अभी नहीं जागे तो सेल्फी पोज तो दूर हमें दिखेगा भी नहीं प्राकृतिक नज़ारा
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Varanasi (वाराणसी)। गर्मी से बचने के लिए लोग पहाड़ों की तरफ रुख करते हैं। कुछ दिन ही सही लेकिन प्रकृति के साथ जुड़ने के लिए जंगल, पर्वत पहाड़ों के बीच छुट्टियां मनाने निकल जाते हैं। खुद को नेचर से जोड़कर उत्साहित होते हैं, रोमांच का बखान स्वजनों से करते हैं। ऐतिहासिक पल को कैमरे में कैद करते हैं और सेल्फी लेकर यात्रा के लिए यादगार बनाते हैं।
लेकिन सवाल की ये सब करते वक्त उनके जेहन में ये बात क्यों नहीं आती कि जिस प्रकृति से जुड़ने के लिए और शुद्ध हवा पानी लेने के लिए वे पर्वत पहाड़ और जंगलों के बीच आते हैं उसके लिए पौध रोपण और पर्यावरण संरक्षण जरूरी है। वरना एक दिन सब उत्साह खत्म हो जाएगा। अभी नहीं जागे तो सेल्फी पोज तो दूर हमें प्राकृतिक का यह अनमोल नज़ारा दिखेगा भी नहीं। इसलिए वक्त रहते हमें जागना होगा। कहा जाता है कि जब जागो तभी सवेरा।
पौधारोपण को बनाएं आंदोलन मिलेगा आनंद
पौधारोपण को आप आंदोलन बनाएं आपको जो आनंद और सुकुन मिलेगा उसे आप बयां नहीं कर सकते। प्रकृति और मानव जीवन के संतुलन को बनाए रखने के लिए पौधारोपण (पेड़ लगाना) अत्यंत आवश्यक है। पौधारोपण के मुख्य लाभ और महत्व हम यहां जानेंगे:-
शुद्ध हवा: पेड़ कार्बन डाइऑक्साइड लेते हैं और जीवनदायिनी ऑक्सीजन छोड़ते हैं।
प्रदूषण नियंत्रण: यह हवा से हानिकारक धूल और गैसों को फ़िल्टर करके वातावरण को साफ रखता है।
मिट्टी का संरक्षण: पेड़ों की जड़ें मिट्टी को मजबूती से बांधकर रखती हैं, जिससे भूकम्प या बाढ़ के समय मिट्टी का कटाव (मृदा अपरदन) रुकता है।
जल चक्र में सुधार: पेड़ वर्षा लाने में मदद करते हैं और भूजल स्तर को बनाए रखते हैं।
वन्यजीवों का घर: पेड़ पक्षियों और कई जीवों को आश्रय और भोजन देते हैं।
मानसिक शांति: हरे-भरे पेड़ तनाव को कम करते हैं और मानसिक स्वास्थ्य में सुधार करते हैं।
पर्यावरण प्रेमी काजल की प्रेरक कहानी
आज हम बात करेंगे ऐसी ही पर्यावरण प्रेमी काजल विश्वकर्मा की। काजल वैसे तो मूलरूप से देवरिया जिले की हैं लेकिन पढ़ाई के लिए वाराणसी आयीं तो यहीं की होकर रह गयीं। वर्तमान में वह रिसर्च स्कॉलर हैं और पढ़ाई के साथ ही पौध रोपण पर भी इनका ध्यान है।
घर पर लगाए पौधे बने पेड़, हॉस्टल को बना दिया ग्रीन
काजल ने बताया कि वह जिस हॉस्टल में रहती हैं वो आज हरा भरा है, क्योंकि खाद्य पानी और रखरखाव वो मन से करती हैं। घर से मिलने वाले हॉस्टल खर्च के पैसों में कुछ बचाकर गमले भी लायीं और पौध लगाया। इतना ही नहीं वाराणसी में ही अपने रिश्तेदारों के यहां भी पौध लगा दिया। काजल ने बताया कि वाराणसी से पौध ले जाकर वह अपने घर देवरिया में लगायी हैं। इसमें दर्जन से अधिक पौधे अब छायादार और फलदार हैं।
उनका मानना है कि शुद्ध हवा और पानी उन्हें अपने शहर में भी मिल सकता है बशर्ते कि पौध रोपण अभियान में हर किसी को आगे आना होगा। कुछ न करें तो कम से कम साल में एक पौध लगा दें कि उनकी आने वाली पीढ़ी को ऑक्सीजन के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। शुद्ध वातावरण के लिए पैसे खर्च कर किसी हिल स्टेशन या जंगल सफारी नहीं जाना होगा। सकून भरा वातावरण अपने शहर में भी प्राप्त कर सकते हैं बशर्ते की सभी को पौध रोपण के लिए आगे आना होगा साथ ही संरक्षण की जिम्मेदारी उठानी होगी।
काजल कर रही हैं पर्यावरण की पहरेदारी
काजल विश्वकर्मा आज युवाओं के लिए प्रेरणा बन गयी हैं। जितनी की पढ़ाई, उतना ही होता है जितनी को पौधों से लगाव। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि वो जिस हॉस्टल में रहती हैं वो आज हरा भरा है। उनसे प्रेरणा लेकर काफी लोग पौधे लगा रहे हैं।