायरों का जज्बा और जुनून देखते ही बन रहा था। यह नज़ारा था अर्दली बाज़ार मुख्य रोड का। यहां देर रात तक शायरों ने जहां कलाम पेश किया वही उलेमा की तकरीर से भी अकीदतमंद फैज़याब हुए। मध्यरात्रि तक शायरों के कलाम फिजा में खुशबू बिखेरते नजर आए। नबी की शान में एक से एक उम्दा कलाम गूंज रहा था।
उधर मरकजी यौमुन्नबी कमेटी की ओर से ईद मिलादुन्नबी पर, आज किसकी आमद से हर तरफ उजाला है, आखिरी पैयंबर है और नूर वाला है... व, आमीना का लाल देखो जगमग जगमग करता है...। जैसे कलाम पेश करते हुए मंगलवार की रात जुलूस निकाला गया। जुलूस बेनियाबाग के पूर्वी छोर हड़हा मैदान से निकला। इसके बाद सराय हाड़हा, छत्तातले, नारियल बाजार, दालमंडी, नई सड़क, मस्जिद खुदा बख्श, कुरैशबाग मस्जिद, उस्ताद बिसमिल्लाह खान मार्ग होकर भीखा शाह गेट पर पहुंचकर समाप्त हुआ। जुलूस में शकील अहमद बबलू, महमूद खां, रेयाज अहमद, इमरान अहमद, दिलशाद अहमद आदि व्यवस्था संभाले हुए थे।
जगमगा उठा मुस्लिम इलाका
Eid miladunnabi 2026 के जश्न के दौरान मुस्लिम इलाके रौशनी से नहां उठे। अर्दली बाजार, पक्की बाजार, मकबूल आलम रोड, नदेसर, लल्लापुरा, हबीबपुरा, नई सड़क, दालमंडी, सराय हड़हा, रेवड़ी तालाब, मदनपुरा, गौरीगंज, शिवाला, बजरडीहा, शक्कर तालाब, जलालीपुरा, कोयला बाजार, पीली कोठी, बड़ी बाजार आदि इलाकों में खूबसूरत विद्युतीय सजावट देखने को मिली। हर तरफ बरसात और बारिश के बावजूद खूबसूरत सजावट की गई थी।
सामाजिक न्याय के महान योद्धा थे स्व. पी.एन. सिंह यादव-डाॅ. सुधा यादव
डीएवी में आयोजित संगोष्ठी में भाजपा संसदीय बोर्ड की सदस्य ने रखे विचार
dil india live (Varanasi). वाराणसी 25 अगस्त को डी.ए.वी. पी.जी. काॅलेज DAV PG College में मंगलवार को महाविद्यालय के पूर्व प्रबन्धक एवं सामाजिक न्याय के योद्धा स्व. पी.एन. सिंह यादव (PN Singh Yadav) की 22वीं पुण्यतिथि मनाई गई। इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में भाजपा संसदीय बोर्ड एवं केन्द्रीय चुनाव समिति की सदस्य (पूर्व सांसद) डाॅ. सुधा यादव ने कहा कि स्व. पी.एन. सिंह यादव सही मायने में सामाजिक न्याय के महान योद्धा थे, जिन्होंने शिक्षा को माध्यम बनाकर पिछड़ों, वंचितों को समाज में बराबरी का अधिकार मिले, इसकी लड़ाई लड़ी और अपनी जान भी गंवा दी।
सामाजिक न्याय और समावेशी नीतियों की अवधारणा विषयक संगोष्ठी को संबोधित करते हुए डाॅ. सुधा यादव ने कहा कि सामाजिक न्याय की लड़ाई की शुरूआत हमें स्वयं से करनी होगी, समाज हमें क्या दे रहा है उससे ज्यादा महत्वपूर्ण हम समाज को क्या लौटा रहे हैं। हमें सबको साथ लेकर चलना होगा, जो सामाजिक, आर्थिक रूप से पिछड़े और वंचित हैं उनकी मदद बिना किसी जातीय, धार्मिक और लैंगिक भेदभाव के करना ही सही मायने में सामाजिक न्याय है।
मुख्य अतिथि नेे कहा कि हमारी सरकार विगत एक दशक में बेटी बचाओं, बेटी पढ़ाओं, जनधन योजना, आयुष्मान भारत योजना जैसी योजनाओं के माध्यम से समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंच कर सामाजिक न्याय की अवधारणा को और शक्ति प्रदान कर रही है। अंत में उन्होंने काॅलेज में सामाजिक न्याय के योद्धा स्व. पी.एन. सिंह यादव की मूर्ति न होने पर खेद भी जताया और अगले वर्षों में काॅलेज प्रबंधन से उनकी भव्य प्रतिमा स्थापित करने की आशा जताई।
इसके पूर्व डाॅ. सुधा यादव, मंत्री/प्रबन्धक अजीत कुमार सिंह यादव एवं अन्य विशिष्टजनों द्वारा स्व. पी.एन. सिंह यादव के तैलचित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उनका पुण्य स्मरण किया गया। इस अवसर पर अजीत कुमार सिंह यादव ने मुख्य अतिथि डाॅ. सुधा यादव का स्मृति चिन्ह, अंगवस्त्र एवं पुष्पगुच्छ प्रदान कर अभिनन्दन किया। स्वागत भाषण उपप्राचार्य प्रो. संगीता जैन, संचालन डाॅ. पारूल जैन एवं धन्यवाद ज्ञापन का0 प्राचार्य प्रो. मिश्री लाल ने दिया।
इस मौके पर मुख्य रूप से प्रबंध समिति के कोषाध्यक्ष हरिबंश सिंह, उपप्राचार्य प्रो. राहुल, प्रधानाचार्य अशोक कुमार सिंह, डाॅ. डाॅ. आहूति सिंह, डाॅ. राजेश झा, डाॅ.ऐश्वर्या उपाध्याय, राहुल श्रीवास्तव, वरिष्ठ भाजपा नेता अशोक यादव, सुमित यादव, चन्द्रजीत यादव, सत्यनारायण सिंह ‘छोटू‘ सहित समस्त विभागों के विभागाध्यक्ष, प्राध्यापक, कर्मचारीगण एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित रहें। पुण्यतिथि के अवसर पर डी.ए.वी. इण्टर काॅलेज में भी पूर्व प्रबन्धक को अध्यापकों एवं कर्मचारियों द्वारा श्रद्धांजलि अर्पित की गयी।
बैठक में हुआ तय, सौ वाहन को ही पास, स्टाल लगाकर बांटे तबर्रुक न बजाएं डीजे
dil india live (Varanasi). ACP Bhelupur गौरव कुमार की अध्यक्षता में 1501 वां जश्ने ईद मिलादुन्नबी के अवसर पर निकलने वाले जुलूस-ए-मोहम्मदी सकुशल संपन्न कराने के लिए जुलूस के आयोजक और विभिन्न मुहल्लों के प्रतिष्ठित लोगों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक हुई। बैठक में एसीपी भेलूपुर गौरव कुमार ने कहा कि जुलूस पैग़म्बरे इस्लाम का है इसकी खूबसूरती और पाकीज़गी बनाएं रखें कोई ऐसा काम न करें जिससे माहौल खराब हो। तय रुप से अमन और मिल्लत के साथ हर साल की तरह जुलूस निकालें।
इस मौके पर उन्होंने साफ किया कि जुलूस के आयोजक सदर काजी मौलाना हसीन अहमद हबीबी हैं जिन्हें 100 वाहनों का पास जारी करने का डीसीपी काशी जोन ने अख्तियार दिया है। वो वाहनों को पास जारी कर रहे हैं बिना पास के जुलूस में कोई भी वाहन शामिल नहीं होगा अगर कोई होता है या माहौल खराब करने की कोशिश करता है तो उसके लिए वो खुद जिम्मेदार होगा।
एसीपी ने यह भी कहा कि खाने पीने का सामान स्टाल लगाकर ही बांटे कोई वाहनों से नहीं बांटा जाएगा। डीजे किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा लाउड स्पीकर का ही प्रयोग करें जिले के बाहर के वाहन जुलूस में शामिल न किए जाएं। इस दौरान एसीपी गौरव कुमार ने आयोजक मौलाना हसीन अहमद हबीबी से पूछा कि जुलूस में आगे कौन रहेगा? मौलाना हसीन अहमद हबीबी ने कहा कि जिसे भी आगे आना हो वह आ सकता है मगर सुबह 6.30 बजे मेरा जुलूस उठेगा उससे पहले उसे आना होगा हम सबसे पीछे भी रहने को तैयार हैं मगर जुलूस उठने के बाद किसी को जुलूस ओवर टेक करने नहीं दिया जाएगा वो जुलूस के पीछे ही रहेगा। हमारे पांच सौ वालेंटियर जुलूस में अपने ड्रेस में होंगे वो किसी को भी न ओवर टेक करने न माहौल खराब करने देंगे। इस मौके तय हुआ कि जुलूसे मोहम्मदी में सौ गाड़ी ही शामिल होंगी वो भी जिसके पास आयोजक द्वारा जारी पास होगा।
बैठक में जोन के सभी थाना प्रभारी, सभी चौकी प्रभारी और संभ्रांत लोगों ने अपने विचार व्यक्त किए।
कल निकलेगा जुलूसे मोहम्मदी
हज़रत मुहम्मद रसूल अल्लाह (से.) की पैदाइश के मुबारक मौके पर शहर में अज़ीमुश्शान जुलूसे मोहम्मदी का आयोजन किया गया है। यह जुलूस 12 रबीउल-अव्वल, 26 अगस्त 2026, बुधवार, सुबह 06:30 बजे नगीना वाली मस्जिद के पास अज़हरी मैदान, रेवड़ी तालाब से उठेगा। जुलूस अपने कदीमी रास्तों से गुजरता हुआ बेनिया बाग (फुटबॉल ग्राउंड) के मैदान में पहुंच कर उलमा-ए-किराम के पाकीज़ा बयानात और दुआओं पर इख़्तेताम पज़ीर होगा। वहीं शहर काजी मौलाना जमील अहमद रज़वी की क़यादत वाला जुलूस रेवड़ी तालाब मैदान में पहुंच कर समाप्त होगा।
बेनियाबाग में होगी इनकी तकरीर
इस जश्न में खुसूसी तौर पर तशरीफ़ ला रहे हैं - खलीफा-ए-शहज़ादा-ए-गौसुल आज़म, खतीबे यूरोप व एशिया हज़रत अल्लामा सैयद कौसर रब्बानी साहब किबला (मुम्बई) और शहज़ादा-ए-आला हज़रत हज़रत अल्लामा मुफ्ती मोहम्मद इमरान रज़ा खां कादरी बरेलवी (बरेली शरीफ)। सदारत मुफ्ती अब्दुल हादी खां हबीबी और मौलाना हसीन अहमद हबीबी की तकरीर होगी।
इस साल की खास बातें
इस जश्न में खुसूसी तौर पर तशरीफ़ ला रहे हैं - खलीफा-ए-शहज़ादा-ए-गौसुल आज़म, खतीबे यूरोप व एशिया हज़रत अल्लामा सैयद कौसर रब्बानी साहब किबला (मुम्बई) और शहज़ादा-ए-आला हज़रत हज़रत अल्लामा मुफ्ती मोहम्मद इमरान रज़ा खां कादरी बरेलवी (बरेली शरीफ)।
इस बात पर दें खास ध्यान
बिना पास के वाहन जुलूस में लेकर न शामिल हो
जुलूस में D.J. का इस्तेमाल सख्त मना है। सिर्फ लाउड स्पीकर का इस्तेमाल करें।
तबर्रूक या खाने पीने का सामान स्टाल लगाकर बांटे
गाड़ियों से खाने-पीने का सामान न बांटे
जुलूस में शामिल गाडियां एक दूसरे को ओवरटेक न करें
जुलूस की पाकीज़गी बनाएं रखें और दुरुद व नबी की शान में नातिया कलाम पढ़ें।
गाड़ियों के पास के लिए आयोजक से संपर्क करें।
अर्दली बाज़ार में अंजुमन फैजाने नूरी की सजावट और तैयारियां जोरों पर ।