रविवार, 18 जनवरी 2026

Varanasi Main आचार्य श्रीदत्तात्रेयानंदनाथ का 21 दिवसीय आविर्भाव महोत्सव

75 लाख से अधिक मंत्रों से हुई मां ललिता की आराधना

महोत्सव के पंद्रहवें दिन हुए पांच लाख मंत्र अर्पित




dil india live
(Varanasi). वाराणसी के श्रीविद्या देशिक प्रवर आचार्य श्रीदत्तात्रेयानंदनाथ (पं.सीताराम कविराज) के आविर्भाव शताब्दी महोत्सव के अवसर पर नगवा, गणेशबाग स्थित श्रीविद्या साधना पीठ में चल रहे 21 दिवसीय कोटि अर्चन के पंद्रहवे दिन शनिवार को पाँच लाख से अधिक मंत्रों से मां ललिता महात्रिपुर सुन्दरी का अर्चन किया गया। देशभर से आये श्रीविद्या के दीक्षित साधकों ने पीठाध्यक्ष स्वामी प्रकाशनन्दनाथ के सानिध्य में मां ललिता की केसर युक्त तंदुल से आराधना की। साधकों द्वारा अबतक मोदक, गुलाब पुष्प, कमल पुष्प, लौंग, इलाइची आदि पदार्थो से 75 लाख मंत्र माँ ललिता को अर्पित किया जा चुका है। अर्चन के क्रम में श्रीयंत्र की त्रिकाल महापूजा की जा रही है। शताधिक साधक 21 आचार्यो के आचार्यत्व में कोटि अर्चन कर रहे है।

     आयोजन सचिव डॉ. दीपक कुमार शर्मा ने बताया कि शताब्दी आविर्भाव महोत्सव के अंतर्गत वर्षभर विविध आयोजन किये जायेंगे। कोटि अर्चन की पूर्णाहुति 23 जनवरी को होगी, जिसमें होम, तर्पण, मार्जन तथा कुमारी, बटुक एवं सुवासिनी पूजन किया जाएगा। एक लाख मंत्रों से यज्ञकुण्ड में पूर्णाहुति दी जायेगी। एक दिन पूर्व 22 जनवरी को रात्रि जागरण में शास्त्रीय संगीत संध्या एवं विद्वत गोष्ठी का आयोजन किया जाएगा। 

    सत्रयाग में मुख्य रूप से सुनील मिश्रा, डॉ. अपूर्व चतुर्वेदी, रवि अग्रवाल, मिलन टण्डन, विजय सिंह, राजेन्द्र सिंह, अनंतदेव तिवारी, रविशंकर शुक्ल, अनूप शर्मा, शशिकांत पाण्डेय, मृत्युंजय त्रिपाठी, शिवम चौबे, कृष्णदास, श्रीकांत तिवारी आदि साधक शामिल रहे।


शनिवार, 17 जनवरी 2026

Education: VKM Varanasi Main हुआ विकसित भारत युवा कनेक्ट कार्यक्रम

युवा ही विकसित भारत का मूल आधार-कौशिक


dil india live (Varanasi). विकसित भारत युवा कनेक्ट प्रोग्राम वसंत कन्या महाविद्यालय, वाराणसी में 17.01 .2026 को आयोजित किया गया। कार्यक्रम के यूथ आइकन शिखर कौशिक ने इस मौके पर बताया कि युवा किस प्रकार सरकार के कार्यक्रम से जुड़ सकते हैं आने वाले समय में महिलाओं की भूमिका को बताते हुए छात्राओं के साथ वार्तालाप भी किया। अपने विचार व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि युवा ही विकसित भारत का मूल आधार है। देश की जिम्मेदारी है युवा को सशक्त बनाने की लेकिन उसी के साथ युवाओं की भी जिम्मेदारी है देश को आगे ले जाने की। वन्दे मातरम् के महत्व को बताते हुए छात्राओं को जागरूक किया। सत्र परस्पर संवाद पर आधारित था। 


कार्यक्रम का शुभारंभ एनी बेसेंट जी की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं पुष्पांजलि अर्पित करते हुए हुआ,महाविद्यालय की प्राचार्या प्रोफेसर रचना श्रीवास्तव एवं NSS कार्यक्रम अधिकारी डॉ सरोज उपाध्याय ने युवा आइकन शीखर कौशिक का उत्तरीय एवं पंडित दिन दयाल उपाध्याय का चित्र देकर स्वागत किया।

कार्यक्रम में महाविद्यालय की लगभग 200 छात्राओं ने सहभागिता निभाई, एवं सभी शिक्षक शिक्षिकाएं उपस्थित रहे। युवा आइकन शिखर कौशिक जी के भाषण से छात्राएं लाभान्वित हुई। कार्यक्रम की पूर्णता डॉ सरोज उपाध्याय के धन्यवाद ज्ञापन से हुआ।

शुक्रवार, 16 जनवरी 2026

Shab-e-Meraj क्या है इसकी सच्चाई यहां पढ़िए

नबी इस रात 'रब' से मुलाकात कर नमाज़ का लेकर आए थे तोहफा



dil india live (Varanasi). Shab-e-Meraj का यह अज़ीम वाक़या दो हिस्सों में बंटा हुआ है। यह वो रात है जिसमें नबी 'रब' से मुलाकात कर नमाज़ का उम्मत के लिए तोहफा लेकर आए थे। dil india live को सूफी इमरान अली बताते हैं कि उस रात को दो हिस्सों में हम बांट सकते हैं।

1. मक्का से यरूशलेम (मस्जिद-ए-अक्सा)

हजरत जिब्राइल (अ.स.) जन्नत से 'बुराक' (एक सफेद सवारी) लेकर आए। आप (स.अ.व.) उस पर सवार होकर पलक झपकते ही बैतुल मुकद्दस (मस्जिद-ए-अक्सा) पहुंच गए। वहां हजरत आदम (अ.स.) से लेकर हजरत ईसा (अ.स.) तक तमाम नबी मौजूद थे। हुजूर (स.अ.व.) ने उन सबकी नमाज में इमामत फरमाई। इसी वजह से आपको 'इमामुल अंबिया' कहा जाता है।


2. आसमानों का सफर और नबियों से मुलाकात

मस्जिद-ए-अक्सा से आप आसमानों की तरफ तशरीफ ले गए। हर आसमान पर महान नबियों ने आपका इस्तकबाल किया। इस दौरान पहले आसमान पर हजरत आदम (अ.स.) से मुलाकात हुई। दूसरे आसमान पर हजरत ईसा (अ.स.) और हजरत यहया (अ.स.) से मिले। तीसरे आसमान पर हजरत यूसुफ (अ.स.) से तो चौथे आसमान पर हजरत इदरीस (अ.स.) व पांचवें आसमान पर आपकी मुलाकात हजरत हारून (अ.स.) से हुई। ऐसे ही छठवें और सातवें आसमान पर हजरत मूसा (अ.स.) व हजरत इब्राहिम (अ.स.), जो 'बैतुल मामूर' (फरिश्तों का काबा) से टेक लगाए हुए थे प्यारे नबी से मुलाकात हुई।

इसके बाद आप 'सिदरतुल मुन्तहा' पहुँचे (एक बेरी का दरख्त जो कायनात की सरहद है)। यहाँ हजरत जिब्राइल (अ.स.) रुक गए और कहा कि अगर मैं यहां से एक उंगली के पोर बराबर भी आगे बढ़ा तो नूर की वजह से जल जाऊंगा। इसके बाद हुजूर (स.अ.व.) तन्हा अल्लाह रब्बुल इज्ज़त के करीब पहुंचे, जहां न कोई फरिश्ता था न कोई परदा। वहीं नमाज का तोहफा मिला।

जन्नत और दोजख के मंजर

सफर के दौरान आपको अल्लाह की कुदरत की बड़ी निशानियां दिखाई गईं। आपने जन्नत देखी। आपने जन्नत की नेमतें और वहां मिलने वाले महलात देखे। इस दौरान दोजख (जहन्नुम) भी देखा। आपने कुछ ऐसे लोगों को भी देखा जिन्हें उनके बुरे कामों की सजा मिल रही थी।
चुगलखोर: जो अपनी जुबान से दूसरों की बुराई करते थे, वे अपने नाखूनों से अपने चेहरों को नोच रहे थे।
ब्याज (सूद) लेने वाले: जिनका पेट कमरों की तरह बड़ा था और उनमें सांप दौड़ रहे थे।
यतीमों का माल खाने वाले: जिनके मुंह में आग के अंगारे डाले जा रहे थे।



वापसी और सुबह का मंजर

जब आप वापस आए, तो अभी आपका बिस्तर गर्म था और वजू का पानी बह रहा था (यानी अल्लाह ने वक्त को थाम दिया था)। मेराज के सफर से वापसी के बाद, जब अगली सुबह हुजूर (स.अ.व.) ने खाना-ए-काबा के पास बैठकर कुरैश के लोगों को इस हैरतअंगेज सफर के बारे में बताया, तो मक्का के अधर्मियों ने इसका मजाक उड़ाना शुरू कर दिया। उनके लिए यह नामुमकिन था कि कोई शख्स एक ही रात में मक्का से यरूसलेम जाए, वहां से सातों आसमानों की सैर करे और वापस भी आ जाए।

अबू जहल और अन्य अधर्मियों ने सोचा कि आज अच्छा मौका है, अबूबक्र को बहकाया जाए। वे दौड़ते हुए हजरत अबूबक्र (र.अ.) के पास पहुंचे और उनसे पूछा: "ऐ अबूबक्र! क्या तुम अपने साथी (मोहम्मद स.अ.व.) की इस बात पर यकीन करोगे कि वह आज रात बैतुल मुकद्दस होकर आए हैं और आसमानों की सैर की है?" हजरत अबूबक्र (र.अ.) ने बिना किसी सोच-विचार के एक ऐसा सवाल पूछा जिसने अधर्मियों को लाजवाब कर दिया।

> "क्या यह बात मोहम्मद (स.अ.व.) ने खुद कही है?" अधर्मियों ने कहा: "हां, वह अभी काबा में यही कह रहे हैं।" तब हजरत अबूबक्र (र.अ.) ने बड़े यकीन के साथ फरमाया:

> "अगर उन्होंने यह कहा है, तो यकीनन यह सच है। मैं तो इससे भी बड़ी बातों पर यकीन करता हूँ कि उनके पास आसमानों से अल्लाह की तरफ से 'वही' (संदेश) आती है।" हजरत अबू बक्र का यह जवाब सुनकर अधर्मियों दंग रह गए। उनके इसी बेमिसाल यकीन की वजह से नबी (स.अ.व.) ने उन्हें 'सिद्दीक' का खिताब दिया।

बैतुल मुकद्दस की निशानियां

अधर्मियों ने हुजूर (स.अ.व.) को आजमाने के लिए एक और शर्त रखी। उन्होंने कहा, "अगर आप वहां गए थे, तो हमें बैतुल मुकद्दस (मस्जिद-ए-अक्सा) की निशानियां बताएं (कितने दरवाजे हैं, कैसी बनावट है?)"
हुजूर (स.अ.व.) वहां इबादत के लिए गए थे, न कि इमारत को गिनने। लेकिन अल्लाह ताला ने अपनी कुदरत से मस्जिद-ए-अक्सा को हुजूर (स.अ.व.) की नजरों के सामने ला दिया। आप उसे देखते जा रहे थे और काफिरों के हर सवाल का जवाब देते जा रहे थे। यह देखकर अधर्मी हैरान रह गए क्योंकि आपकी बताई एक-एक बात सही थी।

गुरुवार, 15 जनवरी 2026

Rab ki Raza के लिए कल होगी पूरी रात इबादत

कल मेराज की है शब, रखा जाएगा रोज़ा



Sarfaraz/Rizwan 

dil india live (Varanasi). इस्लामी त्योहारों, परम्पराओं और पर्वों में मेराज की मुक़द्दस रात जिसे शब-ए-मेराज भी कहा जाता है, इस रात का खासा महत्व है। यह हर साल इस्लामिक महीने रजब की 27 वीं तारीख को मनाया जाता है। कल शब-ए-मेराज की रात है। 

इस्लाम और कुरान का कहना है कि रजब के महीने की 27 वीं तारीख को पैगंबर-ए-इस्लाम (अल्लाह के रसूल) हजरत मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैह वसल्लम), अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त से मिलने मेराज गये थे। जहां पर नबी कि रब से मुलाकात हुई थी। इसीलिए इस रात को 'पाक रात' भी कहा जाता है। शब-ए-मेराज एक अरबी शब्द है, अरबी में शब का मतलब रात और मेराज का मतलब आसमान होता है। सदर काजी -ए-शहर मौलाना हसीन अहमद हबीबी कहते हैं कि इस्लामी किताबों में है कि मेराज कि शब हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैह व सल्लम ने सऊदी अरब के शहर मक्का से येरुसलम की बैतउल मुकद्दस मस्जिद तक का सफर तय किया था, और फिर बैतउल मुकद्दस मस्जिद से सातों आसमान की सैर करते हुए अल्लाह से मिलने गये थे। यह सब इतने कम वक्त में हुआ कि इसका अंदाज़ा इसी से लगाया जा सकता कि नबी रब से मिलकर चले आये और उनके घर के दरवाज़े कि कुंडी जाते वक्त जो हिल रही थी वो लौटने पर भी हिल रही थी। यह भी नबी का एक मोजिज़ा (चमत्कार) ही था।


ये है शब-ए-मेराज का इतिहास

शब-ए-मेराज भी नबी के मोजज़ो में से एक माना जाता है। इस रात हज़रत मोहम्मद (स.) ने न सिर्फ मक्का से येरुशलम का सफर किया, बल्कि सातों आसमानों की सैर (यात्रा) की और आखिर में सिदरत-ए-मुंतहा (जहां तक पैगंबर-ए-इस्लाम के अलावा कोई इंसान या अवतार नहीं जा सका) के पास उनकी मुलाकात अल्लाह से हुई। तभी से इस शब यानी शब-ए-मेराज का मुस्लिम जश्न मनाते है।

रखा जाता है रोज़ा

इस्लाम में शब-ए-मेराज की रात की बड़ी फजीलत (खूबी) है, कहा जाता है कि जो इस दिन रोजा रखता है, उसे बहुत बड़ा सवाब मिलता है। जो इंसान इस रात अल्लाह की इबादत करता है और कुरान की तिलावत (पढ़ता) करता है, उसे कई रातों की इबादत करने वाले के बराबर सवाब मिलता है। इस रात को खास नमाज़े और नबी पर दूरूदों सलाम पढ़ने की भी बड़ी फजिलत है। शबे मेराज पर दो नफिल रोज़ा रखा जाता है। कुछ लोग 27, 28 तो कुछ लोग 26 व 27 रजब को रोज़ा रखते हैं।समाचार लिखे जाने तक मुस्लिम बाहुल्य इलाकों में सेहरी की तैयारियां चल रही थी। 

Ex CM Mayawati's Birthday: पुनः सत्ता सौंपने का लिया संकल्प

सभी दलों ने मुसलामानों को भाजपा का डर दिखा अपना उल्लू किया सीधा

स्वाभिमान और सम्मान की प्रतीक हैं बहन मायावती-मेराज फारुकी जुग्गन 




F.farooqui 

dil india live (Varanasi). बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष पूर्व मुख्यमंत्री मायावती (Ex CM Mayawati) के 70 वे  जन्म दिवस पर एक संगोष्ठी का आयोजन उत्तरी ककरमत्ता स्थित बसपा के पूर्व मंडल अध्यक्ष मेराज फारुकी जुग्गन एडवोकेट के आवास पर संपन्न हुई। सबसे पहले कार्यकर्ताओं ने इस खुशी के अवसर पर केक काटकर मायावती के दीर्घ आयु होने की कामना की।

संगोष्ठी में उपस्थित कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए मेराज फारुकी ने कहा कि बसपा? सुप्रीमो पूर्व मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश मायावती स्वाभिमान और सम्मान की प्रतीक है हम सभी को उनके बताएं हुए रास्ते पर आगे बढ़ने की आवश्यकता है। उत्तर प्रदेश सरकार की मुखिया रहते हुए उन्होंने जिस तरह की कानून व्यवस्था कायम की थी उसकी लोग आज भी मिसाल देते हैं उन्होंने ने कभी समाज को गुमराह कर वोट लेने की बात नहीं की। सभी समाज के लोगों को बराबर का सम्मान मिले। भेदभाव दूर हो आपसी भाईचारा बने, इस पर काम किया। जब कि दूसरे सभी दलों ने समाज को खासकर मुसलामानों को भाजपा  का डर दिखाकर अपना उल्लू सीधा किया है। अब समाज सब जान चुका है और आने वाले चुनाव में बसपा के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलने को तैयार है, बस जरूरत है कि हम मायावती को सभी समाज के हित मे मुख्यमंत्री रहते हुए किए गए काम को जन जन तक पहुंचाने का काम करे और अन्य पार्टियों द्वारा उन्हें गुमराह किए जाने की बात को बताए। हम सभी जन्मदिन के अवसर पर यहीं संकल्प ले कि 20 27 के चुनाव में गुमराह करने वालो से बचे और बसपा को मजबूत करे।

इस अवसर पर कार्यक्रम में शामिल लोगों में अफजाल अहमद  फारुकी, मुंशी राम सुमन, मनोज गौतम, अबु बकर, नफीस  फारुकी, शमीम आजमी, फिरोज अहमद, मुनीर अहमद, अनवारूल मौजूद थे।

बुधवार, 14 जनवरी 2026

IIT BHU में Pr. Alakh Niranjan Sahu एसोसिएट डीन (रिसोर्स एंड एलुमनी) नियुक्त

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (बीएचयू) ने कि घोषणा, जताई खुशी 



dil india live (Varanasi). भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (काशी हिंदू विश्वविद्यालय), वाराणसी ने प्रो. अलख निरंजन साहू (Professor Alakh Niranjan Sahu) को दो वर्ष की अवधि के लिए एसोसिएट डीन (रिसोर्स एंड एलुमनी) नियुक्त किया है। इसकी घोषणा करते हुए संस्थान ने प्रसन्नता जाहिर की है। संस्थान द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि भैषजकीय अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी विभाग के प्रो. अलख निरंजन साहू को दो वर्षों की अवधि के लिए एसोसिएट डीन (रिसोर्स एंड एलुमनी) नियुक्त किया गया है।

प्रो. साहू एक प्रतिष्ठित शिक्षाविद् एवं शोधकर्ता हैं, जिनका भैषजकीय अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान रहा है। शिक्षण, शोध तथा संस्थागत विकास के क्षेत्र में उनके व्यापक अनुभव से संस्थान में एलुमनी सहभागिता, संसाधन जुटाने की प्रक्रिया तथा रणनीतिक साझेदारियों को सुदृढ़ करने में उल्लेखनीय सहयोग मिलने की अपेक्षा है। 

Makar Sankranti संग खत्म होगा खरमास

...तो शहनाई बजेगी अगले महीने

इस बार 2 माह में सिर्फ 19 दिन ही है शुभ मुहूर्त



dil india live (Varanasi). मकर संक्रांति के साथ ही कल खरमास खत्म होने जा रहा है, लेकिन मांगलिक कार्यों की विधिवत शुरुआत अगले महीने से होगी। फरवरी और मार्च इन दो महीनों में कुल 19 दिन ही शुभ मुहूर्त रहेंगे। इस दौरान लोग शादी-विवाह सहित अन्य शुभ कार्य कर सकेंगे।
हिंदू पंचांग के अनुसार फरवरी और मार्च माह में कुल 19 दिन शुभ कार्यों के लिए अनुकूल रहेंगे। इन मुहूर्तों में विवाह, गृह प्रवेश, हवन-यज्ञ, नामकरण संस्कार, मुंडन संस्कार, यज्ञोपवीत (जनेऊ), वाहन क्रय, भूमि पूजन, भवन निर्माण आरंभ सहित अन्य मांगलिक कार्य किए जा सकेंगे।
बीएचयू के ज्योतिष विभाग के प्रोफेसर विनय कुमार पांडेय के अनुसार इस वर्ष शुभ मुहूर्त की शुरुआत 4 फरवरी से होगी, जबकि पंचांग के अनुसार अंतिम शुभ मुहूर्त 14 मार्च को पड़ेगा।
उन्होंने बताया कि 11 दिसंबर 2025 से शुक्र ग्रह अस्त (ढूंढा हुआ) अवस्था में था, जो 1 फरवरी 2026 को उदित होगा। उदय के बाद तीन दिन तक शुक्र ‘बालक अवस्था’ में रहता है, इस अवधि में भी शुभ कार्य नहीं किए जाते।
इसी कारण 4 फरवरी से विवाह आदि मांगलिक कार्यों के मुहूर्त प्रारंभ होंगे। फरवरी में 14 दिन शुभ कार्यों के लिए उपयुक्त होंगे, जबकि मार्च में केवल 5 दिन ही शुभ मुहूर्त रहेंगे।
ज्योतिषाचार्य विनय पांडेय के अनुसार इन तिथियों में कुछ मुहूर्त दिन के समय शुभ होंगे, जबकि कुछ रात्रि में। इसलिए किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत से पहले विद्वान ज्योतिषाचार्य या अपने पुरोहित से परामर्श अवश्य लेना चाहिए, ताकि कार्य शुभ और फलदायी हो।