'ताज इंडिया यूनिवर्स' के ऑडिशन में माडल्स ने बिखेरा जलवा
dil india live (Varanasi). वाराणसी में ग्लैमरस प्रोडक्शन द्वारा आयोजित 'ताज इंडिया यूनिवर्स' ब्यूटी पेजेंट का वाराणसी ऑडिशन लंका स्थित कुबाना हाइट्स में उत्साहपूर्वक सम्पन्न हुआ।'एम्पावर, एलिवेट, इंस्पायर' की थीम पर हुए इस ऑडिशन में वाराणसी और आसपास के जिलों से बड़ी संख्या में युवतियों ने हिस्सा लिया। प्रतिभागियों ने रैंप वॉक, टैलेंट राउंड और प्रश्नोत्तर सत्र में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। Glamers production Founder shahban khan व Organiser adil mm khan ने dil india live को बताया कि 'Be the next you' स्लोगन के साथ इस मंच का उद्देश्य छिपी हुई प्रतिभाओं को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाना है। ऑडिशन के दौरान प्रतिभागियों को 'A queen is not born, she is made by her dreams, her discipline and her desire to make a difference' के संदेश से प्रेरित किया गया।
चयनित प्रतिभागियों को अब अगले राउंड के लिए बुलाया जाएगा। 'ताज इंडिया यूनिवर्स' का ग्रैंड फिनाले आने वाले महीनों में आयोजित होगा।
ग्लैमरस प्रोडक्शन (Glamers production) की टीम में शामिल Kohinoor Mrs india दीक्षा श्रीवास्तव ने बताया कि वाराणसी में युवतियों का आत्मविश्वास और जुनून काबिल-ए-तारीफ रहा। 'Confidence is your crown, Grace is your power, The world is your stage' - इसी सोच के साथ कई प्रतिभागियों ने जजेस का दिल जीता। ऑडिशन के सफल आयोजन के लिए आयोजकों ने सभी प्रतिभागियों और सहयोगियों का आभार व्यक्त किया।
dil india live (Varanasi). बनारस में बढ़ती गर्मी और चिलचिलाती धूप को देखते हुए दावत-ए-इस्लामी हिंद के वेलफेयर विभाग 'ग़रीब नवाज़ रिलीफ फाउंडेशन' (GNRF) ने जनसेवा के तहत बनारस के सरैया पुराना पुल इलाके में निःशुल्क ठंडे और साफ पीने के पानी के स्टॉल (सबील) की शुरुआत की है। इस मुहिम का मुख्य उद्देश्य राहगीरों, मजदूरों और मुसाफिरों को इस तपती गर्मी में राहत पहुंचाना और पानी की कमी से बचाना है।
इस स्टॉल का उद्घाटन मुख्य अतिथि सरैया पुलिस चौकी इंचार्ज सत्यदेव ने किया। उन्होंने संस्था के इस कार्य की सराहना करते हुए इसे मानवता के लिए एक अनुकरणीय पहल बताया।फाउंडेशन के पदाधिकारियों ने बताया कि लोगों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए स्टॉल पर पूरी तरह से फिल्टर्ड और साफ पानी की व्यवस्था की गई है, जहाँ सुबह से शाम तक संस्था के सेवादार (वॉलंटियर्स) मुस्तैद रहकर लोगों को पानी पिला रहे हैं। ग़रीब नवाज़ रिलीफ फाउंडेशन (GNRF) देश भर में मुसीबत में फंसे लोगों की मदद, मुफ्त इलाज और वृक्षारोपण जैसे सामाजिक कार्यों में हमेशा आगे रहता है।
इनकी रही खास मौजूदगी इस अवसर पर मुख्य रूप से मोहम्मद दानिश, शाहिद अत्तारी, डॉ. मुबाशिर, हाजी आरिफ अली, इम्तियाज़, शाहिद अत्तारी, सोहेल अहमद, मुस्कीम अहमद, शाहिद रजा आदि मौजूद थे।
जुलूस में निकला "अलम सददा", जियारत को उमड़े जायरीन
Varanasi (dil india live). इमाम हसन, इमाम हुसैन समेत शहीदाने कर्बला का तीजा Sunday (रविवार) को पूरी अकीदत के साथ मनाया गया। इस दौरान जहां अजाखानों व घरों में 12 वीं मुहर्रम पर फूल की मजलिसे हुई वहीं घरों में फातेहा दिलाकर तबर्रुक तक्सीम किया गया। चना, इलायची दाना, पान, डली और तेल पर फातिहा कराकर अकीदतमंदों ने इमाम हुसैन व शहीदाने कर्बला को नजराना-ए-अकीदत पेश किया। दोपहर बाद अलग-अलग इलाकों से अलम व अखाड़ों के जुलूस निकले। जुलूस के दौरान फन-ए-सिपाहगरी का हैरत अंगेज प्रदर्शन किया गया। बुजुर्गो व बच्चों ने भी बनेठी, लाठी आदि से अपने जौहर दिखाए। भोजूबीर, अर्दली बाजार, नदेसर, जैतपुरा, छित्तनपुरा, चौहट्टा लाल खां, कोयला बाजार, बजरडीहा, नई सड़क, लल्लापुरा, पितरकुंडा, पीली कोठी, सदर बाजार, शिवाला, गौरीगंज, बजरडीहा, नयी सड़क, दालमंडी आदि क्षेत्रों से निकले अलम सद्दे के जुलूस दरगाह फातमान पहुंचे। जुलूस में युवा छोटे से बड़े अलम लेकर चल रहे थे, जिन्हें गुब्बारे, फूल-माला, मोती व बिजली के झालरों से आकर्षक रूप में सजाया गया था।
कुछ जगहों पर अलम के साथ तिरंगा झंडा भी लहराता दिखाई दिया। नई सड़क चौराहे से दरगाह फातमान तक तिल रखने भर की भी जगह नहीं थी। मुख्य मार्ग के दोनों ओर के मकानों की छतों व बरामदों पर महिलाओं व बच्चों की भीड़ रही। उधर, गौरीगंज से नन्हे खां के इमामबाड़े से दोपहर बाद अलम का जुलूस निकला जो शिवाला के अलम के जुलूस को साथ में लेते हुए सैकड़ों लोग कलाम पेश करते चल रहा था। जुलूस शाम में अकीदत के साथ सम्पन्न हुआ।
स्वयंसेवी संगठन और खिदमतगार रहे सक्रिय
तीजा के जुलूस में किसी प्रकार की कोई गड़बड़ी न हो इसके लिए स्वयं सेवी संस्थाओं के वालंटियर्स जुलूस में मुस्तैद रहे। नयी सड़क पर शबीले मौला के डायस पर फैज़ खान, कैफ कुरैशी, शाहिद, दानिश, मंज़ूर इलाही, मक़सूद, प्रिंस, अमन खान, साहब आदि जुलूस में आएं हुए लोगों को तबर्रुक बांटते दिखाई दिए। ऐसे ही नाज़िम ग्रुप की तरफ से जुलूस ए हुसैनी में आए तमाम जायरीन की खिदमत में उनको तबरूक वितरण किया गया जिसमे मुख्य रुप से नाज़िम ग्रुप के डायरेक्टर अहमद रज़ा और उनके साथ सलमान फैसल, मो. आरिफ आलम, शादाब राइन, वेदांत गुप्ता, सागर, अमन खान, साकिब सहित तमाम साथी मौजूद थे।
ऐसे ही जिया क्लब की ओर से शकील अहमद जादूगर के संयोजन में पितरकुंडा चौराहे के पास चिकित्सा शिविर लगाया गया था। ऐसे ही अंजुमन इस्लामिया की ओर से नई सड़क चौराहे पर हाजी मुहम्मद शाहिद अली खां मुन्ना के संयोजन में सहायता व चिकित्सा शिविर लगाया गया।
dil india live (Varanasi). हज कमेटी ऑफ इण्डिया द्वारा हज 2027 के लिए सर्कुलर जारी कर दिया गया है। इसे देखते हुए जायरीन का ऑनलाईन हज फार्म भरवाने की इसरा द्वारा घोषणा की गई है। इसे देखते हुए इसरा (ISSRA) मुख्यालय उल्फत बीबी कंपाउंड, अर्दली बाजार वाराणसी में मौलाना हसीन हबीबी की सदारत में हज 2027 पर जाने की तमन्ना रखने वाले जायरीन के लिए ऑनलाइन निःशुल्क हज फार्म भरवाने हेतु "स्पेशल हज कैम्प" आज दिनांक 27.06.026 को सकुशल सम्पन्न हुआ।
इस कैम्प में वाराणसी सहित पूर्वी पूर्वान्चल कई जिलों से आये हुए इच्छुक हज जायरीनों ने निःशुल्क हज फार्म भरवाया तथा साथ ही हज 2027 से सम्बन्धित शुरूआती आवश्यक जानकारी हासिल की। वाराणसी से मोहम्मद हबीब, अब्दुल रशीद, सुहैल खां, मंसूर, परवेज आलम, अनीस अंसारी सोनभद्र से मोहम्मद आरिफ खान, हमीदुर्रहमान, चंदौली से फुरकान अहमद, मोहम्मद आरिफ, मोहम्मद अमीन, आजमगढ़ से रफीक अहमद हाशमी, सफीक अहमद हाशमी, जौनपुर से मोहम्मद खलील, कमाल अख्तर, फैजान, औरतों में आशिया खातून, खलीफुन्ननिशा, सबीहा, फरजाना बेगम, सबाना आजमी, खालिदा, निकहत सुलताना, शकीला, अंजुम आरा आदि मुख्य थे तथा ट्रेनर में हसीन हबीबी साहब, मौलाना मुबारक साहब, हाफिज गुलाम रसूल तथा लेडीज ट्रेनर में सबीहा खातून, सनम खान, निकहत फातमा तथा इसरा के पदाधिकारीगण एवं सदस्य हाजिर थें।
जुलूस में 'चुप' का बज रहा था डंका, सलाम और कलाम पढ़ रहे थे अजादार
dil india live (Varanasi). 27 जून (11 Moharram 2026) को दिन में 11 बजे डॉ. मुज्तबा जाफ़री, जीशान जाफरी और मुर्तुज़ा जाफ़री की अगुवाई में मरहूम डा. नाज़िम जाफ़री के इमामबाड़े से "लुटे हुए काफ़िले" का ऐतिहासिक जुलूस उठाया गया। इस जुलूस को बनारस में सदियों से "चुप का डंका" कहा जाता है। जुलूस के आगे-आगे सैयद आबिद नक़वी लुटे हुए काफ़िले के जुलूस का एलान करते हुए चल रहे थे। हज़रत अली समिति के सदस्य सलमान हैदर ने बताया कि कर्बला के हादसे के बाद जब इमाम हुसैन का लुटा हुआ काफ़िला, यानी अहले-बैत के बच्चे और ख़वातीन क़ैदी बनाकर शहरे शाम की ओर रवाना किए गए, उसी ग़मनाक मंज़र की याद में यह जुलूस पूरी ख़ामोशी के साथ निकाला गया। रास्ते भर अज़ादार ख़ामोशी के आलम में सलाम व कलाम पढ़ते हुए चल रहे थे।कर्बला के शहीदों का लुटा हुआ काफिला नई सड़क, फाटक शेख सलीम, पितरकुंडा, लल्लापुरा होकर होकर दरगाहे फातमान पहुंचा।
जुलूस में गूंजा इमाम हुसैन का नाम
जुलूस के दौरान सरफ़राज़ ने पूरे जुलूस में इमाम हुसैन के नाम को बुलंद रखा और सबको हुसैनियत का पैग़ाम दिया। इस मौक़े पर उन्होंने स्व नाज़िम जाफ़री और मरहूम हकीम मोहम्मद काज़िम के बेहतरीन कलाम भी पेश किए, जिन्हें सुनकर अज़ादारों की आँखें नम हो गईं।
अज़ाख़ानों में मजलिसों का सिलसिला
अज़ाख़ाना-ए-जाफ़री और दरगाहे फातमान में मौलाना वसी असग़र पाशा ने पुरदर्द मजलिस को ख़िताब किया। फातमान में अपने ख़िताब के दौरान उन्होंने फ़रमाया कि कर्बला महज़ एक हादसा नहीं, बल्कि इमाम हुसैन का अपने ख़ुदा के साथ बांधा गया एक मुआहिदा (अहद) है, जिसे इमाम ने अपने और अपने अज़ीज़ों के ख़ून से निभाया। उनके इस बयान ने पूरी मजलिस को रुला दिया।
फातमान में पेश हुए सलाम
दरगाहे फातमान में अज़ादारों ने इमाम हुसैन की बारगाह में सलाम पेश किए। सलाम पढ़ने वालों में समर जाफ़री, सलमान हैदर, हैदर कैरतपुर, अज़ादारे-हुसैनी पद्मश्री ऐनुल हसन रिज़वी और शम्सुल हसन रिज़वी, मुनाजिर हुसैन मंजू, सैयद आलिम हुसैन, शकील अहमद जादूगर, नेयाब रज़ा, सैयद हैदर मेहंदी, ज़फ़र अब्बास आदि शामिल रहे। पूरे माहौल में ग़म और अक़ीदत की झलक साफ़ नज़र आई और भारी तादाद में अज़ादारों ने जुलूस व मजलिसों में शिरकत कर इमाम हुसैन को खिराजे-अक़ीदत पेश किया।
सैयद फरमान हैदर की कमी खली
इस बार मोहर्रम के जुलूस में शिया जामा मस्जिद के पूर्व प्रवक्ता सैयद फरमान हैदर मरहूम की कमी सभी को खल रही थी मोहर्रम के दौरान वो काफी सक्रिय रहा करते थे। खासकर लुटे हुए काफिले के जुलूस में मरहूम फरमान हैदर जब दालमंडी से माइक संभाले, "अशरे को भी शब्बीर का जो गम नहीं करते, वो पैरवी-ए-सरवरे आलम नहीं करते, हिम्मत हो तो महशर में पयंबर से भी कहना, हम जिंदा-ए-जावेद का मातम नहीं करते...।" जब पढ़ते हुए नयी सड़क पहुंचते थे, तो वो मंज़र देखने लोगों का हुजूम उमड़ पड़ता था।
बारहवीं मोहर्रम को निकलेगा तीजा का जुलूस
हज़रत अली समिति के सदस्य सलमान हैदर ने बताया कि कल बारहवीं मोहर्रम को शहर भर में इमाम हुसैन और कर्बला के शहीदों का तीजा मनाया जाएगा। इस मौक़े पर इमामबाड़ों में फ़ातिहा दिलाई जाएगी, इमाम के फूल की मजलिसें होंगी और तीजे के जुलूस उठाए जाएंगे, जो अपने पारंपरिक रास्तों से होते हुए दरगाहे फातमान और सदर इमामबाड़ा (लाट सरैया) पर शाम को संपन्न होंगे।
यौमे आशूरा पर कर्बला पहुंचा ताजिये का जुलूस, शिया वर्ग ने किया दर्द भरे नौहों पर मातम
दरगाहे फातमान में हुई शामें गरीबा की मजलिस
सुन्नी मस्जिदों घरों में खिचडे़ की फातेहा, रखा गया नफिल रोज़ा, हुआ शहादत नामा
dil india live (Varanasi). वाराणसी में इमाम हुसैन और उनके 71 साथियों की शहादत के गम में शहर कि बल खाती गलियों-मुहल्लों से लेकर सूदूर ग्रामीण इलाकों तक से तकरीबन 1000 से ज्यादा ताजियों का जुलूस शुक्रवार को अकीदत के साथ निकाला गया। इससे पहले घरों में कुरानख्वानी और फातिहा हुई। इमामबाड़ों और अजाखानों में नौहाख्वानी और मजलिसें हुईं। बोल मोहम्मदी या हुसैन...की सदाओं संग दफन होने के लिए ताजिया का जुलूस कर्बला पहुंचा, तो दूसरी ओर शहर भर की शिया अंजुमनों ने जंजीर और कमा का मातम किया, जिसे देखकर तमाम लोग कांप उठे। इस दौरान सुन्नी मस्जिदों में कर्बला के शहीदों की याद में शहादतनामा पेश किया गया, और मोमीनीन ने नफल रोज़ा रखा, शाम में अज़ान की सदाओं पर रोज़ा खोला गया।
इससे पहले शहर और ग्रामीण इलाकों से सुबह 10 बजे के बाद से ही नौवीं मुहर्रम को इमाम चौक पर बैठाए गए ताजियों का जुलूस उठाया जाना शुरू हो गया जो अपने कदीमी रास्तों से होता हुआ कर्बला पहुंचा। हालांकि ज्यादातर बड़े और कदीमी ताजिया जुमा होने की वजह से असर की नमाज़ के समय निकल कर मगरिब बाद तक ठंडा हो गया।
लल्लापुरा, मदनपुरा, रेवड़ी तालाब, दालमंडी, नई सड़क, रामापुरा, बजरडीहा आदि इलाकों के ताजिये दरगाहे फातमान पहुंचे तो बड़ी बाजार, दोषीपुरा, कज्जाकपुरा, जलालीपुरा, कोयला बाजार, पीलीकोठी, पुरानापुल आदि इलाकों के ताजिये सदर इमामबाड़ा लाट सरैया ले जाया गया। इस बार जुलूस मार्ग बदल कर कज्जाकपुरा आरओबी सदर इमामबाड़े जुलूस पहुंचा। उधर शिवाला, गौरीगंज, नवाबगंज आदि की ताजिये भवनिया कब्रिस्तान में दफन हुए। शिवपुर, बीएचयू, लंका आदि इलाकों से भी ताजिये कर्बला पहुंचकर ठंडे हुए। दरगाहे फातमान मार्ग पर खासी भीड़ देर शाम तक उमड़ी रही। ताजिये के साथ ढोल, ताशा बजाते और युवा लाठी, डंडे आदि के जरिये फन-ए-सिपाहगिरी का मुजाहिरा करते हुए चल रहे थे।
नफिल रोजा रखकर पेश की अकीदत
सुन्नी समुदाय ने इमाम हुसैन की शहादत की याद में घरों में फातिहा और दुआख्वानी की। नफिल रोजा रखकर अकीदत पेश की। मगरिब की नमाज के बाद इफ्तार करके रोजा खोला गया। इस दौरान मस्जिद अल कुरैश में सामूहिक रोज़ा इफ्तार का एहतमाम किया गया था।
जुलूस में जंजीर का मातम
शिया समुदाय ने मजलिस, मातम व जुलूस निकाल कर कर्बला के शहीदों को खिराजे अकीदत पेश किया। जगह-जगह से अंजुमनों ने अलम, ताबूत दुलदुल का जुलूस उठाया। अजादारों ने कमा, जंजीर से मातम किया। जोहर की नमाज के बाद शहर की सभी अंजुमनों के जुलूस उठने लगे। अंजुमन हैदरी नई सड़क, अंजुमन जौव्वादिया कच्चीसराय, अंजुमन मातमी जौव्वादिया पितरकुडा, अंजुमन गुलजारे अब्बासिया व अंजुमन कासिमिया अब्बासिया आदि ने मातम का नज़राना पेश किया। गौरीगंज व शिवाला से अलम, दुलदुल का जुलूस उठाया गया। इस दौरान बड़े संग बच्चे भी सीनाजनी, खंजर, कमा से मातम कर रहे थे। खूनी मातम देख जियारतमंदों की आंखें नम हो गईं।
उधर, अर्दली बाजार इमामबाड़े से अंजुमन इमामिया के कमा व जंजीर का मातम देखकर सभी की आंखें नम हो गईं। इस दौरान काफी भीड़ रही। अर्दली बाजार से दसवीं मोहर्रम को अलम, ताबूत, दुलदुल का जुलूस यौम-ए अशूरा को उल्फत बीबी हाता स्थित मास्टर जहीर हुसैन के इमामबाड़ा से उठा। जुलूस में अंजुमन इमामिया के नेतृत्व में लोग नौहाखानी, मातम और सीनाजनी करते हुए चल रहे थे। जुलूस अपने कदीमी रास्ते से होता हुआ नदेसर, अंधरापुल, लोहा मंडी, पिशाचमोचन के रास्ते देर शाम फातमान पहुंच कर ठंडा हुआ़। जुलूस में इरशाद हुसैन "शद्दू ", जैन, दिलशाद, ज़ीशान, फिरोज़, जफर अब्बास, दिलकश. मिसम, अयान, शाद, अमान, अलमदार हुसैन, अद्दनान, अरशान आदि ने सहयोग किया।
शामे गरीबां की मजलिस शाम में जुलूस के बाद देर शाम शिया समुदाय की ओर से शाम-ए-गरीबां की मजलिसें हुई। दरगाहे फातमान, दालमंडी, पितरकुंडा, काली महाल, गौरीगंज व शिवाला में मजलिस को उलेमा ने खेताब करते हुए शहीदान-ए-कर्बला का जिक्र किया।
सैय्यद सलमान हैदर ने बताया कि 11 वीं मुहर्रम को लुटे हुए काफिले का जुलूस दालमंडी में हकीम काजिम के इमामबाड़े से जुमेरात को सुबह 10 बजे से उठेगा। उधर परवेज़ कादिर खां की अगुवाई में उठा दूल्हे का कदीमी जुलूस छिटपुट घटनाओं को छोड़कर सकुशल संपन्न हो गया। इस दौरान जुलूस 60 ताजिया को सलामी और 72 अलाव पर दौड़ने के बाद शिवाला स्थित इमाम बाड़ा दूल्हा कासिम नाल पहुंच कर ठंडा हुआ। शाम में पुनः पानी वाला दूल्हा निकला जो आसपास के इलाकों में होकर वापस शिवाला पर सम्पन्न हुआ। उधर, मरकजी सीरत कमेटी की ओर से नई सड़क स्थित खूजर वाली मस्जिद में जिक्र शोहदा-ए-कर्बला कार्यक्रम हुआ जिसमें उलेमा ने कर्बला के वाक़यात पर रौशनी डाली।
जिया क्लब ने लगाया कैंप
जिया क्लब द्वारा मोहर्रम की 10 तारीख इमामे हुसैन की शहादत पर पितरकुंडा पर मोहर्रम के जुलूस पर एक कैंप लगाया गया था जहां एक ओर अल्पाहार बांटने की व्यवस्था किया गया था वहीं दूसरी ओर एक मेडिकल कैंप लगाया गया था जिसमें आए हुए सभी ताजियादारों के लिए रोजा रखे हुए लोगों को रोज खुलवाया गया व जुलूस में आए हुए लोगों का उपचार कराया गया। फजलुर रहमान, इरशाद अंसारी, रब्बानी अंसारी, शमीम अंसारी, हाजी काजू आदि मौजूद थे तो जुलूस का संचालन समाजसेवी शकील अहमद जादूगर ने किया।
इमाम चौक पर बैठी ताजिया, ज़ियारत को उमड़े अकीदतमंद
dil India live (Varanasi). 9 वीं मोहर्रम को मुस्लिम बहुल इलाके 'या हुसैन या हुसैन' की सदाओं से गूंज उठें। शहीदाने कर्बला की याद में इमाम चौकों पर जहां ताजिया मलीदे और शर्बत की फातेहा के बाद बैठा दी गई वहीं शहर भर में विभिन्न मस्जिदों में हुए जलसे में जिक्रे इमाम हुसैन की शहादत को शिद्दत से याद किया गया। वहीं दूल्हे का विश्व प्रसिद्ध जुलूस शिवाला से निकल कर आग के अंगारों पर दौड़ता हुआ आगे बढ़ा तो वहीं दूसरी ओर शहर भर में गश्ती अलम का जुलूस निकला। इस मौके पर इमाम चौकों और इमामबाड़ों में ताज़िए की जियारत को देर रात तक हुजुम उमड़ा हुआ था।
आग पर से दौड़े इमाम हुसैन के दीवाने
हज़रत कासिम की याद में नौवीं मोहर्रम की मध्यरात्रि विश्व प्रसिद्ध (प्राचीन) दूल्हे का जुलूस इमामबाड़ा हज़रत कासिम नाल से सदर परवेज कादिर खां कि अगुवाई में निकाला गया। इस दौरान सवारी पढ़ने के बाद जुलूस को दूल्हा कमेटी ने आवाम के हवाले किया जो अपने कदीमी रास्तों में लगी आग पर से होकर आगे बढ़ता रहा। जुलूस उठने से पूर्व ही अकीतदमंदों का जनसैलाब शिवाला से लेकर तमाम अलाव के पास उमड़ा हुआ था।
लोगों का हुजूम या हुसैन, या हुसैन...की सदाएं बुलंद करते हुए आग के अंगारों पर दौड़ते हुए हज़रत इमाम हुसैन, हज़रत कासिम समेत कर्बला में शहीद हुए 72 हुसैनियों को सलामी पेश करते हुए इमाम चौकों पर बैठायी गई तकरीबन 60 ताजियों को सलामी देने व 72 अलाव से होकर जुमे की सुबह वापस लौटेगा। जुलूस शहर के छह थाना क्षेत्रों से गुजरता है। इस दौरान कड़ी सुरक्षा व्यवस्था दिखाई दी।
इससे पहले दूल्हा कमेटी ने एक ओहदेदारान को दूल्हा बनाया जिस पर सवारी पढ़ी गई। डंडे में लगी घोड़े की नाल लिये दूल्हे को पकड़ने की लोगों में होड़ मची हुई थी। पीछे पीछे अकीदतमंदों का जनसैलाब जुलूस में शामिल था। जुलूस विभिन्न मुहल्लों में इमाम चौकों पर बैठे ताजिये को सलामी देने शिवाला कि गलियों में लगी आग से होकर अस्सी, दुर्गाकुंड होते हुए समाचार लिखे जाने तक अहातारोहिला, गौरीगंज की ओर रवाना हो गया था। दूल्हे का जुलूस भेलूपुर, रेवड़ी तालाब, बाजार सदानंद, रामापुरा, गौदोलिया, नयी सड़क लल्लापुरा, फातमान, पितरकुंडा, दालमंडी, मदनपुरा, सोनारपुरा व हरिश्चंद्र घाट होकर वापस शिवाला के इमामबाड़ा दूल्हा हज़रत कासिम नाल पहुंच कर सम्पन्न होगा।
जुलूस के साथ विभिन्न थानों की पुलिस के अलावा रिजर्व पुलिस, पीएसी के जवान तैनात थे। कमेटी के अध्यक्ष परवेज कादिर खां ने बताया कि जुलूस सुबह पहुंचेगा और पुन: शिवाला स्थित इमामबाड़ा दूल्हा कासिम नाल से शाम में उठेगा जो शिवाला घाट पर पहुंच कर ठंडा होगा।
निकला गश्ती अलम का जुलूस
दूल्हे का जुलूस निकलने के बाद गश्ती अलम का जुलूस विभिन्न शिया इमामबाडों से निकाला गया। जुलूस गश्त करते हुए एक जगह से दूसरे जगह तक आता जाता दिखाई दिया। इस दौरान लोगों का हुजूम उमड़ा हुआ था। खासकर अर्दली बाज़ार, लल्लापुरा, पितरकुंडा, नयी सड़क, दालमंडी, चौहट्टा, पठानी टोला, गौरीगंज, शिवाला, बजरडीहा, लोहता, रेवड़ी तालाब, मदनपुरा आदि में भारी भीड़ देखी गई।
इमाम चौक पर बैठाईं गई ताजिया
कारीगरी के बेहतरीन नमूनों और कलात्मक डिजाइनों से सजायी गई छोटी बड़ी ताजिया अंतिम रूप देने के बाद शाम को बैठा दी गई। इन ताजियों को देखने के लिए आज शाम से भीड़ देर रात तक जमी रही। खासकर लल्लापुरा स्थित रांगे का ताजिया, बाकराबाद के बुर्राक की ताजिया, बजरडीहा स्थित शीशे का ताजिया, उल्फत बीबी के हाते की ज़री की ताजिया़, कोयला बाजार स्थित नगीने का ताजिया, फूलों की ताजिया, दालमंडी स्थित पीतल की ताजिया, गौरीगंज की शीशम की ताजिया, चपरखट की ताजिया, शिवाला की कुम्हार की ताजिया, दोषीपुरा की शाबान की ताजिया, बजरडीहा की कागज की ताजिया के अलावा सैकड़ों मन्नती ताजिया आज गुरुवार की शाम इमाम चौक पर बैठा दी गई । इन ताजियों की जियारत के लिए लोगों का हुजूम उमड़ा हुआ था।
दस तारीख के रोज़े की फजीलत
इस दौरान दो दिन का मोमीनीन रोज़ा भी रखते हैं। कुछ लोग 9 वीं मोहर्रम और 10 वीं मोहर्रम को तो कुछ लोग 10 वीं, 11 वीं मोहर्रम को रोज़ा रहते हैं। मौलाना अजहरुल कादरी कहते हैं मोहर्रम की दस तारीख के रोज़े की बहुत फजिलत है। मौलाना कहते हैं कि कर्बला के मैदान में शहादत देकर इमाम हुसैन ने इंसानियत को बचाया है। अब तमाम दुनिया के इंसानों को चाहिए कि इमाम हुसैन के पैगाम को बचाएं। उनके नाना के दीन की हिफाजत करें। बुराई से बचें और नेकी व हमदर्दी के रास्ते पर चलें।