श्रीललिता महात्रिपरसुन्दरी का 21 दिनों तक 1 करोड़ मन्त्रों से होगा अर्चन
dil india live (Varanasi). वाराणसी में श्रीविद्या देशिक प्रवर आचार्य श्रीदत्तात्रेयानंदनाथ (पं.सीताराम कविराज) के आविर्भाव शताब्दी महोत्सव का शुभारम्भ शनिवार को हुआ। नगवा, गणेशबाग स्थित श्रीविद्या साधना पीठ में 21 दिनों तक चलने वाले महोत्सव के पहले दिन श्री ललिता महात्रिपुरसुन्दरी का कोटि अर्चन सत्रयाग शुरू हुआ, इसके अंतर्गत माता का विविध पदार्थो से एक करोड़ मंत्रों से अर्चन किया जाएगा। पहले दिन 5 लाख मन्त्रों से श्रीललिता महात्रिपरसुन्दरी का दिव्य अर्चन किया गया।
पीठाध्यक्ष श्रीप्रकाशानंदनाथ के पावन सानिध्य में श्रीविद्या के दीक्षित साधकों द्वारा कोट्टयार्चन प्रारम्भ किया गया। पहले दिन देशभर से आये दर्जनों साधकों ने यज्ञ में सहभागिता की। सबसे पहले श्री गणपति मोदकार्चन, गणपति होम तथा पंचांग पूजन से महोत्सव का शुभारम्भ हुआ।
देशभर से आये साधकों को संबोधित करते हुए स्वामी प्रकाशानंदनाथ जी महाराज ने कहा कि श्रीविद्या की उपासना से चित्त के विकार समूल नष्ट हो जाते हैं, एक दिव्य आनंद एवं अलौकिक शान्ति तथा पुष्टि का अनुभव होता है। वर्तमान समय में विश्व में भयंकर बीमारियाँ महामारी के रूप में व्याप्त हैं जिसका मुख्य कारण है अनियमित दिनचर्या है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक भारतीय यदि वैदिक दिनचर्या का आश्रय ले ले तो जीवन स्वतः ही आनंद स्वरूप में बदल जायेगा।
21 दिनों तक चहकेगा श्रीविद्या साधना पीठ
पीठ के सचिव प्रो. किशोर मिश्र ने बताया कि आचार्य श्रीदत्तात्रेयानंदनाथ धर्मसम्राट स्वामी करपात्री महाराज के प्रिय शिष्य थे जिन्होंने श्री विद्या के विभिन्न ग्रंथों के सम्पादन तथा लेखन के द्वारा इस विद्या को साधकों के समक्ष पहुंचाया है।
सह सचिव डॉ. दीपक कुमार शर्मा ने बताया कि आगमी 21 दिनों तक श्रीविद्या के महागणपति क्रम सहित श्रीयंत्र की त्रिकाल महापूजा एवं विभिन्न द्रव्यों से कोटि अर्चन सत्रयाग किया जा रहा है जिसमे देश के विभिन्न प्रान्तों से प्रतिदिन शताधिक दीक्षित साधक एवं साधिकाएं अर्चन करेंगे। उन्होंने यह भी बताया कि समापन सत्र में होम, तर्पण, मार्जन तथा कुमारी, बटुक, सुवासिनी पूजन किया जाएगा। रात्रि जागरण में शास्त्रीय संगीत संध्या एवं विद्वत गोष्ठी का आयोजन किया जाएगा।
कार्यक्रम में मुख्य रूप से त्रिलोकीनाथ जैतली, विजय सिंह, राजेन्द्र सिंह, डॉ.रवि अग्रवाल, डॉ. रविशंकर शुक्ल, विवेक मोहित, दिनेश सिंह एवं श्रीकांत तिवारी आदि उपस्थित रहे।




























