"साहित्य व सिनेमा: अतः संबंध और रूपांतरण" विषय पर प्रो. संजीव का व्याख्यान
Varanasi (dil India live). वसन्त कन्या महाविद्यालय कमच्छा, वाराणसी के तत्वावधान में पुनर्नवा हिंदी साहित्य परिषद् एवं हिंदी विभाग के अंतर्गत "साहित्य एवं सिनेमा: अतःसंबंध और रूपांतरण" विषयक एकल व्याख्यान का आयोजन किया गया। मुख्य वक्ता के रूप में गुजरात केन्द्रीय विश्वविद्यालय के हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो. संजीव दुबे ने साहित्य और सिनेमा पर चर्चा करते हुए हिंदी सिनेमा के इतिहास और पृष्ठभूमि पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए हिंदी सिनेमा के विकास पर छात्राओं का ध्यान आकर्षित किया। सिनेमा के व्यावसायिकरण की बात करते हुए उन्होंने हिंदी के साहित्यिक बाज़ार पर चर्चा की और कहा कि हिंदी सिनेमा का प्रबुद्ध दर्शक निर्मित नहीं हुआ है। उन्होंने वर्तमान समय में सिने साक्षरता की आवश्यकता पर बल दिया ।उनका मानना है कि सिनेमा के दृश्यों को किसी पुस्तक की तरह पढ़ना चाहिए। साहित्य एवं सिनेमा के अंतःसंबंध पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि साहित्य और सिनेमा में तत्वत: कोई अन्तर नहीं है केवल प्रस्तुति और प्रभाव का अंतर होता है और सिनेमा की प्रभावोत्पादकता साहित्य से अधिक होती है इसलिए इसका विस्तार साहित्य से गई गुणा अधिक होती है। साहित्य के सिनेमा में रूपांतरण पर उन्होंने कहा कि संक्षेपण, विस्तार, सामान्यीकरण और स्थिरीकरण के माध्यम से साहित्य का सिनेमा में रूपांतरण होता है जिसके परिणामस्वरूप मुख्य कथावस्तु के साथ कभी-कभी न्याय नहीं हो पाता। जो पुस्तक पढ़ने वालों को निराश भी करता है। अंत में सिनेमा को अकादमिक क्षेत्र में अध्ययन एवं शोध की दृष्टि से और भी प्रोत्साहित करने की आवश्यकता पर ज़ोर देते हुए विद्यार्थियों को प्रेरित किया।
स्वागत वक्तव्य देते हुए महाविद्यालय की प्राचार्या प्रो रचना श्रीवास्तव ने सिनेमा के माध्यम से समाज पर पड़ने वाले सकारात्मक एवं नकारात्मक दोनों प्रभाव की चर्चा करते हुए छात्राओं को सिनेमा के गुणात्मक रूप को ग्रहण करने के लिए उद्बोधित किया। कार्यक्रम में डॉ. सपना भूषण, डॉ. शशिकला, डॉ. नैरंजना श्रीवास्तव , डॉ. प्रीति विश्वकर्मा एवं महाविद्यालय के सभी सिनेमा और साहित्य प्रेमी ,विद्यार्थी तथा अध्यापक गण मौजूद रहे।संचालन सुश्री राजलक्ष्मी जायसवाल तथा धन्यवाद ज्ञापन डॉ. सपना भूषण ने किया।