बुधवार, 24 जून 2026

Ganga jamuni tahzib: ज़रा देखो तो दुनिया वालों बनारस में बहती है सौहार्द की आबो-हवा

ताजिया है "मंदिर" जैसी तो कुम्हार का "दिल" है अजाखाना
हरिश्चंद्र घाट स्थित कुम्हार की ताजिया -फाइल फोटो 

dil India live (Varanasi). भीतर से देखने में पूरी तरह मंदिर, मगर है अजाखाना (इमामबाड़ा) कहते हैं ये उस नन्हें कुम्हार का दिल है जिससे इस अजाखाने के निर्माण कि कहानी जुड़ी हुई है। बात हो रही है हरिश्चंद्र घाट स्थित एक ऐसे अजाखाने की जिसकी बुनियाद की कहानी एक हिंदू कुम्हार की अकीदत से जुड़ी हुई है। कुम्हार के अटूट विश्वास के कारण ही इस अजाखाने का नाम कुम्हार का अजाखाना पड़ा। इसमें एक ओर जहां शिया मुस्लिम मजलिस करते हैं तो वहीं हिंदू हाथ जोड़कर अकीदत के फूल चढ़ाते हैं। शहर ही नहीं बल्कि दुनिया का लगभग हर अजाखाना गुंबद नुमा होता है, जो मस्जिद या मकबरे की सूरत में नजर आता है। वहीं हरिश्चंद्र घाट के कुम्हार का अजाखाना मंदिर की तरह दिखता है। मुहर्रम आते ही यहां के हिंदू इसकी साफ-सफाई और रंग-रोगन का काम कराते हैं।

यहां जानिए तवारीखी अजाखाने कि दास्तां 

हरिश्चंद्र घाट स्थित कुम्हार का अजाखाना लगभग डेढ़ सौ वर्ष से भी पुराना है। इसकी देखरेख एक हिंदू कुम्हार परिवार कर रहा है, तो वहीं सरपरस्ती शिया वर्ग के हाथ में है। अजाखाना के मुतवल्ली सैयद आलिम हुसैन रिजवी हैं। वो बताते हैं कि डेढ़ सौ वर्ष पहले जहां अजाखाना है उसी के पास ही एक हिंदू कुम्हार परिवार रहता था। कुम्हार का एक बेटा था, जो हर वर्ष मुहर्रम पर मिट्टी की ताजिया बनाया करता था। पिता ने पहले तो बच्चे को ताजिया बनाने से मना किया। जब वह नहीं माना तो उसकी जमकर पिटाई कर दी। पिटाई के बाद बच्चा इतना बीमार हुआ कि वैद्य, हकीम भी काम न आए। बेटे को लेकर पिता की चिंता बढ़ने लगी। मंदिर, मस्जिद, मजार पर उसने हाजिरी लगाई, लेकिन कोई फायदा न हुआ।  

कुम्हार ने एक दिन सपने में देखा कि एक बुजुर्ग उसके सामने खड़े हैं। वह कह रहे हैं कि तेरा बेटा मुझसे अकीदत रखता है। तुमने उसे ताजिया बनाने से रोक दिया, तो वह बीमार पड़ गया है। अगर तुम्हें उससे मोहब्बत नहीं है तो मैं उसे अपने पास बुला लेता हूं। कुम्हार ने स्वप्न में ही अपनी गलती मानते हुए कहा कि बस एक बार आप मुझे माफ करके मेरे बच्चे को ठीक कर दें। इस पर बुजुर्ग ने कहा कि नींद से उठकर देख, तेरा बच्चा खेल रहा है। आलिम हुसैन अपने बुजुर्गो की सुनी जुबानी बातों को याद करते हुए बताते हैं कि नींद से जगकर कुम्हार ने देखा कि जो बच्चा गंभीर रूप से बीमार था, वह न केवल पूरी तरह स्वस्थ था, बल्कि बच्चों के साथ खेल रहा था।

हिंदू कुम्हार की आस्था के कारण ही अजाखाने के निर्माण के समय इसको मंदिर जैसा रूप दिया गया और नाम भी कुम्हार का अजाखाना रखा गया। उसी समय से आस-पास के हिंदू भाइयों की आस्था अजाखाने से जुड़ गई। मोहर्रम में जब भी अजाखाना खुलता है, वहां दोनों मजहब के लोग जुटते हैं। इसके अलावा 9 वीं व 10 वीं मुहर्रम का विश्व प्रसिद्ध दूल्हे का जुलूस यहां सात बार सलामी देता है। आलिम हुसैन बताते हैं कि उन दिनों अवध के नवाब शहादत हुसैन अपने वालिद से नाराज होकर बनारस आ गए थे। उन्हीं की वंशज बाराती बेगम ने कुम्हार के बेटे का इमाम हुसैन के प्रति लगाव देख यह अजाखाना बनवाया। इसकी देख रेख युद्ध-कौशल की शिक्षा देने वाले सैयद मीर हसन के परिवार को सौंपी गई। सैयद आलिम हुसैन और उनका कुनबा उन्हीं का वंशज हैं, जो आज भी शिवाला इलाके में निवास करता है। 

दरअसल बनारस में आबो-हवा ही कुछ ऐसी है कि यहां पग पग पर गंगा जमुनी तहज़ीब की मिसाल देखने को मिलती है। यही वजह है कि सौहार्द की इस नगरी में कोई नूर फातेमा शिव का मंदिर बनवाती है तो कोई विक्रम राय इमामबाड़ा। कबीर के इस शहर को नज़ीर बनारसी के के इस कलाम से समझा जा सकता है कि 

"मेरी एक आंख गंगा, मेरी एक आंख जमुना, मेरा दिल है संगम जिसे पूजना हो आ जाए।।"

Varanasi Main dalmandi ki रंगीले शाह मस्जिद के ज्वाइंट सेक्रेटरी ने दिया पदभार से इस्तीफा

शाहबुद्दीन अहमद अल्लाह मालिक शाही मस्जिद रंगीले शाह के प्रबंधन समिति के हैं जॉइंट सेक्रेटरी

dil india live (Varanasi). अल्लाह मालिक शाही मस्जिद रंगीले शाह के प्रबंधन समिति के जॉइंट सेक्रेटरी शाहाबुद्दीन अहमद, पुत्र स्वर्गीय ख्वाजा सरफराज अहमद, निवासी सी-4/215 ॥ FB सरायगोवर्धन चेतगंज, वाराणसी ने अपने पदभार से इस्तीफा दे दिया है। अपने त्यागपत्र को जारी करते हुए उन्होंने कहा है कि अल्लाह मालिक शाही मस्जिद (रंगीले शाह) की प्रबंधन समिति में मैं जॉइंट सेक्रेटरी के पद पर कार्यरत हूँ।

वर्तमान परिस्थितियों एवं व्यक्तिगत कारणों से मैं अपने दायित्वों का निर्वहन पूर्ववत् करने में स्वयं को असमर्थ पा रहा हूँ। इसीलिए मैं अपने पद से स्वेच्छा से तत्काल प्रभाव से त्यागपत्र प्रस्तुत करता हूँ। आपसे निवेदन है कि मेरा त्यागपत्र स्वीकार करते हुए आवश्यक कार्यवाही करने का कष्ट करें। उन्होंने इस पत्र की एक प्रति मुख्य कार्यपालक अधिकारी (CEO), उत्तर प्रदेश, सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड, लखनऊ को आवश्यक जानकारी एवं अभिलेख हेतु प्रेषित किया है।


मंगलवार, 23 जून 2026

UP के Varanasi में गेल ने किया नये CNG स्टेशन की शुरुआत

गेल द्वारा संचालित सीएनजी स्टेशनों की बनारस में संख्या पहुंची 46

dil india live (Varanasi). वाराणसी में गैस अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (गेल) ने स्वच्छ एवं पर्यावरण-अनुकूल ईंधन को बढ़ावा देते हुए अपने 46वें सीएनजी (सीएनजी) स्टेशन का शुभारंभ किया। यह नया सीएनजी स्टेशन आशापुर क्षेत्र में स्थापित किया गया है, जिससे आसपास के क्षेत्रों के निवासियों को किफायती एवं सुलभ ईंधन की सुविधा मिलेगी। इस सीएनजी स्टेशन का उद्घाटन गेल के कार्यकारी निदेशक (सीजीडी) आशु शिंगल द्वारा किया गया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि, गेल शहर में स्वच्छ ऊर्जा के प्रसार के लिए निरंतर प्रयासरत है और प्रतिदिन नए घरेलू कनेक्शनों (डीपीएनजी) की संख्या बढ़ाने के साथ-साथ अधिक से अधिक उपभोक्ताओं तक पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि वे पीएनजी को अपनाएं, ताकि एलपीजी सिलेंडरों की उपलब्धता ग्रामीण क्षेत्रों में अधिक हो सके और वहां के लोगों को इसका लाभ मिल सके।


उद्घाटन समारोह में गेल के कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे, जिनमें सुशील कुमार (महाप्रबंधक) प्रवीण सिंह, मुख्य प्रबंधक (स्टील) चंदन कुमार, आनंद मोहन, देबाशीष साहू,जे आकाश, सुमित सागर, विकास कुमार शामिल रहे। इसके साथ ही इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (आइओसीएल) के प्रतिनिधियों की उपस्थिति ने इस आयोजन को और अधिक महत्वपूर्ण बना दिया।

यह उपलब्धि वाराणसी सीजीडी के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है, क्योंकि अब गेल शहर में कुल 46 सीएनजी स्टेशनों का संचालन कर रहा है। इससे नागरिकों को स्वच्छ ईंधन की आसान उपलब्धता सुनिश्चित होगी और शहर के विभिन्न हिस्सों में सीएनजी नेटवर्क और मजबूत होगा। सीएनजी एक स्वच्छ, सुरक्षित एवं किफायती ईंधन है, जो पारंपरिक ईंधनों की तुलना में कम प्रदूषण फैलाता है। इसके उपयोग से वाहनों की कार्यक्षमता बढ़ती है, रखरखाव लागत कम होती है तथा कार्बन उत्सर्जन में कमी आती है, जिससे पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलता है। गेल वाराणसी लगातार सीएनजी एवं पीएनजी नेटवर्क का विस्तार कर रहा है। कंपनी आधुनिक तकनीक, उच्च सुरक्षा मानकों तथा विश्वसनीय आपूर्ति के माध्यम से शहरवासियों को बेहतर ऊर्जा समाधान प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। इसके साथ ही गेल स्थानीय स्तर पर अधोसंरचना विकास एवं रोजगार सृजन में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।

गेल का यह प्रयास वाराणसी को स्वच्छ, हरित एवं प्रदूषण-मुक्त शहर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

7 moharram: बड़ागांव, चौहट्टा में मेंहदी और दुलदुल का निकला जुलूस

लोहता में अलम सददा की जियारत तो रिज़वी हाउस में ख़्वातीन का मातम


dil india live (Varanasi). 7 moharram को शहर भर अनेक आयोजन कर्बला के शहीदों की याद में आयोजित हुआ। इस मौके पर चौहट्टा लाल खां से सातवीं मुहर्रम मंगलवार को मेंहदी, ताबूत, अलम और दुलदुल का कदीमी जुलूस परम्परागत तरीके से निकाला गया। इस जुलूस में विभिन्न अंजुमनों ने नौहाख्वानी व मातम का नज़राना पेश किया। उधर बड़ागांव में मजलिस को मौलाना सैयद शकिर इमाम गाजीपुरी ने खिताब करते हुए कर्बला के मसायब बयान किया। इसके बाद जुलुस मरहूम सैय्यद अब्बास हुसैन के इमामबाड़े से निकला। जुलूस में शामिल महेंदी, अल्लम, दुलदुल संग सैकड़ों लोग नौहाख्वानी व मातम करते हुए चल रहे थे।

जुलूस अपने कदीमी रास्तों से होता हुआ अब्बासिया मस्जिद स्थित कर्बला एवं गंजे शहीदा पर पहुंचा जहां रौजे पर सलामी देकर पुनः इमामबाड़े पहुंच कर समाप्त हुआ। जुलुस में रास्ते भर नगर की विभिन्न अंजुमानों ने नौहाख्वानी, मातम किया। जुलूस में मुख्य रूप से सैयद अबूल हसन, सैयद जफरूल हसन, आरिफ, जेमी, प्रिन्स, अम्मार, बादशाह हुसैन, खुशीद हुसैन, जिशान हुसैन, मोहम्मद दानिश, कमरुल हसन, रूमान हुसैन आदि शामिल थे। 

इसी क्रम में चौहट्टा लाल खां स्थित अजाखाना मोहतमिम कासिम का प्राचीन जुलूस देर रात्रि में निकाला गया। जुलूस निकलने से पूर्व मजलिस को डाक्टर शफीक हैदर ने खिताब किया। जुलूस में अंजुमन आबिदिया ने दर्द भरा नौहा पढ़ा जिसे सुनकर अकीदत मंदों की आंखे नम हो गयी। गमें शब्बीर क्या-क्या है, इसे बिस्मिल समझते है, कहानी कर्बला वालों की अहले दिल समझाते है। जुलूस में इस्लाम एण्ड पाटी ने शहनाई पर मातमी धुन प्रस्तुत की। ऊंट, बैण्ड बाजा और ताशा, ढोल से जुलूस का आकर्षण बढ़ गया। अकीदत मंद महिलाओं, पुरुष और बच्चों का हुजूम देर रात्रि तक जमा रहा। मेंहदी का जुलूस अपने कदीमी रास्तो इमामबाड़ा मीरघुरा होता हुआ सदर इमामबाड़ा लाट सरैया जाकर समाप्त हुआ। रास्ते भर अकीदतमंदो ने दुलदुल को दूध पिलाया और मन्नते व मुराद मानी। जुलूस में विभिन्न अंजुमनों ने नौहाख्वानी, मातम किया। 


कदीमी बाल का हुआ मातम, जुटी ख़्वातीन 

सातवीं मुहर्रम मंगलवार को पूर्वाहन १२ बजे शेख सलीम फाटक स्थित रिज़वी हाउस पर खातूनों महिलाओं ने कदीमी बाल का मातम किया और मन्नत मांगा। इस दौरान मजलिस को सम्बोधित करती हुई मोहतरमा नुजहत फरमान ने कहाकि हजरत इमाम हुसैन हजरत इमाम के भतीजे हजरत कासिम जो इमाम हसन के १३ वर्षीय पुत्र पुत्र थे, जिनका अकद इमाम हुसैन की बेटी फातिमा कुबरा से हुआ था और वे कर्बल की जंग में शहीद हो गये थे। यजीदों ने खैमें में आग लगा दी, लाशे इमाम हुसैन पामाल किया। उनकी लाश कर्बला की जलती रेत पर चालीस दिनों तक बेगोरों कफन रही। नन्हें अली असगर को शहीद कर दिया गया। शामे गरीबा आ गयी, कर्बलावालों ने सब कुछ बर्दाशत किया। आज यही वजा है कि सारी दुनिया में हुसैन का नाम याद किया जाता है ओर यजीद जिंदा रहकर मुर्दाबाद हो गया। हुसैन शहीद होकर कयामत तक लोगों के दिलों में जिंदा रहेंगे। हुसैन कल भी जिंदाबाद थे, आज भी जिन्दाबाद है। मोतरमा नुजहत फरमान ने कहाकि लाखों रौजे है जहां में हजरते अब्बास के ऐ यजीदों बेहया तेरा ठिकाना है कहां, सारे मसलक की किताबों को उठाकर देख लो, कर्बला सा वकेया दुनिया में मिलता है कहां।

इस मौके पर या हुसैन-या हुसैन... की सदा आने लगी। मजलिस में शामिल सैकड़ों महिलाओं की आंखों से आंसू छलक पड़े। मजलिस के बाद अंजुमन हैदरी निस्वां ने प्रभावशाली नौहा पढ़ा और बाल का मातम किया गया और कर्बला के मंजर को दर्शाया गया। नौहे के बोल कुछ इस तरह थे ये पुकारे रन में असगर वे जुबान वे जुबानी, कोई तुम में है मुसलमां जो पिला दे मुझको पानी, मैं हुसैन का हूं बेटा और हसन का हूं भतीजा, मेरे जद रसूले वर हक मैं अली की हूं निशानी। सुनते ही दूर-दराज से आयी महिलाओं की आंखों से आंसुओं के एक-एक कतरे बहने लगे और कर्बला का मंजर याद आने लगे। 

इस अनोंखे बाल के मातम और मजलिस को सुनने के लिए दूर-दराज से सैकड़ों की संख्या में गाजीपुर, जौनपुर, शाहगंज, आजमगढ़, मऊ, इलाहाबाद, मिर्जापुर, दुलाईपुर, बड़ागांव, रामनगर आदि जिलों से आयी हुई थी। जायरीनों में तबरुक (प्रसाद) का भी वितरण किया गया। उधर लोहता में अलम सददा का जुलूस निकाला गया। कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच छोटे बड़े रंग-बिरंगे अलम सददा को देखने, अलम सददा की जियारत करने लोगों का हुजूम उमड़ा हुआ था।

Lucknow अग्निकांड के बाद Varanasi में 5 कोचिंग सेंटरों में मिलीं खामियां, भवन सील

अग्निशमन विभाग की बड़ी कार्रवाई से मचा हड़कंप

ऐलान: शिक्षण संस्थाओं में जारी रहेगी आगे भी कार्यवाही 

dil india live (Varanasi). वाराणसी में अग्निशमन विभाग द्वारा बड़े पैमाने पर कोचिंग सेंटर्स में जांच अभियान चलाया गया। दुर्गाकुंड, मकबूल आलम रोड और बाबतपुर क्षेत्र के कोचिंग संस्थानों की जांच के दौरान फायर सेफ्टी मानकों में गंभीर खामियां मिलने पर पांच कोचिंग सेंटरों के भवन सील कर दिए गए। वहीं कई अन्य संस्थानों को नोटिस जारी करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। अधिकारियों का कहना है कि छात्रों की सुरक्षा से किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा। दरअसल लखनऊ के कोचिंग सेंटर में अग्निकांड में एक दर्जन से ज्यादा स्टूडेंट्स की मौत हो गई इसके बाद प्रदेश भर में शिक्षण संस्थानों में आज से पड़ताल अभियान चलाया जा रहा है।





अग्निशमन विभाग की टीम ने दुर्गाकुंड क्षेत्र स्थित जेआरएस, एल-वन, एलेन कोचिंग सेंटर के अलावा मकबूल आलम रोड पर संचालित आकाश कोचिंग, माइक्रोटेक कोचिंग और जेबीकेबी कोचिंग सेंटर का निरीक्षण किया। इसके साथ ही पिंडरा फायर स्टेशन क्षेत्र के अंतर्गत शिव प्रभा भवन शगुनहा, इसरो सेल स्टडी सेंटर और इंस्टीट्यूट ऑफ कंप्यूटर एजुकेशन, बाबतपुर की भी जांच की। इस दौरान कुछ में उपकरण तो मिले, लेकिन व्यवस्था अधूरी ही थी। निरीक्षण के दौरान माइक्रोटेक कोचिंग सेंटर में लगा स्मोक डिटेक्टर क्रियाशील स्थिति में नहीं मिला। वहीं जेबीकेबी कोचिंग सेंटर में केवल अग्निशमन यंत्र लगा हुआ पाया गया, जबकि अन्य आवश्यक सुरक्षा इंतजाम मौजूद नहीं थे। 



फायर अधिकारियों ने बताया कि कई संस्थानों में अग्निशमन यंत्र और अन्य सुरक्षा उपकरण तो उपलब्ध हैं, लेकिन उन्हें संचालित करने वाले कर्मचारियों को पर्याप्त प्रशिक्षण नहीं दिया गया है। कुछ जगहों पर जिम्मेदार कर्मचारी निरीक्षण के समय अनुपस्थित मिले। ऐलेन कोचिंग सेंटर में भी खामियां मिलने पर भवन को सील कर दिया गया। अग्निशमन विभाग की टीम ने समाचार लिखे जाने तक विभिन्न कोचिंग संस्थानों में जांच अभियान जारी रखा। अधिकारियों ने भवनों में आपातकालीन निकास, स्मोक डिटेक्टर, अग्निशमन यंत्र, सुरक्षा संकेतक और कर्मचारियों की तैयारी की स्थिति का भी मूल्यांकन किया।

6 muharram को मातमी धुन संग निकला dalmandi से 40 घंटे चलने वाला कदीमी जुलूस

सैकड़ों साल कदीमी दुलदुल के जुलूस में शामिल हुए ऊंट पर बैठे मासूम



Varanasi (dil India live). 6 muharram (छठवीं मोहर्रम) को विश्व प्रसिद्द तकरीबन 40 घंटे तक चलने वाला चार सौ साल से ज्यादा कदीमी दुलदुल का जुलूस कच्ची सराय (दालमंडी) इमामबाड़े से उठाया गया। इस जुलूस में कई मशहूर बैंड भी मौजूद थे, जो मातमी धुन बजाते हुए चल रहे थे। जुलूस कच्चीसराय से उठकर विभिन्न रास्तों से होते हुए लल्लापुरा स्थित दरगाह फातमान पहुंचा। इसके बाद वापस चौक होता हुआ मुकीमगंज, प्रह्लादघाट, कोयला बाजार, चौहट्टा होते हुए लाट सरैया के लिए रवाना हुआ। वहां से 8 मोहर्रम की सुबह वापस आकर कच्ची सराय के इमामबाड़े में ही समाप्त होगा। यह जुलूस लगातार 6 से 8 मोहर्रम तक चलता रहता है। जुलूस में शामिल ऊंट पर मासूम अजादार सवार थे। दुलदुल की जियारत के लिए लोगों का हुजूम उमड़ा हुआ था 

शकील अहमद जादूगर ने कहा कि मोहर्रम का यह जुलूस महज़ जुलूस ही नहीं बल्कि उस दौर का इतिहास भी अपने भीतर समेटे हुए है जब इन्हीं जुलूसों में छुपकर आजादी के दीवाने एक मुहल्ले से दूसरे मोहल्ले पहुंच जाते थे और अंग्रेज अपना हाथ मलते रहते थे। आठ थाना क्षेत्रों में यह जुलूस आज भी तकरीबन चालीस घंटा चक्रमण करता है। 

छठवीं मोहर्रम के इस विश्व प्रसिद जुलूस में मशहूर बैंड का दस्ता मातमी धुन बजाते हुए चल रहा था। जुलूस नयी सड़क, शेख सलीम फाटक, काली महल, पितरकुण्डा, लल्लापुरा होता हुआ दरगाह-ए-फातमान पहुंचा जहां कुछ देर रूकने के बाद पुनः जुलूस चेतगंज, पियरी, कवीरचौरा, नवाब की ड्योढ़ी औसानगंज, दोषीपुरा, दारानगर, सदर इमामबाड़ा, लाट सरैया, पठानी टोला, हनुमान फाटक, चौहट्टा लाल खां, मुकिमगंज, गायघाट, पक्का महाल, चौक और दालमण्डी होते हुए 40 घंटे तक चल कर वापस कच्चीसराय पहुंचकर समाप्त होगा। 




जुलूस में मुख्य रूप से मिर्जा जफर हसन (एडवोकेट), सगीर हसन, हैदर मौलाई, साजिद हुसैन, इमरान जैदी, सैयद आफाक हैदर, रेहान हसन, जरगम हैदर, शारिक हुसैन, कैफी आजमी, हैदर अब्बास, सैयद सकलैन हैदर, शकील अहमद जादूगर आदि शामिल थे। 



शेख सलीम फाटक में बाल का मातम आज 

सातवीं मोहर्रम पर मंगलवार को बारह बजे दिन में शेख सलीम फाटक स्थित रिजवी हाउस पर महिलाएं बाल का मातम करेगी। मजलिस का आगाज मोहतरमा नुजहत फरमान खिताबत करेगीं। इस दौरान नौहाख्वानी मातम अंजुमन हैदरी निस्वां करेगी।




बड़ी व छोटी मेहंदी का कदीमी जुलूस 
चौहट्टा लाल खां इलाके से मोहर्रम के सातवें रोज़ छोटी मेहंदी व बड़ी मेहंदी के दो कदीमी जुलूस निकाले जाते है। इसमें बड़ी मेहंदी का जुलूस सदर इमामबाड़ा जाकर देर रात सम्पन्न होता है।

कल उठेगा अलम व तुर्बत का जुलूस

अलम व तुर्बत का जुलूस ख्वाजा नब्बू के चाहमामा स्थित इमामबाड़ा से कार्यक्रम संयोजक मुनाजिर हुसैन मंजू के संयोजन में आठवीं मोहर्रम को रात 8:30 बजे उठेगा। जुलूस उठने पर सवारी पढ़ी जाएगी। जुलूस दालमंडी पहुचने पर अंजुमन हैदरी चौक नौहा ख्वानी व मातम शुरू करेगी। जुलूस अपने कदीमी रास्तों से होकर फातमान पहुंचेगा और पुनः वापस अपने कदीमी रास्तों से होते हुए चहमामा स्थित इमामबाडे  मे आकर सम्पन्न होगा। जुलूस में पूरे रास्ते उस्ताद फतेह अली खां व साथी शहनाई पर मातमी धुन पेश करेंगे। 

अर्दली बाज़ार में 8 वीं मोहर्रम को उठेगा दुलदुल 

वरुणापार के अर्दली बाजार में सैय्यद जियारत हुसैन के तारगली स्थित इमामबारगाह से 8 वीं मोहर्रम को दुलदुल, अंलम, ताबूत रात्रि 10 बजे उठेगा। जुलूस अपने कदीमी (पुराने) रास्ते से होकर उल्फत बीबी हाता स्थित स्व.मास्टर जहीर हुसैन के इमामबाड़े पर समाप्त होगा। जुलूस में अंजुमन इमामिया नौहा व मातम करेंगी। यह जानकारी इरशाद हुसैन "शद्दू" ने दी है।

सोमवार, 22 जून 2026

journalist Salim सुहरवर्दी के जनाज़े में उमड़ा हुजूम

सलीम सुहरवर्दी को कंधा देने उमड़ा हुजूम

फरदू शहीद कब्रिस्तान में हुए सुपुर्द-ए-खाक 



dil india live (Varanasi). काशी पत्रकार संघ के सदस्य व वरिष्ठ पत्रकार, उस्ताद शायर सलीम सुहरवर्दी को सुपुर्द-ए-खाक करने के लिए सोमवार को लोगों का हुजूम उमड़ा। उनके जनाजे की नमाज़ छित्तनपुरा में मस्जिद लंगड़े हाफ़िज़ के इमाम मौलाना जकीउल्लाह कादरी ने अदा कराई। इस मौके पर उन्हें आखिरी कंधा देने की लोगों में होड़ देखी गई। सलीम सुहरवर्दी को ओंकारेश्वर में फरदू शहीद कब्रिस्तान में मगरिब की नमाज़ के बाद सुपुर्द-ए-खाक किया गया। उनके जनाजे में रेयाज अहमद नूर, आमीर चौधरी, अब्दुल हकीम, अशफाक सिद्दीकी, जर्नालिस्ट अमन, मौलाना वलीउल्ला आरिफ, हाफ़िज़ इमामुद्दीन, वसीम हाशमी आदि सैकड़ों लोग मौजूद थे।

गौरतलब हो कि आज सोमवार को जर्नालिस्ट सलीम सुहरवर्दी का इंतकाल हो गया था। वो तकरीबन 85 साल के थे। वो अपने पीछे एक लड़का, तीन बेटियों व पत्नी समेत पूरा भरा परिवार छोड़ कर अलविदा कह गये, ह्रदय गति रुकने से शिव प्रसाद गुप्त अस्पताल कबीरचौरा में उन्होंने आज अंतिम सांस ली। 

उनके इंतकाल की खबर जैसे ही मीडिया जगत में फैली हर तरफ अफसोस की लहर देखी गई। तकरीबन 6 दशक से भी ज्यादा समय तक उन्होंने आजाद, हिंदोस्तां, आवाजें मुल्क, क़ौमी मोर्चा समेत विभिन्न पत्र पत्रिकाओं में पत्रकारिता की। काशी पत्रकार संघ के वो वरिष्ठ सदस्यों में थे। हिंदी, उर्दू, अंग्रेजी पर उनकी अच्छी पकड़ थी। हाल ही में उनका मोहर्रम पर एक इंटरव्यू गांडीव डिजिटल में जारी हुआ था। 

हरदिल अज़ीज़ सलीम सुहरवर्दी की लेखनी लोगों के लिए मिसाल थी। उनके परिवार से जुड़े आमीर ने बताया कि फरदू शहीद कब्रिस्तान में मगरिब बाद उन्हें सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा। उनके इंतकाल से विभिन्न नातिया तंजीमो में मायूसी देखी गई। रेयाज अहमद नूर ने भरे गले से बताया कि गंगा जमुनी तहज़ीब लिए मशहूर नज़ीर बनारसी के वो खास शागिर्द थे। यही वजह है कि उनकी उर्दू अदब में अच्छी पकड़ थी। दर्जनों तंजीम नबी की पैदाइश पर सलीम सुहरवर्दी के लिखे अशरार पढ़ा करती थीं। सादगी और ईमानदारी की पत्रकारिता करने की वजह से वो सदैव सादा जीवन उच्च विचार के रास्ते पर चलते रहे। उनका जाना पत्रकारिता और उर्दू अदब की बड़ी क्षति मानी जा रही है। सन्मार्ग के पूर्व संपादक डाक्टर आनंद बहादुर सिंह के खास मित्रों में सलीम सुहरवर्दी भी थे।